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RBI हर दो महीने में ब्याज दरों पर फैसला लेता है। यह काम 6 सदस्यों वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) करती है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों पर हमारी नजर है। इसीलिए अकोमोडेटिव स्टांस रखने का फैसला लिया गया है। इससे पहले MPC की बैठक फरवरी में हुई थी। 5 फरवरी को RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का ऐलान किया था।

पिछले साल मई से RBI ने नीतिगत दरों को समान रखा है। यह दर पिछले 15 सालों के सबसे निचले स्तर पर हैं। बैंकों को दिए गए लोन पर RBI की ओर से वसूले जाने वाले ब्याज को रेपो रेट कहा जाता है। वहीं, बैंकों की ओर से जमा किए गए रुपयों पर RBI की ओर से दिए जाने वाले ब्याज को रिवर्स रेपो रेट कहा जाता है।

इकोनॉमी में जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान
MPC ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए GDP ग्रोथ पर 10.5% का अनुमान दिया है। फरवरी में भी ग्रोथ पर यही अनुमान था। 2021-22 की पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 22.6% रहने का अनुमान है। यह दूसरी तिमाही में 8.3% रह सकता है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि दुनियाभर में आर्थिक ग्रोथ में धीमें-धीमें सुधार देखा जा रहा है, लेकिन अनिश्चितताएं बनी हुईं हैं। जैसे-जैसे वैक्सीनेशन का तेज होगी वैसे-वैसे दुनियाभर की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगी। इकोनॉमी में रिकवरी के लिए सभी संभव प्रयास किया जाएगा।

मंहगाई पर RBI ने दिया अनुमान
RBI ने 2020-21 की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई दर 5% की उम्मीद जताई है। वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए रिटेल महंगाई 5.2% रहने की संभावना है। तीसरी तिमाही में 4.4% और चौथी तिमाही में 5.1% रहने की संभावना है। शक्तिकांत दास ने कहा कि खाने-पीने वाले के सामानों की मंहगाई दक्षिण-पश्चिम मानसून और पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स पर निर्भर करेगी।

 

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