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राहत: 15 दिन बाद पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई कटौती, लेकिन एमपी और राजस्थान में पेट्रोल अभी भी 100 रुपए से महंगा बिक रहा


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। आज सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती की है। गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल 16 और डीजल 14 पैसे सस्ता हुआ है। इस कटौती के बाद यहां पेट्रोल 90.40 रुपए और डीजल 80.73 रुपए प्रति लीटर पर आ गया है। इससे पहले लगातार 15 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ था।
इस साल 26 बार बढ़ी फ्यूल की कीमतें और 4 बार कम हुईं
इस साल पेट्रोल-डीजल के दाम जनवरी में 10 बार और फरवरी में 16 बार बढ़े, जबकि मार्च में कीमतें स्थिर हैं। इस लिहाज से 2021 में अब तक पेट्रोल-डीजल के दाम 26 बार बढ़ चुके हैं। हालांकि मार्च महीने में 3 बार और अप्रैल में 1 बार पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी आई है।
केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल पर वसूलती हैं भारी टैक्स
पेट्रोल का बेस प्राइज अभी 33 रुपए और डीजल का बेस प्राइज 34 रुपए के करीब है। इस पर केंद्र सरकार 33 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं, जिसके बाद इनका दाम बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गया है।
55 रुपए तक जा सकता है कच्चे तेल का दाम
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते है कि देश और दुनिया में कोरोना महामारी एक बार फिर फैलने लगी है। इसके चलते कई जगहों पर लॉकडाउन लगाया गया है। इससे पेट्रोल-डीजल की मांग में गिरावट आने की संभावना है। इसके अलावा ओपेक देशों ने मई से तेल उत्पादन बढ़ाने की बात भी कही है। ऐसे में कच्चा तेल आने वाले महीनों में 55 डॉलर तक आ सकता है।
अभी कच्चा तेल 66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है जो 1 महीने पहले 70 डॉलर के करीब था। 

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कुछ दिनों पहले कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटेंगे तो उसका पूरा फायदा हम ग्राहक को देंगे।

रोजाना सुबह 6 बजे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं। इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं। पेट्रोल-डीजल का का रेट आप स्रूस् के जरिए भी जान सकते हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल के कस्टमरों को क्रस्क्क स्पेस पेट्रोल पंप का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर और बीपीसीएल उपभोक्ता क्रस्क्क लिखकर 9223112222 नंबर पर भेजना होगा। वहीं, एचपीसीएल उपभोक्ता '॥क्कक्कह्म्द्बष्द्ग' लिखकर 9222201122 नंबर पर भेजकर आज का भाव पता कर सकते हैं।

डॉलर की तुलना में रुपया जा सकता है 78 पर, एन आर आई के लिए खुशी, पर आयातकों के लिए घाटा


जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। कोरोना का दूसरा चरण भारतीय रुपया पर भारी पड़ता दिख रहा है। ऐसी उम्मीद है कि डॉलर की तुलना में रुपया 77-78 तक जा सकता है। हालांकि इससे अनिवासी भारतीयों  को फायदा हो सकता है। ऐसे भारतीय जो विदेश में रहते हैं उनके लिए यह फायदा है। क्योंकि अगर वो वहां से भारत में पैसे भेजते हैं तो उनको डॉलर की तुलना में ज्यादा रुपया यहां पर मिल जाएगा।
बाहर देशों से सामान मंगाने वालों को ज्यादा देना होगा पैसा
दूसरी ओर इसका आयातकों यानी जो लोग बाहर देशों से माल मंगाते हैं, उनके लिए यह घाटे का सौदा होगा। क्योंकि उनको डॉलर के पेमेंट में ज्यादा रुपया देना होगा। अभी डॉलर की तुलना में रुपया 75 के करीब है। हाल के समय में रुपए की कीमतों में काफी गिरावट आई है। साथ ही कोरोना की दूसरी लहर से भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को झटका लग सकता है। भारतीय रुपया डॉलर की तुलना में पिछले साल अगस्त में 75 पर पहुंचा था। उसके बाद अब यह फिर से इसी लेवल पर आ गया है। सोमवार को तो यह 75.055 पर पहुंच गया था। नोमुरा होल्डिंग के अर्थशास्त्रियों ने भारत के विकास को लेकर अपने अनुमानों को बदल दिया है और वे कोरोना की दूसरी लहर की वजह से विकास को डाउनग्रेड कर दिए हैं। भारत की त्रष्ठक्क की वृद्धि का लक्ष्य उन्होंने 2021-22 में 11.5त्न कर दिया है। इसका पहले का अनुमान 12.4त्न का था। विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले साल देखें तो ज्यादातर समय डॉलर की तुलना में रुपया 72 से 74 के बीच में था। इस साल यह 75 के लेवल को पार कर गया है। रुपए की कीमत गिरने से एनआरआई के लिए यह अच्छी खबर है। हालांकि बाहर देशों से सामान मंगाने वालों को अब ज्यादा पैसा चुकाना होगा। विश्लेषकों के मुताबिक कोरोना की वैक्सीन की धीमी गति के कारण रुपए में और कमजोरी आ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक रुपए की गिरावट को हालांकि नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वर्तमान हालात में यह उसके लिए एक बड़ी चुनौती है। कोविड से जुड़ी समस्याओं के अलावा, देश में मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स भी हैं। कम ब्याज दरें रुपए की गिरावट में और मदद कर रही हैं। रिजर्व बैंक ने इसीलिए बांड की भारी खरीदारी का फैसला किया है। इससे सरकार की बॉरोविंग को सपोर्ट मिलेगा। सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) की ब्याज दरें 6त्न या इससे नीचे रखे जाने की कोशिश की जा रही है। रिजर्व बैंक बांड खरीदी का पहला चरण 15 अप्रैल से शुरू कर रहा है।

 इसका मतलब यह हुआ कि सिस्टम में ढेर सारी लिक्विडिटी होगी। हालांकि बैंकों ने पहले से ही रिजर्व बैंक के रिवर्स रेपो में काफी पैसा लगा रखा है। रिवर्स रेपो मतलब बैंकों के पास जब ज्यादा पैसा होता है तो वह रिजर्व बैंक के पास इसे रखते हैं। इस पर रिजर्व बैंक उन्हें 3.35त्न का ब्याज देता है।

