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नई दिल्ली :केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग( यूजीसी) ने पांच केंद्रीय एवं 21 राज्य विश्वविद्यालयों सहित62 उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी है। जिन संस्थाओं को पूर्ण स्वायत्तता दी गई है वे अपनी दाखिला प्रक्रिया, फीस की संरचना और पाठ्यक्रम तय करने के लिए स्वतंत्र होंगे। जावड़ेकर ने ट्वीट किया कि ,‘‘उदार नियामक व्यवस्था के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुसार उच्च मानक बनाकर रखने वाल 62 उच्च शैक्षणिक संस्थाओं को यूजीसी की ओर से आज स्वायत्तता दी गई।’’केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों, 21 राज्य विश्वविद्यालयों, 26 निजी विश्वविद्यालयों और10 अन्य कॉलेजों को स्वायत्त कॉलेज नियमन के तहत स्वायत्तता दी गई है।  

पहले भी दे चुकी है सरकार पूर्ण स्वायत्तता 
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) को स्वायत्तता दी गयी थी। अब उन 62 उच्च संस्थानों को अत्यधिक स्वायत्ता दी गयी है। जिन्हें नैक एक्रिडेशन में 3.26 से अधिक ग्रेड आये हैं। उन्होंने बताया कि इनमें पांच केन्द्रीय विश्वविद्यालय, 21 राज्यों के विश्वविद्यालय तथा 24 डीम्ड यूनिवर्सिटी तथा दो निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं।   

खुद ले सकेेगें संस्थान फैसला 
उन्होंने बताया कि इन संस्थानों को अब नया कोर्स और नया विभाग शुरू करने तथा विदेशी छात्रों को दाखिला देने एवं विदेशी शिक्षकों को नियुक्त करने और ऑफ कैंपस शुरू करने एवं ऑनलाइन दूरवर्ती शिक्षा शुरु करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुमति लेनी नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा पहले इन संस्थानों को अनुमति लेने के लिए बार-बार यूजीसी के पास आना पड़ता था लेकिन अब ये संस्थान खुद निर्णय ले सकेंगे। इसके अलावा ये संस्थान विश्व के 500 विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों से अकादमिक सहभागिता भी कर सकेंगे।  

इन विश्वविद्यालयों को मिली है पूर्ण स्वायत्तता  
जावड़ेकर ने यह भी बताया कि आठ स्वशासित कॉलेजों को भी अत्यधिक स्वायत्तता दी गयी है जो अपने पाठ्यक्रम खुद बना सकेंगे और परीक्षा स्वयं आयोजित करेंगे तथा शोधकार्य भी कर सकेंगे, लेकिन उन्हें डिग्री विश्वविद्यालय ही देगा। जिन पांच केन्द्रीय विश्वविद्यालयों को अधिक स्वायत्तता दी गयी है । उनमें जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, बीएचयू और अलीगढ़ विश्वविद्यालय विदेशी एवं अंग्रेजी भाषा संस्थान (तेलंगाना) शामिल है लेकिन उनमें दिल्ली विश्वविद्यालय नहीं है। जिन दो निजी विश्वविद्यालयों को अत्यधिक स्वायत्तता दी गयी है उसमें ओ पी जिंदल यूनिवर्सिटी तथा दीनदयाल उपाध्याय पेट्रोलियम विश्वविद्यालय शामिल है।

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