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राष्ट्रपति ने नारेबाजी का वीडियो ट्वीट किया, बाद में डिलीट किया

सीनेट में अकेले अश्वेत रिपब्लिकन टिम स्कॉट ने सीएनएन से कहा- यह वीडियो अपमानजनक था
ट्रम्प के प्रवक्ता ने कहा- राष्ट्रपति ने वीडियो में समर्थकों का उत्साह देखकर वीडियो ट्वीट किया था
जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन(एजेंसी)। अमेरिका समेत दुनियाभर के कई देशों में नस्लवाद का मुद्दा गरमाया हुआ है। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद से ही अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के समर्थकों ने फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान नस्लभेदी नारेबाजी की। उन्होंने 'व्हाइट पॉवरÓ के नारे भी लगाए। खास बात ये है कि ट्रम्प ने मामले की गंभीरता समझे बिना इसका वीडियो ट्वीट किया। इतना ही नहीं उन्होंने नस्लभेदी नारेबाजी करने वाले समर्थकों का शुक्रिया भी अदा किया। हालांकि, बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया गया। यह वीडियो फ्लोरिडा के द विलेजेज में की गई रैली का है। ट्रम्प ने ट्वीट में समर्थकों को धन्यवाद जताते हुए लिखा था- द विलेजेज के महान लोगों का शुक्रिया। अमेरिकी सीनेट के अकेले अश्वेत रिपब्लिकन सांसद टिम स्कॉट ने रविवार को इंटरव्यू में कहा- यह वीडियो अपमानजनक था। उन्होंने राष्ट्रपति से ट्वीट को हटाने के लिए कहा था। 

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जुड डीरे ने कहा- राष्ट्रपति ने वीडियो में नारेबाजी को नहीं सुना, उन्होंने बस अपने समर्थकों के जबरदस्त उत्साह को देखा था।
व्हाइट सुपरमेसी का समर्थन नहीं करेंगे: स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री एलेक्स अजार ने कहा-  राष्ट्रपति, प्रशासन और न ही मैं व्हाइट सुपरमेसी (गोरों का वर्चस्व) का समर्थन करेंगे। हाल में फ्लॉयड की मौत के बाद हो रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने ट्वीट किया था- जब लूटपाट शुरू होती है तो शूटिंग भी शुरू होती है।
ट्रम्प पर पहले भी आरोप लगते रहे
राष्ट्रपति ट्रम्प पर पहले भी नस्लभेदी कंटेट शेयर करने को लेकर आरोप लगते रहे हैं। 2017 में उन्होंने तीन मुस्लिम विरोधी वीडियो रीट्वीट किए थे। ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे को फटकार लगाई थी। साथ ही कहा था कि वे मुझ पर ध्यान न दें। ब्रिटेन में पनप रहे इस्लामिक आतंकवाद पर ध्यान दें।

नेपाल के प्रधानमंत्री का आरोप- मुझे सत्ता से हटाना चाहता है भारत, इसके लिए दिल्ली और काठमांडू में साजिश रची जा रही

जयपुर टाइम्स
काठमांडू(एजेेंसी)। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आरोप लगाया है कि भारत उनकी सरकार गिराना चाहता है। ओली के मुताबिक, इसके लिए दिल्ली और काठमांडू में साजिश रची जा रही है। ओली के आरोप ऐसे वक्त सामने आए हैं, जब सत्ता पर काबिज अलायंस में उनके चीन प्रेम की कड़ी आलोचना हो रही है। विरोधियों के ओली पर दो आरोप हैं। पहला- सरकार ने नेपाल की जमीन का बड़ा हिस्सा चीन को सौंप दिया। दूसरा- कोविड-19 से निपटने में सरकार नाकाम रही। खास बात ये है कि ओली के आरोपों को चंद मिनट बाद ही उन्हें एक और झटका लगा। उनकी ही पार्टी की सांसद राम कुमारी झनकारी ने कहा- प्रधानमंत्री भारत पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। वो सिर्फ अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाना चाहते हैं। ओली को चीन का कट्टर समर्थक माना जाता है। पार्टी के दूसरे धड़े के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड उनका कई मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं। पिछले बुधवार से शनिवार तक पार्टी की मीटिंग चली। इसमें प्रधानमंत्री सिर्फ एक दिन शामिल हुए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ वारंट

