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पीओके को लेकर दोनों ही देश आमने-सामने

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। अनुच्छेद ३७० हटाने के बाद से ही भारत व पाकिस्तान के बीच टकराव के हालात बनते जा रहे हैं। एक ओर जहां भारत की आवाम ने अनुच्छेद ३७० हटने का स्वागत किया और उनके चेहरों पर खुशी उभर गई वहीं दूसरी और पाकिस्तान की आवाम में अनुच्छेद ३७० हटाने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए आक्रोश व्याप्त हो गया। जिसके चलते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नित नये पैतरे अपना पाकिस्तान की आवाम को संतुष्ट करने की कोशिश कर रहे है। परंतु इसी बीच पीओके को लेकर दोनों ही देश की आवाम में संशय व्याप्त हो गया है। भारतीय जनता यह चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही पीओके को मसले को सुलझाये वहीं पाकिस्तान की जनता पीओके को लेकर संशय से व्याप्त है और उसका मानना है कि भारत जल्द ही पीओके पर भी कब्जा कर सम्पूर्ण कश्मीर हथिया सकता है। इसी बात को लेकर वहां की सेना व आवाम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को नित कठघरे में खड़ा कर रही है।
इस बात पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि भारत पाकिस्तान पर हमला करना नहीं चाहता लेकिन पाकिस्तान में बालाकोट के बाद से इतना खौफ है कि वहां हर दिन जंग छेडऩे के कयास लगाए जा रहे हैं। खतरा इस खौफ से ही पैदा हो सकता है। अगर गलती से पाकिस्तान की तरफ से कोई कदम उठा लिया जाए तो भारत को उसका जवाब देना पड़ेगा। एक और स्थिति है जहां जंग छिड़ सकती है और वह है आतंकवादियों की करतूत। अगर भारत पर आतंकवादी हमला हो जाता है तो भारत को उसका जवाब देना होगा और वह जवाब फौजी कार्रवाई ही हो सकता है जैसा कि उरी के बाद हुआ। यह खतरा सचमुच गंभीर है क्योंकि पाकिस्तानी आर्मी और आतंकवादी जरूर चाहेंगे कि भारत से टकराव हो और उनकी औकात बढ़े। ये दोनों ही बातें भारत के नियंत्रण से बाहर हैं, इसलिए जंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। 
बहुत से लोग मानते हैं कि भारत को पीओके पर कब्जा कर लेना चाहिए। यहां तक कि पूरे पाकिस्तान को भारत में मिला लेने के ख्वाब देखे जा रहे हैं। इस तरह की गलतफहमी से बचना चाहिए। जैसा कि हमने कहा, भारत की कोई मंशा पाकिस्तान पर हमला करने की नहीं है, तो फिर उसे खुद से मिलाने की तो बात ही दूर। हां, अगर युद्ध होता है तो उसका अंजाम क्या होगा कहना मुश्किल है। फिर भी यह समझना चाहिए कि पीओके या किसी भूभाग को मिलाने से हमें फायदा नहीं है। एक अशांत और बदहाल देश की आबादी को खुद से मिलाने में मुसीबतें ही बढ़ेंगी। और उसके बाद भी जो सीमारेखा बनेगी, वह अशांत ही रहेगी। 
