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कांटो के पथ पर अनेकों बाधाओं को तोड़ आगे बढ़ते रहे गहलोत


विगत दिनों प्रदेश सरकार की ओर से अपने कामकाज का 21 माह का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया गया सरकार ने दावा किया है कि चालू शासन काल के प्रथम 21 माह के कार्यकाल में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने जन घोषणा पत्र में जो 502 वादे किए थे उनमें 252 वादे पूरे कर लिए गए हैं, 173 वादों पर काम जारी है और जिन 15त्न वादों पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है उन वादों पर भी बहुत जल्दी ही काम शुरू होने वाला है हालांकि प्रदेश की प्रमुख विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश सरकार के 21 माह में किए गए कामकाज के सभी दावों को सिरे से खारिज कर साफ कहा है कि सरकार ने झूठे और मनगढ़ंत दावे किए हैं और प्रदेश में सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है विरोधी दल की ओर से सत्तारूढ़ दल के दावों को खारिज किया जाना कोई नई बात नहीं है अगर प्रदेश में भाजपा शासन में होती तो शायद कांग्रेश पार्टी भी इसी तरह से सरकार के कामकाज पर सवालिया निशान उठाती लेकिन गत 21 माह के शासन काल की जगह विगत 6 माह के सरकार के कामकाज के तरीकों, कोरोना का मैनेजमेंट और घोषणाओं कि ठीक ढंग से समीक्षा करें तो एक बात साफ सामने निकल कर आती है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दिल में प्रदेश की जनता की तकलीफों को दूर करने की दृढ़ इच्छाशक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है, विगत 6 माह का समयराजस्थान सहित पूरे देश और विश्व में काफी संकटों में बीता है, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन कठिन मुश्किल घड़ी में भीषण आर्थिक तंगी के बावजूद जिस तरह से प्रदेश भर में कोरोना के मरीजों के उपचार और कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए जो बेहतर और ठोस इंतजाम किए हैं उन्हें झूठा साबित नहीं किया जा सकता हालांकि मरीजों का आंकड़ा अब भी दिनोंदिन तेजी से बढ़ रहा है लेकिन मरीजों की संख्या बढऩे से यह नहीं कह सकते कि सरकार ने कोरोना के इंतजाम ठीक नहीं किए क्योंकि मरीजों की संख्या बढऩे का प्रमुख कारण यही है कि लोग अनलॉक में बेपरवाह हो गए हैं और कोरोना की गाइड लाइन का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैंऐसे में सरकार चाहे जितने इंतजाम कर ले, कोरोना के मरीज हर हाल में बढ़ेंगे,सीएम गहलोत प्रदेश में कोरोना के दस्तक देने के पहले दिन से ही कोरोना को लेकर बेहद सजग चौकस हो गए और उन्होंने जिस तरह से कोरोना की इस अवधि में एक-एक दिन में सुबह से लेकर देर रात तक कोरोना के संबंध में नियमित रूप से अनेकोंसमीक्षा बैठकें आयोजित की और कोरोना के साथ-साथ प्रदेश के सभी सरकारी विभागों के कामकाज की भी समीक्षा करते रहे उससे विभागों के अफसरों के अलावा मंत्रियों में भी कोरोना की इस अवधि में काम करने की दक्षता बनी रही देशभर के मुख्यमंत्रियों की गत 6 महीने के कामकाज के तरीकों की समीक्षा करें तो गहलोत अकेले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने सरकारी कामकाज के संबंध में सबसे ज्यादा समीक्षा बैठकें आयोजित करवाई है, कई बार ऐसा भी देखा गया जब डॉक्टरों ने गहलोत को बेड रेस्ट के लिए कहा लेकिन गहलोत डॉक्टरों की सलाह को नजरअंदाज कर एक-एक दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के अधिकारियों कर्मचारियों सामाजिक संगठनों व्यापारियों, चिकित्सकों, विभिन्न कर्मचारी संगठनों किसानों मजदूरों यहां तक कि सफाई कर्मचारियों से भी बातचीत की और कोरोना की रोकथाम के संबंध में सभी लोगों से सुझाव मांगे और अपनी ओर से उन्हें आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए, गहलोत का इस तरह से कोरोना की महामारी के बीचसरकारी कामकाज में व्यस्त रहने का सीधा असर मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी पड़ा और इन सब ने भी बड़ी मुस्तैदी से अपने कप्तान का साथ दिया जिसका नतीजा यह रहा कि पूरे भारतवर्ष में कोरोना के मैनेजमेंट में गहलोत सरकार की जमकर प्रशंसा हुई इसलिए विपक्ष अगर विगत 6 माह के सरकार केकामकाज पर उंगली उठाता है तो वह अपने आप ही झूठा साबित हो रहा है क्योंकि पूरा देश यहां तक कि पीएम मोदी भी गहलोत सरकार के कोरोना काल के कामकाज की प्रशंसा कर चुके हैं, अब 21 में से विगत 6 माह निकाल दें तो बाकी के 15 माह के कामकाज का विश्लेषण करें तो इन 15 माह के दौरान भी गहलोत के सामने ढेरों समस्याएं सामने आई, चाहे उन्हें अपनी ही पार्टी की समस्याओं से जूझना पड़ा हो, या फिर लोकसभा चुनाव की वजह से आचार संहिता लागू हो, राज्यसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो, नगर निकाय या पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में आचार संहिता लागू हो, या फिर प्रदेश में अचानक आई भीषणप्राकृतिक आपदा हो या फिर सबसे बड़ी बाधा सरकारी कोष का खजाना खाली हो इन तमाम बड़ी बाधाओं के बावजूद भी गहलोत के चेहरे पर प्रदेश की जनता की तकलीफों को हर हाल में दूर करने की पीड़ा साफ झलकती रही और उन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद भी प्रदेश में युवाओं को रोजगार देने के रास्ते निकाले हैं, भर्तियां खोली है, काफी हद तक किसानों के कर्ज भी माफ किए हैं, चिकित्सा के क्षेत्र में प्रदेश में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है और खेती और किसान दोनों को उन्नत बनाए जाने के प्रयास भी सरकार की ओर से किए जा रहे हैं, प्रदेश में हाई प्रोफाइल शिक्षा के क्षेत्र में भी विकास देखा जा सकता है, पानी और बिजली यह दोनों ऐसे विभाग हैं जिनमें चाहे आप चाहे जितना काम कर लो फिर भी काम नजर नहीं आता इसलिए सरकार ने काम किया भी है तो विपक्ष को दिख नहीं रहा, जहां तक उद्योगों का सवाल है गहलोत सरकार ने निवेशकों के लिए राह आसान की है लेकिन निवेशक काफी बुद्धिमान लोग होते हैं वह सोच विचार कर ही कदम उठाते हैं इसलिए आने वाले दिनों में पता चलेगा कि निवेशक गहलोत सरकार की योजनाओं का कितना फायदा उठाते हैं जहां तक रियल एस्टेट के कारोबार का सवाल है यह कारोबार पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल के दौरान ही पटरी से नीचे उतर चुका था अब जब कोरोना की अवधि में गरीब से लेकर अमीर तक सब की गाड़ी पटरी से उतरी हुई है तो फिर सरकार चाहे जितने उपाय कर ले रियल एस्टेट कारोबार को उठने में टाइम लगेगा जहां तक महिला अत्याचार और अपराधों का सवाल है प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो एक जैसे हालात ही देखने को मिलते हैं इसलिए भाजपा को अपराध के नाम पर राजनीति करने से पहले अपने गिरेबान में भी झांक कर देखना होगा, देखा जाए तो विगत 21 माह में सरकार को काम करके दिखाने का ज्यादा वक्त ही नहीं मिला क्योंकि आधे से ज्यादा वक्त तो विभिन्न तरह केचुनाव कराए जाने में ही खर्च हो गया फिर भी गहलोत सरकार ने 21 माह में जन घोषणा पत्र में किए गए 50त्न वादे पूरा करने की बात कही है तो उसे गलत साबित करने का कोई बड़ा कारण नजर नहीं आ रहा क्योंकि प्रदेश के शासन की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब पहली कैबिनेट बैठक आहूत की थी उसी समय उन्होंने जन घोषणा पत्र को नीतिगत दस्तावेज मान लिया था किसी सरकार का जन घोषणा पत्र को नीतिगत दस्तावेज मानना एक बहुत बड़ी बात होती , नीतिगत दस्तावेज मानना यह दर्शाती है कि सरकार जन घोषणा पत्र में किए गए सभी वादों को हर हाल में पूरा करेगी इसलिए अभी सरकार के 3 साल बाकी है हालांकि विगत 6 माह में प्रदेश की आर्थिक हालत जो पहले से ही काफी बिगड़ी हुई थी अब और बिगड़ गई है प्रदेश की इनकम आधे से भी कम हो गई है इसलिए सरकार चाहते हुए भी अपने मन मुताबिक विकास काम शुरू नहीं कर पाएगी लेकिन इसके बावजूद भी विगत कुछ माह में कोरोना की अवधि में भी जिस तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर कोटा उदयपुर सहित पूरे प्रदेश भर में करोड़ों रुपए के अनेकों विकास कामों का शिलान्यास और लोकार्पण किया है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जन घोषणा पत्र में किए गए सभी वादों को गहलोत सरकार अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले जरूर कर लेगी क्योंकि गहलोत खुद जन घोषणा पत्र में किए गए वादोंको लेकर प्रत्येक मंत्री से बराबर अपडेट लेते रहते हैं।
-रामेश्वरलाल जाट,
संपादक, मों. नं.- ७०१४२१७७७०

सरकार के भरोसे नहीं बल्कि अब खुद को कोरोना से जागरूक होना ही पड़ेगा अन्यथा मौत आपको भी दावत दे रही है


