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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने देश की आर्थिक राजधानी व मायानगरी मुंबई में डांस बार को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वर्ष 2016 के कानून को वैध माना। हालांकि कुछ नियमों में बदलाव किए हैं।

बार में नोट और सिक्के नहीं उड़ाए जा सकेंगे, लेकिन बार गल्र्स को टिप दी जा सकती है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के कानून में अश्लीलता पर सजा के 3 वर्ष के प्रावधान को इजाजत दी है। अब बार शाम 6 से रात 11.30 बजे तक खुल सकेंगे। शराब परोसने और ऑर्केस्ट्रा को भी इजाजत मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि बार में किसी तरह की अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। 

हालांकि सीसीटीवी लगाना जरूरी नहीं होगा। इससे लोगों की निजता का उल्लंघन होता है। डांस बार में एरिया और ग्राहकों के बीच दीवार नहीं होगी। मुंबई जैसे क्षेत्र में धार्मिक जगहों से एक किलोमीटर की दूरी पर डांस बार होने का नियम तर्कसंगत नहीं है। 
कोर्ट ने कहा कि डांसर और मालिक के बीच वेतन फिक्स करना सही नहीं। ये अधिकार सरकार का नहीं बल्कि मालिक और डांसर के बीच आपसी कॉन्ट्रैक्ट का मामला है। कोर्ट ने कहा कि साल 2005 से सरकार की ओर से एक भी डांस बार को लाइसेंस नहीं दिया गया। वर्तमान नियमों के आधार पर डांस बार पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। इससे पहले पिछले साल 30 अगस्त को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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