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सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों पर अडानी गु्रप का खंडन: तीन दशक में कोई भी लोन एनपीए नहीं हुआ, कहा- सभी आंकड़े गलत और काल्पनिक

नई दिल्ली
अडानी ग्रुप ने सत्ताधारी पार्टी भाजपा के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों का खंडन किया है। अडानी ग्रुप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि बीते तीन दशक में ग्रुप का कोई भी लोन नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स नहीं हुआ है। यह हमारा एक निष्कलंक रिकॉर्ड है।
सोशल मीडिया पर जारी किया बयान
सोशल मीडिया पर जारी आधिकारिक बयान में अडानी ग्रुप का कहना है कि हमने सावधानीपूर्वक कॉरपोरेट गवर्नेंस और कैपिटल मैनेजमेंट की प्रक्रिया अपनाते हुए नामचीन इंफ्रास्ट्रकचर असेट्स का निर्माण किया है। इससे हमारी क्रेडिट क्वालिटी लगातार बढ़ी है। अडानी ग्रुप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि स्वामी की ओर से बताए गए आंकड़े गलत और काल्पनिक हैं।
कंपनी का कुल कर्ज एबिटा अनुपात का 4 प्रतिशत से कम
अडानी ग्रुप का कहना है कि हम नेशन-बिल्डिंग के मूल दर्शन पर काम कर रहे हैं। कंपनी का कुल कर्ज एबिटा अनुपात का 4प्रतिशत से कम है जो उच्च क्रेडिट रेटिंग क्वालिटी को प्रदर्शित करता है। लगभग हमारे सभी कारोबार को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू रेटिंग एजेंसियों से उच्च क्रेडिट रेटिंग मिली है।
सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 15 जनवरी को सोशल मीडिया पोस्ट में अडानी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। स्वामी ने कहा था, कलाबाज अडानी पर अब बैंकों का 4.5 लाख करोड़ रुपए का एनपीए है। मुझे सही कीजिए यदि मैं गलत हूं। 2016 से अब तक उनकी वेल्थ हर दो साल में दोगुनी हो रही है। वह बैंकों को पुनर्भुगतान क्यों नहीं करते हैं? हो सकता है कि छह हवाई अड्डों को खरीदने के बाद वह जल्द ही उन सभी बैंकों को खरीद ले जिनसे उसने पैसे लिए हैं।

वॉट्सऐप का विरोध: व्यापारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, नई प्राइवेसी पॉलिसी वापस लेने के लिए निर्देश देने की मांग की

नई दिल्ली
व्यापारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने वॉट्सऐप के खिलाफ शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। संगठन के मुताबिक याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट वॉट्सऐप को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी वापस लेने का निर्देश दे। सीएआइटी ने कहा है कि वॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी लोगों के कई बुनियादी अधिकारों में हस्तक्षेप करेगी। संगठन ने बताया कि याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि केंद्र सरकार वॉट्सऐप जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाए और नागरिकों व व्यवसायों की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए नीति बनाए। याचिका में यूरोपीय संघ और भारत में वॉट्सऐप की प्राइवेसी पॉलिसी के नजरिये में अंतर का भी उल्लेख किया गया है और आशंका जताई गई है कि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां भारतीय उपयोगकर्ताओं के डाटा का दुरुपयोग कर सकती हैं। इस बीच वॉट्सऐप ने नई प्राइवेसी पॉलिसी को लागू करने की समय सीमा को तीन महीने आगे खिसका दिया। 

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की नई प्राइवेसी पॉलिसी का काफी विरोध हो रहा है। इसके कारण इसके लाखों उपयोगकर्ता सिग्नल और टेलीग्राम जैसे इसके प्रतियोगी प्लेटफॉर्म को अपना रहे हैं। वॉट्सऐप की नई पॉलिसी पहले 8 फरवरी से लागू होने वाली थी। अब उसने इसे 15 मई तक के लिए बढ़ा दिया है।

ष्ट्रढ्ढञ्ज ने आईटी मंत्री को भी लिखी थी चि_ी
इससे पहले ष्ट्रढ्ढञ्ज ने शुक्रवार को केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम ने प्राइवेसी नियमों का उल्लंघन किया है। इसलिए इन पर कार्रवाई तुरंत जरूरी है। ट्रेडर्स का कहना था कि कैट की शिकायतों के जवाब में वॉट्सऐप ने मीडिया में विज्ञापन देकर इस मामले पर सफाई देने की कोशिश की, जो गलत है।

क्या है वॉट्सऐप की नई पॉलिसी?
वॉट्सऐप यूजर जो कंटेंट अपलोड, सबमिट, स्टोर, सेंड या रिसीव करते हैं, कंपनी उसका इस्तेमाल कहीं भी कर सकती है। कंपनी उस डेटा को शेयर भी कर सकती है। यह पॉलिसी 8 फरवरी 2021 से लागू हो रही है। पहले दावा किया गया था कि अगर यूजर इस पॉलिसी को 'एग्री' नहीं करता है तो 8 फरवरी के बाद वह अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। हालांकि बाद में कंपनी ने इसे ऑप्शनल बताया था।

2021 में निवेश की स्ट्रैटेजी: मॉर्गन स्टैनली का श्वस्त्र क्षेत्र में निवेश की सलाह, पिछले साल टेक शेयरों ने दिया था मजबूत रिटर्न