राजस्थान सहित पूरे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या दिनोंदिन तेजी से आगे बढ़ रही है ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए सजग और चौकस नहीं हैं चाहे केंद्र सरकार हो या राज्यों की सरकारें हर सरकार कोरोना मरीजों के उपचार और कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रही हैं राजस्थान सरकार सहित देश भर की विभिन्न राज्य सरकारें अपना पूरा ध्यान कोरोना पर ही केंद्रित किए हुए है भले ही 6 माह से प्रदेश सरकारों की आर्थिक व्यवस्था लॉकडाउन और कोरोना की वजह से बुरी तरह से गड़बड़ा गई हो सरकारों की आई एक चौथाई हो गई हो लेकिन इसके बावजूद भी प्रदेश की गहलोत सरकार और अन्य सभी सरकारें अपने यहां किसी भी व्यक्ति को कोरोना से मरते हुए नहीं देखना चाहती लेकिन इसके बावजूद भी राजस्थान सहित पूरे देश में जहां कोरोना के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो रही है वही कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा भी निरंतर रूप से बढ़ रहा है हालांकि राजस्थान में रिकवरी रेट आज की तारीख में 82त्न तक आ गई है तथा मृत्यु दर 1.29त्न से 1.26त्न तक आ गई है लेकिन इसके बावजूद भी राजस्थान सहित पूरे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है राजस्थान में अगर यूं ही कुछ दिन और मरीजों का आंकड़ा रोजाना बढ़ता रहा तो कुछ ही दिनों बाद राजस्थान में मरीजों का आंकड़ा 100000 के पार हो जाएगा हालांकि अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में गहलोत सरकार की अगुवाई में कोरोना का मैनेजमेंट बहुत ही बढिय़ा कहा जा सकता है आर्थिक तंगी के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जिस तरह से आए दिन कोरोना के बाबत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा बैठक आयोजित करके रोजाना जिला प्रशासन जिला पुलिस अधीक्षक जिला चिकित्सा अधिकारियों से जिलेवार कोरोना के संबंध में संपूर्ण जानकारी हासिल कर रहे हैं कहने का मतलब चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें कोरोना की लड़ाई में पूरी ताकत से जुटी हुई हैं लेकिन हम में से अब भी कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना जैसे अदृश्य राक्षस को अब भी ठीक तरह से नहीं पहचान पा रहे ऐसे लोग बिना मास्क के घूम रहे हैं सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं कर रहे हैं तथा सरकार की ओर से जारी की गई गाइडलाइन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर खुद को यह साबित करने का प्रयास करते हैं कि उसके आगे कोरोना का कोई वजूद है ही नहीं लेकिन ऐसे लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि कोरोना जैसा अदृश्य राक्षस अमीर गरीब जात पात कुछ भी नहीं देखता है थोड़ी सी लापरवाही बरतने पर वह हर किसी को अपनी चपेट में ले रहा है चाहे फिर वह बड़ा राजनेता हो या फिर बड़ा प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी हो या फिर जज वकील हो कोरोना सबको समान दृष्टि से देखता है और हर किसी को चपेट में लेने में 1 सेकेंड का वक्त भी नहीं लगाता यही वजह है कि राजस्थान में अब तक दो दर्जन से ज्यादा विधायक सांसद और मंत्री गण कोरोना की चपेट में आ चुके हैं ऐसा नहीं है कि इन राजनेताओं ने कोरोना को लेकर कोईलापरवाही या ढिलाई की हो लेकिन कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ इन राजनेताओं से पल भर के लिए लापरवाही हो ही गई जिसका नतीजा यह हुआ कि लाख कोशिशों के बावजूद भी कोरोना ने इन्हें अपनी चपेट में ले ही लिया कहने का मतलब अगर आप वर्तमान माहौल में थोड़ा सा भी लापरवाह और बेपरवाह हो गए तो कोरोना आपको जकड़ ही लेगा इसलिए जो लोग यह सोच रहे हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा कोरोना तो महज बकवास है महज अफवाह है उन लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि वह खुद के स्वास्थ्य के साथ तो खिलवाड़ कर ही रहे हैं साथ में अपने परिजनों रिश्तेदारों दोस्तों और अपने साथ काम करने वाले लोगों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं कोरोना अकेले भारत की चिंता नहीं है बल्कि पूरे विश्व की रातों की नींद और दिन का चैन छीने हुए हैं पूरी दुनिया के देश कोरोना की दवाई तैयार करने में गत 6 माह से जुटे हुए हैं भारत अमेरिका फ्रांस चीन जर्मनी कनाडा रूस ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड सहित दुनिया भर के देशों के वैज्ञानिक और चिकित्सा जगत से जुड़े लोग कोरोना की दवाई तैयार करने में जुटे हुए हैं लेकिन आज दिन तक यह दवाई अभी बाजार में नहीं आ पाई है और कोई बड़ी बात नहीं दवाई के बाजार में आने में और भी कई महीने लग जाए क्योंकि यह महामारी ऐसी महामारी है जिसका तोड़ चिकित्सा जगत से जुड़े लोग नहीं निकाल पाए हैं लेकिन वैज्ञानिक और चिकित्सा जगत से जुड़े लोग यह जरूर कहते हैं कि अगर इंसान खुद इस बीमारी को लेकर सर्जक और चौकस हो जाए तो फिर वह इस बीमारी से बच सकता है कहने का मतलब कोरोना से बचाव ही एकमात्र उपाय है लोग अगर सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए अपनी दिनचर्या को संपन्न करें तो वह इस महामारी की चपेट में आने से बच सकते हैं क्योंकि जब देश में लॉकडाउन था तब कोरोना के मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ रही थी लेकिन देश में अनलॉक की अवधि में कोरोना के मरीजों की संख्या में रोजाना अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी हो रही है जिसका सीधा सा मतलब यही निकलता है कि लोग अनलॉक में लापरवाह हो गए हैं बेपरवाह हो गए हैं और अपने हिसाब से अपनी दिनचर्या बिता रहे हैं उन्हें कोरोना का डर नहीं है वे बिना मास्क के घर से बाहर निकल रहे हैं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं बार-बार हाथ साफ नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से वे खुद कोरोना की चपेट में आ रहे हैं और अपने साथ अपने परिजनों दोस्तों और रिश्तेदारों तथा संपर्क में आने वाले लोगों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं जब आदमी खुद ही मौत को गले लगाने की सोच ले फिर भला सरकार उसका और उसके परिवार का कब तक ध्यान रखेगी सरकार कोई भगवान नहीं है जिस के आशीर्वाद से कोरोना छूमंतर हो जाए सरकार एक संस्था है वह लोगों को गाइड कर सकती है लोगों के उपचार की व्यवस्था कर सकती है लेकिन दुनिया की कोई भी सरकार इतनी सक्षम और ताकतवर नहीं होती कि वह हर व्यक्ति के घर में जाकर बैठ जाए और 24 घंटे घर के सदस्यों की निगरानी में लगी रहे कहने का मतलब सरकार की अपनी मर्यादा और लिमिटेशंस होती हैं जिसके आधार पर उसे काम करना होता है इसलिए हर चीज के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं है अब अगर राजस्थान में कोरोना के मरीजों की संख्या एक लाख के पास पहुंच गई है तो इसमें सरकार कि कोई गलती नहीं है अगर गलती है तो हम सबकी क्योंकि हम में से कई ऐसे हैं जो कोरोना जैसी महामारी के स्वरूप को अब तक नहीं पहचान पाए हैं जो सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से मैं खुद तो मौत के मुंह में जा ही रहे हैं साथ में अपने संपर्क में आने वाले लोगों को भी मौत के मुंह में भेज रहे हैं सरकार को दोष तब दिया जा सकता है जब कोरोना के चार और कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कारगर और जरूरी कदम नहीं उठा रही हो गहलोत सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर पूरी ताकत से कोरोना की लड़ाई लड़ रही है लेकिन राजस्थान की जनता में कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना को लेकर लापरवाह बने हुए हैं जिनकी वजह से प्रदेश में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है यह सच है अगर ऐसे लापरवाह लोग अब भी नहीं सुधरे उन्हें अब भी अपनी और अपने परिजनों की जान की चिंता नहीं हुई और वे लापरवाह हो कर ऐसे ही घूमते रहे तो निश्चित रूप से उन्हें और उनके परिजनों रिश्तेदारों और दोस्तों और संपर्क में आने वाले सभी लोगों को उपचार के लिए आने वाले दिनों में अस्पताल में भर्ती होना ही पड़ेगा क्योंकि यह ऐसी बीमारी है जिसका एकमात्र उपाय बचाव है अगर व्यक्ति खुद आगे बढ़कर अपना बचाव करेगा सरकार की गाइडलाइन का पालन करेगा तो निश्चित रूप से वह इस महामारी की चपेट में आने से बच जाएगा अन्यथा उसे और उसके परिजनों को एक दिन जरूर कोरोना के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती होना ही पड़ेगा जिसमें उनकी जान भी जा सकती है इसलिए कोरोना से बचने का एकमात्र उपाय खुद को सेव रखना है जिसके लिए उसे सरकार की गाइडलाइन का पालन करना ही होगा।
-रामेश्वरलाल जाट, संपादक, मों. नं.- ७०१४२१७७७०

