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कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित हुआ एमएसएमई सेक्टर; 35 फीसदी रोजगार की वापसी मुश्किल, बंद होने की कगार पर पहुंचे

उद्योगों को बंद करने का कारण पूरी तरह से कोरोना महामारी नहीं हो सकती: पूर्व अध्यक्ष, एआईएमओ
नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में अब ऑल इंडिया मैन्युफैक्चर्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक देश में एक तिहाई से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम में रिकवरी का कोई आधार नजर नहीं आ रहा है। जिसके चलते ये उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। बता दें कि इस सर्वे में नौ अन्य उद्योग निकायों को शामिल किया गया है। ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गनाइजेशन ने इस सर्वे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, स्व-नियोजित, कॉर्पोरेट सीईओ और कर्मचारियों की 46,000 प्रतिक्रियाओं को शामिल किया है। इस सर्वे को 24 मई से 30 मई के बीच ऑनलाइन किया गया था।
सर्वे के मुताबिक 35 फीसदी एमएसएमई और 37 फीसदी स्व-नियोजित रोजगार से जुड़े लोगों ने कहा कि उनके उद्योग की वापसी बहुत मुश्किल हैं। 32 फीसदी एमएसएमई ने कहा कि उनके उद्योगों को स्थिति से उबरने में छह महीने का समय लगेगा। जबकि महज 12 फीसदी ने कहा कि तीन महीने से भी कम वक्त में उनके उद्योग की स्थिति संभल जाएगी।
उद्योग बंद होने की वजह पूरी तरह कोरोना नहीं: रघुनाथन
एआईएमओ के पूर्व अध्यक्ष केई रघुनाथन ने कहा, उद्योगों के संचालन में कमी, भविष्य के बारे में अनिश्चितता छोटे और मध्यम उद्योगों से संबंधित प्रमुख कारकों में एक है। लेकिन उद्योगों को बंद करने का कारण पूरी तरह से कोरोना महामारी नहीं हो सकती। उद्योग पहले से ही विभिन्न परेशानियों का सामना कर रहे हैं, फिर चाहे नोटबंदी रही हो या जीएसटी। रघुनाथन ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण उद्योगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। 

आजादी के बाद से इस तरह बड़े पैमाने पर व्यापार को नुकसान नहीं हुआ है।

भारत के साख में कमी का मूडीज का कदम प्रत्याशित, रेटिंग के निवेश स्तर से नीचे जाने का जोखिम नहीं

मुंबई। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बोफा ने कहा कि मूडीज द्वारा भारत की साख को कम किया जाना अप्रत्याशित नहीं है। उसने कहा कि उच्च मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार और अच्छी खेती तथा उपज की संभावना से इसके निवेश स्तर से नीचे जाने की आशंका नहीं है। मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने सोमवार को वृद्धि और राजकोषीय जोखिम की चिंता में नकारात्मक परिदृश्य के साथ देश की रेटिंग एक पायदान कम कर बीएए3 कर दी। यह रेटिंग निवेश का सबसे निचला स्तर है। रेटिंग एजेंसी ने दो दशक से भी अधिक समय में भारत की साख घटायी है। बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्रियों ने कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव को देखते हुए वित्तीय प्रोत्साहन उपाय जारी रखने की भी वकालत की है। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ''साख में कमी कोई अप्रत्याशित नहीं है...पुनरूद्धार के लिये वित्तीय प्रोत्साहन जरूरी है।ÓÓ उसने कहा कि हालांकि भारत को साख में और कमी तथा इसके गैर-निवेश स्तर श्रेणी की रेटिंग में जाने को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। ब्रोकरेज कंपनी के अनुसार उच्च मात्र में विदेशी मुद्रा भंडार, अलग से बांड या आरबीआई के 127 अरब डॉलर के पुनर्मूल्यांकित भंडार के जरिये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डाले जाने की उम्मीद तथा बेहतर कृषि उपज की उम्मीद को देखते हुए रेटिंग में और कमी की संभावना नहीं हैं। बोफा के अनुसार 2018 में आरबीआई द्वारा नीतिगत दर को जरूरत से ज्यादा कड़ा किया जाना, 2019 में थोक महंगाई दर में गिरावट के कारण कर्ज के मोर्चे पर एक झटका लगा। वहीं वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस महामारी से आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर झटका लगा है।

ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि देश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 2020-21 में 2 प्रतिशत की गिरावट आएगी जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में इसमें 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। आरबीआई का भी मानना है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में गिरावट आएगी। हालांकि उसने इस बारे में कोई आंकड़ा नहीं दिया। वहीं कुछ विश्लेषकों ने अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत गिरावट आने की आशंका व्यक्त की है।

एनटीपीसी ने वितरण कारोबार के लिये सीईओ पद के लिये आवेदन मंगाये

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी ने कहा कि उसने अपने बिजली वितरण कारोबार के लिये मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पिछले सप्ताह एनटीपीसी ने बिजली वितरण कारोबार में कदम रखने की घोषणा की और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की दिल्ली में दो वितरण कंपनियों में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की भी पेशकश की। एनटीपीसी ने पिछले सप्ताह दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) को लिखे पत्र में कहा था कि उसे पता चला है कि एडीएजी बीएसईएस राजधानी पावर लि. (बीआरपीएल) और बीएसईएस यमुना पावर लि. (बीवाईपीएल) में अपनी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहता है और कंपनी वितरण इकाइयों को खरीदने को लेकर गंभीर है। कंपनी ने एक विज्ञापन में कहा, ''एनटीपीसी को वितरण कारोबार के सीईओ के लिये एक अनुभवी पेशेवर की तलाश है।ÓÓ आवेदनकर्ता के लिये अधिकतम उम्र 55 है और उसके पास मान्यता प्राप्त संस्थान से मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री होनी चाहिए।

 इस पद के लिये आवेदनकर्ता के पास बिजली वितरण कारोबार के अलावा कारोबार बढ़ाने के साथ बिजली उद्योग की वाणिज्यिक पहलुओं, विद्युत नियमन और वितरण कारोबार से जुड़ी बारीकियों के बारे में 25 साल का अनुभव होना चाहिए।
नियुक्ति तीन साल के लिये होगी और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2020 है।
एनटीपीसी की बिजली उत्पादन क्षमता फिलहाल 62,110 मेगावाट है।

सीएमआइई रिपोर्ट: भारत की बेरोजगारी दर 31 मई को खत्म सप्ताह में 23.48प्रतिशत पर पहुंची, पिछले महीने की तुलना में कम हुई