7 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी

आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग सिस्टम में करीबन 7 लाख करोड़ रुपए की ज्यादा लिक्विडिटी है। 12 अप्रैल को ही बैंकों ने रिजर्व बैंक के पास 4.47 लाख करोड़ रुपए 3 दिन के लिए जमा कराए थे। जबकि 14 अप्रैल को 36 हजार करोड़ रुपए जमा कराए। रिजर्व बैंक की बांड खरीदी की योजना से सिस्टम में नई लिक्विडिटी आएगी। यदि रुपए की लिक्विडिटी बाजार में ज्यादा होती है तो यह इसकी कीमत पर दबाव डालेगी और इससे डॉलर भी मजबूत होता जाएगा।

ब्याज दरें लंबे समय तक नीचे ही रह सकती हैं

दरअसल बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी डालने की रिजर्व बैंक की योजना से यह पता चलता है कि आगे भी ब्याज दरें लंबे समय के लिए कम रह सकती हैं। हालांकि पिछली बार की अपनी मॉनिटरी पॉलिसी में रिजर्व बैंक ने दरों को जस का तस रखने का फैसला किया था। रिजर्व बैंक का फोकस ग्रोथ पर है, भले ही महंगाई अगर उसके लक्ष्य से थोड़ा ज्यादा रहती है तो उसे इस बात की चिंता नहीं है।

कोरोना को नियंत्रण में लाने की चुनौती

जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, सरकार के सामने इसे रोक पाना बहुत चुनौता का काम दिख रहा है। हालांकि हर राज्यों ने अलग-अलग तरीके से लॉकडाउन लगा दिया है, फिर भी रोजाना कोरोना के 2 लाख मामले देश में आ रहे हैं। देश के प्रमुख शहर जहां से देश की जीडीपी में ज्यादा योगदान होता है, वह बुरी तरह प्रभावित हैं। वहां पर ज्यादा लॉकडाउन या प्रतिबंध हो चुका है।

मुंबई, पुणे, दिल्ली जैसे शहर चपेट में

ऐसे शहरों में मुंबई, पुणे, दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, अहमदाबाद, बंगलुरू जैसे इलाके कोरोना के टॉप में हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली देश की त्रष्ठक्क में अच्छा योगदान करते हैं और यह कोरोना के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस साल के लिए भारत की त्रष्ठक्क की वृद्धि का अनुमान 10त्न से ज्यादा ही है। अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष (ढ्ढरूस्न) ने 11.5 से 12.5त्न रखा है जबकि बार्कलेज ने 11त्न का लक्ष्य रखा है। गोल्डमैन सैक्श ने 10.5त्न, रिजर्व बैंक ने 10.5त्न और विश्व बैंक ने 10.1त्न का लक्ष्य रखा है।

तिमाही नतीजे पर फोकस: इंफोसिस की नेटवर्थ तीन साल में डबल हुई, कंपनी आज इंक्रीमेंट और हायरिंग पर कर सकती है बड़े ऐलान


जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। सेक्टर की कंपनी इंफोसिस बुधवार को चौथी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। इसमें कंपनी जनवरी से मार्च के दौरान पूरे कारोबार और आमदनी से जुड़ी सभी जानकारी साझा करेगी। इसके अलावा हायरिंग और इंक्रीमेंट सहित शेयर बायबैक का ऐलान कर सकती है। कोरोना के इस दौर में इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ा, लेकिन वर्क फ्रॉम होम से और हेल्थ के चलते फार्मा सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के कारोबार में अच्छी ग्रोथ देखने को मिला। ऐसे में मार्केट एनालिस्ट को उम्मीद है कि इंफोसिस सहित विप्रो, टेक महिंद्रा और कंपनियां अच्छी तिमाही नतीजे पेश करेंगी। 

ब्लूमबर्ग सर्वे के मुताबिक चौथी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 5,210.90 करोड़ रुपए और रेवेन्यू 26,557.50 करोड़ रुपए हो सकता है। सोमवार को आए के आंकड़े से तो ऐसा ही लगता है। कंपनी का प्रॉफिट जनवरी से मार्च के दौरान 9,246 करोड़ रुपए रहा। रेवेन्यू भी करीब 10 बढ़कर 43,705 करोड़ रुपए रहा।
तीन साल में डबल हुआ नेटवर्थ
खास बात यह है कि 2018 में से अब तक कंपनी की नेटवर्थ डबल हो गई है। तीन साल में यह 33 अरब डॉलर से बढ़कर 69 अरब डॉलर हो गया है। इसमें बड़ी भूमिका सलील पारेख है, जिन्होंने 2018 से कंपनी की कमान मजबूती से संभाला। सलील पारेख तब से अब तक कंपनी के हैं।
शेयर बायबैक पर रहेगी नजर
संभव है कि 14 अप्रैल की बोर्ड बैठक में शेयर बायबैक पर मंजूरी दे। शेयर बायबैक का साइज 10-12 हजार करोड़ रुपए हो सकता है। इसमें एक शेयर की कीमत 1650 से 1670 रुपए के बीच होने की संभावना है। इस खबर का पॉजिटिव असर सोमवार को कंपनी के शेयर पर देखने को मिला था। शेयर 3त्न चढ़कर 1,480 पर पहुंचा। यह छह साल का सबसे ऊंचा स्तर है। मंगलवार को यह 1398.60 रुपए पर बंद हुआ था। वर्क फ्रॉम होम के समय में सेक्टर की डिमांड बढ़ी है। ऐसे में कंपनी हायरिंग पर बड़े ऐलान कर सकती है। 2021-22 के दौरान वह 40 हजार से ज्यादा फ्रेशर को हायर करेगा। 

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक इंफोसिस की योजना एट्रिशन दर (कंपनी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों की दर) 10त्न से नीचे लाने की होगी, जो दिसंबर तिमाही में 15त्न से भी ज्यादा रही थी।

1 जून से सिर्फ हॉलमार्किंग वाली गोल्ड ज्वैलरी ही बेच सकेंगे ज्वैलर, यहां जानें अब आपकी पुरानी ज्वैलरी का क्या होगा


