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जयपुर। (योगेश भावरा) देश में जहां तिरुपति तिरुमाला, सत्य साईंबाबा, केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे मंदिरों का पूरा डाटा ऑनलाइन है, राजस्थान में केवल मेंहदीपुर बालाजी मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर सहित प्रमुख मंदिर ही ऑनलाइन हैं।

अब राज्य का देवस्थान विभाग एवं राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल मिलकर देवस्थान विभाग के मंदिरों को ऑनलाइन करने की योजना पर काम कर रहा है, इसके लिए मंदिर प्रबंधकोंं को बेवसाइट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
6 हजार से अधिक हैं मंदिर

राज्य में देवस्थान विभाग के अन्तर्गत बनाए गए राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल को राज्य के मंदिरों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रन्यास मंडल यह कोशिश कर रहा है कि राज्य के प्रमुख मंदिरों की कम से कम चरणबद्ध तरीके से बेवसाइट बनाकर जानकारी डाली जाए। प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन को इसके लिए पत्र भेजे गए हैं कि वे अपने मंदिरों के लिए बेवसाइट बनाने का काम करें। अगर प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत आने वाले मंदिरों का डाटा देखेंं तो जयपुर संभाग को दो भागों में बांटा गया है।

अकेले राजधानी जयपुर में 1162 मंदिर हैं, दौसा में 56, जयपुर संभाग के दूसरे भाग में झुंझुनूं जिले में 137, सीकर में 169, अलवर में 266 मंदिर हैं। भरतपुर संभाग के जिलों में भरतपुर में 316, सवाईमाधोपुर में 111, करौली में 94, धौलपुर में 47 मंदिर हैं। जबकि जोधपुर संभाग के जिलों मेंं जोधपुर में 485, पाली में 338, बाड़मेर में 58, जालौर में 125 मंदिर, सिरोही में 218 और जैसलमेर में 76 मंदिर हैं। उदयपुर संभाग के उदयपुर जिले में 531, चित्तौडग़ढ़ में 95, प्रतापगढ़ में 43, राजसमंद में 50, कोटा संभाग में कोटा जिले में 320, बंूदी में 129, झालावाड़ में 87, बारां में 75 मंदिर हैं। जबकि अजमेर संभाग के जिलों में अजमेर में 327, नागौर में 167, टोंक में 63, और भीलवाड़ा में 114 मंदिर हैं। ऋ षभदेव में 11, डूंगरपुर में 50 और बांसवाड़ा में 74 मंदिरों को मिलाकर कुल 6484 मंदिर राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत रजिस्टर्ड हैं।
केवल बड़े मंदिर ही वेबसाइटों पर 

जयपुर में गोविंददेवजी और मोतीडूंगरी जैसे प्रसिद्ध मंदिर हैं तो मेहंदीपुर बालाजी, श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा, करौली का कैलादेवी मंदिर, राणी दादी मंदिर झुुंझुनूं, खाटूश्याम मंदिर जैसे कुछ बड़े मंदिरों की ही वेबसाइटें हैं। जिनसे पर्यटक राजस्थान के प्रमुख मंदिरों के बारे में जानकर अपने यात्रा शेडयूल में शामिल कर लेते हैं किन्तु अन्य मंदिरों की जानकारी ऑनलाइन मिलना संभव नहीं है। इसलिए अब देवस्थान विभाग इस योजना पर काम कर रहा है कि मंदिरों का ऑनलाइन डाटा इक_ा किया जाए। राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल की वेबसाइट पर केवल मंदिरों की सूची और नाम पते ही हैं।
अधिकांश छोटे मंदिरों में आर्थिक अभाव

हालांकि देवस्थान विभाग की यह भी परेशानी है कि अधिकांश मंदिरों में आर्थिक संसाधनों का अभाव है। ऐसे में इन मंदिरों को वित्तीय सहायता पहली प्राथमिकता है किन्तु वित्तीय सहायता देना हर मंदिर के लिए संभव नहीं है।

देवस्थान विभाग के मंत्री राजकुमार रिणवा एवं राजस्थान प्रन्यास मंडल के चेयरमैन एसडी शर्मा ने अधिकारियों के साथ इस पर मंथन किया है कि किस तरीके से इन मंदिरों को संजीवनी दी जाए और इनमें आर्थिक संसाधन जुटाए जाएं।

यह भी जानकारी नहीं कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति 

राज्य सरकार को अभी तक यह भी नहीं पता है कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति है और किस मंदिर में ज्यादा संसाधन हैं और किस मंदिर में कम। राज्य सरकार को इन मंदिरों का कैटेगराइजेशन करना होगा और इनमें उपलब्ध संसाधनों का ब्यौरा जिला कलेक्टरों एवं अन्य एजेंसियों के माध्यम से जुटाना होगा तभी मंदिरों के संसाधनों की जमीनी हकीकत का पता चल पाएगा।

राज्य के बाहर के मंदिरों की पूरी जानकारी नहीं

राजस्थान सरकार के प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत मथुरा, वृंदावन, आगरा, लखनऊ, हाथरस, सहित अन्य शहरों में बने मंदिरों की संपत्तियां भी है, किन्तु इनके बारे में पूरी जानकारी ही देवस्थान विभाग के पास नही है, तो संसाधनों के बारे में और मंदिरों की जमीनों के बारे में भी डाटा एकत्रित करना टेढ़ी खीर है। इसके लिए बड़ी मैनपॉवर की जरूरत है, जो पहले से ही मंदिरों में नहीं है।

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