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नई दिल्ली । देश की स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद पिछले चार साल में इनमें मामूली सुधार ही नजर आ रहा है। आज भी आठवीं कक्षा के आधे से ज्यादा बच्चे गणित का साधारण गुणा-भाग भी नहीं कर सकते। वहीं, 5वीं कक्षा के करीब आधे बच्चे दूसरी कक्षा का पाठ नहीं पढ़ सकते। शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत देश के सबसे बड़े गैर सरकारी संगठन 'एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) - 2018 के अध्ययन से यह जानकारी मिली है। जारी रिपोर्ट के मुताबिक, आठवीं कक्षा के 56 प्रतिशत बच्चे दो संख्याओं का आपस में भाग नहीं दे सकते। वहीं, भाग न दे सकने वाले पांचवीं के बच्चों की संख्या 72.2 प्रतिशत के बराबर है। भाग देने के मामले में यूपी और उत्तराखंड के छात्र बिहार के छात्रों से पीछे हैं। बिहार में आठवीं कक्षा में पढऩे वाले 56.9 प्रतिशत बच्चे दो संख्याओं के बीच भाग दे सकते हैं। वहीं , यूपी और उत्तराखंड में यह संख्या क्रमश 44.4 एवं 48.6 प्रतिशत है। मणिपुर राज्य के बच्चे सबसे आगे हैं, यहां आठवीं के 72.5 प्रतिशत बच्चे भाग दे सकते हैं।
निजी स्कूलों में नामांकन कम: वर्ष 2006 से 2014 तक निजी स्कूलों में नामांकन बढऩे के बाद से इसमें स्थितरता आई। 2018 में यह 30.9 प्रतिशत रहा।
 

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