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इराक में फिर भड़की हिंसा, सुरक्षा बल की फायरिंग में एक की मौत, छह घायल

जयपुर टाइम्स
बगदाद (एजेंसी)। इराक की राजधानी बगदाद में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुए नए संघर्ष में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और छह प्रदर्शनकारी घायल हो गए। यह घटना तब हुई जब सुरक्षा बलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई राउंड फायरिंग किया। इराकी सुरक्षा और चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि बगदाद के केंद्रीय खिलानी स्क्वायर में रविवार शाम एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और कम से कम छह घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों द्वारा सिनाक पुल के पास झड़पें हुईं।  प्रदर्शनकारियों द्वारा महीनों तक को अवरुद्ध करने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा सिनाक पुल को खोल दिया था। प्रदर्शनकारियों ने सेंट्रल तहरीर स्क्वायर और आस-पास के जम्हूरिया पुल पर कब्जा करना जारी रखा है, जो इराक की सरकार की सीट गढ़वाले ग्रीन जोन की ओर जाता है। बता दें एक अक्टूबर को सरकार के विरोध में इराक के दक्षिण में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। हजारों इराकियों सरकारी भ्रष्टाचार, खराब सेवाओं और बेरोजगारी को कम करने के लिए सड़कों पर उतरे। इस प्रदर्शन में ज्यादातर युवा लोग शामिल है। गौरतलब है कि इराक में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी दो खेमों में बंट गए हैं। शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र ने प्रदर्शनकारियों के अमेरिकी विरोध और नए प्रधानमंत्री के एलान के बाद सरकार विरोधी मुद्दे से भटकने पर आंदोलन से हाथ खींच लिए। इसके बाद कुछ गुट उनके विरोधी हो गए। सात फरवरी को प्रदर्शनकारियों और शिया धर्मगुरु के समर्थकों में हुई हिंसक झड़पों में 11 लोगों की मौत हुई थी। इराक के सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि इन झड़पों में करीब 71 लोग घायल हुए थे।
जानकारी के मुताबिक सद्रेन स्क्वायर पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और शिया धर्मगुरु अल-सद्र के समर्थकों के बीच हिंसक झड़पें हुईं थीं।

बता दें कि शिया धर्मगुरु ने अक्तूबर से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों का शुरू से समर्थन किया था। लेकिन राष्ट्रपति बरहाम सालिह की तरफ से शनिवार को संचार मंत्री मोहम्मद तौफीक अलवी को नया प्रधानमंत्री घोषित करने के बाद वे इस आंदोलन से अलग हो गए थे। अल-सद्र ने अलवी का समर्थन किया है, जबकि प्रदर्शनकारियों ने उनके नाम को खारिज कर दिया है। 

8 महीने पानी में डूबा रहता है हाऊर गांव, 500 से ज्यादा बोट स्कूल में पढ़ रहे 14 हजार बच्चे

