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बढ़ोतरी: डीजल के दामों में फिर आई तेजी, दिल्ली में डीजल 11 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। आज तेल कंपनियों ने डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की है। राजधानी दिल्ली में डीजल आज 11 पैसे महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के साथ राजधानी दिल्ली में डीजल की कीमत 81.05 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गई है। हालांकि आज पेट्रोल की कीमतों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। रविवार को भी डीजल की कीमत में 16 पैसे की बढ़ोतरी हुई थी।
रोजाना सुबह 6 बजे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज़ाना पेट्रोल और डीजल के रेट तय करती हैं। इंडियन ऑयल , भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम रोज़ाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन कर जारी करती हैं।

दिल्ली में टमाटर की खुदरा कीमत बढ़कर 70 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंची

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। टमाटर की कीमत तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली में रविवार को टमाटर की खुदरा कीमत बढ़कर 70 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। एक व्यापारिक रिपोर्ट के मुताबिक टमाटर का मौसम खत्म हो जाने के कारण इसकी कीमत बढ़ गई है। दिल्ली के असंगठित खुदरा बाजारों में एक जून के बाद हर सप्ताह टमाटर की कीमत 10 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ी है। यह बढ़ोतरी मदर डेयरी के सफल रिटेल वेजिटेबल आउटलेट और ईटेलर्स बिगबास्केट और ग्रोफर्स के प्लेटफॉर्म्स पर भी देखी गई। रविवार को बिगबास्केट 60-66 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से और ग्रोफसर्स 53-55 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से टमाटर बेच रही थी। व्यापारियों ने बताया कि असंसगठित बाजारों में क्वालिटी और स्थान के हिसाब से टमाटर करीब 70 रुपए प्रति किलो की दर से मिल रहा था। उन्होने कहा कि थोक मंडियों में भी फसल की आवक कम रहने से पिछले कुछ सप्ताहों से कीमत ऊंची चल रही है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के कुछ टमाटर उत्पादक राज्यों में कोरोनावायरस संक्रमण का मामला बढऩे से कुछ स्थानों पर टमाटर की तोड़ाई प्रभावित हुई है। उपभोक्ता कार्य मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली के आसपास के राज्यों में भी टमाटर की कीमत बढ़ी है।

 पिछले सप्ताह उपभोक्ता कार्य मंत्री राम विलास पासवान ने कहा था कि इस मौसम में टमाटर की आपूर्ति कम रहती है। इसके अलावा यह जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए टमाटर की कीमत बढ़ रही है।
विशेषज्ञों ने कहा कि कम आपूर्ति वाले महीनों में टमाटर की कीमत आम तौर पर बढ़ जाती है। पिछले पांच साल के आंकड़े यही बताते हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, पंजाब, तमिलनाडु, केरल, जम्मू एवं कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश में टमाटर का उत्पादन कम होता है। ये राज्य टमाटर की उपलब्धता के लिए उन राज्यों पर निर्भर हैं, जहां उत्पादन ज्यादा होता है।

देश में सालाना 1.973 करोड़ टन टमाटर का उत्पादन होता है

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में सालाना 1.973 करोड़ टन टमाटर का उत्पादन होता है। जबकि सालाना खपत करीब 1.151 करोड़ टन का है।

रिलायंस की छलांग: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर 1947 के उच्चतम स्तर पर पहुंचे, कंपनी का मार्केट कैप 12.31 लाख करोड़ हुआ

जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। सोमवार को रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर अपने लाइफ टाइम उच्चतम स्तर 1947 पर पहुंच गए। वहीं, कंपनी का मार्केट कैप 12.31 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इससे पहले ये 10 जुलाई को कंपनी का मार्केट कैप 11.90 लाख करोड़ रुपए था।
आज रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर 1908.50 पर खुले। शुक्रवार, 10 जुलाई की तुलना में इसके शेयर में 30 अंक की बढ़त रही। अब तक की ट्रेडिंग के दौरान ये 3.21त्न बढ़त के साथ 1947.00 तक के उच्चतम स्तर पर जाने में कामयाब रहा है। वहीं, कंपनी का मार्केट कैप 12,29,115 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
क्वालकॉम वेंचर्स मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्र्रीज के जियो प्लेटफॉर्म्स में 730 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इस निवेश के साथ जियो पलेटफॉर्म्स में क्वालकॉम वेंचर्स की हिस्सेदारी 0.15 फीसदी हो जाएगी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने एक बयान में कहा कि क्वालकॉम वेंचर्स के निवेश का यह समझौता जियो प्लेटफॉर्म्स के 4.91 लाख करोड़ रुपए इक्विटी वैल्यू पर हुआ है। समझौते में जियो प्लेटफॉर्म्स का एंटरप्राइज वैल्यू 5.16 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। क्वालकॉम वेंचर्स क्वालकॉम इनकॉरपोरेटेड की निवेश इकाई है।
12 निवेश से अब तक 1.17 लाख करोड़ रुपए जुटाए
आरआईएल ने जियो प्लेटफॉर्म्स की हिस्सेदारी बिक्री से 1,17,588.45 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह राशि 11 कंपनियों के 12 निवेश के जरिए जुटाई गई है। इसमें सबसे बड़ा निवेश फेसबुक का रहा है। फेसबुक ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 9.99त्न हिस्सेदारी के लिए 43,573.62 करोड़ रुपए का निवेश किया है। आरआईएल को अब तक जियो प्लेटफॉर्म्स की 25.09 हिस्सेदारी के लिए निवेश मिल चुका है।
मुकेश अंबानी ने वॉरेन बफेट को पीछे छोड़ा
विश्व के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट को रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पीछे छोड़ दिया है। वॉरेन बफेट की नेटवर्थ 67.9 अरब डॉलर रही है। जबकि अंबानी की नेटवर्थ 68.3 अरब डॉलर रही है। यह जानकारी ब्लूमबर्ग बिलिनायर्स इंडेक्स में दी गई है। इससे विश्व के टॉप 10 अमीरों की सूची में अब मुकेश अंबानी 8 वें नंबर पर आ गए हैं। जबकि बफेट 9 वें नंबर पर पहुंच गए हैं।

बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना या पीपीएफ में कर सकते हैं निवेश

30 जुलाई तक निवेश करने पर मिलेगा टैक्स छूट का लाभ
जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)।  बच्चों का भविष्य सवारना सभी पैरेंट्स की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों की शादी या पढाई पर होने वाले खर्चों को ध्यान में रखकर सही जगह निवेश किया जाए। अगर आप अपनी बेटी के लिए कहीं ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं जहां आपका पैसा भी सुरक्षित रहे और आपको टैक्स छूट का लाभ भी मिले तो आप सुकन्या समृद्धि योजना या पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड में निवेश करना सही रहेगा। आज हम आपको इन दोनों योजनाओं के बारे में बता रहें ताकि आप जरूरत के हिसाब से सही जगह निवेश कर सकें।
सुकन्या समृद्धि योजना से जुड़ी खास बातें 
इस स्कीम को बैंक या पोस्ट ऑफिस में कहीं भी खोला जा सकता है। सुकन्या समृद्धि योजना में अभी 7.6 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है।
इसमें 250 रुपए में खाता खोला जा सकता है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत एकाउंट किसी बच्ची के जन्म लेने के बाद 10 साल की उम्र से पहले ही खोला जा सकता है। 
लड़की के 21 साल का होने या लड़की की शादी होने के बाद एकाउंट मैच्योर हो जाएगा और आपको पूरा पैसा ब्याज सहित मिल जाएगा। 
खाता खोलने से 5 साल के बाद बंद किया जा सकता है। यह भी कई परिस्थितियों में किया जा सकता है, जैसे कोई खतरनाक बीमारी होने पर या अगर किसी दूसरे कारण से खाता बंद किया जा रहा हो तो इसकी इजाजत दी जा सकती है, लेकिन उस पर ब्याज सेविंग एकाउंट के हिसाब से मिलेगा।
सुकन्या समृद्धि योजना खाते से 18 साल की उम्र के बाद बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए खर्च के मामले में 50 फीसदी तक रकम निकाली जा सकती है।
इसमें खाता खोलने के लिए बच्ची का बर्थ सर्टिफिकेट देना जरूरी है। इसके साथ ही बच्ची और अभिभावक के पहचान और पते का प्रमाण भी देना होता है।
यह खाता देशभर में कहीं भी ट्रांसफर कराया जा सकता है, अगर खाताधारक खाता खोलने की मूल जगह से कहीं और शिफ्ट हो गया हो। इसमें लिए आपको कोई शुल्क नहीं देना होता।
अगर खाता 21 साल पूरा होने से पहले बंद कराया जा रहा है तो खाताधारक को यह एफिडेविट देना पड़ेगा कि खाता बंद करने के समय उसकी उम्र 18 साल से कम नहीं है।
चालू वित्त वर्ष में सुकन्या समृद्धि योजना के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा कराए जा सकते हैं।
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत पैसा लगाने पर आयकर कानून की धारा 80ष्ट के तहत टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है।  इस स्कीम को बैंक या पोस्ट ऑफिस में कहीं भी खोला जा सकता है। इसके अलावा इसे किसी भी बैंक में या किसी भी पोस्ट ऑफिस में ट्रांसफर भी किया जा सकता है। 
इसे खोला तो केवल 100 रुपए से जा सकता है, लेकिन फिर बाद में हर साल 500 रुपए एक बार में जमा करना जरूरी है। 

इस अकाउंट में हर साल अधिकतम 1.5 लाख रुपए ही जमा किए जा सकते हैं।
यह स्कीम 15 साल के लिए है, जिससे बीच में नहीं निकला जा सकता है। लेकिन इसे 15 साल के बाद 5-5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। 
इसे 15 साल के पहले बंद नहीं किया जा सकता है, लेकिन 3 साल बाद से इस अकाउंट के बदले लोन लिया जा सकता है। अगर कोई चाहे तो इस अकाउंट से 7वें साल से नियमों के तहत पैसा निकाल सकता है। 
ब्याज दरों की समीक्षा हर तीन माह में सरकार करती है। यह ब्याज दरें कम या ज्यादा हो सकती है। फिलहाल इस अकाउंट पर 7.1 फीसदी ब्याज मिल रहा है।
इन योजना में निवेश के जरिए 80ष्ट के तहत 1.5 लाख रुपए तक टैक्स की छूट का लाभ लिया जा सकता है।

कहां करें निवेश?
दोनों ही जगह निवेश करके इनकम टैक्स बचाया जा सकता है। इसके अलावा दोनों की स्कीम की अपनी खासियत और कमियां हैं। अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से कम है तो सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करना सही रहेगा क्योंकि यहां से आपको क्कक्कस्न की तुलना में ज्यादा ब्याज मिलेगा। वहीं अगर आपकी बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा है तो आप क्कक्कस्न में निवेश कर सकते हैं।

पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस 45,000 करोड़ रुपए जुटाने के लिए शेयर धारकों की मंजूरी लेगी

