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एचआरए पर कैसे मिलेगी टैक्स छूट

अप्रैल 2017 में रेंट रिसीट पर इनकम टैक्स ट्राइब्यूनल के आदेश ने काफी ध्यान खींचा, क्योंकि इसने एक वेतनभोगी द्वारा मां को दिए किराये पर एचआरए छूट के दावे को ठुकरा दिया था। ट्राइब्यूनल ने दावे को अस्वीकार करते हुए कहा कि वास्तव में किराया दिया गया है इसे साबित करने के लिए रिसीट के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं है और रिसीट को बिना रेंट दिए मां से हासिल किया जा सकता है। आइए हम आपको बताते हैं कि हाउस रेंट अलाउंस टैक्स छूट के लिए किन डॉक्युमेंट्स की जरूरत है और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय आपक किन बातों का ध्यान रखें। क्लियरटैक्स.कॉम के फाउंडर और सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, आपके पास एक वैलिड रेंट अग्रीमेंट होना चाहिए। रेंट अग्रीमेंट में मासिक किराये, अग्रीमेंट की समयसीमा और आपके द्वारा किए जाने वाले अन्य खर्चों का जिक्र हो। अग्रीमेंट पर आपका और मकान मालिक का साइन हो, भले ही मकान मालिक आपके माता-पिता हों। यदि आप फ्लैट किसी के साथ साझा कर रहे हैं, तो ऊपर बताए गए ब्योरे के साथ अग्रीमेंट में यह जानकारी भी होनी चाहिए। यह भी लिखा हो कि कितने लोग फ्लैट को साझा कर रहे हैं और किराये के साथ अन्य यूटिलिटी बिल्स चुकाने का अनुपात किस तरह बंटा है। कैश की बजाय किराया बैकिंग माध्यम से देने की कोशिश करें। बैंकिंग चैनल्स से किराये देने पर आपके पास ट्रांजैक्शन का सबूत होता है।  हर महीने मकान मालिक को किसी भी माध्यम से चुकाए जाने वाले किराये का रिसीट मांगिए। इंडिया, पीपल अडवाइजरी सर्विसेज, डायरेक्टर पिंकी खन्ना ने कहा, 3,000 रुपये से अधिक मासिक किराये पर टैक्स छूट दावे के लिए रेंट रिसीट देना अनिवार्य है।
यदि सालभर में रेंट 1 लाख रुपये से अधिक है तो रेंट रिसीट के अलावा मकान मालिक का देना भी अनिवार्य है। यदि उपलब्ध ना हो तो आपका मकान मालिक यह घोषित करने का इच्छुक हो। घोषणापत्र के साथ आपको मकान मालिक से 60 प्रतिशत भी भरवाना होगा। यदि आप मकान मालिक कानहीं देते हैं तो आप टीडीएस कटौती के समय टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकते हैं। इनकम टैक्स ऐक्ट किसी कर्मचारी को रिटर्न फाइलिंग करते समय एचआरए क्लेम करने से नहीं रोकता है, लेकिन तब आपके नियोक्ता के द्वारा 26 में घोषित सैलरी इनकम और रिर्टन में घोषित रकम समान नहीं होगी। डिपार्टमेंट इस पर जवाब मांग सकता है।


8. ऐसी भी परिस्थिति हो सकती है, जहां कोई रेंट अग्रीमेंट पर दर्ज राशि से अधिक किराया चुकाता हो और अंतर कैश के जरिए देता है। यदि ऐसा होता है तो टैक्स छूट की गणना केवल रेंट रिसीट के आधार पर ही होगी। रेंट रिसीट पर दर्ज किराये से अधिक यदि आप दे रहे हैं तो उस राशि पर टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकते हैं। 
9. गुप्ता आगे बताते हैं कि एचआरए क्लेम करने के लिए यह जरूरी है कि आप घोषित घर में ही रहते हों। यदि आपके माता-पिता ही मकान मालिक हैं तो वे रेंट इनकम को अपने रिटर्न में दिखाएं। 
10. यदि आप हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक किराया दे रहे हैं तो 5त्न टीडीएस काटना ना भूलें। यदि आप टैक्स काटना भूल गए तो प्रति महीने 1 फीसदी और काटने के बाद जमा नहीं कराने पर 1.5 फीसदी हर महीने ब्याज देना होगा। देरी पर प्रति दिन 200 रुपये का जुर्माना भी लगेगा। 