सुशांत सिंह की मौत ने देश में संयुक्त परिवार प्रथा की अहमियत बता दी है


बिहार के छोटे से शहर से निकलकर मुंबई पहुंचे सुशांत सिंह राजपूत नेबहुत ही कम समय में बॉलीवुड में पैसा और नाम दोनों कमाया लेकिन छोटी सी आयु में ही उनका जो दुखद अंत हुआ और फिर उनकी मौत को लेकर पूरे देश में जो असंतोष का माहौल बना हुआ है उनकी मौत के कारणों और जांच को लेकर जो विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है उससे यह मामला देश का सबसे हाईप्रोफाइल मामला फिलहाल बना हुआ है सीबीआई जांच जारी है और देश दुनिया में लाखों की संख्या में मौजूद सुशांत के समर्थकों की निगाहें इस समय सीबीआई जांच पर टिकी हुई है लेकिन इन सबके बीच अगर हम यह जानने की कोशिश करें कि क्या सुशांत मुंबई में अपने परिवार वालों के साथ रहते तो क्या वे इतनी सी छोटी सी उम्र में मौत के मुंह में चले जाते क्या उनकी दौलत को कोई गैर व्यक्ति हड़पने की कोशिश करता क्या वे डिप्रेशन का शिकार होते क्या वे नशे के आदी होते क्या बे रिया के साथ लिव इन में रहतेइन सब सवालों का बारीकी से विश्लेषण करें तो हर सवाल का जवाब ना में ही मिलेगा क्योंकि अगर कोई नौजवान अपने परिवार वालों के साथ रहता है तो उसकी तकलीफों में से आधी तकलीफ तो परिवार वालों से शेयर करने में उनसे सलाह मशविरा करने में ही दूर हो जाती है घर में बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद और बड़े बुजुर्गों की सलाह कई बार रामबाण औषधि साबित हो जाती है जिसमें गंभीर से गंभीर बीमारी का इलाजऔर गंभीर से गंभीर समस्या का समाधान छुपा हुआ रहता है लेकिन बॉलीवुड का यह लोकप्रिय युवा सितारा बिहार से मुंबई आने के बाद मुंबई जैसी मायावी नगरी के मायावी लोगों के जाल में फंस गया जिसकी वजह से दौलत और नाम दोनों होने के बावजूद भी वह मुंबई में अकेला पड़ा हुआ था उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्य हजारों किलोमीटर दूर बिहार में थे और वह अकेला मुंबई में अपने फ्लैट में नौकर और कर्मचारियों के भरोसे अपना जीवन व्यतीत कर रहा था हालांकि मुंबई में रहना समय की मांग थी क्योंकि वह फिल्मों में अभिनय से अपना कैरियर बना रहा था पेट पालने के लिए पैसा भी जरूरी है इसलिए उसका मुंबई में रहना भी जरूरी था सुशांत के परिवार और रिश्तेदारों में दूर-दूर तक कोई भी व्यक्ति फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ नहीं था सुशांत सिर्फ मुंबई में अकेले थे वैसे दोस्तों की कोई कमी नहीं थी लेकिन यह सब दोस्त सुशांत से व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि उसकी दौलत से जुड़े हुए थे सुशांत के पैसों पर सुशांत के दोस्त ऐश कर रहे थे सुशांत काफी जिंदादिल इंसान थे और अपने दोस्तों पर अपने नौकरों और कर्मचारियों पर दिल खोलकर पैसा खर्च करते थे दूसरों की दिल खोलकर मदद करते थे उनका यह स्वभाव उन्हें उनकी मौत के दरवाजे तक ले गया सुशांत के इर्द-गिर्द घूमने वाले लोग और सुशांत के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग सबकी निगाहें सुशांत की दौलत पर थी सब यह सोचते थे कि है मुंबई में अकेला है नेक दिल इंसान है दिल फरियाद है इसलिए अपनी मौज मस्ती और ऐसो आराम के लिए सुशांत के दिल में पहले जगह बनाई और फिर उसकी दौलत के सहारे अपने शौक पूरे करते रहे और विदेशों में भ्रमण करते रहे कहने का मतलब सुशांत अकेला था और उसे अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए हमदर्द लोगों की जरूरत थी जिसमें रिया चक्रवर्ती भी थी इसके अलावा उसने अपने यहां मोटी तनख्वाह पर कई नौकर और कर्मचारी भी रखे हुए थे नौकर और कर्मचारियों को सिर्फ अपनी तनख्वाह से मतलब होता है महीना खत्म होते ही उन्हें अपनी मेहनत के बदले पैसा चाहिए उन्हें मालिक की निजी जिंदगी और मालिक की निजी परेशानियों से कोई मतलब नहीं होता है सुशांत सिंह कई महीनों से मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान चले आ रहे थे उन्हें रिया का व्यवहार और रिया के खर्चे बिल्कुल पसंद नहीं आ रहे थे जो खबरें निकल कर सामने आ रही है उसमें यह भी सामने आया है कि कई बार सुशांत अपने कमरे में अकेले सो रहे होते थे और उसी समय उनके फ्लैट में रंगीन पार्टियां चल रही होती थी सुशांत का उपचार भी चल रहा था रिया चक्रवर्ती पर यह आरोप भी लग रहा है कि उन्होंने साजिश के तहत सुशांत को ड्रग्स की नशे की आदत भी डाली कहने का मतलब जो लोग सुशांत के आस-पास रहते थे वे सब पूर्व प्लानिंग के तहत अपने अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते इस बॉलीवुड स्टार के इर्द-गिर्द घूम कर खुद को यह बताने का प्रयास करते थे कि वे सुशांत की लाइफ को लेकर कितना सजग और चौकस है सुशांत का कितनी अच्छी तरीके से ख्याल रखते हैं जबकि सच्चाई कुछ और ही कुछ जिसे सुशांत समय रहते नहीं समझ पाए और अगर बाद में उन्हें सच्चाई का पता भी लगा होगा तब तक काफी देर हो चुकी थी जिसकी वजह से हो सकता है उन्हें मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से गहरा आघात लगा होगा क्योंकि जिसे आप अपना हम दर्द समझते हैं जिस पर आपने आंख मूंदकर भरोसा किया हो और जब बाद में पता चले कि वह व्यक्ति है आपका हमदर्द नहीं बल्कि जानी दुश्मन है तो निश्चित रूप से दिल को गहरी ठेस लगती ही है कुछ ऐसा ही शायद सुशांत के साथ हुआ है सुशांत अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए अपने सुख-दुख शेयर करने के लिए रिया चक्रवर्ती जैसी लड़कियों और लड़कों पर भरोसा किए हुए थे जिसे सुशांत की सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है जो बाद में उनकी मौत का कारण भी बन गई हालांकि सुशांत की मां जिंदा नहीं थी लेकिन उनके पिता औरनिकट के परिजन पटना में रहते थे उनकी चार शादीशुदा बहने भी हैं जो अपने अपने ससुराल में रह रही थी इसलिए हो सकता है मुंबई में अकेले रहना सुशांत की नियति बन गई हो लेकिन सुशांत की मौत ने यह जरूर साबित कर दिया है कि जिंदगी जीने का जो मजा संयुक्त परिवार प्रणाली में आता है वह मजा एकल परिवार प्रणाली में नहीं आता एकल परिवार प्रणाली में रह रहे इंसान के सामने समस्याओं को फेस करने का कोई रास्ता ठीक समय में इंसान को नजर नहीं आ पाता है क्योंकि कोई उसे सलाह मशविरा देने वाला उस समय नहीं होता है उस समय वह घर में अकेला या ज्यादा से ज्यादा अपनी पत्नी के साथ मौजूद रहता है जिसकी वजह से कई बार उसे सही सलाह नहीं मिल पाती क्योंकि संयुक्त परिवार प्रणाली में कई सीनियर सिटीजन ऐसे होते हैं जिन्हें जीवन का काफी अनुभव होता है जिन की सलाह से कई बार बड़ी से बड़ी समस्याएं भी छूमंतर हो जाती है इंसान जब अकेला होता है और कईसमस्याओं से ग्रस्त होता है तो वह अंदर ही अंदर घुटता रहता है क्योंकि कोई उसे सामने कोई नजर ही नहीं आता जिसे वह अपना सुख दुख शेयर कर सके यही वजह है कि आए दिन एकल परिवार प्रणाली में रह रहे लोग या तो आत्महत्या करते दिख रहे हैं या फिर पति पत्नी के बीच तलाक होते दिख रहे हैं ऐसा नहीं है कि संयुक्त परिवार प्रणाली में रह रहे लोगों में आपस में झगड़े नहीं होते या फिर कोई समस्याएं पैदा नहीं होती समस्याएं हर जगह होती है समस्याएं और इंसान एक दूसरे के पूरक हैं लेकिन अधिकांश मामलों में यह देखा गया है कि संयुक्त परिवार प्रणाली में रह रहे लोग एकल प्रणाली में रह रहे लोगों से कहीं अधिक सुखी और कहीं अधिक मजबूत होते हैं क्योंकि संयुक्त परिवार प्रणाली में एक ही घर की छत के नीचे परिवार के अनेकों लोग अपने छोटे छोटे नन्हे मुन्ने के साथ रहते जिन्हें अपने सामने देख कर समस्याओं से घिरा कोई भी व्यक्ति खुद को काफी मजबूत और ताकतवर समझ लेता है उसे यह एहसास रहता है कि उसके पीछे घर के कई लोगों का आशीर्वाद और कई लोगों का समर्थन और भरोसा मिला हुआ है इसलिए है पूरी ताकत के साथ बड़ी से बड़ी समस्या को भी फेस कर लेता है लेकिन एकल परिवार प्रणाली में घर आने के बाद इंसान को ज्यादा से ज्यादा अपने घर की दीवारें दिखती है या फिर अपनी पत्नी और बच्चे जिसकी वजह से वह खुद को अकेला समझ अंदर ही अंदर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होता रहता है अपने पति को परेशान देखकर पत्नी का भी परेशान होना लाजमी है इस स्थिति में कई बार इंसान आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेता है जो ज्यादातर एकल परिवार प्रणाली में ही आजकल देखने को मिल रहा है शायद इसी तरह के हालातों से बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत को भी जूझना पड़ा वे अकेले मुंबई में अपने आसपास चालबाज और दगाबाज लोगों के घेरे में बुरी तरह से फस गए थे उन्हें अपनों से गहरा विश्वासघात लगा था अंतिम समय मेंमुंबई में उन्हें ऐसा कोई आदमी नजर नहीं आया जिसे वे अपना सुख दुख शेयर कर सके जिसकी वजह से के अंदर ही अंदर बुरी तरह से टूट गए थे बाद में जो कुछ हुआ जिस तरह से उनका दुखद अंत हुआ उसे देख कर यह कहा जा सकता है कि अगर मुंबई में उनके परिवार वाले उनके साथ रहते तो शायद सुशांत आज जिंदा होते लेकिन उनका अकेलापन ही उनकी मौत का बड़ा कारण बन गया।
-रामेश्वरलाल जाट, संपादक, मों. नं.- ७०१४२१७७७०

