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संयुक्त राष्ट्र की अध्यक्ष ने भारत के लिए कही ये बात

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नेंडा एस्पिनोसा ने बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत के एक अहम भागीदार होने को लेकर उसकी सराहना करते हुए कहा है कि वह जलवायु परिवर्तन पर कार्य और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्रों में एक अग्रणी देश है. मारिया ने इस बात का जिक्र किया कि भारत की विशाल आबादी को देखते हुए इसके द्वारा किए गए कार्यों और जलवायु परिवर्तन तथा गरीबी उन्मूलन जैसे मुद्दों पर सफलता अत्यधिक महत्वपूर्ण है. उन्होंने दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत एक अहम भागीदार देश है. यह इस व्यवस्था का एक बहुत मजबूत और विश्वसनीय साझेदार है. इस बात को स्वीकार किया जाना चाहिए.’’

बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत की रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हुए मारिया ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को बढ़ाने और बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने में यह देश एक बहुत अच्छा सहयोगी है. उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए मैं भारत की सराहना करती हूं. जलवायु के एजेंडा पर भारत एक अग्रणी देश है. नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, गरीबी उन्मूलन का एजेंडा और सतत विकास लक्ष्यों के प्रति इसकी मजबूत प्रतिबद्धता है.’’

संरा महासभा के 73 वें सत्र की अध्यक्ष मारिया ने कहा कि जब कभी हम आतंकवाद निरोध की बात करते हैं तो उसमें भारत को एक अहम भूमिका निभानी होती है. वह बहुत महत्वपूर्ण और मुख्य साझेदार देश है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वह नये साल में, मानवाधिकार आधारित रूख के संदर्भ में, हमारे एजेंडा से जुड़ी हर चीज के संदर्भ में, भारत के साथ काम करने को लेकर बहुत ही आशावादी हैं.’’

पिछले साल सितंबर में महासभा अध्यक्ष का प्रभार संभालने से पहले मारिया ने भारत का दौरा किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. मारिया ने अपने भारत दौरे को याद करते हुए कहा कि यह देख कर वह अभिभूत हो गई थी कि देश में जमीनी स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को किस तरह से क्रियान्वित किया जा रहा है.

पिछले साल उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया था कि सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत की सफलता दुनिया की तस्वीर बदल सकती है. मारिया ने कहा कि बढ़ती एकपक्षीयता और बढ़ते राष्ट्रवाद के युग में बहुपक्षवाद बहुत महत्वपूर्ण, प्रासंगिक और आवश्यक है, ‘‘खासतौर पर आज के समय में’’.  उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रों को अपने राष्ट्रीय हितों पर गौर करने के साथ - साथ बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था में भी योगदान देना होगा. मारिया ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन के इस विचार से सहमत हैं कि जलवायु परिवर्तन, प्रवास, आतंकवाद निरोध जैसे मुद्दों का हल सिर्फ बहुपक्षीय तरीके से ही हो सकता है.  


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बीजेपी सरकार ने महबूबा मुफ्ती के इस बात को लेकर आलोचना की

जम्मू: बीजेपी ने मंगलवार को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की देश के खिलाफ नारेबाजी करने वालों से 'सहानुभूति जताने' के लिए आलोचना की. महबूबा ने 2016 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) देशद्रोह मामले में आरोपपत्र दायर करने के समय को लेकर सवाल खड़े किए थे. आरोपपत्र में सात कश्मीरी छात्रों के नाम शामिल हैं.

बीजेपी उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना ने यहां कहा कि जेएनयू मामले में पुलिस अपना काम कर रही है और पीडीपी नेता की सोच पर उन्हें 'तरस' आती है.