मुंबई
दुनियाभर में कोरोना वैक्सीनेशनल के चलते आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना है। इससे अर्थव्यवस्था प्री-कोविड के स्तर तक पहुंच सकता है। मार्केट एनलिस्ट मान रहे हैं कि वैक्सीनेशन के दौरान वैश्विक बाजारों में तेजी है, लेकिन मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि इंडेक्स की तुलना में शेयरों के रिटर्न अधिक रह सकता है। मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि 2020 में स् क्लीन एनर्जी कवरेज और एवरेज एंटरप्राइस मल्टीपल्स करीब 440प्रतिशत ऊपर चढ़ा था। जबकि 2021 में पर्यावरण, सोशल और गवर्नेंस में ज्यादा निवेश की उम्मीद है। इससे सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की गुणवत्ता भी सुधरेगी। ऐसे में निवेशकों को इस सेक्टर पर नजर बनाए रहना चाहिए। कम दाम पर खरीदारी करनी चाहिए।
टेक्नोलॉजी पर खर्च बढ़ा था, इससे टेक कंपनियों में अच्छा निवेश हुआ
2020 में टेक्नोलॉजी पर खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि डिजिटल अडॉप्शन का चलन तेजी से बढ़ा है। इससे टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी फायदा हुआ है। एडम विर्गदमो ने कहा कि 2021 में अवसर है कि निवेशक 2019 की तुलना में 2020 में खर्च के पैटर्न को समझें। क्योंकि 2020 में आर्टिफिशियल इंटोलिजेंस, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल सॉफ्टवेयर में निवेश की मजबूत मांग देखी गई। इससे साफ है कि कंपनियों ने अधिक कुशल बनने और मार्जिन बचाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया। एडम कहते हैं कि यह एक लंबे अवधि की कहानी की शुरुआत भर है।
वी शेप रिकवरी, लेकिन मुश्किलें कम नहीं
मॉर्गन स्टैनली में इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट एडम विर्गदमो ने बताया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्री-कोविड स्तर जैसी स्थिति में पहुंच रहीं हैं। यानी इसमें वी शेप रिकवरी दर्ज की जा रही है, लेकिन आर्थिक मंदी में सुधार के बाद कुछ आर्थिक मुश्किलें भी लौट कर आती हैं। क्योंकि इससे पहले आए मंदी के दौरान ऐसा देखने को मिला था। इसलिए इस बार भी ऐसी ही संभावनाएं बन रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्थिक सुधार के लिए सरकार द्वारा खर्च बढऩे की बढऩे की उम्मीद हैं।

 इसका सीधा असर ऊंचे ब्याज दर और बढ़ती महंगाई के रूप में नजर आ सकता है। इन सब का मतलब यह है कि मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज की जाएगी और इसमें एक्टिव पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

12 बैंकों के साथ साझेदारी: मारुति सुजुकी का ऑन लाइन लोन अब एरेना पर भी, अभी 30 शहरों में होगी इसकी शुरुआत

मुंबई
अगर आप मारुति की कार ले रहे हैं तो आपके लिए एक अच्छी सुविधा शुरू हुई है। मारुति ने अब ऑन लाइन लोन के दायरे को और बढ़ा दिया है। इसकी एरेना गाड़ी खरीदने के लिए आप इस सुविधा का फायदा ले सकते हैं। शुरू में यह सुविधा देश के 30 शहरों में मिलेगी। उसके बाद आगे के शहरों में इसे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए कंपनी ने 12 बैंकों के साथ टाईअप किया है।
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी है मारुति
बता दें कि कार बनाने वाली मारुति देश की सबसे बड़ी कार कंपनी है। उसके इस नए कदम से कार का लोन लेना अब और आसान हो गया है। आप घर बैठे इसे एक क्लिक पर ले सकते हैं। स्मार्ट फाइनेंस नाम से इस प्लेटफॉर्म को चलाया जाता है। कंपनी ने यह जानकारी एक प्रेस रिलीज में दी है। कंपनी ने कहा कि कार खरीदने के 26 स्टेप्स में से 24 को उसने पूरी तरह डिजिटल बना दिया है।
अपने हिसाब से चुन सकते हैं फाइनेंशियल प्रोडक्ट
मारुति सुजुकी का कहना है कि ग्राहक अपने हिसाब से इसमें फाइनेंशियल प्रोडक्ट चुन सकते हैं। स्मार्ट फाइनेंस से कार के लिए लोन लेने की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह वन स्टॉप सोल्यूशन है। कुछ ही क्लिक में ग्राहक कार लोन से जुड़ी सभी प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। इससे उन्हें तुरंत लोन मिल जाएगा।
इन बैंकों के साथ की गई साझेदारी
जिन बैंकों के साथ साझेदारी की गई है उसमें देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा फाइनेंस, आइसीआइसीआइ बैंक, इंडसइंड बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, चोलामंडलम फाइनेंस, कोटक महिंद्रा प्राइम, एक्सिस बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, यस बैंक आदि हैं। जिन 30 शहरों में यह सुविधा मिलेगी उसमें दिल्ली , एनसीआर जयपुर, अहमदाबाद, पुणे, मुंबई, लखनऊ, इंदौर, कोलकाता, चंडीगढ़, गुवाहाटी, गोवा, भुवनेश्वर, भोपाल, कोयंबटूर, सूरत, वडोदरा, रांची, रायपुर, उदयपुर, कानपुर और देहरादून आदि हैं। इसमें दक्षिण भारत के भी प्रमुख शहर हैं।

बिना किसी झंझट के लोन ले सकते हैं

मारुति के मुताबिक, इसकी वेबसाइट लोन और ग्राहक के बीच एक सुविधा के रूप में काम करेगी। यानी ग्राहक को किसी भी तरह की झंझट नहीं होगी। स्मार्ट फाइनेंस सही समय पर ग्राहकों को उनके लोन की स्थिति की जानकारी देगा। इसमें लोन को ट्रैक किया जा सकता है। आपके हर प्रोसीजर की जानकारी इसके जरिए मिलेगी।