अमेरिका ने इस साल जनवरी में बगदाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला करवाया था
इस हमले में ईरान की कुद्स सेना के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी
जयपुर टाइम्स
तेहरान(एजेंसी)। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। ट्रम्प को गिरफ्तार करने के लिए ईरान ने इंटरपोल से मदद भी मांगी है। ईरान के इस कदम की वजह जनवरी में बगदाद में हुए ड्रोन अटैक को बताया जा रहा है, जिसमें ईरान की कुद्स सेना के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। तेहरान के प्रॉसिक्यूटर अली अलकासिमेहर ने सोमवार को कहा कि 3 जनवरी को हुए इस ड्रोन अटैक में राष्ट्रपति ट्रम्प के अलावा ईरान के ही 30 और लोग शामिल थे। इन सभी लोगों पर हत्या और आतंक फैलाने का आरोप है। ईरान ट्रम्प को गिरफ्तार करने की अपनी कोशिशें जारी रखेगा। फिर भले ही ट्रम्प राष्ट्रपति रहें या न रहें
इंटरपोल ने कोई जवाब नहीं दिया
लियॉन और फ्रांस में मौजूद इंटरपोल ने इस मामले पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अलकासिमेहर ने यह भी बताया कि ईरान ने इंटरपोल से ट्रम्प समेत बाकी आरोपियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी करने की भी अपील की थी। यह इंटरपोल के द्वारा जारी किए जाने वाला सबसे बड़ा नोटिस होता है। इसके तहत आरोपी की लोकेशन का पता करके उसे गिरफ्तार करना होता है।
ट्रम्प ने सुलेमानी पर आतंकी साजिश का आरोप लगाया था
ईरान में ड्रोन हमला अमेरिका ने करवाया था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था, "कासिम सुलेमानी की आतंकी साजिशें दिल्ली से लेकर लंदन तक फैली थीं। अगर कहीं भी अमेरिकियों को डराया गया, तो हमने टारगेट लिस्ट पहले ही तैयार कर ली है। हम जरूरत के हिसाब से हर तरह की कार्रवाई के लिए तैयार हैं।"
खामनेई ने बदला लेने की बात कही थी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई ने कहा कि जनरल सुलेमानी की मौत का हम बदला लेंगे। खामनेई ने कहा था कि सुलेमानी की मौत ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ विरोध को दोगुना कर दिया है। जनरल सुलेमानी की मौत ने अमेरिका से बदला लेने के लिए हमें अधिक मजबूत बना दिया है। 

सुलेमानी की जगह डिप्टी ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल घानी को नया कमांडर नियुक्त किया गया था। 
जनरल कासिम सुलेमानी 1998 में ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की स्पेशलिस्ट एजेंट्स की टुकड़ी 'कुद्स सेनाÓ के प्रमुख बने थे। अमेरिकी खुफिया ?विभाग के लीक दस्तावेजों के मुताबिक, कासिम पर आरोप लगा कि वे सीरिया और इराक में स्थानीय लड़ाकों को अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ युद्ध की तकनीक सिखा रहे हैं।

विकीलीक्स के मुताबिक, 2009 में अमेरिकी अफसरों ने बगदाद में अपने ठिकानों पर हमले रोकने के लिए जनरल कासिम से संपर्क करने की बात कही थी। तब कासिम ने इन हमलों में हाथ होने की बात नकारी थी।

कैलिफोर्निया के वॉलमार्ट में शूटिंग, 2 की जान गई और 4 घायल हुए

जयपुर टाइम्स
कैलिफोर्निया(एजेंसी)। अमेरिका में कैलिफोर्निया के वॉलमार्ट बिक्री केंद्र में शनिवार को हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। घटना में चार लोग घायल हुए हैं। न्यूयार्क टाइम्स ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। वॉलमार्ट वितरण केंद्र उत्तर कैलिफोर्निया से लगभग 120 मील (करीब 193 किमी) दूर स्थित रेड ब्लफ में है। बताया जाता है कि हमलावर को सीने में गोली मारी गई है। रेड ब्लफ डेली न्यूज पेपर के मुताबिक, शूटिंग कर्मचारियों की शिफ्ट बदलने के दौरान हुई। हमलावार वितरण केंद्र में घुसा और गोलीबारी शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना दोपहर 3 बजे के बाद शुरू हुई। लगभग 3:30 बजे पुलिस को इसकी को इसकी जानकारी मिली। घटना के समय वॉलमार्ट में लगभग 200 स्टाफ थे। इनमें से कुछ ने स्टोर रूम में खुद को बंद कर लिया था।
अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध ने अपने वाहन से उस जगह टक्कर मारी जहां से कर्मचारी वॉलमार्ट में घुसते हैं। इसके बाद वाहन में आग लग गई और हमलावर ने स्टाफ पर फायरिंग शुरू कर दी। इससे पहले 21 जून को मिनेपोलिस में हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि 11 घायल हुए थे। वहीं, न्यूयॉर्क में 20 जून को एक जश्न के दौरान हुई फायरिंग में 9 लोग घायल हो गए। इस दौरान 17 साल के एक बच्चे के सिर में गोली लगी थी। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में 2019 में अन्य वर्षों की तुलना में सबसे ज्यादा मास शूटिंग की घटनाएं हुईं। मास शूटिंग वैसी घटनाओं को कहा गया है कि जिनमें चार या ज्यादा लोगों की जान गई हो। 

