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चीन की हिरासत में लापता इंटरपोल चीफ मेंग होंगवेई, इस्तीफा भेजा

लियोन: अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने रविवार को घोषणा की कि उन्हें अपने प्रमुख मेंग होंगवेई का इस्तीफा प्राप्त हो गया है. मेंग 25 सितम्बर से लापता हैं और चीन को उन पर कानून का उल्लंघन करने का संदेह है.  इंटरपोल ने एक बयान में कहा कि मेंग ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है और दक्षिण कोरिया के किम जोंग यांग को कार्यवाहक प्रमुख बनाया गया है. इससे पहले चीन ने रविवार को आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि कर दी थी कि वह कानून का उल्लंघन करने के आरोप को लेकर इंटरपोल प्रमुख के खिलाफ जांच कर रहा है.

दरअसल, अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन के प्रमुख लापता बताए जा रहे हैं. हालांकि, यह साफ नहीं कि इंटरपोल के प्रमुख मेंग होंगवेई को हिरासत में रखा गया है, या नहीं. मेंग चीन के सार्वजनिक सुरक्षा उप मंत्री भी हैं. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने एक आधिकारिक बयान के हवाले से अपनी खबर में बताया था कि चीन का राष्ट्रीय पर्यवेक्षण आयोग कानून के उल्लंघन के संदेह को लेकर 64 साल के मेंग के खिलाफ जांच कर रहा है.

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चीन ने पुष्टि उन खबरों के बीच की थी, जिनके अनुसार इंटरपोल ने चीन से अपने लापता प्रमुख के बारे में पूछा था. इंटरपोल का मुख्यालय फ्रांस के लियोन शहर में है. फ्रांस से मिली खबरों के अनुसार, मेंग को आखिरी बार 29 सितंबर को फ्रांस में देखा गया था.   

चीन में मिले लापता इंटरपोल चीफ, पूछताछ के लिए हिरासत में लिया

फ्रांस। छह दिन से लापता इंटरपोल के अध्यक्ष मेंग होंगवेई (64) का पता चल गया है। वे चीन पुलिस की हिरासत में हैं। हालांकि, दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें एक पुराने मामले में पकड़ा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि मामला क्या है।मेंग की पत्नी ने उनके लापता होने की जानकारी दी थी, इसके बाद शुक्रवार को फ्रांस सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। हॉन्गकॉन्ग के अखबार- साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते चीन में उतरते ही मेंग को हिरासत में ले लिया गया।

दो साल पहले बने थे इंटरपोल के अध्यक्ष : फ्रांस के लियॉन शहर में रहने वाली मेंग की पत्नी ने वहां की पुलिस को बताया था कि पति से उनकी पिछली मुलाकात सितंबर के आखिरी हफ्ते में हुई थी। मेंग 29 सितंबर को फ्रांस से चीन के लिए रवाना हुए थे। नवंबर 2016 में इंटरपोल का अध्यक्ष बनने से पहले मेंग चीन में नागरिक सुरक्षा मामलों के उपमंत्री थे। उनकी जिम्मेदारी खुफिया पुलिस का कामकाज देखने की थी। इंटरपोल के 95 साल के इतिहास में मेंग पहले ऐसे चीनी नागरिक हैं, जो इस संगठन के अध्यक्ष बने।

नादिया मुराद ने दुनियाभर के यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को समर्पित किया 'शांति नोबेल पुरस्कार'

बगदाद । आतंकवादियों के चंगुल से किसी तरह जान बचा कर भागी यजीदी महिला नादिया मुराद को शुक्रवार को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। नादिया इस सम्मान से अभिभूत हैं और उन्होंने कहा है कि वह अवॉर्ड याजिदी, इराकी, कुर्द, अन्य पीड़ित अल्पसंख्यों तथा दुनियाभर में यौन उत्पीड़न का शिकार हुए अनगिनत लोगों को समर्पित करना चाहेंगी। उल्लेखनीय है कि नादिया को यह पुरस्कार यौन हिंसा के खिलाफ प्रभावी मुहिम चलाने और महिला अधिकारों के लिए उत्कृष्ट कार्य के बदले दिया गया है।

