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राजनाथ ने सियाचिन में शहीदों को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली (एजेंसी )। रक्षा मंत्री बनने के बाद राजनाथ सिंह ने पहला दौरा सियाचिन का किया। उन्होंने यहां शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सियाचिन में अब तक करीब 1100 जवान शहीद हुए हैं। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, उत्तरी सेना के कमांडर ले. जनरल रणबीर सिंह, 14 कॉर्प्स कमांडर और करगिल युद्ध के नायक रहे ले. जनरल वाईके जोशी भी मौजूद थे। राजनाथ ने कहा कि हमारे जवानों ने सियाचिन ग्लेशियर पर अदम्य साहस दिखाया है। यहां की मुश्किल परिस्थितियों में पूरे साहस और उत्साह के साथ जवान देश की सुरक्षा करते हैं। उनके इस अटूट साहस और शक्ति को सलाम। विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर राजनाथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। सियाचिन के बाद राजनाथ श्रीनगर जाएंगे। यहां वे सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। पदभार संभालने के बाद राजनाथ ने रावत, एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ और नौसेना अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने रक्षा सचिव संजय मित्रा और तीन वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर अपने मंत्रालय के अधीन आने वाले कार्यों और प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ली। पिछली मोदी सरकार में राजनाथ गृह मंत्री थे। इस बार यह मंत्रालय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दिया गया है।


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अमेरिकी गुड्स पर चीन ने बढ़ाया टैरिफ, हुवेई पर बैन का लिया बदला

बीजिंग (एजेंसी )। चीन के एक कदम से अमेरिका के साथ जारी तनावपूर्ण संबंध और गहरा हो गया है। दरअसल, चीन ने अमेरिकी सामानों पर लगने वाले टैरिफ को बढ़ा दिया है। बता दें कि चीन अविश्‍वसनीय विदेशी कंपनियों को ब्‍लैकलिस्‍ट करने की तैयारी में है। विश्‍लेषकों का कहना है कि इसके पीछे उसका मकसद हुवेई पर बैन लगाने वाले अमेरिका को और विदेशी फर्मों को दंडित करना है। बीजिंग के इस कदम से 60 बिलियन डॉलर की कीमत वाले अमेरिकी सामानों पर असर होगा। 1 जून से लागू हो रहे नए टैरिफ के अनुसार, अमेरिका से आयात होने वाले 5410 उत्पादों पर 5-25 फीसद का टैरिफ शुल्क वसूल किया जाएगा। जिन सामानों पर 25 फीसद का टैरिफ लिया जाएगा उनमें परफ्यूम, आई मेकअप व लिपस्टिक जैसे ब्यूटी प्रॉडक्ट्स के अलावा ओवन, माइक्रोवेव ओवन व कॉफी मशीन जैसे किचनवेयर टेनिस टेबल बॉल्स, बैडमिंटन रैकेट्स व फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स इक्विपमेंट, पियानो व स्ट्रिंग इंस्ट्रूमेंट्स, जिन, वाइन व टकीला जैसे लिक्वर, कंडोम, डायमंड्स, इंडस्ट्रियल रोबोट्स, टायर्स, फैब्रिक, लकड़ी और खिलौने शामिल हैं। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच ट्रेड वार्ता बिना किसी डील के खत्‍म होने के बाद पिछले माह फिर से दोनों देशों के बीच ट्रेड का जंग शुरू हो गया। इसके साथ ही अमेरिका ने चीन पर पुराने प्रतिबद्धताओं से मुकरने का आरोप लगाया।


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रूसी S-400 मिसाइल सिस्‍टम खरीदने के फैसले पर ट्रंप प्रशासन ने भारत को दी चेतावनी, कहा- रक्षा संबंधों पर होगा गंभीर प्रभाव

