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सिडनी/लंदनI बच्चों, बड़ों और बूढ़ों सबकी प्रिय चॉकलेट का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। जी हां चॉकलेट पर आई एक नई रिपोर्ट  के मुताबिक वर्ष 2050 आते-आते चॉकलेट का उत्पादन लगभग ख़त्म हो सकता है यानी चॉकलेट अब करीब 30 से 32 साल की मेहमान है।  लेकिन ज़रा सोचिए आने वाले समय में अगर चॉकलेट दुनिया से खत्म हो गई तो क्या होगा। चॉकलेट Cocoa नामक एक फल के बीज से बनती है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु में आ रहे बदलाव की वजह से Cocoa की फसल बर्बाद हो रही है। बढ़ते तापमान के कारण Cocoa के पेड़ों का फलना-फूलना कम हो गया है जिसका असर उसके फल पर हो रहा है। 

आसान शब्दों में कहा जाए तो चॉकलेट को ग्लोबल वॉर्मिंग की नज़र लग गई है।  हालांकि वैज्ञानिक Cocoa की फसल को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। वो Gene Editing तकनीक की मदद से इस पौधे के genes को बदलना चाहते हैं ताकि ये पौधा गर्म जलवायु के मुताबिक खुद को ढाल ले  लेकिन इसमें अभी बहुत वक़्त लगेगा। चॉकलेट ज़िंदा रहेगी या इतिहास की वस्तु बनेगी ये बात अभी 100 प्रतिशत गांरटी के साथ नहीं कही जा सकती।  

दिलचस्प और ऐतिहासिक है चॉकलेट का सफर
लेकिन एक बात गारंटी के साथ कही जा सकती है कि चॉकलेट का ये सफर दिलचस्प और ऐतिहासिक है। कहा जाता है कि Cocoa के पेड़ की खोज करीब 4 हज़ार साल पहले 1900 ईसा पूर्व में Mexico के जंगलों में हुई थी। ये ऐसे इलाक़े थे जहां बारिश बहुत ज़्यादा होती थी। शुरुआती दौर में चॉकलेट का स्वाद Spicy यानी तीखा हुआ करता था और इसे पिया जाता था। Mexico और मध्य अमरीका के आदिवासी Cocoa के बीजों को पीसकर उनका पेस्ट बनाते थे और फिर इसमें पानी शहद और मिर्च मिलाकर एक चॉकलेट ड्रिंक तैयार किया जाता था। हैरानी की बात ये है कि मीठी और स्वादिष्ट चॉकलेट का स्वाद दुनिया ने करीब 3700 वर्षों के बाद चखा।

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