नेक्सा के लिए भी कंपनी ने शुरू किया था ऑन लाइन लोन

कंपनी के ईडी शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि मारुति सुजुकी भारत की एक ऐसी पहली कार निर्माता है जो ऑन लाइन एक एंड टू एंड सोल्यूशन दे रही है। हमें स्मार्ट फाइनेंस पर हमारे नेक्सा के लिए बहुत अच्छा रिस्पांस मिला था। अब हम इसे बढ़ाकर अन्य मॉडल के लिए भी कर रहे हैं। हमारा मकसद इसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना है।

डेयरी कंपनी क्वॉलिटी को बंद करने पर लगी मुहर, बैंकों ने खारिज किया हल्दीराम स्नैक्स का ऑफर

नई दिल्ली
डेयरी प्रॉडक्ट बनानेवाली कंपनी क्वॉलिटी लिमिटेड अब बंद हो जाएगी और उसकी संपत्तियों को बेच दिया जाएगा। नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल की बेंच ने इसका ऑर्डर जारी कर दिया है। कर्ज से दबी कंपनी को हल्दीराम स्नैक्स खरीदना चाहती थी। कंपनी को खरीदने में अकेले उसी ने दिलचस्पी दिखाई थी। उसके प्लान को क्वॉलिटी के लेनदारों की कमेटी ने खारिज कर दिया। हृष्टरुञ्ज की दिल्ली बेंच के एक कोर्ट ने केस में ऑर्डर सोमवार को जारी कर दिया था। लेकिन ट्राइब्यूनल की वेबसाइट पर यह गुरुवार को डाला गया।
दिवालिया करार देने की कवायद दिसंबर 2018 में शुरू हुई थी
दूध से खाने-पीने के सामान बनाने वाली क्वॉलिटी लिमिटेड 1992 में शुरू हुई थी। इस पर लेनदारों का लगभग 1,900 करोड़ रुपये का बकाया है। कंपनी को दिसंबर 2018 में दिवालिया करार देने की कवायद शुरू हुई थी। कंपनी के खिलाफ अर्जी पंजाब नेशनल बैंक और ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म ्य्यक्र ने लगाई। कंपनी खरीदने में दिलचस्पी दिखाने वालों को रिजॉल्यूशन प्लान देने की डेडलाइन कई बार बढ़ाई गई थी। सिर्फ हल्दीराम रुह्वैक्स और पायनियर सिक्योरिटी ने मिलकर कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। हल्दीराम ने पहले 130 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था, जिसको बाद में 142 करोड़ तक किया। उसका अंतिम ऑफर 145 करोड़ रुपये का रहा जो 1,900 करोड़ रुपये के कर्ज का 8त्न से भी कम था। अगर लेनदार इस ऑफर को मानते तो उन्हें 92त्न कर्ज को छोडऩा पड़ता। हल्दीराम स्नैक्स के रिजॉल्यूशन प्लान में ऑफर की जाने वाली अधिकांश रकम फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के पास जानी थी। प्लान पास होने के लिए जरूरी था कि 66त्न लेनदार उस पर राजी हों, लेकिन हल्दीराम के मामले में ऐसा नहीं था। लेनदारों की कमेटी की तरफ से यह प्लान खारिज किए जाने के बाद क्वॉलिटी का मामला देखने वाले रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने कंपनी बंद करने की अर्जी लगा दी। कंपनी को दिवालिया करार देने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 270 दिन का समय बहुत पहले खत्म हो गया था।

ष्टक्चढ्ढ ने पिछले साल डायरेक्टरों पर जालसाजी का केस बनाया था

क्वॉलिटी लिमिटेड मिल्क पावडर, बटर, चीज, घी, दही, लस्सी, छाछ और सुगंधित दूध बनाती रही है। कंपनी पर बैंक ऑफ इंडिया की लीडरशिप वाले बैंकों के समूह के धोखेबाजी करने का आरोप है। इसको लेकर कंपनी सरकारी एजेंसियां के जांच के दायरे में रही है। ष्टक्चढ्ढ ने पिछले साल कंपनी के डायरेक्टरों, संजय धींगरा, सिद्धांत गुप्ता और अरुण श्रीवास्तव के खिलाफ जालसाजी करने का केस बनाया था।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में है मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, इसकी छह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं। ये हरियाणा के पलवल, यूपी के बुलंदशहर, सहारनपुर, जरार, सीतापुर और राजस्थान के अजमेर में हैं। इसके राजस्थान, यूपी, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में मिल्क चिलिंग सेंटरों का नेटवर्क है, जहां के उत्पादकों से यह दूध खरीदती रही है। क्वॉलिटी अपने प्रॉडक्ट जापान, ्रश्व, सेशेल्स, बांग्लादेश, श्रीलंका, जॉर्डन, नाइजर, मोरक्को सहित 28 देशों में बेचती रही है। एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए इसने दुबई में क्वॉलिटी डेयरी प्रॉडक्ट्स नाम से 100 पर्सेंट मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी बनाई हुई है।

राहत की उम्मीद: रसोई का बजट बिगाड़ रहे खाने वाले तेलों के दाम में जल्द आएगी कमी, दिसंबर में ही भाव 20 प्रतिशत बढ़ गए थे

