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8 और 9 जनवरी को बंद रहेंगे बैंक, जाने क्या है कारण

नई दिल्ली : अगर आपको भी अगले दो दिन यानी 8 और 9 जनवरी को बैंकों से जुड़ा कोई काम है तो उसे आज ही निपटा लें. पिछले दिनों बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दिसंबर के आखिरी 10 दिन में से बैंक 5 दिन बंद रहे थे. ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ था. दिसंबर के बाद अब जनवरी में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है. सार्वजनिक बैंकों के कुछ कर्मचारी 8 और 9 जनवरी को देशव्याही हड़ताल में हिस्सा लेंगे.

बंबई शेयर बाजार को सूचित किया
बैंक कर्मचारियों ने सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर प्रस्तावित हड़ताल के समर्थन में यह निर्णय लिया है. आईडीबीआई बैंक ने बंबई शेयर बाजार को बताया है कि ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (AIBEA) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने 8 और 9 जनवरी के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बारे में इंडियन बैंक एसोसिएशन को सूचित किया है.

कामकाज प्रभावित होने की उम्मीद
बैंक ऑफ बड़ौदा ने बंबई शेयर बाजार को अलग से सूचित किया है कि 8 और 9 जनवरी को एआईबीईए और बीईएफआई के हड़ताल के कारण कुछ क्षेत्रों में बैंकों की शाखाओं एवं कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हो सकता है. 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों इंटक, ऐटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी, टीयूसीसी, एलपीएफ और सेवा ने भी 8 और 9 जनवरी को आम राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.


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बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां ने सरकार का दरवाजा खटखटा

नई दिल्लीः ई-कॉमर्स नीतियों में किये गए बदलावों को लेकर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां सरकार का दरवाजा खटखटा सकती है. ये कंपनियां नए FDI नियमों को लागू करने की समयसीमा को 1 फरवरी से आगे बढ़ाने की मांग कर सकती हैं. कंपनियों का मानना है कि ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ी नीतियों में जो बदलाव किए गए हैं उनका पालन करने और उन्हें लागू करने के लिए कम से कम 4 से 5 महीने चाहिए. एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी के अधिकारी ने बताया कि किसी भी सूरत में कंपनियों को 4 से पांच महीने इसे लागू करने में लगेंगे ही.

क्या हैं नए नियम?
विदेशी निवेश वाले ऑनलाइन मार्केटप्लेस के नए नियमों से कई कंपनियों को नुकसान होगा तो कई कंपनी फायदे में रहेंगी. नया नियम किसी ई-कॉमर्स कंपनी को उन सामानों की बिक्री अपने प्लेटफॉर्म से बेचने से रोकता है, जिनका उत्पादन वह खुद या उनकी कोई सहयोगी कंपनी करती हो. इतना ही नहीं, इसमें यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई वेंडर किसी पोर्टल पर ज्यादा-से-ज्यादा कितने सामान की बिक्री कर सकता है. नई नीति में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर किसी सप्लायर को विशेष सुविधा दिए जाने पर भी रोक है.
कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल पर असर
नई नीति के तहत कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल, ब्रांड लॉन्चिंग, अमेजॉन प्राइम या फ्लिपकार्ट प्लस जैसी विशेष सेवाएं रुक सकती हैं. सरकार इन ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफॉर्म्स को पूरी तरह निष्पक्ष बनाना चाहती है. 

सरकार के पास जा सकती हैं कंपनियां
ई-कॉमर्स कंपनी से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि 26 दिसंबर को नए नियमों का ऐलान किया गया था और कंपनियों को इन बदलावों को लागू करने के लिये सिर्फ एक महीने का समय दिया गया. बहुत से मामलों में मौजूदा पार्टनर्स के साथ अनुबंध करने होंगे. 

फ्लिपकार्ट और अमेजन पर सबसे ज्यादा मार
सरकार के ई-कॉमर्स नियमों को सख्त करने की सबसे ज्यादा मार फ्लिपकार्ट और अमेजॉन पर पड़ सकती है. नए नियमों के तहत विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियां उन कंपनियों के उत्पाद नहीं बेच सकती जिनमें वह खुद हिस्सेदार हैं. इसके अलावा विशेष ऑफर और भारी छूट पर भी रोक लगाई गई है.


