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बम विस्फोट से दहली कोलंबिया ,इतने लोगों के मौत की पुष्टि

बोगोटा : बोगोटा में एक पुलिस कैडेट प्रशिक्षण अकादमी में गुरुवार को एक वाहन बम हमले में 10 लोगों की मौत हो गई और 65 अन्य घायल हो गए. यह कोलंबिया की राजधानी में पिछले 16 साल में हुआ सबसे भीषण हमला है. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि विस्फोटकों से भरे एक वाहन का इस्तेमाल करके ‘‘आतंकवादी हमला’’ किया गया. वाहन में 80 किलोग्राम विस्फोटक था.

राष्ट्रपति इवान ने किया ट्वीट
कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान डुक ने ट्वीट किया, ‘‘सभी कोलंबियाई आतंकवाद के खिलाफ हैं और इसके विरुद्ध लड़ाई में एकजुट हैं.’’ हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने का संकल्प लेते हुए डुक ने कहा, ‘‘कोलंबिया दु:खी है, लेकिन हिंसा के आगे सिर नहीं झुकाएगा.’’ अधिकारियों ने हमलावर के मारे जाने की पुष्टि की है. उसने जनरल फ्रांसिस्को डी पाउला सेंटेंडर ऑफिसर स्कूल में कैडेट के प्रोन्नति समारोह के दौरान हमला किया.
स्कूल परिसर में वाहन लेकर घुसे संदिग्ध
अभी तक किसी ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन सरकारी अभियोजक नेस्टर हमबर्तो मार्टिनेज ने संदिग्ध के तौर पर जोस अल्दामेर रोजस रोड्रिगेज का नाम लिया है. मार्टिनेस ने कहा कि रोजस रोड्रिगेज सुबह साढ़े नौ बजे स्कूल परिसर में वाहन लेकर घुसा. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ‘‘इस आतंकवादी कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने’’ के लिए जांच शुरू की गई है.

अमेरिका ने की हमले की निंदा
इक्वाडोर के राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो ने बताया कि मृतकों में उनके देश का भी एक कैडेट है और एक अन्य कैडेट मामूली रूप से घायल हुआ है. लातिन अमेरिकी मामलों के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री किमबर्ली ब्रीएर ने हमले की निंदा की और पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट की. बोगोटा में अमेरिका के दूतावास ने हमले की जांच में मदद करने की पेशकश की है. 

रोबोट्स की नौकरी भी खतरे में ,एक होटल से 123 रोबोट्स को किया बर्खास्त

नई दिल्ली: इस समय दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बहस छिड़ी है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि कोई भी टेक्नोलॉजी, इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर पाएगी. इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां जापान के एक होटल ने सही काम न करने पर अपने होटल के 123 रोबोट्स को नौकरी से निकाल दिया. जापान का 'हेन ना' दुनिया का पहला होटल है जहां लोगों की सुविधा के लिए 243 रोबोट रखे गए थे. इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. लेकिन होटल को लगा कि रोबोट्स अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे. यानी जहां माना जा रहा था कि रोबोट्स के आ जाने के बाद इंसानों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है, वहीं खुद रोबोट्स की नौकरी भी सुरक्षित नहीं. 

खर्राटे आते ही गेस्ट को जगा देते हैं
एजेंसी के मुताबिक होटल में आने वाले गेस्ट को शिकायत थी कि खर्राटे लेते ही रोबोट उन्हें जगा देते हैं. गेस्ट के साथ ऐसा रात में कई बार होता है. अगर रोबोट रिसेप्शन जैसी जगह बैठा हो तो वह आपके सामान्य सवालों का भी जवाब देने में नाकाम था. गेस्ट की शिकायत थी कि खर्राटे लेते ही रोबोट्स का ऑटो सेंसर काम करने लगता है और रोबोट्स नींद से जगाकर पूछते थे, आपने जो कहा एक बार फिर से कहेंगे?

आसान काम भी नहीं करते रोबोट्स
होटल में रुकने वाले गेस्ट ने बताया कि वहां तैनात रोबोट्स को चुरी बोलते हैं. चुरी छोटे-मोटे काम भी कई बार नहीं कर पाते. रोबोट्स को लाइट या AC बंद करने को कहो, तो भी वो नहीं सुनते. एक गेस्ट ने चुरी से पूछा, 'थीम पार्क किस समय खुलता है?' लेकिन चुरी इस सवाल का सही जवाब नहीं दे पाए. 