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 2016 जेएनयू राजद्रोह मामले में आरोप पत्र दायर करने के समय को लेकर सोमवार को सवाल उठाया था और कहा था कि लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए छात्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस आरोप पत्र में सात कश्मीरियों के भी नाम हैं. 
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख ने अपने ट्वीट में कहा था कि इसमें चौंकने वाली बात नहीं है. 2019 का आम चुनाव कुछ महीने बाद होने वाला है और हमेशा की तरह राजनीतिक लाभ लेने के लिए कश्मीरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने कहा था कि आरोप पत्र का समय इससे अधिक संदिग्ध नहीं हो सकता. जब यूपीए सत्ता में थी तब अफजल गुरु को फांसी दी गई और अब तक जम्मू कश्मीर को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.

बता दें दिल्ली पुलिस ने जेएनयू परिसर में नौ फरवरी 2016 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाने के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित दस लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है जिसमें ये सात भी शामिल हैं. वह कार्यक्रम संसद भवन पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरु की फांसी की बरसी पर आयोजित किया गया था. 

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह), 143 (गैरकानूनी तरीके से एकत्र समूह का सदस्य होने के लिए सजा) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.
 


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डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को लेकर कही ये बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को तुर्की को चेतावनी दी कि अगर वह सीरिया से अमेरिकी बलों की वापसी के बाद अगर वो कुर्द लड़ाकों पर हमला करता है तो उसे आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ेगा. इसके साथ ही उसने कुर्द लड़ाकों से भी सीरिया को न उकसाने की अपील की.

ट्रंप ने सीरिया से सैनिकों को वापस बुलाने की दिसंबर में घोषणा की थी. तुर्की ने अमेरिका समर्थित कुर्द लड़ाकों की सुरक्षा की शर्त पर बलों की वापसी संबंधी ट्रंप की योजना पर नाराजगी जताई थी. ट्रंप ने ट्वीट किया, 'कुर्द बलों पर हमला करने पर तुर्की को आर्थिक रूप से तबाह कर देंगे.' उन्होंने लिखा, 'इसी तरह, हम यह भी नहीं चाहते कि कुर्द सीरिया को उकसाएं.'

ट्रंप के टॉप स्तर के डिप्लोमेट माइक पोम्पियो इस वक्त उस क्षेत्र के भ्रमण पर हैं ताकि तुर्की और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का हल निकाला जा सके. पोम्पियो कोशिश कर रहे हैं कि आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले कुर्द सहयोगियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके, क्योंकि सीरिया से अमेरिकी सेना वापसे होने के बाद तुर्की उन पर हमला कर सकता है.
सीरिया में आईएस के खिलाफ अमेरिका की अगुवाई वाले अभियान का जमीनी स्तर पर कुर्द बहुल सीरियन डेमोक्रेटिक बल (एसडीएफ) नेतृत्व करता है.


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तहव्वुर राणा को जल्द लाया जा सकता है अमेरिका से भारत

मुम्बई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले की साजिश के मामले में अमेरिका में 14 साल की कैद की सजा काट रहे तहव्वुर राणा को 2021 में जेल की सजा पूरी होने से पहले भारत भेजे जाने की ‘प्रबल संभावना’ है। एक सूत्र ने इसकी जानकारी दी। शिकागो के निवासी 58 वर्षीय राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान में जन्मे कैनेडियाई नागरिक को डेनमार्क के एक समाचारपत्र के खिलाफ आतंकवादी साजिश रचने और आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को मदद मुहैया कराने के मामले में संघीय जूरी ने दोषी ठहराया था।
मुम्बई पर आतंकवादी हमले की साजिश रचने के मामले में राणा को 2009 में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए- तैयबा के 10 आतंकवादियों द्वारा किए हमले में छह अमेरिकी नागरिकों सहित कुल 166 लोगों की जान गई थी। पुलिस ने नौ आतंकवादियों को मौके पर मार गिराया था और जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकवादी अजमल कसाब को बाद में फांसी दी गई थी। अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज हैरी लेनेनवेबर ने राणा को 2013 में 14 साल की सजा सुनाई थी और रिहाई के बाद भी उसपर पांच साल तक नजर रखने का आदेश दिया था।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार उसे दिसंबर 2021 में रिहा किया जाएगा। ट्रम्प प्रशासन के ‘पूरे सहयोग’ के साथ भारत सरकार पाकिस्तानी मूल के कैनेडियाई नागरिक के प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर रही है। राणा की जेल की सजा दिसम्बर 2021 में पूरी होने वाली है। मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यहां सजा पूरी होने पर राणा को भारत भेजे जाने की ‘प्रबल संभावना’ है।’’ सूत्र ने कहा कि इस दौरान जरूरी कागजी कार्रवाई और जटिल प्रक्रिया को पूरा करना एक ‘चुनौती’ है। 

