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भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में, पांच प्रतिशत गिरावट का अनुमान: एसएंडपी


नई दिल्ली। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रति गिरावट आने का अनुमान है। इस स्थिति को देखते हुये भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। एसएंडपी की रिपोर्ट में कहा गया है, ''भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। वायरस की रोकथाम में आ रही दिक्कतों, कमजोर नीतिगत प्रक्रिया और अन्य कमजोरियों विशेषरूप से वित्तीय क्षेत्र की दिक्कतों की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में पांच प्रतिशत की गिरावट आएगी। हालांकि, अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधरेगी।ÓÓ एसएंडपी की 'संतुलन खाते में मंदी से एशिया-प्रशांत का नुकसान 3,000 अरब डॉलर के पासÓ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आएगी। हालांकि, 2021 में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। इसका मतबल है कि इन दो साल में क्षेत्र को करीब 3,000 अरब डॉलर के उत्पादन का नुकसान होगा। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री शॉन रोशे ने कहा, ''एशिया-प्रशांत ने कोविड-19 पर अंकुश में कुछ सफलता हासिल की है। क्षेत्र ने प्रभावी वृहद आर्थिक नीतियों के जरिये प्रतिक्रिया दी है।ÓÓ उन्होंने कहा कि इससे झटके से कुछ बचाव हो सकता है। और साथ ही सुधार का रास्ता तैयार हो सकता है। हालांकि, संतुलना खातों पर दबाव की वजह से अर्थव्यवस्था के सुधार पर दबाव रहेगा।
ईमामी का जनवरी-मार्च तिमाही शुद्ध लाभ 59.5 प्रतिशत घटकर 23 करोड़ रुपये
नई दिल्ली।  रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली घरेलू कंपनी ईमामी लिमिटेड का एकीकृत शुद्ध लाभ 2019-20 की जनवरी-मार्च तिमाही में 59.44 प्रतिशत घटकर 22.75 करोड़ रुपये रह गया। कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से बिक्री कारोबार कम रहने के कारण मुनाफा घटा है। इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 56.09 करोड़ रुपये रहा था। शेयर बाजार को दी जानकारी में कंपनी ने बताया समीक्षावधि में उसकी परिचालन से आय 16.81 प्रतिशत घटकर 532.68 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 640.35 करोड़ रुपये था।


 इस दौरान कंपनी का कुल व्यय 434.15 करोड़ रुपये रहा। यह इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में कंपनी के 484.92 करोड़ रुपये के व्यय से 10.46 प्रतिशत कम है। पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी का शुद्ध लाभ 302.30 करोड़ रुपये रहा जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 302.53 करोड़ रुपये था।

कंपनी की इस दौरान परिचालन से आय 2,654.88 करोड़ रुपये रही। यह 2018-19 में कंपनी की 2,694.63 करोड़ रुपये की आय से 1.47 प्रतिशत कम है।

ईमामी के निदेशक मोहन गोयनका ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण सालों में से एक रहा।
 

श्वक्कस्नह्र का प्लान: सरकार फिर घटा सकती है प्रॉविडेंट फंड की 8.5त्न की ब्याज दर, ईपीएफओ जल्द कर सकता है इसकी घोषणा