जयपुर टाइम्स
ढाका (एजेंसी)। उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश का हाऊर इलाका साल के 8 महीने बाढ़ के पानी से घिरा रहता है। ऐसे में सभी जरूरी काम ठप हो जाते हैं। इसके लिए लोग पहले ही जरूरी चीजें जुटा लेते हैं। इनमें सबसे ज्यादा नुकसान होता है स्कूली बच्चों का। लिहाजा सरकार और ब्राक, शिधुलाई स्वनिर्वार संगस्था जैसे सामाजिक संगठनों ने मिलकर तय किया कि अगर बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, तो स्कूल उन तक पहुंचेंगे। इसका जरिया बोट स्कूल को बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि बांग्लादेश के स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़कर 97 प्रतिशत हो गई है। ये तब हुआ है, जब इलाके की 1 प्रतिशत से भी कम आबादी ने प्राथमिक शिक्षा पूरी की है। इस क्षेत्र में कोमिला, पबना, फरीदपुर, सुनामगंज, हाबीगंज, ढाका और सिलहट जिलों के ज्यादातर इलाके आते हैं। हाऊर एक सिलहटी शब्द है, जो संस्कृत शब्द सागर या समुद्र से लिया गया है। 2012 में एक स्कूल बोट से शुरू हुई यह पहल आज 500 से ज्यादा बोट स्कूल तक पहुंच गई हैं और 14,000 से ज्यादा बच्चे इनमें पढ़ाई कर रहे हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि 8 साल में 80 हजार से ज्यादा बच्चे इन स्कूलों से पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और दूसरे शहरों के स्कूल-कॉलेजों में आगे की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से कई तो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास कर और स्कॉलरशिप हासिल कर पढ़ाई कर रहे हैं। जो बच्चे दिन के वक्त स्कूल नहीं जा पाते, उन्हें रात में पढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं, यहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कड़ाई और अन्य उत्पाद बनाना भी सिखाया जाता है। इन बोट पर रोशनी के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। इलाके की 1 प्रतिशत से भी कम आबादी साक्षर है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन बोट स्कूलों में पढ़े सभी बच्चों ने प्राथमिक शिक्षा पूरी की है। इनमें 10 हजार से ज्यादा छात्र तो राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास कर अच्छे स्कूल, कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं, वे अब अपने माता-पिता को भी पढ़ाई की अहमियत बताते हुए साक्षर बना रहे हैं। 44 साल की आशिया कहती हैं- मैं और मेरे पति पढ़े-लिखे नहीं हैं। अब हमारी बेटी हमें पढ़ाती है। उसने नाम लिखना सिखा दिया है, घर खर्च चलाने के लिए गिनती और हिसाब-किताब भी सिखा रही है। हमें गर्व है कि हमारी बेटियां अपनी मांओं को शिक्षित कर रही हैं। 

विदेश नीति विशेषज्ञ रिचर्ड रोसो बोले- रक्षा के मोर्चे पर भारत-अमेरिका आ रहे करीब

 जयपुर टाइम्स
वॉश्ंिागटन (एजेंसी)। विदेश नीति विशेषज्ञ रिचर्ड रोसो के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में समृद्ध भारतीय प्रवासी डोनाल्ड ट्रम्प के लिए आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए राजनीतिक दान देने का एक बड़ा लक्ष्य हो सकते है। 
यूएस-इंडिया पॉलिसी स्टडीज, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रिचर्ड रोसो ने एएनआइ को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 4 मिलियन भारतीय प्रवासी एक बढ़ता हुआ समुदाय है जो काफी समृद्ध हैं। ट्रम्प की यात्रा के संभावित परिणाम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, मुझे पता है कि हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए कोई मिनी व्यापार सौदा होगा, लेकिन लगता नहीं कि ऐसा कुछ होने वाला है। लेकिन आपको व्यापार सौदों के लिए कुछ विकल्प देखना चाहिए जहां भारत रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका से नई खरीद की घोषणा करने जा रहा है। वॉशिंगटन, एएनआइ। 
विदेश नीति विशेषज्ञ रिचर्ड रोसो के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में समृद्ध भारतीय प्रवासी डोनाल्ड ट्रम्प के लिए आगामी राष्ट्रपति चुनावों के लिए राजनीतिक दान देने का एक बड़ा लक्ष्य हो सकते है। यूएस-इंडिया पॉलिसी स्टडीज, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के रिचर्ड रोसो ने एएनआइ को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 4 मिलियन भारतीय प्रवासी एक बढ़ता हुआ समुदाय है जो काफी 
समृद्ध हैं।

