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नईदिल्ली(एजेंसी)।
बीते एक साल से जारी अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार से चीन को भारी नुकसान हुआ है। ग्लोबल मार्केट में चीनी समानों के आयात और निर्यात दोनों प्रभावित हुए हैं। इससे भारत सहित अन्य देशों को फायदा हुआ है। लेकिन, भारत के लिए चीन के साथ कंपीट करना अभी आसान नहीं है। आंकड़ों को देखें तो भारत और चीन दोनों के बीच व्यापार के लिहाज से बड़ा अंतर है।
ग्लोबल मार्केट में चीन की घटती हिस्सेदारी
ट्रेड वार के कारण चीन को वैश्विक बाजारों में भारी नुकसान हो रहा है। सेक्टर आधारित आंकड़ों को देखें तो चीनी सामानों का मार्केट में भागीदारी कम हुई है। इसका फायदा भारत समेत दुनिया अन्य उत्पादक देशों को हुआ है। उदाहरण के तौर पर फुटवियर सेक्टर में ग्लोबल मार्केट शेयर में चीन की हिस्सेदारी 7.5त्न कम हुई है। इससे फुटवियर मार्केट में वियतनाम क हिस्सेदारी 5.9त्न और जर्मनी की हिस्सेदारी 1.4त्न बढ़ी है। इसके अलावा भारत की भी हिस्सेदारी 0.1त्न बढ़ी है। पर्ल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर में चीन का मार्केट शेयर 2.3त्न कम हुआ है। भारत का मार्केट शेयर 3.5त्न बढ़ा है। इस सेक्टर में इजराइल और अमेरिकी भागीदारी भी बढ़ी है। इसी प्रकार लेदर, आयरन और स्टील, कपड़ा और सिरेमिक सेक्टर में चीन की घटती हिस्सेदारी का फायदा भारत और अन्य देशों के हुआ है।


चीन के साथ भारत का कंपटीशन

यूं तो भारत 1990 के दशक से ही चीन के साथ कंपीट करने का सपना देख रहा है। चीन की जीडीपी भारत के मुकाबले 4 गुना बड़ी है। लेकिन, अभी भी कुछ सेक्टर्स में भारत, चीन से काफी पीछे है, जिससे भारत का वर्ल्ड लीडर बनने और चीन को पछाडऩे में काफी समय लग सकता है। उदाहरण के तौर पर स्टील के उत्पादन में चीन और भारत के बीच का अनुपात 10:1 का है।

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