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कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया कहते हैं- यह सोना गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के जरिए अगले 2-3 साल तक सोने का आयात कम करने में मदद कर सकता है
नई दिल्ली। दो हफ्ते पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के एक ट्वीट ने बहुत सुर्खियां बटोरीं थीं। ट्वीट में चव्हाण ने लिखा था, वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत के धार्मिक ट्रस्टों के पास 1 ट्रिलियन डॉलर (76 लाख करोड़) का सोना है, भारत सरकार को देश के इन तमाम धार्मिक ट्रस्टों के पास मौजूद सोने का तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए। आपातकाल जैसी इस स्थिति में सरकार गोल्ड बॉन्ड्स के जरिए सरकार कम ब्याज दरों पर यह सोना उधार ले सकती है।
चव्हाण के इस ट्वीट के बाद भाजपा नेता उन पर बरस पड़े थे। भाजपा से राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा भी इनमें से एक थे। इन्होंने इस ट्वीट के जवाब में लिखा था, "क्या कांग्रेस अपने नेता पृथ्वीराज चव्हाण की राय से इत्तफाक रखती है कि मंदिरों का सोना ले लेना चाहिए ? क्या पृथ्वीराज चव्हाण जी अकेले कैथेड्रल चर्च की जमीन जिसकी अनुमानित कीमत 7000 करोड़ है, वक्फ जिसकी अनुमानित सम्पत्ति 60 लाख करोड़ है उसका भी इस्तेमाल करने की भी बात करेंगे?"
ये दो हफ्ते पहले की बात है लेकिन सोशल मीडिया पर यह बहस अभी भी जारी है। क्या देश के मंदिरों का सोना इस आपात स्थिति में उपयोग किया जाना चाहिए? क्या वक्फ बोर्ड के पास भी सोना है?

 क्या उसकी संपत्ति भी कोरोना से आहत हुई अर्थव्यवस्था को सींचने में उपयोग की जा सकती है? 

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