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भारत में कारोबारी टैक्स घटने से अमेरिकी कॉर्पोरेट सेक्टर भी खुश, कहा- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। भारत में कारोबारी टैक्स घटाने के फैसले की अमेरिका के कॉर्पोरेट सेक्टर ने भी तारीफ की। उनका कहना है कि इससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस बढ़ाने का अच्छा विकल्प मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉर्पोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत करने और शेयर बाजार से जुड़े फैसलों का ऐलान किया था।
यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम  के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि हम लंबे समय से कॉर्पोरेट टैक्स घटाने की मांग कर रहे थे। यह मांग पूरी करने के सरकार के फैसले से भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेंगी। अघी के मुताबिक मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) घटाने, शेयर बायबैक पर टैक्स नहीं लगाने और कैपिटल गेन पर बढ़े हुए सरचार्ज लागू नहीं करने के फैसलों से अमेरिका समेत दुनियाभर के निवेशकों का भारत में भरोसा बढ़ेगा। अघी का कहना है कि भारत सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की पहल में शामिल होने के लिए यूएसआईएसपीएफ आगे रहता है।
यूएसआईएसपीएफ ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली मुलाकात के दौरान अमेरिका-भारत के बीच व्यापार विवाद सुलझा लिए जाएंगे। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।
अघी ने कहा कि भारत को लेकर अमेरिकी कंपनियों के सेंटीमेंट अब ज्यादा परिपक्व और सुनियोजित हैं। अमेरिकी कंपनियों की भारतीय निवेश प्रक्रिया में कमी नहीं आ रही। बल्कि, वे मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन के अलावा बैकअप स्ट्रैटजी तलाश रहे हैं। भारत इसका विकल्प बन गया है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी कंपनियों का भारत में मार्केट शेयर बढ़ रहा है। गूगल, फेसबुक, अमेजन, वॉट्सऐप, उबर चीन से कारोबार समेट चुकी हैं। अमेरिका भारत में बड़ा विदेशी निवेशक (एफडीआई) भी है। भारत की ओर से सुधार के सकारात्मक कदमों के चलते यह उत्साह बना रहेगा। 

सेंसेक्स में 1300 अंक का उछाल, निफ्टी 390 प्वाइंट चढ़कर 11650 के ऊपर पहुंचा

विश्लेषकों ने कहा- कॉर्पोरेट टैक्स घटने, शेयर बिक्री पर टैक्स में राहत के ऐलानों का असर जारी
आईटीसी के शेयर में 8.5 प्रतिशत उछाल, ब्रिटानिया में 8 प्रतिशत और एशियन पेंट्स में 7.5 प्रतिशत बढ़त
जयपुर टाइम्स
मुंबई (एजेंसी)। शेयर बाजार की शुरूआत आज भी जोरदार बढ़त के साथ हुई। सेंसेक्स 1331 अंक की तेजी के साथ 39,346.01 पर पहुंच गया। निफ्टी ने 392 प्वाइंट की बढ़त के साथ 11,666.35 का स्तर छुआ। हालांकि, ऊपरी स्तरों से दोनों इंडेक्स नीचे आ गए। लेकिन, सेंसेक्स में 700 और निफ्टी में 250 अंक की बढ़त बनी हुई है। विश्लेषकों के मुताबिक सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स घटाने और शेयर बाजार में टैक्स संबंधी राहतों के ऐलानों का असर जारी है। इन ऐलानों के बाद शुक्रवार को भी बाजार में रिकॉर्ड उछाल आया था। सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 21 और निफ्टी के 50 में से 36 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। आईटीसी के शेयर में 8.5 प्रतिशत तेजी आई। ब्रिटानिया में 8 प्रतिशत और एशियन पेंट्स में 7.5 प्रतिशत उछाल आया। लार्सन एंड टूब्रो का शेयर 7 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा।  दूसरी ओर आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इन्फोसिस 3 प्रतिशत लुढ़क गया। टीसीएस में 2.5 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। टेक महिंद्रा का शेयर 2.2 प्रतिशत और एचसीएल टेक 1.9 प्रतिशत नीचे आ गया। 

सरकार ने ओपन सेल एलईडी पैनल पर 5 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी खत्म की