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ऑडी-सैमसंग में करार, इन कामो के लिए लगेगी चिप


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नेस्‍ले इंडिया कंपनी Maggi को लेकर फिर से मुसीबत में

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में सरकार के मामले में गुरुवार को आगे कार्यवाही की अनुमति प्रदान कर दी है. इस मामले में सरकार ने कथित अनुचित व्यापार तरीके अपनाने, झूठी लेबलिंग और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर 640 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की है.

दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले ने मैगी नूडल मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है. एनसीडीआरसी में दायर अपनी याचिका में मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि नेस्ले ने यह दावा कर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया है कि उसका मैगी नूडल गुणकारी ‘‘टेस्ट भी हेल्दी भी’’ है.

न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) मैसूरू की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार होगी. इसी संस्थान में मैगी के नमूनों की जांच की गई थी
शीर्ष अदालत ने पूर्व में राष्ट्रीय उपभोक्ता वाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) में चल रहे इस मामले में कार्यवाही पर 16 दिसंबर 2015 को तब रोक लगा दी थी जब नेस्ले ने इसे चुनौती दी थी. न्यायालय ने सी एफटीआरआई मैसूरू को निर्देश दिया था कि वह अपनी जांच रिपोर्ट उसके समक्ष रखे.

उसी वर्ष भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (एफ एस एस ए आई) ने नमूनों में सीसे का अत्यधिक स्तर पाए जाने के बाद मैगी नूडल्स पर रोक लगा दी थी और इसे मानव उपयोग के लिए ‘‘असुरक्षित और खतरनाक’’ बताया था. इस मामले की सुनवाई के दौरान नेस्ले इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ को बताया कि मैसूरू प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आ गई है और पाया गया है कि मैगी नूडल्स में सीसे की मात्रा तय सीमा के दायरे में है.
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सिंघवी से पूछा, ‘‘हमें सीसे वाली मैगी क्यों खानी चाहिए?’’ सिंघवी ने जवाब दिया कि नूडल्स में सीसे की मात्रा तय सीमा के दायरे में है और अन्य कई उत्पादों में भी थोड़ा बहुत सीसा होता है.

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि सीएफटीआरआई की रिपोर्ट का एनसीडीआरसी द्वारा मूल्यांकन किया जाए जहां शिकायत दर्ज है. एनसीडीआरसी के अधिकारक्षेत्र का उल्लंघन करना इस अदालत के लिए उचित नहीं होगा...पक्षों के सभी अधिकार और तर्क उपलब्‍ध रहेंगे.’’ 

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि मैसूरू प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मद्देनजर मामला वापस एनसीडीआरसी के पास जाना चाहिए और कार्यवाही पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए. सिंघवी ने कहा कि मामला अब निष्फल हो चुका है क्योंकि रिपोर्ट ‘‘मेरे पक्ष में है’’ और एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) नहीं पाया गया है.

सिंघवी और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दत्तार ने मामला फिर से एनसीडीआरसी के पास भेजे जाने का विरोध किया और कहा कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद ऐसा कुछ नहीं बचा है जिस पर फैसला किया जाए.
पीठ ने कहा, ‘‘हमें एनसीडीआरसी की शक्ति क्यों छीननी चाहिए ? हम प्रयोगशाला की रिपोर्ट आयोग को भेजेंगे और उससे उसके समक्ष दायर शिकायत का निपटारा करने के लिये कहेंगे.’’

इसने कहा कि बम्बई उच्च न्यायालय के 2015 के उस फैसले के खिलाफ अपील पर बाद में सुनवाई की जाएगी जिसमें नेस्ले के मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध के एफएसएसएआई के आदेश को निरस्त कर दिया गया था. उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 2015 में लगभग तीन दशक पुराने उपभोक्ता संरक्षण कानून के एक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए नेस्ले इंडिया के खिलाफ एनसीडीआरसी में शिकायत दर्ज कराई थी.