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। सरकार 1 जून 2021 से गोल्ड ज्वैलरी (गहनों) की हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की तैयारी में है। पहले यह 1 जनवरी 2021 से लागू होने वाला था, लेकिन ज्वैलर्स और एसोसिएशंस की मांग पर इसे अगले 6 महीनों के लिए टाल दिया गया। यानी अब आपको 1 जून से हॉलमार्क के निशान वाली ही ज्वैलरी मिलेगी। सरकार ने नवंबर 2019 में गोल्ड ज्वैलरी और डिजाइन के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य किया था। इसके लिए देश के सभी ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग पर शिफ्ट होने और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 1 साल से ज्यादा का समय दिया था। बाद में ज्वैलर्स ने इस डेडलाइन को बढ़ाने की मांग की थी। इसे देखते हुए डेडलाइन को 15 जनवरी से बढ़ाकर 1 जून 2021 कर दिया गया है। अब तक देश के 34,647 ज्वैलर्स ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड में हॉलमार्किंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। अगर आपके पास बिना हॉलमार्किंग वाला सोना है तो उसका क्या होगा?
1 जून 2021 के बाद भी बिना हॉलमार्किंग वाला सोना एक्सचेंज किया जा सकेगा। इसके अलावा अगर आप चाहें तो अपने ज्वैलर के जरिए अपने सोने की हॉलमार्किंग करा सकते हैं। मामले के जानकार संजय मंडोत के मुताबिक 5 साल की लाइसेंस फीस 11,250 रुपए लेकर ज्वैलर्स को यह लाइसेंस देती है। फिर ज्वैलर्स हॉलमार्क सेंटर पर ज्वैलरी की जांच करवाकर कैरेट के हिसाब से हॉलमार्क जारी करवाता है। आम आदमी पुरानी ज्वैलरी पर सीधे सेंटर जाकर हॉलमार्क नहीं लगवा सकता। उन्हें संबंधित ज्वैलर के जरिए ही आना होगा। हालांकि वह सेंटर पर सोने की शुद्धता की जांच न्यूनतम राशि देकर करवा सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले साल पारित बीआईएस कानून के मुताबिक हॉलमार्किंग के नियम तोडऩे वालों पर न्यूनतम 1 लाख रुपए से ज्वैलरी की वैल्यू के 5 गुना तक जुर्माने और एक साल की सजा का प्रावधान है। ग्राहकों को नकली ज्वैलरी से बचाने और ज्वैलरी कारोबार की निगरानी के लिए हॉलमार्किंग जरूरी है। हॉलमार्किंग का फायदा यह है कि जब आप इसे बेचने जाएंगे तो किसी तरह की डेप्रिसिएशन कॉस्ट नहीं काटी जाएगी। मतलब आपको सोने की सही कीमत मिल सकेगी। हॉलमार्किंग में सोना कई फेज में गुजरता है। ऐसे में इसकी शुद्धता में गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती। 2 ग्राम से अधिक ज्वैलरी को से मान्यता प्राप्त सेंटर से जांच करवाकर उस पर संबंधित कैरेट का बीआईएस मार्क लगवाना होगा।

 ज्वैलरी पर बीआईएस का तिकोना निशान, हॉलमार्किंग केंद्र का लोगो, सोने की शुद्धता लिखी होगी। साथ ही ज्वैलरी कब बनाई गई, इसका साल और ज्वैलर का लोगो भी रहेगा।

केवल 14,18 व 22 कैरेट ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग होगी।
14 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी- इसमें 58.50त्न गोल्ड होता है।
18 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी- इसमें 75त्न गोल्ड होता है।
22 कैरेट गोल्ड ज्वैलरी, इसमें 91.60त्न गोल्ड होता है।
क्या है हॉलमार्किंग?
हॉलमार्क सरकारी गारंटी होती है। हॉलमार्क भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (क्चढ्ढस्) देती है। हॉलमार्किंग में किसी प्रोडक्ट को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। बीआईएस वह संस्था है, जो ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे सोने की जांच करती है। सोने के सिक्के या गहने पर हॉलमार्क के साथ क्चढ्ढस् का लोगो लगाना जरूरी है। इससे पता चलता है कि क्चढ्ढस् की लाइसेंस वाली लैब में इसकी शुद्धता की जांच की गई है।

24 कैरेट सोना होता है 99.9त्न शुद्ध
सोने की शुद्धता कैरेट के हिसाब से रहती है। 24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध सोना माना गया है, लेकिन इसके आभूषण नहीं बनते, क्?योंकि वो बहुत मुलायम होता है। आमतौर पर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66त्न सोना होता है।

कोराना से अर्थव्यवस्था को झटका: जीडीपी में हर हफ्ते 10,000 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका, पाबंदियां मई अंत तक जारी रहीं तो 80,000 करोड़ तक जा सकता है लॉस


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। देश में कोविड के एक्टिव मामले जिस रफ्तार से बढ़ रहे हैं वह इकोनॉमी के लिए अच्छी बात नहीं है। दरअसल, आर्थिक रूप से अहम इलाकों में छिटपुट लॉकडाउन हो रहा है, वहां नाइट कर्फ्यू लगाया जा रहा है। इसके चलते आर्थिक गतिविधियां घट रही हैं जिससे में हर हफ्ते 1.25 अरब डॉलर यानी 9,400 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। इस बात का जिक्र बार्कलेज ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में किया है। बार्कलेज के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाले उसके चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट राहुल बजोरिया कहते हैं, अगर कोविड के चलते लगाई जा रहीं पाबंदियां मई अंत तक जारी रहती हैं तो देश की में कुल 10.5 अरब डॉलर (79,238 करोड़ रुपए) की कमी आ सकती है। इस हिसाब से पूरे वित्त वर्ष में नॉमिनल ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट 0.34 घट सकता है जबकि जून क्वॉर्टर में नॉमिनल लगभग 1.4त्न घट सकता है। जीडीपी की नॉमिनल वैल्यू बताती है कि तय समय अवधि में आर्थिक उत्पादन कुल कितना रहा है। इसमें महंगाई के चलते होने वाली बढ़ोतरी का ध्यान नहीं रखा जाता। नॉमिनल वैल्यू में से महंगाई का हिसाब करने पर जीडीपी की रियल वैल्यू मिलती है। यानी अगर सालाना आधार पर 12 पर्सेंट बढ़ती है और उस दौरान महंगाई 6त्न रहती है तो रियल रहेगी। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के कोविड ट्रैकर के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में भारत में कोविड के 1,68,912 नए केस सामने आए हैं। 


