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जयपुर टाइम्स
दिसपुर (एजेंसी)। असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने उग्रवादी संगठन उल्फा-आई के लीडर परेश बरुआ को बातचीत के लिए न्योता दिया है। असम और नॉर्थ ईस्ट में लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल इस संगठन ने गणतंत्र दिवस के पर डिब्रूगढ़ में तीन जगहों पर धमाके किए थे। हालांकि, इनमें कोई हताहत नहीं हुआ। सीएम शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार भी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है। एक दिन पहले ही केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के प्रतिनिधियों ने सोमवार को असम समझौते पर दस्तखत किए। इसके तहत अब असम से अलग बोडोलैंड बनाने की मांग खत्म होगी। बोडो उग्रवादियों के सरकार से समझौते के बाद उल्फा-आई संगठन के प्रमुख परेश बरुआ ने कहा था कि इससे आने वाले समय में असम में शांति स्थापित होगी। खासकर बोडोलैंड के क्षेत्र में। बरुआ ने एक चैनल से बातचीत में समझौते का स्वागत करते हुए कहा था कि राज्य में इसे लेकर कोई अलग विचार नहीं है। बोडो लोग अपने अधिकारों को लेकर दशकों से लड़ रहे हैं। हम अपनी जमीन पर एकता के साथ रहेंगे। बरुआ के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि वे भी केंद्र सरकार की तरफ की से शांति समझौते की पहल पर विचार कर सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के प्रतिनिधियों ने सोमवार को असम समझौता-2020 पर दस्तखत किए। इसके साथ ही करीब 50 साल से चला आ रहा बोडोलैंड विवाद खत्म हो गया है। इस मौके पर गृह मंत्री ने घोषणा की कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के 1,550 सदस्य 30 जनवरी को 130 हथियार सौंपकर आत्मसमर्पण कर देंगे। समझौते में असम के संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंड ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी), ऑल बोडो स्टूडेंट एसोसिएशन (एबीएसए) शामिल हुए।

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