इसने नेस्ले पर आरोप लगाया था कि अनुचित व्यापार तरीकों, झूठी लेबलिंग और मैगी नूडल्स से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों के जरिए उसने भारतीय उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाया. यह पहली बार था जब सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून की धारा 12-1-डी के तहत कार्रवाई की जिसके तहत केंद्र और राज्यों दोनों को शिकायत दर्ज कराने की शक्तियां प्राप्त हैं.


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नहीं चलाते है Facebook ,फिर भी आपका डेटा चोरी होरह

नई दिल्लीः डेटा चोरी, जो इस समय दुनिया का सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है उसमें फेसबुक सबसे बड़ा प्लेयर है. यहां तक कि ताजा रिसर्च बताती है कि अगर आप फेसबुक ऐप यूज ही नहीं कर रहे तो भी आपका डेटा फेसबुक के पास जा रहा है. डेटा प्राइवेसी के लिए काम करने वाली कंपनी प्राइवेसी इंटरनेशनल के रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर आपने मोबाइल पर फेसबुक ऐप इंस्टॉल नहीं किया है या आपका फेसबुक अकाउंट नहीं है तब भी फेसबुक कंपनी दूसरे ऐप की मदद से आपके डेटा तक पहुंच बना सकती है. यही नहीं इस डेटा की बाकयदा सौदेबाजी होती है. 

कैसे चोरी होता है डेटा?
ऐसे सभी ऐप जिन्हें बनाते समय फेसबुक एसडीके नाम के ऐप डेवलपिंग टूल का इस्तेमाल किया गया, वे यूजर का डेटा फेसबुक को भेज सकते हैं. ड्यूलिंगो, ट्रिपएडवाइजर, इंडीड और स्काय स्कैनर जैसे नामी गिरामी एंड्रॉएड ऐप भी यूजर्स का डेटा फेसबुक को बेच रहे हैं. जर्मनी के शहर लाइपजिग में हुई 'कैओस कम्प्यूटर कांग्रेस' में इस रिसर्च को जारी किया गया
कैसे हुई रिसर्च?
रिसर्च में प्राइवेसी इंटरनेशनल ने 10 से लेकर 50 करोड़ तक के यूजर बेस वाले ऐसे 34 एंड्राएड ऐप का अध्ययन किया जो फेसबुक के साथ डेटा शेयर करते हैं. 2018 में अगस्त से लेकर दिसंबर तक इन चुने हुए ऐप पर नजर रखी गई और देखा गया कि ये किस तरह का डेटा फेसबुक को भेजते हैं. रिसर्च में ता चला कि ऐप डेवलपर ऐप डेवलपिंग टूल 'फेसबुक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट' के जरिए यूजर का डेटा फेसबुक तक पहुंचा रहे हैं. 34 में से 23 ऐप ऐसे निकले जिन्हें ओपन करते ही आपकी निजी जानकारी फेसबुक के साथ शेयर हो गई.

डेटा चोरी के नुकसान
दुनियाभर में डेटा इस समय किंगमेकर की भूमिका निभा रहा है. इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि प्रोडक्ट बनाकर बेचने वाले जिन कंपनियों के मालिक आज करोड़पति, अरबपति हैं उन्हें यहां तक पहुंचने में कई दशक लग गए. लेकिन हिंदुस्तान सहित दुनियाभर के कई ऐसे अरबपति हैं जो डेटा, इंटरनेट और ई-कॉमर्स को ताकत बनाकर कुछ सालों में ही यहां तक पहुंच गए. अब गूगल, फेसबुक कंपनियां आपको ट्रैक करती हैं. यहां तक कि आपके मोबाइल की हर हरकत उन्हें पता है. आपके हर फोटो, हर पासवर्ड, हर सीक्रेट नंबर, हर कॉन्टैक्ट तक उनकी पहुंच है. ऐसे में आपका पर्सनल डेटा लीक हो गया तो आपको बहुत नुकसान होगा. कंपनियां भले ही कहें कि आपका डेटा एनक्रिप्टेड यानी सुरक्षित है लेकिन हैकिंग के सामने कुछ भी नामुमकिन नहीं. 