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस 45,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी इसके लिए अगले महीने शेयर धारकों से मंजूरी लेगी। 5 अगस्त को इसकी एजीएम है। यह पैसा डेट सिक्योरिटीज से जुटाया जाएगा। यह जानकारी कंपनी ने एक्सचेंज को दी है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कंपनी ने कहा है कि शेयरधारकों से यह अपील की जाएगी कि वे बोर्ड के इस ऑफर को मंजूरी दें। यह पैसा सिक्योर्ड, अनसिक्योर्ड एनसीडी से जुटाया जाएगा। इसके जरिए 45,000 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इसे एक बार में या कई बार में जुटाया जाएगा। कंपनी इसके लिए बांड भी जारी कर सकती है जो प्राइवेट प्लेसमेंट के लिए होगा। कंपनी का उद्देश्य लंबी अवधि के लिए पैसा जुटाना है। इन पैसों को कंपनी लोन के रूप में वितरित करेगी। अगर शेयरधारकों से मंजूरी मिलती है तो कंपनी इसे किसी भी तरह से जुटा सकती है। इसमें प्राइवेट प्लेसमेंट और पब्लिक इश्यू शामिल हो सकता है। 2019-20 में कंपनी को ब्याज से शुद्ध आय 2,308 करोड़ रुपए हुई थी।


 यह एक साल पहले की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक था।

कर्ज के वितरण में आई भारी कमी 

पीएनबी हाउसिंग ने बताया कि उसके कर्ज का वितरण वित्त वर्ष 2020 में 48 प्रतिशत गिरकर 18,626 करोड़ रुपए हो गया है। जबकि असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 2 प्रतिशत गिरकर 83,346 करोड़ रुपए रह गया है। इसमें से 85 प्रतिशत एयूएम रिटेल बिजनेस से आता है। पीएनबी हाउसिंग को पंजाब नेशनल बैंक ने प्रमोट किया है।

मास हाउसिंग और रिटेल पर होगा फोकस

कोविड की वजह से कंपनी का फोकस मास हाउसिंग और कैपिटल एफिसिएंट रिटेल सेगमेंट पर होगा। यह ऑपरेटिंग खर्च को कम करने पर भी फोकस करेगी। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में क्रेडिट ग्रोथ के बारे में अनुमान है कि यह धीमा रहेगी। जबकि रिकवरी आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी। कंपनी के एमडी एवं सीईओ नीरज व्यास ने कहा कि यह अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगा कि किस तरह की स्थिति आगे रहेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी लगातार अपने कॉर्पोरेट बुक को कम करेगी।

मुकेश अंबानी की नेटवर्थ देश के 9 छोटे राज्यों की जीडीपी के बराबर

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अब दुनिया के 7वें सबसे अमीर शख्स बन गए हैं। इससे पहले अप्रैल 2020 में आई लिस्ट में अंबानी 21वें नंबर पर थे। अब 10 जुलाई को उनकी नेटवर्थ 70.10 अरब डॉलर यानी 5.25 लाख करोड़ रुपए हो गई। शुक्रवार शाम को फोर्ब्स की रियल टाइम बिलियनेयर्स की रैंकिंग में अंबानी ने बर्कशायर हैथवे के वॉरेन बफे, गूगल के लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन को पीछे छोड़ दिया।
दुनिया के 10 सबसे अमीरों की लिस्ट में मुकेश अंबानी न सिर्फ इकलौते भारतीय हैं, बल्कि एशिया के भी इकलौते व्यक्ति हैं। मुकेश अंबानी के पास अभी जितनी संपत्ति है, उतनी जीडीपी तो देश के 9 छोटे राज्यों की है। इन 9 राज्यों की जीडीपी कुल मिलाकर 5.31 लाख करोड़ रुपए है। 
इससे पहले अप्रैल 2020 में आई फोर्ब्स की लिस्ट में अंबानी 21वें नंबर पर थे।
मुकेश अंबानी, पत्नी नीता, बेटी ईशा, बेटे अनंत और आकाश के साथ।
5 साल में मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 3.5 गुना बढ़ी
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सितंबर 2016 में जियो के साथ टेलीकॉम सेक्टर में कदम रखा था। उससे पहले मार्च 2016 में अंबानी की नेटवर्थ 19.3 अरब डॉलर थी। उसके बाद के सालों में अंबानी की नेटवर्थ 50 अरब डॉलर (करीब 3.86 लाख करोड़ रुपए) बढ़ी।
मार्च से लेकर अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर्स में भी दोगुना से ज्यादा की बढ़त देखी गई। 23 मार्च को आरआईएल के शेयर्स की कीमत बीएसई पर 875.72 रुपए थी। जबकि, 10 जुलाई तक शेयर की कीमत बढ़कर 1880.20 रुपए पर पहुंच गई। इस वजह से मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में अच्छा खासा इजाफा हुआ है।
हालांकि, फोर्ब्स के मुताबिक, जियो के अलावा अंबानी की नेटवर्थ के इजाफे की वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज का तेल और गैस से जुड़ा कारोबार भी है। इन दोनों सेक्टर से कंपनी को 88 अरब डॉलर (करीब 6.68 लाख करोड़ रुपए) का सालाना रेवेन्यू मिलता है।
अमेजन के सीईओ और फाउंडर जेफ बेजोस दुनिया के सबसे अमीर शख्स हैं। उनके पास 189.2 अरब डॉलर (14.12 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति है। दूसरे नंबर माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स हैं, जिनके पास 111.1 अरब डॉलर (8.30 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति है। जबकि, तीसरे नंबर पर लग्जरी गुड्स कंपनी एलवीएमएच के चेयरमैन बर्नार्ड अरनॉल्ट हैं। अरनॉल्ट 109.3 अरब डॉलर (8.16 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति के मालिक हैं।
अगर जेफ बेजोस, बिल गेट्स और बर्नार्ड अरनॉल्ट की संपत्ति को जोड़ दिया जाए, तो ये कुल 30.58 लाख करोड़ रुपए होती है। सरकार ने 2020-21 के लिए 30.42 लाख करोड़ रुपए का बजट रखा है।
फोर्ब्स की लिस्ट के मुताबिक, अभी भारत में 115 अरबपति हैं। अप्रैल 2020 तक देश में अरबतियों की संख्या 102 थी। यानी तीन महीने में देश में 13 अरबपति बढ़ गए।
मुकेश अंबानी देश के सबसे अमीर शख्स हैं। उनकी संपत्ति 5.25 लाख करोड़ रुपए है। दूसरे नंबर पर डी-मार्ट की पैरेंट कंपनी एवेन्यू सुपरमार्केट के मालिक राधाकृष्ण दमानी की संपत्ति 1.21 लाख करोड़ रुपए है। यानी पहले और दूसरे सबसे अमीर शख्सियतों की संपत्ति में 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का अंतर है।