इस हिसाब से अमेरिका (1,32,67,359) के बाद इंडिया में कोविड के सबसे ज्यादा 1,35,27,717 केस हैं। इन सबके बीच महाराष्ट्र और दिल्ली सहित कई राज्यों की सरकारों ने अपने यहां लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया है।

मई में कोविड संक्रमण के नए मामलों का बढऩा रुक सकता है

हालांकि बार्कलेज का यह भी कहना है कि एक्टिव केस के साथ रिकवरी भी बढऩे से मई में कोविड संक्रमण के नए मामलों का बढऩा रुक सकता है। इसके अलावा लोगों को कोविड का टीका लगने की रफ्तार में भी तेजी आ सकती है लेकिन उसकी सप्लाई में कमी आने की खबरों से टीकाकरण में थोड़ी दिक्कत आने का अंदेशा हो रहा है।

पाबंदी वाले राज्यों से जीडीपी में लगभग 60त्न का योगदान

कोविड के केस में हो रही बढ़ोतरी के बीच महाराष्ट्र, गुजरात तमिलनाडु और राजस्थान जैसे आर्थिक रूप से अहम राज्यों में लोगों की आवाजाही पर पाबंदी बढ़ रही है। बार्कलेज का अनुमान है कि जिन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर किसी न किसी तरह की पाबंदी लगी है, वहां से देश की जीडीपी में लगभग 60त्न का योगदान होता है।

एक महीने में 40,000 करोड़ के त्रङ्क्र का लॉस मुमकिन

जहां तक महाराष्ट्र की बात है तो वहां कोविड के चलते लगी पाबंदियों से मार्च 2022 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में ग्रॉस वैल्यू ऐडेड (त्रङ्क्र) 0.32त्न घट सकता है। यह अनुमान हाल ही में केयर रेटिंग्स ने दिया था। उसके मुताबिक, 'एक महीने के लॉकडाउन में लगभग 40,000 करोड़ रुपए के त्रङ्क्र का लॉस हो सकता है।'

क्या है त्रङ्क्र और किस तरह त्रष्ठक्क से अलग है?

त्रङ्क्र बताती है कि तय समय अवधि में देश के तमाम आर्थिक क्षेत्रों में कितने रुपए का उत्पादन हुआ है, लेकिन सामान तैयार करने में लगने वाले कच्चे माल की कीमत और दूसरे खर्च के अलावा सेवाएं देने में होने वाले खर्च को घटा लिया जाता है। इससे पता चलता है कि देश के कुल घरेलू उत्पादन में शुद्ध रूप से कितनी बढ़ोतरी हुई है। इसको यूं भी कहा जा सकता है कि त्रङ्क्र देश में होने वाले कुल उत्पादन को निर्माताओं के योगदान जबकि त्रष्ठक्क उपभोग की नजर से देखने का तरीका है।

लगातार तीसरे साल अच्छी होगी बारिश: स्काईमेट का अनुमान-सामान्य रहेगा मानसून, एक जून को केरल पहुंचेगा


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)।  किसानों के लिए अच्छी खबर है। इस साल 1 जून से शुरू होने वाला मानसून यानी बारिश सामान्य रहने का अनुमान है। मौसम की जानकारी देने वाली संस्था स्काईमेट वेदर सर्विसेस ने बताया कि भारत में इस साल जून से सितंबर के दौरान औसत बारिश 907 मिलीमीटर हो सकती है। बता दें कि पूरे भारत में चार महीनों के दौरान औसत 880.6 मिलीमीटर बारिश होती है, जिसे लॉन्ग पीरियड एवरेज कहते हैं। स्काईमेट इसे ही औसत मानकर चलती है। यानी 100 मानती है। सामान्य तौर पर सभी इसी आंकड़े को आधार मानते हैं। अब इस साल 907 मिलीमीटर बारिश की संभावना है। यानी सामान्य से 3 ज्यादा बारिश होगी। इस लिहाज से 2021 में मानसून के दौरान 103त्न बारिश होने की संभावना है। औसत 880.6 मिलीमीटर को ही आधार मानते हुए स्काईमेट ने बताया कि 96त्न से लेकर 104 की बारिश को सामान्य बारिश कहा जाता है। अब अगर पिछले आंकड़े देखें तो 2019 में यह 110 और 2020 में 109 रहा था। अब 2021 में लगातार तीसरे साल भी अच्छे मानसून का फायदा मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जून महीने में 177 मिलीमीटर बारिश हो सकती है, जबकि जुलाई में 277, अगस्त में 258 और सितम्बर महीने में 197 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद है।
 यानी जुलाई और अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है।

समय पर आएगा मानसून
खास बात यह है कि पिछले साल जिन इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई थी, वहां पर इस बार अच्छी बारिश की संभावना है। जून में बिहार और पश्चिम बंगाल में अच्छी बारिश की संभावना है। जुलाई के दौरान महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्यों में अच्छी बारिश की होगी, जबकि नॉर्थ ईस्ट और कर्नाटक में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है।

वहीं, सितंबर महीने में मध्य प्रदेश और देश के पश्चिमी क्षेत्रों में जैसे महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना है। इस साल भी मुंबई में बारिश जून के पहले हफ्ते से शुरू होगी। हालांकि स्काईमेट ने साफ किया कि राज्यों पर अनुमान अभी नहीं दिया जा रहा है, यह अनुमान पूरे देश के लिहाज से है।

बारिश के पूर्वानुमान से होता है फायदा
मौसम पूर्वानुमान से प्राकृतिक आपदाओं में जैसे भारी वर्षा, ओलावृष्टि, हीट वेव यानी लू, शीतलहर से फसलों को बचाने की तैयारी में मदद मिलती है। इसके अलावा केंद्र व राज्य सरकार को भी सूखे और बाढ़ जैसे मामले में किसानों से जुड़ी योजना को तैयार करने में मदद मिलता है।

अच्छे मानसून का खेती पर अच्छा असर
अच्छे मानसून से खेती पर भी अच्छा असर पड़ता है। पिछले साल समय पर बारिश के चलते रबी फसल की बुआई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। क्रिसिल के मुताबिक सीजन में 27 नवंबर 2020 तक कुल 348 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई, जो सालभर पहले से 334 लाख हेक्टेयर थी। यानी 4त्न की ग्रोथ रही और बीते पांच सालों के औसत से भी

अमेरिकी बाजार ने अदाणी पोर्ट्स को इंडेक्स से बाहर किया, म्यांमार की सेना से कारोबारी संबंध का लगाया आरोप