पिंगोन झील के दक्षिणी छोर पर भारत की रणनीतिक जीत अब डरने लगा है चीन


विगत 30 अगस्त की रात लद्दाख क्षेत्र के पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर भारत की सेना ने जिस तरह से बिना गोलीबारी किए बिना धक्का-मुक्की किए चीन की सेना को तगड़ी शिकस्त दी है उसके बाद चीन के मीडिया ने जो खबरें प्रकाशित की है उससे एक बात तो साफ हो गई है कि चीन अब भारत से डरने लग गया है इतना ही नहीं 30 अगस्त की रात पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर जो कुछ घटनाक्रम हुआ उसके बाद चीन सरकार ने गत 70 साल के इतिहास में यह पहली बार कहा है कि भारत की सेना ने चीन की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की है जबकि अब से  पहले 70 साल के इतिहास में यही सुनने को मिल रहा था कि चीन की सेना ने भारत की सीमा में घुसपैठ का प्रयास किया है या घुसपैठ कर ली है लेकिन गत 30 अगस्त की रात के बाद चीन भी यह समझ चुका है कि भारत अब आक्रामक हो गया है यही वजह है कि चीन ने भारत की सेना पर उंगली उठाते हुए यहां तक कह दिया कि भारत की सेना ने चीन की सीमा में घुसने का प्रयास किया जबकि 30 अगस्त की रात ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था क्योंकि दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपस में किसी भी तरह की झड़प नहीं हुई थी हालांकि चीन सेना के मंसूबों को भारत की सेना ने पहले ही समझ लिया था जिसकी वजह से भारत की सेना पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर चीन की सेना से काफी ऊंचाई पर पहले से ही पहुंच गई थी जिसकी वजह से चीन की सेना अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाई क्योंकि चीन की सेना नीचे के इलाके में मौजूद थी चीन की सेना को यह अहसास नहीं था कि भारत की सेना उसके ऊपर के इलाके में पहले से ही मौजूद है लेकिन बाद में जब चीन की सेना को यह पता चला कि भारत की सेना उनसे काफी ऊंचाई पर पहले से ही मौजूद है तो फिर भी चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए क्योंकि उन्हें यह पता था कि वे जिस पोजीशन में हैं उस पोजीशन में वे भारत की सेना का मुकाबला नहीं कर सकते इसलिए चीन सेना के सारे मंसूबे धरे के धरे रह गए और भारत की सेना ने एक बड़ी रणनीतिक जीत हासिल कर चीन सेना के अधिकारियों को चौंका दिया भारतीय सेना की इस तरह की रणनीतिक जीत को चीन बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने पहली बार अपने मुंह से यह कहा कि भारत की सेना में चीन की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की जबकि भारतीय सेना ने वास्तव में ऐसा कुछ किया ही नहीं था क्योंकि पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर की ऊंचाई पर भारतीय सेना जिस जगह पर तैनात थी वह जगह भारतीय सीमा में ही आती है हां अगर 30 अगस्त की रात भारतीय सेना उस जगह पर तैनात नहीं होती तो शायद चीन की सेना कोई बड़ा गेम खेल जाति और अपने मंसूबों में कामयाब भी हो जाती लेकिन गत कुछ सालों से जिस तरह से चीन की ओर से भारत में घुसपैठ की प्रयास किए जा रहे हैं और गत दो माह पहले गलवान घाटी में चीन की सेना ने भारत की सेना को उकसा कर अघोषित युद्ध किया उसके बाद भारत सरकार और भारतीय सेना दोनों ही चीन को लेकर काफी सजग और चौकस हो गए हैं और चीन को उसी के अंदाज में और लहजे में शिकस्त देने के लिए अपनी ओर से तमाम तरह के प्रबंध और उपाय भी किए हैं इसके अलावा एलएसी पर भारत की सेना ने चौकसी बढ़ा दी है हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों से भारतीय वायु सेना दिन रात गश्त करने में व्यस्त है यही वजह है कि गत 30 अगस्त की रात चीन की सेना ने पे गोंग झील के दक्षिणी छोर पर ऊंचाई के इलाके में घुसपैठ करने का जो प्लान बनाया था वह प्लान कामयाब भारतीय सेना की समझदारी और सूझबूझ से कामयाब नहीं हो पाया अपने प्लान में कामयाब नहीं होने से परेशान होकर चीन ने यहां तक कह दिया की 30 अगस्त की रात पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर भारत की सेना ने घुसपैठ करने की कोशिश की कुल मिलाकर अब यह कहा जा सकता है कि चीन सरकार और चीन सेना दोनों ही भारत की ताकत को पहचान चुके हैं दोनों को अब पक्का भरोसा हो गया है कि भारत पहले जैसा देश नहीं रह गया है अगर उसने थोड़ी सी भी गलती की तो भारत पलट कर ऐसा जवाब देगा जैसे उसने कुछ माह पहले पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करके दिया था गत 30 अगस्त के घटनाक्रम को लेकर आजकल चीन की मीडिया में भी खूब हो हल्ला मचा हुआ है चीन का मीडिया चीन सरकार को गाइड करने में लगा हुआ है चीन के सबसे बड़े अखबार ग्लोबल टाइम्स ने साफ कहा है कि चीन को अब मजबूती के साथ भारत को जवाब देना चाहिए जिसका सीधा सा मतलब यही निकल रहा है ग्लोबल टाइम्स ने चीन को भारत से युद्ध करने की सलाह दी है कहने का मतलब भारतीय सेना की पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर हुई एक छोटी सी रणनीतिक जीत को लेकर खलबली सी मची हुई है वैसे भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालत आजकल चीन में काफी खराब होती जा रही है एक तरफ चीन की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह से बिगड़ गई है तो दूसरी तरफ दुनिया भर के अधिकांश देश कोरोना और चीन की विदेश नीतियों को लेकर चीन से बेहद गुस्से में है भले ही चीन के पास ताकतवर देश का दर्जा हो लेकिन अब चीन पहले जैसा देश नहीं रह गया है चीन के अंदर आंतरिक गतिरोध जबरदस्त बना हुआ है चीन में 140 करोड लोग रहते हैं जिनके खाने पीने की व्यवस्था करना चीन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है पहले अमेरिका से चीन भारी मात्रा में खाद्यान्न आयात कर लिया करता था लेकिन अब अमेरिका से दुश्मनी मोल लेने के बाद चीन अपने देश के लोगों के लिए खाद्यान्न जुटाने के लिए भी जूझ रहा है चीन के कई बड़े बैंक दिवालिया हो गए हैं इन बैंकों ने चीन सरकार के कहने पर कई छोटे-छोटे देशों को भारी मात्रा में कर्जा दे दिया था चीन सरकार छोटे-छोटे देशों को पैसा उधार देकर उन्हें अपने प्रेशर में लेने का प्रयास किया था लेकिन अब जिन देशों ने चीन से पैसा उधार लिया था वह अब कोरोना की वजह से पैसा वापस नहीं लौटा पा रहे जिसकी वजह से चीन के कई बैंक दिवालिया हो गए हैं भारत सहित दुनिया के अनेक देशों ने चीन से विभिन्न सामानों का आयात करना बंद कर दिया है जिसकी वजह से चीन को काफी मात्रा में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है इन तमाम हालातों के चलते चीन के वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग अंदर ही अंदर काफी परेशान हैं और वे चीन के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ले देकर भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दे को जोरो से उछाल देते हैं ताकि चीन के लोग अपने अंदर के झगड़ों और अपने अंदर की समस्याओं को भूल जाएं और राष्ट्रीय मुद्दे को ध्यान में रखते हुए सरकार के समर्थन में खड़े हो जाएं इसी सोच के साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आजकल आए दिन कोई न कोई किसी ना किसी बहाने से भारत से उलझने का प्रयास करते रहते हैं लेकिन गत 30 अगस्त की रात की घटना के बाद चीन सरकार और चीन सेना दोनों को ही आभास हो गया है कि भारत अब पूरी तरह से पलटवार करने के लिए तैयार बैठा हुआ है यही वजह है कि चीन के बड़े अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीन सरकार को साफ कह दिया है कि वह भारत के साथ मजबूती से पेश आएं इसके अलावा ग्लोबल टाइम्स यह भी लिखता है कि चीन के पास भारत से ज्यादा सैन्य शक्ति और औजार हैं और युद्ध हुआ तो भारत को 1962 से भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है कहने का मतलब ग्लोबल टाइम्स ने एक तरह से चीन सरकार को भारत से अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध करने के लिए कह दिया है लेकिन सच्चाई यह भी है कि चीन सरकार यह जानती है कि भारत से युद्ध हुआ तो यह युद्ध चीन की तबाही का भी बड़ा कारण बन सकता है क्योंकि वर्तमान परिपेक्ष में दुनिया भर के कई देश चीन के खिलाफ हैं इसके अलावा चीन के आर्थिक हालात भी बुरी तरह से बिगड़े हुए हैं ऐसे में चीन भारत से युद्ध करने की गलती शायद नहीं करेगा।
-रामेश्वरलाल जाट,
संपादक,
मों. नं.- ७०१४२१७७७०

न्यूज़ चैनल पर रिया चक्रवर्ती के घडिय़ाली आंसू देशवासियों के दिल को नहीं पिघला पाए