ईपीएफओ का फाइनेंस डिपार्टमेंट, इन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट और ऑडिट कमेटी जल्द बैठक करने वाले हैं
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन वित्त वर्ष 2020 के लिए घोषित 8.5त्न ब्याज दर को कम कर सकता है। निवेश पर रिटर्न लगातार घट रहा है, जिसके चलते ईपीएफओ द्वारा प्रोविडेंट फंड पर दिए जाने वाले ब्याज को घटाने पर विचार किया जा रहा है।  बता दें कि ईपीएफओ की ब्याज दर पहले 8.65 फीसदी थी, जिसे मार्च में घटाकर 8.50 फीसदी किया गया था। अब फिर से इसे घटाने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक ब्याज दरों पर निर्णय लेने के लिए ईपीएफओ का फाइनेंस डिपार्टमेंट, इन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट और ऑडिट कमेटी जल्द ही एक बैठक करने वाले हैं। इसमें ये तय किया जाएगा कि ईपीएफओ कितना ब्याज दर देने की हालत में है।
मार्च की शुरुआत में नई ब्याज दर 8.5 फीसदी की घोषणा हुई थी, लेकिन अभी तक उसे वित्त मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिल सकी है। श्रम मंत्रालय इसके बारे में तभी नोटिफाई करेगा, जब वित्त मंत्रालय इसे अपनी मंजूरी दे देता है। ट्रेड यूनियन जो ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी मंडल का हिस्सा है उसने कहा कि वे इस कदम का विरोध करेंगे। भारतीय मजदूर संघ के बृजेश उपाध्याय ने कहा, हम पहले से घोषित ब्याज दर पर किसी भी पुनर्विचार के लिए सहमत नहीं हैं, क्योंकि पिछले वित्तीय वर्ष में निवेश पर रिटर्न लेने के बाद इस पर सहमति की घोषणा की गई थी। ईपीएफओ ने 18 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। इसमें से करीब 4500 करोड़ रुपए दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशल सर्विसेज में लगाए गए हैं। इन दोनों को ही भुगतान करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने मार्च के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं को कोविड-19 संकट से उबरने के लिए भविष्य निधि से संबंधित कई राहत उपायों की घोषणा की है। सरकार ने पीएफ कंट्रीब्यूशन को 12त्न से घटाकर 10त्न करने का फैसला किया है। कर्मचारी अब पीएफ खाते में से तीन महीने की बेसिक सैलरी और डीए या पीएफ में जमा रकम के 75 फीसदी में से जो कम हो, उतनी रकम निकाल सकते हैं। इस रकम को दोबारा इसमें जमा करने की जरूरत नहीं है।

खेसारी दाल उत्पादन बढ़ाने के प्रयास तेज


नई दिल्ली। देश में दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने और लोगों की प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बेहद स्वादिष्ट मानी जाने वाली खेसारी दाल की पैदावार को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बिहार से इसकी खेती को बढ़ावा देने का शुरुआती प्रयोग सफल हुआ है और अब इसका विस्तार किए जाने की तैयारी की जा रही है।  एक समय देश में बड़े पैमाने पर खेसारी की खेती की जाती थी लेकिन इसमें लकवा को बढ़ावा देने वाले तत्व ओडीएपी (ऑक्सालिल डायमिनो प्रोपियनिक एसिड) के अधिक मात्रा में पाए जाने के बाद इसकी खेती पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में वैज्ञानिकों ने खेसारी की दो किस्मों रतन और प्रतीक का विकास किया जिसमें ओडीएपी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से भी कम है जिससे इसे स्वास्थ्य की द्दष्टि से बिल्कुल उपयुक्त माना गया है।  केंद्रीय जैव प्रोद्योगिकी विभाग ने खेसारी की खेती को बढ़ावा देने तथा फिर से इसे लोकप्रिय बनाने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय को बायो टेक किसान हब परियोजना दी है जिसके तहत कई अभिनव प्रयोग किए जा रहे हैं। 
भारतीय पक्षों के साथ भागीदारी जारी रखने को लेकर हमारा नजिरया सकारात्मक: हुआवेई
नई दिल्ली। चीन की दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी हुआवेई टेक्नोलॉजीज ने बुधवार को कहा कि वह भारत में पिछले 20 साल से काम कर रही है तथा इस भागीदारी को आगे और भी मजबूत बनाने को लेकर उसका नजिरया पूरी तरह सकारात्मक है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक सूची में दुनिया की छठी सर्वाधिक नवोन्मेषी प्रौद्योगिकी कंपनी हुआवेई ने यह भी कहा कि वह देश में नवप्रवर्तन के लिए भारतीय इकाइयों के साथ गठजोड़ करती रही है।  हुआवेई इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डेविड ली ने कहा, ''हुआवेई 20 साल से भारत की डिजिटल यात्रा में भागीदार है और हमने भारत में और भारत के लिये नवप्रवर्तन करने को लेकर स्थानीय इकाइयों के साथ गठजोड़ किया है। उन्होंने कहा, ''हमारा नजरिया भारत के डिजिटल और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिये इस भागीदारी को आगे और भी मजबूत बनाने को लेकर पूरी तरह सकारात्मक है।

हुआवेई की यह टपिप्पणी ऐसे समय आयी है जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा पर झड़प के बाद चीनी सामान तथा कंपनियों के बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही है। 