ट्रम्प की यात्रा के संभावित परिणाम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि हम सभी उम्मीद कर रहे हैं कि व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए कोई मिनी व्यापार सौदा होगा, लेकिन लगता नहीं कि ऐसा कुछ होने वाला है। लेकिन आपको व्यापार सौदों के लिए कुछ विकल्प देखना चाहिए जहां भारत रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका से नई खरीद की घोषणा करने जा रहा है। उन्होंने कहा किमुझे लगता है कि सुरक्षा के मोर्चे पर एशिया में बढ़ते खतरों को लेकर भारत-अमेरिका और करीब आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों पर उन्होंने कहा, '20 साल पहले संयुक्त राज्य अमेरिका की भारत में शून्य रक्षा बिक्री थी और अब वो 17 बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंच गई है।' बता दें कि दोनों देशों के बीच व्यापार के मोर्चे पर तनाव पिछले साल जून में सामने आया था, जब ट्रम्प ने भारत से तरजीही व्यापार विशेषाधिकार रद्द कर दिया था। इसके जवाब में भारत ने बादाम और सेब सहित 28 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाया था। फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिवसीय भारत यात्रा पर आज अहमदाबाद आने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने परिवार और एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ लगभग 36 घंटे तक भारत में रहेंगे। वे अपने प्रवास के दौरान अहमदाबाद, आगरा और दिल्ली जाएंगे। यह ट्रंप की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। 

सीएए-एनआरसी पर व्हाइट हाउस के अफसर ने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति पीएम मोदी के सामने धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाएंगे

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाएंगे। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, व्हाइट हाउस के अफसरों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थानों को लेकर अमेरिका के मन में सम्मान है और उन मूल्यों को बनाए रखने के लिए वह भारत को प्रोत्साहित करना जारी रखेगा। ट्रम्प की पहली भारत यात्रा से पहले, यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम नाम की सरकारी संस्था ने एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें दावा किया गया कि नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) की वजह से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में गिरावट आई है। व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प सार्वजनिक और निजी तौर पर लोकतंत्र और धार्मिक स्वतंत्रता की हमारी साझा परंपरा पर बात करेंगे। वह धार्मिक स्वतंत्रता समेत अन्य मुद्दों को उठाएंगे, जो कि अमेरिका के लिए बहुत जरूरी है।  
दुनिया भारत की ओर देख रही है: अमेरिका- ट्रम्प सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीएए और एनआरसी से जुड़े सवाल पर कहा कि आपने जिन मुद्दों को उठाया है, हम उनमें से कुछ को लेकर जरूर चिंतित हैं। मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रम्प, पीएम मोदी के साथ बैठक में इन मुद्दों को जरूर उठाएंगे। दुनिया लोकतांत्रिक परंपराओं, अल्पसंख्यकों का सम्मान बनाए रखने के लिए भारत की तरफ देख रही है। अधिकारी ने आगे कहा- जाहिर तौर पर भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों का सम्मान और सभी धर्मों से समान व्यवहार की बात है।
यह अमेरिका के लिए यह काफी अहम है। मोदी ने पिछला चुनाव जीतने के बाद अपने पहले भाषण में सभी को साथ लेने की बात कही थी। दुनिया आज भारत की तरफ देख रही है।

भारत-पाकिस्तान बातचीत से मुद्दे सुलझाएं
इसके अलावा, दोनों के बीच भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और ट्रेड डील पर भी बात हो सकती है। ट्रम्प के भारत दौरे से पहले एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ''अमेरिका चाहता है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर सहित बाकी मुद्दों को बातचीत से सुलझाएं। हालांकि, यह तभी मुमकिन है जब पाकिस्तान आतंकियों पर सख्त और निर्णायक कार्रवाई करे। दोनों देशों की कोई भी वार्ता आतंकियों पर ठोस कार्रवाई के बिना सफल नहीं हो सकती। राष्ट्रपति इस बात पर भी जोर देंगे कि एलओसी पर शांति रहे और दोनों देश भड़काऊ बयानबाजी और कार्रवाई से बचें। ट्रम्प ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था, लेकिन हम जानते हैं कि भारत इसके लिए कभी तैयार नहीं होगा।ÓÓ  