नहीं, ऐसा कभी नहीं होगा। जंग का पारा कितना भी चढ़ा हो या नेता कोई भी बयान दें, दुनिया में एटमी जंग नहीं हो सकती। हर किसी को पता है कि उसके नतीजे कितने भयानक हो सकते हैं, क्योंकि जब एटम बम इस्तेमाल होंगे तब हार या जीत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। फिर यह भी तय है कि फौरन ही दुनिया की बड़ी ताकतें इसे रोकने के लिए अपनी ऊर्जा लगा देंगी।  चीन खुलकर ऐसा करने से बचेगा, क्योंकि तब यह एक बहुत बड़ी लड़ाई की शुरुआत हो जाएगी। इसकी बजाय चीन की कोशिश यह होगी कि जंग को जल्द से जल्द खत्म करा दिया जाए।  हर पाकिस्तानी की तरह इमरान बुरी तरह डर गए हैं और फ्रस्ट्रेशन में हैं। अब उनके इस्लामिक देशों को भारत के खिलाफ लामबंद करने का ही रास्ता है। हम उनकी तरफ से काफी शोरगुल सुनेंगे। लेकिन इससे बेचैन होने की जरूरत नहीं है। दुनिया में पहले ही पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है और कोई भी देश उनके पीछे खड़े होने को तैयार नहीं होने वाला। शोरगुल का असर सिर्फ ये होगा कि अलगाववादियों को खुराक मिलती रहेगी। यानी कश्मीर में अमन-चैन की बहाली मुश्किल बनी रहेगी। 
फिलहाल कश्मीर में अमन-चैन बहाल करना एक बड़ी चुनौती है। हमें सारा फोकस इस बात पर रखना चाहिए, क्योंकि पाबंदी हटने के बाद क्या होगा, यह महत्वपूर्ण है। भारत की कश्मीर पॉलिसी सिर्फ यही हो सकती है कि एक तो कश्मीरियों को एकजुटता का अहसास दिलाया जाए यानी उनके साथ कोई बदसलूकी ना हो, और दूसरा यह कि उनकी तरक्की के लिए जो भी हो सके वह जल्द से जल्द किया जाए। प्यार, भाईचारा और तरक्की यही तीन चीजें हैं जो कश्मीरियों को बाकी देश से जोड़ेंगी और यह अहसास दिलाएंगी कि अलगाव के झूठे सपनों में कुछ नहीं रखा है। और यह भी कि पाकिस्तान जैसे मुल्क का साथ लेने से उनका कोई भला नहीं होने वाला। 
यह आर्थिक तौर पर कमजोरी का दौर है, इसलिए भारत को जंग की खासी कीमत चुकानी पड़ेगी। लेकिन फिर भी अपनी ताकत के बूते भारत इस को झेल जाएगा। लेकिन पाकिस्तान के लिए यह ऐसी तबाही होगी जिसका खात्मा होने में शायद दशकों लग जाएं। क्योंकि तब पाकिस्तान को आईएमएफ की मदद भी शायद ही मिले। फिर उसके भीतर जो ज्वालामुखी फटेगा वह देश को राजनीतिक तौर पर अपाहिज बना देगा और मुमकिन है कि बलूचिस्तान उससे अलग ही हो जाए। पाकिस्तान में कट्टरवाद और भी बढ़ेगा, इसलिए अगर वह अफगानिस्तान जैसा देश बन जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। भारत जैसे बड़े देश को अपनी हैसियत को पाकिस्तान के बराबर नहीं लानी चाहिए। लिहाजा न तो हर बात में पाकिस्तान से तुलना करने की जरूरत है और न उसकी बातों को तवज्जो देनी चाहिए। टीवी पर जो हंगामा मचा हुआ है, उससे ऐसा लगता है मानो भारत के दिमाग में सिर्फ पाकिस्तान ही बसा हुआ है। जबकि भारत को अंदरूनी मसलों पर गौर करना चाहिए। 