343 अंक ऊपर खुला बीएसई, अब तक की ट्रेडिंग के दौरान 4 बार नीचे गिरा; आइडिया और एयरटेल के शेयर में गिरावट

मुंबई। गुरुवार को कारोबार के चौथे दिन बीएसई 343.59 अंक नीचे और निफ्टी 69.75 पॉइंट की गिरावट के साथ खुला। अब तक की ट्रेडिंग के दौरान बीएसई में 4 बार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ये 166.89 अंक तक ऊपर और 369.2 अंक तक नीचे गया है। अभी बीएसई 148.96 अंक ऊपर 35,017.94 पर और निफ्टी 41.60 पॉइंट ऊपर 10,346.90 पर कारोबार कर रहा है। इससे पहले बुधवार को बीएसई 249.31 अंक ऊपर और निफ्टी 58.25 पॉइंट की बढ़त के साथ खुला था। कल दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान उतार-चढ़ाव के बीच बीएसई 635.5 अंक तक और निफ्टी 189.05 पॉइंट तक नीचे चला गया। कारोबार के अंत में बीएसई 561.45 अंक नीचे 34,868.98 पर और निफ्टी 165.70 पॉइंट नीचे 10,305.30 पर बंद हुआ था।
बुधवार को दुनियाभर के बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 2.72 फीसदी की गिरावट के साथ 710.16 अंक नीचे 25,445.90 पर बंद हुआ था। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 2.19 फीसदी गिरावट के साथ 222.20 अंक नीचे 9,909.17 पर बंद हुआ था। दूसरी तरफ, एसएंडपी 2.59 फीसदी गिरावट के साथ 80.96 पॉइंट नीचे 3,050.33 पर बंद हुआ था। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.30 फीसदी बढ़त के साथ 8.93 अंक ऊपर 2,979.55 पर बंद हुआ था। इधर इटली, जर्मनी और फ्रांस के बाजार में भी गिरावट रही।

कोरोना से देश और दुनिया में मौतें
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 4,72,985 हो गई है। इनमें 1,86,335 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 2,71,688 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 14,907 हो चुकी है। ये आंकड़े ष्श1द्बस्र19द्बठ्ठस्रद्बड्ड.शह्म्द्द के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 9,527,123 हो चुकी है। इनमें 484,972 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 124,281 हो चुकी है।

अब ग्राहकों का पैसा रहेगा सुरक्षित, आरबीआई की निगरानी में आए को-ऑपरेटिव बैंक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट और कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स  की बैठक शुरू हुई, जिसमें कई बड़े फैसले लिए गए। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए इन फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारे देश में 1482 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और 58 मल्टी स्टेट बैंक हैं। इन बैंकों के तुरंत प्रभाव से आरबीआई के सीधे सुपरविजन पॉवर में आने का एक अध्यादेश पारित किया गया है। आरबीआई की पावर अब शेड्यूल बैंक के साथ-साथ को-ऑपरेटिव पर भी लागू होगी।  केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खाताधारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया है। नियमों में बदलाव के बाद भी सहकारी बैंकों के प्रबंधन का जिम्मा रजिस्ट्रार के पास ही रहेगा। यह बदलाव बैंकों की वित्तीय मजबूती के लिए किया गया है और इन बैंकों में सीईओ की नियुक्ति के लिए जरूरी अर्ह्ता की स्वीकृति भी आरबीआई से लेनी होगी।  जावड़ेकर ने बताया कि बैठक में बहुत अहम फैसले लिए गए हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ा सुधार किया है। आज तक हमने अंतरिक्ष में अच्छा विकास किया है अब ये एक तरह से सभी के उपयोग के लिए खोले जा रहे हैं। इसके साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने की मंजूरी दे दी है। 