भारत का विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा कानून एवं विधि मंत्रालय और अमेरिकी विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय सभी की अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया है। उसने कहा कि जब प्रत्यर्पण की बात आती है तो वे अपनी प्रक्रिया को ना धीमा करना चाहते हैं और ना ही तेज करना चाहते हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) प्रक्रिया की समय-सीमा और नौकरशाही संबंधी औपचारिकताओं को कम करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों से सीधे सम्पर्क कर सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार राणा का प्रत्यर्पण दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करेगा, आतंकवाद विरोधी सहयोग को बढ़ावा देगा और भारतीयों के बीच अमेरिका की छवि को बेहतर बनाएगा। ट्रम्प प्रशासन ने नवम्बर 2018 को मुंबई हमलों की 10वीं बरसी पर हमले में शामिल लोगों को न्याय के दायरे में लाने का अपना संकल्प दोहराया था। 
अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने नवम्बर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ वार्ता के दौरान भी इस मामले को उठाया था। अमेरिका में आंशिक रूप से ठप पड़े सरकारी कामकाज का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय ने राणा के प्रत्यर्पण के सवाल पर प्रतिक्रिया देने में अपनी असमर्थता जाहिर की। भारतीय दूतावास और राणा के वकील ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।


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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी करेगी इस काम में मदद

वॉशिंगटनः व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी एवं सलाहकार इवांका विश्व बैंक का नेतृत्व करने के लिए देश का उम्मीदवार चुनने में मदद करेंगी लेकिन वह स्वयं इस पद की उम्मीदवार नहीं हैं. व्हाइट हाउस की संचार उप निदेशक जेसिका डिट्टो ने कहा, 'वित्त मंत्री स्टीवन म्नुचिन और व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मिक मुलवाने ने इवांका ट्रम्प से अनुरोध किया है कि वह अमेरिका की नामांकन प्रक्रिया के प्रबंधन में मदद करें क्योंकि उन्होंने पिछले दो वर्षों में विश्व बैंक के नेतृत्व के साथ निकटता से काम किया है.'

डिट्टो ने कहा कि इस पद के लिए 'इवांका के नाम पर विचार किए जाने संबंधी खबरें गलत हैं''. लंदन के 'द फाइनेंशियल टाइम्स' ने शुक्रवार को कहा था कि जिम योंग किम का स्थान लेने वाले संभावित अमेरिकी उम्मीदवारों में इवांका और संयुक्त राष्ट्र में वाशिंगटन की पूर्व राजदूत निक्की हेली का नाम शामिल है. उल्लेखनीय है कि किम ने अपने दूसरे कार्यकाल के खत्म होने से तीन वर्ष पहले ही विश्व बैंक के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पिछले सप्ताह अचानक घोषणा की थी.

बता दें 8 जनवरी को किम ने अपने फैसले का ऐलान करते हुए ट्वीट कर कहा, 'इस बेहतरीन संस्थान के समर्पित स्टॉफ को लीड करने का मौका मिलना सौभाग्य की बात रही.' बता दें किम 1 फरवरी को यह पद छोड़ देंगे. बता दें इस पद के लिए किम को 2012 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नामित किया था. जिसके बाद ट्रंप के चुनाव से पहले किम को दूसरे कार्यकाल के लिए सितंबर 2016 में दोबारा नियुक्त किया गया, जो जुलाई 2017 को शुरू हुआ.