पूरे देश की निगाहें आजकल बॉलीवुड स्टारसुशांत केस की सीबीआई जांच पर टिकी हुई है यह केस आज दिन की तारीख में देश का सबसे हाई प्रोफाइल केस बना हुआ है प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रोजाना इस मामले से जुड़ी हुई खबरें प्रसारित हो रही है और हर कोई सीबीआई जांच के पूरी होने का बेताबी से इंतजार करता दिख रहा है इस केस में रिया चक्रवर्ती मुख्य आरोपी है पटना में सुशांत के पिता ने अपनी एफआईआर में रिया चक्रवर्ती को ही मुख्य आरोपी बताया है हालांकि रिया चक्रवर्ती पर लगाए गए आरोप फिलहाल साबित नहीं हुए हैं क्योंकि सीबीआई की जांच अभी जारी है लेकिन इस प्रकरण में रिया की भूमिका को लेकर न केवल सुशांत के पिता उनकी बहने और उनके निकट के रिश्तेदार उंगली उठाए हुए हैं बल्कि सुशांत के लाखों प्रशंसकों में से अधिकांश ऐसे हैं जो यह मान रहे हैं कि सुशांत ने आत्महत्या नहीं की है वे किसी साजिश का शिकार हुए हैं इसलिए सुशांत के लाखों प्रशंसक भी रिया को इस प्रकरण मेंसंशय की दृष्टि से देख रहे हैं लेकिन इन सबके बीच हाल ही में देश के एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल ने करीब 2 घंटे का रिया का जो इंटरव्यू अपने चैनल पर प्रसारित किया है उस इंटरव्यू को लेकर आजकल प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में घमासान मचा हुआ है इसके अलावा देश के नागरिकों में भी इस इंटरव्यू को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही है देश का एक बड़ा वर्ग इस इंटरव्यू के प्रसारित किए जाने पर गहरी आपत्ति जता रहा है कई प्रबुद्ध जन लोग भी इस इंटरव्यू को गलत बता रहे हैं भारतीय प्रेस परिषद ने भी इस इंटरव्यू को गलत बताया है और देश के लाखों लोगों ने सोशल मीडिया पर इस इंटरव्यू को पूरी तरह से डिसलाइक किया है कहने का मतलब जिस प्रतिष्ठित चैनल ने देश की जनता में वाह वाही लूटने और अपनी टीआरपी रेटिंग को बढ़ाने के लिए रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू प्रसारित किया उस टीवी की कार्यशैली पर अब देश के लोगों ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है यह चैनल कोई छोटा मोटा चैनल नहीं था बल्कि देश का एक बड़ा वर्ग इस चैनल को देखता है लेकिन रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू प्रसारित करने के बाद इस चैनल के प्रति देश के लोगों का विश्वास कमजोर हुआ है काफी हद तक लोगों का इस चैनल से नाराज होना वाजिब भी लगता है क्योंकि रिया चक्रवर्ती छोटे-मोटे केस की आरोपी नहीं है बल्कि वे उस केस की प्रमुख आरोपी हैं जिस पर महाराष्ट्र सरकार और बिहार सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है इस केस पर मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है इसके अलावा सीबीआई की जांच पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई है ऐसे में एक हाई प्रोफाइल केस के प्रमुख आरोपी का देश के एक प्रतिष्ठित चैनल पर इंटरव्यू प्रसारित होना किसी भी लिहाज से ठीक नहीं कहा जा सकता यही वजह है कि भारतीय प्रेस परिषद ने भी इस इंटरव्यू को ठीक नहीं माना क्योंकि न्यूज़ चैनल के पत्रकार ने रिया से जो सवाल किए और उन सवालों का जो जवाब रिया ने दिया उससे हर कोई यह जल्दी से ही समझ गया कि यह इंटरव्यू प्लानिंग के तहत लिया गया है क्योंकि पत्रकार ने ऐसे कोई सवाल पूछा ही नहीं जिसका जवाब रिया के पास ना हो रिया ने जवाब देते समय देशवासियों की हमदर्दी हासिल करने के लिए अपने चेहरे का हाव भाव पूरे इंटरव्यू में ऐसा बनाए रखा कि उसे बेवजह इस केस में फसाया जा रहा है यहां तक कि इंटरव्यू के दौरान रिया की आंखों में आंसू भी दिख रहे थे लेकिन अब जमाना और लोग इतने बदल चुके हैं कि उन्हें घडिय़ाली आंसू पहचानने में देर नहीं लगती जैसे ही न्यूज़ चैनल पर यह इंटरव्यू समाप्त हुआ सोशल मीडिया में रिया के इस इंटरव्यू को लेकर कई तरह के कमेंट से आने लगे और बड़ी संख्या में लोग इस इंटरव्यू को नापसंद करते हुए न्यूज़ चैनल की कार्यशैली पर ही सवालिया निशान लगाने लगे लोगों को यह समझने में बिल्कुल भी देर नहीं लगी कि रिया चक्रवर्ती के वकील ने अपना दिमाग लगाते हुए न्यूज़ चैनल का इस्तेमाल किया और इस केस में देशवासियों की हमदर्दी हासिल करने तथा सीबीआई के जांच अधिकारियों का ध्यान भटकाने के लिए सीबीआई के जांच अधिकारियों पर नैतिक दबाव डालने के लिए न्यूज़ चैनल के माध्यम से पूरी प्लानिंग के तहत रिया का इंटरव्यू प्रसारित करवाया है इंटरव्यू लेना और इंटरव्यू प्रसारित करना गलत नहीं है लेकिन जरूरी यह होता है कि इंटरव्यू लेने वाला और इंटरव्यू देने वाला इमानदारी से अपना काम कर रहा है या नहीं अगर इंटरव्यू लेने वाला और इंटरव्यू देने वाला दोनों ईमानदार नहीं है तो फिर इंटरव्यू का कोई मतलब नहीं रह जाता और जब देशवासियों ने न्यूज़ चैनल पर रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू देखा और सुना तो उन्हें यह लगा कि यह इंटरव्यू महज ढकोसला है इसमें इंटरव्यू लेने वाला और इंटरव्यू देने वाला दोनों ही ईमानदार नहीं दिख रहे हो इसलिए रिया का संपूर्ण इंटरव्यू देखने और सुनने के बाद कुछ ही घंटों में देश के करीब 500000 लोगों ने इस इंटरव्यू को पूरी तरह से डिसलाइक कर दिया दर्शकों को लगा कि रिया चक्रवर्ती ने खुद को पाक साबित करने के लिए तथा देश की हमदर्दी बटोरने के लिए जानबूझकर यह इंटरव्यू चैनल पर प्रकाशित करवाया है अब सवाल यह पैदा होता है कि क्या न्यूज़ चैनल के लिए रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू लेना वर्तमान हालातों में ठीक था देखा जाए तो मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए न्यूज़ चैनल को रिया चक्रवर्ती का इंटरव्यू प्रसारित ही नहीं करना था क्योंकि रिया एक ऐसे केस की मुख्य आरोपी हैं। 
जिसके इस पर भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के उन देशों में जहां सुशांत के प्रशंसक रह रहे हैं उन सब की इस केस की जांच पर निगाहें टिकी हुई है हर कोई फेयर जांच की मांग कर रहा है हर कोई यह जानने का प्रयास कर रहा है कि आखिर क्यों सुशांत जैसे जिंदादिल इंसान ने मौत को गले लगाया अधिकांश लोग इस मामले को हत्या से जोड़कर देख रहे हैं तो अधिकांश यह सोच रहे हैं कि किसी ने सुशांत को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना कमजोर और परेशान कर दिया था कि उसने परेशान होकर मौत को गले लगाया अब जब इस मामले की सीबीआई जांच तेजी से चल रही है इस बीच  मुख्य आरोपी का 2 घंटे तक न्यूज़ चैनल पर इंटरव्यू प्रसारित करवा देना क्या सीबीआई जांच को बाधित करने का प्रयास नहीं दिख रहा चाहे अपराधी छोटा हो या बड़ा वह कभी भी जल्दी से अपना गुनाह कबूल नहीं करता वह हमेशा खुद को सत्यवान राजा हरिश्चंद्र समझता आया है और यही बात 2 घंटे तक चले रिया चक्रवर्ती के इंटरव्यू में देखने को मिली जिसमें इंटरव्यू लेने वाले शख्स ने भी रिया के प्रति हमदर्दी दिखाने में पूरी दिलेरी दिखाई उन्होंने ऐसा कोई सवाल पूछा ही नहीं जिसमें रिया को बेचैनी हो और वह खुद को सवाल से घिरी हुई समझे इसलिए उसने बड़े सहज सरल तरीके से आंखों में आंसू लिए हुए हर सवाल का जवाब दिया यह सोच कर कि देश के लोग उसके समर्थन में खड़े होंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं देश के अधिकांश लोगों ने रिया चक्रवर्ती के इस इंटरव्यू को पूरी तरह से नकारा है रिया के इंटरव्यू को नकार कर लोगों ने साफ संदेश देकर यह बताने का प्रयास किया है कि उन्हें बनावट इंटरव्यू पसंद नहीं है उन्हें वही इंटरव्यू पसंद है जो ईमानदारी से लिए गए हो और इमानदारी से दिए गए हो अगर कल को कोई टीवी चैनल माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम का लंबा चौड़ा इंटरव्यू प्रसारित करें और उस इंटरव्यू में दाऊद खुद को भला मानुस साबित करने की कोशिश करें इंटरव्यू में रोए और खुद को यह बताने का प्रयास करें कि उन्हें बेवजह माफिया डॉन बताया गया है तो क्या देश के लोग उस इंटरव्यू को पसंद करेंगे हालांकि दाऊद का इंटरव्यू प्रसारित करने से भले ही कुछ समय के लिए उस चैनल की टीआरपी रेटिंग में बढ़ोतरी हो जाए लेकिन उक्त चैनल के प्रति लोगों की विश्वसनीयता में कमी जरूर आ जाएगी क्योंकि आजकल पत्रकारिता में कई ऐसे लोग शामिल हो गए हैं जिनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना है उनकी प्राथमिकता में पैसा पहले और पत्रकारिता बाद में इसलिए लोग न्यूज़ चैनल पर दाऊद का इंटरव्यू देखने के बाद यही सोचेंगे कि दाऊद इब्राहिम ने प्लानिंग के तहत अपना यह इंटरव्यू प्रसारित करवाया है कहने का मतलब रिया चक्रवर्ती इस समय देश के सबसे बड़े चर्चित केस की मुख्य आरोपी है इसलिए अव्वल तो किसी चैनल को उनका 2 घंटे तक का इंटरव्यू प्रसारित करना ही नहीं था और अगर प्रसारित भी करना था तो इंटरव्यू के प्रति पूरी इमानदारी बरतनी चाहिए थी लेकिन जिस तरह से देश के लोगों ने इस इंटरव्यू को नकारा है उससे जाहिर होता है कि देश के लोग सोच रहे हैं यह इंटरव्यू इमानदारी से नहीं लिया गया यही वजह है कि आजकल लोग पत्रकारिता पर भी उंगली उठाने लगे हैं जो लोग सच्चाई से पत्रकारिता के काम को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं उन्हें भी लोग संशय की दृष्टि से देखने लगे हैं

                                      रामेश्वर लाल जाट
 

अगर दाऊद इब्राहिम भारत आ गया तो कई वीवीआईपी लोगों की खुल जाएगी पोल


जयपुर टाइम्स
यह सच है अगर भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम को भारत लाने में कामयाब हो गई और जांच एजेंसियों की ओर से दाऊद से पूछताछ की गई तो दाऊद के मुंह से निकले बोल देश में रह रहे कई वीवीआईपी लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ा सकते हैं क्योंकि वे यह जानते है कि दाऊद को इतना बड़ा खूंखार अपराधी बनाने में उन्होंने भी उसका उस समय काफी सहयोग किया था इसमें कोई दो राय नहीं भारत में रह रहे कई लोग यह नहींचाहते  कि दाऊद इब्राहिम जिंदा भारत को मिले क्योंकि उन्हें यही डर सता रहा है अगर दाऊद ने उनकी भूमिका के बारे में सच्चाई उगल दी तो फिर उनके रास्ते भी जेल की ओर जाते नजर आएंगे इसलिए यह तमाम लोग यही सोच रहे हैं कि दाऊद कभी भारत को मिले ही नहीं हालांकि इस समय देश के शासन की बागडोर एक मजबूत व्यक्ति के हाथों में है अगर वह सोच ले तो निश्चित रूप से दाऊद भारत के कब्जे में भी आ सकता है अब जिस तरह से दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तान के कराची शहर मेंअपने परिवार सहित रहने की पुख्ता जानकारी सार्वजनिक हुई है जिसमें दाऊद कराची में सेना के अधिकारियों के निवास स्थान वाले इलाके में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच बड़े मजे से रह रहा है उसकी जानकारी भारत सहित दुनिया भर के देशों को अब मिल गई है हालांकि भारत को गत कई सालों से यह दावा करता हुआ आ रहा है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान सरकार की शरण में पाकिस्तान में ही छुपा हुआ है लेकिन पाकिस्तान की ओर से दाऊद के बारे में साफ इंकार कर देने की वजह से दाऊद की भारत में वापसी नहीं हो पा रही थी लेकिन भारत अब निश्चित रूप से दाऊद को अपने कब्जे में लेने के लिए अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा क्योंकि पीएम मोदी आतंकवादियों औरखूंखार अपराधियों को लेकर काफी सख्त हैं खासतौर से दाऊद इब्राहिम अजहर महमूद जैसे आतंकवादियों को उनके किए की सजा दिलाने के लिए वे सरकारी स्तर पर कोई भी कमी बाकी नहीं छोड़ेंगे क्योंकि दाऊद इब्राहिम ने मुंबई में सिलसिलेवार बम ब्लास्ट करवा कर 257 लोगों की जो जान ली थी और 800 लोग घायल हुए थे उस दर्दनाक और भयावह मंजर को न तो कोई भारतीय आज तक भूल पाया है न देश की सरकारें हो हालांकि भारत सरकार यह भली-भांति जानती है कि पाकिस्तान राजी खुशी दाऊद को भारत को सुपुर्द नहीं करेगा इसलिए भारत सरकार की पहली कोशिश यही रहेगी कि कानून के हिसाब से अंतरराष्ट्रीय दबाव डालकर दाऊद को कब्जे में किया जाए इसके लिए हो सकता है आने वाले दिनों में भारत सरकार इस मामले को आईसीजे में भी ले जाए लेकिन सच्चाई यह भी है कि भारत में ही रह रहे कई राजनेता कई बड़े पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दाऊद की वापसी चाहते ही नहीं है क्योंकि उन्हें यह डर सताता है अगर जांच एजेंसियों की पूछताछ में दाऊद ने सच सच उगल दिया तो फिर पूरा देश उनके वास्तविक चरित्र को पहचान लेगा और वे ठीक तरह से भारत में जी नहीं सकेंगे यह सब जानते हैं कि माया नगरी मुंबई में दाऊद ने जिस समय अपराध की दुनिया में पांव रखा था उस समय वह महज एक मामूली इंसान था एक डरपोक इंसान था उसका फैमिली बैकग्राउंड भी बेहद कमजोर था लेकिन कुछ ही सालों के भीतर साधारण सा दिखने वाला यह शख्स मुंबई में अपराध जगत की दुनिया का बड़ा डॉन बन गया यह सच है अगर उस समय मुंबई पुलिस और मुंबई सरकार इस खूंखार अपराधी के खिलाफ सख्त कदम उठा लेती और इसके काले कारनामों तथा इसकी गुंडा गैंग को खत्म कर देती तो वह आगे चलकर इतना बड़ा माफिया डॉन नहीं बनता लेकिन चाहे इसे मुंबई पुलिस की मिलीभगत कहें या फिर राजनीतिक संरक्षण एक साधारण से डरपोक इंसान ने जिस तरह सेकुछ ही सालों में अपने अफीम ड्रग्स चरस गांजा जैसे काले धंधों की मार्फत करोड़ों अरबों रुपए कमाने लगा बल्कि मुंबई के बॉलीवुड जगत को भी उसने अपने कब्जे में कर लिया उस समय अधिकांश फिल्मों में दाऊद का ही पैसा निवेश होता था दाऊद के कहने पर ही निर्माता और निर्देशक अभिनेता अभिनेत्रियों का चयन किया करते थे कहने का मतलब करोड़ों अरबों रुपए कमाने के साथ-साथ दाऊद की गुंडा गैंग का जाल भी तेजी से फैल रहा था मुंबई में मकान खाली कराना दुकान खाली कराना धन्ना सेठों से हफ्ता वसूली जैसे काले कारनामों की वजह से पूरी मुंबई पर दाऊद का एक छत्र राज हो गया था अगर उस समय मुंबई पुलिस चाहती और इमानदारी से अपना काम करती तो क्या उस समय मुंबई में दाऊद का कारोबार इतनी तेजी से आगे बढ़ता लेकिन दाऊद पैसा लुटाता रहा और अपना काला कारोबार तेजी से आगे बढ़ाता रहा इस काम में रसूखदार राजनेताओं ने भी दाऊद का खूब साथ दिया जिसकी वजह से दाऊद का काला कारोबार मुंबई से निकलकर पहले भारत के अन्य राज्यों में और फिर भारत की सीमा को लांग कर दुनिया के अनेक देशों में फैल गया कहने का मतलब दाऊद शुरू में अपराध की दुनिया का एक छोटा सा मामूली पौधा था लेकिन इस पौधे को खाद बीज पानी उपलब्ध करवाने में पुलिस प्रशासन राजनेताओं सभी ने अपनी अहम भूमिका अदा की जिसकी वजह से अपराध की दुनिया का यह मामूली सा पौधा आगे चलकर एक बड़ा वटवृक्ष बन गया जिसे गिराने में भारत सहित दुनिया के कई देशों को अब तक नाकामी ही हाथ लगी है 1993 में मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके करवाने के बाद यह माफिया डॉन मुंबई छोड़कर पहले दुबई भाग गया और फिर दुबई से ही कई सालों तक अपने काले कारोबार को दुनिया भर में फैलाता रहा इसके बाद वह पाकिस्तान में जाकर पाकिस्तान सरकार की मेजबानी में अपने परिवार के सदस्यों के साथ ऐशो आराम की जिंदगी जीने लगा उसके पासपैसों की कोई कमी नहीं है हजारों करोड़ों रुपए का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है पैसों के दम पर पाकिस्तान सरकार को भी अपने प्रभाव में लिए हुए हैं दाऊद का पूरा परिवार काले कारोबार में लिप्त है दाऊद ने अपने परिवार के सदस्यों को अपने काले कारोबार को अलग अलग हिस्सों में बांटा हुआ है पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से दाऊद के गत कई सालों से दोस्ताना बना हुआ है वजह यही है कि दाऊद भारत को अपना दुश्मन मानता है और आईएसआई भारत के दुश्मनों को अपना दोस्त मानती है यही वजह है कि गत कई सालों से दाऊद पाकिस्तान में मजे की जिंदगी जी रहा है 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट कांड में दाऊद मुख्य आरोपी है करीब 22 साल तक मुंबई बम ब्लास्ट कांड मामला कोर्ट में चलता रहा बाद में कोर्ट के फैसले के बाद मुंबई बम ब्लास्ट कांड से जुड़े अपराधियों में से कुछ को फांसी पर लटका भी दिया गया है लेकिन मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम को जब तक भारत सरकार सजा नहीं दिलवा आएगी तब तक प्रत्येक भारतीय की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी यह सच है भारत में धार्मिक कट्टरता फैलाने में हिंदू और मुसलमानों में दूरियां करने में दाऊद का बड़ा हाथ था दाऊद ने मुंबई में जो बम धमाके करवाए थे उसका मुख्य कारण यही था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद दाऊद हिंदुओं का कट्टर दुश्मन बन गया था जिसके चलते छोटा राजन जो कभी दाऊद का बाया हाथ हुआ करता था उसने भी दाऊद की धार्मिक कट्टरता और हिंदुओं के प्रति उसके नफरत को देखते हुए उसने दाऊद से किनारा कर लिया था वर्तमान में दाऊद का काला कारोबार लंदन ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान यूएई मोरक्को कनाडा सहित कई देशों में फैला हुआ है हालांकि दाऊद की ताकत अब पहले जैसी नहीं रह गई है उसकी उम्र भी काफी हो गई है और भारत अमेरिका जैसे देशों की कार्रवाई के डर से वह खुद को अपने कराची के घर तक ही सीमित किए हुए है वह बहुत ही कम मौकों पर भेष बदलकर घर से बाहर निकलता है जब से भारत में शासन की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथों में आई है और पीएम बनने के बाद मोदी ने जिस तरह से जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाया है उसके बाद दाऊद इब्राहिम को यह डर सताने लगा है कि अमेरिका ने जिस तरह से लादेन का सफाया किया था वैसा ही सफाया कहीं भारत उसका न कर दे इसलिए वह कराची में अपने घर में ही रहता है लेकिन इन दिनों मीडिया में जिस तरह से दाऊद के कराची के घर के पते दाऊद और उनके परिवारजनों के बैंक अकाउंट की लिस्ट दाऊद और उनके परिवार वालों के पासपोर्ट सार्वजनिक हुए हैं उसके बाद भारत सरकार पूरी ताकत से दाऊद को भारत लाने के प्रयास में जुटती दिख रही है हालांकि उन लोगों को जरूर बेचैनी हो रही है जिन्होंने पहले शुरुआती दिनों में दाऊद का साथ दिया था क्योंकि वे यह जानते हैं दाऊद सच्चाई उगल देगा तो उनकी और उनके बच्चों की जिंदगी भी नरक बन जाएगी।                             -रामेश्वर लाल जाट

खुद के स्वास्थ्य की चिंता किए बिना पहले की तुलना में 3 गुना ज्यादा सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं गहलोत


गत दिनों जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में करोड़ों रुपए की विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया था उसी रात रात गहलोत को बुखार आ गया था और चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी लेकिन गहलोत ने चिकित्सकों की सलाह को दरकिनार करते हुए अगली सुबह फिर से अपने सरकारी कामकाज में जुट गए उन्होंने अपने स्वास्थ्य की चिंता करने के बजाए प्रदेश के लोगों की समस्याओं को हल करना और प्रदेश के विकास को पहली प्राथमिकता दी जो यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी जिम्मेवारी को कितनी इमानदारी से और निष्ठा से निभाते हैं अन्यथा गहलोत की जगह अगर और कोई होता तो वह चिकित्सकों की सलाह पर आराम जरूर फरमाता सबसे अहम बात यह है कि अगर गत 5 माह में सीएम गहलोत की दिनचर्या की बारीकी से समीक्षा करें तो एक बात खुलकर सामने आ रही है कि गत 5 माह में सीएम गहलोत ने सरकारी कामकाज करने की अपनी क्षमता को पहले की तुलना में 3 गुना ज्यादा बढ़ा लिया है प्रदेश में कोरोना के दस्तक देने से पहले और प्रदेश में कोरोना के दस्तक देने के बाद गहलोत की दैनिक दिनचर्या को खंगाले तो गहलोत की दिनचर्या पहले की तुलना में काफी बदल गई है गहलोत सुबह से लेकर देर रात तक सरकारी कामकाज में जुटे रहते हैं गहलोत ने कोरोना की अवधि में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जितने सरकारी कामकाज निपटाए हैं शायद ही देश के किसी मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी संख्या में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कामकाज निपटाया हो, गहलोत रोजाना कोरोना के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चिकित्सा विभाग जिला प्रशासन पुलिस सहित अनेकों विभागों के अधिकारियों से नियमित रूप से बातचीत कर कोरोना समीक्षा तो करते ही हैं, इसके अलावा प्रदेश के विकास का पहिया नहीं थमे इसके लिए वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही प्रदेश भर में विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण उद्घाटन करते हुए दिख रहे हैं भले ही भारतीय जनता पार्टी गहलोत सरकार पर प्रदेश में विकास काम नहीं होने का आरोप लगा रही हो लेकिन जितनी तादाद में हाल ही में प्रदेश में गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न तरह की विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है उससे भाजपा का आरोप काफी हद तक अपने आप ही झूठा साबित होता भी दिख रहा है इसमें कोई दो राय नहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से योजनाओं का शिलान्यास लोकार्पण और उद्घाटन करने से एक और पैसा और समय की बचत होती है वही पुलिस और जिला प्रशासन के लोगों को भी ज्यादा भागदौड़ करनी नहीं पड़ती क्योंकि सीएम के दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस को भी काफी भागदौड़ करनी पड़ जाती है इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेशिलान्यास और लोकार्पण जैसे कार्यक्रमों के आयोजनों में खर्चा भी ज्यादा नहीं होता इसलिए कोरोना की अवधि में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करना तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही प्रदेश भर के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ विभिन्न सरकारी विभागों के कामों की समीक्षा करने से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्य क्षमता में पहले की तुलना में 3 गुना ज्यादा वृद्धि हो गई है गहलोत पहले की तुलना में कम से कम 3 गुना ज्यादा सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं एक ही दिन में अनेकों विभागों की जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा कर लेते हैं वही अपने हाथों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोकार्पण और शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों का भी शुभारंभ कर देते हैं एक ही जगह पर एक ही समय में कई तरह के कार्यक्रमों की शुरुआत होने से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कीमती समय की बचत तो होती ही है इसके अलावा बेफिजूल खर्चा भी नहीं होता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जो समय बसत है उस समय का सदुपयोग गहलोत किसी दूसरे काम में कर लेते हैं जिसकी वजह से एक ही दिन में पहले की तुलना में आजकल 3 गुना ज्यादा सरकारी कामकाज गहलोत की ओर से निपटाया जा रहा है जो वास्तव में प्रदेश की जनता के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरकारी कामकाज निपटाने से समय और पैसा दोनों की बचत हो जाती है इसलिए वे एक ही दिन में ज्यादा से ज्यादा सरकारी कामकाज निपटाने का प्रयास करते हैं यह सच है जब से प्रदेश में कोरोना ने दस्तक दी है सीएम गहलोत ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ प्रदेश की जनता की तकलीफों को हर संभव दूर करने का प्रयास किया है इसके अलावा कोरोना की रोकथाम और कोरोना के मरीजों के उपचार में भी किसी तरह की कोई कमी बाकी नहीं छोड़ी है गहलोत की पहली प्राथमिकता यही है कि प्रदेश में लोगों का जीवन और आजीविका बचाई जाए तथा प्रदेश से कोरोना का जड़ से सफाया हो इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए वे गत 5 माह से अपना काम कर रहे हैं गहलोत यह जानते हैं कि कोरोना की वजह से प्रदेश के लोगों के सामने कई तरह की विकट समस्याएं खड़ी हो गई है कोरोना की वजह से लोग मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हैं सरकारी मशीनरी से जुड़े लोग भी कोरोना के साए में हर पल खुद को असुरक्षित महसूस कर अपना काम निपटा रहे हैं इन तमाम विकट परिस्थितियों के बीच गहलोत जिस तरह से तमाम सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का हौसला बढ़ाते हुए एक श्रेष्ठ कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं वह काबिले तारीफ है खुद के स्वास्थ्य की चिंता किए बिना कोरोना के खौफ में किसी सीएम का इस तरह से सुबह से लेकर शाम तक बड़े पैमाने पर सरकारी कामकाज निपटाना कोई आसान काम नहीं है गहलोत ने एक ही दिन में ढेरों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की है और प्रत्येक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में देर तक अधिकारियों से बातचीत करते रहते हैं इतने काम के वजन को वे कैसे और किस तरह से सह लेते हैं खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर लेते हैं इन सवालों का जवाब तो खुद गहलोत ही दे सकते हैं सीएम गहलोत भी आम इंसान की तरह हैं उनका भी परिवार है उनके ऊपर भी कोरोना का साया हर पल मंडराता रहता है इसके बावजूद भी उन्होंने अपने काम करने की क्षमता को जिस तरह से तेजी से बढ़ाया है और खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से और भी मजबूत किया है उससे प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को सबक लेनाचाहिए और कोरोना के खौफ से खुद को उभार कर कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए अपने दैनिक काम निपटाने चाहिए क्योंकि कोरोना आगे कितने लंबे समय तक रहेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को कर्म तो करना ही होगा लेकिन इसके लिए उसे मास्क सैनिटाइजर सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बातों का ध्यान रखते हुए घर से बाहर निकलना होगा क्योंकि जब प्रदेश में शासन का मुखिया खुद अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना अपना कर्म कर रहा है तो फिर प्रजा को भी शासक की तरह अपने दैनिक काम निपटाने होंगे तब ही प्रदेश खुद को कोरोना से पूरी तरह से उभार पाएगा इसमें अकेले प्रदेश सरकार पर निर्भर रहना बिल्कुल ठीक नहीं।
-रामेश्वरलाल जाट, संपादक,
मों. नं.- ७०१४२१७७७०

कांग्रेस में फिल्म गांधी परिवार से शुरू होकर गांधी परिवार पर ही खत्म होती है


यह कोई चौंकाने वाला निर्णय नहीं है कि सोनिया गांधी के पास फिर से कांग्रेस पार्टी की बागडोर हाथ में आ गई है क्योंकि यह पहले से ही दिख रहा था कि कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जब अध्यक्ष पद के चयन की कोई बात उठेगी तो इस अहम पद के लिए गांधी परिवार के अलावा किसी और दूसरे व्यक्ति के बारे में विचार तक नहीं किया जाएगा हालांकि हाल ही में संपन्न हुई कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक पहले की अन्य बैठकों से थोड़ी हटकर नजर आई राहुल गांधी ने सोनिया गांधी को चि_ी लिखने वाले कांग्रेश के नेताओं के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की राहुल के अलावा पार्टी के कई अन्य शीर्ष नेताओं ने भी चि_ी को लेकर गहरा एतराज जताया और चि_ी लिखने वाले नेताओं को भाजपा का एजेंट तक करार दे दिया गया भाजपा का एजेंट बताने से चि_ी लिखने वाले नेताओं का गुस्सा लाजमी था कपिल सिब्बल गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं ने भाजपा के एजेंट शब्द पर कड़ा विरोध जताते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की पेशकश तक कर दी जिससे विवाद को उग्र होता देखकर तथा चि_ी लिखने वाले नेताओं के गरम तेवर देखकर राहुल गांधी ने समझदारी दिखाते हुए इस मामले से थोड़ा खुदपीछे हट गए और फिर उन्होंने कपिल सिब्बल और गुलाम नबी को हाथों-हाथ ही राजी भी कर लिया जिसके चलते जिस तेज गति से चि_ी लिखने का मुद्दा पार्टी की बैठक में उठा था उतनी ही तेज गति से यह मुद्दा राहुल गांधी की दखलंदाजी से शांत भी हो गया लेकिन इस पूरी पिच्चर में यही बात देखने को मिली कि न तो गांधी परिवार का अध्यक्ष पद से मोहभंग हुआ है न ही गांधी परिवार के प्रति कई कांग्रेसी नेताओं का मोह कम हुआ है अभी कई सीनियर नेता ऐसे हैं जो गांधी परिवार के प्रति पूरी निष्ठा और आस्था बनाए हुए हैं और वे गांधी परिवार के अलावा किसी दूसरे व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर देखना ही नहीं चाहते हालांकि जिन नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस पार्टी में आमूलचूल परिवर्तन करने की सलाह दी थी वे तमाम नेता काफी सीनियर नेता थे जिनमें चार-पांच तो पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं चार पांच नेता ऐसे हैं जो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के वर्तमान में सदस्य हैं इन नेताओं ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के आधार पर ही सोनिया गांधी को सलाह दी थी इन नेताओं का पत्र लिखने के पीछे यह मंशा भी नहीं थी कि वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में विश्वास नहीं रखते लेकिन उन्होंने वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की दुर्दशा को देखकर ही शायद पत्र लिखा था इन नेताओं की चिंता को गलत भी नहीं बताया जा सकता क्योंकि आज कांग्रेस पार्टी जिस तरह से दिनोंदिन पूरे देश में अपना जनाधार खोती जा रही है और पार्टी का संगठन कमजोर होता जा रहा है उसे देख कर चि_ी लिखने वाले नेताओं की मंशा पर सवाल उठाना गलत ही कहा जाएगा क्योंकि कांग्रेस पार्टी एक ऐसी पार्टी है जिसने भारत की आजादी में अपनी अहम भूमिका निभाई कांग्रेस पार्टी एक ऐसी पार्टी है जिसने देश को एक से बढ़कर एक नेता दिए हैं और आजादी के बाद भी कई सालों तक कांग्रेस पार्टी ने देशवासियों के दिलों पर राज किया है लेकिन गत करीब डेढ़ दशक से जिस तरह से कांग्रेस पार्टी अपना जनाधार निरंतर तेजी से देश में जा रही है पार्टी के कई कद्दावर और लोकप्रिय नेता पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों का दामन थाम रहे हैं पार्टी का संगठन दिनोंदिन कमजोर होता जा रहा है इन सब हालातों को देखकर सोनिया गांधी को चि_ी लिखने वाले नेताओं को शायद ऐसा लगने लगा था कि कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के संबंध में फैसले ठीक तरीके से नहीं लिए जा रहे कहीं ना कहीं पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व वर्तमान स्थितियों का ठीक तरह से आकलन नहीं कर पा रहा है और पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व वर्तमान और भविष्य के बारे में ठीक तरह से अनुमान नहीं लगा पा रहा है जिसकी वजह से वर्तमान में पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर जो फैसले लिए जा रहे हैं वे फैसले पार्टी को मजबूती देने के बजाय पार्टी को पीछे धकेल रहे हैं इसलिए उन्होंने पार्टी की दुर्दशा को देखकर पार्टी में आमूलचूल परिवर्तन करने की सलाह सोनिया गांधी को दे दी जिसे शायद गांधी परिवार ने यह सोच लिया कि कि उन्हें ललकारा गया है उन्हें चुनौती दी गई है इसलिए राहुल गांधी ने गत दिनों जैसे ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक शुरू हुई उन्होंने चि_ी लिखने वाले नेताओं के खिलाफ अपना गहरा गुस्सा प्रकट कर दिया जबकि होना यह चाहिए था कि अगर पार्टी के कई बड़े सीनियर नेता कोई सलाह और मशविरा दे रहे हैं तो उनके बारे में पार्टी की बैठक में गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी क्योंकि चि_ी लिखने वाले तमाम नेता पार्टी के बड़े चेहरे थे जिन्होंने पार्टी को मजबूत करने में अपनी ओर से कोई कमी बाकी नहीं छोड़ी थी शायद चि_ी लिखते समय इन नेताओं ने यह बिल्कुल भी नहीं सोचा था कि उनकी चि_ी को लेकर इस तरह से पार्टी की बैठक में बवाल मचाया जाएगा उन्होंने सिर्फ अपनी बात और अपने विचार पार्टी के मंच पर रखे थे जो उनका अधिकार भी था और उनका कर्तव्य भी था क्योंकि कांग्रेस पार्टी जो कभी भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी हुआ करती थी जिसका केंद्र में और देश के अधिकांश राज्यों में कई सालों तक दबदबा रहा वह पार्टी आज कुछ गिने-चुने राज्यों तक ही सीमित रह गई ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो अपने घर को बर्बाद होता हुआ देखें अगर कोई घर बर्बाद हो रहा है और घर के जिम्मेदार व्यक्ति ही चुपचाप तमाशा देखते रहे तो फिर वे उस घर के जिम्मेदार व्यक्ति है ही नहीं इसलिए अगर सोनिया गांधी को पार्टी की हालत सुधारने के लिए पार्टी में आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए पार्टी के नेताओं ने अपनी राय दे दी तो इसमें उन्होंने क्या गलत कर दिया यह उनका फर्ज था जो उन्होंने निभाया । कांग्रेस पार्टी में इस तरह के हालातों को देखकर ही पार्टी के नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा और अपनी राय दी लेकिन उसका गलत अर्थ निकाला गया भले ही पत्र लिखने वाले पार्टी के नेता फिलहाल शांत हो गए हो लेकिन ऐसा नहीं लग रहा कि वे हमेशा के लिए शांत हुए हो क्योंकि पत्र लिखने वाले नेता पार्टी के काफी बड़े चेहरे हैं जो गांधी परिवार के प्रति गत कई सालों से गहरी निष्ठा और आस्था भी रखे हुए हैं लेकिन अब जिस तरह से उन्हें पार्टी की बैठक में लज्जित किया गया है और भाजपा का एजेंट तक बता दिया गया है ऐसे आरोप उन्हें अब कांटों की तरह चुप रहे होंगे वे रात में नींद भी ठीक तरह से नहीं ले रहे होंगे इसलिए कांग्रेस पार्टी में अंतर्विरोध की स्थिति अब और तेज होती दिख रही है राजस्थान सहित देश के कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेश पार्टी की प्रदेश इकाइयों में जोरदार मनमुटाव की स्थिति बनी हुई है अब जिस तरह से पार्टी के केंद्रीय नेताओं में भी चि_ी को लेकर विवाद पैदा हुआ है पार्टी के नेता चि_ी को लेकर दो गुटों में बट गए हैं उसे देख कर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है जो उसके अस्तित्व के लिए काफी घातक साबित हो सकती है यह सच है कि स्वर्गीय इंदिरा गांधी स्वर्गीय राजीव गांधी ने देश के विकास और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी को एकजुट बनाए रखने में भी अपनी अहम भूमिका निभाई लेकिन हकीकत यह भी है कि आज कांग्रेश पार्टी पहले जैसी नहीं रह गई है पार्टी के नेता पार्टी के नियम और सिद्धांतों के अनुसार नहीं चल रहे और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है ऐसे हालातों में गांधी परिवार को भी कुछ आगे बढ़ कर सोचना होगा क्योंकि गांधी परिवार ने देश को और कांग्रेस पार्टी को बहुत कुछ दिया है इसलिए गांधी परिवार को पार्टी की छवि को बचाने के लिए और पार्टी को मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए कुछ नए सिरे से मंथन और विचार करने की अहम जरूरत आ पड़ी है अगर पार्टी के सीनियर नेताओं ने पत्र लिखकर पार्टी हाईकमान को पार्टी की बेहतरी के लिए कुछ सुझाव और सलाह दी है तो उसका गलत अर्थ नहीं निकालना चाहिए चि_ी लिखने वाले नेताओं ने सिर्फ आमूलचूल परिवर्तन करने की बात कही थी उन्होंने पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व बदलने की बात नहीं कही थी इसलिए चि_ी लिखने वाले नेताओं की सलाह पर मंथन करना आज समय की मांग है और अगर समय रहते पार्टी के मौजूदा हालातों और देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते भी पार्टी के संगठन में बदलाव नहीं किए गए तो निश्चित रूप से आने वाले दिन कांग्रेस पार्टी के लिए और भी बुरे साबित हो सकते हैं हालांकि यह सच है पूरे देश भर में गांधी परिवार के प्रति निष्ठा रखने वाले कांग्रेश जनों की संख्या अब भी बहुत है कांग्रेसका एक बड़ा धड़ा अध्यक्ष पद पर गांधी परिवार से जुड़े व्यक्ति को ही देखना चाहता है और गांधी परिवार भी अध्यक्ष पद के मोह से खुद को अलग नहीं कर पा रहा तभी तो राजनीतिक हलकों में यही चर्चा है कि कांग्रेसमें फिल्म की शुरुआत गांधी परिवार से शुरू होती है और गांधी परिवार पर ही आकर फिल्म का समापन होता है।
-रामेश्वरलाल जाट, संपादक,
मों. नं.- ७०१४२१७७७०