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। अदाणी ग्रुप की कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन को जोंस ने बड़ा झटका दिया है। अपने सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स से बाहर कर दिया है। जोंस ने कहा है कि अदाणी पोर्ट्स के म्यांमार की सेना के साथ कारोबारी संबंध होने के कारण यह फैसला लिया गया है।
म्यांमार के यांगोन में पोर्ट बना रही है अदाणी पोर्ट
अदाणी ग्रुप की कंपनी म्यांमार के यांगोन में एक पोर्ट बना रही है। इस पोर्ट की लागत 290 मिलियन डॉलर करीब 2100 करोड़ रुपए है। इस पोर्ट के लिए म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन ने किराए पर जमीन दी है। म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन को वहां की सेना का समर्थन प्राप्त है। म्यांमार की सेना ने 1 फरवरी को सैन्य तख्ता पलट कर दिया था। इसको लेकर वहां सेना विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में म्यांमार के 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। अमेरिका समेत कई देश और मानवाधिकार कार्यकर्ता म्यांमार की सेना पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। सेना ने तख्ता पलट के जरिए जनता के द्वारा चुनी गई आंग सांग सू की सरकार को सत्ता से बेदखल किया है।
सभी स्टेक होल्डर्स से बात कर रही है कंपनी
म्यांमार की सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के बाद अदाणी पोर्ट्स सतर्क हो गई है। अदाणी पोर्ट्स ने पिछले महीने कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट को लेकर सभी संबंधित एजेंसियों और स्टेक होल्डर्स से बातचीत कर रही है। अमेरिका और ब्रिटेन ने मार्च में म्यांमार की सेना से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। बाइडेन प्रशासन ने जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है उसमें म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन और म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग पब्लिक कंपनी लिमिटेड और एक सरकारी जेम्स कंपनी शामिल है। इस कंपनी का नाम सामने नहीं आ पाया है। अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल ने 25 मार्च को प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।
जापान की कंपनी ने रूश्व॥रु से साझेदारी तोड़ी
म्यांमार में सेना का विरोध बढऩे के बाद जापान की दिग्गज ड्रिंक कंपनी किरिन होल्डिंग्स ने फरवरी में के साथ साझेदारी तोड़ दी थी। वहीं, दक्षिण कोरिया की स्टील निर्माता कंपनी भी से संबंध तोडऩे की दिशा में आगे बढ़ गई है। उन विकल्पों पर विचार कर रही है जिनके जरिए से संबंध तोड़े जा सकते हैं।

शेयरों में 4त्न से ज्यादा की गिरावट

एसएंडपी डाउ जोंस की कार्रवाई का असर अदाणी पोर्ट्स के शेयरों पर भी पड़ा है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (क्चस्श्व) में अदाणी पोर्ट्स का शेयरों में 4त्न से ज्यादा की गिरावट हो गई है। दोपहर 12.24 बजे अदाणी पोर्ट्स का शेयर 4.27त्न की गिरावट के साथ 712.70 रुपए प्रति यूनिट पर कारोबार कर रहे हैं।

क्या है सस्टेनिबिलिटी इंडेक्स?

डाउ जोंस के सस्टेनिबिलिटी इंडेक्स को स्&क्क डाउ जोंस इंडिसेज और रौबेको स््ररू (सस्टेनेबल असेट मैनेजमेंट) मिलकर बनाते हैं। इसको सतत सूचकांक भी कहा जाता है। इस इंडेक्स में 61 उद्योगों में से सबसे अधिक सस्टेनेबल कंपनियों को शामिल किया जाता है। इस इंडेक्स में शामिल होने वाली कंपनियों का चयन गवर्नेंस, सामाजिक और पर्यावरण क्षेत्र में अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है।

निवेशकों के काम की बात: 12 हजार करोड़ रुपए का शेयर बायबैक ला सकती है इंफोसिस, 14 प्रतिशत का प्रीमियम मिलने की उम्मीद


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। देश की दिग्गज आईटी सर्विसेज कंपनी इंफोसिस शेयर बायबैक लाने पर विचार कर रही है। इसको लेकर अंतिम फैसला कंपनी की बोर्ड बैठक में 14 अप्रैल को होगा। यदि शेयर बायबैक को मंजूरी मिल जाती है तो बीते पांच सालों में यह कंपनी का तीसरा बायबैक होगा। इस शेयर बायबैक का साइज 10-12 हजार करोड़ रुपए हो सकता है।
1670 रुपए प्रति शेयर पर हो सकता है बायबैक
एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बायबैक 1650 से 1670 रुपए प्रति शेयर के बीच लाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो शेयरहोल्डर्स को करीब 14त्न का प्रीमियम मिल सकता है। सोमवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज में इंफोसिस का शेयर सुबह 9.40 बजे 1460.50 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा है। कंपनी की ओर से रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा गया है कि 14 अप्रैल को वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च 2021 तिमाही के वित्तीय नतीजे भी जारी किए जाएंगे। 2017-18 में इंफोसिस 13 हजार करोड़ रुपए का शेयर बायबैक लाई थी। इसमें 1150 रुपए प्रति यूनिट की दर से शेयरों का बायबैक हुआ था। इसके बाद 2019 में 8,260 करोड़ रुपए का शेयर बायबैक हुआ था। इसमें कंपनी ने 800 रुपए प्रति यूनिट की दर पर शेयर वापस खरीदे थे। के डाटा के मुताबिक, बीते 1 साल में इंफोसिस अपने शेयरहोल्डर्स को दो बार डिविडेंड का भुगतान कर चुकी हैं। इसमें शेयरहोल्डर्स को औसतन 21.5 रुपए प्रति यूनिट का डिविडेंड मिला है। वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में इंफोसिस ने बीते 9 साल की सबसे अच्छी ग्रोथ दर्ज की थी। इस तिमाही में कंपनी की ग्रोथ 5.3त्न रही थी। तीसरी तिमाही के नतीजों की बदौलत कंपनी पूरे वित्त वर्ष में 4.5-5 प्रतिशत की ग्रोथ की उम्मीद जता रही है। इससे पहले कंपनी में 2-3 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान जताया था। बैलेंस शीट के अनुसार, दिसंबर 2020 तक कंपनी के पास 33,157 करोड़ रुपए का कैश और करेंट इन्वेस्टमेंट था। सेबी के नियमों के मुताबिक, कंपनी अपनी कुल नेटवर्थ का 25त्न हिस्सा शेयर बायबैक कार्यक्रम में इस्तेमाल कर सकती है।  

