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जयपुर टाइम्स
न्यूयॉर्क (एजेंसी)। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत रहीं निकी हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर अपनी किताब में कई खुलासे किए हैं। हेली ने बताया कि किस तरह व्हाइट हाउस में ट्रम्प के सहयोगी मंत्रियों ने ही राष्ट्रपति को देश-विदेश से जुड़े मामलों पर नजरअंदाज किया। हेली ने किताब 'विद ऑल ड्यू रिस्पेक्टÓ में खुलासा किया है कि पूर्व विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और व्हाइट हाउस में चीफ ऑफ स्टाफ रहे जॉन केली ने उनसे कुछ मुद्दों पर ट्रम्प को अनसुना करने के लिए भी कहा था। भारतीय मूल की निकी हेली ने पिछले साल अक्टूबर में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें जनवरी 2017 में यूएन में अमेरिका का राजदूत बनाया गया था। ट्रम्प ने ट्वीट करके उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी थीं। हेली के मुताबिक, केली और टिलरसन ने उन्हें इस विश्वास में ले लिया था कि ट्रम्प की बात नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने यह तक कहा कि इसका मतलब राष्ट्रपति को टालना नहीं, बल्कि देश को बचाना है। दोनों कहते थे कि उनके फैसले अमेरिका के हित में हैं, न कि राष्ट्रपति ट्रम्प के, क्योंकि राष्ट्रपति नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। हेली ने बताया कि एक मौके पर टिलरसन ने उनसे कहा था कि अगर राष्ट्रपति ट्रम्प को बिना देखरेख के छोड़ दिया गया, तो लोग मरेंगे। हेली ने बताया, मैंने दोनों मंत्रियों की बात मानने से इनकार कर दिया और इसे खतरनाक बताया। उन्हें राष्ट्रपति को नजरअंदाज करना था तो यह बात उन्हें खुद ट्रम्प से कहनी चाहिए थी। उन्हें मुझे साजिश में शामिल होने के लिए नहीं कहना था। हेली के मुताबिक, मंत्रियों को अपने मतभेद राष्ट्रपति से बात कर के सुलझाने थे, लेकिन उन्हें कमजोर करने का फैसला बेहद खतरनाक और संविधान का उल्लंघन था। 
हेली ने आगे कहा, व्हाइट हाउस के कुछ अफसर ट्रम्प के बर्ताव की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए एक साथ इस्तीफा देने पर भी विचार कर रहे थे। इससे पहले सितंबर 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के रिपोर्टर बॉब वुडवर्ड ने अपनी किताब में बताया था कि ट्रम्प प्रशासन के कई वरिष्ठ मंत्री उनकी मेज से अहम दस्तावेज हटा लिया करते थे। कुछ अन्य किताबों में भी पत्रकारों ने व्हाइट हाउस में टकराव और गुटबंदी का खुलासा किया था। 

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