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नीरव मोदी को लंदन कोर्ट से झटका, एक महीने बाद होगी जमानत पर अगली सुनवाई

लंदन (एजेंसी) । 13400 करोड़ रुपये पीएनबी घोटाले के आरोपी और हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की कोर्ट ने झटका दिया है। नीरव की रिमांड पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अब इस मामले की अगली सुनवाई  24 मई को होगी। बता दें कि नीरव के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है। 48 वर्षीय कारोबारी पिछले महीने अपनी गिरफ्तारी के बाद से दक्षिण-पश्चिम लंदन में वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। इससे पहले नीरव को जेल से वीडियो लिंक के जरिए वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। 29 मार्च को चीफ मजिस्ट्रेट ने इस आधार पर उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी कि एक से अधिक पासपोर्ट होने के चलते वह फरार हो सकता है। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ नए तथ्य भी विचार के लिए पेश किए जा सकते हैं। साथ ही नीरव तीसरी जमानत याचिका भी दाखिल कर सकता है। 

ईरानी संसद ने अमेरिकी सैन्‍य बलों को आंतकवादी संगठन घोषित किया, US सैनिकों पर चलेगा मुकदमा!

तेहरान, एपी। ईरानी संसद ने उस बिल को मंजूरी दी है, जिसमें समस्‍त अमेरिकी सैन्‍य बलों को आतंकवादी संगठन के रूप में स्‍थापित किया गया है। हालांकि, अभी इस मामले में अमेरिका की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बता दें कि कुछ दिन पूर्व अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरान की रिवोल्‍यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन कहा था। ट्रंप ने कहा था कि ईरान से तेल लेने वाला कोई देश अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्‍त नहीं होगा। इसके बाद ईरान ने अमेरिका के विरोध में अपनी संसद में यह बिल पास किया है। मंगलवार को तेहरान की संसद में 215 सांसदों में से 173 ने इस बिल के पक्ष में मतदान किया। चार सांसदों ने मतदान में हिस्‍सा नहीं लिया। पिछले सप्‍ताह ईरानी सांसदों ने मध्‍य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को आतंकवादी के रूप में स्‍थापित किया गया था। इसके लिए ईरानी संसद में बाकायदा कानून भी बनाया गया। लेकिन एक सप्‍ताह बाद ईरानी संसद में नया बिल पेश किया गया। यह नया बिल एक कदम और आगे है। अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी आइएसएनए ने कहा है कि इन अमेरिकी सैनिकों को रसद सहायता सहित कोई भी सैन्‍य और गैर सैन्‍य मदद करना एक आतंकवादी कार्रवाई मानी जाएगी। विधेयक में यह भी मांग की गई है कि ईरानी सरकार उन देशों के खिलफ भी कार्रवाई करें जो इस मामले में ट्रंप प्रशासन की नीतियों का समर्थन करती है। बता दें कि सऊदी अरब, बहरीन और इजराइल ने ट्रंप का समर्थन किया है। सांसदों ने यह भी अनुरोध किया है कि ईरान की खुफ‍िया एजेंसी तीन म‍हीने के भीतर सभी अमेरिकी कंमाडरों की एक सूची उपलब्‍ध कराए, ताकि ईरानी न्‍यायपालिका उन पर आतंकवादियों के रूप में मुकदमा चला सके।