इन 8 डॉक्यूमेंट्स के बिना नहीं मिलेगा, 10% सामान्य वर्ग को आरक्षण

नई दिल्ली. सवर्णों को मिलने वाला 10% आरक्षण का रास्ता लगभग साफ हो चुका है. लोकसभा और राज्यसभा से ये बिल पास हो चुका है, बस राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है. सवर्णों में काफी सारे ऐसे लोग हैं, जो आरक्षण के दायरे में आ सकते हैं. लेकिन इसके लिए आपको आरक्षण के लिए जरूरी शर्तों पर आप खरा उतरना होगा. इसके लिए आपके पास 8 डॉक्टूमेंट होने चाहिए, नहीं तो आपको आरक्षण मिलने में दिक्कत आएगी. यहां हम आपको ऐसे ही 8 डॉक्यूमेंट्स के बारे में बता रहे हैं. 
 
इनकम सर्टिफिकेट
सरकार की ओर से उन लोगों को आरक्षण को लाभ दिया जाएगा, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है. इसके लिए इनकम सर्टिफिकेट यानी आय प्रमाण पत्र की जरूरत होगी. आमतौर पर आय प्रमाण पत्र तहसील से बनता है. तहसील के अलावा इन्हें जनसेवा केंद्र से भी बनवाया जा सकता है. इसे आप 50 रुपए फीस देकर बनवा सकते हैं.
कास्ट सर्टिफिकेट
आरक्षण का लाभ लेने के लिए आपको कास्ट सर्टिफिकेट यानी जाति प्रमाण पत्र की जरूरत होगी. इसे भी स्थानीय तहसील या फिर जनसेवा केंद्र से बनवाया जा सकता है. आमतौर पर सवर्णों को जाति प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं पड़ती, ऐसे में हो सकता है कि काफी लोगों के पास ये डॉक्यूमेंट न हो.   

BPL कार्ड
BPL यानी Bilow the powerty line. यानी ऐसे लोग जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोग हैं. ये कार्ड उन लोगों का बनता है, जो आर्थिक तौर पर एक निश्चित गरीबी रेखा से नीच गुजर बसर कर रहे हैं. BPL कार्ड अधिकृत सरकारी राशन विक्रेता या फिर ग्राम पंचायत की ओर से बनाया जाता है. 
पैन कार्ड
पैन कार्ड आज के समय में सभी नौकरी और सेवाओं के लिए अनिवार्य कर दिया गया है अगर आपने अभी तक पैन कार्ड नहीं बनवाया है तो जल्‍द ही इसके लिए अप्‍लाई कर दें. शिक्षा और नौकरी में अब पैन कार्ड लगाना अनिवार्य होता है. वैसे भी अगर आप  50,000 रुपए से ज्यादा ट्रांजैक्शन करते हैं, तो पैन कार्ड की जरूरत होती है. इसे ऑनलाइन बनवाया जा सकता है. 

आधार कार्ड
हो सकता है आपमें से बहुत सारे लोगों के पास पहले से ही आधार कार्ड हो. लेकिन जिनके पास नहीं हैं वो आधार कार्ड तुरंत बनवा लें. एक बात और आधार कार्ड में नाम, पता, जन्मतिथि और पिता का नाम सब सही हों. अगर इसमें किसी तरह की गलती है तो नजदीकी आधार सहायता केंद्र जाकर इसे ठीक करा लें

जनधन योजना से जुड़ें
पिछड़े सवर्णों को आर्थिक आधार पर नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण चाहिए तो जनधन योजना के तहत बैंक अकाउंट होना चाहिए. जनधन योजना के तहत उन्‍हीं खाताधारकों को लाभ मिलता है जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं.
इनकम टैक्स रिटर्न
सवर्णों को आरक्षण का लाभ उठाना है तो इनकम टैक्‍स रिटर्न के कागजात अपने साथ रखने होंगे. फॉर्म 16 के जरिए आप इस बात का प्रमाण दे सकते हैं कि आपकी आय आठ लाख रुपए से कम है और आप आरक्षण के दायरे में आते हैं.
पासबुक या बैंक स्टेटमेंट
आरक्षण का लाभ उठाने के लिए पासबुक की कॉपी अपने साथ रखें. पासबुक के तीन महीने की स्टेटमेंट भी आपको दिखानी पड़ सकती है. इससे आपकी आय के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है. इसके अलावा अगर आप ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करते हैं तो आपकी बैंक स्टेटमेंट भी आपके काम आ सकती है. 