वॉशिगटन (एजेंसी )। भारत द्वारा रूस की सबसे दूरी की मिसाइल एस 400 रक्षा प्रणाली  खरीदने के फैसले पर अब ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा करने से रक्षा संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। रूस का एस-400 को चीन ने पिछले साल ही रूस से खरीद लिया था। जुलाई में इसकी डिलवरी भी कर दी गई थी। चीन और रूस के बीच साल 2014 में इस रक्षा प्रणाली के लिए 3 बिलियन डॉलर में डील हुई थी। वहीं, भारत ने इस सिस्टम की खरीद के लिए रूस के साथ अक्टूबर 2018 में 40 हजार करोड़ रुपये का सौदा किया था ।विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को संवाददाताओं के एक समूह को बताया कि मॉस्को से एस -400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने का नई दिल्ली का निर्णय महत्वपूर्ण था। अधिकारी इस दृष्टिकोण से असहमत थे कि भारत द्वारा रूस से एस -400 खरीदने का असर तब तक नहीं हो सकता है जब तक वह अमेरिका से अपनी सैन्य खरीद को बढ़ाता है। अधिकारी ने आगे कहा कि मैं असहमत हूं। सीएएटीए प्रतिबंधों  के कारण एस -400 महत्वपूर्ण है। भविष्य में उच्च तकनीक सहयोग के संदर्भ में, यह क्या महत्वपूर्ण है, इसकी वजह से भी महत्वपूर्ण है, "अधिकारी ने कहा। CAATSA के तहत रूस से हथियारों की खरीद पर अमेरिका कांग्रेस द्वारा कुछ प्रतिबंध लगाए गए है। वहीं अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर भारत रूस से एस -400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के अपने फैसले पर आगे बढ़ा, तो इसका रक्षा संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह पूछे जाने पर कि भारत ने रूस से एस -400 खरीदने का निर्णय लिया क्योंकि अमेरिका इस तरह के हार्डवेयर को साझा करने के लिए तैयार नहीं था, अधिकारी ने कहा: "संयुक्त राज्य अमेरिका का एक और संदेश है और वह है कि बात करते हैं। हमारे पास ऐसी प्रणालियां हैं जो प्रभावी हैं।" अन्य प्लेटफ़ॉर्म हैं जो बहुत प्रभावी हैं ”। अधिकारी ने कहा कि खेलने के साथ-साथ अन्य विचार भी हैं। "लेकिन मुझे लगता है कि एक बहुत ही सकारात्मक संदेश है।


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पीएनबी घोटाला : नीरव की रिमांड 27 जून तक बढ़ी

लंदन (एजेंसी )। नीरव मोदी (48) गुरुवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उसकी हिरासत 27 जून तक बढ़ा दी है। जज ने भारत सरकार से कहा है कि नीरव को कौनसी जेल में रखा जाएगा। 14 दिन में इसकी जानकारी दें। 13700 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले का आरोपी नीरव साउथ-वेस्ट लंदन की वांड्सवर्थ जेल में है। 19 मार्च को सेंट्रल लंदन की मेट्रो बैंक ब्रांच से नीरव की गिरफ्तारी हुई थी। वह बैंक खाता खुलवाने पहुंचा था। नीरव की जमानत अर्जी तीन बार खारिज हो चुकी है। उसने 8 मई को आखिरी बार अर्जी लगाई थी। नीरव की वकील क्लेर मोंटगोमरी ने दलील दी थी कि जमानत के लिए नीरव कोर्ट की सभी शर्तें मानने के लिए तैयार है क्योंकि वांड्सवर्थ जेल की स्थितियां रहने के लायक नहीं हैं।


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अमेरिका ने भारत को बताया महान सहयोगी