भारत को जीएसपी कार्यक्रम में शामिल करने के लिए 44 अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प प्रशासन को पत्र लिखा

अमेरिका ने इस साल जून में भारत को अपनी जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज कार्यक्रम से बाहर किया था 
इस कार्यक्रम के तहत 
भारत को अमेरिका से व्यापार करने पर आयात शुल्क में विशेष छूट मिलती थी
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प 22 सितंबर को ह्यूस्टन में जीएसपी पर चर्चा 
कर सकते हैं
जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के 44 सांसदों ने ट्रम्प प्रशासन से कहा है कि वे भारत को फिर से जीएसपी व्यापार कार्यक्रम में शामिल करें ताकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते में आसानी हो। अमेरिका ने इसी साल जून में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (जीएसपी) कार्यक्रम से बाहर कर दिया था। जीएसपी के तहत भारत को अमेरिका से व्यापार में लाभार्थी का विशेष दर्जा मिला था। अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है। अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर को लिखे पत्र में सांसदों ने कहा है कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए हमें अपने उद्योगों के लिए बाजारों की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी। कुछ छोटे मुद्दों पर मोल-भाव की वजह से इस पर असर नहीं पडऩा चाहिए। कांग्रेस (संसद) सदस्य जिम हाइम्स और रॉन एस्टेस की तरफ से लिखे पत्र में कुल 26 डेमोक्रेट्स और 18 रिपब्लिकन सासंदों ने हस्ताक्षर किए हैं। कोलिशन फॉर जीएसपी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डैन एंथनी ने कहा कि भारत से जीएसपी दर्जा छीने जाने के बाद से ही अमेरिकी कंपनियां संसद को नौकरियों और आमदनी के नुकसान के बारे में बता रही हैं। एंथनी के मुताबिक, भारतीय निर्यातकों की हालत जीएसपी हटने के बाद भी बेहतर है, जबकि अमेरिकी कंपनियों को हर दिन 10 लाख डॉलर (7 करोड़ रुपए) नए टैरिफ के तौर पर चुकाने पड़ रहे हैं। नए डेटा के मुताबिक, अकेले जुलाई में ही अमेरिकी कंपनियों को 3 करोड़ डॉलर (214 करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को ह्यूस्टन में भारतीय समुदाय की एक रैली को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेता इस दौरान लंबे समय से विवाद का कारण बने व्यापारिक मुद्दों पर समझौते करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों की बीच भारत को जीएसपी कार्यक्रम में वापस शामिल करने पर भी बात होगी।
जीएसपी कार्यक्रम में शामिल विकासशील देशों को अमेरिका में आयात शुल्क से छूट मिलती है। इसके तहत भारत करीब 2000 उत्पाद अमेरिका भेजता है। इन उत्पादों पर अमेरिका में इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगती। भारत 2017 में जीएसपी कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश था।
 उसे अमेरिका में 5.7 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपए) के आयात पर शुल्क में छूट मिली थी।


अमेरिका ने भारत को जीएसपी से क्यों हटाया?
ट्रम्प का कहना था कि उन्हें भारत से यह भरोसा नहीं मिल पाया है कि वह अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा। अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है। वह जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है। अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी।  

मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में कश्मीर मुद्दे पर नहीं होगी बात

जयपुर टाइम्स
बीजिंग (एजेंसी)। संयुक्त राष्ट्र में चीन ने हाल ही में कश्मीर मुद्दे को उठाया था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत का यह मुख्य विषय नहीं होगा। यह बात एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने कही। आने वाले हफ्तों में जिनपिंग भारत के दौरे पर आने वाले हैं। दोनों वैश्विक नेताओं की मुलाकात की तारीखों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। मगर माना जा रहा है कि दोनों अक्तूबर में अनौपचारिक बैठक करेंगे। पिछले साल वुहान में मोदी और जिनपिंग ने अनौपचारिक बैठक की थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि पिछले साल की ही तरह दोनों नेता किसी विशिष्ट मुद्दे की बजाय बड़े रणनीतिक मामलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हुआ ने कहा, नेता व्यापक नजरिए वाले रणनीतिक मामलों पर चर्चा करेंगे। मुझे लगता है कि कश्मीर मसला एक ऐसा मुद्दा इतना बड़ा मसला नहीं है जिसपर की बात की जाएगी। ऐसा मेरा सोचना है। वह किसी भी विषय पर बात करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह मेरा मानना है। वुहान में पिछले साल अनौपचारिक मुलाकात एक ऐसे समय पर हुई थी जब 2017 में दोकलम में चीन और भारतीय सेना आमने-सामने आ गई थी। इस मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य करने में मदद की थी। दोनों देश दूसरी मुलाकात को लेकर आशान्वित हैं। जिससे सुरक्षा से लेकर व्यापार और निवेश तक के क्षेत्रों में रिश्तों को अधिक से अधिक मजबूत बनाया जा सके। 

ट्रम्प ने कहा- भारत-पाक के बीच तनाव कम हुआ, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से जल्द मिलूंगा

ट्रम्प अब तक चार बार कश्मीर मामले पर मध्यस्थता की पेशकश कर चुके हैं
ट्रम्प और मोदी 22 सितंबर को ह्यूस्टन में होने वाले 'हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की प्रतिबद्धता जताई। व्हाइट हाउस में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कश्मीर का नाम लिए बगैर कहा कि दोनों भारत-पाक के बीच तनाव कम हुआ है। ट्रम्प ने कहा कि वे जल्द ही दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात करेंगे। ट्रम्प 22 सितंबर को मोदी से मिलेंगे। दोनों नेता ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस दौरान पहली बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय समुदाय को संबोधित करेगा। ट्रम्प ने यह साफ नहीं किया कि वे पाक के प्रधानमंत्री इमरान खान से कब मिलेंगे। हालांकि, माना जा रहा है कि वे न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ही इमरान से बात कर सकते हैं। 