उन्होंने लिखा, 'आज सुबह नोबेल कमिटी ने मुझे सूचित किया कि मुझे 2018 नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। मैं नोबेल कमिटी का आभार जताती हूं। मैं उनके समर्थन से सम्मानित महसूस कर रही है और मैं यह पुरस्कार याजिदी, इराकी, कुर्द, अन्य पीड़ित अल्पसंख्यों तथा दुनियाभर में यौन उत्पीड़न का शिकार अनगिनत लोगों को समर्पित करना चाहूंगी।' नादिया ने कहा, 'मैं इस अवसर के लिए आभारी हूं जिसके जरिए मुझे याजिदी लोगों की दशा की तरफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने का अवसर मिलेगा, जिन लोगों ने आईएस के नरसंहार को झेला है जिसकी शुरुआत 2014 में हुई थी।'

उन्होंने कहा कि की याजिदी इस पुरस्कार को देखकर लोग अपने परिवार के उन सदस्यों को याद करेंगे जिन्हें उन्होंने खो दिया है। अन्य कई अल्पसंख्यक समुदाय की तरह याजिदी ने ऐतिहासिक यातना के भार को झेला है। महिलाएं ज्यादा प्रभावित हुई हैं क्योंकि वे यौन उत्पीड़न का शिकार होती रही हैं और हो रही हैं। नादिया ने उनके साथ संयुक्त रूप से इस पुरस्कार के लिए चुने गए डीआर कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे को बधाई दी। नादिया ने रविवार को वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की है।

अमेरिकी प्रतिबंधो के बावजूद ईरान से क्रूड आॅयल आयात जारी रखेगा भारत

दिल्ली। अमेरिकी सरकार  के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि ट्रम्प प्रशासन सक्रिय रूप से प्रतिबंधों पर छूट पर विचार कर रहा है, जो अगले महीने ईरानी तेल के आयात को कम करने वाले देशों के लिए फिर से लागू होगा. ट्रंप प्रशासन इस साल मई में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते से पीछे हट गया था. अब वह 4 नवंबर से ईरान के कच्चे तेल उपभोक्ताओं पर एकतरफा प्रतिबंधों को फिर से लागू कर रहा है. प्रतिबंधों का उद्देश्य तेहरान को सीरिया और इराक में संघर्षों में शामिल होने से रोकना और इसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर करना है. ईरान का कहना है कि उसने साल 2015 के परमाणु समझौते का पालन किया है.

सरकार के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रशासन एसआरई छूट पर विचार करने की प्रक्रिया में है. ऐसा पहली बार है जब अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि प्रशासन छूट पर विचार कर रहा है. स्टेट सेक्रेटरी माइक पोम्पियो ने पिछले महीने भारत में कहा था कि प्रशासन छूट पर विचार करेगा.
बता दें कि रूस से S-400 मिसाइल डील के बाद अब भारत ने अमेरिका को दूसरा झटका दिया है. भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के साथ कारोबार जारी रखेगा. सरकारी रिफाइनर्स ने ईरान से 1.25 मिलियन टन क्रूड ऑयल खरीदने के लिए करार किया है. यही नहीं भारत ने अमेरिकी डॉलर में पेमेंट की जगह रुपये में कारोबार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की तैयारी कर ली है.

दरअसल, अमेरिका 4 नवंबर से ईरान से तेल खरीदने वाले देशों के लिए अपने प्रतिबंधों को पूरी तरह प्रभावकारी बना देगा. हालांकि, ईरान के खिलाफ प्रतिबंध अमेरिका का द्विपक्षीय मसला है, लेकिन अमेरिका इसमें पूरी दुनिया को खींच चुका है. अमेरिका का साफ कहना है कि नवंबर के बाद अगर किसी देश ने ईरान के साथ बिजनेस जारी रखा, वो अमेरिका के साथ बिजनेस नहीं कर पाएगा. हालांकि, भारत ने ईरान के साथ बिजनेस जारी रखने का फैसला लिया है. ऐसे में रूस से S-400 डील के बाद यह एक तरह से भारत द्वारा अमेरिका को दिया गया दूसरा झटका होगा.