 

कोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन' कंपनी को यू दिया करारा जवाब

नई दिल्ली (महेश गुप्ता). अमेरिकी की दिग्गज फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन को अब भारत सरकार की ओर से तय किए मुआवजे के आधार पर ही मरीजों को भुगतान करना होगा. जॉनसन एंड जॉनसन ने खराब हिप इम्प्लांट की शिकायतों के बाद सरकार के मुआवजे के फॉर्मूले पर सवाल उठाया था और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. अब सुप्रीम कोर्ट सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीड़ितों को 3 लाख रुपए से लेकर 1.22 करोड़ रुपए के मुआवजे का प्रावधान बिल्कुल सही है. बता दें कि हिप इंप्लांट में उपयोग होने वाले खराब उपकणों की वजह से करीब 14 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं.

सभी लोगों को मिले फायदा
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि इस मुआवजे के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताया जाए, ताकि जितने भी मरीज हिप इंप्लांट की प्रक्रिया में प्रभावित हुए हैं, उन सबको मुआवजा मिल सके. आपको बता दें कि सरकार ने इस मामले में गठित एक समिति के आधार पर मुआवजे का फॉर्मूला तैयार किया था. लेकिन इस पर जॉनसन एंड जॉनसन ने ये कहकर आपत्ति जताई थी कि मुआवजे के फॉर्मूले के बारे में सरकार ने कंपनी से कोई राय नहीं ली.

क्या है मामला?
मामला वर्ष 2004 से 2010 के बीच कंपनी के हिप इंप्लांट से उपकरणों से जुड़ा है. फॉर्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के हिप इंप्लांट डिवाइस की वजह से दुनिया भर के कई मरीजों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा. पहली बार साल 2009 में जॉनसन एंड जॉनसम कंपनी के खराब हिप इंप्लांट सिस्टम का मामला सामने आया था. कंपनी के मुताबिक भारत में 2006 से लेकर इन उपकरणों के तहत 4,700 सर्जरी हुई थी, जिसमें 2014 से लेकर 2017 के बीच 121 गंभीर मामले सामने आए थे. भारत में कंपनी के गलत हिप इंप्लांट सिस्टम की वजह से लगभग 3600 मरीज प्रभावित हुए हैं.

विवादों में कंपनी
ये पहला मामला नहीं है जब जॉनसन एंड जॉनसन के प्रोडक्ट्स पर सवाल उठ रहे हैं. जुलाई 2017 में आई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के मिसौरी राज्य में कई महिलाओं ने कंपनी के पाउडर संबंधित उत्पादों के कारण गर्भाशय का कैंसर होने का मामला दर्ज कराया था. जांच के दौरान पीड़ितों द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित हुए और कंपनी पर 32000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया गया था.
 

Google ने 85 एप्स को बताया खतरनाक ,आप भी फोन से करें डिलीट

नई दिल्लीः गूगल ने हाल ही में ऐसी 85 खतरनाक apps अपने प्ले स्टोर से हटाई हैं, जो फोन में मौजूद आपकी जानकारियों पर नजर रख रही थीं. ये ऐप्स गूगल के प्ले स्टोर से भले ही हटा दी गई हैं, लेकिन अगर आप इन ऐप्स को फोन में डाउनलोड कर चुके हैं, तो आपको खुद उन्हें हटाना होगा. जो 85 ऐप हटाई गई हैं, उनमें वायरस भी था. ये ऐप्स आपके फोन में फुल स्क्रीन एड दिखाकर मोबाइल के बैकग्राउंड में चालू रहते थे और आपके फोन की अनलॉकिंग फंक्शन पर नजर रखते थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये ऐप्स एक तरह के जासूसी ऐप्स का हिस्सा हैं.

90 लाख बार हो चुकी हैं डाउनलोड
जापान की सायबर सिक्योरिटी और डिफेंस कंपनी Trend Micro के मुताबिक इन ऐप्स को अब तक 90 लाख बार प्ले स्टोर से डाउनलोड किया गया है. इसमें से एक ऐप 'Easy Universal Remote’ ही अकेले 50 लाख बार डाउनलोड हुआ है. इन 85 ऐप्स की लिस्ट में से ये सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाला ऐप है.