नई दिल्ली। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक 31 मई को खत्म हुए सप्ताह में भारत की बेरोजगारी दर 23.48फिसदी पर पहुंच गई है। ये अप्रैल में 23.52फिसदी  से थोड़ी कम है। इससे पहले 24 मई को खत्म हुए सप्ताह में बेरोजगारी दर 24.3 प्रतिशत दर्ज की गई थी। यह लॉकडाउन के दौरान के पिछले 8 सप्ताह में दौरान की औसतन 24.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर से भी अधिक थी।
पिछले सप्ताह 38.7प्रतिशत रही श्रम भागीदारी दर
24 मई को खत्म हुए सप्ताह में श्रम भागीदारी दर 38.7 प्रतिशत थी। पूर्ववर्ती सप्ताह में यह 38.8 प्रतिशत से कम थी। श्रमिक भागीदारी दर में यह गिरावट तीन सप्ताह की निरंतर वृद्धि के बाद आती है। जबकि लॉकडाउन के दौरान बेरोजगारी दर लगभग 24 प्रतिशत स्थिर रही है। बेरोजगारी दर मार्च में 8.8 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 23.5 प्रतिशत हो गई थी। शहरी और ग्रामीण क्षत्रों में लगातार बेराजगारी दर बढ़ रही है। जनवरी 2020 में शहरी बेरोजगारी दर 9.70 फीसदी थी, जो मई में 16.09 फीसदी बढ़कर 25.79 फीसदी पर पहुंच गई। ठीक इसी तरह, जनवरी 2020 में ग्रामीण बेरोजगारी दर 6.06 फीसदी थी, जो मई में 16.42 फीसदी बढ़कर 22.48 फीसदी पर पहुंच गई।
अप्रैल में घटी थी एलपीआर
दूसरी ओर, श्रम भागीदारी दर मार्च में 41.9 प्रतिशत से 6.3 प्रतिशत घटकर अप्रैल में 35.6 प्रतिशत हो गई। श्रम भागीदारी दर महीने में लगभग सप्ताह-दर-सप्ताह बढ़ रहा है। 17 मई को खत्म हुए सप्ताह के दौरान यह 38.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। ऐसा लगता है कि तकनीकी रूप से अप्रैल में श्रम के एक बड़े हिस्सा ने बाजार को छोड़ दिया था, वो वापस लौट रहा है।
सीएमआईई के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण की जानकारी के मुताबिक अप्रैल में श्रम बल 68 मिलियन गिरकर 437 मिलियन तक पहुंच गया, जो अप्रैल में 2019-20 में 369 मिलियन हो गया था। इन 68 मिलियन ने सक्रिय रूप से नौकरियों की तलाश बंद कर दी थी। रोचक बात ये है कि उन्होंने नौकरियों में रुचि नहीं दिखाई।
नौकरी पर लौटे 2 करोड़ लोग
सीएमआईई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन को आसान करने के बाद मई में लगभग 20 मिलियन (2 करोड़) लोग नौकरी पर वापस लौटे हैं। जिससे भारत की रोजगार दर मई में 2प्रतिशत बढ़कर 29प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 27प्रतिशत थी। ष्टरूढ्ढश्व के अनुमान के मुताबिक 25 मार्च शुरू हुए लॉकडाउन की वजह से देश के 122 मिलियन (करीब 12.20 करोड़) लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। 


ष्टरूढ्ढश्व के अनुसार, मई में सप्ताह के बाद श्रम भागीदारी दर बढ़ रही है, 17 मई को खत्म हुए सप्ताह में ये 38.8प्रतिशत रही थी। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,90,622 हो गई है। इनमें 93,348 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 91,855 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 5,408 हो चुकी है।
 ये आंकड़े ष्श1द्बस्र19द्बठ्ठस्रद्बड्ड.शह्म्द्द के अनुसार हैं।

जीएसटी काउंसिल की 40वीं बैठक 14 जून को, गैर-जरूरी वस्तुओं पर टैक्स बढ़ाने पर हो सकता है विचार

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की 40वीं बैठक 14 जून को हो सकती है। कोरोना महामारी के सामने आने के बाद जीएसटी काउंसिल की यह पहली बैठक होगी। कोरोना संक्रमण सामने आने के बाद पूरे देश में 25 मई से लॉकडाउन लागू है। इस कारण टैक्स वसूली बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इस बैठक में टैक्स वसूली में तेजी के लिए गैर-जरूरी वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है। यह जानकारी सूत्रों ने दी है। जीएसटी काउंसिल की बैठक की प्रमुख केंद्रीय वित्त मंत्री हैं, जबकि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री काउंसिल के सदस्य हैं। सूत्रों के मुताबिक, 14 जून को होने वाली बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इससे पहले मार्च में हुई जीएसटी काउंसिल की 39वीं बैठक में कोरोनावायरस के अर्थव्यवस्था पर पडऩे वाले प्रभाव पर चर्चा की गई थी। हालांकि, तब देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या काफी कम थी और लॉकडाउन भी लागू नहीं हुआ था।  सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय लॉकडाउन के कारण राजस्व वसूली में गिरावट के बावजूद जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में गैर जरूरी वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यदि गैर-जरूरी वस्तुओं पर टैक्स की दर बढ़ाई जाती है तो इससे इनकी मांग में कमी आ जाएगी जिससे ओवरऑल आर्थिक रिकवरी पर प्रभाव पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, लॉकडाउन के बाद गैरजरूरी वस्तु ही नहीं बल्कि सभी मोर्चों पर मांग में तेजी आएगी और आर्थिक रिकवरी में सुधार होगा।
 