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अमेरिका H-1B वीजा में कर रहा है बड़ा बदलाव,इनको होगा फायदा

वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा धारकों को आश्वासन दिया कि उनका प्रशासन जल्द ऐसे बदलाव करेगा, जिससे उन्हें अमेरिका में रुकने का भरोसा मिलेगा और जिससे उनके लिए ‘‘नागरिकता लेने के लिए संभावित रास्ता बनेगा.’’ अधिकतर एच-1बी वीजा धारक आईटी पेशेवर हैं.

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि उनका प्रशासन एच-1बी वीजा में अमेरिकी नीतियों में बदलाव लाने की योजना बना रहा है और वह प्रतिभाशाली तथा उच्च कौशल लोगों को अमेरिका में कॅरियर बनाने के लिए बढ़ावा देगा.

ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ‘‘अमेरिका में एच-1बी वीजा धारक आश्वस्त हो सकते हैं कि बदलाव जल्द होंगे जिससे आपको यहां रूकने में आसानी होगी और आपको भरोसा मिलेगा. साथ ही इससे यहां की नागरिकता लेने का संभावित रास्ता खुलेगा. हम प्रतिभाशाली और उच्च कौशल लोगों को अमेरिका में कॅरियर बनाने के लिए बढ़ावा देंगे.’’
ट्रंप का ट्वीट भारतीय पेशेवरों और खासकर आईटी क्षेत्र के पेशेवरों के लिए अच्छी खबर के रूप में सामने आया है, जिन्हें ग्रीन कार्ड अथवा स्थायी कानूनी निवास पाने में वर्तमान में करीब एक दशक तक का इंतजार करना पड़ता है.

राष्ट्रपति शासनकाल के प्रथम दो वर्षों में ट्रम्प प्रशासन ने एच-1बी वीजा धारकों के वहां अधिक समय तक ठहरने, विस्तार और नया वीजा हासिल करना कठिन बना दिया था. भारतीय आईटी पेशेवर एच-1बी वीजा की काफी चाहत रखते हैं. यह गैर आव्रजन वीजा है जिसमें अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञ विदेशी कामगारों को रोजगार पर रखती हैं


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अमेरिका में इस पद पर चुनाव लड़ेंगी तुलसी गेबार्ड

न्यूयॉर्क । अमेरिका में 2020 में राष्ट्रपति चुनाव में हिंदू सांसद तुलसी गेबार्ड अपनी किस्मत आजमाने जा रही हैं। अमेरिका की पहली हिंदू सांसद गेबार्ड (37) ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह अगले साल होने जा रहा राष्ट्रपति चुनाव लड़ेंगी।

कई न्यूज रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय मूल की अमेरिकी कमला हैरिस (54) भी अगले सप्ताह डेमोक्रेटिकपार्टी की ओर से अपना उम्मीदवारी का ऐलान कर सकती हैं।

ऐसी अटकलें भी हैं कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी स्थाई प्रतिनिधि का पद छोड़ चुकी निकी हेली भी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से इस दौड़ में शामिल होने की मंशा रखती हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अगले साल राष्ट्रपति चुनाव में दोबारा इस पद पर चुनाव लडऩे की कोई मंशा जाहिर नहीं की है।

निकी हेली अमेरिकी कैबिनेट में शामिल होने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी नागरिक हैं।

गेबर्ड भारतीय मूल की नहीं हैं लेकिन वह हिंदू परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने हवाई से सीनेटर पद पर काबिज होने केबाद भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। वह पहली बार 2011 में प्रतिनिधि सभा में चुनी गई थीं।

