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कार्यालय संवाददाता
जयपुर। एनसीईआरटी की भूमिका अब मात्र किताबों की पब्लिशिंग और टीचर्स को ट्रेनिंग देने तक ही सीमित नहीं रहेगी। अब एनसीईआरटी को अधिक पॉवर देने की तैयारी कर ली है। यह एजेंसी शिक्षा नीति बनाने और इसको लागू करने में भी मुख्य भूमिका निभाने वाली है। सीबीएसई पर बढ़ते काम के दबाव को कम करने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसका बिल सार्वजनिक करते हुए सुझाव भी मांगे हैं। एनसीईआरटी को नेशनल इंस्टीट्यूट का दर्जा दिया गया है। 
अब एनसीईआरटी स्कूल एजुकेशन और टीचर्स पॉलिसी निर्धारण में मानव संसाधन मंत्रालय का सहयोग करेगा। वहीं, राज्य सरकार को भी स्कूल एजुकेशन की पॉलिसी निर्धारित करने के लिए सुझाव देगा। एजुकेशन की सभी ब्रांचों में होने वाली रिसर्च को प्रमोट करने और इन इनोवेशन को लागू करवाने की जिम्मेदारी भी संस्थान की होगी। 
सेकंडरी के प्रधानाध्यापक करेंंगे पंचायतों के प्राथमिक स्कूलों की मॉनिटरिंग
उधर, ग्राम पंचायतों प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों की मॉनिटरिंग शैक्षणिक स्तर सुधारने का जिम्मा अब सरकार ने उसी पंचायत के सैकण्डरी हायर सैकण्डरी स्कूलों के संस्था प्रधानों को सौंपा है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने पीईईओ के काम करने की गाइड लाइन तय की है। सरकार ने इसके लिए पदेन पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी  का नया पद सृजित किया था। लेकिन गाइड लाइन तय नहीं होने से पीईईओ काम नहीं कर पा रहे थे। अब सरकार के आदेशों के बाद शिक्षा विभाग ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए पीईईओ के नामों की सूची जारी कर दी है। पीईईओ का मुख्यालय सम्बन्धित स्कूल ही होगा। 

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