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जयपुर । प्रेग्नेंसी में महिला को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना होता है। यदि मां के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होगी तो इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। समय-समय पर चेकअप करवाने में किसी तरह की लापरवाही बरतना भी नुकसानदेह हो सकता है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान डेंटल केयर भी जरूरी है। इस समय शरीर में होने वाले हार्मोन के उतार-चढ़ाव का प्रभाव दांतों पर भी पड़ता है।

जरूरी है रेगुलर चेकअप : सीनियर कॉस्मोटोलॉजिस्ट और डेंटिस्ट डॉ. ज्योति शर्मा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान कमजोर दांत, मसूड़ों में दर्द जैसी परेशानियों से बचने के लिए रेगुलर चेकअप करवाना जरूरी है। साथ ही महिलाओं को अपने स्तर पर भी ओरल केयर करनी चाहिए और कुछ समस्या हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। मुंह में पनपने वाले बैक्टेरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जो गर्भस्थ शिशु के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। 
इन बातों का रखें ध्यान ..
रेगुलर हो ब्रशिंग : दांत साफ करने में कोई आलस नहीं करना चाहिए। इसके अलावा समय.समय पर फ््लॉसिंग पर भी ध्यान दें। ब्रशिंग न करने से मुंह में संक्रमण फैलने का डर रहता है जिससे बचने के लिए दांतों की सफाई जरूरी है।
न खाएं एंटीसेप्टिक्स : प्रेग्नेंसी के दौरान दांतों में दर्द की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे को नुकसान होने की संभावना हो सकती है। तकलीफ होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।
कैविटी से रखें दूरी : मीठे पदार्थों के अधिक सेवन से दांतों की कैविटी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे दांतों में इनेमल खत्म होना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में आइसक्रीमए अचारए चीनीए चॉकलेट्स जैसी चीजों का सेवन कम से कम करें।
हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी : दांतों में सडऩए मुंह से बदबू या मसूढ़ों से खून आने की परेशानी हो तो इससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए। रोज ब्रशिंग व मसूढ़ों की मसाज करना चाहिए। ऑयल पुलिंग थेरेपी भी एक अच्छा विकल्प है।
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट : मुंह से अमलता को दूर करने के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे दांत के सडऩे की समस्या से छुटकारा पाया जा सता है।
 

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