अर्थव्यवस्था में गिरावट से रेपो रेट में अभी भी 50 से 150 बीपीएस की कटौती हो सकती है

आरबीआई से मिल सकती है राहत
जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। जिस तरह से देश की अर्थव्यवस्था है, उसमें 3 से 5 प्रतिशत की गिरावट वित्त वर्ष 2021 में मानी जा रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अभी भी 50 से 150 बीपीएस की कटौती कर सकता है। यह उम्मीद बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने जताई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई के लिए ज्यादा रियल लेंडिंग रेट भी एक चिंता का विषय बना रहेगा। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि अगस्त के अंत तक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुल जाएगी। ऐसे में 3 प्रतिशत की गिरावट दिख सकती है। अगर यह संकट और आगे जाता है तो यह गिरावट 5 प्रतिशत तक हो सकती है। यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि सालाना वृद्धि किस तरह की होगी। रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल-मई के लॉकडाउन से 150 बीपीएस का असर दिखा है। हमारा मानना है कि आंशिक लॉकडाउन से यह असर 100 बीपीएस और रहेगा। वास्तविक असर तभी दिखेगा, जब यह पता चले कि यह महामारी कब तक रहेगी। बता दें कि कई अर्थशास्त्रियों ने यह आशंका जताई है कि अर्थव्यवस्था में 3 से 7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। कुछ अर्थशास्त्रियों के मुताबिक जिस तरह से कोरोना महामारी है, ऐसे में आगे अभी और दिक्कत हो सकती है। हालांकि अभी भी महामारी दिन ब दिन बढते जा रही है। बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से पहले रेट कट हुए हैं, उसे देखते हुए आगे यह उम्मीद बनी है कि रेट कट हो सकता है। बता दें कि इस साल सरकार ने बैंकों में कोई भी पूंजी डालने की घोषणा नहीं की है। साथ ही सरकार इस साल विनिवेश के जरिए 2.1 लाख करोड रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी तक पूंजी जुटाने में सरकार को कोई खास सफलता नहीं मिली है। माना यह भी जा रहा है कि सरकार की घोषणा नहीं होने के बावजूद बैंकों को पूंजी मिल सकती है।


 इसमें एक डायरेक्ट बांड इश्यू से और दूसरा रिजर्व बैंक के पास प?े रिजर्व से संभव हो सकता है। आरबीआई के पास इस समय 139 अरब डॉलर का रिजर्व है।

यस बैंक के 15,000 करोड रुपए के एफपीओ के पहले बांड निवेशकों ने शुरू की लडाई, ज्यादा ब्याज पाने पर कोई आरोप नहीं लगाता-आरबीआई

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। यस बैंक के ऊंचे ब्याज दर वाले एडिशनल टियर 1 बांड के राइटडाउन के मुद्दे पर अब ज्यादा निवेशक अपने पैसे वापस लेने को आगे आ गए हैं। ज्यादा ब्याज देने के यस बैंक के वादे के खिलाफ कई निवेशक कोर्ट तक पहुंचे हैं। बता दें कि यस बैंक का एफपीओ 15 जुलाई को खुल रहा है। बैंक इससे 15 हजार करोड रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। कई निवेशकों ने यस बैंक के रेस्क्यू प्लान के हिस्से के रूप में बांड के राइट डाउन के लिए आरबीआई के खिलाफ देश भर में मुकदमों की शुरुआत की है। इनमें से एक 63 मून्स टेक्नोलॉजीज है। पहले इसका नाम फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज था। एमसीएक्स के प्रमोटर्स जिग्नेश शाह द्वारा स्थापित इस कंपनी ने आरबीआई, आरबीआई द्वारा नियुक्त यस बैंक के प्रशासक और यस बैंक के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