ट्रेड डील पर फैसला नहीं
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अब तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस बात की संभावना कम है कि ट्रम्प के भारत दौरे पर इससे संबंधित कोई समझौता या घोषणा हो। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "भारत कुछ सेक्टर्स में विदेशी कंपनियों को प्रवेश देने के मामले में हिचकिचा रहा है। हम भारतीय अधिकारियों से डील को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका भी चाहता है कि दोनों देशों में कोई भी व्यापारिक समझौता हो तो संतुलन का खास ध्यान रखा जाए। उनकी कुछ चिंताएं हैं। हम बातचीत कर रहे हैं। उम्मीद है उनकी शंकाएं जल्द दूर कर पाएंगे।" खास बात ये है कि ट्रेड डील पर बातचीत करने वाले अमेरिकी अधिकारी रॉबर्ट लाइथजर ट्रम्प के साथ दौरे पर नहीं आएंगे।

 
मेक इन इंडिया पर भारत सख्त
इस अधिकारी ने कहा, "मेक इन इंडिया को लेकर मोदी सरकार ज्यादा सतर्क है। इसकी वजह से ट्रेड डील में दिक्कत आ रही है। अमेरिका को लगता है कि भारत सरकार मेक इन इंडिया को लेकर ज्यादा सख्त रुख अपना रही है। डील पर दोनों देशों के अधिकारी करीब 18 दौर की बातचीत कर चुके हैं लेकिन फैसला नहीं हो पाया। मेक इन इंडिया की सुरक्षा पर भारत ने हाल ही में कई घोषणाएं की हैं। इनकी वजह से अमेरिकी सरकार की चिंताएं कम होने के बजाए बढ़ गई हैं। इसके बावजूद हमें भरोसा है कि जल्द ही कोई अच्छी खबर मिलेगी।" 

अमेरिकी राष्टट्रपति आज साबरमती आश्रम भी जाएंगे

जयपुर टाइम्स
अहमदाबाद (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का 24 फरवरी को साबरमती आश्रम जाना तय हो गया है। रोड शो के दौरान 15 मिनट का समय बचाकर ट्रम्प साबरमती आश्रम जाएंगे। इसकी पुष्टि आश्रम के ट्रस्टी अमृत मोदी ने की है। यह भी तय हो गया है कि रोड शो 22 किमी का होगा। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया कि २४ फरवरी को ट्रम्प के साथ रहना हमारे लिए सम्मान की बात है।  
ट्रम्प के साबरमती आश्रम में पहुंचने पर कुछ दिनों से रहस्य बना हुआ था। इसके पहले सीएम विजय रूपाणी ने कहा था कि व्हाइट हाउस की तरफ अधिकृत घोषणा के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। उधर, नगर निगम कमिश्नर विजय नेहरा ने ट्वीट किया कि मोदी-ट्रम्प का रोड शो 22 किमी का ही होगा।  
7 आईपीएस अफसरों ने किया आश्रम की तैयारियों का निरीक्षण : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का स्वागत करने के लिए गांधी आश्रम पूरी तरह से तैयार है। जब यह बात सामने आई थी कि ट्रम्प गांधी आश्रम नहीं जाएंगे, तब भी गांधी आश्रम की तैयारियों में कोई फर्क नहीं पड़ा। आश्रम के हृदय कुंज का रंग-रोगन किया गया है। पीछे रिवरफ्रंट के एक हिस्से पर स्टेज बनाया गया है। जहां तीन आलीशान कुर्सियों की व्यवस्था की गई है, जहां से ट्रम्प, उनकी पत्नी मेलानिया और मोदी रिवरफ्रंट का नजारा देख सकें। 7 आईपीएस अधिकारियों ने आश्रम की तैयारियों का जायजा लिया। ट्रम्प की कार्यक्रम में भले ही गांधी आश्रम के लिए कोई निर्धारित समय तय नहीं है, लेकिन 22 किमी के रोड शो में वे 15 मिनट का समय निकालेंगे। इन 15 मिनट में ही वे गांधी आश्रम का दौरा करेंगे।
इस दौरान वे गांधीजी की प्रतिमा को सूत की माला पहनाएंगे और हृदय कुंज में चरखा भी देखेंगे। ट्रम्प चरखा चलाएंगे या नहीं, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।

