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सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानिए 10 ग्राम गोल्ड हुआ कितना सस्ता?

नई दिल्लीः वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख तथा स्थानीय आभूषण विनिर्माताओं की मांग घटने से दिल्ली सर्राफा बाजार में आज सोना 220 रुपए टूटकर 31,450 रुपए प्रति दस ग्राम पर आ गया। औद्योगिक इकाइयों तथा सिक्का विनिर्माताओं का उठाव घटने से चांदी भी 400 रुपए के नुकसान से 39,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई।

कारोबारियों ने कहा कि वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख के अलावा स्थानीय आभूषण विनिर्माताओं तथा फुटकर विक्रेताओं की मांग घटने से सोने में गिरावट आई। वैश्विक स्तर पर न्यूयॉर्क में कल सोना 0.70 प्रतिशत के नुकसान से 1,324.90 डॉलर प्रति औंस रह गया। चांदी भी 0.53 प्रतिशत टूटकर16.47 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 99.9 और 99.5 प्रतिशत शुद्धता 220-220 रुपए टूटकर क्रमश: 31,450 रुपए और 31,300 रुपए प्रति दस ग्राम पर आ गया। कल के कारोबार में सोना 220 रुपए चढ़ा था। आठ ग्राम की गिन्नी का भाव हालांकि सीमित सौदों में 24,800 रुपए पर कायम रहा। चांदी हाजिर 400 रुपए टूटकर 39,500 रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई। साप्ताहिक डिलिवरी के भाव 470 रुपए के नुकसान से 38,770  रुपए प्रति किलोग्राम रह गए। चांदी सिक्का लिवाल 74,000 रुपए और बिकवाल 75,000 रुपए प्रति सैकड़ा पर कायम रहा।  

सोने-चांदी की कीमतों में हुई बढ़ौतरी

नई दिल्लीः वैश्विक स्तर पर दोनों कीमती धातुओं में रही गिरावट के बीच खुदरा जेवराती मांग निकलने से आज दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 220 रुपए चमककर 31,670 रुपए प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। औद्योगिक मांग आने से चांदी भी 500 रुपए की तेजी में 39,900 रुपए प्रति किलोग्राम बिकी। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में लंदन का सोना हाजिर शुरूआती तेजी के बाद 6.30 डॉलर की गिरावट में 1,332.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अप्रैल का अमेरिकी सोना वायदा भी 1.5 डॉलर की गिरावट में 1,333.70 डॉलर प्रति औंस बोला गया। 

विदेशी बाजारों में चांदी हाजिर भी 1.5 डॉलर की गिरावट में 16.66 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। कारोबारियों ने बताया कि दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर में आई गिरावट से पीली धातु को बल मिला है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक सलाहकार गैरी कॉन के इस्तीफे के बाद डॉलर दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर की गिरावट और राजनीतिक अस्थिरता के कारण निवेशकों का रुझान सोने में बढ़ा है।

बाजार में गिरावट, सैंसेक्स 284 अंक लुढ़का और निफ्टी 10150 के करीब बंद

नई दिल्लीः ग्लोबल बाजारों से मिले कमजोर संकेतों से आज भारतीय शेयर बाजार  गिरावट के साथ बंद हुए हैं। कारोबार के अंत में आज सैंसेक्स 284 अंक यानि 0.85 फीसदी गिरकर 33,033 पर और निफ्टी 95 अंक यानि 0.93 फीसदी गिरकर 10,154  पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान आज सैंसेक्स 32991 अंक तक लुढ़क गया। बैंकिंग शेयरों में दबाव का असर आज बाजार पर देखने को मिला।

मिड-स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.42 फीसदी गिरकर बंद हुआ है। निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 2.21 फीसदी लुढ़क कर बंद हुआ है।

बैंकिंग निफ्टी में गिरावट
बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल, फार्मा, कैपिटल गुड्स, पावर और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। बैंक निफ्टी 1.36 फीसदी गिरकर 24116 के स्तर पर बंद हुआ है। आज निफ्टी ऑटो में 0.34 फीसदी, निफ्टी फार्मा में 1.56 फीसदी गिरावट आई। मेटल शेयरों में आज 1.33 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में गिरावट का कारण
पीएनबी घोटाले की जांच के लिए सीरियस फ्रॉड इन्‍वेस्टिगेशन ऑफिस यानि एसएफआईओ ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर और एक्सिस बैंक की सीईओ शिखा शर्मा को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। 31 बैंकों के कंसोर्टियम ने गीतांजलि ग्रुप को वर्किंग कैपिटल की सुविधा दी थी और आईसीआईसीआई बैंक इनमें कर्ज देने वाला लीड बैंक था। इस खबर से बैंकिंग स्टॉक्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली। पिछले दो दिनों में आईसीआईसीआई बैंक का स्टॉक 6 फीसदी तक टूट गया है।

टॉप गेनर्स
एचसीएल टेक, आईटीसी, मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो, एशियन पेंट्स, टाटा मोटर्स
 

शेयर बाजार धड़ाम, सैंसेक्स 430 अंक लुढ़का और निफ्टी 10250 के नीचे बंद

नई दिल्लीः भारतीय शेयर बाजार आज गिरावट के साथ बंद हुए हैं। कारोबार के अंत में आज सैंसेक्स 429.58 अंक यानि 1.27 फीसदी गिरकर 33,317.20 पर और निफ्टी 109.60 अंक यानि 1.06 फीसदी गिरकर 10,249.25 पर  बंद हुआ। हालांकि ग्लोबल बाजारों से मिले मजबूत संकेतों से आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। कारोबार की शुरुआत में आज सैंसेक्स में 300 अंकों से ज्यादा का उछाल आया।

मिड-स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.32 फीसदी गिरकर बंद हुआ है। निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 1.32 फीसदी लुढ़क कर बंद हुआ है।

बैंकिंग शेयर लुढ़के
बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल, फार्मा, कैपिटल गुड्स, पावर और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है। बैंक निफ्टी 1.49 फीसदी गिरकर 24448 के स्तर पर बंद हुआ है। आज निफ्टी ऑटो में 1.37 फीसदी, निफ्टी फार्मा में 1.20 फीसदी गिरावट आई। मेटल शेयरों में आज 0.36 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में गिरावट का कारण
पीएनबी घोटाले की जांच के लिए आज सीरियस फ्रॉड इन्‍वेस्टिगेशन ऑफिस यानि एसएफआईओ ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर और एक्सिस बैंक की सीईओ शिखा शर्मा को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। 31 बैंकों के कंसोर्टियम ने गीतांजलि ग्रुप को वर्किंग कैपिटल की सुविधा दी थी और आईसीआईसीआई बैंक इनमें कर्ज देने वाला लीड बैंक था। इस खबर से बैंकिंग स्टॉक्स में बड़ी गिरावट देखने को मिली।

आपकी कंपनी TDS सरकार के पास जमा कर रही है या नहीं? ऐसे करें पता

नई दिल्लीः अगर आप किसी कंपनी या संस्‍थान में काम करते हैं और कंपनी आपका टी.डी.एस. काट रही है। तो आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि आपका टी.डी.एस. इनकम टैक्‍स विभाग के पास जमा हुआ या नहीं। कंपनी को कटा हुआ टी.डी.एस. टैक्‍स विभाग के पास जमा कराना होता है। विभाग हर तिमाही आपको मैसेज भेज कर बताता है कि 3 माह में कितना टी.डी.एस. आपकी कंपनी ने जमा कराया है। 

अगर आपको टैक्‍स विभाग से हर तिमाही टी.डी.एस. जमा होने का मैसेज नहीं आ रहा है। तो यह खतरे का संकेत भी हो सकता है। हो सकता है कि आपकी कंपनी आपका टी.डी.एस. काट तो रही हो लेकिन इनकम टैक्‍स विभाग के पास जमा न करा रही हो। 

ऐसे कर सकते हैं चेक 
अगर आपको टैक्‍स विभाग का मैसेज नहीं आ रहा है तो आप फॉर्म 26AS चेक करें। इस फॉर्म को आईटी की वैबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। फॉर्म ओपन करने के लिए आपको अपनी आईडी से लॉगइन करना होगा। अगर आपका टी.डी.एस. टैक्स विभाग के पास जमा हुआ होगा तो फॉर्म 26AS में दिखेगा। टी.डी.एस. जमा न होने पर आपका कोई रिकॉर्ड फॉर्म 26AS में नहीं दिखेगा।

कंपनियों को कब TDS रिटर्न फाइल करना होता है? 
किसी कंपनी को टैक्स विभाग में टी.डी.एस. हर तिमाही फाइल करना होता है। कंपनियों के लिए यह मियाद उस तिमाही के खत्म होने के एक महीना तय की गई है। इस तरह, 30 जून 2018 को खत्म हो रही तिमाही का टी.डी.एस. रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई होगी। हालांकि, 31 मार्च को खत्म हो रही तिमाही के टी.डी.एस. रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 मई होती है। इसलिए फॉर्म 26AS 31 मई के बाद ही अपडेट होगा।  

आयकर विभाग ने करदाताओं को मैसेज के जरिए टी.डी.एस. की जानकारी देना शुरू किया है। इसलिए यह जरूरी है कि आप आयकर विभाग के डॉक्युमेंट्स में अपना सही नंबर दें। आप अपना नंबर आयकर विभाग की वैबसाइट पर लॉगइन कर बदल भी सकते हैं। 

मल्टीनैशनल कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही देसी टॉफी

मुंबईः कैंडी बनाने वाली भारतीय कंपनियां पारले, आईटीसी और डीएस फूड्स 7,500 करोड़ रुपए के कन्फेक्शनरी सेगमेंट में मल्टीनैशनल कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। नील्सन के डाटा के अनुसार, परफेटी वैन मेल, मॉन्डलेज और नेसल जैसी ग्लोबल कंपनियों की पिछले कैलेंडर ईयर में इस मार्कीट में हिस्सेदारी स्थिर रही है या उसमें कमी आई है। इसका बड़ा कारण इन कंपनियों के प्रॉडक्ट्स के अधिक दाम हैं। पिछले वर्ष नोटबंदी के चलते मार्कीट पर दबाव था और कम डिनॉमिनेशन की करंसी की उपलब्धता भी कम थी। इससे महंगे कन्फेक्शनरी प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर असर पड़ा था।

कैंडी के मार्कीट में प्राइस पर काफी ध्यान दिया जाता है और 50 पैसे की बढ़ौतरी से भी बिक्री पर असर पड़ सकता है। पिछले 3 वर्षों में मॉन्डलेज इंडिया ने हॉल्स को पहले के 50 पैसे की जगह 1 रुपए में दोबारा लांच किया है और चॉकलेयर्स की कीमत दोगुनी कर 2 रुपए कर दी है। परफेटी वैन मेल ने एल्पेनलीबे जैसी अपनी अधिकतर कैंडी को 1 रुपए और इससे अधिक के प्राइस पर लांच किया है। इसके विपरीत भारतीय कंपनी पारले प्रॉडक्ट्स ने अपने प्रॉडक्ट्स के दाम नहीं बदले हैं।

मैंगो बाइट, मेलोडी और पॉपिन्स जैसे ब्रैंड्स की मालिक पारले प्रॉडक्ट्स के कैटिगरी हेड बी कृष्णा राव ने बताया, 'नोटबंदी के बाद कम डिनॉमिनेशन की काफी करंसी वापस सर्कुलेशन में आई है और इससे 50 पैसे की कीमत वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है। हालांकि इसके साथ ही दुकानदारों से बकाया पैसे के बदले 1 रुपए की टॉफी लेने से कस्टमर्स अब इनकार करने लगे हैं।' 

भारत में सबसे ज्यादा बिकती हैं ये 11 कारें

नई दिल्ली। भारत का वाहन उद्योग दुनिया में सबसे बड़ा है, जिसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 7.1 फीसदी हिस्सेदारी है। बढ़ते मध्यम वर्ग और युवाओं की बढ़ती आबादी के कारण यह उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और पिछले साल देश में लगभग 2.5 करोड़ वाहनों (पीवी) की बिक्री हुई, जिसमें 30,46,727 यात्री वाहनों (कार, वैन, एसयूवी, जीप) की बिक्री हुई।

इसके अलावा भारत वाहनों का प्रमुख निर्यातक है, जिसमें अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है। देश के वाहन निर्यात की वृद्धि दर साल-दर-साल आधार पर अप्रैल-दिसंबर (2017) अवधि में 13.01 फीसदी रही है। 

तो आइए देखते हैं कि पिछले साल (2017) देश में कौन से कारों की सबसे ज्यादा बिक्री हुई। 

देश में सबसे ज्यादा मारुति सुजुकी की गाडिय़ां बिकती हैं और हरेक 10 कारों में से 7 कारें इसी कंपनी की बिकती हैं। साल 2017 में सबसे ज्यादा बिकनेवाली कार मारुति सुजुकी ऑल्टो रही। पिछले साल कुल 2,57,732 ऑल्टो कारों की बिक्री हुई, जो कि औसतन 21,478 वाहन प्रति माह और 716 कारें रोजाना है। हालांकि जून में सबसे कम 14,856 ऑल्टो कारों की बिक्री हुई है। इसकी बिक्री में पिछले साल साल-दर-साल आधार पर 13 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में दूसरे नंबर पर पिछले साल मारुति सुजुकी की ही स्विफ्ट डिजायर कार रही, जिसकी कुल 2,25,043 इकाइयों की बिक्री हुई। कंपनी ने मई में डिजायर का नया संस्करण लांच किया था, जिसे ग्राहकों ने हाथों हाथ लिया और लांच होने के पहले दो महीनों में ही क्रमश: 30,934 और 34,305 स्विफ्ट डिजायर कारों की बिक्री हुई। पिछले साल औसतन 18754 स्विफ्ट डिजायर की हर महीने बिक्री हुई। 

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में तीसरे नंबर पर भी मारुति सुुजुकी की कार बलेनो रही। साल 2017 में कुल 1,77,209 बलेनो कार की बिक्री हुई। साल 2016 में कुल 97,580 बलेनो कार की बिक्री हुई और एक साल बाद इसमें 81 फीसदी की विशाल वृद्धि दर देखी गई। एक साल पहले की तुलना 2017 में बलेनो की बिक्री लगभग दोगुनी बढ़ गई। पिछले साल औसतन हर महीने 14,767 बलेनो कार की बिक्री हुई। 

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में चौथे नंबर पर मारुति सुजुकी की स्विफ्ट रही। साल 2017 में कुल 1,67,371 स्विफ्ट कारों की बिक्री हुई, जोकि औसतन 13,948 कारों की हर महीने बिक्री रही। इस कार की इतनी मांग है कि बाजार में नया मॉडल लांच होने के बावजूद दिसंबर तक पुराने मॉडल का उत्पादन होता रहा। 

सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में पांचवे नंबर पर भी मारुति सुजुकी की ही वैगन आर रही। 2017 में कुल 1,66,814 वैगन आर कारों की बिक्री हुई। यह कार कई साल से मध्य वर्ग की पसंदीदा कार है और दिल्ली, मुबंई, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों की सडक़ों पर शायद सबसे ज्यादा वैगन आर कारें ही दिखती हैं। मारुति सुजुकी ने साल 2017 में औसतन हर महीने 14,000 वैगन आर की बिक्री की। यह एक भरोसेमंद, कुशल और कम रखरखाव वाली कार है, जिसने सितंबर (2017) में 20 लाख कारों की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया। 

कंपनी मार्च (2018) में वैगन आर का नया संस्करण लांच करने जा रही है जो सुजुकी के नए हार्टेक प्लेटफार्म पर आधारित है। इस प्लेटफार्म पर बनने वाली कारों का वजन कम होता है तथा मजबूती और ईंधन दक्षता अधिक होती है। चर्चा है कि साल 2018 में मारुति सुजुकी इस कार को डीजल इंजन के साथ भी बाजार में उतारेगी।

देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में छठे पर दक्षिण कोरियाई कंपनी हुंडई की ग्रैंड आई10 रही। पिछले साल कुल 1,54,787 ग्रैंड आई10 की बिक्री हुई थी। कोरियाई कारें अपने प्रीमियम इंटीरियर और फिट और फिनिश के लिए जानी जाती हैं। पिछले साल हुंडई भारतीय बाजार में हर माह औसतन 12,900 ग्रैंड आई10 की बिक्री करने में सफल रही। हुंडई ने फरवरी (2017) में आई10 का नया संस्करण लांच किया था, जो ज्यादा क्षमता की डीजल इंजन के साथ था। 
 

IMF ने दी चेतावनी, ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से अमेरिका को होगा नुकसान

वाशिंगटनः अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के इस्पात आयात पर 25 फीसदी और एल्यूमीनियम पर 10 फीसदी आयात शुल्क लगाने के प्रस्‍ताव का अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई.एम.एफ.) ने विरोध किया है। आई.एम.एफ. ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह का कदम अमेरिका के साथ-साथ कई दूसरे देशों को नुकसान पहुंचा सकता है। 

दूसरे देशों को भी होगा नुकसान 
आई.एम.एफ. के प्रवक्ता गेरी राइस ने कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा घोषित आयात प्रतिबंध से न केवल अमेरिकी के बाहर नुकसान होगा बल्कि अमेरिका में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र समेत उसकी अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित होगी।’’ अमेरिका का विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र एल्यूमीनियम और इस्पात का सबसे बड़ा खपतकर्ता है।

राइस ने कहा, ‘‘हम अमेरिका तथा उसके कारोबारी सहयोगियों को व्यापार बाधाएं कम करने तथा व्यापार को लेकर असहमति को दूर करने को लेकर साथ मिलकर रचनात्मक तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।’’   

कनाडा ने किया विरोध 
अमेरिका की इस घोषणा को लेकर प्रमुख सहयोगी देशों कनाडा, यूरोपीय संघ, आस्ट्रेलिया तथा मेक्सिको ने नाराजगी जताई है। कनाडा तथा जर्मनी दोनों ने शुल्क को अस्वीकार्य करार दिया है। हालांकि, ट्रंप ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ‘‘व्यापार युद्ध बेहतर होते हैं।’’ उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘अमेरिका को व्यापार में अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है और वह व्यापार की लड़ाई में आसानी से जीत हासिल करेगा।’’  

भारत- प्रशांत क्षेत्र को खुला रखने का भारत, वियतनाम का संकल्प

नई दिल्लीः भारत और वियतनाम ने नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था का आह्वान करते हुए भारत- प्रशांत क्षेत्र को खुला रखने का संयुक्त रूप से आज संकल्प व्यक्त किया और परमाणु सहयोग सहित तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग ने आपसी बातचीत में रक्षा, तेल एवं गैस और कृषि सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की भी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वियतनाम के राष्ट्रपति की उपस्थिति में मोदी ने मीडिया को जारी वक्तव्य में कहा, ‘‘हम मिलकर एक ऐसे खुले, स्वतंत्र और प्रगति वाले भारत- प्रशांत क्षेत्र के लिए काम करेंगे जिसमें संप्रभुत्ता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान होगा और जहां मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दोनों ही पक्ष एक खुले, सक्षम और नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के लिए और द्विपक्षीय समुद्री क्षेत्र सहयोग का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ भारत, वियतनाम के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब समूचे क्षेत्र में चीन का दबदबा बढ़ रहा है। रक्षा सहयोग के मामले में प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा उत्पादन में गठजोड़ करने और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में अवसर तलाशने का फैसला किया है।

बातचीत के दौरान, मोदी ने कहा कि भारत और वियतनाम तेल और गैस खोज, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों को और गहरा करने पर भी सहमत हुए हैं। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि उनके बीच बातचीत सभी क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करते हुए देश के वृहद रणनीतिक भागीदारी के आधार पर मजबूती के लिये कदम उठाये जाने चाहिए। 

IRCTC ने किया टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव

मुंबई: भारतीय रेलवे ने आई.आर.सी.टी.सी. वैबसाइट के जरिए टिकट बुक करने को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। एक मार्च से आप मुंबई सबअर्बन सीजन टिकट (MSST) आई.आर.सी.टी.सी. वैबसाइट के जरिए बुक नहीं कर पाएंगे।

हालांकि इसका मतलब ये कतई नहीं है कि अब आप घर बैठे यह काम नहीं कर सकेंगे। भारतीय रेलवे ने वैबसाइट की बजाय अब यह काम एप्प के जरिए करने की सुविधा दी है। रेलवे के अनुसार अब मुंबई सबअर्बन सीजन टिकट 'UTS' मोबाइल एप्प के जरिए बुक किया जा सकता है। यह एप्प गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

UTS एप्प
भारतीय रेलवे ने 'यूटीएस ऐप-अनरिजर्व्ड टिकट थ्रू मोबाइल एप्ल‍िकेशन' लांच किया है। इससे आप आसानी से सभी तरह के अनारक्ष‍ित टिकट बुक कर सकते हैं। इस एप्प के जरिए आप नया सीजन टिकट बनाने के साथ ही रिन्यू भी करवा सकते हैं।

ऐसे करें इस्तेमाल
इसका इस्तेमाल करने के लिए आपको खुद को रजिस्टर करना होगा। जैसे ही आप खुद को रजिस्टर करेंगे, वैसे ही इसमें 'आर-वॉलेट' बन जाएगा। इस वॉलेट को आप यूटीएस काउंटर के जरिए रिचार्ज कर सकते हैं या फिर https://www.utsonmobile.indianrail.gov.in पर जाकर भी इसे रिचार्ज किया जा सकता है.

प्याज निर्यात 2 साल के निचले स्तर पर

नई दिल्लीः प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई है। प्याज का निर्यात करीब 2 साल के निचले स्तर तक लुढ़क गया है। दिवाली के बाद देश में जब प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी तो सरकार ने प्याज निर्यात पर न्यूनतम निर्यात मूल्य की शर्त लगाई थी जिस वजह से प्याज का मासिक निर्यात 2 साल के निचले स्तर तक लुढ़क गया है।

आंकड़ों के मुताबिक नवंबर के दौरान देश से सिर्फ 92944 टन प्याज का निर्यात हो पाया है, नवंबर 2015 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि मासिक निर्यात 1 लाख टन से नीचे फिसला हो। नवंबर से पहले अक्टूबर के दौरान देश से 1.75 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले 8 महीने यानि अप्रैल से नवंबर 2017 के दौरान देश से 17.72 लाख टन प्याज का निर्यात हो पाया है।

PNB scam: घबराए विदेशी निवेशक, FPI ने फरवरी में 10 हजार करोड़ निकाले

नई दिल्लीः पंजाब नैशनल बैंक (पी.एन.बी.) घोटाले के असर से विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक शेयर बाजारों से करीब 10 हजार करोड़ रुपए (1.5 अरब डॉलर) निकाले। पी.एन.बी. ने 14 फरवरी को आभूषण कारोबारियों नीरव मोदी और मेहुल चौकसी समूह की कंपनियों द्वारा बैंक से धोखाधड़ी का खुलासा किया था। यह घोटाला 11,400 करोड़ रुपए का है।  

डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टपोलियो निवेशकों (एफ.पी.आई.) ने एक फरवरी से 23 फरवरी के बीच कुल 9,899 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। हालांकि इस दौरान उन्होंने ऋण बाजार में 1,500 करोड़ रुपए का निवेश किया है। जनवरी में एफ.पी.आई. ने 13,780 करोड़ रुपए का निवेश किया था।       

आनलाइन निवेश मंच 'ग्रो' के सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी हर्ष जैन ने कहा, "जनवरी में अमेरिका में बेरोजगारी दर 17 साल के निचले स्तर 4.1 फीसदी पर रही। इसके अलावा इस बात की भी काफी आशंकाएं हैं कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दर बढ़ा सकता है। हमने वैश्विक स्तर पर बिकवाली देखी है। भारतीय बाजार से एफ.पी.आई. की निकासी के कारण यही हैं।"

इंटेलिस्टॉक्स की मुख्य निवेश सलाहकार नलिनी जिंदल ने कहा कि अमेरिका में मुद्रास्फीति कई साल के निचले स्तर पर है जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की आशंकाएं बलवती हुई हैं। इसके कारण एफ.पी.आई. सतर्कता बरत रहे हैं।