आरबीआई ने जवाबी हलफनामा कोर्ट में दायर किया
अब आरबीआई ने 63 मून्स टेक्नोलॉजीज द्वारा याचिका के जवाब में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। काउंटर एफिडेविट में आरबीआई ने क?े शब्दों का उपयोग किया है। इसने कहा है कि यस बैंक और एटी-1 बांड होल्डर्स के बीच हुए कांट्रैक्ट के प्रोविजन के आधार पर राइट ऑफ किया गया था। इसमें कोई गलत नहीं है। एटी-1 बांड को राइटिंग ऑफ करने का उद्देश्य यह था कि जिन सरकारी बैंकों ने इसमें पैसे लगाए थे वे सुरक्षित रहें। आरबीआई ने कहा है कि रिटेन ऑफ नोटीफाइड स्कीम को लागू करने के लिए होता है।
बैंक के बांड में लोगों को मिल रहा था ज्यादा ब्याज
आरबीआई ने एफिडेविट में कहा है कि यस बैंक में वित्तीय मुश्किलों से पहले किसी भी पिटीशनर ने कोई शिकायत नहीं कराई। क्योंकि तब वे लोग इसी एटी-1 बांड में ऊंची ब्याज दरों का फायदा ले रहे थे। आरबीआई ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है कि एक ओर आप ऊंची ब्याज दर लें और बाद में जब यह फेल हो जाए तो अपना फोकस आरबीआई पर कर दें। एटी 1 बांड्स को परपेच्युअल बांड्स भी कहा जाता है। यह टियर 1 बांड्स की तुलना में जोखिम वाला बांड होता है। निवेशक अक्सर ज्यादा ब्याज की लालच में इस बांड्स में निवेश करते हैं।
एक्सिस ट्रस्टी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर किया है पिटीशन
कोर्ट ने कहा कि इस साल 31 मार्च के बाद बिके बीएस-4 वाहनों का अभी रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। पीठ ने कहा कि लॉकडाउन लगने के बाद भी मार्च के आखिरी सप्ताह में बीएस-4 वाहनों की बिक्री ब? गई। ऑनलाइन माध्यमों से भी ये वाहन बेचे गए। इस मामले में कोर्ट की न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि अदालत ने 27 मार्च के अपने आदेश को वापस ले लिया है।
लॉकडाउन में वाहनों की बिक्री पर कोर्ट ने उठाया सवाल
वाहन डीलर्स संगठन के वकील ने पुराने आदेश के हवाले से कहा कि कोर्ट ने कहा था कि  31 मार्च से पहले बिके बीएस-4 वाहनों को रजिस्ट्र्रेशन होगा। इस पर पीठ ने कहा कि मार्च में लॉकडाउन लागू होने के बाद डीलर्स ने ये वाहन कैसे बेचे। कोर्ट ने कहा कि 17,000 वाहनों के विवरण सरकार के ई-वाहन पोर्टल पर नहीं डाले गए हैं। कोर्ट सरकार से ई-वाहन के आंक?े की जांच करने के लिए कहेगा।
उन्हीं वाहनों का होगा रजिस्ट्र्रेशन, जिनके विवरण ई-वाहन पोर्टल पर 31 मार्च तक अपलोड किए गए
कोर्ट ने कहा कि वह उन्हीं बीएस-4 वाहनों के रजिस्ट्र्रेशन की अनुमति देगा, जिनके विवरण 31 मार्च से पहले ई-वाहन पोर्टल पर डाले गए हैं। कोर्ट ने सरकार से उन वाहनों के आंक?े देने के लिए कहा, जिन्हें ई-वाहन पोर्टल पर 31 मार्च के बाद च?ाया गया है। कोर्ट ने वाहन डीलर संगठन से उन वाहनों के आंक?े भी मांगे, जिनकी बिक्री सरकार को की गई है।
बीएस-4 के बाद देश में सीधे बीएस-6 हुआ लागू
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2018 में कहा था कि एक अप्रैल 2020 से देश में बीएस-4 वाहनों की बिक्री नहीं होगी और न ही उनका रजिस्ट्र्रेशन किया जाएगा। इससे पहले 2016 में केंद्र सरकार ने कहा था कि 2020 तक देश में बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 लागू होगा। 15 जून को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि देश में बीएस-4 वाहनों की बिक्री या रजिस्ट्र्रेशन को अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने हल्की छूट वाले पिछले आदेश का उल्लंघन किए जाने के लिए वाहन डीलर्स एसोसिएशन को फटकार भी लगाई थी।
मार्च में कोर्ट ने बिके हुए वाहनों का 30 अप्रैल तक रजिस्ट्र्रेशन किए जाने का दिया था आदेश
मार्च में सुप्रीम कोर्ट को बीएस-4 वाहनों के अनसोल्ड इनवेंट्र्री के विवरण दिए गए थे। उसके मुताबिक वाहन उद्योग के पास करीब 7 लाख दोपहिया, 15,000 पैसेंजर कार और 12,000 कमर्शियल वाहन बचे हुए थे। कोर्ट को यह भी बताय गया था कि 1.05 लाख दोपहिया, 2,250 पैसेंजर कारें और 2,000 कमर्शियल वाहन बिक चुके थे, लेकिन उनका रजिस्ट्र्रेशन नहीं हुआ था। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन बिके वाहनों का रजिस्ट्र्रेशन नहीं हुआ है, उनका रजिस्ट्रेशन 30 अप्रैल तक कर दिया जाए।

कोल इंडिया लिमिटेड और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, 20 हजार करोड़ रुपए जुटाने की है योजना

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। केंद्र सरकार दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकार 20 हजार करोड़ रुपए जुटाएगी। इस राशि का इस्तेमाल कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए घोषित किए गए प्रोत्साहन पैकेज में किया जाएगा। 
इस मामले से वाकिफ अधिकारियों के हवाले से ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बिक्री शेयर सेल के जरिए की जाएगी। हालांकि, यह पूरी तरह से मार्केट सेंटीमेंट पर निर्भर है। कोल इंडिया के मामले में यदि आकर्षक वैल्यूएशन नहीं मिल पाता है तो कंपनी सरकार से शेयरों को बायबैक कर सकती है। कोविड-19 महामारी के कारण केंद्र सरकार के बजट लक्ष्य पटरी से उतर गए हैं। महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के चलते सरकार को वेलफेयर कार्यक्रमों पर खर्च बढ़ाना पड़ा है। इसके अलावा सरकार को अर्थव्यवस्था में रिकवरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
फरवरी में पेश किए गए आम बजट में केंद्र सरकार ने विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया था। यह पिछले साल के विनिवेश लक्ष्य से दोगुना है। इस विनिवेश के जरिए सरकार बजट डेफिसिट को जीडीपी के 3.5 फीसदी के बराबर रखना चाहती है। कोविड-19 के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर अनिश्चित प्रतिबंध और तेल की कम कीमतों के कारण सरकार की एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम को बेचने की योजना को झटका लगा है। पिछले साल सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। इस खरीदारी के बाद बैंक में सरकार की 47 फीसदी हिस्सेदारी रह गई थी। कोल इंडिया में 66 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने जनवरी 2015 में कोल इंडिया में से 10 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी थी। इस बिक्री से सरकार को 22,550 करोड़ रुपए मिले थे।  ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस साल देश का फिस्कल डेफिसिट जीडीपी के 7 फीसदी तक हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह 1994 के स्तर तक पहुंच सकता है। इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) ने भी कहा है कि अगले साल तक देश का पब्लिक डेट जीडीपी के 85.7 फीसदी के बराबर पहुंच सकता है। 

