Updated -

आंखों के लिए जरूरी है विटामिन ए

विटामिन फैट सॉल्यूबल विटामिन है और 13 आवश्यक विटामिनों में से एक है। आंखों से जुड़ी कई सारी कार्यप्रणालियों के सही संचालन के लिए विटामिन ए आवश्यक होता है, जिसमें कलर विजन और लो लाइट विजन शामिल हैं। इम्यूनिटी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी यह विटामिन आवश्यक होता है। ऐसे में इसकी कमी से कई सारी शारीरिक क्रियाओं पर प्रभाव पड़ता है, जिसकी पूर्ति इस विटामिन से खाद्य पदार्थों के जरिए की जा सकती है।

डाइट से कर सकते हैं पूर्ति

  1.     गाजर, पालक, शकरकंद, शिमला मिर्च
  2.     राजमा, हरी पत्तेदार सब्जियां
  3.     यदि आपको लगता है कि भोजन द्वारा इसके लक्षणों पर फर्क नहीं पड़ रहा तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें।

ओवरडोज की स्थिति
विटामिन ए की अधिकता होने पर विटामिन सी, ई और के की कमी होने लगती है। अत्यधिक मात्रा में विटामिन ए होने पर उसके लक्षण 6 घंटे के अंदर ही नजर आने लगते हैं और सप्लीमेंट बंद करने के कुछ हफ्तों के बाद ही ये लक्षण चले जाते है। वयस्कों की तुलना में बच्चे विटामिन ए के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए विटामिन ए के सप्लीमेंट को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
विटामिन ए डिफिशिएंसी से कई सारी समस्याएं उभरकर सामने आने लगती हैं और साथ ही इसकी अधिकता भी शरीर में टॉक्सीसिटी पैदा करती है।

प्रमुख लक्षणों 
रतौंधी 
 विटामिन ए की कमी के सबसे प्रमुख लक्षण रतौंधी या आंखों की कम रोशनी के रूप में नजर आते हैं। रतौंधी की समस्या में कम रोशनी की स्थिति में व्यक्ति देख नहीं पाता। लेकिन सामान्य रोशनी में चीजों को स्पष्ट देख सकता है।
ड्राय आइज 
 विटामिन ए डिफिशिएंसी की स्थिति में क्रॉनिक ड्राय आइज की समस्या होती है। इसमें आंसुओं का निर्माण नहीं होताए आंखों में चुभन और खुजली जैसी महसूस होती है। आंखों की पुतलियां भी कड़ी महसूस होती हैं। वैसे यह स्थिति कई अन्य कारणों से भी हो सकती है।
कॉर्निया डिसआॅर्डर 
विटामिन ए की गंभीर कमी के कारण कॉर्निया का रंग सफेद होने लगता है और अंधेपन की नौबत आ जाती है। ऐसा लंबे समय तक विटामिन ए की कमी के कारण होता है।

ये लक्षण भी हैं

  •     खाने में स्वाद महसूस न होना
  •     घाव भरने में समय लगना
  •     आंखों के कॉर्नर में सफेद धब्बे हो जाना
  •     आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं जैसे कंजंक्टिवाइटिस
  •     ड्राय स्किन, सूखे, बेजान बाल
  •     टूटते नाखून कमजोर इम्यून सिस्टम

खाने में विविधता 
 विटामिन ए की जरूरत को पूरा करने का सबसे आसान तरीका है कि विविध प्रकार के खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। इससे पोषण की पूर्ति बड़े पैमाने पर हो पाएगी। नियमित रूप से विभिन्न रंगों वाली सब्जियां और फलों का चुनाव करें, इससे विटामिन का सही संतुलन शरीर में हो पाएगा।