वाशिंगटन, एजेंसी। ट्रंप प्रशासन ने भारत को अमेरिका का 'महान सहयोगी'  बताया है। उसने कहा है कि अमेरिका भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा। विदेश विभाग की प्रवक्‍ता मॉर्गन ऑर्टागस ने संवाददाताओं से ऑफ कैमरा बातचीत में कहा कि अमेरिका, भारत में लोकसभा चुनावों की निष्‍पक्षता को लेकर पूरी तरह आश्‍वस्‍त था। ऑर्टागस ने कहा कि हम निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर काम करेंगे। अमेरिकी विदेश सचिव माइक पोंपियो ने भी भारत के अपने समकक्ष से बातचीत की इच्‍छा जताई है। मैं समझती हूं कि पोंपियो अपने भारतीय समकक्ष के साथ कई मुद्दों पर गहन बातचीत करेंगे। भारत अमेरिका का महान सहयोगी है। हमें भारत में लोकसभा चुनावों की निष्‍पक्षता और उसकी सत्‍यता पर पूरा भरोसा है। उल्‍लेखनीय है कि लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड विजय के बाद दुनियाभर के नेताओं ने उन्‍हें बधाइयां दी थी। खुद अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उप राष्‍ट्रपति माइक पेंस एवं अमेरिकी विदेश सचिव माइक पोंपियो  ने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय जनता पार्टी को बधाई दी थी। भारतीय दूतावास के मुताबिक, अब तक 50 से अधिक अमेरिकी सांसद और वरिष्‍ठ अधिकारी प्रधानमंत्री मोदी को जीत की बधाई दे चुके हैं।  


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धार्मिक मामलों के मंत्रालय के कर्मचारियों की बस में IED ब्लास्ट, 10 लोग घायल

काबुल (एजेंसी )। अफगानिस्तान के काबुल शहर के PD2 में सोमवार सुबह हज और धार्मिक मामलों के मंत्रालय के कर्मचारियों की एक बस को निशाना बनाकर IED ब्लास्ट किया। इस धमाके में तकरीबन 10 लोगों घायल हो गए है। अधिकारियों ने खुद इस हमले की पुष्टि की है।  वहीं दूसरी ओर टोलो न्यूज के अनुसार, अफगानिस्तान के काबुल शहर के कर्त-ए-साकी इलाके में रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने एक ही परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी है। हाल ही में काबुल से सटे शहर-ए-नाव क्षेत्र में धमाका हुआ था।।  धमाके में कई लोग घायल भी हुए थे।  इसके बाद 17 मई को भी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के ओबा जिले में बम धमाका हुआ। जिसमें दो बच्चों और दो लोगों की मौत हो गई है। इस हादसे में 14 लोग भी घायल हो गए हैं। 


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अमेरिका ने फ़ारस की खाड़ी में उड़ने वाले विमानों को दी चेतावनी

वाशिंगटन (एजेंसी )। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने फ़ारस की खाड़ी में उड़ान भरने वाले विमानों को चेतावनी जारी की है। अमेरिकी राजनयिकों ने शनिवार को कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव के कारण फ़ारस की खाड़ी में उड़ान भरने वाले विमानों को खतरा पैदा हो सकता है।  अमेरिकी राजनयिकों ने कहा है कि फ़ारस की खाड़ी में पैदा तनाव के दौरान वहां से उड़ने वाले विमानों को दुश्मन का जहाज समझने की गलतफहमी भी हो सकती है। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने वैश्विक हवाई यात्रा के लिए मौजूदा तनाव के जोखिमों को रेखांकित किया है। इससे पहले ईरान से बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने अपने गैर-आपातकालीन अधिकारियों को बगदाद छोड़ने के निर्देश दिए। अमेरिकी विदेश विभाग ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास और एर्बिल में वाणिज्‍य दूतावास के अधिकारियों को स्‍वदेश वापस लौटने को कहा था। इस बीच सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हुए हमले ने भी मौजूदा तनाव को और बढ़ा दिया। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की जल सीमा में चार तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद तेल के दाम बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। सऊदी अरब ने सीधे तौर पर इस हमले के लिए ईरान को दोषी ठहराया है। वहीं, यमन में ईरान-गठबंधन के विद्रोहियों ने सऊदी तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली।


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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध की खबरों को बताया फेक