शुरुआत में मिली शोहरत
2015 में यह होटल जापान के सासेबो में खोला गया था. इसे काफी शोहरत भी मिली थी. शुरुआत में होटल में 80 रोबोट रखे गए थे. बाद में इनकी संख्या तिगुनी हो गई. होटल की बेवसाइट के जनरल कॉन्सेप्ट में भी इस बार का जिक्र है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके वो अपने लोगों को मदद करते हैं. होटल संचालक हिडियो सवाडा का कहना है कि हमने ये रोबोट्स सिर्फ ख्याति बटोरने के लिए नहीं रखे थे, बल्कि हम टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करना चाहते थे.

अमेरिकी अखबार में छपी डोनाल्ड ट्रंप को लेकर ऐसी खबर , हर कोई हो रहा Shock!

वॉशिंगटन : दुनिया भर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्तीफे की फर्जी खबर फैलाई गई. ट्रंप के इस्तीफे की खबर बड़ी ही तेजी से अमेरिका के राजनेताओं समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैली  दरअसल, बुधवार को अमेरिका में ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ न्यूज पेपर के फर्जी संस्करण का व्हाइट हाउस के आस-पास और वॉशिंगटन के व्यस्त इलाके में खुले आम बांटा गया. इसमें दावा किया गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफा दे दिया है.

मुफ्त में बांटे गए अखबार
मूल अखबार के संस्करण की तरह इसे पेश किया गया. इसमें छह कॉलम में बड़ा शीर्षक दिया गया ‘अप्रत्याशित : ट्रंप व्हाइट हाउस से विदा, संकट खत्म’ . खास बात ये थी कि यह अखबार पर प्रकाशित तिथी 16 जनवरी नहीं बल्कि एक मई 2019 लिखी हुई थी.
पेनसिलवेनिया एवेन्यू और व्हाइट हाउस के बाहर एक महिला ने कहा, ‘‘वॉशिंगटन पोस्ट का यह विशेष संस्करण लीजिए. यह मुफ्त है. आपको यह कभी नहीं मिलेगा.’’ 

महिला ने सभी को बांटे अखबार
महिला प्लास्टिक बैग में अखबार का बंडल रखकर वहां से गुजरने वालों को उससे निकालकर अखबार थमा रही थी. ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने एक ट्वीट के जरिए स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि फर्जी अखबार का वितरण किया गया. हालांकि इस मामले में अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय़ व्हाइट हाउस की ओर से किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष पद के लिए इंद्रा नूई का नाम आगे: रिपोर्ट जयपुर टाइम्स

वॉशिंगटन । वल्र्ड बैंक चीफ बनने की रेस में पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूई का नाम भी शामिल है। वाइट हाउस प्रशासन के एक अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक इंद्रा के अलावा ट्रेजरी डिपार्टमेंट के अधिकारी डेविड मालपास और ओवरसीज प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के सीईओ रे वॉशबर्न का नाम भी आगे है। इन तीनों का नाम तब आया है जब चर्चा चल रही थी कि पहली फरवरी को जिम यॉन्ग किम के पद छोड़ते ही राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप विश्व बैंक का नया अध्यक्ष ढूंढने में अगुवाई कर रही हैं। अक्टूबर में इंद्रा नूई ने पेप्सिको छोड़ी थी। मालपास विदेश मंत्रालय में ट्रेजरी के अंडर सेक्रटरी हैं और वॉशबर्न अगस्त 2017 से के सीईओ हैं। ये उन लोगों में हैं जिनका नाम वर्ल्ड बैंक हेड बनने के लिए सामने आ रहा है। यूनाइटेड स्टेट 1949 से ही वर्ल्ड बैंक के लीडर का चुनाव करता आ रहा है। किम ने कार्यकाल खत्म होने के तीन साल पहले ही विश्व बैंक के अध्यक्ष का पद छोडऩे का फैसला किया है। उनका कार्यकाल साल 2022 में खत्म हो रहा था। माना जा रहा है कि कई मामलों में ट्रंप प्रशासन के साथ मतभेद होने की वजह से यह फैसला लिया गया ह

US में करीब एक तिहाई कर्मचारी इस के शिकार

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के करीब एक तिहाई कर्मचारियों ने पिछले दो वर्षों में विश्व निकाय में यौन शोषण का शिकार होने की जानकारी दी है. इस तरह के दुर्व्यवहार पर पहले सर्वेक्षण के मंगलवार को जारी नतीजों में यह जानकारी दी गई. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कर्मचारियों को एक पत्र में कहा है कि अध्ययन में व्यथित करने वाले कुछ आंकड़े और तथ्य हैं जिन्हें बदलने की जरुरत है ताकि संयुक्त राष्ट्र में कार्यस्थल में सुधार किया जा सके.

सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले दो वर्षों में करीब 33 प्रतिशत कर्मचारियों ने कम से कम एक बार यौन शोषण किए जाने की जानकारी दी. बहरहाल, विश्व निकाय में अपनी कार्य अवधि के दौरान किसी न किसी तरह के यौन उत्पीड़न के शिकार हुए लोगों की संख्या 38.7 फीसदी है.

यौन शोषण की सबसे आम घटनाओं में यौन कहानियां या चुटकुले हैं जिनमें कपड़ों, शरीर या यौन गतिविधियों को लेकर अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं. इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि यौन उत्पीड़न करने वाले हर तीन व्यक्तियों में दो पुरुष और हर चार में से एक निरीक्षक या प्रबंधक है.
सर्वेक्षण के अनुसार, यौन शोषण करने वालों में करीब 10 में से एक व्यक्ति वरिष्ठ नेता था. गुतारेस ने कहा कि सर्वेक्षण के नतीजों से पता चलता है कि विश्व निकाय में यौन शोषण के मामले अन्य संगठनों के मुकाबले कम हैं लेकिन समानता, गरिमा और मानवाधिकारों में चैम्पियन संयुक्त राष्ट्र को उच्च मानक तय करने चाहिए.

पाकिस्तान ने बढ़ती जनसंख्या को 'टिकटिक करता टाइमबम'

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की तेजी से बढ़ रही जनसंख्या को ‘टिकटिक करता टाइमबम’ बताते हुए सुप्रीप कोर्ट ने मंगलवार को धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार से जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढा़वा देने की अपील की है. इन उपायों में प्रति परिवार दो बच्चों का नियम भी शामिल है. मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार के नेतृत्व वाली तीन सदस्यों की एक पीठ ने पाकिस्तान में जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े मामले की सुनवाई करने के दौरान यह बात कही.

पाकिस्तान दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है. सुप्रीप कोर्ट ने अपने आदेश में धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार से देश में जनसंख्या नियंत्रण के कदमों का प्रचार के लिए कदम उठाने की अपील की. एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक पीठ ने तेजी से बढ़ रही जनसंख्या को ‘टिकटिक करता टाइमबम’ करार दिया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘‘पूरे देश को जनसंख्या नियंत्रण के कदम के साथ खड़े होने की जरूरत है.' 

पाकिस्तान: सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, उनका अगला अभियान बढ़ती जनसंख्या
आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश साकिब निसार का कहना था कि उनका अगला अभियान बढ़ती जनसंख्या के खिलाफ होगा. गौरतलब है कि संख्या के लिहाज से पाकिस्तान दुनिया का छठवां सबसे बड़ा देश है. मुसलमान देश में बढ़ती जनसंख्या से जुड़े एक मामले की जुलाई में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ने कहा था कि ‘‘जनसंख्या बम’’ को निष्क्रिय करने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ संबंधित कानून भी जरूरी है. फिलहाल ब्रिटेन की यात्रा पर गए न्यायमूर्ति निसार ने कहा कि वह पाकिस्तान में जनसंख्या नियंत्रण पर जागरूकता फैलाने के लिए एक अभियान चलाने पर विचार कर रहे हैं.

पाकिस्तान में बांध बनाने के लिए बर्मिंघम में आयोजित फंडरेजर में जियो न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सचिव कैप्टन (अवकाश प्राप्त) जाहिद सईद की अध्यक्षता में परिवार नियोजन पर एक कार्यबल का गठन किया जा चुका है और उन्होंने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है.उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में 12 और 13दिसंबर को एक सम्मेलन का आयोजन होगा और प्रधानमंत्री तथा मैं उस सम्मेलन का हिस्सा होंगे. उन्होंने रेखांकित किया कि पाकिस्तान के संसाधन खत्म हो रहे हैं और अंतत: इससे संसाधनों के असमान वितरण की स्थिति पैदा होगी. यह देश की मौलिक चिंताओं में से एक है जिससे निपटना जरूरी है.

संयुक्त राष्ट्र की अध्यक्ष ने भारत के लिए कही ये बात

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नेंडा एस्पिनोसा ने बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत के एक अहम भागीदार होने को लेकर उसकी सराहना करते हुए कहा है कि वह जलवायु परिवर्तन पर कार्य और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्रों में एक अग्रणी देश है. मारिया ने इस बात का जिक्र किया कि भारत की विशाल आबादी को देखते हुए इसके द्वारा किए गए कार्यों और जलवायु परिवर्तन तथा गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर सफलता अत्यधिक महत्वपूर्ण है. उन्होंने दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत एक अहम भागीदार देश है. यह इस व्यवस्था का एक बहुत मजबूत और विश्वसनीय साझेदार है. इस बात को स्वीकार किया जाना चाहिए.’’

बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत की रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हुए मारिया ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को बढ़ाने और बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने में यह देश एक बहुत अच्छा सहयोगी है. उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए मैं भारत की सराहना करती हूं. जलवायु के एजेंडा पर भारत एक अग्रणी देश है. नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, गरीबी उन्मूलन का एजेंडा और सतत विकास लक्ष्यों के प्रति इसकी मजबूत प्रतिबद्धता है.’’

संरा महासभा के 73 वें सत्र की अध्यक्ष मारिया ने कहा कि जब कभी हम आतंकवाद निरोध की बात करते हैं तो उसमें भारत को एक अहम भूमिका निभानी होती है. वह बहुत महत्वपूर्ण और मुख्य साझेदार देश है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह नये साल में, मानवाधिकार आधारित रूख के संदर्भ में, हमारे एजेंडा से जुड़ी हर चीज के संदर्भ में, भारत के साथ काम करने को लेकर बहुत ही आशावादी हैं.’’

पिछले साल सितंबर में महासभा अध्यक्ष का प्रभार संभालने से पहले मारिया ने भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. मारिया ने अपने भारत दौरे को याद करते हुए कहा कि यह देख कर वह अभिभूत हो गई थी कि देश में जमीनी स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को किस तरह से क्रियान्वित किया जा रहा है.

पिछले साल उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया था कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत की सफलता दुनिया की तस्वीर बदल सकती है. मारिया ने कहा कि बढ़ती एकपक्षीयता और बढ़ते राष्ट्रवाद के युग में बहुपक्षवाद बहुत महत्वपूर्ण, प्रासंगिक और आवश्यक है, ‘‘खासतौर पर आज के समय में’’.  उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रों को अपने राष्ट्रीय हितों पर गौर करने के साथ - साथ बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था में भी योगदान देना होगा. मारिया ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन के इस विचार से सहमत हैं कि जलवायु परिवर्तन, प्रवास, आतंकवाद निरोध जैसे मुद्दों का हल सिर्फ बहुपक्षीय तरीके से ही हो सकता है.  

बीजेपी सरकार ने महबूबा मुफ्ती के इस बात को लेकर आलोचना की

जम्मू: बीजेपी ने मंगलवार को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की देश के खिलाफ नारेबाजी करने वालों से 'सहानुभूति जताने' के लिए आलोचना की. महबूबा ने 2016 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) देशद्रोह मामले में आरोपपत्र दायर करने के समय को लेकर सवाल खड़े किए थे. आरोपपत्र में सात कश्मीरी छात्रों के नाम शामिल हैं.

बीजेपी उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने यहां कहा कि जेएनयू मामले में पुलिस अपना काम कर रही है और पीडीपी नेता की सोच पर उन्हें 'तरस' आती है.

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 2016 जेएनयू राजद्रोह मामले में आरोप पत्र दायर करने के समय को लेकर सोमवार को सवाल उठाया था और कहा था कि लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए छात्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस आरोप पत्र में सात कश्मीरियों के भी नाम हैं. 
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख ने अपने ट्वीट में कहा था कि इसमें चौंकने वाली बात नहीं है. 2019 का आम चुनाव कुछ महीने बाद होने वाला है और हमेशा की तरह राजनीतिक लाभ लेने के लिए कश्मीरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने कहा था कि आरोप पत्र का समय इससे अधिक संदिग्ध नहीं हो सकता. जब यूपीए सत्ता में थी तब अफजल गुरु को फांसी दी गई और अब तक जम्मू कश्मीर को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.

बता दें दिल्ली पुलिस ने जेएनयू परिसर में नौ फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित दस लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है जिसमें ये सात भी शामिल हैं. वह कार्यक्रम संसद भवन पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर आयोजित किया गया था. 

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह), 143 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र समूह का सदस्य होने के लिए सजा) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.
 

डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को लेकर कही ये बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को तुर्की को चेतावनी दी कि अगर वह सीरिया से अमेरिकी बलों की वापसी के बाद अगर वो कुर्द लड़ाकों पर हमला करता है तो उसे आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ेगा. इसके साथ ही उसने कुर्द लड़ाकों से भी सीरिया को न उकसाने की अपील की.

ट्रंप ने सीरिया से सैनिकों को वापस बुलाने की दिसंबर में घोषणा की थी. तुर्की ने अमेरिका समर्थित कुर्द लड़ाकों की सुरक्षा की शर्त पर बलों की वापसी संबंधी ट्रंप की योजना पर नाराजगी जताई थी. ट्रंप ने ट्वीट किया, 'कुर्द बलों पर हमला करने पर तुर्की को आर्थिक रूप से तबाह कर देंगे.' उन्होंने लिखा, 'इसी तरह, हम यह भी नहीं चाहते कि कुर्द सीरिया को उकसाएं.'

ट्रंप के टॉप स्तर के डिप्लोमेट माइक पोम्पियो इस वक्त उस क्षेत्र के भ्रमण पर हैं ताकि तुर्की और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का हल निकाला जा सके. पोम्पियो कोशिश कर रहे हैं कि आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कुर्द सहयोगियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके, क्योंकि सीरिया से अमेरिकी सेना वापसे होने के बाद तुर्की उन पर हमला कर सकता है.
सीरिया में आईएस के खिलाफ अमेरिका की अगुवाई वाले अभियान का जमीनी स्तर पर कुर्द बहुल सीरियन डेमोक्रेटिक बल (एसडीएफ) नेतृत्व करता है.

तहव्वुर राणा को जल्द लाया जा सकता है अमेरिका से भारत

मुम्बई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले की साजिश के मामले में अमेरिका में 14 साल की कैद की सजा काट रहे तहव्वुर राणा को 2021 में जेल की सजा पूरी होने से पहले भारत भेजे जाने की ‘प्रबल संभावना’ है। एक सूत्र ने इसकी जानकारी दी। शिकागो के निवासी 58 वर्षीय राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान में जन्मे कैनेडियाई नागरिक को डेनमार्क के एक समाचारपत्र के खिलाफ आतंकवादी साजिश रचने और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को मदद मुहैया कराने के मामले में संघीय जूरी ने दोषी ठहराया था।
मुम्बई पर आतंकवादी हमले की साजिश रचने के मामले में राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए- तैयबा के 10 आतंकवादियों द्वारा किए हमले में छह अमेरिकी नागरिकों सहित कुल 166 लोगों की जान गई थी। पुलिस ने नौ आतंकवादियों को मौके पर मार गिराया था और जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकवादी अजमल कसाब को बाद में फांसी दी गई थी। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज हैरी लेनेनवेबर ने राणा को 2013 में 14 साल की सजा सुनाई थी और रिहाई के बाद भी उसपर पांच साल तक नजर रखने का आदेश दिया था।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार उसे दिसंबर 2021 में रिहा किया जाएगा। ट्रम्प प्रशासन के ‘पूरे सहयोग’ के साथ भारत सरकार पाकिस्तानी मूल के कैनेडियाई नागरिक के प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर रही है। राणा की जेल की सजा दिसम्बर 2021 में पूरी होने वाली है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यहां सजा पूरी होने पर राणा को भारत भेजे जाने की ‘प्रबल संभावना’ है।’’ सूत्र ने कहा कि इस दौरान जरूरी कागजी कार्रवाई और जटिल प्रक्रिया को पूरा करना एक ‘चुनौती’ है। 

भारत का विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा कानून एवं विधि मंत्रालय और अमेरिकी विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय सभी की अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया है। उसने कहा कि जब प्रत्यर्पण की बात आती है तो वे अपनी प्रक्रिया को ना धीमा करना चाहते हैं और ना ही तेज करना चाहते हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) प्रक्रिया की समय-सीमा और नौकरशाही संबंधी औपचारिकताओं को कम करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों से सीधे सम्पर्क कर सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार राणा का प्रत्यर्पण दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करेगा, आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ावा देगा और भारतीयों के बीच अमेरिका की छवि को बेहतर बनाएगा। ट्रम्प प्रशासन ने नवम्बर 2018 को मुंबई हमलों की 10वीं बरसी पर हमले में शामिल लोगों को न्याय के दायरे में लाने का अपना संकल्प दोहराया था। 
अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने नवम्बर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्ता के दौरान भी इस मामले को उठाया था। अमेरिका में आंशिक रूप से ठप पड़े सरकारी कामकाज का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय ने राणा के प्रत्यर्पण के सवाल पर प्रतिक्रिया देने में अपनी असमर्थता जाहिर की। भारतीय दूतावास और राणा के वकील ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी करेगी इस काम में मदद

वॉशिंगटनः व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी एवं सलाहकार इवांका विश्व बैंक का नेतृत्व करने के लिए देश का उम्मीदवार चुनने में मदद करेंगी लेकिन वह स्वयं इस पद की उम्मीदवार नहीं हैं. व्हाइट हाउस की संचार उप निदेशक जेसिका डिट्टो ने कहा, 'वित्त मंत्री स्टीवन म्नुचिन और व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मिक मुलवाने ने इवांका ट्रम्प से अनुरोध किया है कि वह अमेरिका की नामांकन प्रक्रिया के प्रबंधन में मदद करें क्योंकि उन्होंने पिछले दो वर्षों में विश्व बैंक के नेतृत्व के साथ निकटता से काम किया है.'

डिट्टो ने कहा कि इस पद के लिए 'इवांका के नाम पर विचार किए जाने संबंधी खबरें गलत हैं''. लंदन के 'द फाइनेंशियल टाइम्स' ने शुक्रवार को कहा था कि जिम योंग किम का स्थान लेने वाले संभावित अमेरिकी उम्मीदवारों में इवांका और संयुक्त राष्ट्र में वाशिंगटन की पूर्व राजदूत निक्की हेली का नाम शामिल है. उल्लेखनीय है कि किम ने अपने दूसरे कार्यकाल के खत्म होने से तीन वर्ष पहले ही विश्व बैंक के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पिछले सप्ताह अचानक घोषणा की थी.

बता दें 8 जनवरी को किम ने अपने फैसले का ऐलान करते हुए ट्वीट कर कहा, 'इस बेहतरीन संस्थान के समर्पित स्टॉफ को लीड करने का मौका मिलना सौभाग्य की बात रही.' बता दें किम 1 फरवरी को यह पद छोड़ देंगे. बता दें इस पद के लिए किम को 2012 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नामित किया था. जिसके बाद ट्रंप के चुनाव से पहले किम को दूसरे कार्यकाल के लिए सितंबर 2016 में दोबारा नियुक्त किया गया, जो जुलाई 2017 को शुरू हुआ.

अमेरिका H-1B वीजा में कर रहा है बड़ा बदलाव,इनको होगा फायदा

वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा धारकों को आश्वासन दिया कि उनका प्रशासन जल्द ऐसे बदलाव करेगा, जिससे उन्हें अमेरिका में रुकने का भरोसा मिलेगा और जिससे उनके लिए ‘‘नागरिकता लेने के लिए संभावित रास्ता बनेगा.’’ अधिकतर एच-1बी वीजा धारक आईटी पेशेवर हैं.

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि उनका प्रशासन एच-1बी वीजा में अमेरिकी नीतियों में बदलाव लाने की योजना बना रहा है और वह प्रतिभाशाली तथा उच्च कौशल लोगों को अमेरिका में कॅरियर बनाने के लिए बढ़ावा देगा.

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘‘अमेरिका में एच-1बी वीजा धारक आश्वस्त हो सकते हैं कि बदलाव जल्द होंगे जिससे आपको यहां रूकने में आसानी होगी और आपको भरोसा मिलेगा. साथ ही इससे यहां की नागरिकता लेने का संभावित रास्ता खुलेगा. हम प्रतिभाशाली और उच्च कौशल लोगों को अमेरिका में कॅरियर बनाने के लिए बढ़ावा देंगे.’’
ट्रंप का ट्वीट भारतीय पेशेवरों और खासकर आईटी क्षेत्र के पेशेवरों के लिए अच्छी खबर के रूप में सामने आया है, जिन्हें ग्रीन कार्ड अथवा स्थायी कानूनी निवास पाने में वर्तमान में करीब एक दशक तक का इंतजार करना पड़ता है.

राष्ट्रपति शासनकाल के प्रथम दो वर्षों में ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा धारकों के वहां अधिक समय तक ठहरने, विस्तार और नया वीजा हासिल करना कठिन बना दिया था. भारतीय आईटी पेशेवर एच-1बी वीजा की काफी चाहत रखते हैं. यह गैर आव्रजन वीजा है जिसमें अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञ विदेशी कामगारों को रोजगार पर रखती हैं