अब ग्राहकों का पैसा रहेगा सुरक्षित, आरबीआई की निगरानी में आए को-ऑपरेटिव बैंक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट और कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स  की बैठक शुरू हुई, जिसमें कई बड़े फैसले लिए गए। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए इन फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारे देश में 1482 अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और 58 मल्टी स्टेट बैंक हैं। इन बैंकों के तुरंत प्रभाव से आरबीआई के सीधे सुपरविजन पॉवर में आने का एक अध्यादेश पारित किया गया है। आरबीआई की पावर अब शेड्यूल बैंक के साथ-साथ को-ऑपरेटिव पर भी लागू होगी।  केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खाताधारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया है। नियमों में बदलाव के बाद भी सहकारी बैंकों के प्रबंधन का जिम्मा रजिस्ट्रार के पास ही रहेगा। यह बदलाव बैंकों की वित्तीय मजबूती के लिए किया गया है और इन बैंकों में सीईओ की नियुक्ति के लिए जरूरी अर्ह्ता की स्वीकृति भी आरबीआई से लेनी होगी।  जावड़ेकर ने बताया कि बैठक में बहुत अहम फैसले लिए गए हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बहुत बड़ा सुधार किया है। आज तक हमने अंतरिक्ष में अच्छा विकास किया है अब ये एक तरह से सभी के उपयोग के लिए खोले जा रहे हैं। इसके साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने की मंजूरी दे दी है। 

चीन को बड़ा झटका देने की तैयारी में मुकेश अंबानी-रतन टाटा समेत कई उद्योगपती, ष्ट्रढ्ढञ्ज ने लिखा पत्र


नई दिल्ली।
 कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने आज रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और भारत के 50 अन्य उद्योगपति को पत्र भेजकर राष्ट्र एवं अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के अभियान में उनसे जुडऩे का आग्रह किया है। कैट द्वारा चलाए जा रहे अभियान 'भारतीय सामान-हमारा अभिमानÓ के नाम से 'चीनी सामानों का बहिष्कारÓ का एक अभियान 10 जून, 2020 से राष्ट्रीय स्तर पर चलाया जा रहा है, जिससे जुडऩे के लिए कैट ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों और बॉलीवुड और क्रिकेट की मशहूर हस्तियों से भी अपील किया है। कैट ने मुकेश अम्बानी के अलावा टाटा समूह के रतन टाटा, इंफोसिस के नारायणमूर्ति, विप्रो समूह के अजीम प्रेमजी, गोदरेज समूह के आदी गोदरेज, नुस्ली वाडिया, अजय पीरामल, विक्रम किर्लोस्कर, कुमार मंगलम बिरला, शिव नाडार, राहुल बजाज, सुनील भारती मित्तल, ज्योत्स्पा सूरी, आनंद महिंद्रा, उदय कोटक, पालनजी मिस्त्री, शशि रुइया, मधुकर पारेख, डॉ. सतीश रेड्डी, पंकज पटेल, नीलेश गुप्ता, हर्ष मरीवाला, पंकज पटेल आदि से सहयोग का आग्रह किया है।  कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने अंबानी और अन्य उद्योगपतियों को भेजे पत्र में कहा कि एक सफल उद्यमी और भारतीय उद्योग के कर्णधारों में से एक होने के कारण कैट ने सभी उद्योगपतियों से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। 
मंगलवार से शुरू हुई एंटी-डंपिंग ड्यूटी पिछले साल अक्टूबर से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए लागू होगी मंगलवार से शुरू हुई एंटी-डंपिंग ड्यूटी पिछले साल अक्टूबर से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए लागू होगी एक जांच से पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स से घरेलू प्रॉडक्ट्स को नुकसान हो रहा है

अक्टूबर 2019 में प्रॉडक्ट्स पर लगाई गई एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई इस साल अप्रैल में खत्म हो गई थी
दैनिक भास्करछ्वह्वठ्ठ 24, 2020, 11:42 ्ररू ढ्ढस्ञ्ज
नई दिल्ली. भारत ने चीन, दक्षिण कोरिया और वियतनाम से इम्पोर्ट होने वाले कुछ स्टील प्रॉडक्ट्स पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। एक जांच से पता चला कि इन प्रॉडक्ट्स के वजह से घरेलू प्रॉडक्ट्स को नुकसान हो रहा है।

राजस्व विभाग ने एक आदेश में कहा कि एल्युमीनियम और जस्ता की मिश्र धातु के साथ लेपित स्टील के फ्लैट रोल प्रॉडक्ट को इन देशों से उनके सामान्य मूल्य से नीचे निर्यात किया गया। जिसकी वजह से घरेलू प्रॉडक्ट्स को नुकसान हुआ। एक देश से दूसरे देश में ड्यूटी दर अलग-अलग होती है। चीन से निर्यात स्टील पर लागू उच्चतम दर 128.9 डॉलर प्रति टन है।