दक्षिण एशिया के बाकी देशों से पिछड़ा पाकिस्तान, मानव विकास सूचकांक में मिला 152वां स्थान

 जयपुर टाइम्स
इस्लामाबाद (एजेंसी)।  मानव विकास सूचकांक 2019 में 189 अन्य देशों के बीच पाकिस्तान को 152 वें स्थान पर रखा गया है, जो दक्षिण एशिया के अन्य सभी क्षेत्रीय देशों की तुलना में सबसे कम है। पाकिस्तान की रैंकिंग बांग्लादेश और भारत सहित दक्षिण एशिया के ॥ष्ठढ्ढ के औसत से 13 प्रतिशत कम है। समाचार इंटरनेशनल ने बताया कि एचडीआर 2019 में कहा गया है कि पाकिस्तान ने 2000 से 2015 तक प्रगति की, लेकिन बाद में इसकी प्रगति धीमी हो गई। एचडीआर को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा शुरू किया गया था। 2017 के, एचडीआई में पाकिस्तान 151 वें स्थान पर रहा। एचडीआई में 2000 से 2015 तक 25 प्रतिशत की सुधार के साथ औसत वार्षिक वृद्धि 1.2 प्रतिशत रही लेकिन, उसके बाद से पाकिस्तान की प्रगति धीमी हो गई। 

कार्बन उत्सर्जन घटाने में चीन से बड़ी समस्या है भारत : ब्लूमबर्ग

जयपुर टाइम्स

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी में उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर माइकल ब्लूमबर्ग (78) ने दावा किया है कि जलवायु परिवर्तन से लडऩे और खासतौर पर कार्बन उत्सर्जन घटाने के मामले में चीन के मुकाबले भारत ज्यादा बड़ी समस्या है। लास वेगास में डेमोक्रेटिक पार्टी में उम्मीदवारी की प्रारंभिक बहस में ब्लूमबर्ग ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के हटने का फैसला हास्यास्पद था। ब्लूमबर्ग ने एक सवाल के जवाब में कहा, पूरी तरह ईमानदारी से कहूं तो चीन ने कमी लाई है। भारत ज्यादा बड़ी समस्या है, बल्कि यह असाधारण समस्या है। कोई इस बारे में कुछ नहीं कर रहा। ब्लूमबर्ग से उनके कारोबार के बारे में पूछा गया था जिसका दुनिया के सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जक देश चीन में काफी निवेश है। उन्होंने आगे कहा, आप उनसे (चीन से) युद्ध करने नहीं जा रहे। आपको उनसे बातचीत करनी होगी और हमने टैरिफ के मामले में यह देख लिया है। 
आपको चीनियों को मनाना होगा कि यह उनके भी हित में है, जिस तरह हमारे लोग मरेंगे, उसी तरह उनके लोग भी मरेंगे और हम मिलकर काम करेंगे। 
ब्लूमबर्ग ने कहा, मुझे लगता है कि हमारे सामने दो सवाल हैं। पहला, डोनाल्ड ट्रंप को कौन हरा सकता है? और दूसरा, व्हाइट हाउस पहुंचकर कौन काम कर सकता है? मेरा कहना है कि मैं ही ऐसा उम्मीदवार हूं जो दोनों काम कर सकता है। मैं न्यूयॉर्क का हूं। मैं जानता हूं कि डोनाल्ड ट्रंप जैसे अहंकारी धूर्त व्यक्ति से कैसे निपटना है, जो न्यूयॉर्क से ही आते हैं। मैं मेयर हूं या मेयर था। मुझे पता है कि इस देश के एक जटिल, सबसे बड़े और सबसे विविधतापूर्ण शहर को कैसे चलाया जाता है।