अभी पब्लिक डेट जीडीपी के 70 फीसदी के बराबर है।

1885 में ब्रिटिश इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा इंडियन टेलीग्राफ एक्ट पास किया गया। 1980 के दशक में डाक और टेलीग्राफ विभाग के विभाजन के बाद, दूरसंचार विभाग के अस्तित्व में आने के कारण अंतत: सरकारी स्वामित्व वाली टेलीग्राफ और टेलीफोन कंपनी की शुरुआत हुई, जिसके कारण बीएसएनएल की नींव रखी गई।
15 जुलाई 2013 को टेलीग्राफ सेवाएं बंद हो गई
इसने भारत में टेलीग्राफ सेवाओं को जारी रखा। पर 15 जुलाई 2013 को टेलीग्राफ सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया। 160 साल तक इस सर्विस को उपलब्ध कराने के बाद बीएसएनएल ने 15 जुलाई 2013 को अपनी टेलीग्राफ सेवा बंद कर दी। इसने फरवरी 1855 में जनता के लिए टेलीग्राम देने का काम शुरू किया। इस सेवा को 2010 में वेब-आधारित मैसेजिंग सिस्टम में अपग्रेड किया गया था और इसे पूरे भारत में 182 टेलीग्राफ आफिस के माध्यम से पेश किया गया था।
बीएसएनएल ने 1990 में लैंडलाइन की सेवा शुरू की
कंपनी ने अपनी लैंडलाइन सेवा को 1990 की शुरुआत में लांच किया था। उस समय यह एकमात्र फिक्स्ड लाइन टेलीफोन देनेवाली कंपनी देश में थी। 1999 में जब डीओटी ने नई टेलीकॉम पॉलिसी लाई तब उसके बाद एमटीएनएल को लैंडलाइन सेवा देने की मंजूरी मिली। 1990 और कुछ हद तक 2000 के दशक को देखें तो बीएसएनल के लिए एक स्वर्णिम युग था। आज जिस तरह से किसी विदेशी ब्रांड के फोन की लांचिंग के समय रातों रात लाइन लगती है बुक करने की, उसी तरह की हाल बीएसएनएल की थी। उस दौर में इसकी लैंड लाइन फोन के लिए 6-6 महीने तक लाइन लगती थी।
क्षमता और सब्सक्राइबर
30 अप्रैल 2019 तक इस कंपनी के पास बेसिक टेलीफोन की क्षमता 2.96 करो? थी। डब्ल्यूएलएल की क्षमता 13.9 लाख थी। फिक्स्ड एक्सचेंज की क्षमता 1.46 लाख थी। 11.58 करो? मोबाइल फोन ग्राहक हैं। 1.17 करो? वायरलाइन फोन ग्राहक इसके हैं। वायरलाइन और वायरलेस ब्रॉडबैंड दोनों में 21.56 मिलियन उपभोक्ता शामिल हैं।

कनेक्टिंग इंडिया से डिसकनेक्टिंग बीएसएनएल: 12 साल पहले 4 लाख करोड़ रुपए की थी वैल्यूएशन

जयपुर टाइम्स
मुंबई(एजेंसी)। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की संपत्ति को बेचने यानी एसेट मॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। सरकार ने बीएसएनएल की लैंडहोल्डिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रॉपर्टी बेचने की संभावनाओं को तलाशने की जिम्मेदारी कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई ग्रुप, जोन्स लैंग लासेल और नाइट फ्रैंक को सौंपी है। ये इस महीने के अंत तक अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
दिल्ली और मुंबई छोडकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक बीएसएनएल था
मुंबई और दिल्ली को छोडकर पूरे भारत को कनेक्ट करनेवाली बीएसएनएल का यह हाल कैसे हुआ है और क्यों हुआ, यह भी एक दिलचस्प कहानी है। बीएसएनएल तब शुरू हुआ जब देश में कोई इसकी प्रतिद्वंदी कंपनी नहीं थी। बावजूद इसके महज पिछले 30 सालों में इस कंपनी ने दम तोड दी। इन्हीं 20 सालों में दूसरी ओर निजी कंपनियों ने भारतीय बाजार पर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया है। पिछले तीन-चार सालों में ही जियो ने 40 करोड से ज्यादा ग्राहक बना लिए। वैसे तो बीएसएनएल की शुरुआत 15 सितंबर 2000 को हुई थी। लेकिन कहानी इससे अलग है। कंपनी ने 1 अक्टूबर 2000 से केन्द्र सरकार के तत्कालीन दूरसंचार सेवा विभागों (डीटीएस) और दूरसंचार संचालन (डीटीओ) के दूरसंचार सेवा और नेटवर्क प्रबंधन के लिए इसका गठन हुआ। भारत में दूरसंचार सेवाओं की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने वाली सबसे बडी और प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में से यह एक है।
ब्रिटिश सरकार के जमाने से है इसका इतिहास
भारत संचार निगम लिमिटेड भारत की सबसे पुरानी टेलीकॉम कंपनी है। इसके इतिहास का पता ब्रिटिश सरकार के जमाने से लगाया जा सकता है। भारत में दूरसंचार नेटवर्क की नींव अंग्रेजों ने 19वीं सदी के आसपास रखी थी। ब्रिटिश काल के दौरान,1850 में पहली टेलीग्राफ लाइन कलकत्ता और डायमंड हार्बर के बीच स्थापित की गई थी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1851 में टेलीग्राफ का इस्तेमाल करना शुरू किया और 1854 तक देश भर में टेलीग्राफ लाइनें बिछाई गईं। 1854 में टेलीग्राफ सेवा को जनता के लिए खोला गया और पहला टेलीग्राम मुंबई से पुणे भेजा गया। 