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7 फीचर्स ला रहा WhatsApp, पूरी तरह बदल जाएगा

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में मशहूर वॉट्सऐप, जिसने मैसेजिंग का तरीका ही बदल दिया वो 2019 में 7 ऐसे धांसू फीचर लेकर आ रहा है जिससे यूजर्स को नया एक्सपीरिएंस मिलेगा. इनमें से कुछ फीचर्स डिजाइन और चैट्स को बेहतर बनाएंगे तो कुछ ऐप चलाने का नया एक्सपीरिएंस देंगे. जो फीचर्स हम आपको बता रहे हैं उनमें से कुछ की टेस्टिंग चल रही है, जबकि कुछ जल्द लॉन्च होने वाले हैं. 

1. मीडिया प्रीव्यू
वॉट्सऐप मीडिया प्रीव्यू फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इसके तहत यूजर्स नोटिफिकेशन के जरिए ही ये देख सकते हैं कि भेजे गए वीडियो, ऑडियो या इमेज कौन सी है. मतलब आपको वॉट्सऐप ओपन नहीं करना होता और नोटिफिकेशन से ही पता चल जाएगा कि भेजा गई चीज क्या है. 

2. QR कोड फीचर
मान लीजिए आपको किसी को कॉन्टैक्ट शेयर करना है, तो आपको वॉट्सऐप QR कोड का ऑप्शन मिलेगा. इसकी टेस्टिंग शुरू है और जल्द आपको वॉट्सऐप में ये ऑप्शन मिलेगा. 
3. डार्क मोड
इस फीचर की टेस्टिंग कंपनी काफी पहले से कर रही है. कम रौशनी या अंधेरे में वॉट्सऐप यूज करने के लिए ये फीचर शानदार होगा. स्मार्टफोन में भी डार्क मोड का ऑप्शन होता है जिसे आप एनेबल कर सकते हैं.

4. कॉन्टैक्ट रैंकिंग फीचर
इस साल वॉट्सऐप में आपको कॉन्टैक्ट रैंकिगं फीचर भी दिखेगा. इसके तहत एक लिस्ट आपको मिलेगी जिसमें पता चलेगा कि आप सबसे ज्यादा बात किससे करते हैं. इस फीचर से बार-बार आपको कॉन्टैक्ट सर्च नहीं करने होंगे. 

5. वॉयस मैसेज सुनना आसान
एक के बाद एक वॉयस मैसेज सुनने के लिए एक नया फीचर मिलेगा. अब तक एक वॉयस मैसेज के बाद आपको दूसरा मैनुअली प्ले करना होता है. यह फीचर भी टेस्टिंग में है और जल्द ही ये सभी के लिए दिया जा सकता है. यानी एक साथ आए कई वॉयस मैसेज एक एक करके खुद प्ले होंगे. 
6. लॉक फीचर
अब आप प्राइवेसी के लिए अपना वॉट्सऐप अलग से लॉक कर सकेंगे और इसकी सुविधा वॉट्सऐप खुद देगा. फिंगरप्रिंट स्कैनर और फेस लॉक के जरिए वॉट्सऐप लॉक करने का फीचर आईफोन यूजर्स के लिए पहले जारी किया जाएगा. 

7. प्राइवेट रिप्लाई  
यह फीचर खासतौर पर ग्रुप में बातचीत करने के लिए होगा. ग्रुप में आप किसी मैसेज को प्राइवेट रिप्लाई करके सीधे केवल उस व्यक्ति को भेज सकते हैं, जिसे आप चाहते हैं. बाकियों को ये मैसेज नहीं मिलेगा. 


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2000 रुपये के नोट को लेकर , RBI ने लिया यह बड़ा फैसला

नई दिल्‍ली: दो साल पहले नोटबंदी के बाद जारी किया गया 2,000 रुपये का करेंसी नोट आजकल बाजार में कम ही देखने को मिल रहा है. इसे लेकर अब केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बड़ा फैसला लिया है. इस फैसले के अनुसार 2000 रुपये करेंसी नोट की छपाई 'न्यूनतम स्तर पर' पहुंच गई है. वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी. 