पाकिस्तान : हजारा समुदाय को निशाना बनाकर विस्फोट, 20मरे, 48 घायल

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के क्वेटा शहर में शुक्रवार को हजारा समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में कम से कम 20 लोग मारे गए और 48 से अधिक घायल हो गए। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) अब्दुल रज्जाक चीमा ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की और डॉन न्यूज को बताया कि मरने वालों में से आठ लोग हजारा समुदाय के हैं जिन्हें सांप्रदायिक हिंसा का निशाना बनाया जाता रहा है क्योंकि वे अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट के कारण आसानी से पहचाने जा सकते हैं।
डीआईजी चीमा ने कहा, "हमला एक दुकान (हजारगंजी इलाके की सब्जी की दुकान) में हुआ। आलू से भरी एक बोरी में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईडी) लगा था। हमें अभी पता करना है कि इसका टाइम सेट किया गया था या रिमोट नियंत्रित था। जांच जारी है। "
मरने वालों में फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) का एक सैनिक भी शामिल है। इस हमले की अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पिछले चार दशकों के दौरान हिंसा से बचने के लिए अफगानिस्तान से भागकर आए करीब पांच लाख हजारा समुदाय के लोग क्वेटा में बस गए हैं। शहर का हजारगंजी इलाका अतीत में इसी तरह के हमलों का गवाह रहा है।
हजारा समुदाय के दुकानदार हजारगंजी बाजार में अपनी दुकानों पर सब्जियां और फल बेचने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें हजारीगंज से आने और जाने के दौरान सुरक्षा मुहैया कराई जाती है क्योंकि यह लगातार हमले के निशाने पर रहते हैं।
चीमा ने डॉन को बताया, "हजारा समुदाय के लोग रोजाना हजारा क्षेत्र से एक काफिले में सब्जियां खरीदने आते हैं। उन्हें पुलिस और एफसी द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है और फिर वे लौट जाते हैं। आज भी ऐसा ही था।" बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री जाम कमाल ने हमले की कड़ी निंदा की है और आश्वासन दिया है कि हमले में शामिल तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा।
कमाल ने कहा, "जिन लोगों की चरमपंथी मानसिकता है, वे समाज के लिए एक खतरा हैं।' उन्होंने कहा, "हमें शांति को बाधित करने की साजिश को जरूर नाकाम करना चाहिए।" प्रधानमंत्री इमरान खान ने विस्फोट की निंदा की है और हमले की जांच रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनसीएचआर) द्वारा पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि जनवरी 2012 से दिसंबर 2017 तक बलूचिस्तान प्रांत के सबसे बड़े शहर क्वेटा में आतंकवाद की विभिन्न घटनाओं में हजारा समुदाय के 509 सदस्य मारे गए और 627 घायल हुए।
 

ट्रम्प की प्रवासियों को चेतावनी- हमारा देश भर चुका है, वापस लौट जाएं

वॉशिंगटन (एजेंसी) । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रवासियों के मुद्दे का इस्तेमाल कर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान को मजबूती देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। हाल ही में वे अमेरिकी सीमा पर तैनात बॉर्डर पैट्रोल एजेंट्स से मिलने कैलेक्सिको शहर पहुंच गए थे। यहां सैनिकों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि प्रवासियों की समस्या हमारे सिस्टम पर भारी पड़ रही है और हम ऐसा नहीं होने दे सकते। इसके बाद ट्रम्प ने सीमापार मैक्सिको के मैक्सिकैली शहर में प्रदर्शन रहे लोगों से कहा कि अमेरिका पूरी तरह भर चुका है, हम अब और लोगों को यहां नहीं रख सकते। बेहतर होगा कि आप वापस लौट जाएं। अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर शुक्रवार को दोनों देशों के प्रदर्शनकारी भी आमने-सामने थे। मैक्सिको स्थित मैक्सिकैली में 200 प्रदर्शनकारी जुटे थे। बार्डर के पास बेबी ट्रम्प (डायपर पहने ट्रम्प) का एक बड़ा गुब्बार लगा था। साथ ही कई लोगों के हाथ में बोर्ड था, जिसमें लिखा था- परिवारों को अलग करना बंद करो और अगर तुमने दीवार बनाई तो हमारी पीढ़ी उसे उखाड़ फेंकेगी। वहीं अमेरिका की तरफ भी सैकड़ों लोग जुटे थे। उनके पोस्टरों में ‘दीवार बनाओ’ जैसे नारे लिखे थे। इससे पहले ट्रम्प ने वॉशिंगटन में कहा कि उनकी बॉर्डर बंद करने की धमकी धीरे-धीरे काम कर रही है, क्योंकि मैक्सिको के अधिकारियों ने लोगों को अमेरिका की तरफ जाने से रोकना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों से मैक्सिको का बर्ताव काफी बेहतर हुआ है। इसी बीच अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने सीमा पर दीवार बनाने के ट्रम्प के फैसले को रोकने के लिए एक संघीय मुकदमा दायर किया है। इसमें कहा गया है कि ट्रम्प ने सीमा पर दीवार बनाने के लिए इमरजेंसी लगाकर अपनी संवैधानिक ताकतों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। मामले में कई विभागों और उनके अधिकारियों के खिलाफ भी शिकायत की गई है। 