इस समय कर लगाने से प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा

सूत्रों का कहना है कि कोविड-19 के कारण बने आर्थिक परिदृश्य में किसी भी प्रकार का विपत्ति उपकर लगाने से इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सूत्रों ने कहा कि मांग में कमी के कारण बिक्री पहले ही घट गई है। ऐसे में किसी भी प्रकार का टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव से कीमतें बढ़ जाएंगी जिससे बिक्री के आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।

अप्रैल में केंद्र सरकार को जीएसटी से 5,934 करोड़ रुपए मिले, पिछले साल की तुलना में 87 प्रतिशत कम

पिछले साल अप्रैल महीने में 46,848 करोड़ रुपए केंद्र सरकार को जीएसटी के रूप में मिले थे
मुंबई। लॉकडाउन की वजह से केंद्र सरकार को जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर जबरदस्त झटका लगा है। चालू वित्त वर्ष के पहले महीने अप्रैल में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में 5,934 करोड़ रुपए मिले हैं। पिछले साल में इसी महीने में मिले 46,848 करोड़ रुपए की तुलना में यह 87 प्रतिशत कम है। यह आंकड़े मार्च की आर्थिक गतिविधियों से संबंधित हैं। रेवेन्यू कलेक्शन में आई इस कमी को लॉक डाउन से जोड़कर देखा जा रहा है। देश में 24 मार्च से कोरोनावायरस को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन शुरू किया गया था। इस वजह से रिटर्न्स फाइलिंग को जून तक के लिए टाल दिया गया है। शुक्रवार को ही जीडीपी के आंकड़े भी जारी किए गए थे जो सालाना आधार पर 4.2 प्रतिशत था। हालांकि उस पर भी असर देखा गया। चूंकि मार्च के अंतिम हफ्ते से लॉकडाउन शुरू हुआ था, इसलिए उस पर जीएसटी की तरह असर नहीं दिखा है। 
केंद्र के आंकड़ों से पूरे जीएसटी का परिणाम निकालना संभव नहीं
आंकड़ों से, कुल जीएसटी कलेक्शन का परिणाम निकालना संभव नहीं है, क्योंकि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) आमतौर पर केंद्र की तुलना में अधिक होता है। मसलन, सीजीएसटी मार्च में 19,183 करोड़ रुपए और एसजीएसटी 25,601 करोड़ रुपए था। इसके बाद इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) है और यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कितना आवंटन राज्यों को होता है। अप्रैल में आईजीएसटी 9749 करोड़ रुपए रहा। हालांकि यह पिछले साल के अप्रैल में माइनस 564 करोड़ रुपए से काफी ज्यादा था। माइनस में अगर आंकड़ा रहता है तो केंद्र द्वारा एकत्र की गई तुलना में राज्यों को अधिक आवंटन होते हैं।
वैसे इससे पहले हर महीने जीएसटी कलेक्शन करीबन एक लाख करोड़ रुपए होता था। हालांकि सरकार ने अप्रैल महीने के कलेक्शन को काफी देर से घोषित किया है। आमतौर पर कलेक्शन का आंकड़ा महीने की अंतिम तारीख या अगले महीने की पहली तारीख तक आ जाता है। वैसे विश्लेषकों का मानना है कि मई महीने के भी जीएसटी कलेक्शन में अच्छी खासी गिरावट दिख सकती है। क्योंकि मई महीने में लॉकडाउन में ढील तो मिली है, पर पूरी तरह से अभी भी गतिविधियां चालू नहीं हो पाई हैं।
सरकार ने पहले घोषणा की थी कि 5 करोड़ रुपए से कम के कुल वार्षिक कारोबार वाले रजिस्टर्ड जीएसटी करदाता जून 2020 के अंतिम सप्ताह तक मार्च, अप्रैल और मई 2020 के जीएसटीआर-3बी (समरी इनपुट-आउटपुट रिटर्न) दाखिल कर सकते हैं।

