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जयपुर टाइम्स
जयपुर (कासं)। शुक्रवार सुबह से ही जयपुर में धूम-धाम के साथ महाशिवरात्रि मनाई गई। वैसे तो हिंदू पंचांग में इस दिन को बेहद खास माना गया है, लेकिन इस बार यह पर्व और भी अधिक खास रहा। दरअसल, 117 साल बाद शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहा। यह एक दुर्लभ योग है, जब यह दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहे। 
ज्योतिषाचार्य पं.रामवतार मिश्र ने बताया कि इससे पहले 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। इस दुर्लभ योग में महाशिवरात्रि मनाने के लिए शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ शिवालयों के बाहर पहुंची। शहर के सबसे प्राचीन आमेश्वर महादेव, एकलिंगेश्वर महादेव, राजराजेश्वर महादेव, झारखंड महादेव, ताड़केश्वर महादेव, सदाशिव ज्योतिर्लिंगेश्वर महादेव, रोजगारेश्वर महादेव, डबल शंकर महादेव सहित सभी शिवालयों पर भक्त भोले के दर्शन करने पहुंचे। भक्तों की मंदिरों में कतारें लगी रही। 
शहर में कई जगह भगवान शिव की बारात भी निकाली गई। मंदिरों में जागरण और भजन कीर्तन किए गये। शिव पुराण में महाशिवरात्रि को चार पहर पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। खासतौर पर निशीथ काल में पूजन का अत्यंत फल प्राप्त होता है। 

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