अनिल अंबानी अवमानना के दोषी, 4 हफ्ते में चुकाएं बकाया राशि: SC

नई दिल्ली (एजेंसी)। एरिक्सन के बकाया मामले में अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी और दो अन्य निदेशकों को अदालती अवमानना का दोषी करार देते हुए उन्हें चार हफ्तों के भीतर स्वीडिश कंपनी एरिक्सन की बकाया राशि को चुकाने का आदेश दिया है।
अदालत ने अनिल अंबानी को चार हफ्तों के भीतर एरिक्सन की 453 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। जस्टिस आर एफ नरीमन और विनीत सरन की बेंच ने कहा कि अगर अनिल अंबानी ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें तीन महीने जेल में बिताना होगा।इसके साथ ही कोर्ट ने अनिल अंबानी और दो अन्य निदेशकों पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि अगर इस जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उन्हें एक महीने जेल की सजा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'रिलायंस की तीनों कंपनियों की मंशा बकाया रकम का भुगतान करने की नहीं थी, इसलिए यह अदालत की अवमानना है।' कोर्ट ने कहा कि इस मामले में रिलायंस की बिना शर्त माफी स्वीकार नहीं की जा सकती। 
गौरतलब है कि जस्टिस आर एफ नरीमन और विनीत सरन की बेंच ने 13 फरवरी को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
एरिक्सन ने 550 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाने के मामले में अनिल अंबानी, रिलायंस टेलीकॉम के चेयरमैन सतीश सेठ और रिलायंस इन्फ्राटेल की चेयरपर्सन छाया विरानी और एसबीआई के चेयरमैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की थी।
23 अक्टूबर 2018 को कोर्ट ने आरकॉम से कहा था कि वह 15 दिसंबर 2018 तक इस रकम का भुगतान कर दें। ऐसा नहीं करने की स्थिति में उन्हें 12 फीसद ब्याज के साथ कर्ज चुकाना पड़ेगा।
धाराशायी हुए ADAG के शेयर: कोर्ट के इस फैसले का असर अनिल अंबानी समूह की अन्य कंपनियों पर भी हुआ है। बीएसई में रिलायंस कैपिटल के शेयर में करीब 9 फीसद की गिरावट आई है, वहीं आरपावर का शेयर करीब एक फीसद की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा है।

मोदी बोले- आतंक फैलाने वालों की लगाम कसने की जरूरत, सऊदी प्रिंस ने कहा- हम भारत के साथ