फेफड़े के कैंसर से देश में हर नौ मिनट में एक मौत

ग्लोबोकैन की ताजा रिपोर्ट से यह पता चला है कि फेफड़े के कैंसर का स्तन, गर्भग्रीवा और ओरल कैविट कैंसर के बाद सभी प्रकार के कैंसर (नॉनमेलानोमा स्किन कैंसर को छोड़कर) में चौथे स्थान पर है। भारतीय पुरुषों में फेफड़े के कैंसर के 53 हजार 728 और महिलाओं में 16 हजार 547 नए मामले सामने आए हैं। फेफड़े के कैंसर वाले भारतीय रोगियों में 90 प्रतिशत का कारण तंबाकू पदार्थों का सेवन रहा है। इसके साथ ही कभी भी धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी फेफड़े के कैंसर के होने में पर्यावरणीय, हार्मोन संबंधी, आनुवंशिक और जीवाणु संबंधी कई कारक शामिल हैं।
पेसिव स्मोकिंग भी है घातक

दूसरों के सिगरेट पीने से निकलने वाले धुएं के शरीर में जाने से जिसे पेसिव स्मोकिंग के नाम से जाना जाता है, इसके कारण व्यक्ति के फेफड़े के कैंसर की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है, भले ही व्यक्ति स्वयं धूम्रपान न करे। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस) इंडिया के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि 52 प्रतिशत वयस्क घर पर पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में रहते हैं। धुएं के जहरीले रासायनिक कण घर के पर्दे, कपड़े, कालीन, खाद्य पदार्थों, फर्निचर्स एवं अन्य सामग्रियों में चिपक जाते हैं, जो कि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए पैसिव स्मोकिंग का जरिया बन जाते हैं।  यह जोखिम घर में धूम्रपान करने वाले लोगों की संख्या के अधिक होने एवं संपर्क में रहने की अवधि के अनुसार बढ़ जाता है।

  1. देश हर साल फेफड़े के कैंसर के लगभग 63 हजार 
  2. नए मरीज सामने मेंआ रहे हैं। वर्तमान में हमारे देश में 
  3. सभी प्रकार के कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर 
  4. से होने वाली मौतों का प्रतिशत 9.3 है।

फिर लौट रहा है 80 के दशक का फैशन

कहते हैं कि पुराना समय लौट कर आता है। ऐसा ही कुछ फैशन के साथ भी हो रहा है। इन दिनों 1980 का फैशन ट्रेंड युवतियों और लड़कियों के बीच हिट हो रहा है। 1980 के दशक में चमकीले-भड़कीले कपड़े, ट्रैक सूट और रफल्स (झालरदार) वाले गाउन या फ्रॉक चलन में थे। इस समय भी फैशन का कुछ ऐसा ही अंदाज देखने को मिल रहा है।
कॉलेज स्टूडेंट्स के अलावा
लड़कियां रफल्स टॉप, स्कर्ट, शर्ट और गाउन भी खूब ले रही हैं। कॉलेज स्टूडेंट्स के अलावा आॅफिस गर्ल्स के बीच भी यह ट्रेंड काफी फॉलो हो रहा है। इस समय चल रहे ट्रेंडी फैशन में ब्राइट कलर खूब देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में युवतियां और महिलाएं भी इन्हें अपने ड्रेस सेंस में शामिल कर रही हैं। फैशन डिजाइनर नीतू शर्मा ने बताया कि फैशन में इस समय ब्राइट कलर का खूब प्रयोग हो रहा है।
स्पॉर्टी लुक काफी चलन में
इन दिनों 1980 का स्पॉर्टी लुक काफी चलन में है। मौजूदा दौर में भी ऐथलेटिक और स्पॉर्टी लुक के प्रति रुझान बढ़ा है। ऐसे में इन्हें पहनकर अलग व आकर्षक लुक दिया जा सकता है। भड़कीले हरे, पीले, लाल रंग के ट्रैक सूट के बजाय इन दिनों भूरे, ग्रे जैसे रंग के ट्रैक सूट पहनें। आप चाहें तो वेलवेट या सनील के कपड़े का ट्रैक सूट भी पहन सकते हैं।
युवतियों में काफी अधिक : डिजाइनर विमल कुमार का कहना है कि हल्के जैकेट को छोड़कर 1980 के दशक में पहने जाने वाले हेवी जैकेट, ब्लेजर और कोट इन दिनों काफी हिट हैं। इससे आपको स्मार्ट लुक भी मिलता है। यह महज 2000 रुपए की रेंज में शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा बेहद छोटा, मध्यम और बड़े साइज में उपलब्ध रफल्स ड्रेस का चार्म इन दिनों युवतियों में काफी अधिक है।