इस तरह होता है नुकसान
एक बार जब आप इन ऐप्स को फोन में डाउनलोड कर लेते हैं और उपयोग करना शुरू करते हैं तो शुरू में आपको फुल स्क्रीन पॉप-अप एड दिखता है. ये ऐड आपको तब तक दिखता है, जब तक आप इसे बार-बार बैक का बटन दबाकर बंद न करें. लेकिन इस बीच कई अलग-अलग URL खुल चुके होते हैं. फिर जब आप इस ऐप को उपयोग करने का बाद बंद कर देते हैं, तब भी बैकग्राउंड में ये ऐप चालू रहता है और बाद में करीब हर आधे घंटे में डिवाइस में पॉप-अप करता है. बैकग्राउंड में चालू रहते हुए ये आपके फोन के सारे फंक्शंस पर नजर रखते हैं और डाटा लीक का कारण बन सकते हैं.

ये है इन ऐप्स की पूरी लिस्ट

-TV Remote
-SPORT TV
-Offroad Extreme
-Remote Control
-Moto Racing
-A/C Remote
-Prado Parking Simulator 3D
-TV WORLD
-City Extremepolis 100
-American Muscle Car
-Idle Drift
-Brasil TV
-Nigeria TV
-WORLD TV
-Drift Car Racing Driving
-BRASIL TV
-Golden
-Bus Driver
-Trump Stickers
-Love Stickers
-TV EN ESPAÑOL
-Christmas Stickers
-Parking Game
-TV EN ESPANOL
-TV IN SPANISH
-TV IN ENGLISH
-Racing in Car 3D Game
-Mustang Monster Truck Stunts
-TDT España
-Brasil TV
-Challenge Car Stunts Game
-Prado Car
-UK TV
-POLSKA TV
-Universal TV Remote
-Bus Simulator Pro
-Photo Editor Collage 1
-Canais de TV do Brasil
-Prado Car 10
-Spanish TV
-Kisses
-Prado Parking City
-SPORT TV
-Pirate Story
-Extreme Trucks
-TV SPANISH
-Canada TV Channels 1
-Prado Parking
-3D Racing
-TV
-USA TV 50,000
-GA Player
-Real Drone Simulator
-Garage Door Remote
-Racing Car 3D
-TV
-TV Colombia
-Racing Car 3D Game
-World Tv
-FRANCE TV
-Hearts
-PORTUGAL TV
-SPORT TV 1
-SOUTH AFRICA TV
-3d Monster Truck
-ITALIA TV
-Vietnam TV
-Movies Stickers
-Police Chase
-South Africa TV
-TV of the World
-WORLD TV
-ESPAÑA TV
-TV IN ENGLISH
-TV World Channel
-Televisão do Brasil
-CHILE TV

छोटे कारोबारियों की खत्म होंगी ये बड़ी टेंशन

नई दिल्ली (प्रकाश प्रियदर्शी): सरकार ने GST काउंसिल मीटिंग में छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी है. कह सकते हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले मीडियम और छोटे कारोबारियों के लिए इससे बड़ा नए साल का तोहफा कुछ नहीं हो सकता. सूत्रों के हवाले से खबर है कि सरकार ने न सिर्फ थ्रेसहोल्ड की लिमिट 20 से बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दी है, बल्कि कंपोजीशन स्कीम का दायरा भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए कर दिया है. आपको बता दें कि GST काउंसिल की 31वीं और इस साल की पहली बैठक अभी चल रही है और जैसे-जैसे अपडेट आएंगे, हम आपको बताते रहेंगे. 

छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत
चुनावों से पहले MSMEs सेक्टर को बड़ी सौगात मिली है. सरकार ने GST थ्रेशहोल्ड की लिमिट 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दी है. इससे छोटे और मंझोले कारोबारियों को फायदा मिलेगा साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. इसका सीधा सा मतलब ये है कि अब 40 लाख रुपए तक सालाना टर्नओवर करने वाले कारोबारी को GST रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी. 
बढ़ाया गया कंपोजीशन स्कीम का दायरा
बार-बार GST रिटर्न फाइल करने वाले व्यापारियों को राहत देते हुए सरकार ने कंपोजीशन स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है. अब एक करोड़ रुपए की बजाय 1.5 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले स्मॉल ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर भी कंपोजीशन स्कीम के दायरे में आएंगे. नया नियम 1 अप्रैल, 2019 से लागू किया जाएगा. इसके अलावा सबसे बड़ी राहत ये है कि कंपोजीशन स्कीम के दायरे में आने वाले कारोबारी तिमाही की बजाय, सालाना आधार पर रिटर्न फाइल कर सकेंगे. आपको बता दें कि कंपोजिशन स्कीम में आने वाले कारोबारियों के लिए कुल बिक्री पर एकमुश्त GST जमा करना होता और टैक्स भी एक फिक्स रेट्स पर देना होता है. 