नई दिल्‍ली, जेएनएन। सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर सहमति बनी। बैठक के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संबंधों में और भी प्रगाढ़ता आई है, सऊदी अरब भारत के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी में से है। सऊदी अरब हमारे विस्तृत पड़ोस में है, एक करीबी दोस्त है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। वहीं सऊदी युवरात मोहम्‍मद बिना सलमान ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हम भारत के साथ खुफिया जानकारी बांटने समेत हर कदम पर सहयोग करेंगे।
सऊदी के युवराज ने कहा, 'आतंकवाद और कट्टरवाद पर हमारी साझा चिताएं हैं। हम अपने दोस्त भारत को बताना चाहते हैं कि हर मोर्चे पर हम सहयोग करेंगे। सबके साथ मिलकर हम आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए काम करेंगे।'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मोदी ने पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा, 'पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर चर्चा हुई। पिछले हफ्ते पुलवामा में हुआ बर्बर आतंकवादी हमला, इस मानवता विरोधी खतरे से दुनिया पर छाए कहर की एक और क्रूर निशानी है। इस खतरे से प्रभावशाली ढंग से निपटने के लिए हम इस बात पर सहमत हैं कि आतंकवाद को किसी भी प्रकार का समर्थन दे रहे देशों पर सभी संभव दबाव बढ़ाने की आवश्यकता है। सऊदी अरब और भारत आतंकवादी, कट्टरवाद पर एक जैसा विचार रखते हैं। अतिवाद के खिलाफ सहयोग और इसके लिए एक मज़बूत कार्ययोजना की भी जरूरत है, ताकि हिंसा और आतंक की ताकतें हमारे युवाओं को गुमराह न कर सकें। मुझे खुशी है कि सऊदी अरब और भारत इस बारे में साझा विचार रखते हैं। हम इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि काउंटर टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और मजबूत द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए लाभप्रद रहेंगे। पश्चिम एशिया और खाड़ी में शांति और स्थिरता सुनिचित करने में हमारे दोनों देशों के साझा हित हैं। आज हमारी बातचीत में, इस क्षेत्र में हमारे कार्यों में तालमेल लाने और हमारी भागीदारी को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति हुई है।'
पीएम मोदी ने बताया, 'आज हमने द्विपक्षीय संबंधों के सभी विषयों ​​पर व्यापक और सार्थक चर्चा की है। हमने अपने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का निश्चय किया है। हमारे ऊर्जा संबंधों को स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप में तब्दील करने का समय आ गया है। दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व में सऊदी अरब की भागीदारी, हमारे ऊर्जा संबंधों को बायर-सेलर रिलेशन से बहुत आगे ले जाती है। भारत और सऊदी अरब के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध सदियों पुराने हैं। और यह सदैव सौहार्द्रपूर्ण और मैत्रीपूर्ण रहे हैं। हमारे लोगों के बीच के घनिष्ठ और निकट संपर्क हमारे देशों के लिए एक सजीव सेतु यानि living bridge है।'
इससे पहले राष्ट्रपति भवन में सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के सम्‍मान में भव्‍य स्वागत समारोह हुआ। पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसमें मौजूद रहे। सऊदी प्रिंस ने इस दौरान कहा कि आज हमें यह पक्का करना है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते बने रहें और पहले से बेहतर हों। पीएम और राष्ट्रपति के नेतृत्व में मुझे उम्मीद है कि हमलोग दोनों देशों के लिए कुछ अच्छा कर पाएंगे। सऊदी प्रिंस मंगलवार को देर रात नई दिल्ली पहुंचे और पीएम नरेंद्र मोदी ने हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी की।
 

प्रधानमंत्री ने अफ्रीकी देशों को 'शीर्ष प्राथमिकताÓ में शामिल किया : सुषमा स्वराज

गांधीनगर । विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अफ्रीकी देशों को  आश्वस्त किया कि भारत उनका विश्वसनीय साझीदार बना रहेगा और अफ्रीकी देशों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए लगन के साथ काम करना जारी रखेगा। वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के दौरान 'अफ्रीका दिवसÓ के दौरान करीब 50 अफीक्री देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश और आर्थिक नीति में अफ्रीका को 'शीर्ष प्राथमिकताÓ में रखा है। सुषमा स्वराज ने कहा, अफ्रीका की सुरक्षा, पुनरोद्धार और समृद्धि के मार्ग पर भारत एक विश्वसनीय साझीदार बना रहेगा और वहां के लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अफ्रीका के साथ मिलकर काम कर रहा है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत निवेशकों के सम्मेलन में पहली बार किसी महाद्वीप को एक पूरा दिन समर्पित कर रहा है, जिससे पता चलता है कि देश अफ्रीकी अर्थव्यवस्था को कितना महत्व देता है। सुषमा स्वराज से पहले यूगांडा के विदेश मामलों के मंत्री हेनरी ओकेलो ने कहा कि भारत और अफ्रीका के रिश्तों में गतिशीलता के अभाव के कारण चीन ने महाद्वीप की संभावनाओं पर गौर करते हुए बड़ी पहल की। 
ओकेलो ने कहा, सबको पता है अतीत में भारत और अफ्रीका के संबंध काफी मजबूत रहे हैं लेकिन इसमें ठहराव के चलते चीन ने अफ्रीकी क्षेत्र में संभावनाओं को देखा और बड़ी पहल की। अब इसे पटरी पर लाये जाने की जरूरत है। अफ्रीका दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए स्वराज ने कहा कि इसका आयोजन महात्मा गांधी की 150वीं जयंती एवं महान अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला की जन्मशती वर्ष में किया जा रहा है। विदेश मंत्री ने कहा, पिछले चार साल में ? 
अफ्रीका के साथ हमारे लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में गतिशीलता आई है। अफ्रीका के साथ हमारा राजनीतिक संपर्क बहुत अधिक बढ़ा है। इस दौरान कई मंत्रियों के अलावा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने अफ्रीकी देशों की 29 यात्राएं की है। सुष्मा स्वराज ने कहा कि अफ्रीका भारत का महत्वपूर्ण व्यापार और निवेश साझीदार बनकर उभरा है।

रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश भेजने के आरोपों से बीएसएफ का इनकार

अगरतला । सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) के उन आरोपों को खारिज किया है कि वह जानबूझकर रोहिंग्या मुसलमानों को उनके क्षेत्र में भेज रहा है। ें कहा गया है कि बीएसएफ ब्राह्मनबाड़ी में कस्बा उपजिला के काजिआताली सीमा क्षेत्र से 31 रोहिग्याओं को उनके देश में भेजने की कोशिश कर रहा है। यह क्षेत्र यहां से 32 किलोमीटर दूर त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में कमलासागर में आता है। बीएसएफ त्रिपुरा सीमा क्षेत्र ने इन आरोपों को गलत और आधारहीन बताते हुए एक बयान जारी करके कहा कि 18 जनवरी को रात करीब साढ़े आठ बजे बीजीबी के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल गोमाल कबीर ने बीएसएफ के कमांडेन्ट रत्नेश कुमार से बात की और उन्हें सूचित किया कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 31 रोहिंग्या मुसलमानों को हिरासत में लिया है। बयान के अनुसार,  25 बीजीबी के कमांडिंग ऑफीसर ने बीएसएफ कमांडेन्ट से कहा कि वे उन रोहिंग्याओं को भारत-बांग्लादेश सीमा (आईबीबी)तारबंदी के अंदर ले लें। बीजीबी के कमांडिंग ऑफीसर ने यह भी आरोप लगाया कि बीएसएफ रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश के इलाके में भेज रहा है। बयान में कहा गया कि बीएसएफ इन आरोपों से इनकार करता है।

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री ने पेश की ये योजना

नई दिल्ली: ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने सोमवार को संसद में ब्रेक्जिट पर अपनी 'दूसरी योजना' (प्लान बी) पेश की. ईयू से ब्रिटेन के अलग होने संबंधी समझौते को सांसदों द्वारा खारिज किए जाने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया. इससे पहले समझौता संसद में पारित नहीं हो पाने के कारण ब्रेक्जिट से पहले ब्रिटेन में राजनीति गर्मा गई है.

सांसद यदि समय रहते ऐसी वैकल्पिक योजना तैयार नहीं कर पाते, जिससे ब्रसेल्स खुश हो या ब्रेक्जिट की तय तारीख को स्थगित नहीं किया गया तो ब्रिटेन को बिना किसी समझौते के 29 मार्च को यूरोपीय संघ छोड़ना पड़ सकता है.

गौरतलब है कि मे के समझौते को 'हाउस ऑफ कामन्स' में 432 के मुकाबले 202 मतों से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव में 325 सांसदों ने उनकी सरकार का समर्थन किया जबकि 306 सांसदों ने संसद में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था और मे 19 मतों के अंतर से जीत गईं थी.

मे ने गुरुवार को नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रट, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से बात की. उन्होंने शुक्रवार को ईयू नेता जीन-क्लाउड जंकर और डोनाल्ड टस्क से भी फोन पर ब्रेक्जिट के संबंध में चर्चा की.

