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'21वीं सदी में और मजबूत होंगे भारत-अमरीका संबंध'

वॉशिंगटन: भारत में अमरीका के राजदूत केनेथ आई जस्टर  ने आज कहा कि कार्नेगी इंडिया, यूएस दूतावास के सहयोग से 21वीं सदी में भारत-अमरीका के संबंधों में और मजबूती लाएगा। उन्होंने कहा कि वे इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि आने वाले सालों में कैसे भारत-अमरीका के संबंध और मजबूत व टिकाऊ हो सकें। उन्होंने कहा कि वे दोनों देशों बीच रिश्ते को और गहरा बनाने के  लिए रक्षा सहयोग, आर्थिक, व्यापार संबंधों, ऊर्जा और स्वास्थ्य सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों को शामिल करेंगे। इससे पहले प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि अमरीका भारत का महत्वपूर्ण भागीदार है। वे भी विश्वास जता चुके हैं कि दोनों देशों के बीच की बहुत सी दूरियां खत्म होंगी और रणनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू होगा। दोनों देशों के बीच शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी व नवोन्मेष में भागीदारी की बडी संभावनाएं हैं। आतंकवाद के खिलाफ  भी अमरीका भारत  का समर्थन कर रहा है। यहीं वजह कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आतंकवाद  की पनाहगाह बने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त फैसले ले रहे हैं। इसी के तहत ही ट्रंप ने पाकिस्तान  को दी जाने वाली मदद पर भी रोक लगा दी है। 

खतरे में चॉकलेट का अस्तित्व, कुछ साल की मेहमान

सिडनी/लंदनI बच्चों, बड़ों और बूढ़ों सबकी प्रिय चॉकलेट का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। जी हां चॉकलेट पर आई एक नई रिपोर्ट  के मुताबिक वर्ष 2050 आते-आते चॉकलेट का उत्पादन लगभग ख़त्म हो सकता है यानी चॉकलेट अब करीब 30 से 32 साल की मेहमान है।  लेकिन ज़रा सोचिए आने वाले समय में अगर चॉकलेट दुनिया से खत्म हो गई तो क्या होगा। चॉकलेट Cocoa नामक एक फल के बीज से बनती है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु में आ रहे बदलाव की वजह से Cocoa की फसल बर्बाद हो रही है। बढ़ते तापमान के कारण Cocoa के पेड़ों का फलना-फूलना कम हो गया है जिसका असर उसके फल पर हो रहा है। 

आसान शब्दों में कहा जाए तो चॉकलेट को ग्लोबल वॉर्मिंग की नज़र लग गई है।  हालांकि वैज्ञानिक Cocoa की फसल को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। वो Gene Editing तकनीक की मदद से इस पौधे के genes को बदलना चाहते हैं ताकि ये पौधा गर्म जलवायु के मुताबिक खुद को ढाल ले  लेकिन इसमें अभी बहुत वक़्त लगेगा। चॉकलेट ज़िंदा रहेगी या इतिहास की वस्तु बनेगी ये बात अभी 100 प्रतिशत गांरटी के साथ नहीं कही जा सकती।  

दिलचस्प और ऐतिहासिक है चॉकलेट का सफर
लेकिन एक बात गारंटी के साथ कही जा सकती है कि चॉकलेट का ये सफर दिलचस्प और ऐतिहासिक है। कहा जाता है कि Cocoa के पेड़ की खोज करीब 4 हज़ार साल पहले 1900 ईसा पूर्व में Mexico के जंगलों में हुई थी। ये ऐसे इलाक़े थे जहां बारिश बहुत ज़्यादा होती थी। शुरुआती दौर में चॉकलेट का स्वाद Spicy यानी तीखा हुआ करता था और इसे पिया जाता था। Mexico और मध्य अमरीका के आदिवासी Cocoa के बीजों को पीसकर उनका पेस्ट बनाते थे और फिर इसमें पानी शहद और मिर्च मिलाकर एक चॉकलेट ड्रिंक तैयार किया जाता था। हैरानी की बात ये है कि मीठी और स्वादिष्ट चॉकलेट का स्वाद दुनिया ने करीब 3700 वर्षों के बाद चखा।

वियतनाम और भारत के रिश्तों से बौखलाया चीन

बीजिंगI चीन ने वियतनाम द्वारा विवादित दक्षिण चीन सागर में तेल एवं प्राकृतिक गैस क्षेत्र में निवेश के लिए भारत को आमंत्रित करने पर आज आपत्ति व्यक्त की। उसने कहा कि वह द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने के बहाने अपने अधिकारों में दखल के विरोध में है। भारत में वियतनाम के राजदूत तोन सिन्ह थान्ह ने एक सामाचार चैनल को कहा था कि उनका देश दक्षिण चीन सागर में भारतीय निवेश का स्वागत करेगा। 

चीन पहले भी कर चु​का है विरोध 
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन पड़ोस के संबंधित देशों के बीच सामान्य द्विपक्षीय संबंधों पर आपत्ति नहीं जताता है। लेकिन यदि इसका इस्तेमाल चीन के वैधानिक अधिकारों में दखल, दक्षिण चीन सागर में दिलचस्पी या क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को खत्म करने में किया जाता है तो वह इसका कड़ा विरोध करता है। उल्लेखनीय है कि चीन भारत की ओएनजीसी द्वारा दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के दावे के कुओं में तेल की तलाश करने का पहले से ही विरोध करता आया है। भारत का कहना है कि ओएनजीसी व्यावसायिक परिचालन कर रही है और उसका कार्य क्षेत्र विवाद से जुड़ा नहीं है।