ट्रम्प हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल होंगे

डोनाल्ड ट्रम्प और नरेंद्र मोदी 22 सितंबर को ह्यूस्टन में होने वाले हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे
हाउडी मोदी इवेंट के लिए अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके
जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह साफ कर दिया कि वे 22 सितंबर को होने वाले ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल रहेंगे। यह पहला मौका होगा जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होगा। मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने से पहले हाउडी मोदी के अलावा अमेरिकी कंपनियों के सीईओ के साथ राउंडटेबल मीटिंग भी करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली और वॉशिंगटन के अफसर ट्रम्प के दोनों या कम से कम किसी एक इवेंट में पहुंचने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हाउडी मोदी इवेंट के लिए अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। ट्रम्प के हाउडी मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने पर मोदी ने ट्वीट किया, ''राष्ट्रपति ट्रम्प ह्यूस्टन में हमारे साथ रहेंगे। यह फैसला भारत-अमेरिका के रिश्ते की मजबूती दिखाता है। इससे यह भी पता चलता है कि भारतीय समुदाय का अमेरिकी समाज और वहां की अर्थव्यवस्था में खासा योगदान है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय ट्रम्प का शानदार स्वागत करेगा।

पाकिस्तान के आक्रामक रुख को लेकर एलओसी पर भारतीय सेना ने बढ़ाई मौजूदगी

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बढ़ते आक्रामक रुख और युद्ध के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष खतरों के मद्देनजर एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा 6 अगस्त को खत्म कर दिए जाने के बाद सीमापार से युद्ध की अप्रत्यक्ष धमकियां मिलती रही हैं। 
अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने एलओसी पर पाकिस्तान से सैन्य हमले के खतरे के मद्देनजर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। इससे पहले, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नियंत्रण रेखा पर भारत की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए घाटी का दौरा किया था। सेना ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह में, पाकिस्तान ने अपने इलाके में एलओसी से 30 किलोमीटर दूर एक ब्रिगेड-साइज फौज को भेजा था। 
पाकिस्तान में पीओके के सामने बाग और कोटली सेक्टर में लगभग 2,000 जवानों को तैनात किया गया है। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम उल्लंघन को भी बढ़ाया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने जम्मू एवं कश्मीर के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर भारत के खिलाफ आक्रामक रुख रखा है। पाकिस्तान कश्मीर पर अपनी बयानबाजी में भारत के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की पूरी कोशिश कर रहा है। 6 अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर पर ऐतिहासिक फैसले के एक दिन बाद, इमरान खान ने पाकिस्तान संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत के साथ युद्ध होने की संभावना जताई थी। 

इजरायल से स्पाइस-2000 बमों की पहली खेप मिली

स्पाइस-2000 को 'बिल्डिंग ब्लास्टर के नाम से भी जाना जाता है
वायुसेना ने इसे हासिल करने के लिए जून में इजरायल से समझौता किया था
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना ने बालाकोट एयर स्ट्राइक में सफलतापूर्वक इस्तेमाल की गई 'बिल्डिंग ब्लास्टर के नाम से प्रसिद्ध स्पाइस-2000 बमों की पहली खेप हासिल कर ली है। वायुसेना सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि इजरायली कंपनी ने भारत को स्पाइस-2000 बमों की डिलीवरी शुरू कर दी है और हाल ही में इसकी पहली खेप मिली है। उन्होंने बताया कि यह बम मिराज-2000 फाइटर एयरक्राफ्ट के घरेलू बेस ग्वालियर को हासिल हुआ है क्योंकि यही एयरक्राफ्ट इजरायली बमों को फायर करने में सक्षम है। 
भारतीय वायुसेना ने इजरायल के साथ मार्क 84 वारहेड और बमों को हासिल करने के लिए 250 करोड़ रु. के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसमें बिल्डिंग को पूरी तरह ध्वस्त करने की क्षमता है।