ईयू प्रमुखों बहुत पहले ही समझौते पर फिर से बातचीत से इनकार कर चुके हैं. लेकिन उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि मे नागरिकों के मुक्त आवागमन को बाधित करने और ईयू के सीमा शुल्क संघ को छोड़ने पर अपनी 'रेड लाइन' में बदलाव करती हैं तो वापसी की प्रक्रिया को स्थगित किया जा सकता है.

कनाडा के लोक सुरक्षा मंत्री ने चीन को लेकर कही ये बात .

टोरंटो: हुआवेई कंपनी के 5जी नेटवर्क को लेकर बढ़ते विरोध के बीच कनाडा ने कहा है कि चीनी दबाव से वह डरने वाला नहीं है. चीन ने हाल में यह धमकी दी थी कि अगर 5जी नेटवर्क के लिए उपकरण की आपूर्ति को लेकर हुआवेई पर प्रतिबंध लगाया गया तो इसके नतीजे ठीक नहीं होंगे. कनाडा के लोक सुरक्षा मंत्री ने शुक्रवार को यह बात कही.

हालिया घटना ने कनाडा और चीन के बीच बढ़ती तनातनी को रेखांकित किया है. ऐसे आरोप हैं कि टेलीकॉम क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी पर चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण है या यह कंपनी चीन के लिये जासूसी में मदद करती है. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अन्य देशों ने इसकी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा रखा है.

कनाडा के लोक सुरक्षा मंत्री राल्फ गुडेल ने कहा कि कनाडा बेहद स्पष्ट है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा. गुडेल ने कहा, ‘‘यह मुश्किल चुनौती है लेकिन हमें इसका डर नहीं है क्योंकि हम, कनाडा के लिये जो सही है और जो उसके हित में है, उसमें यकीन रखते हैं.’’ 
कनाडा के लिये चीन के राजदूत लू शाये ने बृहस्पतिवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि अगर कनाडा कंपनी को नये 5जी नेटवर्क से दूर रखता है तो इसके परिणाम ठीक नहीं होंगे. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि ऐसे हालात में चिंता की बात यह है कि चीन के वाणिज्यिक हित और उसका राजनीतिक दबदबा तथा धमकियां सबकुछ एकसाथ मिल गये हैं. ‘‘मुझे लगता है कि यह कनाडा वासियों और दुनिया भर के लोगों के लिये चिंता की बात है.’’ 

कनाडा और उसकी सुरक्षा एजेंसियां इस बात का अध्ययन कर रही हैं कि हुआवेई के उपकरण का इस्तेमाल क्या ठीक होगा, क्योंकि फोन निर्माता कंपनी 5जी नेटवर्क प्रौद्योगिकी को शुरू करने वाली है.

बर्फीले तूफान के बाद बर्फ में दबे सैलानी

लद्दाख । जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में हिमस्खलन की चपेट में कई वाहन और लोग फंस गए है। इस हिमस्खलन में चार लोगों मौत होने की खबर है। वहीं 10 लोग लापता बताए जा रहे है। हिमस्खलन के कारण बर्फ की बड़ी चादर वहां खड़ी कार पर गिरी है जिसके कारण कार के अंदर सवार लोग भी फंस गए हैं। वहीं इस घटना के बाद सेना और पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। लेकिन मौसम होने वाले बदलाव के कारण सेना को ऑपरेशन के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के मुताबिक, लद्दाख के खारदुंगला पास में बर्फीला तूफान आया है। जिसके कारण वहां के पर्यटक गाड़ी में फंस गए हैं। वहीं प्रत्यक्षदर्शीयों की माने तो बर्फीले तूफान ने एक स्कॉर्पियों कार को भी अपनी चपेट में लिया है। 
फिलहाल अभी तक कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल इस बर्फीले तूफान में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। डिविजनल एडमिनिस्ट्रेशन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे हिमस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में न घूमें, पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान साथ रखें क्योंकि इस अवधि के दौरान हवाई और जमीनी कनेक्टिविटी प्रभावित होने की आशंका है।