 ऐसे करदाताओं के लिए कोई ब्याज, लेट फीस और पेनाल्टी नहीं देनी होगी। कम से कम 5 करोड़ रुपए या उससे अधिक के वार्षिक कारोबार वाले लोग जून 2020 के अंतिम सप्ताह तक मार्च, अप्रैल और मई 2020 में रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इस पर तय तिथि से 9 प्रतिशत प्रति वर्ष पर ब्याज दर में कमी लागू होगी। मौजूदा ब्याज दर 18 फीसदी सालाना है। 

इस साल 30 जून तक जमा होने पर लेट फीस और पेनाल्टी नहीं ली जाएगी।

लॉकडाउन का झटका, अप्रैल में कोर सेक्टर इंडस्ट्रीज के उत्पादन में 38प्रतिशत की गिरावट

नई दिल्ली। कोरोना की वजह से देशभर में जारी लॉकडाउन की वजह से अप्रैल महीने में आठ प्रमुख उद्योगों वाले कोर सेक्टर के उत्पादन में 38.1 फीसदी की गिरावट आई है। मार्च 2020 में आठ कोर सेक्टर के उत्पादन में 9 फीसदी की गिरावट आई थी। कोर सेक्टर के इंडस्ट्रीज में कोयला, सीमेंट, स्टील, नेचुरल गैस, रिफाइनरी, बिजली, उर्वरक और क्रूड ऑयल को शामिल किया जाता है। कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से इनके उत्पादन में भारी गिरावट आई है। सबसे ज्यादा झटका स्टील सेक्टर को लगा है जिसके उत्पादन में करीब 84 फीसदी की गिरावट आई है। गौरतलब है कि देश के कुल औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कोर सेक्टर का वेटेज करीब 40.27 फीसदी होता है। इस दौरान कोयला के उत्पादन में 15.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह कच्चे तेल के उत्पादन में 6.4 फीसदी की गिरावट आई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने के दौरान प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 19.9 फीसदी की भारी गिरावट आई है। इस दौरान रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में भी 24.2 फीसदी की भी गिरावट आई है। इस दौरान उर्वरक के उत्पादन में 4.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह सीमेंट के उत्पादन में 86 फीसदी की जबरदस्त गिरावट आई है। अप्रैल में बिजली के उत्पादन में 22.8 फीसदी की गिरावट आई है। इस दौरान सबसे ज्यादा झटका स्टील और सीमेंट सेक्टर को लगा है।

 जिनके उत्पादन में क्रमश: 83.9 फीसदी और 86 फीसदी की गिरावट आई है।

जनवरी-मार्च तिमाही में 2.2 प्रतिशत अनुमान के मुकाबले जीडीपी वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत रही, सालाना स्तर पर 4.2 प्रतिशत रहा