वॉशिंगटन (एजेंसी )। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशा जताई है कि ईरान जल्द ही बात करने की कोशिश करेगा। साथ ही ट्रंप ने उन सब खबरों को खारिज भी कर दिया है। जिनमें ईरान के खिलाफ युद्ध की तैयारियों की बात कही गई थी। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव चल रहा है। इस बीच मीडिया में खबरें थी कि अमेरिका के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ईरान से मुकाबला करने के लिए मध्य पूर्व में लगभग एक लाख 20 हजार सैनिकों को भेजने की योजना पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने मीडिया की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि हमें आशा है कि ईरान बात करने की कोशिश करेगा। और युद्ध की सभी खबरें गलत हैं। हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है। साथ ही बुधवार को इराक में मौजूद अधिकारियों को अमेरिका वापस बुला लिया है। कल गैर-आपातकालीन अमेरिकी अधिकारियों को ट्रंप प्रशासन ने वापस लौटने का आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा है कि ईरान से जुड़े इराकी मिलिशिया से उसके अधिकारियों को खतरा है। 


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अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने बगदाद स्थित दूतावास से अधिकारी बुलाए

वाशिंगटन (एजेंसी )। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने अपने गैर-आपातकालीन अधिकारियों को बगदाद छोड़ने के निर्देश दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास और एर्बिल में वाणिज्‍य दूतावास के अधिकारियों को स्‍वदेश वापस लौटने को कहा है। विभाग की ओर से बताया गया है कि दोनों पोस्‍टों से सामान्‍य वीजा सेवाएं अस्‍थाई रूप से निलंबित रहेंगी। हालांकि अभी यह निश्चित नहीं है कि कुल कितने कर्मचारियों को वापस बुलाया जाएगा। बता दें कि ट्रंप ने पिछले साल आठ मई को ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने का एलान किया था। इसके बाद उसके तेल निर्यात को रोकने के साथ ही उस पर कई कठोर प्रतिबंध लगा दिए। ट्रंप ने ईरान पर यह कार्रवाई उसके परमाणु कार्यक्रम और आतंकी गतिविधियों को लेकर की थी। इन प्रतिबंधों के कारण भारत और चीन जैसे देशों को दी गई रियायत खत्म हो गई जिसकी वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस बीच ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने प्रमुख सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले किए हैं। इस तरह सऊदी के दो तेल टैंकरों पर यूएई तट पर हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है। हालांकि, ईरान ने इन हमलों में अपना हाथ होने से इनकार करते हुए इन्‍हें एक साजिश करार दिया है। दोनों देशों में बढ़े तनाव के बाद ऐसी खबरें आईं कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इस क्षेत्र में एक लाख 20 हजार सैनिकों की तैनाती कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध की तैयारी के बारे में रिपोर्टों को खारिज कर दिया है। वहीं बीती रात ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई युद्ध नहीं होने जा रहा है। कोई भी युद्ध नहीं करना चाहता है।  


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बलूचिस्तान में एक और बड़ा आतंकी हमला, 4 पुलिसकर्मियों की मौत

करांची (एजेंसी )। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सोमवार को एक बड़े आतंकी हमले में 4 पुलिसकर्मियों को मौत हो गई है, जबकि 11 घायल हुए हैं। यह हमला उस वक्त हुआ जब बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में लोग एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए थे। पुलिसकर्मी यहां नमाज पढ़ने वालों की सुरक्षा में लगे थे, तभी यहां एक बम ब्लास्ट हुआ। बताया जा रहा है कि यह एक रिमोट कंट्रोल के द्वारा किया गया ब्लास्ट था। पिछले तीन दिनों में यहां दूसरा बड़ा आतंकी हमला हुआ है। क्वेटा के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल(डीआईजी) रज्जाक चीमा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि हमारे पुलिसकर्मी यहां मस्जिद की सुरक्षा में तैनात थे। हमले में हमारी रेपिड रिस्‍पॉन्‍स ग्रुप के चार कर्मियों की मौत हो गई है, जबकि घायलों की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है। यहां के गृहमंत्री जियाउल्लाह लंगोव ने बताया कि इस हमले में 11 लोग घायल हो गए हैं। यह बलूचिस्तान में पिछले तीन दिनों में दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले शनिवार को ग्वादर में आतंकियों ने एक लग्जरी होटल को अपना निशाना बनाया था। इसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में पाकिस्तानी जल सेना का एक सैनिक और तीन आतंकी शामिल थे। 