भारत में ट्रम्प की लोकप्रियता बढ़ रही, लेकिन उनकी कुछ नीतियां और कारोबारी रवैया भारतीयों को पसंद नहीं

जयपुर टाइम्स
वॉशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता भारत में बढ़ रही है। लेकिन उनकी कुछ नीतियां और कारोबार को लेकर उनका रवैया लोगों को पसंद नहीं है। वहीं, कांग्रेस के मुकाबले भाजपा समर्थकों को ट्रम्प के कामकाज पर ज्यादा भरोसा है। यह बात पीयू रिसर्च के एक सर्वे में सामने आई। जिसे ट्रम्प की 24-25 फरवरी की भारत यात्रा से पहले जारी किया गया। 
अमेरिकी राष्ट्रपति सबसे पहले अहमदाबाद, फिर आगरा और दिल्ली जाएंगे। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, भारत में पिछले साल 24 जून से 2 अक्टूबर तक किए गए ग्लोबल एटीट्यूड सर्वे में 2,476 लोगों ने जवाब दिए। इसके आधार पर पीयू ने कहा है कि ज्यादातर भारतीयों का मानना है कि जब वैश्विक मामलों की बात आती है तो ट्रम्प सही कदम उठाते हैं। 
उन्हें भारतीयों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलती हैं। लेकिन कुछ खास नीतियों और व्यापार से जुड़े दृष्टिकोण को उतनी तरजीह नहीं मिलती है। सर्वे में सामने आया है कि 2016 में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने पर भारत में ट्रम्प की लोकप्रियता बढऩे लगी थी। पिछले तीन साल में यह 14 प्रतिशत से बढ़कर 56 प्रतिशत पर पहुंच गई। उनसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की लोकप्रियता 58 प्रतिशत थी। पीयू का कहना है कि कांग्रेस के मुकाबले भाजपा समर्थकों को ट्रम्प के कामकाज पर ज्यादा भरोसा है। वस्तुओं पर ट्रैरिफ बढ़ाने के ट्रम्प के फैसले को 48 प्रतिशत ने अस्वीकार किया।   

अमेरिकी राष्ट्रपति पत्नी के साथ आगरा भी जाएंगे

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 फरवरी को दोपहर 11:55 बजे गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उनका भारत दौरा दो दिन का होगा। वे अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में  नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ करीब एक लाख लोगों को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ताजमहल देखने के लिए आगरा जाएंगे। इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने यमुना किनारे बदबू दूर करने के लिए गंगनहर से 500 क्यूसेक पानी छोड़ा है। अगले दिन 25 फरवरी को ट्रम्प और मेलानिया दिल्ली में रहेंगे। राष्ट्रपति भवन में आधिकारिक स्वागत होगा। दोनों महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट भी जाएंगे। द्विपक्षीय वार्ता और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात के बाद ट्रम्प रात को ही वॉशिंगटन रवाना होंगे।

जापानी शिप पर जांच पूरी, स्वस्थ यात्रियों को आज से घर जाने की इजाजत; 2 और भारतीय संक्रमित मिले