फिर बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम ,जानिए आज के भाव

नई दिल्ली। दो दिनों की स्थिरता के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में गुरुवार को फिर वृद्धि हुई। तेल विपणन कंपनियों ने देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम में 38 पैसे और डीजल के दाम में 29 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। 

इसके साथ दिल्ली में पेट्रोल 68.88 रुपये लीटर हो गया है और डीजल का भी दाम बढक़र 62.53 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

कोलकाता में पेट्रोल के दाम में 37 पैसे और डीजल में 29 पैसे की वृद्धि की गई है। मुंबई में पेट्रोल 37 पैसे और चेन्नई में 40 पैसे लीटर महंगा हो गया है। डीजल के दाम में मुंबई और चेन्नई में 31 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।

इस सप्ताह दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी हुई। इससे पहले तेल विपणन कंपनियों ने सोमवार को कीमतें बढ़ाई थीं।
 

तेल-गैस, बिजली को जीएसटी में लाने की पहल करें मंत्रालय: पीएमओ

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने संबंधित मंत्रालयों को तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और कोयले को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत लाने की कोशिश तेज करने को कहा है। इससे पहले नीति आयोग ने ऊर्जा क्षेत्र पर एक ब्लूप्रिंट पीएमओ को दिया था, जिसमें इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और पूरे देश में इनकी एक कीमत का सुझाव दिया गया था। पीएमओ के इस निर्देश की जानकारी एक बड़े सरकारी अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर दी। पीएमओ का यह निर्देश 10 जनवरी को होने वाली जीएसटी काउंसिल की मीटिंग से पहले आई है। पावर सेक्टर को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग ग्राहकों के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स भी कर रहे हैं। अगर बिजली क्षेत्र को जीएसटी में लाया जाता है तो बिजली बिल में 10 पर्सेंट की कमी आ सकती है। अधिकारी ने बताया, संबंधित मंत्रालयों ने पीएमओ के निर्देश पर अमल करते हुए सभी स्टेकहोल्डर्स और राज्यों से इस पर बातचीत शुरू कर दी है। राज्य नहीं चाहते कि इन प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के तहत लाया जाए क्योंकि इससे वे इन पर टैक्स नहीं लगा पाएंगे, जिसका उनकी आमदनी पर बुरा असर हो सकता है। अभी राज्यों को इन प्रॉडक्ट्स से काफी टैक्स मिलता है। हालांकि, नीति आयोग का मानना है कि कई तरह की सब्सिडी और टैक्स से इन-एफिशिएंट फ्यूल्स को बढ़ावा मिल रहा है। उसका कहना है कि इस वजह से देश से निर्यात पर बुरा असर पड़ रहा है और घरेलू उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। उसकी वजह यह है कि इन प्रॉडक्ट्स पर इनपुट क्रेडिट नहीं दिया जा रहा है। नीति आयोग ने कहा है कि एनर्जी सेक्टर को जीएसटी के तहत लाने पर सबको बराबरी का मौका मिलेगा। इससे यह क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी भी होगा। अभी जीएसटी पॉलिसी में रिन्यूएबल्स यानी अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को काफी रियायत मिल रही है। अक्षय ऊर्जा के लिए कच्चे माल पर 5 पर्सेंट का जीएसटी लगता है, जबकि थर्मल पावर जेनरेशन के लिए यह 18 पर्सेंट है। नीति आयोग ने सुझाव दिया है, रिन्यूएबल और थर्मल एनर्जी के बीच इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। दोनों तरह की बिजली पैदा करने के लिए जो भी कच्चा माल लगता है, उस पर एक बराबर टैक्स होना चाहिए। उसका कहना है कि इससे जीएसटी पूरे पावर सेक्टर के लिए न्यूट्रल हो जाएगा और अच्छी टैक्स पॉलिसी को ऐसा ही होना चाहिए। केंद्र सरकार अभी ऑयल से 2.5 लाख करोड़ और राज्य 2 लाख करोड़ का टैक्स वसूलते हैं। 
छोटे उद्यमों को बड़ी राहत देने का प्रस्ताव, 40 लाख रुपये तक टर्नओवर वाले उद्यमों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट का सुझाव
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल की अध्यक्षता वाले एक मंत्री समूह ने छोटे उद्योगों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रजिस्ट्रेशन से छूट की सीमा मौजूदा 20 लाख रुपये से बढ़ाने का सुझाव दिया है। हालांकि, इस मंत्री समूह ने यह सीमा तय करने का फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल पर छोड़ दिया है। दरअसल, लॉ कमिटी ने भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट का लाभ 40 लाख रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को देने का सुझाव दिया था, जिसका दिल्ली सरकार ने भी समर्थन किया था। वहीं, बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने 50 से 75 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाले उद्योगों के लिए फ्लैट पेमेंट की सुविधा का प्रस्ताव रखा जो वैल्यु ऐडेड टैक्स (वैट) के तहत प्राप्त थी। जीएसटी छूट की सीमा बढ़ाने से कई छोटे-छोटे उद्यमों को कानूनी पचड़ों से मुक्ति तो मिल जाएगी, लेकिन इससे टैक्स चोरी की घटनाएं भी बढऩे की आशंका पैदा होगी क्योंकि तब कई उद्योग टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में ही नहीं आएंगे। मंत्रिमंडलीय समिति ने 50 लाख रुपये तक सालाना टर्नओवर वाली सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए कंपोजिशन स्कीम को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा जिसके तहत 5त्न लेवी और और आसान रिटर्न का सुझाव दिया गया। हालांकि, पहले इस प्रस्ताव को इस दलील के साथ खारिज किया जा चुका है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। गौरतलब है कि अभी कंपोजिशन स्कीम की सुविधा छोटे उत्पादकों और व्यापारियों को उपलब्ध है जिसके लिए कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही कहा गया है कि इन उद्यमों को तिमाही की जगह सालाना रिटर्न भरने की अनुमति दी जाए। हालांकि, इन्हें चालान के साथ तिमाही आधार पर ही टैक्स पेमेंट करने दिया जाए। उधर, सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने केरल जैसे आपदा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी रेट बढ़ाने की जगह संबंधित राज्य/राज्यों को सेस लगाने की छूट देने की वकालत की। हालांकि, उसने सेस लागू करने से पहले जीएसटी काउंसिल से अनुमति लेने की शर्त रखी। 

लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए इस तरह करे अप्लाई

नई दिल्ली: पिछले दिनों कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार से जोड़ना होगा. लेकिन, अभी तक अगर आपने अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनाया है तो इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप आसानी से इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आपको RTO ऑफिस के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. लर्निंग के लिए फीस 200 रुपये है. अगर आपने अभी तक एकबार भी लाइसेंस नहीं बनवाया है तो पहले लर्निंग बनवाना होगा. लर्निंग के बाद ही परमानेंट लाइसेंस बनता है. उम्र सीमा कम से कम 18 साल है.

लर्नर कैसे करें अप्लाई?
1. राजमार्ग मंत्रालय की वेबसाइट https://parivahan.gov.in/sarathiservice10/stateSelection.do पर जाएं. यहां अपना स्टेट चुनना है. वहां लर्नर के लिए ऑप्शन होता है. वहां क्लिक करने पर पूरा फॉर्म खुलता है. फॉर्म भरने के बाद एक नंबर जेनरेट होगा जिसे सेव कर लें. यहां आपको उम्र प्रमाण पत्र, एड्रैस प्रूफ, आईडी प्रूफ अटैच करना होता है.

2.इस प्रक्रिया के बाद अपना फोटो और डिजिटल सिग्नेचर अपलोड करना होगा. फिर टेस्ट के लिए स्लॉट बुक कराना होगा. स्लॉट का चुनाव करने के दौरान फीस भरना होगा. इसके बाद रजिस्टर्ड नंबर पर एक मैसेज आएगा, जिसे सेव करना है.

3. फीस पेमेंट के बाद स्लॉट के हिसाब से RTO ऑफिस जाकर टेस्ट देना होगा. टेस्ट में पास हो जाने पर 48 घंटे के भीतर ऑनलाइन लर्निंग लाइसेंस ऑनलाइन मिल जाएगी. इसकी वैलिडिटी 6 महीने की होती है. 6 महीने के दौरान आपको परमानेंट लाइसेंस के लिए अप्लाई करना होगा. लर्निंग लाइसेंस मिलने के 1 महीने के बाद से लेकर 6 महीने के बीच आपको दोबारा ऑनलाइन अप्लाई करके टेस्ट देना होता है. दूसरी बार टेस्ट पास करने पर परमानेंट लाइसेंस मिल जाता है.