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। वित्त मंत्रालय ने ओपन सेल एलईडी टीवी पैनल पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी।  इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ। पहले 5 प्रतिशत ड्यूटी लगती थी। इसे खत्म करने के फैसले से देश में बनने वाले एलईडी टीवी 3 प्रतिशत तक सस्ते होंगे। एलईडी टीवी मैन्युफैक्चरिंग में पैनल एक अहम हिस्सा है। प्रोडक्शन की कुल लागत में इसकी 65 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक हिस्सेदारी होती है। टीवी में इस्तेमाल से पहले इन पैनल में और असेंबलिंग करनी पड़ती है। जबकि, रेडी टू यूज पैनल में इसकी जरूरत नहीं पड़ती लेकिन उन पर 15 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश का टेलिविजन मार्केट 22,000 करोड़ रुपए का है। जुलाई और अगस्त में इसमें 2-3 प्रतिशत गिरावट आई। विश्लेषकों के मुताबिक कीमतें ज्यादा होने, सेंटीमेंट कमजोर होने और स्मार्टफोन पर ऑडियो-विजुअल कंटेंट का इस्तेमाल बढऩे जैसी वजहों से लोग टीवी खरीदना कम पसंद कर रहे हैं। इंडस्ट्री के विश्लेषकों का कहना है कि ओपन सेल पैनल पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म होने से देश में एलईडी टीवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से सैमसंग ने पिछले साल अक्टूबर में भारत में टीवी प्रोडक्शन बंद कर दिया था। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ाने के लिए बड़ी स्क्रीन वाले एलईडी पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की मांग भी उठ रही है। इंडस्ट्री को 20 सितंबर को गोवा में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक का इंतजार है। 32 इंच तक के टीवी पर फिलहाल 18 प्रतिशत लेकिन, इससे ज्यादा आकार वाले पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। 

मेट्रो शहरों में पेट्रोल-डीजल 24 से 27 पैसे तक महंगे

मुंबई में 2 दिन में पेट्रोल 39 पैसे, डीजल 42 पैसे महंगा हुआ
तेल कंपनियां कू्रड के रेट के आधार पर कीमतें तय करती हैं
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। मेट्रो शहरों में पेट्रोल के रेट 25 पैसे से 27 पैसे तक बढ़े। मुंबई में कीमत 25 पैसे बढ़कर 78.10 रुपए प्रति लीटर हो गई। 
डीजल के रेट में 24 से 26 पैसे तक इजाफा हुआ। मुंबई में डीजल का रेट 26 पैसे बढ़कर 69.04 रुपए प्रति लीटर हो गया।              पेट्रोल-डीजल के रेट में लगातार दूसरे दिन इजाफा हुआ है। पेट्रोल 13-14 पैसे और डीजल 15-16 पैसे तक महंगा हुआ था। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट के आधार पर हर दिन पेट्रोल-डीजल के रेट तय करती हैं। नई कीमतें सुबह 6 बजे से लागू होती हैं। 

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- एपल की भारत में बड़ी कारोबारी योजनाएं

सरकार एपल से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, यहां से एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए भी कह चुकी
एपल भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए फिलहाल आईफोन 6एस, 
7 का प्रोडक्शन कर रही
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने एक कार्यक्रम में कहा कि सभी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भारतीय बाजार के प्रति आशावान हैं और आईफोन कंपनी एपल की देश में बड़ी कारोबारी योजनाएं हैं। प्रसाद ने बताया कि उन्होंने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। प्रसाद ने एपल को इस बात के लिए प्रेरित किया था कि वह भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाए और देश को एक्सपोर्ट हब की तरह इस्तेमाल करे। क्योंकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और फोन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए लिए अगले 2-3 महीने में कदम उठाए जाएंगे। एपल फिलहाल भारत में ताइवान की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर कंपनी विस्ट्रॉन के जरिए आईफोन 6एस और 7 का प्रोडक्शन कर रही है। प्रसाद के मुताबिक मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में कंपोनेंट निर्माताओं समेत मोबाइल फैक्ट्रियों की संख्या 2 से बढ़कर 268 पहुंच गई। अब उनका फोकस स्ट्रैटजिक, डिफेंस और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स पर है। उन्होंने इंडस्ट्री से अपील करते हुए कहा कि मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार में भी शामिल हों। एमआरआई, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अन्य जांच मशीनों के बिजनेस में बड़े अवसर हैं। 

जनरल मोटर्स के 49 हजार संविदा कर्मचारी हड़ताल पर, 33 प्लांट, 22 वेयरहाउस में काम बंद

जयपुर टाइम्स
डेट्रॉइट (एजेंसी)। यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स  के 49 हजार सदस्यों ने जनरल मोटर्स की फैक्ट्रियों में हड़ताल कर दी। कर्मचारियों ने अमेरिका के 9 राज्यों में स्थित 33 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और 22 वेयरहाउस में काम बंद कर दिया। कॉन्ट्रैक्ट को लेकर वार्ता सफल नहीं रहने की वजह से कर्मचारियों ने यह फैसला लिया। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि कई महीनों की वार्ता में जीएम का रुख काफी धीमा रहा। जबकि, कंपनी का कहना है कि उसने ज्यादा मेहनताने समेत कई प्रस्ताव रखे। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि हड़ताल कब तक चलेगी। 2007 के बाद यूएडब्ल्यू ने पहली बार हड़ताल की है। उस वक्त 2 दिन की हड़ताल से जनरल मोटर्स को 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ था। यूएडब्ल्यू के वाइस प्रेसिडेंट टेरी डिट्स का कहना है कि हड़ताल का फैसला आखिरी विकल्प के तौर पर लिया गया। क्योंकि, चार साल के नए कॉन्ट्रैक्ट को लेकर दोनों पक्षों में सहमति के आसार काफी कम हैं। स्वास्थ्य और भत्तों को लेकर आपत्तियां हैं। जीएम का कहना है कि उसने वेतन बढ़ाने समेत अमेरिका की फैक्ट्रियों में 7 अरब डॉलर के निवेश के जरिए 5,400 नई नौकरियां देने का प्रस्ताव रखा। इनमें से कुछ जगह मौजूदा कर्मचारियों से ही भरी जाएंगी। ज्यादा प्रॉफिट शेयरिंग, बेहतर स्वास्थ्य लाभ और हर कर्मचारी को 8 हजार डॉलर के भुगतान का प्रस्ताव दिया गया। 

एक करोड़ से ज्यादा कैश पेमेंट पर अब नहीं लगेगा 2 फीसदी टीडीएस

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने कृषि क्षेत्र को एक बड़ी राहत दी है। अब कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) के जरिए एक करोड़ रुपए से अधिक राशि के नकद भुगतान पर स्रोत पर टैक्स कटौती (टीडीएस) नहीं की जाएगी। किसानों को उपज का भुगतान मिलने में दिक्कतें सामने आने के बाद सरकार इस नियम में राहत देने का फैसला किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट में यह जानकारी दी। सरकार ने नकद लेन-देन को हतोत्साहित करने और कैशलेस इकोनॉमी की तरफ बढऩे के लिए आम बजट में एक करोड़ रुपए से ज्यादा नकदी निकालने पर 2 प्रतिशत टीडीएस लगाने का प्रस्ताव किया था। यह नियम एक सितंबर से अमल में आया था। एपीएमसी के सदस्य व्यापारी किसानों से उपज खरीदते हैं और उन्हें भुगतान करते हैं। लेकिन देशभर की मंडियों में इसका विरोध होने लगा। मंडी व्यापारियों का कहना था कि किसानों की आय पर वैसे भी आयकर नहीं है। ऐसे में व्यापारियों पर बेवजह टैक्स का भार आ सकता है। 
कई मंडियों में व्यापारियों को इस नियम के लागू होने की तारीख को लेकर भी भ्रम था। इस मामले में और भी कई समस्याएं थीं। कई मंडियों में व्यापारियों ने एक सितंबर से किसानों से उपज खरीद करना ही बंद करने का ऐलान कर दिया था। जीरा की प्रमुख ऊंझा मंडी में व्यापारियों ने किसानों से माल खरीदना बंद करने का फैसला किया था और सरकार से स्पष्टीकरण देने की मांग की थी। कुछ मंडियों में एपीएमसी किसानों को डिजिटल पेमेंट करने पर भी विचार करने लगे थे। सितंबर मध्य से कृषि उपज मंडियों में खरीफ फसलों की आवक शुरू हो जाती है। अभी भी मंडियों में बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज का भुगतान नकद लेना ही पसंद करते हैं। मंडियों में चिंता व्यक्त की जा रही थी कि जैसे ही खरीफ फसलों की आवक तेज होगी। किसानों को भुगतान लेने में दिक्कतें आने लगेंगी। इसी को ध्यान रखते हुए सरकार ने मंडियों में टीडीएस का नियम वापस लेने का फैसला किया है। 

आरबीआई गवर्नर ने कहा- जीडीपी की 5 प्रतिशत ग्रोथ ने चौंकाया, सुधार का अनुमान लगाना अभी मुश्किल