एसोसिएटेड प्रेस (एपी), यूएसए टुडे और नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के मुताबिक, 2019 में 41 मास शूटिंग की घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 211 लोगों की मौत हुई है।
दुनिया की कुल सिविलियन गन में 48त्न अमेरिकियों के पास
अमेरिका में करीब 31 करो? हथियार हैं, 66त्न लोगों के पास एक से ज्यादा बंदूक हैं। दुनियाभर की कुल सिविलियन गन में से 48त्न सिर्फ अमेरिकियों के पास है। 89त्न अमेरिकी लोग अपने पास बंदूक रखते हैं। इनमें से 66त्न लोग एक से ज्यादा बंदूक रखते हैं। अमेरिका में बंदूक बनाने वाली इंडस्ट्री का सालाना रेवेन्यू 91 हजार करो? रुपए का है। 2.65 लाख लोग इस कारोबार से जु?े हुए हैं। अमेरिकी इकोनॉमी में हथियार की बिक्री से 90 हजार करो? रुपए आते हैं। अमेरिका में हर साल एक करो? से ज्यादा बंदूकें यहां बनती हैं।

अमेरिकी सैनिकों पर इनाम रखने वाली रिपोर्ट को लेकर बिडेन ने ट्रम्प की निंदा की

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन(एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन ने एक रिपोर्ट को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि अगर यह रिपोर्ट सच है तो इसमें कमांडर इन चीफ और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की रक्षा करने में उनकी (ट्रम्प) नाकामी के बारे में हैरान करने वाले खुलासे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने कुछ महीनों पहले पता लगाया था कि रूस की खुफिया सैन्य इकाई ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की हत्या के लिए तालिबान से जुड़े आतंकियों को गुप्त रूप से इनाम देने की पेशकश की थी। रूस ने आरोपों का खंडन किया रूस ने इन आरोपों का खंडन किया है। रूस ने शनिवार को ट्वीट किया- यह आरोप बेबुनियाद और अस्पष्ट हैं। ट्वीट में कहा गया है कि इन आरोपों से अमेरिका के वॉशिंगटन और ब्रिटेन के लंदन स्थित रूसी दूतावासों के कर्मचारियों का जीवन प्रत्यक्ष खतरे में आ गए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने भी आरोपों को निराधार बताया। मुजाहिद ने एनवाईटी से कहा कि फरवरी में सेना की वापसी करने और प्रतिबंध हटाए जाने पर सहमति बनने के बाद तालिबान ने अमेरिका और नाटो सेना पर हमला करना बंद कर दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूसियों ने पिछले साल ऐसे समय में हमले के लिए पेशकश की थी, जब अमेरिका और तालिबान लंबे समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे थे। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने भी इस खबर की पुष्टि की है।
ट्रम्प ने कोई कार्रवाई नहीं की: बिडेन
बिडेन ने वर्चुअल टाउन हॉल में शनिवार को कहा कि अगर एनवाईटी की रिपोर्ट सही है तो यह मामला चौंकाने वाला है। मैं यह पूछना चाहता हूं कि अमेरिकी सेना के कमांडर इन चीफ राष्ट्रपति ट्रम्प पहले से यह सब जानते थे और उन्होंने क्यों नहीं कुछ किया। बिडेन ने कहा- अगर मैं राष्ट्रपति बनता हूं तो इस बारे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का सामना किया जाएगा। हम रूस पर गंभीर प्रतिबंध लगाएंगे। हालांकि, इस पर व्हाइट हाउस ने बताया है कि ट्रम्प और उपराष्ट्रपति माइक पेंस को इस खुफिया सूचना की जानकारी नहीं दी गई थी। एनवाईटी में शुक्रवार को प्रकाशित किए गए आर्टिकल में सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा गया था कि राष्ट्रपति को अमेरिकी सैनिकों को मारे जाने पर इनाम देने वाली जानकारी के बारे में जानकारी दी गई थी। इसके बाद भी वे कार्रवाई करने में नाकाम रहे थे। एनवाईटी ने तालिबान के एक प्रवक्ता के हवाले से यह जानकारी दी थी। इसमें बताया गया था कि उसके लड़ाकों और रूसी खुफिया एजेंसी के बीच ऐसी डील हुई थी। न्यूज पेपर ने बताया कि खुफिया एजेंसी के अज्ञात अधिकारियों के हवाले से उन्हें जानकारी मिली कि इसके बारे में ट्रम्प को बताया गया था। मार्च में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल में इस पर चर्चा भी की गई थी। पूर्व उपराष्ट्रपति बिडेन ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। वे (ट्रम्प) न केवल रूस पर प्रतिबंध लगाने में नाकाम रहे।

