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ग्लोबोकैन की ताजा रिपोर्ट से यह पता चला है कि फेफड़े के कैंसर का स्तन, गर्भग्रीवा और ओरल कैविट कैंसर के बाद सभी प्रकार के कैंसर (नॉनमेलानोमा स्किन कैंसर को छोड़कर) में चौथे स्थान पर है। भारतीय पुरुषों में फेफड़े के कैंसर के 53 हजार 728 और महिलाओं में 16 हजार 547 नए मामले सामने आए हैं। फेफड़े के कैंसर वाले भारतीय रोगियों में 90 प्रतिशत का कारण तंबाकू पदार्थों का सेवन रहा है। इसके साथ ही कभी भी धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी फेफड़े के कैंसर के होने में पर्यावरणीय, हार्मोन संबंधी, आनुवंशिक और जीवाणु संबंधी कई कारक शामिल हैं।
पेसिव स्मोकिंग भी है घातक

दूसरों के सिगरेट पीने से निकलने वाले धुएं के शरीर में जाने से जिसे पेसिव स्मोकिंग के नाम से जाना जाता है, इसके कारण व्यक्ति के फेफड़े के कैंसर की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है, भले ही व्यक्ति स्वयं धूम्रपान न करे। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस) इंडिया के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि 52 प्रतिशत वयस्क घर पर पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में रहते हैं। धुएं के जहरीले रासायनिक कण घर के पर्दे, कपड़े, कालीन, खाद्य पदार्थों, फर्निचर्स एवं अन्य सामग्रियों में चिपक जाते हैं, जो कि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए पैसिव स्मोकिंग का जरिया बन जाते हैं।  यह जोखिम घर में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या के अधिक होने एवं संपर्क में रहने की अवधि के अनुसार बढ़ जाता है।

  1. देश हर साल फेफड़े के कैंसर के लगभग 63 हजार 
  2. नए मरीज सामने मेंआ रहे हैं। वर्तमान में हमारे देश में 
  3. सभी प्रकार के कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर 
  4. से होने वाली मौतों का प्रतिशत 9.3 है।

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