2016 में हुआ था जारी
नवंबर, 2016 में केंद्र सरकार की ओर से लाई गई नोटबंदी के बाद सरकार ने 2,000 रुपये का नया नोट जारी किया था. सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से हटा दिया था. उसके बाद रिजर्व बैंक ने 500 के नए नोट के साथ 2,000 रुपये का भी नोट जारी किया.
यह है वजह
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक और सरकार समय समय पर करेंसी की छपाई की मात्रा पर फैसला करते हैं. इसका फैसला चलन में मुद्रा की मौजूदगी के हिसाब से किया जाता है. जिस समय 2,000 का नोट जारी किया गया था तभी यह फैसला किया गया था कि धीरे-धीरे इसकी छपाई को कम किया जाएगा. 2,000 के नोट को जारी करने का एकमात्र मकसद प्रणाली में तत्‍काल नकदी उपलब्ध कराना था. अधिकारी ने बताया कि 2,000 के नोटों की छपाई काफी कम कर दी गई है. 2000 के नोटों की छपाई को न्यूनतम स्तर पर लाने का फैसला किया गया है. 

क्या कहते हैं आंकड़ें?
रिजर्व बैंक के आंकड़ों में मार्च, 2017 के अंत तक 328.5 करोड़ इकाई 2000 के नोट चलन में थे. 31 मार्च, 2018 के अंत तक इन नोटों की संख्या मामूली बढ़कर 336.3 करोड़ इकाई पर पहुंच गई. मार्च 2018 के अंत तक कुल 18,037 अरब रुपये की करेंसी चलन में थी. इनमें 2000 के नोटों का हिस्सा घटकर 37.3 प्रतिशत रह गया.

मार्च, 2017 के अंत तक कुल करेंसी में 2000 के नोटों का हिस्सा 50.2 प्रतिशत पर था.  इससे पहले नवंबर 2016 में 500, 1000 रुपये के जिन नोटों को बंद किया गया उनका कुल मुद्रा चलन में 86 प्रतिशत तक हिस्सा था.


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केवल इन कंपनी ने ही जोड़े नए ग्राहक

नई दिल्ली। दूरसंचार दिग्गज रिलायंस जियो नए ग्राहक जोडऩे में अक्टूबर में सबसे आगे रही और कंपनी ने करीब 1.05 करोड़ नए ग्राहक जोड़े। उसके बाद बीएसएनएल रही, जबकि बाकी दूरसंचार कंपनियों के ग्राहकों में कमी दर्ज की गई। 

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलांयस जियो के ग्राहकों की संख्या बढक़र 26.27 करोड़ हो गई, जबकि सितंबर में कंपनी के कुल 25.22 करोड़ ग्राहक थे। 

ट्राई ने बयान में कहा कि जीएसएम, सीडीएमए और एलटीई तीनों को मिलाकर वायरलेस ग्राहकों की संख्या में अक्टूबर में 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जोकि 117 करोड़ रही। जबकि सितंबर में कुल 116.92 करोड़ वायरलेस ग्राहक थे। 

बयान में कहा गया, ‘‘शहरी क्षेत्रों में वायरसेल ग्राहकों की संख्या अक्टूबर में 64.82 करोड़ हो गई, जबकि सितंबर में यह 64.77 करोड़ थी। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस ग्राहकों की संख्या अक्टूबर में बढक़र 52.17 हो गई, जबकि सितंबर में यह 52.15 करोड़ थी।’’

सरकारी भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) जियो के बाद दूसरी कंपनी रही जिसके ग्राहकों में बढ़ोतरी हुई और कंपनी ने अक्टूबर में कुल 3.64 लाख नए ग्राहक जोड़े और उसके कुल ग्राहकों की संख्या बढक़र 11.34 करोड़ हो गई। 

देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया के ग्राहकों में समीक्षाधीन महीने में 73.61 लाख की कमी आई और कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या घटकर 42.76 करोड़ हो गई है। 

भारती एयरटेल के ग्राहकों की संख्या में अक्टूबर में 18.64 लाख की गिरावट आई है और इनकी संख्या घटकर 34.16 करोड़ हो गई है। 