बल्कि पुतिन के सामने खुद को हमेशा झुकाए रखा। उनका यह अभियान अब तक जारी है। 

नेपाल ने पहली बार भारत से लगी सीमा पर सेना उतारी; हमारी जमीन कब्जाई, नदी का बहाव रोक दिया

भास्कर की दो टीमों ने बिहार- नेपाल की 729 किमी लंबी सीमा की 7 दिन तक पडताल की
बिहार में नेपाल कभी दूसरा देश नहीं माना गया, पर अब आवाजाही पर बंदिशें लगीं
जयपुर टाइम्स
बिहार(एजेंसी)। सीमा पर नेपाल भी चीन जैसी हरकतें करने लगा है। बिहार के वाल्मीकिनगर में सुस्ता क्षेत्र पर नेपाल ने पूरी तरह कब्जा कर लिया है। भारतीयों के यहां जाने पर भी रोक लगा दी है। इलाके में 7,100 एकड जमीन पर नेपाल के साथ पुराना विवाद है। अब उसने सुस्ता के साथ लगे नरसही जंगल पर भी दावा ठोक दिया है। नेपाल आर्म्ड फोर्स ने यहां कैंप बना लिया है। त्रिवेणी घाट के पास नदी किनारे जंगल में भी नेपाल ने अपना झंडा लगा दिया। भारत-चीन के बीच तनाव बढऩे के दौरान नेपाल ने पहली बार बिहार सीमा पर सेना लगाई है। कोरोना क्वारेंटाइन सेंटर के नाम पर बने कैंप सेना के ठिकाने हैं। सुपौल के कुनौली बॉर्डर के सामने नेपाल के राज बिराज भंसार ऑफिस के पास सेना की आवाजाही कई बार देखी गई। मधुबनी के मधवापुर से सटे मटिहानी की तरफ भी नेपाली सेना की गतिविधियां देखी जा रही हैं। हालांकि, रक्सौल से सटे महदेवा गांव के पास तैनात नेपाली जवान ने कहा कि यह कुछ दिन की बात है। जल्द ही पहले जैसी स्थिति होगी।


वहीं, स्थानीय लोग कहते हैं कि भारत की ओर से एसएसबी के नरम रुख का नेपाल फायदा उठा रहा है। बता दें कि नरसही जंगल गंडक नदी के उस पार सुस्ता के समानांतर है। जंगल की 14,500 एक? जमीन शुरू से भारत के अधिकार में ही रही है। अब यहां नेपाल ने गन्ने की खेती कर ली है।

भारत-चीन के रिश्ते बिगड़े तो दोनों को होगा घाटा

चीन के हाथ से एशिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार निकल जाएगा, भारत में महंगाई बढ़ेगी, नौकरियां भी जा सकती हैं

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली(एजेंसी)। गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झडप के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। सोशल मीडिया पर चीनी सामान के बहिष्कार को लेकर कैंपेन शुरू हो गए हैं। देश के अलग- अलग हिस्सों से भी चीनी सामानों के बहिष्कार और विरोध की खबरें आई हैं। कई नेता और नामचीन हस्तियां भी चीनी प्रोडक्ट्स का विरोध कर चुकी हैं। 
हाल ही में रेलवे ने चीन की कंपनी से 471 करोड़ रुपए का करार रद्द कर दिया। इसके साथ ही भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने 4जी संसाधनों को अपग्रेड करने के लिए चीन के प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह भी कहा जा रहा है कि भारत सरकार चीन से आयात किए जाने वाले कई प्रोडक्ट्स पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा सकती है। आने वाले दिनों में चीन के साथ हुए और भी करार रद्द किए जा सकते हैं। भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते प्रभावित होते हैं तो इसका असर भारतीयों की नौकरियों पर भी होगा। चीन की कंपनियां भारत में बडे लेवल पर रोजगार मुहैया कराती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2 लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है।