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 4.7 प्रतिशत थी जीडीपी
2019 के पूरे साल के दौरान 6.1 प्रतिशत था यह आंकड़ा
मुंबई। जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3.1 प्रतिशत रहा है। जबकि अनुमान 2.2 प्रतिशत का था। हालांकि पूरे साल के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर 4.2 प्रतिशत रही। जबकि अनुमान 4.4 प्रतिशत का था। इसी तरह ग्रास वैल्यू एडेड (जीवीए) 3.9 प्रतिशत रहा है जबकि इसका अनुमान 4.3 प्रतिशत का था।  माइनिंग ग्रोथ की बात करें तो यह चौथी तिमाही में 2.2 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत रही है। कृषि की विकास दर इसी अवधि में तिमाही आधार पर 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.9 प्रतिशत पर रही है। इससे पहले अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में यह आंकड़ा 4.7 प्रतिशत था। जबकि 2019 के पूरे साल के दौरान यह आंकड़ा 6.1 प्रतिशत था। इससे पहले अप्रैल में 8 सेक्टर की वृद्धि दर 38.1 प्रतिशत गिरी। मार्च में इसमें 9 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इलेक्ट्रिसिटी आउटपुट 22.8 प्रतिशत गिरा जबकि सीमेंट के आउटपुट में 86 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को शुक्रवार को जारी किया। नेशनल स्टेटेस्टिकल ऑफिस (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।
मार्च में एक हफ्ते की बंदी से ज्यादा असर नहीं
हालांकि इस आंकड़ें पर लॉकडाउन का ज्यादा असर इसलिए नहीं पड़ा है क्योंकि मार्च के अंतिम हफ्ते में लॉकडाउन शुरू हुआ था। इस तरह से देखा जाए तो महज एक हफ्ते के बंद का ही इस पर असर हुआ है। बीते वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में विकास दर क्रमश: 5.1 फीसदी, 5.6 फीसदी और 4.7 फीसदी थी। बता दें कि इससे पहले तमाम एजेंसियों ने अपना-अपना अनुमान पेश किया था। ज्यादातर एजेंसियों ने मार्च तिमाही में 2 प्रतिशत से नीचे ही जीडीपी का अनुमान व्यक्त किया था। हालांकि पूरे साल के लिए यह आंकड़ा 5 प्रतिशत से नीचे का अनुमान लगाया गया था। इक्रा ने मार्च तिमाही के लिए 1.9 प्रतिशत, क्रिसिल ने 0.5 प्रतिशत, एसबीआई ने 1.2 प्रतिशत, केयर ने 3.6 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक ने 1.5 प्रतिशत और नोमुरा ने 1.5 प्रतिशत के जीडीपी का अनुमान लगाय था।   जबकि पूरे साल के लिए इ्रक्रा ने 4.3 प्रतिशत, क्रिसिल ने 4, एसबीआई ने 4.2, केयर ने 4.7, आईसीआईसीआई बैंक ने 5.1 और फिच ने 5 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। बता दें कि लॉकडाउन4.0 रविवार को समाप्त हो रहा है। 

जीडीपी का आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कोविड-19 से लॉकडाउन के बाद यह पहली बार जारी हो रहा है।

लॉकडाउन से पहले देश की विकास दर 6 साल के निचले स्तर पर 

लॉकडाउन से पहले भारत की विकास दर पिछले छह साल में सबसे निचले स्तर पर थी। एसबीआई इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगने की आशंका है। देश की अर्थव्यवस्था को 1.4 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होने की संभावना है। सरकार ने इस साल में पहले ही 12 लाख करोड़ रुपए की उधारी ले रखी है। इसका असर आनेवाले समय में आंकड़ों पर दिखेगा।

स्पाइसजेट ने तीन क्यू400 विमानों को मालवाहक में बदला

नई दिल्ली। किफायती विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट ने यात्री मांग में कमी और कार्गो मांग में तेजी के मद्देनजर अपने तीन क्यू400 विमानों को मालवाहक विमानों में बदल दिया है। एयरलाइन ने छोटे शहरों की हवाई यात्रा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अपने टर्बोप्रॉप इंजन वाले तीन क्यू400 विमानों की सीटें हटाकर इन विमानों में मालढुलाई शुरू कर दी है।  स्पाइसजेट के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने बताया कि हवाई माल परिवहन की माँग लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुये 78 सीट वाले इन क्यू400 विमानों को मालवाहक विमानों में बदला गया है। एक विमान में 8.5 टन सामान की ढुलाई हो सकती है जो छोटे शहरों के लिए एकदम उपयुक्त है। इनका इस्तेमाल पर्वतीय तथा पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए किया जा सकेगा। एयरलाइन के बेड़े में पहले से पांच बोइंग 737 मालवाहक विमान हैं। उसके पास 32 क्यू400 यात्री विमान थे जिनमें से तीन को मालवाहक में बदला गया है। इसके अलावा 82 बोइंग 737 यात्री विमान भी उसके बेड़े में शामिल हैं।  

