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जयपुर । लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस सरकार राजस्थान में आधी आबादी को मैसेज देने के लिए 33 फीसदी महिला आरक्षण का दांव खेलने जा रही है। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के लिए महिला आरक्षण का प्रस्ताव विधानसभा में लाकर इसे पारित करवाया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया, कैबिनेट में इस संकल्प पर विस्तार से चर्चा हुई। अब विधानसभा के मौजूदा सत्र में ही महिला आरक्षण के प्रस्ताव को पारित करवाने की तैयारी है। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने के लिए लोकसभा में बिल पारित हो चुका है, महिला आरक्षण का बिल राज्यसभा में अटका हुआ है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी इसे लेकर अभियान चलाती रही हैं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले महीने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिटी  लिखकर 33 फीसदी महिला आरक्षण का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर केंद्र को भिजवाने को कहा था।  पंजाब की कांग्रेस सरकार प्रस्ताव पारित भेज चुकी है।कांग्रेस हाईकमान के आदेशों को अब राजस्थान की कांग्रेस सरकार भी अमली जामा पहनाने जा रही है। लोकसभा चुनावों से पहले 33 फीसदी महिला आरक्षण का प्रस्ताव पारित करने की सियसासी वजह भी है, कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि इस कदम से महिलाओं के वोट पार्टी की तरफ करने में मदद मिलेगी।
राहुल-सोनिया की भी मंशा
इस मसले पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी चाहते हैं कि कांग्रेस शासित प्रदेशों में विधानसभा में महिला आरक्षण का प्रस्ताव पारित हो,  इस बारे में नीतिगत फैसला लिया गया है, विधानसभा में जल्द महिला आरक्षण का प्रस्ताव पारित करवाया जाएगा। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने महिला आरक्षण पर उठाई थी, संघर्ष के बाद आखिरकार लोकसभा में बिल पास हो गया था।

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