जयपुर टाइम्स
टोक्यो (एजेंसी)। जापान के योकोहामा पोर्ट पर रोके गए 'डायमंड प्रिंसेजÓ शिप पर दो और भारतीयों में कोरोनावायरस का संक्रमण पाया गया है। जापान में स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि इससे पहले चार भारतीयों में संक्रमण पाया गया था। उनकी स्थिति में अब सुधार हो रहा है। जहाज पर कुल 454 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। दोनों भारतीय कू्र मेंबर्स के सदस्यों समेत सभी को इलाज के लिए ऑब्जर्वेशन सेंटर भेजा गया है। जापान के स्वास्थ्य मंत्री कत्सुनोबु काटो ने कहा- जहाज पर मौजूद जिन यात्रियों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, वे बुधवार से अपने घर जा सकते हैं। उधर, भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा- वुहान से वापस लाकर निगरानी में रखे गए 220 लोगों को मानेसर स्थित सेना परिसर से मंगलवार को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। सभी की जांच रिपोर्ट निगेटिव पाए गए हैं। भारतीय दूतावास ने कहा- शिप पर अब 6 भारतीय संक्रमित हैं। जहाज पर कुल 138 भारतीय हैं। इनमें 132 कू्र और 6 यात्री हैं। सभी भारतीयों के इलाज और बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए जापान सरकार से बातचीत किया जा रहा है। टोक्यो में भारतीय दूतावास लगातार शिप पर मौजूद भारतीय नागरिकों के संपर्क में है। जापान सरकार ने मंगलवार को बताया- शिप पर मौजूद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जांच पूरी हो गई। कई देश अब अपने नागरिकों को वहां से निकाल रहे हैं। अमेरिका ने योकोहामा पोर्ट पर फंसे शिप से अपने सभी 14 नागरिकों को निकाल लिया है। दक्षिण कोरिया ने भी घोषणा की है कि वह जल्द अपने नागरिकों को वहां से निकालेगा। शिप पर 3711 कू्र और यात्री थे। अब तक अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, हॉन्गकॉन्ग अपने नागरिकों को शिप से निकाल चुका है। चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि चीन में एक दिन में 1886 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 98 लोगों की मौत हुई है। 
हुबेई में एक दिन में 93 लोगों की मौत हुई। वहीं, हेनान प्रांत में 3 और हेबेई और हुनान में 1-1 युवक की जान गई है। 
चीन में अब तक 1870 लोगों की मौत हुई है और 72 हजार 436 मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया- राज्य में कोरोनावायरस के 64 संदिग्ध मामलों में से 60 लोगों की जांच रिपोर्ट निगेटीव आई है। चार के रिपोर्ट आने अभी बाकि हैं। 

इनमें 59 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। पांच युवकों को अभी भी मुंबई और सांगली के अस्पतालों में रखा गया है। 

18 जनवरी से अब तक हवाईअड्डे पर 38,131 यात्रियों की जांच

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, दिसंबर के अंत से चीन से आने वाले हर यात्रियों की मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग की जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने 18 जनवरी से हवाई अड्डे पर एहतियात के तौर पर 38,131 यात्रियों की जांच की है। राज्य में अब तक कोरोनावायरस का मामला सामने नहीं आया है। 

एफएटीएफ की पाकिस्तान को नाम लिए बिना चेतावनी- कुछ जगहों पर आतंकी संगठनों को मदद मिल रही

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को बिना नाम लिए चेतावनी दी है। संस्था ने कहा कि दुनिया के कुछ देश अब भी अवैध तरीकों से जुटाई गई रकम के जरिए आतंकी संगठनों का समर्थन कर रहे हैं। पेरिस में फिलहाल एफएटीएफ की बैठक चल रही है। इसमें पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटाकर ब्लैक लिस्ट में रखे जाने पर फैसला होगा। एफएटीएफ ने बयान जारी कर कहा, आतंकी फंड जुटाने के लिए कई नए तरीके अपना रहे हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए नए फॉलोवर्स की पहचान कर रहे हैं और अपनी फंडिंग और अन्य सुविधाएं जुटाने के रास्ते बना रहे हैं। एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए कड़े मानक लागू किए हैं। ताकि आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे संगठनों के पैसे जुटाने पर असर पड़े। हालांकि, अब भी कई आतंकी संगठन अवैध गतिविधियों के जरिए फंड जुटाने में लगे हैं। एफएटीएफ लगातार नए पेमेंट के तरीकों की पहचान कर अवैध लेनदेन रोकने में जुटा है।
पाकिस्तान ने एफएटीएफ के फैसले से पहले ही आतंकियों पर कार्रवाई और उनके भाग जाने के झूठे दावे शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान आर्मी की कैद से गायब हो गया है। पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) पार्टी के प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने एफएटीएफ की बैठक से पहले मसूद अजहर के गायब होने पर चिंता जाहिर की और पाकिस्तान की नीयत पर सवाल खड़े किए। पिछले हफ्ते ही पाकिस्तान की आतंकरोधी अदालत ने 2008 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को आतंक से जुड़े दो मामलों में 11 साल जेल की सजा सुनाई थी। यह कदम एफएटीएफ की बैठक से ठीक 4 दिन पहले आया था। पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में एफएटीएफ को जानकारी दी कि उसके यहां छिपे 16 आतंकियों में से 7 को मारा जा चुका है। जो 9 बचे हैं, उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
पाकिस्तान खुद को ब्लैक लिस्ट से बचाने के लिए लगातार इस तरह के झूठे दावे करने में जुटा है।  एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। साथ ही ब्लैक लिस्ट से खुद को बचाने के लिए 27 सूत्रीय एक्शन प्लान सौंपा था। अगर संस्था को लगता है कि पाकिस्तान ने एक्शन प्लान को सही तरीके से लागू नहीं किया है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा। 