गेबार्ड ने सीएनएन को साक्षात्कार में बताया, ‘‘मैं राष्ट्रपति चुनाव लडऩे का फैसला किया है और मैं अगले सप्ताह इस बारे में औपचारिक ऐलान करूंगी।’’

गेबार्ड ने कहा, ‘‘यह फैसला करने के मेरे पास कई कारण हैं। अमेरिकी लोगों के समक्ष मौजूदा समय में कई चुनौतियां हैं और मैं इसे लेकर फ्रिकमंद हूं और मैं इसका समाधान करने में मदद करना चाहती हूं।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुख्य मुद्दा युद्ध और शांति का है। मैं इस पर काम करने को लेकर आशान्वित हूं और गहराई में जाकर इस पर बात करूंगी।’’

राजनीति में आने से पहले गेबार्ड अमेरिकी सेना की ओर से 12 महीने के लिए इराक में तैनात रह चुकी हैं।


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अमेरिका: राष्ट्रपति ट्रंप की बढ़ सकती है मुसीबत,जाने क्या है वजह

वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व वकील माइकल कोहेन अगले महीने संसद की समिति के समक्ष सार्वजनिक रूप से गवाही देंगे. कोहेन की इस गवाही के साथ ही डेमोक्रेट्स को ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका मिल सकता है. सदन की '' निगरानी एवं सुधार समिति'' ने गुरुवार को कहा कि कोहेन सात फरवरी को उनके समक्ष पेश होंगे. गौरतलब है कि तीन जनवरी को नव-निर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण के साथ ही सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत प्राप्त हो गया है.
एक वक्त में ट्रंप के बेहद भरोसेमंद रहे वकील कोहेन हाल फिलहाल के दिनों में उनके खिलाफ बोलने लगे हैं और चुनाव में रूसी हस्तक्षेप मामले की जांच में सहयोग भी कर रहे हैं. बता दें कोहेन को इससे पहले 13 दिसंबर 2018 को ही अमेरिका की एक अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुनाई थी. कोहेन पर आरोप था कि उन्होंने 2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन किया था. वहीं कोहेन ने भी कोर्ट में अपने आरोप स्वीकार करते हुए इसे प्रशासकीय जांच में सहयोग करने की बात कही थी.
इस दौरान कोहेन ने कहा था कि 'अंधी निष्ठा के कारण मैंने राष्ट्रपति ट्रंप के गलत कामों को छिपाए रखा और इसमें उनका साथ दिया. मैं ट्रंप के संबंध में हर वह जानकारी देने के लिए तैयार हूं जो मेरे पास हैं. मैं अपनी सच्चाई साबित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं और वादा करता हूं की मैं इस पूरी जांच-पड़ताल में प्रशासन का पूरा सहयोग करूंगा और इतिहास में मुझे खलनायक के तौर पर याद नहीं किया जाएगा.' बता दें कोहेन के ट्रंप से अलग होने और उनके खिलाफ मोर्चा खोलने से ट्रंप बेहद मुश्किल में फंस सकते हैं. 
 


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बांग्लादेश में 35 साल के एक व्यक्ति को ये आरोप करने के कारण मिली सजा

ढाका: बांग्लादेश में 35 साल के एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित कई नेताओं की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में सात साल की जेल की सजा सुनायी गयी है. दक्षिणपंथी समूहों ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शेख हसीना सरकार सख्त इंटरनेट कानूनों का उपयोग असंतुष्टों की आवाज दबाने के लिए कर रही है. बांग्लादेश साइबर ट्रायब्यूनल के एक न्यायाधीश ने मुनीर हुसैन नामक व्यक्ति को बुधवार को यह सजा सुनायी. बीडीन्यूज24 डॉट काम की खबर के अनुसार इस मामले में दो और आरोपी थे लेकिन आरोपों के साबित नहीं होने के कारण उन्हें बरी कर दिया गया.