 


 


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बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ इन बैंको के विलय को मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरकारी बैंकों -देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के विलय को मंजूरी प्रदान कर दी। 

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद के मुताबिक, इस विलय से बैंक ऑफ बड़ौदा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक और ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धी निकाय’ बन जाएगा।

मंत्री ने कहा कि इस विलय से कर्मचारियों की छंटनी नहीं होगी, क्योंकि देना और विजया बैंक के कर्मचारियों को बैंक ऑफ बड़ौदा में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

पिछले साल सितंबर में सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में समेकन के उद्देश्य से सुधार उपाय लागू किए थे। इस सुधार उपाय के लागू होने से बीओबी देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा, जिसके पास 14.82 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त कारोबार होगा।

बैंकों के विलय का यह फैसला ‘वैकल्पिक तंत्र’ द्वारा लिया गया है, जिसमें जेटली के अलावा रेल मंत्री पीयूष गोयल और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं।

गौरतलब है कि पिछले 21 महीनों में दूसरी बार सरकारी बैंकों का विलय किया जा रहा है। इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहयोगी बैंकों और  भारतीय महिला बैंक का इसमें एक अप्रैल, 2017 को विलय किया गया था। इसके बाद एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक बन गया और दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल हो गया। 

 


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अब मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले कार्ड नहीं करेंगे काम, ऐसे बदलवाएं

नई दिल्ली: पहले कैश का चलन था. वक्त बदला और बदलते वक्त में कैश की जगह कार्ड का इस्तेमाल किया जाने लगा. अब पैसे निकालने के लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं रह गई है. जगह-जगह ATM लगे हुए हैं. हर बड़े दुकान पर खरीददारी के लिए कार्ड का इस्तेमाल होने लगा है. ऐसे में कार्ड की सुरक्षा बेहद अहम है. इसलिए, बदलते वक्त के साथ डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के डेटा को ज्यादा सुरक्षित रखना अहम हो गया है. यही वजह है कि पुराना मैग्नेटिक स्ट्रिप वाला कार्ड आज से काम करने बंद कर दिया है. आज से केवल चिप वाला कार्ड ही काम करेगा.

रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया मैग्‍नेटिक  स्ट्रिप कार्डों को ईएमवी (यूरोप, मास्टरकार्ड और वीजा) वाले चिप कार्ड से बदलने के लिए 31 दिसंबर, 2018 तक दिशा-निर्देश जारी किया था. RBI का मानना है कि नए ईएमवी कार्ड से फ्रॉड होने का खतरा बेहद कम होगा. इसको लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी ट्वीट किया है कि 31 दिसंबर से पहले आप अपने ऐसे कार्ड बदल लें.
कैसे बदलेगा कार्ड?
बैंक की ओर से ट्वीट कर दी गई जानकारी के मुताबिक, पुराने ATM कार्ड बदलकर उनकी जगह EVM चिप वाला डेबिट कार्ड जारी किया जा रहा है. इसके लिए ग्राहकों को अपनी पासबुक लेकर बैंक जाना होगा और एक फॉर्म भरना होगा. इसके बाद वे नया और सुरक्षित कार्ड ले सकते हैं. जो लोग इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करते हैं, वे ऑनलाइन भी नए कार्ड का आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा बैंक की ब्रांच में जाकर भी ऑनलाइन अप्लाई करने का विकल्प है.