अमेरिका में खाने के पड़े लाले! विदेशी संस्था ने पहुंचाई राहत

वॉशिंगटन: अमेरिका में आंशिक संघीय कामबंदी से प्रभावित कर्मचारियों को स्पेन के एक प्रख्यात शेफ की मानवीय सहायता संस्था सूप और सैंडविच वितरित कर रही है. समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, शेफ जोस एंद्रेस का वर्ल्ड सेंट्रल किचन अमेरिका के संघीय कर्मचारियों को भोजन मुहैया कर रहा है, जिन्हें कामबंदी की वजह से वेतन नहीं मिला है. एंद्रेस का यह किचन 2010 में हैती में आए भूकंप के बाद और प्यूटरे रिको में 2017 में तूफान मारिया से प्रभावित लोगों को भोजन मुहैया करा चुका है. गौरतलब है कि बुधवार को अमेरिकी कामबंदी का 26वां दिन है.

मिशेलिन स्टार शेफ ने कहा कि वह सरकारी कामबंदी को एक अन्य तरह का आपातकाल मानते हैं. दीवार निर्माण को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस के बीच गतिरोध के बाद से लगभग 800,000 संघीय कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है.

अमेरिका बंद: ट्रंप अपनी जिद पर अड़े, तमाम जोड़-तोड़ के बाद भी नहीं निकल रहा कोई नतीजा
आंशिक सरकारी बंदी से जूझ रहे व्हाइट हाउस ने संघीय कर्मचारियों का वेतन देने की अगली अंतिम तारीख नजदीक आते हुए देख इस गतिरोध को खत्म करने का नया तरीका अपनाया है. वह अब सदन की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी को दरकिनार कर पार्टी के अन्य सदस्यों और सांसदों से सीधी बातचीत करने की कोशिश में लगा हुआ है. लेकिन मुद्दा अभी भी वही है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के लिए धन देने की अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. वह कई सप्ताह से जारी आंशिक सरकार बंदी को लंबे वक्त तक चलने देना चाहते हैं.
राष्ट्रपति बंद के 25वें दिन भी दीवार के लिए 5.7 अरब डॉलर की मांग पर अड़े हुए हैं. वहीं डेमोक्रैट्स का कहना है कि सरकार का कामकाज पूरी तरह से बहाल होने पर पार्टी सीमा सुरक्षा पर चर्चा करेगी. लेकिन पेलोसी दीवार के लिए पैसे की मांग को अप्रभावी और अनैतिक बताकर उसे खारिज कर रही हैं.

ट्रंप ने समर्थकों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर अपनी जिद से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए. उन्होंने कहा, ‘‘अगर जरूरत पड़ी तो हम लंबे समय तक बाहर रखेंगे. हम लंबे समय तक बाहर रह सकते हैं.’’ सरकार के आंशिक रूप से ठप पड़े काम के दौरान करीब 8,00,000 सरकारी कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे हैं या उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है.

ट्रंप ने कहा, ‘‘लोग इससे खुश हैं कि ऐसी स्थिति से सरकार कैसे निपट रही है.’’ वहीं प्रशासन को उम्मीद है कि वह अगले सप्ताह मंगलवार को अंतिम तारीख से पहले इस गतिरोध का हल निकाल लेंगे. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता मर्सिडीज श्लैप ने कहा, ‘‘हम सबको समझ आ रहा है कि समय खत्म हो रहा है और हमें उससे पहले इसे सुलझाना है.
इसकी अंतिम तारीख अगले सप्ताह मंगलवार है.’’ व्हाइट हाउस ने मंगलवार को सांसदों को दोपहर के भोजन पर बुलाया था, पेलोसी ने वहां पहुंचने वाले सांसदों को अपनी शुभकामनाएं दी. दूसरी ओर आंतरिक राजस्व सेवा बंद के कारण छुट्टी पर भेजे गए लगभग 46,000 कर्मचारियों को वापस बुला रही है ताकि आयकर टैक्स रिटर्न और रिफंड (आईटीआर) का काम पूरा किया जा सके.इन कमर्चारियों को वेतन नहीं दिया जाएगा. लोगों को आयकर रिफंड का काम आधिकारिक तौर पर 28 जनवरी से शुरू होना है. ट्रंप प्रशासन ने लोगों से समय पर रिफंड देने का वादा किया है.