फैसले के अनुसार मुनीर ‘‘मुनीर टेलीकॉम’’ नाम से एक दुकान चलाता था और 2013 में उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वालों को शेख हसीना, पूर्व राष्ट्रपति जिल्लूर रहमान और मनमोहन सिंह की ऐसी तस्वीरें भेजी थी जिनमें छेड़छाड़ की गयी थी. दक्षिणपंथी समूहों ने सख्त इंटरनेट कानूनों का उपयोग करने के लिए सरकार की आलोचना की.  


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पाकिस्तान: पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को लेकर ,21 जनवरी को फिर होगी सुनवाई

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की एक अदालत ने अल-अजीजिया स्टील मामले में अपनी कैद की सजा को निलंबित करने की पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की दरख्वास्त पर सुनवाई की तारीख बृहस्पतिवार को 21 जनवरी तय की. इस्लामाबाद उच्च न्यायलय ने शरीफ की अपील पर सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति अमीर फारुक और न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर की दो सदस्यीय पीठ भी गठित की.  यही पीठ शरीफ की सजा को निलंबित करने की मांग संबंधी उनकी याचिका पर भी सुनवाई करेगी. 24 दिसंबर, 2018 को एक जवाबदेही अदालत ने अल-अजीजिया भ्रष्टाार मामले में 69 वर्षीय शरीफ को सात साल की कैद की सजा सुनायी थी और उन पर जुर्माना भी लगाया थी.

इसी के साथ हाईप्रोफाइल पनामा पेपर्स स्कैंडल में शरीफ परिवार के खिलाफ तीन अदालत मामलों का समापन हुआ. तीन बार प्रधानमंत्री रहे शरीफ लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद की सजा काट रहे हैं.  उन्होंने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की है. 

उन्होंने अपनी अपील पर अदालत से फैसला होने तक सजा को निलंबित करने की मांग करते हुए अलग से भी एक याचिका दायर की है. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो ने आठ सितंबर, 2017 को शरीफ परिवार के खिलाफ तीन मामले-- एवेनफील्ड प्रोपर्टीज मामला, फ्लैगशिप इनवेस्टमेंट मामला और अल अजीजिया मामला दर्ज किये थे.  उससे पहले उच्चतम न्यायलय ने पनामा पेपर्स मामले में शरीफ को (प्रधानमंत्री पद के लिए) अयोग्य करार दिया था. 


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भारत ने 'तबाह हो रहे देश की सहायता

नई दिल्ली: रूस ने भारत की अफगानिस्तान में विकास के विभिन्न कार्यक्रम चलाने के लिए तारीफ करते हुए बुधवार को कहा कि वहां भारत की ‘‘अत्यावश्यक’’ भूमिका है. युद्ध से तबाह अफगानिस्तान में भारत के कार्य को लेकर रूस के उपविदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव की टिप्पणी तब आई है जब कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान में भारत की भूमिका का मज़ाक उड़ाया था. भारत की यात्रा पर आए मंत्री ने कुछ मामलों में परिणामों के बारे में विचार किए बिना ही ताकत, सैन्य शक्ति तथा सैन्य तरीके अपनाने की प्रवृति को लेकर अमेरिका और कुछ अन्य देशों की आलोचना भी की.

उन्होंने कहा कि यह अपने आप में अस्थिरता का कारण है. अफगानिस्तान के पुन:निर्माण में भारत की भूमिका पर किए गए सवाल पर रयाबकोव ने कहा, ‘‘ उन सभी देशों में जहां हम घरेलू संघर्ष देख रहे हैं, वहां विकास का मुद्दा सर्वप्रथम मुद्दा होता है.  युद्ध जीते जा सकते हैं, लेकिन आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता में ठोस निवेश के लिए बिना शांति सुनिश्चित नहीं की जा सकती है.’’

