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मल्टीमीडिया डेस्क। 24 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं। पितृ पक्ष भाद्रपद की शुक्ल चतुर्दशी से आरम्भ होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि तक चलेगा। पितरों को भोजन और अपनी श्रद्धा पहुंचाने का एकमात्र साधन श्राद्ध है।

आमतौर पर श्राद्ध 16 दिन के ही होते हैं, लेकिन कभी-कभार एक ही दिन दो तिथियां पड़ने से इनकी संख्या घट-बढ़ सकती है। पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक कुल मिलाकर 16 तिथियां होती हैं। हर व्यक्ति की मृत्यु इन्हीं 16 तिथियों में से किसी एक तिथि को होती है।

लिहाजा, जिस तिथि को व्यक्ति की मृत्यु होती है, उसी के अनुसार उसके परिजन श्राद्ध करते हैं। मृतक के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिंड तथा दान ही श्राद्ध कहा जाता है। अगर किसी को अपने परिजन की मृत्यु की तिथि नहीं पता हो, तो उनके लिए श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए।

पितृपक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध कई तरह के होते हैं। भविष्य पुराण में श्राद्ध के 12 प्रकार के बारे में बताया गया है। ये हैं नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धयर्थ, कर्मांग, दैविक, यात्रार्थ और पुष्टयर्थ।

नित्य श्राद्ध- पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं। इसे नित्य श्राद्ध कहा जाता है।

नैमित्तिक श्राद्ध- माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।

काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध विशेष सिद्धि को हासिल करने के लिए किया जाता है।

वृद्धि श्राद्ध- सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है।

सपिंडन श्राद्ध- यह श्राद्ध मृत व्यक्ति के 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है।

पार्वण श्राद्ध- यह श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है।

गोष्ठी श्राद्ध- जब परिवार के सभी सदस्य मिलकर श्राद्ध करते हैं, तो उसे गोष्ठी श्राद्ध कहते हैं।

शुद्धयर्थ श्राद्ध- परिवार की शुद्धता के लिए इसे किया जाता है।

कर्मांग श्राद्ध- किसी संस्कार के मौके पर किया जाता है।

 

तीर्थ श्राद्ध- किसी तीर्थ पर जाकर किए जाने वाला श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध कहते हैं।

यात्रार्थ श्राद्ध- यात्रा की सफलता के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को याश्रार्थ श्राद्ध कहते हैं।

 

पुष्टयर्थ श्राद्ध- आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाने वाले श्राद्ध को पुष्टयर्थ कहते हैं।

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