संयुक्त राष्ट्र कश्मीर को लेकर अपने वादे पूरे करने और लोगों को अधिकार दिलाने में मदद करे : इमरान

जयपुर टाइम्स
इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटोनियो गुटेरस के सामने कश्मीर राग अलापा। गुटेरस इन दिनों पाकिस्तान दौरे पर हैं। उनके साथ बैठक में इमरान ने कहा संयुक्त राष्ट्र कश्मीर के लोगों से किया अपने वादे और उन्हें अधिकार दिलाने में मदद करे। इमरान ने भारत पर आरोप लगाया कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद वहां के लोगों के मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र को अवगत कराया कि कश्मीरी लोग अपने अधिकार को हासिल करने के लिए लगातार यूएन की तरफ देख रहे हैं क्योंकि यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों में से एक है। इमरान ने दावा किया था कि भारत की तरफ से नियंत्रण रेखा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही भारत उकसाने वाली बयानबाजी कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत कश्मीर पर अपनी गतिविधि से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए किसी अन्य कार्रवाई को अंजाम दे सकता है। अफगानिस्तान के मुद्दे पर इमरान ने कहा कि अफगान संघर्ष का कोई सैन्य सामाधान नहीं है और पाकिस्तान यह आश्वस्त कराना चाहता है कि वह देश को युद्ध से निकालकर शांति कायम करने में पूरा समर्थन देगा।
इससे पहले, गुटेरेस ने इस्लामाबाद में कहा था कि वे कश्मीर की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने में मध्यस्थता कर सकते हैं। 
इस पर, भारत ने कश्मीर पर मध्यस्थता का उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि असली मुद्दा पाकिस्तान की ओर से अवैध तरीके से कब्जा किए गए क्षेत्र को खाली कराने का होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- अनुच्छेद 370 से अलगाववाद और आतंकवाद ब?े

पिछले साल जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव ब? गया था। इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने भारत से कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए थे और भारतीय राजनयिकों को बाहर जाने को कहा था। भारत ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा था कि विशेष दर्जा से कश्मीर में आतंकवाद को पनाह मिल रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था, "देश ने अनुच्छेद 370 को हटाने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि इसने राज्य में केवल अलगाववाद और आतंकवाद को ब?ावा देने का काम किया था।

गुटेरस गुरुद्वारा करतापुर साहिब जाएंगे

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरस रविवार को चार दिन के पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे हैं। वे इस दौरान गुरुद्वारा करतारपुर साहिब भी जाएंगे। गुटेरस ने कश्मीर में भारत और पाकिस्तान की यूनाइटेड नेशंस मिलिट्री ऑब्जर्वर ग्रुप को क्षेत्र में पूरी पहुंच देने के लिए इमरान खान को धन्यवाद दिया। उन्होंने पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति और पूरे एशियाई क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रधानमंत्री की सराहना भी की।