अक्टूबर में भारत आएंगी शेख हसीना

जयपुर टाइम्स
ढाका (एजेंसी)। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अक्टूबर में भारत दौरे पर आएंगी। हसीना ने तीस्ता जल बंटवारा संधि सहित विभिन्न अनसुलझे मुद्दों पर भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त करने की उम्मीद जताई है।हसीना ने बुधवार को बांग्लादेश की संसद इसकी जानकारी देते हुए कहा हमे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच इस यात्रा पर दोनों देशों के बीच अनसुलझे मुद्दों जल्द ही सुलझा लिया  जाएगा। मेरी भारत यात्रा से पहले उपरोक्त मुद्दों पर हमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। शेख हसीना 3-6 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक मंच के भारतीय आर्थिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 3-6 अक्टूबर के लिए भारत आने वाले हैं। शेख हसीना 3-6 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक मंच के भारतीय आर्थिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 3-6 अक्टूबर के लिए भारत आने वाले हैं। इस दौरान हसीना और उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच 5 अक्टूबर को द्विपक्षीय बैठक होगी। हसीना ने यह भी कहा कि वह अपनी भारत यात्रा के दौरान तीस्ता समेत दोनों देशों के बीच जल बंटवारे के मुद्दों पर मोदी से बात करेंगी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का भारत के साथ बहुत ही स्वस्थ संबंध है। दोनों देशों के लिए आपसी सहयोग और विकास के नए क्षेत्रों में नए दरवाजे खुले हैं। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश और भारत पहले ही सुरक्षा, व्यापार, बिजली, ऊर्जा, संचार, विकास सहायता, पर्यावरण और शिक्षा समेत अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।

पीएम मोदी ने दिया था आश्वासन
इसके अलावा, समुद्री रास्ते से व्यापार , परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग, एयरोस्पेस अनुसंधान और साइबर सुरक्षा सहित अन्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। तीस्ता जल समझौते के बारे में, उन्होंने कहा कि इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए उनकी सरकार के कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। इस मुद्दे को दोनों देशों के उच्चतम राजनीतिक स्तरों के समक्ष रखा जा रहा है। पीएम मोदी ने अपनी पिछली बांग्लादेश यात्रा के दौरान तीस्ता मुद्दे को संबंधित भारतीय राज्य सरकारों की सहायता से हल करने का आश्वासन दिया था। 

अमेरिका में बड़े ड्रग रैकेट का हुआ खुलासा

जयपुर टाइम्स
वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका की ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (डीईए) ने सबसे बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसके तार भारत से भी जुड़ रहे हैं। अंडरवल्र्ड के सरगना दाऊद इब्राहिम के एक पूर्व सहयोगी और कथित तौर पर भारत से संचालित एक दवा कंपनी इससे जुड़ी बताई जा रही है। इस कंपनी में मैंड्रेक्स और एफेड्रिन जैसे ड्रग का उत्पादन किया जाता था। बॉलीवुड की दो पूर्व अभिनेत्रियों के पतियों की संलिप्तता भी सामने आई है। 
न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अदालत में 25 जुलाई को डीईए की ओर से दायर जांच रिपोर्ट में डी-कंपनी के सहयोगी और अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के पति विक्की गोस्वामी और अभिनेत्री किम शर्मा के पूर्व पति अली पंजानी के नाम का उल्लेख है।
उन पर केन्या से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप हैं। ममता के पति और दाऊद के सहयोगी गोस्वामी को दुबई की अदालत ने ड्रग तस्करी के आरोप में सजा सुनाई थी। 2013 में जेल से रिहाई के बाद उसने केन्या से यह काम करना शुरू किया। जहां वह पंजानी के संपर्क में आया। फिर साझेदारी में इस धंधे को चलाने लगा। 