सोमवार को क्चस्श्व में इंफोसिस का मार्केट कैप करीब 6.2 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। मार्केट कैप के लिहाज से इंफोसिस देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। मार्केट कैप में इससे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस और एचडीएफसी बैंक का नंबर आता है। बीते 1 साल में इंफोसिस का शेयर 126त्न चढ़ चुका है। 13 अप्रैल 2020 को कंपनी का शेयर 637 रुपए प्रति यूनिट पर कारोबार कर रहा था जो 9 अप्रैल 2021 को 1441 रुपए प्रति यूनिट पर बंद हुआ था।

बीते 4 सालों में आईटी कंपनियों ने पेआउट बढ़ाया

शेयरहोल्डर्स को पूंजी लौटाने के लिए बायबैक एक टैक्स किफायती तरीका है। बीते चार सालों में आईटी कंपनियों ने डिविडेंड और बायबैक के जरिए पेआउट बढ़ाया है। 2017 से अब तक टीसीएस और विप्रो तीन बार बायबैक ला चुकी हैं। जबकि एचसीएल टेक्नोलॉजी 2 बार बायबैक लाई है। विप्रो 2019 में करीब 14 हजार करोड़, 2017 में 11 हजार करोड़ और 2016 में 2500 करोड़ रुपए का बायबैक लाई थी।

बाजार में गिरावट से निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स 1700 पॉइंट गिरकर 2 महीने बाद 48 हजार के नीचे बंद


जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। कोरोना और लॉकडाउन के चलते शेयर मार्केट में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 1000 पॉइंट गिर गया। दोपहर तक इंडेक्स 48 हजार के नीचे आ गया। बाजार सुबह ही सेंसेक्स 634.67 अंक नीचे 48,956.65 पर खुला था। दिनभर भारी गिरावट के बाद अंत में इडेक्स 1,707 अंकों की भारी गिरावट के साथ 47,883 पर बंद हुआ है। इससे निवेशकों के 8.4 लाख करोड़ रुपए डूब गए। इससे पहले 29 जनवरी को इंडेक्स 48 हजार के नीचे 46,285 अंकों पर बंद हुआ था। सेंसेक्स में शामिल 30 में से 29 शेयरों में गिरावट रही। इंडेक्स में इंडसइंड बैंक का शेयर सबसे ज्यादा 8.6त्न नीचे आ गया है। वहीं, डॉ. रेड्डीज का शेयर 4.8त्न ऊपर चढ़कर बंद हुआ है। निफ्टी भी 524 अंकों की गिरावट के साथ 14,310 पर बंद हुआ है। कारोबार के दौरान इंडेक्स दिन के सबसे ऊपरी स्तर 14,652 तक भी पहुंचा। 1. देश में लगातार कोरोना के नए केस बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में एक लाख 69 हजार 914 मामले सामने आए। यह देश में एक दिन में मिलने वाले संक्रमितों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2. दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट रही। इनमें चीन का शंघाई कंपोजिट, हॉन्गकॉन्ग का हेंगसेंग और जापान का निक्केई इंडेक्स शामिल है। 3. चौथी तिमाही के नतीजों से पहले निवेशक नर्वस हैं। लगातार दो तिमाहियों में अच्छे रिजल्ट के बाद चौथी तिमाही के दौरान कोरोना का असर देखने को मिल सकता है इसीलिए निवेशक निवेश से पहले सतर्क हैं। आज की भारी गिरावट में बैंकिंग सेक्टर के शेयर सबसे आगे हैं। निफ्टी बैंक इंडेक्स 1,656 पॉइंट यानी 5.1त्न नीचे 30,792 पर आ गया है। इसमें क्रक्चरु और क्कहृक्च बैंक के शेयर 10-10त्न की गिरावट के साथ बंद हुए हैं। बैंकिंग शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह लॉकडाउन है, क्योंकि इससे बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ रहा है। लॉकडाउन का बाजार पर असर
इसी तरह ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों में भी भारी गिरावट रही। हृस्श्व पर दोनों इंडेक्स 6त्न तक गिरे। हालांकि, फार्मा शेयरों ने अपनी बढ़त कायम रखी है। सिप्ला के शेयर में 3त्न से ज्यादा की गिरावट है। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कई राज्यों में जगह-जगह लॉकडाउन लगाया जा रहा है। इससे इकोनॉमिकल एक्टिविटीज पर बुरा असर पड़ रहा है। नतीया यह है कि बाजार में चौतरफा गिरावट है। 3,070 शेयरों में कारोबार हो रहा है। 437 शेयर बढ़त और 2,452 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। इसमें 403 शेयरों में लोअर सर्किट लग गया है।

 एक्सचेंज पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट 201.32 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो शुक्रवार को 209.63 लाख करोड़ रुपए था। इस लिहाज से मार्केट कैप 8.31 लाख करोड़ रुपए घटा है।

पहली लहर में भी बाजार लुढ़का था
पिछले साल कोरोना की वजह से 23 मार्च से बाजार में गिरावट दिखी थी। तब सेंसेक्स अपने निचले स्तर पर 25,800 पर पहुंच गया था। हालांकि, वहां से यह रिकवर कर इस साल 16 फरवरी में 52,500 के पार पहुंच गया था। लेकिन पिछले दिनों से कोरोना के नए मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से इसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। आज कारोबार के दौरान दिन के सबसे निचले लेवल 47,755 तक भी आया।

विदेशी निवेशकों ने घरेलू मार्केट से निकाले 929 करोड़ रुपए
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक 1- 9 अप्रैल के दौरान विदेशी निवेशकों यानी स्नढ्ढढ्ढ ने घरेलू मार्केट से 740 करोड़ रुपए और डेट या बॉन्ड मार्केट से 189 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। पिछले कुछ महीनों से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार जोरदार निवेश किया, लेकिन कोरोना के बढ़ते नए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। इससे निवेशक अब दूसरे उभरते बाजारों में निवेश कर रहे हैं, जिनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान शामिल है।
 

