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जाने-अनजाने में इंसान से घर के निर्माण समय कुछ एेसी गलतियां हो जाती हैं, जिससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। जिस कारण उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई बार घर में रखे साज-सजावट के सामान से भी कई प्रकार के वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति वास्तु में बताए गए कुछ उपायों को अपनाए तो वो इन सबसे छुटकारा पा सकता है। इतना ही नहीं वास्तु दोषों के प्रभावों से मुक्ति पाने के विए कुछ मंत्रो का उच्चारण किया जाता है। तो आईए जानें किन मंत्रों के जाप से धन और सुख की प्राप्ति की जा सकती है।

उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। आकाश और पाताल को भी इसमें दिशा स्वरूप शामिल किया गया है। इस प्रकार चार दिशा, चार विदिशा और आकाश, पाताल को जोड़कर इस विज्ञान में दिशाओं की संख्या कुल दस माना गया है। मूल दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य को विदिशा कहा गया है।


पूर्व दिशा
वास्तु शास्त्र में यह दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्योदय होने की दिशा है। इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं। 

मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्य नमः या  ॐ इंद्राय नमः का जाप करने से इस दिशा के वास्तु दोष का नाश होता है। 


पश्चिम दिशा
इस दिशा के स्वामी शनिदेव हैं। यदि इस दिशा में वास्तु दोष हो तो ॐ शनि शनैश्चाय नमः का नियमित का जाप रपना चाहिए। 


उत्तर दिशा
यदि वास्तु दोषों के कारण घर की उत्तर दिशा प्रभावित हो जाए तो इसका अधिकतर प्रभाव घर की महिलाओं पर पड़ता है। साथ ही उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो यदि इस दिशा को वास्तु मुक्त करना हो तो निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए। 

 

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