विक्रम से संपर्क में इसरो को मिला नासा का साथ, साझा करेगा लैंडिंग की तस्वीरें

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सहयोग मिल रहा है। नासा ने कहा है कि वह इसरो के साथ चंद्रमा के उस जगह की तस्वीरें साझा करेगा जहां सात सितंबर की अल सुबह विक्रम लैंडर ने हार्ड लैंडिंग की थी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि, नासा चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लैंडिग से पहले और बाद की तस्वीरों को इसरो के साथ साझा करेगा। इससे विक्रम को लेकर किए जा रहे अध्ययन में मदद मिलेगी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी भी विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जिसने 7 सितंबर से कोई संकेत प्रेषित नहीं किया है। नासा का डीप स्पेस नेटवर्क विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने की उम्मीद में रेडियो सिग्नल भेज रहा है। इसरो भी लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए बंगलूरू के पास स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क के एंटेना का उपयोग कर रहा है। नासा ने चांद की सतह पर गतिहीन पड़े विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए उसे हैलो का संदेश भेजा है। अपने डीप स्पेस ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क के जरिए नासा के जेट प्रोपल्सन लैबोरेटरी (जेपीएल) ने लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए विक्रम को एक रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है। नासा के एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की। विक्रम से संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। 14 पृथ्वी दिवस के बाद 20-21 सितंबर को जब चंद्रमा पर रात होगी तब विक्रम से दोबारा संपर्क स्थापित करने की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी।  विक्रम से संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। 14 पृथ्वी दिवस के बाद 20-21 सितंबर को जब चंद्रमा पर रात होगी तब विक्रम से दोबारा संपर्क स्थापित करने की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी।  लैंडर को सिग्नल भेजने पर चांद रेडियो रिफ्लेक्टर के तौर पर कार्य करता है और उस सिग्नल के एक छोटे से हिस्से को वापस धरती पर भेजता है जिसे 8,00,000 किलोमीटर की यात्रा के बाद डिटेक्ट किया जा सकता है। 

अमेरिका को हांगकांग की दो टूक, कहा- हमारे मामले में न दे दखल

जयपुर टाइम्स
हांगकांग (एजेंसी)। हांगकांग की नेता कैरी लैम की ओर से अमेरिका के लिए चेतावनी जारी की गई जिसमें देश में चल रहे लोकतंत्र समर्थक गतिविधियों को समर्थन देकर हस्तक्षेप न करने को कहा गया है। उन्होंने अमेरिका को चेताते हुए कहा कि देश में जारी लोकतंत्र समर्थित प्रदर्शनों पर उनकी सरकार की कार्रवाई में वाशिंगटन दखल न दे। पिछले 14 हफ्ते से अधिक समय से हजारों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जो 1997 में ब्रिटेन द्वारा चीन के हाथों हांगकांग को सौंपे जाने के बाद से अब तक की यह सबसे बड़ी चुनौती है। रविवार को प्रदर्शनकारी फिर से सड़क पर उतर आए और अमेरिकी कंसुलेट तक मार्च किया और मदद की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कंसुलेट के पास पहुंच हांगकांग को आजाद कराने व चीन को रोकने के नारे लगाए। बता दें कि अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने हांगकांग के आंदोलन से निपटने में चीन से संयम बरतने की अपील की। वह इन दिनों पेरिस की यात्रा पर हैं। अगस्त में राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को हांगकांग की समस्या मानवीय तरीके से सुलझाने की सलाह दी थी। बता दें कि हाल में ही अमेरिका ने चीन से हांगकांग में जारी विरोध प्रदर्शनों से निपटने में संयम की अपील की। जिसपर चीन ने इसे अपना आंतरिक मामले बताते हुए मध्यस्थता की संभावना से इंकार कर दिया और हांगकांग में जारी अशांति के लिए अमेरिका और ब्रिटेन को जिम्मेदार बताया।
सन 1997 तक ब्रिटिश उपनिवेश रहा हांगकांग इस शर्त के साथ चीन को दिया गया था कि नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार बने रहेंगे। चीन ने हांगकांग को स्वायत्तता दी। लेकिन धीरे नागरिक अधिकारों में धीरे-धीरे कटौती शुरू कर दी। इससे हांगकांग की जनता को स्वायत्ता पूरी तरह खत्म होने का खतरा महसूस हुआ और तभी लोकतंत्र की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। वाशिंगटन ने बीजिंग के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहा है और चीन ने अपने इस दावे को सही ठहराने के लिए सबूत भी पेश किए। इन सबूतों में अमेरिकी राजनीतिज्ञों के समर्थन देने वाले बयान हैं। इससे इतर ब्रिटेन में 150 से अधिक सांसदों ने विदेश सचिव डॉमिनिक राब से हांगकांग की जनता के लिए द्वितीय नागरिकता और निवासियों को रहने का अधिकार देने की अपील की। इससे चीन को यह संदेश मिला कि हांगकांग की जनता अकेली नहीं है।