नई दिल्ली
पिछले कुछ महीनों से रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहे खाने वाले तेलों की कीमतों में जल्द राहत मिल सकती है। पाम और सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के आसार हैं। हालांकि, खुदरा में इसका असर आने में एक महीने से अधिक का वक्त लग सकता है।
दाम पिछले कुछ महीनों में रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे
पाम ऑयल से लेकर मूंगफली, सरसों, सोयाबीन सभी खाने वाले तेलों के दाम पिछले कुछ महीनों में रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। अकेले दिसंबर महीने में इनकी कीमतों में 20 प्रतिशत की उछाल देखी गई। हालांकि, नए साल की शुरुआत के साथ हुए घटनाक्रमों ने इनकी कीमत पर अंकुश लगा दिया और अब इसमें गिरावट की उम्मीद की जा रही है।
पाम तेल के महंगे होने से अन्य खाने वाले तेलों की कीमत प्रभावित हुई
खाने वाले तेलों में पाम तेल सबसे सस्ता होता है और इसका इस्तेमाल भी अन्य के मुकाबले अधिक है। पाम ऑयल के वैश्विक उत्पादन में इंडोनेशिया और मलेशिया की 85 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले साल मई के बाद पाम तेल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हुई थी। पाम तेल के महंगे होने से सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली समेत सभी खाने वाले तेलों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।
पाम तेल में नरमी, दिसंबर की तुलना में भाव करीब 3 प्रतिशत घटा
हालांकि, पाम तेल में फिर नरमी आ रही है। कमोडिटी एक्सचेंज  इसके वायदा भाव दिसंबर की तुलना में 2.84प्रतिशत घटकर 950 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गए हैं। माना जा रहा है कि मलेशिया बायोफ्यूल में पाम तेल मिलाने की अपनी योजना को एक साल टाल सकता है। इससे अतिरिक्त मांग नहीं बढ़ेगी और पाम तेल की कीमतों में और कमी आएगी। दूसरी बड़ी राहत सोयाबीन में देखने को मिल सकती है। 

इस साल देश में सोयाबीन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सोयाबीन की बड़ी खपत पोल्ट्री इंडस्ट्री में होती है। इस साल अचानक बर्ड फ्लू आ जाने से पोल्ट्री से डिमांड में कमी आ रही है। इससे सोयाबीन की कीमतें टूट रही हैं। देश की सबसे बड़ी सोयाबीन मंडी इंदौर में बीते 14 दिनों में सोयाबीन की कीमतों में 15 फीसदी तक की कमी आई है। एक जनवरी को जहां एक क्विंटल मॉडल सोयाबीन 4700 रुपए में बिक रहा था, वहीं अब यह 4100 रुपए में बिक रहा है। वहीं, सरसों की नई फसल की आवक शुरू होने से इसके भाव में भी गिरावट आने के आसार हैं।

खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले तेलों की कीमतों में 8 से 10त्न की कमी संभव

केडिया एडवायजरी के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि वैश्विक घटनाक्रम में आए बदलावों से खाने वाले तेलों में गिरावट के आसार बन रहे हैं। क्रूड पाम ऑयल के वायदा कीमतें अगले एक माह में 8-10त्न घट सकती हैं। ऐसे में खाने वाले तेलों की कीमतों में कमी आ सकती है।

इन वजहों से आएगी कीमतों में कमी, लग सकता है एक माह

सरसों तेल- सरसों की नई फसल मंडियों में आने लगी है। इस साल इसकी अच्छी पैदावार का अनुमान है। इससे भाव घट सकते हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने फिर से सरसों तेल में ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी है। यानी इसमें दूसरे सस्ते तेल मिलाए जा सकेंगे। इससे सरसों तेल की कीमतों में नरमी के आसार हैं।

पाम ऑयल- मलेशिया बायोफ्यूल में 20 प्रतिशत और 40 प्रतिशत पाम तेल मिलाने की योजना पर अमल एक साल तक के लिए टाल सकता है। इससे अतिरिक्त मांग की उम्मीद ठंडे बस्ते में चली जाएगी। इसके अलावा मलेिशया में लॉकडाउन के चलते घरेलू मांग भी कुछ कमजोर पड़ गई है।

सोयाबीन तेल- देश में इस साल 104.55 लाख टन सोयाबीन उत्पादन होने का अनुमान है, जो पिछले साल से 15 फीसदी अधिक है। सोयाबीन की बड़ी खपत वाली इंडस्ट्री पोल्ट्री हाल में बर्ड फ्लू से प्रभावित हो गई है। इससे सोयाबीन की मांग में कमी आ रही है। इन दोनों कारणों से सोयाबीन की कीमतें टूट रही हैं।

वॉट्सऐप की सफाई: पॉलिसी बदलने से यूजर की डेटा सेफ्टी पर असर नहीं होगा, नए बदलाव सिर्फ बिजनेस चैट के लिए किए गए

नई दिल्ली
वॉट्सऐप की नई पॉलिसी कंपनी के लिए मुसीबत बन चुकी है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे लेकर खरी-खोटी सुना रहे हैं। ऐसे में अब कंपनी इस पर सफाई दे रही है। उसने कहा कि नए अपडेट से फेसबुक के साथ डेटा शेयरिंग में कोई बदलाव नहीं होगा। चैट और कॉल डिटेल पहले की तरह सुरक्षित रहेंगी। एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन भी जारी रहेगा। दुनियाभर में वॉट्सऐप के 200 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं।
बिजनेस चैट के लिए पॉलिसी में बदलाव किए
कंपनी ने कहा कि हमने बीते साल अक्टूबर में बताया था कि वॉट्सऐप लोगों के लिए खरीदारी को आसान बनाना चाहता है। लोग ऐप की मदद से डायरेक्ट खरीदारी कर पाएंगे। ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल फैमिली और फ्रेंड्स के साथ चैटिंग के लिए करते हैं। ऐसे में इससे उनके बिजनेस को भी बढ़ावा मिलेगा। वॉट्सऐप के हेड विल कैथार्ट ने सोशल मीडिया पर बताया कि कंपनी ने अपनी पॉलिसी में ट्रांसपेरेंसी लाने और पीपुल-टू-बिजनेस के ऑप्शनल फीचर की जानकारी देने के लिए अपडेट किया है। यह अपडेट बिजनेस से जुड़ी जानकारियां देने के लिए किया जा रहा है। इससे फेसबुक के साथ डेटा शेयर करने की हमारी पॉलिसी पर कोई असर नहीं होगा।
वॉट्सऐप पॉलिसी पर चिंता करने की जरूरत क्यों?
वॉट्सऐप ने अपनी नई पॉलिसी में साफ लिखा है कि यूजर को अपनी प्राइवेसी कंपनी के साथ शेयर करना होगी। यानी वॉट्सऐप अब आपके डेटा पर पूरी नजर रखेगी और आपकी प्राइवेसी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। भारत में वॉट्सऐप यूजर्स की संख्या 40 करोड़ से ज्यादा है। यानी पॉलिसी एग्री करने के बाद कंपनी आपके खर्च, आईपी एड्रेस, लोकेशन, स्टेटस, कंटेंट, कॉल जैसे सभी डेटा को एक्सेस कर पाएगा। कुल मिलाकर ऐप पर आपकी प्राइवेसी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। नई पॉलिसी में लिखा है कि हमारी सर्विसेज को ऑपरेट करने के लिए आप वॉट्सऐप को जो कंटेंट अपलोड, सबमिट, स्टोर, सेंड या रिसीव करते हैं, कंपनी उन्हें कहीं भी यूज, रिप्रोड्यूस, डिस्ट्रीब्यूट और डिस्प्ले कर सकती है। यूजर्स को ये पॉलिसी पर सहमति देनी होगी।

 ये 8 फरवरी, 2021 से लागू हो रही है। इस तारीख के बाद इसे एग्री करना जरूरी होगी। यदि एग्री नहीं करते हैं तो अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके लिए आप हेल्प सेंटर पर विजिट कर सकते हैं।

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चालू वित्त वर्ष में सर्कुलेशन में आई 13 प्रतिशत ज्यादा करेंसी, पहले नौ महीनों में 3.23 लाख करोड़ रु. की बढ़ोतरी

नई दिल्ली
कोविड-19 महामारी की अनिश्चितता के कारण सतर्कता बरतते हुए लोगों ने नकदी को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सर्कुलेशन में 13 प्रतिशत ज्यादा करेंसी आ गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा डाटा के मुताबिक, 1 जनवरी 2021 को सर्कुलेशन में 27,70,315 करोड़ रुपए की करेंसी थी। जबकि 31 मार्च 2020 को 24,47,312 करोड़ रुपए की करेंसी सर्कुलेशन में थी। एक साल पहले समान अवधि में सर्कुलेशन में आई करेंसी में 6 प्रतिशत की ग्रोथ रही थी।
चालू वित्त वर्ष में उच्च स्तर पर पहुंची करेंसी इन सर्कुलेशन
केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में करेंसी इन सर्कुलेशन उच्च स्तर पर पहुंच गई है। सबनवीस का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी जरूरत से निपटने के लिए लोगों ने ज्यादा करेंसी जमा की थी। उन्होंने कहा कि जब भी संकट जैसी स्थिति पैदा हुई है, तब घरों में नकदी जमा करने की प्रवृत्ति रही। यह कारण है कि कैश की मांग में बढ़ोतरी रही है। आरबीआइ ने अगस्त 2020 में 2019-20 के लिए एनुअल रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि कोविड-19 महामारी की अनिश्चितता के कारण करेंसी की मांग बढऩे लगी है।

कैलेंडर इयर 2020 में 5 लाख करोड़ रुपए की करेंसी बढ़ी
आरबीआइ के डाटा के मुताबिक, कैलेंडर इयर 2020 में करेंसी इन सर्कुलेशन में 22.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सर्कुलेशन में 5,01,405 करोड़ रुपए की करेंसी बढ़कर 1 जनवरी 2021 को 27,70,315 करोड़ रुपए हो गई है। करेंसी इन सर्कुलेशन में बैंक नोट और सिक्कों की गणना की जाती है। मौजूदा समय में आरबीआइ 2,5,10,20,50,100,200,500 और 2000 रुपए के नोट जारी करता है। इसके अलावा 50पैसा, 1,2,5,10 और 20 रुपए के सिक्कों की गणना भी करेंसी में होती है। वित्त वर्ष 2020 में सर्कुलेशन में शामिल बैंक नोट की वैल्यू 14.7 प्रतिशत बढ़ी आरबीआइ की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में सर्कुलेशन में शामिल बैंक नोट की वैल्यू 14.7 प्रतिशत और वॉल्यूम में 6.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही है। वैल्यू के लिहाज से मार्च 2020 के अंत में सर्कुलेशन में शामिल कुल बैंक नोट में 500 रुपए और 2000 रुपए के नोट की 83.4 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। वहीं, वॉल्यूम के लिहाज से सर्कुलेशन में शामिल कुल बैंक नोट में 10 और 100 रुपए के नोट की 43.4 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस अवधि में सर्कुलेशन में 500 रुपए के बैंक नोट में तेज बढ़ोतरी रही थी।

4,818 करोड़ का निवेश: साल के पहले हफ्ते जारी रहा स्नढ्ढढ्ढ का निवेश, अगले हफ्ते 49 हजार तक जा सकता है सेंसेक्स

मुंबई
सेंसेक्स अगले हफ्ते 49 हजार तक जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि विदेशी निवेशकों का निवेश शेयर बाजार में लगातार जारी है। साथ ही तीसरी तिमाही में कंपनियों का फाइनेंशियल रिजल्ट अच्छा रहने की उम्मीद है।
दूर नहीं है 49 हजार का आंकड़ा
आनंद राठी सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी कहते हैं 49 हजार का आंकड़ा अब लंबा नहीं है। यह हो सकता है कि सोमवार को ही बाजार टच कर ले। उनके मुताबिक, सेंसेक्स 50 हजार के भी आंकड़े को अब टच कर सकता है। क्योंकि बाजार में लिक्विडिटी है। एफआईआई का निवेश आ रहा है। कंपनियों के रिजल्ट अच्छे रह सकते हैं।
48,854 तक गया था सेंसेक्स
शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 48,854 तक गया था। हालांकि यह 48,782 पर बंद हुआ था। इस लिहाज से 218 अंक बढऩे पर सेंसेक्स 49 हजार हो जाएगा। तीसरी तिमाही के रिजल्ट से अच्छी उम्मीदें हैं। शुक्रवार को टाटा कंसलटेंसी सर्विसेस (टीसीएस) का रिजल्ट बहुत से एनालिस्ट के अनुमान से बेहतर रहा है। साथ ही एचडीएफसी ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसकी ग्रोथ तीसरी तिमाही में अच्छी रही है। लोन और फायदा दोनों में अच्छी ग्रोथ है।
विदेशी निवेशकों ने 4,819 करोड़ लगाया
जनवरी में अब तक विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 4,819 करोड़ रुपए का निवेश किया है। हालांकि प्रोविजनल आंकड़ों में यह 9,264 करोड़ रुपए है। अकेले शुक्रवार को ही 6 हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। दिसंबर में कुल 62 हजार करोड़ का निवेश किया गया है। इसमें से एक से 15 दिसंबर के बीच 41,898 करोड़ रुपए जबकि 16 से 31 दिसंबर के बीच 20,118 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। 2020 में एफआईआई का इक्विटी में कुल निवेश 1.60 लाख करोड़ रुपए रहा है। पिछले 3 महीनों में ही 1.50 लाख करोड़ का निवेश हुआ।

 इसमें दिसंबर में 62 हजार, नवंबर में 60 हजार और अक्टूबर में 22 हजार करोड़ का निवेश किया गया था।

2019-20 में 6,153 करोड़ का निवेश

विदेशी निवेशकों ने वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय इक्विटी बाजार में महज 6153 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया था। 2020-21 में इन्होंने 2 लाख 23 हजार 111 करोड़ रुपए का निवेश किया है। भारतीय बाजार में इनका कुल निवेश 11.15 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

फाइनेंशियल सेक्टर में ज्यादा निवेश

1 से 15 दिसंबर के दौरान जिन सेक्टर्स में इन निवेशकों ने अच्छा खासा निवेश किया है उसमें ऑटो मोबाइल और कंपोनेंट में 3,668 करोड़ रुपए है। बैंक और फाइनेंशियल में 27,064 करोड़, कैपिटल गुड्स में 2,951, फार्मा, बायोटेक में 2,811, मेटल और माइनिंग सेक्टर में 2,601 और फूड, बेवरेजेस, तंबाकू में 2,438 करोड़ रुपए का निवेश किया है।

भारत में निवेश, दूसरे उभरते बाजारों से पैसे निकाले

उभरते हुए बाजारों की बात करें तो सभी बाजारों से एफआईआई ने पैसा निकाला है। केवल भारत ही ऐसा बाजार है जिसमें पैसा लगाया है। कैलेंडर साल 2020 में भारत में एफआईआई ने 21.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। जबकि इंडोनेशिया से 3.2, कोरिया और ताइवान से 17.-6,17.6, थाइलैंड से 8.3 और मलेशिया से 5.8 अरब डॉलर का शेयर बेचा है।

इस साल 15-20 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है

विश्लेषकों के मुताबिक, 2021 कैलेंडर साल में एफआईआई भारतीय बाजार में 15-20 अरब डॉलर का निवेश कर सकते हैं। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार से देश की करेंसी को स्थिरता मिल सकती है। रिजर्व बैंक रुपए की कमजोरी को आगे भी लगातार मैनेज करेगा। मुद्रा में स्थिरता या बढ़त से विदेशी निवेशक डेट में निवेश करते हैं। देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी इस समय रिकॉर्ड स्तर पर है। यह दिसंबर 25 तक 581 अरब डॉलर रहा है।

आज से एक बार फिर मिलेगा सस्ता सोना खरीदने का मौका

नई दिल्ली
सरकारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 स्कीम की 10वी सीरीज सोमवार यानी 11 जनवरी से खरीदारी के लिए खुलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की इस सीरीज के लिए 1 ग्राम सोने की कीमत 5,104 रुपए तय की है। जो लोग इनके लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे और डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान करेंगे, उन्हें प्रति ग्राम 50 रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। ये स्कीम 11 से 15 जनवरी तक खुलेगी।
1 ग्राम सोना से कर सकते हैं खरीदी की शुरुआत
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है। कोई शख्स एक वित्त वर्ष में मिनिमम 1 ग्राम और मैक्सिमम 4 किलोग्राम तक वैल्यू का बॉन्ड खरीद सकता है। हालांकि किसी ट्रस्ट के लिए खरीद की अधिकतम सीमा 20 किलोग्राम है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में इश्यू प्राइस पर हर साल 2.50 प्रतिशत का निश्चित ब्याज मिलता है। यह पैसा हर 6 महीने में अपने आप आपके खाते में पहुंच जाता है। फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ पर आपको इस तरह का फायदा नहीं मिलता।
8 साल का रहता है मेच्योरिटी पीरियड
बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है। लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी जरूरत पडऩे पर आप 5 साल बाद इसे कैश कर सकते हैं। एनएसई के मुताबिक लोन लेने के दौरान कोलैटरल (इसके बदले लोन लेना) के रूप में भी इन सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ये बांड एनएसई पर ट्रेड भी करते हैं। अगर गोल्ड बॉन्ड के मैच्योरिटी पर कोई कैपिटल गेन्स बनता है तो इसपर छूट मिलेगी है। गोल्ड ईटीएफ की कीमत पारदर्शी और एक समान होती है। यह लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन का अनुसरण करता है, जो कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी है। वहीं फिजिकल गोल्ड की अलग-अलग विक्रेता/ज्वैलर अलग-अलग कीमत पर दे सकते हैं। गोल्ड ईटीएफ से खरीदे गए सोने की 99.9 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी होती है, जो कि सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है। इस बॉन्ड को लोन लेने के लिए जमानत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें समय के साथ सोने के भाव में होने वाली बढ़ोतरी का फायदा मिलेगा। उसके ऊपर ढाई पर्सेंट सालाना का ब्याज भी मिलेगा जो हर छह महीने पर बैंक खाते में जमा हो जाएगा। बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना होगा, लेकिन उसकी बिक्री से होनेवाले कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं लगेगा।

9 महीनों में इसकी कीमत में आया 10त्न का उछाल
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2020-21 स्कीम की शरुआत 20 अप्रैल 2020 से हुई थी। इसकी पहली सारीज 20 से 24 अप्रैल तक चली थी। इस दौरान 1 ग्राम सोन की कीमत 4,639 रुपए तय की गई थी। अब 10वी सीरीज के लिए इसकी कीमत 5,014 रुपए प्रति ग्राम तय की गई है। यानी 20 अप्रैल 2020 से लेकर अब तक इसकी कीमत में 10त्न से ज्यादा का उछाल आ चुका है। इस हिसाब से जिन लोगों ने अप्रैल में इसमें निवेश किया था उन्हें 1 साल से कम समय में ही फिक्सड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिल चुका है।

कहां से खरीदा जा सकता है गोल्ड बॉन्ड?
स्त्रक्च स्कीम वाले बॉन्ड कमर्शियल बैंकों, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक एक्सचेंजों- बीएसई और एनएसई, और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन से खरीदे जा सकते हैं। इसे भारतीय नागरिक, अविभाजित हिंदू परिवार (॥स्न), ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन खरीद सकते हैं। इस स्कीम में कम से कम एक ग्राम सोने के दाम के बराबर का एक बॉन्ड खरीदा जा सकता है।

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?
सरकार ने देश में फिजिकल फॉर्म में सोने की खरीदारी की मांग घटाने के मकसद से नवंबर 2015 में यह स्त्रक्च स्कीम शुरू की थी। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक सरकारी बांड होता है। इसे डीमैट रूप में परिवर्तित कराया जा सकता है। इसका मूल्य रुपए या डॉलर में नहीं होता है, बल्कि सोने के वजन में होता है। यदि बॉन्ड पांच ग्राम सोने का है, तो पांच ग्राम सोने की जितनी कीमत होगी, उतनी ही बॉन्ड की कीमत होगी। इसे खरीदने के लिए सेबी के अधिकृत ब्रोकर को इश्यू प्राइस का भुगतान करना होता है। बॉन्ड को भुनाते वक्त पैसा निवेशक के खाते में जमा हो जाता है। यह बॉन्ड भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सरकार की ओर से जारी करता है।

रिकवरी के संकेत: भारत के फ्यूल डिमांड में लगातार चौथे महीने पॉजिटिव ग्रोथ, दिसंबर में कुल खपत 11 महीने के हाई पर पहुंचा

नई दिल्ली
कोरोना महामारी के बीच एक और अच्छी खबर आ रही है। दिसंबर में लगातार चौथे महीने फ्यूल डिमांड में बढ़त दर्ज की गई। अर्थव्यवस्था में सकारात्मक सुधार के चलते कुल खपत भी 11 महीने के हाई पर पहुंच गया है। हालांकि, यह प्री-कोविड लेवल से अभी भी 2 प्रतिशत नीचे है। ऑयल मिनिस्ट्री के मुताबिक दिसंबर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिमांड घटकर 18.59 मिलियन टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 18.94 मिलियन टन रही थी।
लगातार चौथे महीने फ्यूल डिमांड में पॉजिटिव ग्रोथ
हालांकि मासिक आधार पर यह लगातार चौथा महीना रहा जब ईंधन खपत में पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज की गई। इससे पहले नवंबर में भी खपत 17.86 मिलियन टन रही थी। दिसंबर में खपत का यह आंकड़ा फरवरी 2020 के बाद से सबसे हाई है। क्योंकि आर्थिक गतिविधियों और ट्रांसपोर्टेशन में अच्छी रिकवरी देखने को मिली।
फ्यूल डिमांड में लॉकडाउन के चलते भारी गिरावट दर्ज किया गया था
लॉकडाउन के चलते अप्रैल 2020 में फ्यूल डिमांड 49 प्रतिशत नीचे आ गई थी। क्योंकि 69 दिनों के सख्त लॉकडाउन के दौरान देशभर में लगभग सभी तरह के ट्रांसपोर्टेशन थम गए थे। हालांकि फेस्टिव सीजन से पहले अनलॉक प्रक्रिया के तहत मिली ढील के बाद फ्यूल डिमांड में पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज की जा रही है।
डीजल की खपत में अक्टूबर के बाद लगातार दूसरे महीने गिरावट
देश के कुल ईंधन खपत में लगभग 40प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले डीजल की खपत भी पिछले साल की तुलना में दिसंबर में 2.7 प्रतिशत गिरकर 7.18 मिलियन टन रही। यह नवंबर में भी 6.9 प्रतिशत नीचे आ गई थी। हालांकि अक्टूबर में यह 7.4 प्रतिशत बढ़ी थी। दूसरी ओर देश में पेट्रोल की कुल खपत सितंबर में ही प्री-कोविड लेवल के पार पहुंच गया था। इसकी बड़ी वजह अनलॉक में सरकार से मिली रियायतें रहीं।

जेट फ्यूल की खपत दिसंबर में घटी, लेकिन रसोई गैस, नेफ्था और बिटुमिन की खपत बढ़ी

बिजली उत्पादन और पेट्रोकेमिकल के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले नेफ्था की खपत दिसंबर में 2.67त्न बढ़कर 1.23 मिलियन टन रही।
सड़क निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली बिटुमिन की खपत 20त्न बढ़कर 7.61 हजार टन रही।
रसोई गैस (रुक्कत्र) की खपत 7.4त्न बढ़कर 2.53 मिलियन टन रहा। खास बात यह है कि रुक्कत्र ही एकमात्र ईंधन रहा जिसकी डिमांड लॉकडाउन के दौरान भी बढ़ी।
एविएशन टरबाइन फ्यूल (्रञ्जस्न) की बिक्री दिसंबर में 41त्न फिसलकर 4.28 हजार टन रहा, क्योंकि इस दौरान कई एयरलाइंस अभी भी पूरी तरह ऑपरेशन शुरु नहीं कर पाए हैं। हालांकि मासिक आधार पर इसमें 13.5त्न की पॉजिटिव ग्रोथ देखने को मिली।

डीजल-पेट्रोल में रिकॉर्ड महंगाई: दिल्ली में पेट्रोल 84.20 रु. और मुंबई में डीजल 81.07 रु. लीटर, यहां ये अब तक की सबसे ज्यादा कीमतें

नई दिल्ली
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। गुरुवार को यहां पेट्रोल 23 पैसे महंगा होकर 84.20 रुपए प्रति लीटर हो गया। इससे पहले 4 अक्टूबर 2018 को यहां पेट्रोल की कीमत 84 रुपए प्रति लीटर तक गई थी। दिल्ली में डीजल भी 26 पैसे महंगा होकर 74.38 रुपए हो गया है। हालांकि यह रिकॉर्ड नहीं है। दिल्ली में डीजल की रिकॉर्ड कीमत 75.45 रुपए है। यह रिकॉर्ड भी 4 अक्टूबर 2018 को बना था। डीजल ने मुंबई में रिकॉर्ड बनाया है। वहां कीमत 26 पैसे बढ़ कर 81.07 रुपए हो गई है।
दूसरे महानगरों में भी दाम रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचे
देश के दूसरे महानगरों में भी पेट्रोल महंगा हुआ है। वहां दाम रिकॉर्ड स्तर पर तो नहीं पहुंचे हैं, लेकिन उसके आसपास ही हैं। मुंबई में पेट्रोल 90.83 रुपए लीटर है। यह 91.34 रुपए के रिकॉर्ड से 51 पैसे कम है। यह रिकॉर्ड 4 अक्टूबर 2018 को बना था। चेन्नई में कीमत 86.96 रुपए है। यह 87.33 रुपए के रिकॉर्ड से 37 पैसे नीचे है।
बुधवार से पहले 29 दिन तक दाम नहीं बदले थे
एक दिन पहले, बुधवार को भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े थे। लगातार 29 दिन दाम स्थिर रहने के बाद कल पेट्रोल की कीमत अलग-अलग शहरों में 24 से 26 पैसे तक बढ़ी थी। डीजल 25 से 27 पैसे तक महंगा हुआ था। इससे पहले पेट्रोल-डीजल के दाम में आखिरी बार 7 दिसंबर को बढ़ोतरी हुई थी।
अक्टूबर 2018 में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, इस बार उम्मीद कम
4 अक्टूबर 2018 को जब पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे थे, तब सरकार ने इन पर एक्साइज ड्यूटी 1.50 रुपए प्रति लीटर घटाई थी। सरकारी तेल कंपनियों ने भी दाम एक रुपया घटाया था। लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार के पास फंड की कमी को देखते हुए अभी एक्साइज कम करने की संभावना कम ही है।

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज 13 रुपए और डीजल पर 15 रुपए बढ़ाया था

पिछले साल जब क्रूड 20 डॉलर से नीचे गया था, तब पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं घटे थे। मार्च और मई में दो किस्तों में सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपए और डीजल पर 15 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी थी। इससे सरकार को पूरे साल में 1.6 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने की उम्मीद थी। मई से पेट्रोल 14.54 रुपए और डीजल 12.09 रुपए महंगा हो चुका है।

पेट्रोल पर अभी 32.98 रुपए है एक्साइज, डीजल पर 31.83 रुपए

इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर उपलब्ध 1 जनवरी 2020 की जानकारी के अनुसार पेट्रोल पर प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए है। पेट्रोल पर दिल्ली सरकार का वैट 19.32 रुपए और डीजल पर 10.85 रुपए है। यानी पेट्रोल की कीमत का 62.5त्न और डीजल का 57.8त्न केंद्र और राज्य सरकारें वसूलती हैं।

कच्चा तेल एक हफ्ते में 5 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ है

देश में पेट्रोल-डीजल के दाम ग्लोबल मार्केट से जुड़े हैं। तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चा तेल महंगा होने के कारण उन्हें दाम बढ़ाना पड़ा है। भारत ब्रेंट क्रूड का आयात करता है। इसकी कीमत 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। एक हफ्ते में यह 5 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो चुका है।

ओपेक ने रोजाना उत्पादन 72 लाख बैरल घटा दिया है, इससे क्रूड महंगा

तेल उत्पादन करने वाले देशों के संगठन ओपेक और रूस की मंगलवार को बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने दिसंबर में उत्पादन रोजाना 77 लाख बैरल कम किया था। जनवरी में रोजाना 72, फरवरी में 71 और मार्च में 70 लाख बैरल उत्पादन घटाने का प्लान है।