चीनी जासूसों ने लगाई एपल व अमेजन के सर्वर में सेंध, माइक्रोचिप का किया इस्तेमाल

चीनी जासूसों के साइबर हमले की चपेट में अमेरिका की लगभग 30 कंपनियां आ गई हैं। इनमें अमेजन और एपल जैसी कंपनियां भी हैं। अमेजन के सर्वर की जांच के दौरान मदरबोर्ड पर यह चिप पाई गई।

अमेजन डॉट कॉम ने अपनी वीडियो सेवा को बेहतर बनाने के लिए 2015 में एलीमेंटल टेक्नोलॉजी नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था, जिसे आज अमेजन प्राइम वीडियो के नाम से जाना जाता है। एलीमेंटल की सुरक्षा की जांच के लिए अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) ने एक थर्ड पार्टी कंपनी से करार किया।

इसमें सबसे पहले जो परेशानी सामने आई उसने एडब्ल्यूएस को एलीमेंटल के मुख्य उत्पाद यानी महंगे सर्वर पर नजर रखने के लिए प्रेरित किया, जिन्हें उपभोक्ता अपने वीडियो कंप्रेस करने के लिए नेटवर्क पर इंस्टाल करते हैं। एलीमेंटल के लिए यह सर्वर सैन जोस की एक कंपनी सुपर माइक्रो कंप्यूटर या सुपरमाइक्रो ने बनाए थे। यह कंपनी मदरबोर्ड सप्लाई करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है।

2015 में ही एलीमेंटल ने जांच के लिए कुछ सर्वर सुरक्षा कंपनी के पास भेजे। जांच में सर्वर के मदरबोर्ड पर चावल के दाने जितनी बड़ी एक माइक्रोचिप मिली, जो बोर्ड की डिजाइन का भाग नहीं थी। अमेजन ने यह जानकारी अमेरिका के सुरक्षा अधिकारियों को दी। बता दें कि एलीमेंटल के सर्वर रक्षा डाटा केंद्र के विभाग, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी सीआइए के ड्रोन ऑपरेशन और नौसेना के युद्धपोतों के ऑनबोर्ड नेटवर्क में इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं, एलीमेंटल सुपरमाइक्रो के सैकड़ों कस्टमर में से एक है।

उच्च स्तरीय गुप्त जांच में पता चला कि इस चिप की सहायता से परिवर्तित मशीनों समेत किसी भी नेटवर्क में पहुंचा जा सकता था। जानकारी के मुताबिक जांच में पाया गया कि माइक्रोचिप को चीन में सब कांट्रैक्टर उत्पादकों द्वारा संचालित फैक्ट्री में डाला गया था।
 

रूस की खुफिया एजेंसी पर लगे दुनियाभर के साइबर अपराधों के आरोप

ब्रसेल्स। पश्चिमी देशों ने रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू पर बड़े साइबर हमले करने का आरोप लगाया है। नीदरलैंड्स और ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी हैकरों ने रासायनिक हथियारों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था और 2014 में यूक्रेन के ऊपर मलेशियाई विमान को गिराने की घटना की जांच पर हमला किया गया। दोनों मामलों में रूस ने साइबर हमला करके निष्कर्षो के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की।
जीआरयू पर आरोप है कि उसने बीते अप्रैल में रासायनिक हथियारों की जांच करने वाली संस्था के रिकॉर्ड में घुसपैठ की। नीदरलैंड्स की रक्षा मंत्री एनक बिजलेवीड ने बताया है कि चार रूसी खुफिया अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से देश से निष्कासित कर दिया गया है।

मलेशियाई विमान हादसा मामले में डच रक्षा मंत्री ने कहा, हमें मामले से जुड़े रूसी हितों की जानकारी है। इसलिए जांच को सही दिशा में जारी रखने के लिए हम आवश्यक कदम उठा रहे हैं। दोनों मामलों में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स की सरकारों ने रूस की संलिप्तता की निंदा की है।
अमेरिका ने सात रूसी जासूस काली सूची में डाले
अमेरिका के न्याय विभाग ने रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू के सात अधिकारियों को काली सूची में डाल दिया। इस सूची में आने के बाद उनका अमेरिका और उसके मित्र देशों से किसी तरह का संपर्क नहीं रह पाएगा और न ही वे इन देशों में या उनकी एयरलाइंस में यात्रा कर पाएंगे। यह कार्रवाई नीदरलैंड्स में हुए साइबर हमले के सिलसिले में की गई है।

डेनिस मुक्वेगे व नादिया मुराद को मिलेगा 2018 का शांति नोबेल पुरस्कार

आज नोबेल के शांति पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा कर दी गई है। नॉर्वे की कमेटी ने इस साल दो लोगों को इस पुरस्कार के लिए चुना है। जिनके नाम डेनिस मुक्वेगे और उनकी साथी नादिया मुराद हैं।

नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रेइस एंडरसन ने यहां नामों की घोषणा करते हुए कहा कि इन दोनों को यौन हिंसा को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के इनके प्रयासों के लिए चुना गया है। दोनों वैश्विक अभिशाप के खिलाफ संघर्ष के उदाहरण हैं। शांति का नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति के अनुसार इस बार 216 व्यक्तियों और 115 संगठनों को नामित किया गया था।

प्रति वर्ष यह पुरस्कार उस शख्स या व्यक्ति को दिया जाता है जिसने विश्व शांति में अपना योगदान दिया हो या शांति के लिए कोशिश की हो। इस साल इस पुरस्कार के लिए कुल 331 लोग नामित किए गए थे। जो नामांकित व्यक्तियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है।

 जिसे शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाता है उसके नाम को गुप्त रखा जाता है। नामांकित किए व्यक्तियों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन और पोप फ्रांसिस जैसी शख्सियतों का भी नाम शामिल था।

शांति पुरस्कार देने वाली संस्था ने ट्वीट कर कहा, 2018 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेगे ने युद्ध के समय यौन हिंसा के पीड़ितों की रक्षा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनकी साथी नादिया मुराद को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसने खुद और दूसरों के खिलाफ दुर्व्यवहार के बारे में जिक्र किया है।'

जानें कौन हैं डेनिस मुक्वेगे
डेनिस का जन्म 1 मार्च 1955 को पेंटोकोस्टल मंत्री के घर हुआ था। पेशे से गायनोकोलोजिस्ट 9 भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर के हैं। उन्होंने बुकावू के पनजी अस्पताल में काफी काम किया है। यहां वह उन महिलाओं का इलाज करते थे जिनके साथ सुरक्षाबलों ने बलात्कार या समूहिक दुष्कर्म किया होता था। दूसरे कांगों युद्ध के बाद उन्होंने ऐसी हजारों पीड़िताओं का इलाज किया है। वह 18 घंटे के दौरान लगभग 10 पीड़िताओं की सर्जरी किया करते थे। द ग्लोब एंड मॉल के अनुसार मुक्वेगे बलात्कार की चोटों को ठीक करने के लिए दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञ हैं।

जानें कौन है नादिया मुराद
नादिया मुराद बसी ताहा का जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था। वह इराक की यजीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्हें आईएसआईएस ने अगवा करके तीन सालों तक बंधक बनाकर रखा था। मुराद नादिया अभियान की संस्थापक हैं। यह संस्था उन महिलाओं और बच्चों की मदद करती है जो नरसंहार, सामूहिक अत्याचार और मानव तस्करी के पीड़ित होते हैं। संस्था उन्हें अपनी जिंदगी दोबारा जीने और उन बुरी यादों से उबरने में मदद करती है। 

रोहिंग्या शरणार्थीयों को म्यांमार भेजने पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महज कुछ घंटों बाद मणिपुर से रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजे पर रोक लगाने से गुरुवार को साफ इनकार कर दिया। भारत की तरफ से आधिकारिक तौर पर म्यांमार प्रत्यर्पण का यह पहला मामला है।वकील प्रशांत भूषण ने इस में सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी और कहा था कि यह अदालत का कर्तव्य है कि वह राज्य विहीन रोहिंग्या शरणार्थियों की रक्षा करे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने प्रशांत भूषण से कहा कि उन्हें इस बात को याद दिलाने की कोई आवश्यता नहीं है कि जजों की क्या जिम्मेदारियां हैं। गृह मंत्रालय ने हलफनामा दायर कर कहा था कि सात रोहिंग्या अपनी सजा पूरी करने के बाद वापस म्यांमार जाने को तैयार हैं। अवैध प्रवासी थे और उन्हें फॉरनर्स एक्ट में दोषी पाया गया था।

सरकारी वकील ने कहा- म्यांमार वापस लेने को है तैयार
सरकार की तरफ से पेश हुए सीनियर कानूनी अधिकारी तुषार मेहता ने कोर्ट से बताया कि म्यांमार सरकार ने इस बात को माना है कि वे उनके नागरिक हैं और उनको पहचान के लिए सार्टिफिकेट दिए हैं ताकि उनकी वापसी हो सके।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल तथा न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने यह आदेश दिया। 
गौरतलब है कि न्यायालय में बुधवार को एक याचिका दाखिल कर केंद्र को असम के सिलचर में हिरासत केंद्र में बंद सात रोहिंग्याओं को म्यामां भेजने से रोकने का अनुरोध किया गया था। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा था कि रोहिंग्या प्रवासियों को गुरुवार को मणिपुर में मोरे सीमा चौकी पर म्यामां अधिकारियों को सौंपा जाएगा। सात रोहिंग्याओं के प्रस्तावित निर्वासन को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के अनुरोध वाली यह अंतरिम याचिका पहले से ही लंबित जनहित याचिका में दाखिल की गई।

दो रोहिंग्या प्रवासी मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने पहले जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर भेदभाव और हिंसा के कारण म्यामां से भागकर भारत आने वाले 40,000 शरणार्थियों को उनके देश भेजने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी थी। असम के हिरासत शिविर में करीब 32 रोहिंग्या शरणार्थी है। इनमें से नाबालिग समेत करीब 15 रोंहिग्या शरणार्थी तेजपुर में हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर म्यांमार के रखाइन राज्य के हैं जिन्हें साल 2014 में रेलवे पुलिस ने पकड़ा था।

भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या
पिछले कई वर्षों से हजारों की संख्या में म्यांमार के पश्चिमी तटवर्ती इलाके रखाइन में रहनेवाले रोहिंग्या मुसलमान पुलिस और कट्टरपंथी रोहिंग्या के बीच छिड़ी खूनी लड़ाई के चलते वहां से भागने के मजबूर हुए। ज्यादातर ये रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश गए लेकिन उनमें कुछ सीमा पार कर भारत आ गए। भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ऐसा मानते हैं कि भारत में ऐसे शरणार्थियों की संख्या करीब 40 हजार है।

रूस के साथ एस-400 समझौते पर बौखलाया अमेरिका 

नई दिल्‍ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत दौरे पर आ रहे हैं. इस दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीद पर भारत और रूस के बीच करार होने की संभावना है. अमेरिका इस डील के खिलाफ है क्योंकि वह चाहता है कि भारत S-400 की जगह उसका बनाया थाड (THAAD-टर्मिनल हाई ऑल्टिट्यूड एरिया डिफेंस) सिस्टम खरीदे. भारत पर वह लगातार दबाव भी बनाता रहा है लेकिन थाड की डील नहीं हुई और एक-दो दिन के अंदर S-400 पर बात बन जाएगी. आइए जानते हैं कि भारत क्यों थाड के बदले रूस निर्मित S-400 खरीदने जा रहा है।

एस-400 और थाड दोनों एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली हैं लेकिन दोनों की मारक क्षमता में काफी अंतर है. S-400 300 किलोमीटर की रेंज तक मार कर सकता है. यह 'फायर एंड फॉरगेट' की नीति पर काम करता है. S-400 जहां कई स्तर के डिफेंस सिस्टम पर काम करता है, तो थाड सिंगल लेयर डिफेंस प्रणाली है।

थाड जहां 3 हजार मीटर प्रति सेकेंड की गति से आते खतरों को भेद सकता है, तो S-400 4,800 मीटर प्रति सेकेंड वाले टारगेट को आसानी से तबाह कर सकता है. S-400 ट्रंफ मिसाइल एक साथ 100 हवाई खतरों को भांप सकता है और अमेरिका निर्मित एफ-35 जैसे 6 लड़ाकू विमानों को एक साथ दाग सकता है।
S-400 लगभग 400 किमी के दायरे में किसी भी विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. इसकी मारक क्षमता अचूक है क्योंकि यह एक साथ तीन दिशाओं में मिसाइल दाग सकता है. जबकि अमेरिकी थाड ऐसा एंटी मिसाइल सिस्टम है जो खतरे को भेदने से ज्यादा अपने लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में ज्यादा प्रयोग होता है।

अमेरिकी थाड डिफेंस सिस्टम कोई विस्फोटक वॉरहेड रॉकेट नहीं है. दरअसल थाड टारगेट को निशाना बनाता है न कि उसमें विस्फोट कर उसे तबाह करता है. जबकि S-400 के जरिए एक साथ तीन मिसाइल छोड़ी जा सकती है. एक चरण में कुल 72 मिसाइलें शामिल रहती हैं. यह एक साथ कई लक्ष्यों पर वार कर सकता है।
S-400 एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है. इसके अलावा इसमें स्टैंड-ऑफ जैमर एयरक्राफ्ट, एयरबोर्न वॉर्निंग और कंट्रोल सिस्टम एयरक्राफ्ट है. यह बैलिस्टिक और क्रूज दोनों मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर सकता है, जबकि थाड में एक ही प्रकार का मिसाइल सिस्टम होता है जो किसी एक दिशा में निशाना साधता है।

S-400 रोड मोबाइल है और इसके बारे में कहा जाता है कि आदेश मिलते ही पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है.  S-400 की रेंज 150 किमी है, जबकि थाड मात्र 30 किमी तक मार करता है. S-400 360 डिग्री के दायरे में स्कैन कर निशाने को भेद सकता है, जबकि थाड 90 डिग्री होरिजोंटल और 60 डिग्री वर्टिकल स्वीप पर काम करता हैदोनों मिसाइल सिस्टम की कीमतों की तुलना करें, तो 6 लॉन्चर और 8 इंटरसेप्टर के साथ एक थाड की कीमत 2-3 अरब डॉलर है, जबकि S-400 8 लॉन्चर और चार इंटरसेप्टर के साथ 500 मिलियन डॉलर में खरीदा जा सकता है. कुल मिलाकर S-400 थाड की तुलना में 6 गुना सस्ता है।

दक्षिण चीन सागर में टकराने से बचे अमेरिका और चीन के जंगी जहाज

नई दिल्ली। अमेरिका ने चीनी नौसैनिक पोत पर आरोप लगाए हैं कि जब एक अमेरिकी युद्धपोत विवादित दक्षिण चीन सागर में प्रवेश किया था तो चीनी पोत ‘‘असुरक्षित एवं गैरपेशेवराना’’ तरीके से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा था। चीन ने दक्षिण चीन सागर में उन द्वीपों और चट्टानों के पास से अमेरिकी युद्धपोत के गुजरने पर मंगलवार को कड़ा असंतोष और दृढ़ विरोध जताया है जिन पर वह अपना कब्जा बताता है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को एक बयान में कहा, अमेरिकी विध्वंसक डेकाटूर ने 30 सितंबर को चीन सरकार की इजाजत के बगैर चीन के नानशा द्वीपसमूह के द्वीपों और चट्टानों से लगे जलक्षेत्र में प्रवेश किया।   
 
हुआ ने बताया कि चीनी नौसैनिक पोत ने अमेरिकी युद्धपोत की शिनाख्त की, उसे चेताया और वहां से हटाया. उन्होंने जोर दिया कि नानशा द्वीपसमूह (स्पार्टली द्वीपसमूह) और उसके इर्दगिर्द के जलक्षत्र पर चीन की निर्विवाद संप्रभुता है. इस बीच, अमेरिका के एक आधिकारिक बयान में चीनी विध्वंसक के इस कदम को ‘‘असुरक्षित बताया’’ क्योंकि वह अमेरिकी युद्धपोत के 41 मीटर के दायरे में आ चुका था।

 

दिल्ली से 1350 किलोमीटर की दूरी पर चीन ने बनाए बंकर, भारत की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। भारत के लिए उसके पड़ोसी देश चीन हो या फिर पाकिस्तान हमेशा से ही चिंता का विषय रहा है। चीन ने एक बार प्रधानमंत्री ऑफिस की नींद उड़ा कर रख दी है। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीआरए) में चीन की तरफ से ल्हासा के गोंगर एयरपोर्ट पर चीन ने अपने सैनिकों के लिए अंडरग्राउंड बम प्रूफ शेल्टर बनाया है। जिसने भारत के पशीने पर चिंता की लकीरें उकेर दी है। इस पूरे मामले से वाकिफ आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है।
बता दें कि गोंगर एयरपोर्ट की दूरी नई दिल्ली से महज 1,350 किलोमीटर है। देश की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है पहले इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल क्षेत्रीय संपर्कों को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन, अब इसे पूरी तरह से सैन्य छावनी के रूप में बदला जा रहा है।

गोंगर एयरपोर्ट को चीन ने बनाई सैन्य छावनी
वैसे तो चीन भारत की सीमा से सटे अपने क्षेत्रों में हर दिन नई तकनीक का उपयोग कर विकास की नई कहानी गढ़ता रहा है। चीनी सैनिक की अकसर ही भारतीय सीमा में प्रवेश करने की खबरे आती रहती हैं लेकिन नया मामला भारत के लिए सचमुच चिंता का विषय बन गया है। सूत्रों ने बताया कि 'टैक्सी ट्रैक' नीति के तहत चीन ने हवाई पट्टी से शुरुआत कर इसे पूरी तरह छावनी में बदल दिया है। और यहां फिलहाल तीन स्क्वैड्रोन यानी 36 लड़ाकू विमानों को रखे जाने की योजना बनाई है।

हाल के दिनों में भले ही भारत और चीन के बीच आपसी रिश्तों में गर्माहट देखने को मिली है। प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी एक अनौपचारिक सम्मेलन के दौरान वुहान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक की। जिसके बाद दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया था।

दोकलम विवाद के समय आमने-सामने आए भारत-चीन
राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री की मुलाकात भले ही दोकलम विवाद के बाद हुई हो लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दोनों देशों के बीच एक वक्त ऐसा आ गया था जब युद्ध होने की संभावना बढ़ गई थी।
 
युद्ध के समय बम प्रूफ हैंगर्स की पड़ती है जरूरत
सुरक्षा अधिकारी ने चीन द्वारा बनाए गए बम प्रूफ हैंगर्स के बारे में बताया कि लड़ाकू विमानों के लिए बम प्रूफ हैंगर्स की जरूरत तभी पड़ती है जब युद्ध की स्थिति बन पड़ी हो। क्योंकि युद्ध की स्थिति में लड़ाकू विमानों को खुले में रखना एक जोखिम भरा निर्णय हो सकता है। ऐसे में लड़ाकू विमानों को बम प्रूफ शेल्टर में रखना  होता है। वैसे चीन ने यह सुविधा रूस से लगती सीमा के पास पहले से ही बना रखा है लेकिन तिब्बत क्षेत्र  में जिस तरह से चीन ने अंडरग्राउंड बम प्रूफ शेल्टर का निर्माण किया है यह भारत तो चिंता में डालने के लिए काफी है।

 

फिजिक्स में तीन वैज्ञानिकों को मिलेगा नोबेल पुरस्कार, 7.35 करोड़ होगी पुरस्कार राशि

स्टॉकहोम। भौतिकी के क्षेत्र में योगदान के लिए इस साल तीन वैज्ञानिकों को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। रॉयल स्वीडिश एकेडमी आॅफ साइंसेज ने लेजर फिजिक्स पर खोज के लिए अमेरिका के आर्थर एश्किन, फ्रांस के गेरार्ड मोरो और कनाडा की डोना स्ट्रिकलैंड के नाम का ऐलान किया। तीनों वैज्ञानिकों को 90 लाख स्वीडिश क्रोनर (करीब 7.35 करोड़ रुपए) दिए जाएंगे।

एश्किन को मिलेगी आधी इनामी राशि
96 साल के एश्किन को आॅप्टिकल ट्वीजर्स पर रिसर्च के लिए नोबल की आधी इनामी राशि दी जाएगी। वे पुरस्कार पाने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं। दो अन्य विजेताओं को बाकी बची इनामी राशि को साझा करना होगा।

स्ट्रिकलैंड 55 साल बाद भौतिकी का नोबल पाने वाली महिला
ओंटारियो यूनिवर्सिटी में रिसर्चर स्ट्रिकलैंड 55 साल बाद फिजिक्स में नोबेल पाने वाली महिला हैं। पहले यह अवॉर्ड 1963 में न्यूक्लियर स्ट्रक्चर पर खोज करने वाली मारिया को मिला था।