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जयपुर टाइम्स
पटना/रांची (एजेंसी)। बिहार के चारा घोटाला से जुड़े एक और मामले में शनिवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसमें लालू प्रसाद यादव समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया। वहीं, 7 को बरी कर दिया। ये सभी 22 आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट 3 जनवरी को सजा सुनाएगी। लालू को यहांं से होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल ले जाया गया। बता दें कि इस फैसले के पहले ही रांची पुलिस ने सेंट्रल जेल के आसपास सिक्युरिटी सख्त कर दी थी। फैसले के कुछ मिनट बाद ही लालू के ट्विटर से बीजेपी पर हमला बोला गया। इसमें लिखा बीजेपी विपक्ष का पब्लिक पर्सेप्शन बिगाडऩे के लिए गंदी राजनीति कर रही है।
दोषियों को सजा कब सुनाई जाएगी
सभी दोषियों को 3 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।
लालू का कितने केस में नाम है
900 करोड़ के चारा घोटाले में यह 33वां और लालू से जुड़ा दूसरा फैसला है। लालू पर चारा घोटाले के 7 केस दर्ज हैं। एक केस में उन्हें 6 साल की सजा हो चुकी है। लालू के खिलाफ 5 अन्य केस में सुनवाई जारी है।
लालू ने सुनवाई के पहले क्या कहा था
रांची के रेलवे गेस्ट हाउस में लालू ने मीडिया से कहा था, मुझे ज्यूडिशियरी सिस्टम पर पूरा भरोसा है। सभी को इंसाफ मिल रहा है, हमें भी मिलेगा। मैं पिछड़ी जाति से हूं, मुझे भी इंसाफ मिलेगा। एक ही मुर्गी को 9 बार हलाल किया जा रहा है। वकीलों में सभी जरूरी सबूत कोर्ट को दिए हैं, जो बरी होने के लिए काफी हैं।
वहीं, शुक्रवार शाम रांची एयरपोर्ट पर लालू ने कहा था, अगर मैंने किसी से पैसा लिया तो सीबीआई सबूत दे। आखिर किस बात की मुझे सजा दिलाना चाहते हैं। 20 साल से मुझे परेशान किया जा रहा है। ज्यूडीशियरी सिस्टम पर पूरा भरोसा है। टू जी की तरह इसमें भी फैसला आएगा। बीजेपी और सीबीआई मुझे और परिवार को परेशान कर रही है।
फैसला आने के बाद क्या 
था कोर्ट का माहौल
कोर्ट का फैसला आते ही आरजेडी वर्कर्स निराश हो गए। एक शख्स रोने लगा। कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। पार्टी के सीनियर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि एक ही मामले में लालू को जेल और जगन्नाथ मिश्रा को बेल मिला है। ये कैसा इंसाफ है। ये कैसा फैसला है। ये बीजेपी की साजिश है। हम इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
आरजेडी सुप्रीमो पर क्या आरोप था
बिहार के सीएम और वित्त मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप था कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की इंक्वायरी के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 96 तक अटकाए रखा।
चारा घोटाले में 900 करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है। इस दौरान देवघर ट्रैजरी (कोषागार) से अवैध तरीके से 1991 से 1994 के बीच 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए। जबकि बिहार सरकार की ओर से दवा और चारा की खरीदारी के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए गए थे।
चाईबासा ट्रैजरी से गलत तरीके से पैसा निकालने के मामले में लालू यादव को सजा सुनाई जा चुकी है। 1997 में वह पहली बार जेल गए थे। उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। फिलहाल वो जमानत पर हैं। केस की सुनवाई सीबीआई कोर्ट में 1996 से चल रही है। सीबीआई ने 100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज कराए हैं। आरोपियों की ओर से भी बचाव में गवाह पेश किए गए।

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