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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने शिक्षक-छात्र के अनुपात में किए गए वदलाव के कारण प्रोफेशनल कॉलेजों के शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बदलाव के कारण करीब 1.78 लाख निजी इंजीनियरिंग, एमबीए, होटल मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को अपनी नौकरी से हाथ खोना पड़ सकता है। इन कॉलेजों के शिक्षकों ने एआईसीटीई द्वारा प्रस्तावित शिक्षक-छात्र अनुपात के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर 9 मार्च को सुनवाई होगी।

 

है क्या शिक्षक-छात्र अनुपात
एआईसीटीई के निर्देशों के अनुसार निजी इंजीनियरिंग, एमबीए, एमसीए, होटल मैनेजमेंट और अन्य प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:20 होना चाहिए। वहीं, डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए शिक्षक-छात्र अनुपात को घटाकर 1:25 कर दिया गया है। पहले प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:15 था और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:20 था। 


पीईआईइए ने दाखिल की याचिका
तमिलनाडु और तेलंगना के प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस इम्पलॉयी एसोसिएशन (पीईआईइए) ने सुप्रीम कोर्ट में एआईसीटीई के इस फैसले के विरोध में याचिका दाखिल की है। एसोसिएशन के अनुसार एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों के लगभग 1.78 लाख शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नया शिक्षक-छात्र अनुपात प्रोफेशनल एजुकेशनल सिस्टम को कमजोर करेगा और इससे बेहतरीन दिमागों का ब्रेन ड्रेन बढ़ेगा। बी.ई और बी.टेक जैसे पाठ्यक्रमों में शिक्षकों की कमी होने से इन पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि कम होगी।  


ट्रस्टों को हो सकता है फायदा
याचिकाकर्ता ने याचिका में कहा है कि ज्यादातर निजी संस्थान शैक्षणिक ट्रस्ट द्वारा संचालित की जाती है। मौजूदा वक्त में एआईसीटीई के नए निर्देशों के बाद संस्थानों को संचालित करने वाले ट्रस्ट फीस में तो बढ़ौतरी कर रहे हैं लेकिन शिक्षकों के वेतन में कटौती कर रहे हैं। एआईसीटीई शिक्षक-छात्र अनुपात को घटाकर इन ट्रस्टों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे संस्थान मान्यता प्राप्त करने के लिए फर्जी फैकल्टी रखने का भी तरीका अपना रहे हैं।

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