एसएंडपी का अनुमान, चालू वित्त वर्ष में 5त्न घट सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में पांच फीसदी घट सकती है। एसएंडपी ने एक बयान में कहा, हमने मार्च 2021 में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष के लिए अपने वृद्धि पूर्वानुमान को घटाकर नकारात्मक पांच फीसदी कर दिया है। इस समय हमारा मानना है कि महामारी का प्रकोप तीसरी तिमाही में चरम पर होगा।
इससे पहले इस सप्ताह रेटिंग एजेंसी फिच और क्रिसिल ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी संकुचन का अनुमान जताया था। एसएंडपी ने एक बयान में कहा कि, भारत में कोविड-19 के प्रकोप और लॉकडाउन ने कुछ क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था में अचानक रुकावट पैदा कर दी है। इसका मतलब है कि इस वित्त वर्ष में वृद्धि तेजी से संकुचित होगी। आर्थिक गतिविधियां अगले एक साल तक व्यवधान का सामना करेंगी। भारत में अभी तक कोविड-19 पर काबू नहीं पाया जा सका है। सरकार ने लॉकडाउन के प्रतिबंधों में कमी की है, जिससे संक्रमण के मामले बढ़े हैं। सरकार ने संक्रमण के मामलों के आधार पर देश को ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में विभाजित किया है। ज्यादातर औद्योगिक महत्व के शहर रेड जोन में हैं। एसएंडपी ने कहा, 'हम मानते हैं कि रोड जोन में आर्थिक गतिविधियों के सामान्य होने में अधिक समय लगेगा। 


इससे पूरे देश में आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ेगा और सुधार की रफ्तार धीमी हो जाएगी। हमारा मानना है कि इस दौरान पूरे देश में आर्थिक बहाली की स्थिति अलग-अलग रहेगी।'

रोजगार की स्थिति नाजुक 
बयान में कहा गया कि सबसे अधिक रोजगार देने वाला सेवा क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। श्रमिक भौगोलिक रूप से विस्थापित हो गए हैं और उन्हें लॉकडाउन उबरने में वक्त लगेगा। एसएंडपी के मुताबिक इस दौरान रोजगार की स्थिति नाजुक बनी रहेगी।

कोरोना संकट से दोगुना होगा बैंकों का एनपीए, 1.5 लाख करोड़ डालने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर का हाल पहले से ही काफी बुरा था लेकिन कोरोना के कारण बैड लोन में भारी इजाफा होने की पूरी संभावना है, सरकार भी इस बात को भली भांति जानती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद बैंकों से लगातार कह रही हैं कि वे लोन बांटने में दिक्कत ना करें और याद रखें कि इसकी गारंटी सरकार दे रही है। सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि बैंकों की माली हालत को देखते हुए इस सेक्टर में 20 अरब डॉलर (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए) डालने की जरूरत है।
बैड लोन का बोझ दोगुना होने की पूरी संभावना
माना जा रहा है कि कोरोना महामारी के कारण बैंकों पर बैड लोन का बोझ लगभग दोगुना होने वाला है। एक सूत्र के हवाले से न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कहा कि पहले सरकार 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल बजट बैंक री-कैपिटलाइजेशन के बारे में सोच रही थी लेकिन कोरोना संकट इतना गंभीर है कि इसे अब काफी आगे बढ़ा दिया गया है। डिमांड में तेजी लाने के लिए रिजर्व बैंक लगातार रीपो रेट घटा रहा है और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए साथ ही साथ रिवर्स रीपो रेट में कटौती की जा रही है। वर्तमान हालात में बैंकों को फ्रेश फंड की सख्त जरूरत है।
दूसरी छमाही में अंतिम फैसले की उम्मीद
एक दूसरे सूत्र ने कहा कि कैपिटलाइजेशन का प्लान अभी ठंडे बस्ते में नहीं गया है। संभव है कि सरकार इस दिशा में वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में विचार करे। पिछले दिनों वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी कहा था कि अभी तक जो कदम उठाए गए हैं, वह वर्तमान परिस्थिति को लेकर है। जरूरत के हिसाब से आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण कदम उठाएं जाएंगे। सरकार पूरी गंभीरत से इस दिशा में विचार कर रही है।
सितंबर 2019 में 9.35 लाख करोड़ का एनपीए
बैंकों के एनपीए की बात करें तो सितंबर 2019 में बैंकों का कुल एनपीए करीब 9.35 लाख करोड़ रुपये था। उस समय यह उनके कुल असेट का 9.1 फीसदी के करीब था। पिछले दिनों रॉयटर्स ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि कोरोना महामारी के कारण बैड लोन का बोझ उनके कुल असेट का 18-20 फीसदी तक पहुंच सकता है।