उन्होंने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि भारत और अन्य देश अफगानिस्तान में साजो-समान के क्षेत्र में सहयोग के जो प्रयास कर रहे हैं वे ‘अत्यावश्यक’’ है. भारत जंग में तबाह हुए अफगानिस्तान के पुन:निर्माण में सक्रियता से भाग ले रहा है. भारत ने अमेरिका नीत बलों द्वारा तालिबान को सत्ता से हटाने के बाद से अफगानिस्तान को करीब तीन अरब अमेरिकी डॉलर की मदद की प्रतिबद्धता की है.

अफगान शांति वार्ता और तालिबान को बातचीत में शामिल करने के सवाल पर रयाबकोव ने कहा, ‘‘ हम इस देश के संबंध में भारत की अनिवार्य भूमिका को समझते हैं और रूस स्थिति के शांतिपूर्ण हल और संधि के लिए मॉस्को प्रक्रिया समेत सभी प्रारूपों में किए जा रहे सभी प्रयासों को बढ़ावा देगा.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अफगानिस्तान पर द्विपक्षीय वार्ता के साथ ही हम हमेशा भारत और भारतीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हैं.

रूस और भारत अहम मुद्दों पर करीब से मिलकर काम करते हैं. उपमंत्री ने दावा किया कि रूस, भारत और कुछ अन्य देशों ने जिन चीजों को प्रोत्साहित किया, उसे कुछ देशों ने अलग तरीके से प्रचारित किया. ये एक ‘कृत्रिम प्रतिस्पर्धा है.’’ गौरतलब है कि भारत ने नवंबर में मास्को में अफगान शांति प्रक्रिया पर हुए एक सम्मेलन में अपने दो पूर्व राजनयिकों को ‘अनौपचारिक’ हैसियत से भेजा था. 


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पाकिस्तान में अब नहीं दिखाए जायँगे भारतीय कार्यक्रम , क्या है कारण

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के चीफ जस्टिस साकिब निसार ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर भारतीय कार्यक्रम दिखाने की अनुमति नहीं देगा क्योंकि यह ‘‘हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचाते हैं.’’ 

हाईकोर्ट के फैसले को पलटा!
"डॉन" की खबर के अनुसार चीफ जस्टिस निसार ने पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण पर पाबंदी के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पेमरा) की अपील पर सुनवाई करते वक्त ये टिप्पणियां कीं. अखबार के अनुसार, प्राधिकरण के प्रमुख सलीम बेग ने अदालत से कहा कि ‘फिल्माजिया चैनल’ पर दिखाए जाने वाले 65 प्रतिशत कार्यक्रम विदेशी हैं और कई बार यह आंकड़ा 80 प्रतिशत तक चला जाता है.

चैनलों से नहीं हो कोई दुष्प्रचार- वकील
इस पर, प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम (पाकिस्तानी) चैनलों पर भारतीय कार्यक्रमों के प्रसारण की अनुमति नहीं देंगे.’’ प्राधिकरण के वकील ने प्रधान न्यायाधीश से कहा, ‘‘फिल्माजिया कोई समाचार चैनल नहीं बल्कि मनोरंजन चैनल है, यह कोई दुष्प्रचार नहीं करता है.’’ प्रधान न्यायाधीश ने जवाब दिया, ‘‘हालांकि यह हमारी संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहा है.’’ 

मामले के सभी पहलूओं पर विचार करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने इस केस की सुनवाई को फरवरी तक के लिए टाल दिया है. न्यायाधीश की इस टिप्पणी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान में जल्द ही भारतीय चैनलों पर बैन लग सकता है.
2016 में लगाया गया था इस तरह का प्रतिबंध
इससे पहले 2016 में पेमरा ने स्थानीय टेलीविजन और एफएम रेडियो चैनलों पर भारतीय सामग्री को प्रसारित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. इस फैसले को काफी हद तक भारत में कुछ चैनलों और मनोरंजन उद्योग द्वारा समान सामग्री और कलाकारों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बाद 'जैसे को तैसा' कदम के रूप में देखा गया था