 
इंवेस्ट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 800 चीनी कंपनियां हैं। जिसमें ओप्पो, वीवो, फोसुन इंटरनेशनल, हायर, एसएआईसी और मीडिया प्रमुख हैं। वहीं अडानी ग्लोबल लिमिटेड, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, बीईएमएल लिमिटेड, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और अरबिंद फार्मा लिमिटेड जैसी भारतीय कंपनियां चीन में हैं। 
चीन दे रहा धमकी

चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स बार-बार यह धमकी दे रहा है कि अगर भारत के लोग चीन के सामानों का बहिष्कार करते हैं तो इसका भारत को नुकसान उठाना प? सकता है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत इस समय कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहा है। आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। ऐसे में चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते में अगर दरार प?ती है तो इसका खामियाजा भारत के लोगों को उठाना प?ेगा।
उसने भारत की फिल्मों को लेकर भी धमकी दी है। उसने एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, इंडिया की टॉप-10 फिल्मों ने चीन में लगभग 3 हजार 700 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। दंगल, हिंदी मीडियम, सीक्रेट सुपरस्टार जैसी भारतीय फिल्मों को चीन में बेहतर रिस्पॉन्स मिला है।
लॉकडाउन के बाद सुपर-30 भी चीन के सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अगर सोशल मीडिया पर चीनी सामानों का बहिष्कार किया जाता है तो चीन में भी भारतीय फिल्मों को लेकर विरोध के कदम उठाए जा सकते हैं। 
भारत-चीन टूरिज्म
टूरिज्म के क्षेत्र में भी भारत और चीन के बीच ब?े लेवल पर मार्केट है। साल 2018 में चीन में आने वाले कुल यात्रियों में से तीन फीसदी भारतीय रहे। अगर चीन से भारत आने वाले यात्रियों की संख्या देखें तो यह काफी कम है। 2017 में चीन में भारत के करीब 8 लाख पर्यटक गए, जबकि टूरिज्म मिनिस्ट्री के मुताबिक 2018 में लगभग 2.8 लाख भारतीय चीन गए थे। अगर दोनों देशों के बीच रिश्ते बिग?ते हैं तो इस सेक्टर में भी असर देखने को मिलेगा। हालांकि, यहां चीन को अधिक नुकसान उठाना होगा।
सोलर एनर्जी के क्षेत्र में 78 फीसदी हिस्सेदारी चीन की

सोलर एनर्जी के क्षेत्र में भी चीन भारत में बड़े लेवर पर हिस्सेदार है। देश की कई बड़ी कंपनियों के थर्मल पावर यूनिट्स में उसके उपकरण लगे हुए हैं।
भारत के सोलर एनर्जी उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 78 फीसदी है। इतना ही नहीं भारत के थर्मल और कोल इंडस्ट्री में भी चीन के ही उपकरण लगे हुए हैं। ईएसएसएआर पावर, अडानी पावर, रिलायंस और जीएमआर एनर्जी के थर्मल पावर यूनिट्स में भी चीनी उपकरण लगे हुए हैं। 
हेल्थ सेक्टर्स में प? सकता है असर
भारत जरूरी दवाइयों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है। भारत बल्क ड्रग और उनके इंग्रीडिएंट्स का 70त्न चीन से आयात करता है। दवा बनाने के लिए एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रीडिएंट्स) और कुछ जरूरी दवाओं के लिए भारत, चीनी बाजार पर काफी हद तक निर्भर है। भारत मेडिकल उपकरणों का 80त्न आयात करता है और इसमें चीन की अहम हिस्सेदारी है। 2018-19 में भारत ने कुल 3.56 अरब डॉलर यानी 26 हजार 700 करोड़ रुपए का कच्चा माल खरीदा था। इसमें से 2.40 अरब डॉलर यानी 18 हजार करोड़ रुपए का माल चीन से आया था।
दुनिया में सबसे मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टेलीविजन सेट की मैनुफैक्चरिंग चीन करता है। चीन ने 2018 में 90त्न सेल फोन (18 हजार करोड़ ), 90त्न कंप्यूटर (30 करोड़) और 70 त्न यानी लगभग 20 करोड़ टेलीविजन डिवाइस का उत्पादन किया था। भारत लगभग इसी मात्रा में इन सामानों की खरीद करता है। 