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अप्रैल-जून में 5 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ चौंकाने वाली थी। हमारा अनुमान 5.8 प्रतिशत का था। मुझे लगता है कि 5.5 प्रतिशत से कम ग्रोथ के बारे में किसी ने नहीं सोचा होगा। दास से पूछा गया कि अर्थव्यवस्था में सुधार कब तक दिखेगा? उन्होंने कहा- इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। कई बातें हैं जो अभी भी असर डाल रही हैं। जैसे सऊदी अरब का तेल संकट अप्रत्याशित था। ट्रेड वॉर को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। ऐसे में जुलाई-सितंबर तिमाही में हालातों का विश्लेषण करने के बाद ही कुछ कहा जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि सरकार ने जो कदम उठाए हैं उनसे अर्थवयवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में मंदी को देखते हुए आरबीआई ने भी ब्याज दरों में कटौती की थी। मुझे लगता है कि उचित कदम उठाए गए हैं, हालात सुधरने चाहिए। यह सकारात्मक है कि सरकार तेजी से प्रतिक्रिया दे रही है। सरकार से ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि अब कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि प्रक्रिया जारी रहेगी। दास ने कहा कि सरकार ने रिएल एस्टेट, एक्सपोर्ट, एमएसएमई, ऑटो सेक्टर के लिए ऐलान करने समेत बैंकों के विलय की भी घोषणा की। मुझे लगता है कि एग्रीकल्चर मार्केटिंग बड़ा एक बड़ा क्षेत्र होगा।
 उम्मीद करते हैं कि इसमें सुधार लागू करने के लिए भी सरकार कदम उठाएगी। 

देश का औद्योगिक उत्पादन जुलाई में 4.3 फीसदी बढ़ा

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर इस साल जुलाई में बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई। वहीं, इस साल जून महीने में देश का औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 1.17 फीसदी दर्ज की गई थी। औद्योगिक उत्पादन दर के आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए। हालांकि सालाना आधार पर जुलाई 2019 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर कम है। पिछले साल जुलाई में देश की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 6.5 फीसदी थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2019 के दौरान संचयी औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.3 फीसदी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन में जुलाई के दौरान 4.2 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह वृद्धि दर सात फीसदी थी। सालाना आधार पर खनन क्षेत्र का उत्पादन 3.4 फीसदी से बढ़कर इस साल जुलाई में 4.9 फीसदी हो गया। बिजली उत्पादन में 4.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जबकि जुलाई 2018 में बिजली उत्पादन वृद्धि दर 6.6 फीसदी थी। प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादन में 3.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। 
वहीं, मध्यवर्ती क्षेत्र का उत्पादन 13.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स क्षेत्र के उत्पादों में 8.3 फीसदी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स उत्पादों में 2.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

इन्फ्रास्ट्रक्चर व कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के उत्पादों में 2.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 7.1 फीसदी घट गया।

विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 13 उद्योगों में इस साल जुलाई के दौरान पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। (आईएएनएस)

ऊंचे भाव के कारण 37 फीसदी घटा गैर-बासमती चावल का निर्यात

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में चावल का भाव ऊंचा होने के कारण इसकी निर्यात मांग सुस्त पड़ गई है। यही कारण है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक गैर-बासमती चावल का निर्यात तकरीबन 10 लाख टन यानी 37 फीसदी घट गया है। बासमती चावल का निर्यात भी पिछले साल के मुकाबले करीब डेढ़ फीसदी घटा है, लेकिन जानकार बताते हैं कि बासमती के मामले में भाव कोई वजह नहीं है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के तहत आने वाले बासमती निर्यात विकास संस्थान के निदेशक अरविंद कुमार गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, देश में गैर-बासमती चावल का भाव ऊंचा है, जिसके कारण इसकी निर्यात मांग कम हो गई है। यही कारण है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में चावल का निर्यात पिछले साल के मुकाबले काफी कम हो गया है।
एपीडा की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2019-20 में अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत ने 17,06891 टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात 26,94,827 टन था। इस प्रकार, गैर-बासमती चावल का निर्यात पिछले साल के मुकाबले अबतक 9.88 लाख टन यानी 36.66 फीसदी घट गया है। देश से निर्यात किए गए चावल का मूल्य अगर रुपये में देखें तो पिछले साल से 36.30 फीसदी घटकर 48.16 करोड़ रुपये रह गया है। वहीं, डॉलर के मूल्य में चालू वित्त वर्ष के चार महीने में 69.5 करोड़ डॉलर के गैर बासमती चावल का निर्यात हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 38.30 फीसदी कम है। वहीं, बासमती चावल का निर्यात इस साल अप्रैल-जुलाई के दौरान पिछले साल के मुकाबले 1.42 लाख टन घट कर तकरीब 14.35 लाख टन रह गया। हालांकि डॉलर के मूल्य में बासमती चावल का निर्यात 9.26 फीसदी घटा है।
 भारत ने उक्त अवधि के दौरान 156.3 करोड़ डॉलर का बासमती चावल निर्यात किया।


ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन विजय सेतिया ने भी बताया कि भारतीय गैर-बासमती चावल महंगा होने के कारण विदेशी बाजार में इसकी मांग नरम है। उन्होंने कहा, "भारत में धान सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर बिकता है, जिसके कारण विदेशी बाजार में चावल का भाव ऊंचा हो जाता है, क्योंकि अन्य प्रतिस्पर्धी देशों में ऐसा नहीं है।"

सेतिया ने कहा, "इसके अलावा, आयातक देशों में स्थानीय उत्पादन होने के कारण भी वहां से मांग घट गई है, मसलन बांग्लादेश में घरेलू उत्पादन होने से मांग कम हुई है।"

भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसके बाद दूसरे स्थान पर थाईलैंड और तीसरे स्थान पर वियतनाम है। चावल का निर्यात पाकिस्तान भी करता है।

अरविंद गुप्ता ने बताया, "बंग्लादेश व अन्य पड़ोसी देशों को भारत से चावल मंगाने में नौवहन किराया कम लगता है, इसलिए भाव ऊंचा होने पर भी भारत से चावल खरीदना उनके लिए ज्यादा महंगा नहीं होता है। लेकिन दूरवर्ती अफ्रीकी देशों के मामले में ऐसा नहीं है। उनको जहां से सस्ता चावल मिलता है, वे वहां से खरीदते हैं।"

गुप्ता ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैर बासमती चावल का भाव और घरेलू बाजार के भाव में तकरीबन 30 डॉलर प्रति टन का अंतर है। मतलब घरेलू भाव 30 डालर प्रति टन ज्यादा है। 

पैनल का सुझाव- एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए जीएसटी जैसी संस्था बने, सरकार कर्जमाफी से बचे

जयपुर टाइम्स
मुंबई (एजेंसी)। आरबीआई के पैनल ने एग्रीकल्चर सेक्टर में सुधारों को लागू करने के लिए जीएसटी काउंसिल जैसी संस्था बनाने का सुझाव दिया। सब्सिडी सीधे खाते में ट्रांसफर करने और कर्जमाफी से बचने की सिफारिश भी की गई। पैनल ने ये सुझाव दिए।  पैनल का कहना है कि इन्टरेस्ट सबवेंशन या कृषि कर्ज पर सब्सिडी को एलपीजी और फर्टिलाइजर की तरह डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में बदलना चाहिए। बैंकों को कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए क्रेडिट बढ़ाना चाहिए।  आरबीआई के पैनल ने ये भी कहा है कि केंद्र सरकार को राज्यों पर इस बात के लिए जोर डालना चाहिए कि वे तय समय में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया और जमीनों के रिकॉर्ड को अपडेट करें। राज्य सरकारों को बैंकों को डिजिटाइज्ड लैंड रिकॉर्ड का एक्सेस देना चाहिए। इसके बाद बैंकों को कृषि कर्ज लेने वालों से जमीन के दस्तावेज जमा करने पर जोर नहीं डालना चाहिए। 

एफपीआई ने सितंबर पहले सप्ताह में पूंजी बाजारों से निकाले 1,263 करोड़ रुपये, सरचार्ज वापस लेने की हो चुकी है घोषणा

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर के पहले सप्ताह में भारतीय पूंजी बाजारों से 1,263 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से पिछले दिनों एफपीआई से बढ़ा हुआ अधिभार वापस लेने की घोषणा के बाद भी निकासी का सिलसिला जारी है। डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के अनुसार तीन से छह सितंबर के दौरान एफपीआई ने शेयरों से शुद्ध रूप से 4,263.79 करोड़ रुपये निकाले। इस दौरान उन्होंने लोन या बांड बाजार में शुद्ध रूप से 3,000.86 करोड़ रुपये डाले। 
इस तरह भारतीय पूंजी बाजारों से उनकी शुद्ध निकासी 1,262.93 करोड़ रुपये रही। गणेश चतुर्थी पर दो सितंबर को बाजार बंद रहे। इससे पिछले दो माह के दौरान भी एफपीआई शुद्ध बिकवाल बने रहे। अगस्त में उन्होंने भारतीय पूंजी बाजारों से 5,920.02 करोड़ रुपये निकाले थे। जुलाई में उन्होंने पूंजी बाजारों से 2,985.88 करोड़ रुपये की निकासी की थी।