आदेश में कहा गया है कि अक्टूबर 2019 में प्रॉडक्ट्स पर लगाई गई प्रोविजनल एंटी-डंपिंग ड्यूटी इस साल अप्रैल में खत्म हो गई थी। मंगलवार से शुरू हुई एंटी-डंपिंग ड्यूटी पिछले साल अक्टूबर से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए लागू होगी।

चीन से निर्यात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी को उस वक्त लगाया गया जब भारत-चीन की सीमा पर विवाद चल रहा है। वहीं, चीनी सैनिकों के साथ हुए संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हो चुके हैं।

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड ने की जांच
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर महेश जयसिंग ने कहा कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि इन देशों के सामानों के आयात से मुनाफे, नकदी प्रवाह और निवेश पर वापसी के मामले में घरेलू उद्योग के प्रदर्शन में गिरावट आई है। कम लागत में आयात प्रॉडक्ट्स लोकल प्रोडक्ट्स को बाजार से बाहर कर देते हैं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है?
यदि कोई कंपनी अपने बाजार में एक निश्चित कीमत पर बेची गई वस्तु को उससे अधिक मूल्य पर निर्यात करती है, तो कहा जाता है कि प्रॉडक्ट में डंपिंग की गई है। इसी कारण ऐसे प्रोडक्ट्स पर डंपिंग का मुकाबला करने और घरेलू बाजार को बचाने के लिए, आयात करने वाले देशों द्वारा एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है।

एटीएम से कैश निकालने की सीमा 5000 रुपए हो सकती है तय!


नई दिल्ली। आरबीआई की एक समिति ने एटीएम से कैश निकालने की लिमिट 5000 रुपए निर्धारित करने और एटीएम चार्ज में बढ़त करने की सिफारिश की है। आरबीआई द्वारा पिछले साल एटीएम इंटरचेंज फी स्ट्रक्चर की समीक्षा के लिए गठित की गई कमेटी ने अपनी सिफारिशी आरबीआई रिपोर्ट सौंप दी है। लेकिन इस बात की जानकारी नहीं है कि आरबीआई ने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया है कि नहीं। एक रिपोर्ट के मुताबित आरबीआई की एक समिति ने पूरे देश में एटीएम के जरिए होने वाले सभी ट्रांजैक्शनों पर  बढ़ाने की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी ने प्रति ट्रांजैक्शन की लिमिट 5,000 रुपए तय करने और इससे ज्यादा की निकासी करने पर शुल्क लगाने के पक्ष में है। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए इस समिति ने चार्ज में 24 फीसदी तक की बढ़त की सिफारिश की है। इस रिपोर्ट में सिगंल ब्रांच ट्रांजेक्शन और सिंगल एटीएम ट्रांजेक्शन की लागत की भी तुलना की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है। कोरोना वायरस के चलते प्रति कस्टमर एटीएम ट्रांजेक्शनों में ब्रांच ट्रांजेक्शन की तुलना में भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। 
रुपया 37 पैसे की मजबूती के साथ 75.66 रुपये प्रति डालर पर बंद
मुंबई। रुपया मंगलवार को आरंभिक आंकड़ों के हिसाब से डॉलर के मुकाबले 37 पैसे सुधरकर 75.66 पर बंद हुआ। विदेशी पूंजी के लगातार निवेश और घरेलू शेयर बाजारों के ऊंचे रुख से रुपये को समर्थन मिला। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के अस्थिर रहने से भी भारतीय मुद्रा को समर्थन मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 75.86 के मजबूत रुख के साथ खुला। कारोबार के दौरान इसने 75.65 के उच्चतम और 75.89 के निचले स्तर को छुआ। अंत में कारोबार समाप्ति पर यह पिछले बंद के मुकाबले 37 पैसे की मजबूती के साथ 75.66 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 76.03 पर बंद हुआ था। 


घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 397.86 अंक की बढ़त के साथ 35,309.18 अंक पर और निफ्टी 122.60 अंक की तेजी के साथ 10,433.80 अंक पर कारोबार कर रहा है। 
आरंभिक आंकड़ों के अनुसार सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 424.21 करोड़ रुपये की लिवाली की। इस बीच वैश्विक बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल का भाव 0.67 प्रतिशत चढ़कर 43.37 डॉलर प्रति बैरल रहा।

सोने की कीमतें 0.13प्रतिशत गिरकर 47,881 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंची; चांदी 281 रुपए गिरकर 48,219 रुपए प्रति किग्रा हुई

नई दिल्ली। मंगलवार को वायदा बाजार में सोने का भाव 0.13 प्रतिशत गिरकर 47,881 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया, क्योंकि प्रतिभागियों ने कम हाजिर मांग के कारण अपनी पकड़ बना कर ली। दूसरी तरफ, वायदा कारोबार में चांदी भी 281 रुपए गिरकर 48,219 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई।
सोने की कीमत में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में अगस्त में डिलीवरी वाले सोने की कीमत 63 रुपए या 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 47,881 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई, जिसमें 14,059 लॉट के लिए कारोबार हुआ। दूसरी तरफ, अक्टूबर में डिलीवरी वाले सोने की कीमत 63 रुपए या 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 48,028 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई, जिसमें 5,742 लॉट के लिए कारोबार हुआ। न्यूयॉर्क में सोने का भाव 0.17 प्रतिशत गिरकर 1,763.40 डॉलर प्रति औंस हो गया था। मंगलवार को चांदी की कीमत 281 रुपए की गिरावट के साथ 48,219 रुपए प्रति किग्रा हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जुलाई डिलीवरी के लिए चांदी की कीमत 281 रुपए या 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 48,219 रुपए प्रति किग्रा हो गई, जिसमें 10,727 लॉट के लिए कारोबार हुआ। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी की कीमत 275 रुपए या 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 49,112 रुपए प्रति किग्रा हो गई।  जिसमें 3,017 लॉट के लिए कारोबार हुआ।


 इधर, न्यूयॉर्क में चांदी का भाव 0.58 प्रतिशत गिरकर 17.97 डॉलर प्रति औंस हो गया था।

बीएसई 179 अंक और निफ्टी 66 पॉइंट ऊपर बंद हुआ, ग्लेनमार्क फार्मा के शेयर में 28प्रतिशत का उछाल रहा


मुंबई। सोमवार को कारोबार के पहले दिन बीएसई और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। आज बीएसई 160.3 अंक ऊपर और निफ्टी 74.35 पॉइंट की बढ़त के साथ खुला। दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान बीएसई 481.79 अंक तक और निफ्टी 149.25 पॉइंट तक ऊपर जाने में कामयाब रहा। कारोबार के अंत में बीएसई 179.59 अंक या 0.52त्न ऊपर 34,911.32 पर और निफ्टी 66.80 पॉइंट या 0.65त्न ऊपर 10,311.20 पर बंद हुआ। आज ग्लेनमार्क फार्मा के शेयर में 28 फीसदी की बढ़त रही। इससे पहले शुक्रवार को बीएसई 523.68 अंक ऊपर 34,731.73 पर और निफ्टी 152.75 पॉइंट ऊपर 10,244.40 पर बंद हुआ था। बीएसई का मार्केट कैप 139 लाख करोड़ रुपए रहा, 2,917 कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग हुई। इसमें 1,883 कंपनियों के शेयर बढ़त में 866 कंपनियों के शेयर में गिरावट रही, 133 कंपनियों के शेयर 1 साल के उच्च स्तर और 54 कंपनियों के शेयर एक साल के निम्न स्तर पर रहे, 599 कंपनियों के शेयर में अपर सर्किट और 158 कंपनियों के शेयर में लोअर सर्किट लगा शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। 
महाराष्ट्र सरकार ने चीन की तीन परियोजनाओं पर रोक लगाई, पुणे के तलेगांव में 5,000 करोड़ रुपए के थे ये प्रोजेक्ट
मुंबई। महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार ने हाल ही में मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0 इन्वेस्टर्स मीट में चीन की 3 कंपनियों की परियोजनाओं को रद्द कर दिया है। इन प्रोजेक्ट के लिए हालांकि साइन हो चुका था। इन तीनों प्रोजेक्ट में कुल 5,000 करोड़ रुपए का निवेश होना था। राज्य के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार की सलाह से लिया गया है। इन पर पहले चीन और भारत के बीच तनाव के पहले हस्ताक्षर किए गए थे। सुभाष देसाई ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने चीनी कंपनियों के साथ किसी और समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने की सलाह दी है। पिछले सोमवार को आयोजित ऑनलाइन सम्मेलन में चीन के राजदूत सुन वेडोंग ने हिस्सा लिया था। इन तीनों समझौतों में पुणे के पास तलेगांव में एक ऑटोमोबाइल प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए ग्रेट वॉल मोटर्स (जीडब्ल्यूएम) के साथ 3,770 करोड़ रुपए का समझौता शामिल था।

पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी ने 1,000 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की थी

राज्य सरकार ने कहा कि इसके अलावा, फोटन (चीन) के साथ एक जॉइंट वेंचर में पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी ने 1000 करोड़ रुपए की घोषणा की थी जो 1,500 नौकरियां पैदा करेगी। हेंगली इंजीनियरिंग जैसी चीनी कंपनी ने तलेगांव में अपने दूसरे चरण के विस्तार के हिस्से के रूप में 250 करोड़ रुपए के निवेश की बात कही है जो 150 नौकरियां पैदा करेगी।

अर्थव्यवस्था को किक स्टार्ट करने का प्रयास 

मैग्नेटिक महाराष्ट्र 2.0, कोविड के बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था को किकस्टार्ट करने का एक प्रयास था। इन सभी 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए जिसमें कई भारतीय कंपनियों के अलावा सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, अमेरिका की कंपनियां शामिल थीं। देसाई ने कहा कि राज्य सरकार अन्य नौ एमओयू पर सक्रियता से कार्रवाई कर रही है।

इलेक्ट्रिक और एसयूवी मॉडलों के उत्पादन की थी योजना

इस साल जनवरी में ग्रेट वॉल मोटर्स ने अमेरिका स्थित मल्टीनेशनल जनरल मोटर्स से तलेगांव प्लांट हासिल करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जीडब्ल्यूएम ने यूनिट में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों और एसयूवी मॉडलों का उत्पादन करने की योजना बनाई। जीडब्ल्यूएम की भारतीय सहायक कंपनी के प्रबंध निदेशक पार्कर शी ने एक बयान में कहा कि यह तलगांव में एक अत्यधिक ऑटोमैटिक प्रोजेक्ट होगा, जिसमें कई उत्पादन प्रक्रियाओं में एडवांस्ड रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी के साथ इंटीग्रेटेड किया गया था।

भारत में एक अरब डॉलर के निवेश की योजना

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हम चरणबद्ध तरीके से भारत में 1 अरब डॉलर (7600 करोड़ रुपए) के निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह निवेश वर्ल्ड क्लास इंटेलीजेंट और प्रीमियम उत्पादों के निर्माण, आरएंडडी सप्लाई चेन का निर्माण और चरणबद्ध तरीके से 3,000 लोगों को रोजगार प्रदान करने की दिशा में काम कर रहा है।

सोने की कीमतों में लगी आग, रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संकट के बीच सोने ने कीमतों के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। घरेलू बाजार में 24 कैरेट गोल्ड ने प्रति 10 ग्राम 48,300 रुपए का नया रिकॉर्ड बनाया है। निवेशक कोरोना संकट के इस दौर में गोल्ड को ही निवेश का सबसे सुरक्षित साधन मान रहे हैं। सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिली है। चांदी में प्रति किलोग्राम पर 500 रुपए से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया है। इस तेजी के साथ चांदी के दाम 49,000 प्रति किलोग्राम के पार चले गए हैं।
इंडिया बुलियन ऐंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के मुताबिक 24 कैरेट गोल्ड ने प्रति 10 ग्राम 48,300 रुपए का नया रिकॉर्ड बनाया है। 23 कैरेट सोने का भाव भी 645 रुपए बढ़कर 48107 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया है। 22 कैरेट सोने का मूल्य अब 593 रुपए तेज होकर 44243 रुपए और 18 कैरेट का 36,225 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोना 0.5 फीसदी उछलकर 1751.63 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इसके पहले सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई 18 मई को हासिल की थी। इसी तरह अमेरिकी वायदा बाजार में सोना 1,764.50 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। भारत-चीन तनाव और हांगकांग के माहौल का भी अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों पर असर पड़ा है।
क्यों बढ़ रही है कीमत
असल में जब-जब दुनिया में आर्थिक संकट गहराया है, सोने ने अपनी चमक बिखेरी है, दरअसल, कीमत में बढ़ोतरी के साथ-साथ सोने में निवेश का दायरा बढ़ता जा रहा है। कोरोना संकट की वजह से सोने में निवेश को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-चीन सीमा विवाद: बार-बार विरोध के बाद भी कम नहीं हो रही चीन पर निर्भरता, डोकलाम विवाद से अब तक चीन से फार्मा आयात 28फिसदी बढ़ा