अमेरिका के बाद भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर
चीन 13.6 ट्रिलियन डॉलर (1033 लाख करोड रु.) जीडीपी के साथ एशिया का सबसे बडा और दुनिया का दूसरी सबसे बडा अर्थव्यवस्था वाला देश है। वहीं भारत 2.7 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 200 लाख करोड़ रुपए) के साथ एशिया में तीसरे नंबर पर है। इंडस्ट्रियल कंपोनेंट्स, कच्चे माल, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन, अमेरिका के बाद भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर है। चीन भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सबसे महत्वपूर्ण सोर्स है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार, साल 2015 और 2019 के बीच चीन से कुल 13 हजार करोड़ रुपए का एफडीआई आया। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल उपकरण, बुक प्रिंटिंग, सर्विसेज और इलेक्ट्रॉनिक्स ये टॉप-5 सेक्टर्स रहे जिनमें चीन ने सबसे ज्यादा निवेश किया। 

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने कहा- लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने में पाक नाकाम, ग्रे लिस्ट में ही रहेगा

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन(एजेंसी)। ग्लोबल टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने कहा है कि पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की फंडिंग रोकने में नाकाम रहा है। एफएटीएफ ने फैसला किया है कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाए रखा जाएगा।
इससे पहले बुधवार को एक अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने आतंकियों की फंडिंग रोकने का दिखावा करते हुए बहुत मामूली कदम उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि भारत में पुलवामा अटैक के बाद पाकिस्तान घबरा गया और भारत में बड़े हमले करवाने से बच रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग की ओर से आतंकवाद पर सालाना रिपोर्ट-2019 जारी की गई है। इसमें बताया गया कि पाकिस्तान ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीफ) के प्लान पर कुछ कदम तो बढाए, लेकिन सभी वादों को पूरा नहीं किया। पाकिस्तान ने कुछ आतंकी समूहों के खिलाफ मामूली कार्रवाई की, इसमें लश्कर ए-तैयबा (एलईटी) का संस्थापक हाफिज सईद भी है। पाकिस्तान अभी भी क्षेत्रीय आतंकियों का अड्डा बना हुआ है। पाकिस्तान ने दूसरे आतंकियों जैसे- जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और 2008 में मुंबई अटैक के मास्टरमाइंड साजिद मीर पर कोई कार्रवाई नहीं की। यूएन ने भी मसूद को आतंकी घोषित किया हुआ है।


 पाकिस्तान में अफगानिस्तान को टार्गेट करने वाले अफगान तालिबानी, हक्कानी नेटवर्क और भारत को टार्गेट करने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आंतकी संगठन हैं। ये आतंकी संगठन यहीं से अपना नेटवर्क चलाते हैं। 
एफएटीएफ के एक्शन प्लान पर कोई कार्रवाई नहीं की
जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। इसके साथ ही आतंकियों की फंडिंग रोकने के लिए पाकिस्तान को एक एक्शन प्लान दिया था। सितंबर 2019 तक एक्शन प्लान पर काम करना था। अक्टूबर 2019 में एफएटीएफ ने जब दोबारा समीक्षा की तो गंभीर खामियां सामने आई थीं। एफएटीएफ ने ब्लैकलिस्ट में डालने की चेतावनी देते हुए फरवरी 2020 तक का और समय दिया था। 
अफगानिस्तान में भी हालात बिगा? रहा
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया में भी कोई योगदान नहीं दिया। इसके बजाय उसने तालिबान को हिंसा के लिए उकसाकर मामले को बिगा?ा ही है। पाकिस्तान अफगानिस्तान पर अटैक करने वाले हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान की पनाहगाह है।

नेपाल के तीन सांसदों की मांग- चीन ने हमारे 4 जिलों की 158 एकड़ जमीन पर कब्जा किया, प्रधानमंत्री इसे वापस दिलाएं

चीन ने नेपाल के हुमला, सिंधुपालचौक, गोरखा और रसुवा जिलों की कई हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया है
चीन ने गोरखा जिले में सीमा पर पिलर नंबर 35 शिफ्ट कर दिया, इससे रुई गुवान गांव उनके कब्जे में चला गया
जयपुर टाइम्स
काठमांडू(एजेंसी)। नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन का कब्जा सामने आने के बाद इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के तीन सांसदों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चि_ी लिखकर चीन से जमीन वापस लेने की मांग की है। सांसदों के मुताबिक, चीन ने नेपाल के कई जिलों की 64 हेक्टेयर (करीब 158 एकड़) जमीन पर कब्जा कर लिया है। इनमें हुमला, सिंधुपालचौक, गोरखा और रसुवा जिले शामिल हैं। यह चि_ी प्रतिनिधि सभा के सचिव के जरिए प्रधानमंत्री तक पहुंचाई गई है। पूरा गांव अब चीन के कब्जे में
सांसदों ने कहा- चीन और नेपाल सीमा पर मौजूद पिलर नंबर 35 को चीन ने अपनी तरफ शिफ्ट कर लिया है। इससे गोरखा जिले का रुई गुवान गांव उनके कब्जे में चला गया। अब इस गांव के 72 परिवार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के नागरिक बताए जा रहे हैं। धारचूला जिले के 18 घरों पर भी चीन दावा कर रहा है।

उ.कोरिया की वेबसाइट से द.कोरिया के खिलाफ लिखे गए आर्टिकल हटाए गए, मिलिट्री एक्शन पर भी रोक लगाई

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, किम जोंग-उन ने यह नहीं बताया कि मिलिट्री एक्शन पर रोक क्यों लगाई गई
द.कोरिया के पूर्व अफसर ने कहा- उत्तर कोरिया ने मिलिट्री एक्शन टाला है, न कि कैंसिल की है
जयपुर टाइम्स
सियोल(एजेंसी)। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ मिलिट्री एक्शन पर रोक लगा दी है। इसके कुछ घंटों बाद ही उ.कोरिया की वेबसाइटों से 12 से ज्यादा द.कोरिया के विरोध में लिखे आर्टिकल हटा दिए गए। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सेंट्रल मिलिट्री कमीशन की मीटिंग में किम जोंग उन ने घोषणा की कि वह अपनी सेना पर रोक जारी रखेगा। हालांकि, यह फैसला क्यों लिया गया, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के प्रवक्ता योह सांग-की ने कहा कि वे उत्तर कोरिया की रिपोर्ट पर करीब से नजर रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भी इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। वहीं, सियोल के फार इस्टर्न स्टडीज के विशेषज्ञ किम डोंग-यूब ने कहा कि हो सकता है कि उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया की ओर से किसी एक्शन के इंतजार में हो और अपने विरोधियों के प्रति नरम रूख अपनाने की बजाए खुद का पोजिशन मजबूत करने का एक तरीका हो। किम डोंग-यूब दक्षिण कोरिया की सेना में पूर्व अफसर रह चुके हैं। मीटिंग में वे भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि उत्तर कोरिया ने मिलिट्री एक्शन पर रोक लगाई है, रद्द नहीं किया है। उ.कोरिया से भाग कर गए लोगों का समूह किम जोंग-उन समेत वहां की सरकार की आलोचना वाले पर्चे गुब्बारों के जरिए यहां भेजता है। इन गुब्बारों को ज्यादा से ज्यादा लोग उठाएं इसलिए इनमें भोजन और कई चीजें भी होती हैं। इसका मकसद उत्तर कोरिया के लोगों में सत्ता के खिलाफ विद्रोह की भावना जगाना है। इन गुब्बारों के साथ भेजे जाने वाले पर्चे और भोजन के कारण दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। द. कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी योनहाप के मुताबिक, डीपीआरके टुडे और मेयर जैसे उत्तर कोरियाई सरकार के समर्थक न्यूज आउटलेट की वेबसाइटों से आर्टिकल और ओपिनियन हटा लिए गए हैं। उ.कोरिया से द.कोरिया गए समूह ने इस महीने की शुरुआत में डिमैटेरियलाइज्ड जोन (डीएमजेड) में उ.कोरिया विरोधी मैसेज साथ गुब्बारे उड़ाए थे।