बीमा कंपनियों का नया प्रपोजल, जाने क्या है वो

नई दिल्ली : आपके पास इंश्योरेंस प्लान है और कंपनी के पास आपने अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा रखा है तो इंश्योरेंस कंपनी आपके पॉलिसी डॉक्यूमेंट से लेकर हर प्रकार की जानकारी आपको कॉल से या व्हाट्सएप के जरिये दे सकती हैं. मौजूदा समय में हजारों पॉलिसी धारक इसका फायदा भी उठा रहे हैं. बीमा कंपनियों ने बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से मांग की है कि सभी कंपनियों के लिए मोबाइल नंबर को शामिल करने को अनिवार्य किया जाए.

पॉलिसी होल्डर को होगा फायदा
रिलायंस जनरल के सीईओ राकेश जैन के मुताबिक, जनरल इंश्योरेंस में पॉलिसी होल्डर का मोबाइल नंबर जरूरी किया जाता है तो बीमा कंपनी के साथ पॉलिसी होल्डर को काफी फायदा होगा. उन्होंने ज़ी बिजनेस से बातचीत में कहा कि मोबाइल नंबर के जरिये पॉलिसी होल्डर कंपनी से सीधा जुड़ पाएगा. और फिर पॉलिसी दस्तावेज से लेकर क्लेम तक की सभी प्रकिया की जानकारी पॉलिसी धारक को मोबाइल नंबर पर दी जाएगी. व्हाट्सएप पर इंश्योरेंस कंपनी सभी डॉक्यूमेंट भेज सकती है.

सेटलमेंट प्रकिया में आसानी होगी
राकेश जैन ने बताया कि मोबाइल नंबर से पॉलिसी होल्डर की पुष्टि करना आसान हो जाता है. सही मोबाइल नंबर से क्लेम सेटलमेंट प्रकिया आसान होती है. और जिन ग्राहकों का नंबर कंपनी के पास है, उन तक कंपनियां आसानी से पहुंच बना पाती हैं. इसके अलावा म्युचुअल फंड और बैंक अकाउंट में मोबाइल नंबर जरूरी होता है. कई कंपनियां पॉलिसी डॉक्यूमेंट और क्लेम प्रकिया मोबाइल ऐप के जरिए ही करती हैं.

ऐसे में यह भी उम्मीद की जा रही है कि ग्राहक का मोबाइल नंबर ही उसका इंश्योरेंस नंबर हो जाएगा. इसका दूसरा फायदा यह होगा कि ग्राहक के सही मोबाइल नंबर से क्लेम सेटलमेंट प्रकिया आसान हो जाती है. दरअसल जिन ग्राहकों का नंबर कंपनी के पास होता है उन तक कंपनी की पहुंच आसानी से हो जाती है. जिन ग्राहकों का मोबाइल नंबर पॉलिसी में दर्ज नहीं होता, उनके क्लेम में कई बार परेशानी आती है. म्युचुअल फंड और बैंक अकाउंट में मोबाइल नंबर को पहले ही जरूरी किया जा चुका है.

जीडीपी दर इतनी फीसदी रहने का अनुमान

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की रफ्तार बढक़र 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसकी रफ्तार 6.7 फीसदी थी। आधिकारिक आंकड़ों से सोमवार को यह जानकारी मिली।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने ‘2018-19 के राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमानों’ में बताया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 में वास्तविक जीडीपी या लगातार कीमतों (2011-12) पर जीडीपी 139.52 लाख करोड़ रुपये के स्तर को प्राप्त करने की संभावना है, जबकि ‘वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जीडीपी का अनंतिम अनुमान 130.11 लाख करोड़ रुपये है’, जो 31 मई 2018 को जारी किया गया था।’’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीडीपी अनुमान 7.2 फीसदी लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2017-18 में इसकी वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी।’’

सस्ते स्मार्टफोन के लिए रहिए तैयार, मिलेगा बंपर डिस्काउंट

नई दिल्ली: जनवरी महीने में आपको सस्ते स्मार्टफोन खरीदने का मौका मिल सकता है. अमेजन और फ्लिपकार्ट को भरोसा था कि फेस्टिव सीजन में बहुत ज्यादा बिक्री होगी, इसलिए स्टॉक बहुत ज्यादा मंगा लिया गया था. लेकिन, उम्मीद के मुताबिक बिक्री नहीं होने के कारण बहुत स्टॉक पड़ा हुआ है. इधर ई-कॉमर्स कंपनियों को डर है कि नई FDI नीति लागू कर दी जाएगी. ऐसे में इनकी कोशिश है कि नई नीति से पहले ऑफर देकर स्टॉक खाली कर लिया जाए.