क्या है दोनों कार्ड्स में अंतर?
अगर आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड में सामने की ओर बाईं तरफ मोबाइल के सिम कार्ड की तरह नजर आने वाला चिप नहीं लगा है, तो ये पुराना यानी मैग्‍नेटिक स्ट्रिप कार्ड है. इस कार्ड से ट्रांजैक्‍शन के लिए कार्डहोल्‍डर के सिग्‍नेचर या पिन की जरूरत होती है. इस पर आपके अकांउट की डिटेल्‍स मौजूद होती है. इसी स्ट्रिप की मदद से कार्ड स्‍वाइप के वक्‍त मशीन आपके बैंक इंटरफेस से जुड़ती है और प्रोसेस आगे बढ़ता है. वहीं, चिप वाले कार्ड में सारी इन्‍फॉरमेशन चिप में मौजूद होती है। इनमें भी ट्रांजैक्‍शन के लिए पिन और सिग्‍नेचर जरूरी होते हैं लेकिन, ईएमवी चिप कार्ड में ट्रांजैक्‍शन के वक्‍त यूजर को ऑथेंटिकेट करने के लिए एक यूनीक ट्रांजैक्‍शन कोड जनरेट होता है, जो वेरिफिकेशन को सपोर्ट करता है. ऐसा मैग्नेटिक स्ट्रिप कार्ड में नहीं होता.

नहीं लगेगी कोई फीस
अगर आप SBI के ग्राहक हैं तो आपके लिए जरूरी है कि जल्द ही अपना कार्ड बदल लें, क्योंकि, SBI मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप एटीएम को ब्लॉक कर रहा है. बैंक अपने ग्राहकों के लिए पुराने मैग्‍नेटिक स्‍ट्राइप कार्ड को चिप वाले कार्ड से रिप्‍लेस करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर चुका है.


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नए साल में LPG सिलेंडर के दामों में बड़ी कटौती

नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं के लिए एक एक बड़ी राहत की खबर है कि नए साल में रसोई गैस सिलेंडरों के दाम घट गए हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 120.50 रुपये और सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम में 5.91 रुपये की कटौती की है। 

आईओसी द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, नई दरें एक जनवरी से लागू हो जाएंगी। नई दरों के अनुसार, सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम दिल्ली में 500.90 रुपये से घटकर 494.99 रुपये प्रति सिलेंडर हो जाएगा। 

वहीं, बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम 809.50 रुपये से घटकर 689 रुपये प्रति सिलेंडर हो जाएगा। आईओसी ने कहा, ‘‘दिल्ली में बिना सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर का दाम 120.50 रुपये घट गया है और नई दर एक जनवरी, 2019 से लागू हो जाएगी।’’


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नये साल का तोहफा : जाने आज से क्या क्या सस्ता हुआ

नई दिल्ली। आम आदमी को नये साल का तोहफा देते हुये सरकार ने एक जनवरी से सिनेमा टिकट, 32 इंच तक के टेलीविजन और मानिटर स्क्रीन सहित 23 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दर कम करने की अधिसूचना जारी कर दी है। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद ने 22 दिसंबर को हुई बैठक में 23 वस्तुओं और सेवाओं पर कर दर कम करने का फैसला किया था। इनमें सिनेमा टिकट, टेलीविजन और मानिटर स्क्रीन, पावर बैंक आदि शामिल हैं। इसके अलावा शीतित एवं डिब्बा बंद खास तरह की प्रसंस्कृत सब्जियों को शुल्कमुक्त कर दिया गया।

उपभोक्ताओं को मंगलवार से इन वस्तुओं के लिये कम दाम देने होंगे। एक जनवरी से इन वस्तुओं पर जीएसटी दर कम हो जायेगी। जिसके परिणामस्वरूप इनके दाम घट सकते हैं। जीएसटी परिषद ने अपनी पिछली बैठक में इन वस्तुओं एवं सेवाओं पर 28 प्रतिशत की दर को कम कर दिया था। कुछ वस्तुओं पर इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है जबकि कुछ सेवाओं पर 18 प्रतिशत की दर को कम कर 12 प्रतिशत किया गया है। 

जीएसटी की 28 प्रतिशत की सबसे ऊंची दर अब कुछ लक्जरी वस्तुओं, अहितकर सामानों, सीमेंट, बड़े टीवी स्क्रिन, एयरकंडीसनर्स और डिशवाशर्स पर ही रह गई है। परिषद ने दिव्यांग व्यक्तियों के काम आने वाले वाहक साधनों के कलपुर्जो पर जीएसटी दर को 28 से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया। माल परिवहन वाहनों के तीसरे पक्ष की बीमा प्रीमियम पर जीएसटी दर को 18 से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया।