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मंगल के क्रेटर में मिले सिलिका के भंडार, रोवर बताएंगे किस प्रकार की सामग्री है मौजूद

जयपुर टाइम्स
न्यूयॉर्क (एजेंसी)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर के डाटा का अध्ययन कर शोधकर्ताओं ने लाल ग्रह के एक क्रेटर में हाइड्रेटेड सिलिका के भंडार खोजे हैं, जो जीवन के रासायनिक संकेतों को संरक्षित करने के लिए एक अच्छा खनिज माना जाता है। इस क्रेटर में नासा अगले साल एक रोवर लैंड करने की योजना भी बना रही है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि जाजीरो नामक इस क्रेटर में कई ऐसी सामग्रियां हैं जिन्हें सदियों पहले में नदियां अपने साथ बहा कर लाई थीं और अपने डेल्टा के आसपास इन्हें छोड़ देती थीं। इस अध्ययन के शोधकर्ताओं में अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधार्थी भी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने कॉम्पैक्ट रिकॉनिसेंस इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर (सीआरआइएस) का इस्तेमाल कर इस क्रेटर में मौजूद सिलिका का विश्लेषण किया। शोधार्थियों ने कहा कि लाल ग्रह के इन डेल्टाओं में भी पृथ्वी की तरह ही ऐसी कई सामग्रियां हैं, जो जीवन संभावना के लिए एक महत्वूपर्ण संकेत हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मंगल के जाजीरो क्रेटर में हाइड्रेटेड सिलिका मिलने से जीवन के रासायनिक संकतों के संरक्षण की क्षमता बढ़ गई है। उन्होंने कहा, 'उन्हें यहां एक ऐसा सिलिका का भंडार भी मिला है जो कम ऊंचाई पर डेल्टा के किनारे है।

Ó ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक जैक मस्टर्ड ने कहा, 'जिस सामग्री से डेल्टा की सबसे निचली परत का निर्माण होता है, कभी-कभी उसमें सबसे ज्यादा जैविक संकेतक भी मिलते हैं। इसलिए यदि आप उस सामग्री की निचली परत को खोज लेते हैं और उसमें बहुत अधिक मात्रा में सिलिका मौजूद है तो यह डबल बोनस जैसा है।Ó अध्ययन ने बताया गया है कि इस क्षेत्र में अन्य कई खनिजों की खोज भी हो सकती है। 

बोलिविया में पुलिस और सैनिकों की प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसक झड़प

जयपुर टाइम्स
ला पेज (एजेंसी)। बोलिविया में  पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें पांच प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। लोकपाल कार्यालय के एक प्रतिनिधि ने को बताया कि कोचाबम्बा शहर के बाहर बोलिवियाई पुलिस के साथ टकराव के दौरान पांच प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। पांचों प्रदर्शनकारियों की मौत पास के सैकाबा के एक अस्पताल में हुई। 10 नवंबर को राष्ट्रपति इवो मोरालेस के इस्तीफा देने के बाद सत्ता पर काबिज अंतरिम सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए कोचाबम्बा की ओर मार्च करने वाले एक समूह ने ऐसी हिंसक प्रतिक्रिया के लिए सुरक्षाबलों को दोषी ठहराया है। कॉक्सा ने कहा कि कम से कम 22 लोगों को बंदूक की नोक वाले सैकाबा और कोचाबम्बा के अस्पतालों में ले जाया गया, उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल चौकियों पर एम्बुलेंस में देरी कर रहे थे। ओम्बड्समैन कार्यालय के एक प्रतिनिधि नेल्सन कॉक्स ने बताया कि इस हिंसा में कम से कम 22 प्रदर्शनकारियों को बंदूक की नोंक पर सैकाबा और कोचाबम्बा के अस्पतालों में ले जाया गया, उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल चौकियों पर एम्बुलेंस में देरी कर रहे थे। कॉक्स ने कहा कि हम रविवार (10 नवंबर) से सुरक्षाबलों और सशस्त्र बलों के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिनके हस्तक्षेप की वजह से ऐसी खतरनाक परिस्थितियां पैदा हो गई हैं। बोलीविया की पुलिस ने लोगों की मौत के लिए प्रदर्शनकारियों को दोषी ठहराया है। मोरालेस ने सालों बाद राजनीति में प्रवेश किया क्योंकि कोचाबम्बा प्रांत के चापर क्षेत्र में कोका उत्पादकों के संघ के नेता के रूप में, जहां बोलीविया के पहले स्वदेशी राष्ट्रपति का समर्थन मजबूत बना हुआ है। कोकाओ उत्पादकों ने जाहिर तौर पर ला पेज के लिए मार्च की तैयारी में कोचाबम्बा शहर में इक_ होने की योजना बनाई। हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए मोरालेस ने पुलिस और सैनिकों से नरसंहार को रोकने की अपील की। 

यूएन में राजदूत रहीं निकी हेली का खुलासा- 2 मंत्रियों ने मुझे ट्रम्प को अनसुना करने के लिए कहा था

जयपुर टाइम्स
न्यूयॉर्क (एजेंसी)। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत रहीं निकी हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर अपनी किताब में कई खुलासे किए हैं। हेली ने बताया कि किस तरह व्हाइट हाउस में ट्रम्प के सहयोगी मंत्रियों ने ही राष्ट्रपति को देश-विदेश से जुड़े मामलों पर नजरअंदाज किया। हेली ने किताब 'विद ऑल ड्यू रिस्पेक्टÓ में खुलासा किया है कि पूर्व विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और व्हाइट हाउस में चीफ ऑफ स्टाफ रहे जॉन केली ने उनसे कुछ मुद्दों पर ट्रम्प को अनसुना करने के लिए भी कहा था। भारतीय मूल की निकी हेली ने पिछले साल अक्टूबर में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें जनवरी 2017 में यूएन में अमेरिका का राजदूत बनाया गया था। ट्रम्प ने ट्वीट करके उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी थीं। हेली के मुताबिक, केली और टिलरसन ने उन्हें इस विश्वास में ले लिया था कि ट्रम्प की बात नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने यह तक कहा कि इसका मतलब राष्ट्रपति को टालना नहीं, बल्कि देश को बचाना है। दोनों कहते थे कि उनके फैसले अमेरिका के हित में हैं, न कि राष्ट्रपति ट्रम्प के, क्योंकि राष्ट्रपति नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। हेली ने बताया कि एक मौके पर टिलरसन ने उनसे कहा था कि अगर राष्ट्रपति ट्रम्प को बिना देखरेख के छोड़ दिया गया, तो लोग मरेंगे। हेली ने बताया, मैंने दोनों मंत्रियों की बात मानने से इनकार कर दिया और इसे खतरनाक बताया। उन्हें राष्ट्रपति को नजरअंदाज करना था तो यह बात उन्हें खुद ट्रम्प से कहनी चाहिए थी। उन्हें मुझे साजिश में शामिल होने के लिए नहीं कहना था। हेली के मुताबिक, मंत्रियों को अपने मतभेद राष्ट्रपति से बात कर के सुलझाने थे, लेकिन उन्हें कमजोर करने का फैसला बेहद खतरनाक और संविधान का उल्लंघन था। 
हेली ने आगे कहा, व्हाइट हाउस के कुछ अफसर ट्रम्प के बर्ताव की तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए एक साथ इस्तीफा देने पर भी विचार कर रहे थे। इससे पहले सितंबर 2018 में वॉशिंगटन पोस्ट के रिपोर्टर बॉब वुडवर्ड ने अपनी किताब में बताया था कि ट्रम्प प्रशासन के कई वरिष्ठ मंत्री उनकी मेज से अहम दस्तावेज हटा लिया करते थे। कुछ अन्य किताबों में भी पत्रकारों ने व्हाइट हाउस में टकराव और गुटबंदी का खुलासा किया था। 

बस यात्रा के दौरान अमरिंदर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ पुराने रिश्ते याद किए, क्रिकेट पर बात हुई

जयपुर टाइम्स
जालंधर (एजेंसी)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करतारपुर जाते वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बस में सफर किया। करीब 5 मिनट के सफर में कैप्टन ने इमरान को दोनों के खानदानों के बीच दशकों पुराने रिश्ते की यादें साझा कीं। करतारपुर कॉरिडोर से रवाना हुए 550 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे में अमरिंदर के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू भी शामिल थे। इमरान ने जीरो पॉइंट पर भारतीय श्रद्धालुओं का स्वागत किया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा बाबा नानक में कॉरिडोर का शुभारंभ किया था।
पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा- बेशक बस में यह यात्रा 5 मिनट की थी, लेकिन इसमें इमरान खान और अमरिंदर सिंह की पुरानी जान-पहचान सामने आई है। मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बताया कि वह उन्हें क्रिकेट खेलने के दिनों से जानते हैं। इमरान के रिश्तेदार जहांगीर खान अंग्रेजों के दौर में पटियाला के लिए भी क्रिकेट खेल चुके हैं। उनके साथ मुहम्मद निसार, लाला अमरनाथ, तेज गेंदबाज अमर सिंह, बल्लेबाज वजीर अली और अमीर अली भी थे। यह 7 खिलाड़ी उस टीम के मेंबर थे, जिसकी कप्तानी कैप्टन अमरिंदर सिंह के पिता महाराजा यादविंदर सिंह ने 1934-35 में भारत और पटियाला के लिए की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है कि क्रिकेट एक धागे की तरह है जो भारत और पाकिस्तान को हमेशा जोड़े रखता है। लेकिन, क्रिकेट को धन्यवाद। 
जो इमरान और अमरिंदर के रिश्तों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने के लिए काफी थी। सफर में क्रिकेट से रिश्ता जुडऩे के बाद दोनों के बीच सौहार्द बनाने में मदद मिली। बेशक दोनों इससे पहले नहीं मिले और न ही निजी तौर पर एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन उन्होंने भविष्य में रिश्तों को मजबूती देने के संकेत दिए हैं। 

नए मिशन पर नासा, स्पेस में लांच हुआ सैटेलाइट आइकन

जयपुर टाइम्स
केप कानावेरल (एजेंसी)। नासा ने  एक सैटेलाइट लांच किया। यह सैटेलाइट रहस्यमयी और गतिशील क्षेत्र का पता लगाएगा । साथ ही इसे अंतरिक्ष व पृथ्वी के मौसम के बीच का लिंक पता करना है। नासा का यह मिशन एक साल की देरी से शुरू हुआ है। आयोनोस्फेरिक कनेक्शन एक्सप्लोरर स्पेसक्राफ्ट को रात दस बजे लांच किया गया। नासा के इस मिशन को इस तरह तैयार किया गया है कि यह पृथ्वी के ऊपरी वातावरण का अध्ययन करेगा। 
पृथ्वी की कक्षा में आईकन ने अपना रास्ता बनाएगा ताकि यह  आयोनोस्फेयर का अध्ययन कर सके।  इसके अध्ययन की मदद से वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष व पृथ्वी के मौसम  के बीच के लिंक को समझेंगे। 
साथ ही यह भी पता लगाएंगे कि आयोनोस्फेयर में दोनों का आपसी तालमेल कैसा है। यह जानकारी मिशन के सदस्यों ने दी। आइकन नाम का सैटेलाइट रिलीज होने के पांच सेकेंड के बाद इसमें लगा पेगासस रॉकेट प्रज्वलित हुआ और सैटेलाइट आइकन को इसकी राह पर आगे भेज दिया। वायुमंडल के ऊपरी सतह का चार्ज किया गया हिस्सा आयोनोस्फेयर है। यह सैंकड़ों मील तक फैला हुआ है।  

ट्रंप ने अमेरिकी राजनयिकों को तुर्की-सीरिया मामले में मध्यस्थता करने को कहा

जयपुर टाइम्स
वाशिंगटन (एजेंसी)।  तुर्की-सीरिया संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राजनयिकों को कहा है कि वह इस मामले को शांत करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाएं। इससे पहले ट्रंप ने सीरिया से अपनी सेना हटा ली थी, जिसके तुरंत बाद तुर्की ने उत्तरी सीरिया पर बम बरसाए थे। इसमें सात नागरिकों की मौत हो गई थी। हालांकि, सेना हटाने के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो के सहयोगी तुर्की को चेतावनी दी थी कि यदि उसने सीरिया के खिलाफ कार्रवाई की तो उसकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देंगे। अमेरिका के कदम से आईएस के खिलाफ लड़ाई में उसके मुख्य सहयोगी कुर्द अकेले पड़ गए थे। चेतावनी के बाद भी तुर्की के इस कदम पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि तुर्की तर्कसंगत कार्य करेगा। तुर्की की अर्थव्यवस्था के खिलाफ चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर उत्तरी सीरिया में अंकारा ने अपने ऑपरेशन को यथासंभव मानवीय रूप से नहीं किया तो वह प्रतिबंधों के कहीं अधिक सख्त कदम उठाने पर विचार करेंगे।  

ब्लैक लिस्ट होने से बचने की कोशिश

जयपुर टाइम्स
इस्लामाबाद (एजेंसी)। आतंकी संगठनों को मिल रही आर्थिक मदद और उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाल सकती है। यह संस्था टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की निगरानी करती है। पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से बचने की कोशिश में लगा है। इसी के चलते इमरान खान सरकार ने गुरुवार को आतंकी हाफिज सईद के चार बड़े करीबियों को गिरफ्तार कर लिया है। ये चारों जफर इकबाल, हाफिज याह्या अजीज, मोहम्मद अशरफ और इकबाल सलाम आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य हैं। पिछले दिनों एफएटीएफ से जुड़े एेिशया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) ने माना था कि पाकिस्तान ने यूएनएससीआर 1267 के प्रावधानों को उचित तरह से लागू नहीं किया। वह मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज समेत दूसरे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। ऐसे में अगले हफ्ते पेरिस में होने वाली बैठक में उसे ग्रे लिस्ट से हटाकर ब्लैक लिस्ट में रखा जा सकता है। यह बैठक 12 से 15 अक्टूूबर के बीच होनी है। एपीजी ने 228 पेज की रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान 40 में से 32 पैरामीटर पर नाकाम रहा। पाकिस्तान को आईएसआई, अलकायदा, जमात-उद-दावा, जैश-ए-मोहम्मद सहित अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग के मामले की पहचान कर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि जमात-उद-दावा और लश्कर से जुड़े लोगों के खिलाफ यह कार्रवाई नेशनल एक्शन प्लान (एनएपी) के तहत जरूरी थी। पंजाब प्रांत के सीटीडी ने चारों को टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीटीडी के मुताबिक, जमात और लश्कर का सरगना हाफिज सईद पहले से ही टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद है। अब उससे जुड़े लोगों पर शिकंजा कसा गया है। 
ब्लैक लिस्ट होने के बाद कर्ज लेने में पाक को परेशानी
ब्लैक लिस्ट होने के चलते अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ पाकिस्तान की वित्तीय साख को और नीचे गिरा सकते हैं। ऐसे में वित्तीय संकट में जूझ रहे पाकिस्तान की स्थिति और खराब हो सकती है। एफएटीएफ ने पाक को लगातार ग्रे लिस्ट में रखा है। इस कैटेगरी के देश को कर्ज देने में बड़ा जोखिम समझा जाता है।
इसके कारण अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं ने पाक को आर्थिक मदद और कर्ज देने में कटौती की है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हुई। 

भारत और चीन के बीच दिसंबर 2019 में होगा आतंकरोधी संयुक्त सैन्य अभ्यास

जयपुर टाइम्स
श्रीनगर (एजेंसी)।  भारत और चीन अपने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए दिसंबर 2019 में आतंकरोधी संयुक्त सैन्य अभ्यास को आयोजित करेंगे। हालांकि इस अभ्यास का आयोजन कहां होगा इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है। बता दें कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 अक्तूबर को दो दिवसीय भारत यात्रा पर आ रहे हैं। उनके साथ चीनी विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य भी भारत आएंगे। दोनों देशों के नेता चेन्नई में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। सूत्रों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम नरेंद्र मोदी की वार्ता के दौरान आतंकवाद, आतंकी फंडिंग, समर्थन जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अनौपचारिक बैठक होने के कारण चीनी राष्ट्रपति के इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के किसी समझौता या समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं होंगे और न ही कोई संयुक्त विज्ञप्ति जारी की जाएगी। जिनपिंग 24 घंटों के चेन्नई और उसके आस-पास बिताएंगे। वह शुक्रवार को डेढ़ बजे चेन्नई पहुंचेंगे और अगले दिन लगभग इसी समय अपने देश वापस चले जाएंगे। दोनों नेता महाबलिपुरम के तीन प्रसिद्ध स्मारकों और एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। जिसमें एक घंटे का समय लगेगा। कुल मिलाकर मोदी और जिनपिंग लगभग सात घंटे एकसाथ रहेंगे।

अब रिपब्लिकन पार्टी की जांच में खुलासा- 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने ट्रम्प की मदद की थी

सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की रिपोर्ट- रूसी इंटरनेट रिसर्च एजेंसी ने ट्रम्प के लिए सोशल मीडिया कैम्पेन चलाया और हिलेरी को नुकसान पहुंचाया
इसी साल आई स्पेशल काउंसल रॉबर्ट मुलर की रिपोर्ट में भी 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखलअंदाजी की बात कही गई थी
जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। रिपब्लिकन पार्टी की एक जांच में कहा गया है कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने डोनाल्ड ट्रम्प की मदद की। यह रिपोर्ट सीनेट में पेश की गई। ट्रम्प खुद रिपब्लिकन पार्टी से हैं। इससे पहले व्हाइट हाउस ने दावा किया था कि चुनाव में ट्रम्प को रूस से किसी भी तरह की मदद नहीं मिली। सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की 2016 इलेक्शन इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) स्थित इंटरनेट रिसर्च एजेंसी (आईआरए) ने सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाया। यह कैम्पेन उस व्यक्ति के लिए चलाय गया, जो रूस का पसंदीदा उम्मीदवार था। इस अभियान के जरिए राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को नुकसान पहुंचाया गया, क्योंकि उनके जीतने की संभावना ज्यादा थी। क्रेमलिन के आदेश पर रूसी एजेंसी ने ट्रम्प के लिए समर्थन जुटाया। रिपोर्ट के मुताबिक- आईआरए ने  2016 चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार रहे ट्रम्प को अपनी सोशल मीडिया एक्टिविटी के जरिए भारी समर्थन दिलाया। रिपब्लिकन सीनेटर रिचर्ड बर की अगुआई में मामले की जांच हुई। ट्रम्प लगातार इस बात की पैरवी करते रहे हैं कि राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने किसी भी तरह की दखलअंदाजी की। इस तरह की खबरों को वे फेक न्यूज करार देते रहे हैं। ट्रम्प और उनके साथी रिपब्लिकंस एक अप्रमाणित थ्योरी लेकर आए। इसमें कहा गया कि डेमोक्रेट्स ने यूक्रेन के साथ मिलकर 2016 चुनाव में ट्रम्प को प्रभावित करने का प्लान बनाया था।
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2020 के चुनाव में भी रूस की दखलअंदाजी हो सकती है। लिहाजा एजेंसियों को सावधान रहने की जरूरत है। इसी साल 448 पेज की रिपोर्ट में 74 वर्षीय स्पेशल काउंसल रॉबर्ट मुलर ने कहा था- ‘‘रूसी सेना के अधिकारियों ने डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। 18 अप्रैल को यह रिपोर्ट कानून मंत्रालय को सौंप दी 
गई थी।

 हालांकि, रिपोर्ट के आखिर में उन्होंने लिखा कि रूसी दखल के मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ट्रम्प ने रूसी दखल की जांच को नियंत्रित करने की कोशिश की। उन्होंने मुलर को जांच से हटवाने की भी कोशिश की थी। मुलर न्याय विभाग में पदस्थ थे।
ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (अमेरिकी संसद का निचला सदन) की स्पीकर नेंसी पेलोसी ने सितंबर में ट्रम्प पर महाभियोग जांच बैठाने की बात कही थी। ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडाइमर जेलेंस्की पर डेमोक्रेट नेता जो बिडेन और उनके बेटे हंटर के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की जांच कराने के लिए दबाव बनाया था। एक व्हिसलब्लोअर ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, ट्रम्प कह चुके हैं कि वे जेलेंस्की के साथ फोन कॉल में हुई बातचीत का ब्योरा देने के लिए तैयार हैं। 

जिनपिंग-मोदी की मुलाकात में कश्मीर और 370 पर बात नहीं होगी, सीमा और विकास पर होगी चर्चा

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली/बीजिंग (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को भारत आएंगे। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तमिलनाडु के महाबलीपुरम में 11 और 12 अक्टूबर को दोनों नेताओं की मुलाकात होगी। इस दौरान कोई समझौता और एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन मोदी-जिनपिंग की ओर से साझा बयान जारी हो सकता है। दोनों नेता आतंकवाद, सीमा पर शांति कायम करने समेत कई मुद्दों पर बातचीत करेंगे। पिछले साल अप्रैल में पहली अनौपचारिक बैठक के लिए मोदी चीन के वुहान गए थे। 
सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जिनपिंग के साथ चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य भी भारत आएंगे। इस बैठक के लिए कोई एजेंडा तय नहीं है, लेकिन सीमा विवाद, आतंकवाद, आतंकी गुटों की आर्थिक मदद और उन्हें बढ़ावा देने के मुद्दे पर चर्चा की उम्मीद है।
मोदी और जिनपिंग की वन टू वन मीटिंग के अलावा प्रतिनिधिमंडल की वार्ता होगी। इस दौरान दोनों नेता अगली विशेष प्रतिनिधिस्तर की वार्ता की तारीख तय कर सकते हैं। भारत और चीन के सैनिक संयुक्त रूप से दिसंबर में आतंकवाद विरोधी अभ्यास में शामिल होंगे। मोदी और जिनपिंग महाबलीपुरम के तीन प्रसिद्ध स्मारकों का दौरा करेंगे। करीब एक घंटे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। पुरातत्त्वविद् एस राजावेलु के मुताबिक, महाबलीपुरम का चीन से करीब 2000 साल पुराना संबंध है। 
इस वजह से बैठक को ऐतिहासिक बल मिलेगा।
 

अमेरिका ने चीन की 28 संस्थाओं को किया ब्लैकलिस्ट, पुलिस कॉलेज भी है शामिल

जयपुर टाइम्स
वाशिंगटन (एजेंसी)।  अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने घोषणा की कि वह 28 चीनी संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट कर रही है। इन्हें इसलिए ब्लैकलिस्ट किया गया है क्योंकि इन्होंने शिनजियांग प्रांत में उइगुरों और दूसरे मुस्लिम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया है। वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने इस कदम की घोषणा की। रॉस ने बताया कि इन सभी संस्थाओं को अमेरिकी उत्पादों को खरीदने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका  चीन के भीतर जातीय अल्पसंख्यकों के हो रहे कूर दमन को बर्दाश्त नहीं करेगा। बुधवार को प्रकाशित होने वाले अमेरिकी फेडरल रजिस्टर के अपडेट के अनुसार ब्लैकलिस्ट संस्थाओं में वीडियो सर्विलांस कंपनी हिकविजन शामिल है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी मेगवी टेक्नोलॉजी और सेंसटाइम भी शामिल है। यह प्रतिबंध ऐसे समय पर लगाया जा रहा है जब चीन और अमेरिका के बीच तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच व्यापार नीति और चीन द्वारा शिनजियांग प्रांत में की गई कार्रवाई को लेकर तनाव बना हुआ है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इस समय व्यापार युद्ध के बीच में हैं। 
सोमवार को व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच बातचीत गुरुवार से शुरू होने वाली है। 
चीन के शीर्ष व्यापार दूत लियू हे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर और ट्रेजरी सचिव स्टीवन नुचिन के साथ मुलाकात करेंगे। अमेरिका ने इस बीच पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में अपनी नीतियों को लेकर बीजिंग के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

मानवाधिकार समूह का कहना है कि चीन ने एक मिलियन उइगुरों और अन्य मुस्लिमों को री-एजुकेशन कैंप में कैद किया हुआ है। इस कदम को अमेरिका ने जर्मनी के नाजी के समानांतर बताया है। पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका के गृह विभाग ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें उइगुरों की तकलीफ को दिखाया गया था। अमेरिकी सांसद जॉन सुलिवन ने इसे चीन के दमन का भयावह अभियान कहा था। अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित संस्थाओं में शिनजियांग के 18 सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो, एक पुलिस कॉलेज और आठ व्यापार शामिल हैं।