निवेशकों को स्टार्टअप में दिख रहे मौके: पिछले हफ्ते 11,588 करोड़ रुपए जुटाकर यूनिकॉर्न बनीं छह स्टार्टअप, इस साल 50 से ज्यादा इंडियन स्टार्टअप बन सकती हैं यूनिकॉर्न


जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। पिछले हफ्ते छह इंडियन स्टार्टअप ने रिकॉर्ड कुल 1.55 अरब डॉलर यानी लगभग 11,588 करोड़ रुपए जुटाए। ये स्टार्टअप इस निवेश से यूनिकॉर्न की जमात में शामिल हो गईं। एक अरब डॉलर से ज्यादा वैल्यू वाली प्राइवेट स्टार्टअप यूनिकॉर्न कहलाती हैं। पिछले साल देश में 12 ऐसी स्टार्टअप शुरू हुईं, जो अपना नाम यूनिकॉर्न की लिस्ट में दर्ज करा चुकी हैं और इस साल 10 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन भी चुकी हैं। इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम और टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी जिनोव की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया में इस साल 50 से ज्यादा स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन सकती हैं। हेल्थकेयर, सोशल कॉमर्स, फिनटेक के अलावा सोशल और कंटेंट प्लेटफॉर्म ने जुटाए पैसे पिछले हफ्ते जिन स्टार्टअप्स ने छह निवेश के लिए डील कीं, वे अलग अलग अलग-अलग सेक्टरों की थीं। उनमें हेल्थकेयर (फार्मेसी), सोशल कॉमर्स (मीशो), फिनटेक (ग्रो और क्रेड) के अलावा सोशल और कंटेंट प्लेटफॉर्म गपशप और शेयरचैट की पेरेंट कंपनी मोहल्ला टेक शामिल हैं। सबसे ज्यादा इंडियन स्टार्टअप (छह में से चार) में पैसा न्यूयॉर्क के फंड टाइगर ग्लोबल ने लगाया है। यह शेयरचैट के 50.2 करोड़ डॉलर और ग्रो के 8.3 करोड़ डॉलर के हालिया इनवेस्टमेंट राउंड में लीड इनवेस्टर रहा। टाइगर ग्लोबल ने गपशप में 10 करोड़ डॉलर लगाए। इंडिया कोशंट के फाउंडिंग पार्टनर आनंद लूनिया टाइगर को नया सॉफ्टबैंक बता रहे हैं। स्टार्टअप के अर्ली स्टेज में पैसा लगाने वाले इस फंड का निवेश लेंडिंगकार्ट, शुगर कॉस्मेटिक्स और शेयरचैट में है।

सॉफ्टबैंक के विजन फंड 2 ने सोशल प्लेटफॉर्म मीशू में 30 करोड़ डॉलर लगाए हैं।

मीशू के फाउंडर और ष्टश्वह्र विदित आत्रे बताते हैं कि शुरुआती वर्षों में उनको कई बार इनकार सुनना पड़ा। आत्रे का कहना है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि कि उनकी स्टार्टअप देश में छोटे कारोबारियों के साथ काम कर रही है। स्टार्टअप का मकसद 10 करोड़ छोटे कारोबार को ऑनलाइन लाना है।

इंडियन स्टार्टअप ने 3 से 9 अप्रैल के बीच कुल 21 डील कीं, 19,400 करोड़ रुपए जुटाए

इंडस्ट्री को ट्रैक करने वाली फर्म वेंचर इंटेलीजेंस के मुताबिक इंडियन स्टार्टअप ने 3 से 9 अप्रैल के बीच निवेश के लिए कुल 21 डील कीं। उन कंपनियों ने उनसे 2.6 अरब डॉलर (19,400 करोड़ रुपए) जुटाए।

लूनिया कहते हैं कि बाजार में पूंजी बहुत सस्ती है। ऐसे में निवेशकों ने वैल्यूएशन के लिए कैश फ्लो शुरू होने के अनुमानित समय से आगे का सोचना शुरू कर दिया है। बढ़ते रेवेन्यू और कस्टमर वाली स्ड्डड्डस् कंपनियां और दबदबे वाली कंज्यूमर कंपनियां पहले से ज्यादा वैल्यूएबल हो गई हैं।

स्विगी में 5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर निवेश, जोमैटो से कॉम्पिटिशन के लिए रिजर्व बढ़ाया

टाइगर ग्लोबल के अलावा न्यूयॉर्क के दूसरे इनवेस्टर फाल्कन एज ने भी जमकर पैसा लगाया था। उसने स्विगी के 80 करोड़ डॉलर के इनवेस्टमेंट राउंड में अमांसा कैपिटल के साथ मिलकर निवेश किया है। निवेश 5 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर हुआ है। इससे स्विगी ने अपना रिजर्व बढ़ाया है जिससे उसको ढ्ढक्कह्र लाने की दिशा में बढ़ रही कॉम्पिटिटर जोमाटो को जोरदार कॉम्पिटिशन देने में मदद मिलेगी।

एयरबीएनबी को सपोर्ट देने वाली जनरल कैटलिस्ट का पुरानी कारें बेचने वाली स्पिनी पर दाव

फाल्कन एज फिनटेक स्टार्टअप क्रेड के 21.5 करोड़ के इनवेस्टमेंट राउंड में लीड इनवेस्टर रहा है। उसमें यह निवेश 2.2 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर हुआ है। इसके अलावा स्नैप, एयरबीएनबी और स्ट्राइप जैसी कंपनियों को शुरुआती सपोर्ट देने वाली जनरल कैटलिस्ट ने पुरानी कारें बेचने वाली स्पिनी पर दाव लगाया है। उसने ह्रस्नक्च टेक के बिजनेस टू बिजनेस प्लेटफॉर्म ऑफबिजनेस में भी निवेश किया है।

इस साल 8 अप्रैल तक स्टार्टअप ने 63 डील के जरिए जुटाए हैं औसतन 62.9 लाख डॉलर

देश में जनवरी से स्टार्टअप में रिकॉर्ड तोड़ निवेश हो रहा है। उनकी डील फटाफट हो रही हैं, उसका एवरेज साइज बढ़ा है। इसके अलावा कंपनियां प्लानिंग से ज्यादा फंड जुटा रही हैं। रिसर्च फर्म ट्रैक्शन के 8 अप्रैल तक के डेटा के मुताबिक स्टार्टअप ने 63 डील के जरिए औसतन 62.9 लाख डॉलर जुटाए हैं। यह उनकी तरफ से पिछले पांच साल में मार्च तिमाही में जुटाई गई सबसे ज्यादा रकम है।