1885 में ब्रिटिश इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा इंडियन टेलीग्राफ एक्ट पास किया गया। 1980 के दशक में डाक और टेलीग्राफ विभाग के विभाजन के बाद, दूरसंचार विभाग के अस्तित्व में आने के कारण अंतत: सरकारी स्वामित्व वाली टेलीग्राफ और टेलीफोन कंपनी की शुरुआत हुई, जिसके कारण बीएसएनएल की नींव रखी गई।
15 जुलाई 2013 को टेलीग्राफ सेवाएं बंद हो गई
इसने भारत में टेलीग्राफ सेवाओं को जारी रखा। पर 15 जुलाई 2013 को टेलीग्राफ सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया। 160 साल तक इस सर्विस को उपलब्ध कराने के बाद बीएसएनएल ने 15 जुलाई 2013 को अपनी टेलीग्राफ सेवा बंद कर दी। इसने फरवरी 1855 में जनता के लिए टेलीग्राम देने का काम शुरू किया। इस सेवा को 2010 में वेब-आधारित मैसेजिंग सिस्टम में अपग्रेड किया गया था और इसे पूरे भारत में 182 टेलीग्राफ आफिस के माध्यम से पेश किया गया था।
बीएसएनएल ने 1990 में लैंडलाइन की सेवा शुरू की
कंपनी ने अपनी लैंडलाइन सेवा को 1990 की शुरुआत में लांच किया था। उस समय यह एकमात्र फिक्स्ड लाइन टेलीफोन देनेवाली कंपनी देश में थी। 1999 में जब डीओटी ने नई टेलीकॉम पॉलिसी लाई तब उसके बाद एमटीएनएल को लैंडलाइन सेवा देने की मंजूरी मिली। 1990 और कुछ हद तक 2000 के दशक को देखें तो बीएसएनल के लिए एक स्वर्णिम युग था। आज जिस तरह से किसी विदेशी ब्रांड के फोन की लांचिंग के समय रातों रात लाइन लगती है बुक करने की, उसी तरह की हाल बीएसएनएल की थी। उस दौर में इसकी लैंड लाइन फोन के लिए 6-6 महीने तक लाइन लगती थी।
क्षमता और सब्सक्राइबर
30 अप्रैल 2019 तक इस कंपनी के पास बेसिक टेलीफोन की क्षमता 2.96 करो? थी। डब्ल्यूएलएल की क्षमता 13.9 लाख थी। फिक्स्ड एक्सचेंज की क्षमता 1.46 लाख थी। 11.58 करो? मोबाइल फोन ग्राहक हैं। 1.17 करो? वायरलाइन फोन ग्राहक इसके हैं। वायरलाइन और वायरलेस ब्रॉडबैंड दोनों में 21.56 मिलियन उपभोक्ता शामिल हैं।

बीएस-4 वाहनों की बिक्री पर कोर्ट सख्त: अदालत ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद बीएस-4 वाहनों की बिक्री के लिए दी गई 10 दिनों की मोहलत वापस ली

जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च के उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें भारत स्टेज-4 (बीएस-4) वाहनों की बिक्री के लिए लॉकडाउन खत्म होने के बाद 10 दिनों की मोहलत दी गई थी। यह मोहलत दिल्ली-एनसीआर को छोडकर पूरे देश के लिए थी। कोर्ट ने साथ ही कहा कि वाहन डीलर्स ने उसके आदेश को उल्लंघन किया और लॉकडाउन लागू होने के बाद मार्च के आखिरी सप्ताह में और उसके बाद भी बीएस4 वाहनों की बिक्री की गई। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, एसए नजीर आौर इंद्रा बनर्जी की पीठ ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये बुधवार को की गई एक सुनवाई में कहा कि धोखाधडी करने के लिए इस कोर्ट का लाभ मत उठाइए। कोर्ट ने 27 मार्च के आदेश में कहा था कि लॉकडाउन में खराब हुए छह दिनों की भरपाई के लिए वह 10 फीसदी अनबिके बीएस-4 वाहनों को बेचने की अनुमति देता है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने कहा कि इस साल 31 मार्च के बाद बिके बीएस-4 वाहनों का अभी रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। पीठ ने कहा कि लॉकडाउन लगने के बाद भी मार्च के आखिरी सप्ताह में बीएस-4 वाहनों की बिक्री ब? गई। ऑनलाइन माध्यमों से भी ये वाहन बेचे गए। इस मामले में कोर्ट की न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि अदालत ने 27 मार्च के अपने आदेश को वापस ले लिया है।
लॉकडाउन में वाहनों की बिक्री पर कोर्ट ने उठाया सवाल
वाहन डीलर्स संगठन के वकील ने पुराने आदेश के हवाले से कहा कि कोर्ट ने कहा था कि  31 मार्च से पहले बिके बीएस-4 वाहनों को रजिस्ट्र्रेशन होगा। इस पर पीठ ने कहा कि मार्च में लॉकडाउन लागू होने के बाद डीलर्स ने ये वाहन कैसे बेचे। कोर्ट ने कहा कि 17,000 वाहनों के विवरण सरकार के ई-वाहन पोर्टल पर नहीं डाले गए हैं। कोर्ट सरकार से ई-वाहन के आंक?े की जांच करने के लिए कहेगा।
उन्हीं वाहनों का होगा रजिस्ट्र्रेशन, जिनके विवरण ई-वाहन पोर्टल पर 31 मार्च तक अपलोड किए गए
कोर्ट ने कहा कि वह उन्हीं बीएस-4 वाहनों के रजिस्ट्र्रेशन की अनुमति देगा, जिनके विवरण 31 मार्च से पहले ई-वाहन पोर्टल पर डाले गए हैं। कोर्ट ने सरकार से उन वाहनों के आंक?े देने के लिए कहा, जिन्हें ई-वाहन पोर्टल पर 31 मार्च के बाद च?ाया गया है। कोर्ट ने वाहन डीलर संगठन से उन वाहनों के आंक?े भी मांगे, जिनकी बिक्री सरकार को की गई है।
बीएस-4 के बाद देश में सीधे बीएस-6 हुआ लागू
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2018 में कहा था कि एक अप्रैल 2020 से देश में बीएस-4 वाहनों की बिक्री नहीं होगी और न ही उनका रजिस्ट्र्रेशन किया जाएगा। इससे पहले 2016 में केंद्र सरकार ने कहा था कि 2020 तक देश में बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 लागू होगा। 15 जून को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि देश में बीएस-4 वाहनों की बिक्री या रजिस्ट्र्रेशन को अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने हल्की छूट वाले पिछले आदेश का उल्लंघन किए जाने के लिए वाहन डीलर्स एसोसिएशन को फटकार भी लगाई थी।
मार्च में कोर्ट ने बिके हुए वाहनों का 30 अप्रैल तक रजिस्ट्र्रेशन किए जाने का दिया था आदेश
मार्च में सुप्रीम कोर्ट को बीएस-4 वाहनों के अनसोल्ड इनवेंट्र्री के विवरण दिए गए थे। उसके मुताबिक वाहन उद्योग के पास करीब 7 लाख दोपहिया, 15,000 पैसेंजर कार और 12,000 कमर्शियल वाहन बचे हुए थे। कोर्ट को यह भी बताय गया था कि 1.05 लाख दोपहिया, 2,250 पैसेंजर कारें और 2,000 कमर्शियल वाहन बिक चुके थे, लेकिन उनका रजिस्ट्र्रेशन नहीं हुआ था। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन बिके वाहनों का रजिस्ट्र्रेशन नहीं हुआ है, उनका रजिस्ट्रेशन 30 अप्रैल तक कर दिया जाए।

अब त्रशशद्दद्यद्ग द्वड्डश्च आपके सफर को बनाएगा और आसान

रूट के ट्रैफिक सिग्नल को बताकर आपका समय बचाएगा
जयपुर टाइम्स
नईदिल्ली(एजेंसी)। गूगल मैप्स इस समय हमारी जरूरत बन गया है। कई बार रास्ते भटका देते हैं तब डेस्टिनेशन तक पहुंचने के लिए स्मार्ट फोन में मौजूद गूगल मैप ही सहारा बनता है। लोगों में गूगल मैप की जरूरत को समझते हुए गूगल अब अपने इस ऐप में नए फीचर को एड करने वाला है। इस फीचर की मदद से रास्ता और आसान होगा। इससे समय की बचत भी होगी। बताया जा रहा है कि गूगल मैप पर जल्द ही चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल्स भी नजर आएंगे। फिलहाल इस फीचर पर काम किया जा रहा है। जल्द ही यह फीचर रोल आउट किया जाएगा। ट्रैफिक लाइट आइकन गूगल मैप पर दिखाई दिए गए
टेक वेबसाइट ष्ठह्म्शद्बस्र रुद्बद्घद्ग के मुताबिक, ट्रैफिक लाइट आइकॉन यूजर्स के गूगल मैप पर दिखाई देगा। इस सुविधा का उपयोग न केवल नेविगेशन के दौरान बल्कि आसपास सर्च के दौरान ट्रैफिक सिग्नलों को देखने के लिए किया जा सकता है। किस रूट्स पर आने-जाने में कितना समय लगेगा, इस ऐप से यह भी पता चल सकेगा। बता दें कि इससे पहले तक ट्रैफिक और आपके आसपास के होटल-रेस्तरां की जानकारी देने वाले गूगल मैप में अब आपको चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल्स भी नजर आएंगे। फिलहाल इस फीचर पर एक्सपेरीमेंट जारी है और जल्द ही यह फीचर रोल आउट किया जाएगा। इस फीचर के आने के बाद गूगल मैप पहले से बेहतर हो जाएगा। बता दें कि एपल पिछले साल ही इस फीचर को अपने द्बह्रस् 13 में जारी कर चुका है। वहीं, गूगल इसे अब लाएगा। हालांकि, इसके बावजूद यह फीचर यूजर्स के लिए काफी काम का साबित होने वाला है। इस फीचर के कुछ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए गए हैं। इनमें साफ देखा जा सकता है कि जिस रूट का उपयोग किया जा रहा है उसमें आगे आने वाले ट्रैफिक सिग्नल्स मैप में दिखाई दे रहे हैं।