Updated -

mobile_app
liveTv

सीकर । मक र संक्राति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस दौरान इससे पूर्व यहा पर पतंगबाजी का दौर लम्बे समय तक चलता है। 
लेकिन पतंगबाजी का यह दौर चले और यह कई पीढिय़ो से चलता आ रहा है। पूर्व मे हमारे बुर्जग पतंग व डोर हाथ से बनाते थे। खासकार मांझे को वे बड़ी मेहनत से तैयार करते थे।उस दौर में बल्वो का चलन था सो वे नये पुराने बल्वो को खरीदते, उनको इक्क्ठा करते व बड़ी मेहनत से मकंर संक्राति के लिए डोर तैयार करते। पर धीरे धीरे वक्त के साथ डोर का बाजार रेडिमेड हो गया। और बरेली सहित और प्रायकर सभी ने मेहनत छोड़ रेडिमेड डोर पर अपना फोकस बना लिया। और उसका उपयोग करने लगे पर समय के साथ युवा वर्ग व बगाों में अधिक पेच काटने व अच्छे माझें की ललक को लेकर अपना रूख किया चाइनीज मांझे की तरफ। शुरूआत मे तो यह मांझा किस तरह का है किसी को समझ मे नही आया। कुछ बर्षो पूर्व से ही यह डोर इतनी तेजी से बाजार में फैला जिसकी कोई कल्पना भी नही की होगी। जगह जगह बड़े से लेेेेकर छोटे दुकानदारो ने चाईनीज मांझे पर अपना ध्यान केन्द्रित कर लिया।
इसके कई मुख्य कारण थे। इनमे प्रमुख थी कि इनकी पैकिंग छोटी आती है। खरीददारो को ज्यादा रकम नही देनी पड़ती है। वही इसके पैसे और डोर से कम है। तथा इसमे बड़े दुकानदारो व छोटे दुकानदारो को मुनाफा ज्यादा है। सो वे अपना सारा ध्यान इसी पर केन्द्रित करने लगे। पर देखे इसके अवगुणो के बारे मे तो इसका पता बड़े दुकानदारो को तो पता था लेकिन उन्होने अधिक मुनाफे के कारण इस राज को नही खोला और अपनी कमाई नजरे गढ़ाई रखी। लेकिन आमजन को बहुत जल्द ही पता चल गयाकि इस चाईनिज मांझे से कितने नुकसान है। बीते कुछ बर्षो की बात करे तो कई बगाों ने अपनी जान गवाई है। इस डोर से यही नही पतंग के कटने के बद जब डोर को खीचंा जाता है तो इसकी चपेट मे कई राहगीर व वाहन चालक भी लपेटै मे आ जाते है। उनको भी कई मौको पर अपनी जान गंवानी पड़ी व शरीर के अंग गवंाने पड़े।
पर अब गौर किया जाये चाईनीज मांझे की ब्रिकी पर तो बड़ी मछलिया इसे लगातार वैसे ही बेच रही है जैसे कि पुर्व मे बेचा करती थी।ये अपना माल मुख्य दुकानो पर न रखक र दुरदराज बने दुकानेा व  गोदामो मे अपना माल रखते है। या अपने आस पास के धरो  से इसकी सप्लाई करते है। पर अब इसके बाद जो भी कारवाई प्रशासन द्वारा की जाती है वो छोटे दुकानदारो पर की जाती है। बड़ो के साथ लक्ष्मी प्रेम होने के कारण इससे जुड़े जो संबधित विभाग है वे उन पर कारवाई नही करते है। अगर कारवाई की बात नौबत आती भी है तो बड़ी मछलियो को पहले ही सूचित कर दिया जाता है। वही कु छ संबधित विभाग के ही कर्मी इसमे यह सूचना लीक करते है तभी तो हम देखे जब जब भी कारवाई हुई हे उसमे छोटै दुकानदार जो मौहगे व गांवो मे रहते है उन पर गाज गिरती है। बड़ो  का बाल भी बांका नही होता।
जबकि छोटै दुकानदार ये चाईनिज यही से खरीदते है और कारवाई भी उन पर ही होती है। अब मकंर संक्र ाति 14 जनवरी को है। इसमे अब बीस दिन शेष है औश्र उससे पूर्व लाखो रूपये का पतंग डोर बाजार मे बिक चुका है। 
पर एक भी कारवाई संबधित विभाग व प्रशासन ने नही की है। केवल अंतिम छणो मे दिखावट के तौर पर यह नजारा हमें पूर्व की तरह देखने को मिलेेगा।
इसमे भी तब जब बड़े दुकानदार अपना सारा स्टाक खत्म कर चुके होगें तब उसके बाद छोटे छोटै व्यापारी इसकी चपेट मे आयेगे ऐसा ही प्रतीत हो रहा है।
 

Searching Keywords:

facebock whatsapp

Comments

Leave a comment

Your email address will not be published.

Similar News