पूरे देश में करीब दो महीने से लॉकडाउन की स्थिति है जिसके कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। लाखों लोग बेरोजगार भी हुए हैं। तमाम रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि जीडीपी में 5 फीसदी या उससे ज्यादा तक की गिरावट आ सकती है।

2 माह में मॉल्स को 90 हजार करोड़ रुपए का हुआ नुकसान

, 500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स हो सकते हैं बंद, एससीएआई ने मांगी राहत
नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए पिछले 61 दिनों से लागू देशव्यापी लॉकडाउन में सभी मॉल्स बंद हैं। इस बीच शॉपिंग सेंटर उद्योग को काफी नुकसान हुआ है। मॉल बंद होने के कारण इस इंडस्ट्री को पिछले दो माह में करीब 90 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसकी जानकारी शॉपिंग सेंटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एससीएआई) ने दी है। एससीएआई ने कहा कि इस सेक्टर को रेपो रेट कटौती और आरबीआई द्वारा विस्तारित ऋण स्थगन से अधिक की जरूरत है। उद्योग मंडल ने एक बयान में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा किए गए राहत उपाय उद्योग की लिक्विडिटी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।


सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं है मॉल्स

एससीएआई के अनुसार, 'एक आम गलतफहमी है कि शॉपिंग सेंटर का उद्योग केवल बड़े डेवलपर्स, निजी इक्विटी खिलाडिय़ों और विदेशी निवेशकों के निवेश के साथ महानगरों और बड़े शहरों के आसपास ही केंद्रित है।' हालांकि, अधिकांश मॉल एसएमई या स्टैंडअलोन डेवलपर्स का हिस्सा हैं। यानी 550 से अधिक एकल स्टैंडअलोन डेवलपर्स के स्वामित्व वाले हैं, जो देश भर में 650-संगठित शॉपिंग सेंटरों से बाहर हैं और छोटे शहरों में ऐसे 1,000 से अधिक छोटे केंद्र हैं।

कई मॉल डेवलपर्स की दुकानें बंद हो सकती हैं

एससीएआई के अध्यक्ष अमिताभ तनेजा ने कहा कि संगठित खुदरा उद्योग संकट में है और लॉकडाउन के बाद से कुछ भी कमाई नहीं हुई है। ऐसे में उनका अस्तित्व दांव पर लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार की लंबे समय तक के लिए लाभकारी योजना की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। तनेजा ने कहा है कि लॉकडाउन में छूट होने के बाद भी मॉल्स को खोलने की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे कई लोगों की नौकरी छूट जाएगी और बहुत सारे मॉल डेवलपर्स की दुकानें बंद हो सकती हैं।

500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स बंद होने की कगार पर

केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को दिए गए अपने आवेदन में संघ ने यह भी बताया है कि आरबीआई से वित्तीय पैकेज और प्रोत्साहन के अभाव में 500 से अधिक शॉपिंग सेंटर्स बंद हो सकते हैं, जिससे बैंकिंग उद्योग का 25,000 करोड़ रुपए एनपीए हो सकता है।