जनवरी महीने में सस्ते स्मार्टफोन बिकने की तीन बड़ी वजहें हैं. पहली ये की ई-कॉमर्स के लिए नई FDI पॉलिसी 1 फरवरी से लागू होने जा रही है. इसलिए, इन कंपनियों को 31 जनवरी तक अपना स्टॉक खाली करना होगा. नई पॉलिसी लागू हो जाने के बाद आसुस, लेनोवे, ऑनर जैसे ऑनलाइन एक्सक्लूसिव हैंडसेट ब्रांड्स को अपने स्मार्टफोन का स्टॉक खाली करना होगा. ऑनर, आसुस, रियलमी और लेनेवो की मार्केट पर अच्छी पकड़ बन रही है, जिसकी वजह से इनका स्टॉक भी बड़ा है.

सूत्रों की मानें तो अमेजन और फ्लिपकार्ट के पास अभी तक दिवाली का स्टॉक पड़ा हुआ है. ऑनलाइन एक्सक्लूसिव होने की वजह से स्टॉक धीरे-धीरे खाली होता है. यही वजह है कि रियलमी और हुआवे ऑफलाइन मार्केट की तरफ भी बढ़ रही है. नए नियम के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों के एक्सक्लूसिव डील पर रोक लगाई गई है.

दूसरी सबसे बड़ी वजह है कि सरकार ने साफ-साफ कहा है कि एक वेंडर एक ई-कॉमर्स कंपनी पर अधिकतम 25 फीसदी इनवेंटरी बेच सकता है. इस नियम के चलते ब्रांड्स को अलग-अलग ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार करना होगा. साथ ही ऑफलाइन रूट भी अपनाना होगा.

ऑफलाइन चैनल का विस्तार करना जरूरी
मार्केट से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई पॉलिसी के बाद इन कंपनियों के पास दो ही ऑप्शन बचे हैं. पहला कि डिस्काउंट ऑफर देकर स्टॉक खाली करें और दूसरा ऑफलाइन चैनल का विस्तार करें. साथ ही ये ब्रांड्स अधिक से अधिक ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ करार कर सकते हैं. रियलमी और ऑनर का कहना है कि आने वाले दिनों में वह ऑफलाइन चैनल का विस्तार तो करेगा ही, साथ ही ऑनलाइन मौजूदगी को और मजबूत करेगा.

बाबा राम देव ने पतंजलि परिधान शोरूम खोलने का दिया ऑफर

नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव गारमेंट सेक्टर में पतंजलि परिधान शोरूम की चेन तेजी से बढ़ा रहे हैं. 4 जनवरी को ही बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में अपना स्टोर खोला है. बाबा रामदेव का कहना है कि मार्च 2019 तक देश भर में 100 शोरूम खोले जाएंगे, जबकि मार्च 2020 तक शोरूम की संख्या बढ़ाकर 500 की जाएगी. ऐसे में आप या आपके परिवार का भी कोई सदस्य पतंजलि परिधान शोरूम खोलकर कमाई कर सकता है. अगर आप पतंजलि के साथ बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो ये सही मौका है. कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने के कुछ तरीके हम आपको यहां बता रहे हैं.

क्या हैं फ्रेंचाइजी की शर्तें
बाबा रामदेव ने खुद ट्वीट कर पतंजलि की फ्रेंचाइजी की शर्तों का खुलासा किया था. रामदेव के मुताबिक शोरूम खोलने के लिए जरूरी है आपके पास अपनी प्रॉपर्टी हो. यह प्रॉपर्टी किसी मॉल, कमर्शियल कॉम्प्लैक्स या हाई स्ट्रीट पर होनी चाहिए. शोरूम के लिए स्पेस ग्राउंड फ्लोर पर कम से कम 2000 वर्ग फुट होना चाहिए, जिसका फ्रंट 20 फुट का होना चाहिए और हाइट कम से कम 10 फुट होनी चाहिए. गारमेंट या टैक्सटाइल्स का पूर्व अनुभव होना चाहिए.
कैसे कर सकते हैं अप्लाई
अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं और फ्रेंचाइजी के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आप enquiry@patanjaliparidhan.org पर मेल कर सकते हैं. बाबा ने अपने फेसबुक पोस्ट और ट्वीट पर कुछ फोन नंबर भी दिए हैं. उन पर कॉल करके आप पूरी प्रोसेस जान सकते हैं. नीचे दिए गए ट्वीट से आप नंबर देखकर कॉल भी कर सकते हैं.