मैक्सिको में 24 घंटे में 5वीं बार कांपी धरती: 7.4 तीव्रता के भूकंप से 5 की मौत

447 ऑफ्टरशॉक से हजारों लोग दहशत में, सुनामी का अलर्ट
जयपुर टाइम्स
मैक्सिको सिटी(एजेंसी)। मैक्सिको में मंगलवार को तेज भूकंप आने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 लोग घायल हैं। मैक्सिको सिटी, साउथ मैक्सिको और सेंट्रल मैक्सिको में 7.4 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। इसके तुरंत बाद यूएस सुनामी वॉर्निंग सिस्टम ने राज्य में सुनामी की चेतावनी भी जारी की है। यहां करीब 200 घरों को नुकसान पहुंचा है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 24 घंटे में 447 से ज्यादा आफ्टरशॉक आए हैं। इससे लोग दहशत में हैं। यूएस जियोलॉजिक सर्वे के मुताबिक भूकंप का केंद्र ओक्साका स्टेट से 12 किलोमीटर दूर था। वहां के समय के मुताबिक भूकंप सुबह 10.29 बजे आया। देश की सीस्मोलॉजिकल सर्विस ने ओक्साका तट पर चल रही सुनामी को लेकर चेतावनी देते हुए निवासियों को समुद्र तट से दूर जाने को कहा है।
2017 में भूकंप से गई थी 700 से ज्यादा लोगों की जान
मैक्सिको में इसके पहले 2017 में दो बार भूकंप आया था। 8 सितंबर को 8.1 तीव्रता से भूकंप के झटके आए थे। इसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। दूसरी बार 20 सितंबर को 7.1 की तीव्रता से भूकंप आया। इसमें 500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। चारों तरफ तबाही का मंजर देखने को मिला था। 

भूकंप के झटके साउथ और सेंट्रल मैक्सिको में 100 किलोमीटर के दायरे में महसूस किए गए।
7 दिनों में 20वीं बार लगे झटके
मेक्सिको कई फॉल्ट लाइंस के ऊपर स्थित है। पिछले 35 सालों में देश के दक्षिणी और मध्य भागों में कई शक्तिशाली भूकंप आए। वहीं, अर्थक्वेक ट्रैक डॉट कॉम के मुताबिक मैक्सिको में पिछले 7 दिनों में 20 बार भूकंप आ चुका है। हालांकि सबसे ज्यादा तीव्रता का भूकंप मंगलवार को आया। पिछले 24 घंटे में ही 4 बार झटके महसूस किए जा चुके हैं। आंक?ों के मुताबिक इस साल यहां 99 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। 

भारतीय सिख के रेस्टोरेंट में तोडफोड, दीवारों पर नफरत फैलाने वाले नारे लिखे

न्यू मैक्सिको शहर के सैंटा फे सिटी में कुछ लोगों ने इंडिया पैलेस रेस्टोरेंट में अचानक घुसकर तोडफोड की
जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन(एजेंसी)। न्यू मैक्सिको शहर की सैंटा फे सिटी में भारतीय के खिलाफ हेट क्राइम का मामला सामने आया। मंगलवार को यहां कुछ लोग इंडिया पैलेस रेस्टोरेंट में घुसे। तोडफ़ोड़ की। भगवान की मूर्ति तोड़ दी। बाद में दीवार पर नफरत फैलाने वाले नारे लिख दिए। 
रेस्टोरेंट के मालिक बलजीत सिंह के मुताबिक, किचेन और सर्विंग एरिया को काफी नुकसान पहुंचा है। बलजीत के मुताबिक, उन्हें 1 लाख डॉलर (करीब 75 लाख रु.) का नुकसान हुआ। लोकल पुलिस और फेडरल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एफबीआई) घटना की जांच कर रही है।  अमेरिका में सिखों के संगठन 'सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजूकेशन फंड (सालडेफ) ने घटना की निंदा की है। सालडेफ की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर किरण कौर गिल ने कहा- इस तरह की नफरत और हिंसा ठीक नहीं है। सभी अमेरिकियों की सुरक्षा तय करने के लिए फौरन कार्रवाई की जानी चाहिए। सैंटा फे में रहने वाले सिख लोगों के मुताबिक- यह शांत इलाका है। यहां 1960 से सिख समुदाय के लोग रह रहे हैं। इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई।  बीते दिनों सैंटा फे में अश्वेत समर्थकों ने स्पेनिश शासकों की मूर्तियां भी हटा दी थीं। इसके बाद से यहां हेट क्राइम बढ गया। 29 अप्रैल को कोलोराडो के लेकवुड में अमेरिकी सिख लखवंत सिंह पर एक व्यक्ति ने हमला किया था।

 उसने लखवंत को अपने देश लौट जाने को कहा। आरोपी का नाम एरिक ब्रीमैन बताया गया है। अब तक उसके खिलाफ हेट क्राइम का मामला दर्ज नहीं किया गया है।