सुरक्षित निवेश: पीपीएफ अकाउंट के जरिए आप भी आस


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। महंगाई के जमाने में अपने बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए बढ़ा फंड तैयार कर पाना आसान काम नहीं है। लेकिन पब्लिक प्रॉविडेंट फंड स्कीम आपके इस काम को आसान बना सकती है। इस स्कीम के तहत फिलहाल 7.1 सालाना ब्याज दिया जा रहा है। इसमें निवेश करके आप 1 करोड़ से ज्यादा का फंड तैयार कर सकते हैं। हम आपको इस स्कीम के साथ यह बता रहे हैं ताकि आप भी आसानी से बड़ा फंड तैयार कर सकें।
पोस्ट ऑफिस या बैंक में खोल सकते हैं अकाउंट
एक खाता किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक में अपने नाम से और नाबालिग की तरफ से किसी और व्यक्ति द्वारा खोला जा सकता है। हालांकि, नियमों के अनुसार, एक हिंदू अविभाजित परिवार के नाम पर एक अकाउंट खोला नहीं जा सकता है।
500 रुपए में खोल सकते हैं अकाउंट
अकाउंट खोलने के लिए आवश्यक न्यूनतम राशि 500 रुपए है। किसी वित्त वर्ष में न्यूनतम 500 रुपए जमा करने की जरूरत है, जबकि अधिकतम निवेश सीमा 1.5 लाख रुपए सालाना तय की गई है। अकाउंट 15 साल में मैच्योर होता है, हालांकि अवधि को परिपक्वता के एक साल के भीतर 5-5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए मैच्योरिटी पूरा होने के एक साल पहले ही बढ़ाना होगा। यानी आप इस स्कीम में कुल 25 साल के लिए निवेश कर सकते हैं। आप 15, 20 या 25 साल बाद अपना पैसा निकाल सकते हैं।
5 साल का रहता है लॉक इन पीरियड
हालांकि अकाउंट खोलने वाले साल के बाद 5 साल तक इस खाते से पैसा नहीं निकाला जा सकता। ये अवधि पूरा होने के बाद फॉर्म 2 भर कर पैसा निकाला जा सकेगा। हालांकि 15 साल साल पहले पैसा निकालने पर आपके फंड से 1त्न की कटौती की जाएगी। पीपीएफ की श्रेणी में आती है। यानी योजना में किए गए पूरे निवेश पर आपको टैक्स छूट का लाभ मिलता है। 


साथ ही इस योजना में निवेश से मिलने वाले ब्याज और निवेश की संपूर्ण राशि पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं देना होता। क्कक्कस्न इन्वेस्टमेंट पर मिलने वाले इंटरेस्ट की दर हर तीन महीने में बदलती रहती है। पीपीएफ अकाउंट को किसी भी कोर्ट या आदेश द्वारा कर्ज या अन्य लायबिलिटी के समय जब्त नहीं किया जा सकता है।

कौन खोल सकता है क्कक्कस्न अकाउंट?
कोई भी व्यक्ति किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक में अपने नाम पर यह अकाउंट खोल सकता है। इसके अलावा नाबालिग की तरफ से किसी और व्यक्ति द्वारा भी से खाता खोला जा सकता है।

हर महीने 12,500 रुपए निवेश करने पर मिलेंगे 1.02 करोड़ रुपए
इस स्कीम के जरिए अगर आप 1 करोड़ रुपए का फंड तैयार करना चाहते हैं तो आपको 25 साल तक हर महीने 12,500 रुपए निवेश करने होंगे। वहीं अगर आप 10 हजार रुपए महीना निवेश करते हैं तो आपको 25 साल बाद लगभग 81.76 लाख रुपए मिलेंगे। यहां जानें इसमें निवेश करने पर आपको कितना फायदा होगा।

ानी से तैयार कर सकते हैं 1 करोड़ से ज्यादा का फंड, इसमें मिल रहा 7.1 प्रतिशत ब्याज

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से राहत की मांग: पिछले साल 9 महीने में सरकारी खजाने में पहुंचे 1.36 लाख करोड़ रु, वैट वसूलने में राजस्थान-एमपी आगे


जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)।  देश में पेट्रोल-डीजल के दामों को कम करने की मांग होने लगी है। शनिवार को राजस्थान के पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों ने पंप बंद रखकर वैट (राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स) कम कर ने की मांग की। पेट्रोल-डीजल पर वैट वसूलने के मामले में मणिपुर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और असम आगे हैं। देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 100 रुपए और डीजल के 90 रुपए प्रति लीटर के पार निकल गए हैं। वैट वसूलने के मामले में मणिपुर सबसे आगे हो गया है। यहां पेट्रोल पर 36.50त्न और डीजल पर 22.50त्न टैक्स वसूला जा रहा है। बड़े राज्यों में तमिलनाडु में वैट कम है। यहां पेट्रोल पर 15त्न और डीजल पर 11त्न टैक्स वसूला जाता है। लेकिन पेंच यह है कि यहां वैट के साथ पेट्रोल पर 13.02 रुपए और डीजल पर 9.62 रुपए प्रति लीटर सेस (उपकर) भी वसूला जाता है। ज्यादातर राज्य सेस वसूल रहे हैं। लक्षद्वीप एक मात्र ऐसा राज्य है जहां वैट नहीं लिया जाता है। वैट से कमाई के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है। 2019-20 में वैट के जरिए राज्य सरकार को 26,791 करोड़ रुपए कर कमाई हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है उसने 20,112 करोड़ रुपए की कमाई की। राज्यों को पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाने से होने वाली कमाई 5 साल में 43त्न बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014-15 में इससे होने वाली कमाई 1.37 लाख करोड़ थी जो 2019-20 में बढ़कर 2 लाख करोड़ पर पहुंच गई।

 कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीनों तिमाही (अप्रैल-दिसंबर) में वैट से 1.36 रुपए करोड़ की कमाई हुई है।

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल पर वसूलती हैं भारी टैक्स

पेट्रोल का बेस प्राइज अभी 33 रुपए और डीजल का बेस प्राइज 34 रुपए के करीब है। इस पर केंद्र सरकार 33 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। इसके बाद राज्य सरकारें इस पर अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं, जिसके बाद इनका दाम बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गया है।