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G-20 सम्मेलन में हो सकती है डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात

वाशिंगटन (एजेंसी )। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार लैरी कुडलो ने कहा है कि जापान में अगले महीने होने वाले जी-20 आर्थिक सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग की मुलाकात की प्रबल संभावना है। सीएनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, कुडलो ने रविवार को एक टीवी पर साक्षात्कार देते हुए कहा कि इस मुलाकात की संभावना अच्छी है लेकिन अमेरिकी और चीनी वार्ताकारों की अगली मुलाकात कब होगी इसके लिए कोई ठोस योजना तैयार नहीं है। शुक्रवार को अमेरिका और चीनी वार्ताकारों की 11वें चरण की वार्ता दोनों देशों के बीच जारी व्यापार युद्ध को खत्म करने का समझौता करने में विफल रही। 2018 में ट्रंप द्वारा चीन से आयातित 200 अरब डॉलर की वस्तुओं पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध शुरू हुआ था, इसके बाद चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 60 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर कर वसूला था। कुडलो ने कहा कि वार्ता जारी रहेगी। मैं कहूंगा कि अगले महीने जापान में जी-20 सम्मेलन है और राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी की मुलाकात की काफी उम्मीद है।


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चिनूक के बाद वायुसेना को मिला पहला अपाचे हेलीकॉप्टर

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना को आज अपना पहला लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे गार्जियन मिल गया है। इसका निर्माण अमेरिका के एरिजोना में हुआ है। भारत ने अमेरिका के साथ 22 ऐसे हेलीकॉप्टर के लिए अनुबंध किया था। इससे पहले वायुसेना को चिकून हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर मिल चुका है। बोइंग एएच-64 ई अपाचे को दुनिया का सबसे घातक हेलीकॉप्टर माना जाता है। पिछले साल अमेरिका ने भारतीय सेना को छह एएच-64 ई हेलीकॉप्टर देने के समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसे चीन और पाकिस्तानी सीमा पर तैनात किया जाएगा। बोइंग एएच-64ई अमेरिकी सेना और अन्य अतंरराष्ट्रीय रक्षा सेनाओं का सबसे एडवांस हेलीकॉप्टर है। यह एक साथ कई काम करने में सक्षम है। अपाचे हेलीकॉप्टर को अमेरिका ने पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के दुश्मनों से लोहा लेने में प्रयोग किया है। लेबनान और गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों के लिए इजरायल इसी का प्रयोग करता रहा है। अमेरिकी सेना के एडवांस अटैक हेलिकॉप्टर प्रोग्राम के लिए इस हेलीकॉप्टर को बनाया गया था। साल 1975 में इसने पहली उड़ान भरी थी। अमेरिकी सेना में इसे साल 1986 में शामिल किया गया था। इस हेलीकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक टी700 टर्बोशैफ्ट इंजन लगे हैं। इसमें आगे की तरफ सेंसर फिट है जिसकी वजह से यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। अपाचे 365 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। तेज गति के कारण यह दुश्मनों के टैंकरों के आसानी से परखच्चे उड़ा सकता है। इस हेलीकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हैं। जिनके पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन रहता है। इसके अलावा इसके दोनों तरफ 30एमएम की दो गन लगी हैं। इसका वजन 5,165 किलोग्राम है। इसके अंदर दो पायलटों के बैठने की जगह होती है। इसे इस तरीके से डिजायन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है।