चीन से हर साल 15,250 करोड़ के फार्मा इंग्रीडेंट्स, केमिकल और अन्य मेटेरियल का आयात
नई दिल्ली। लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद एक बार फिर देश में चीन में बने उत्पादों का विरोध करने की बात कही जा रही है। सीमा पर हर बार विवाद के बाद चीन पर निर्भरता कम करने के लिए योजनाएं बनाई जाती हैं। लेकिन यह योजनाएं सिर्फ कागजों में ही रह जाती हैं। 2017 में डोकलाम विवाद के बाद भी फार्मा सेक्टर ने चीन पर निर्भरता कम करने आयात में कमी लाने की बात कही थी। लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ, बल्कि तब से अब तक चीन से फार्मा आयात में बढ़ोतरी हो गई है। 
2019-20 में 1150 करोड़ के फार्मा उत्पादों का आयात
कॉमर्स मिनिस्ट्री के डाटा के मुताबिक, 2015-16 में चीन से 947 करोड़ के फार्मा उत्पादों का आयात हुआ था, जबकि 2019-20 में यह आयात 1150 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इस प्रकार इसमें 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा इस अवधि में मिश्रित फार्मा उत्पादों का आयात 58 फीसदी बढ़कर 276 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। मिनिस्ट्री के डाटा के मुताबिक, भारत एक साल में चीन से 15,250 करोड़ रुपए के फार्मा इंग्रीडेंट्स, केमिकल और अन्य मेटेरियल का आयात करता है।  दवा निर्माताओं का कहना है कि चीन के उत्पाद सस्ते होते हैं। इसके अलावा घरेलू दवा इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने के लिए देश में पर्याप्त नीतियां नहीं हैं। इस कारण दवा कंपनियों की चीने से आयात पर निर्भरता बरकरार है। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत के 70 फीसदी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडेंट (एपीआई) चीन से आयात करता है। इसमें एंटी इनफेक्टिव और एंटी कैंसर मेडीकेशन शामिल हैं। इंडस्ट्री के मुताबिक, पेंसिलिन और एजिथ्रोमाइसिन जैसे उत्पादों के लिए भारत 80-90 फीसदी तक आयात पर निर्भर है।
एक देश पर निर्भरता खत्म करनी होगी: सुदर्शन जैन
इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस के जनरल सेक्रेटरी सुदर्शन जैन ने ईटी से बातचीत में कहा कि कोविड-19 महामारी हमारे लिए एक वेक अप कॉल की तरह है। हमें दवा आपूर्ति के लिए किसी भी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जैन का कहना है कि भारतीय कंपनियों को नई बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना करने में दो-तीन वर्ष का समय लगेगा। इसके अलावा चीनी कंपनियों से मुकाबले के लिए भारतीय कंपनियों को सस्ती जमीन, बिजली, प्रदूषण संबंधी जल्दी क्लीयरेंस और वित्तीय मदद की आवश्यकता होगी। 
मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल का मानना है कि दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा दवा निर्यातक देश होने के बावजूद भारत अपनी दो-तिहाई एपीआई जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। भारत मुख्य तौर पर 58 ड्रग इंग्रीडेंट के लिए आयात पर निर्भर है। इसमें भी चीन की ज्यादा भागीदारी है।


 इस निर्भरता को कम करने के लिए सरकार नई बल्क ड्रग पॉलिसी लेकर आई है।

 इस पॉलिसी के जुलाई में पास होने की उम्मीद है।