महिलाओं में बढ़ रहा मेल हार्मोन एड्रोजन

 इस भागदौड़ भरी जिंदगी में बदली हुई लाइफ स्टाइल के कारण अब महिलाओं के शरीर और चेहरे पर हल्के बाल नजर आना अब आम बात हो गई है। इन बालों से निजात पाने के लिए वो थ्रेडिंग और वैक्सिंग का भी सहारा लेती हैं, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हों तो सावधान हो जाइए।

यह हार्मोंस का असंतुलन प्रजनन परेशानी, थॉयराइड सहित कई तरह की बीमारियों का रोगी बना सकता है। कुछ स्थितियों में महिलाओं के चेहरे पर हल्की सी मूंछ व दाढ़ी भी दिखाई देती है।

ये लक्षण पीसीओडी या पीसीओएस के निशानी हो सकते हैं। स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर महिला को मां बनने में भी परेशाानी का सामना करना पड़ता है। बदलती जीवन शैली के कारण हर 10 में से एक महिला इसकी शिकार है। पहले यह समस्या 25 की उम्र के बाद महिलाओं में देखी जाती थी पर अब छोटी बच्चियां भी इसकी जकड़ में आने लग गई हैं।

हार्मोन एक्सपर्ट व सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट कहते हैं कि आजकल की भागदौड़ भरी, व्यस्त और तनावपूर्ण लाइफ स्टाइल के चलते हम अक्सर अपनी सेहत का सही तरह से ध्यान नहीं रख पाते।

जिसके कारण कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। यह एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जो आमतौर पर रिप्रोडक्टिव उम्र की महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन के कारण पाई जाती है।इसमें महिला के शरीर में मेल हॉरमोन एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है व ओवरीज पर एक से ज्यादा सिस्ट हो जाते हैं। पहले यह समस्या 25 की उम्र के बाद महिलाओं में देखी जाती थी पर अब छोटी बच्चियां भी इसकी जकड़ में आने लग गई हैं।

ये होते हैं लक्षण
कई बार इसके लक्षण बाहरी तौर पर नजर नहीं आते हैं और इसका पता नहीं लग पाता है। फि र भी कुछ ऐसे संकेत हैं, जो इस बीमारी के होने का संकेत देते हैं।

जैसे वजन बढऩा, अनियमित पीरियड्स, शरीर व चेहरे पर एक्सट्रा हेयर ग्रोथ होना यानी कि मर्दों की तरह शरीर पर बाल, मुहांसों व तेलीय त्वचा की समस्या अचानक से होना, बालों का झडऩा, पेलविक दर्द होना, ओवरी पर कई सिस्ट होना। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व दूसरे हॉर्मोंस का असंतुलन भी इसके बढऩे पर हो सकते हैं।

ऐसे करें बचाव
1. चेहरे व शरीर पर अत्याधिक बाल होने का शिकार हैं तो तत्काल ही एंडोक्रोइनोलॉजिस्ट डॉक्टर से मिलें।
2. वजन को नियंत्रित रखें। क्योंकि ओवरवेट लोगों में समस्या गंभीर हो जाती है।
3. नियमित रूप से व्यायाम करें। वॉक, स्विमिंग, जॉगिंग, साईकिलिंग आदि किसी भी तरह की कसरत नियमित रूप से करें।

4. तनाव मुक्त रहें। इसके लिए प्राणायाम और ध्यान भी कर सकती हैं।

5.सही लाइफस्टाइल का चुनाव करें। सिगरेट, शराब, कोल्डडिंऊक्स, जंक फूड, कैफीन आदि चीजों से दूर रहें। जल्दी उठें और पूरी नींद लें।

हार्मोन असंतुलन हो सकता है खतरनाक
अक्सर महिलाएं शरीर में हो रहे परिवर्तनों से अनजान बनी रहती हैं। इन्हें अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है। यह हार्मोन असंतुलित होकर पीसीओडी या पीसीओएस की परेशानी तो करता ही है, साथ ही डायबिटीज, बीपी, थॉयराइड, प्रजनन क्षमता पर असर सहित कई तरह की बीमारियों का रोगी बना सकता है। समय पर जांच और दवाओं से इस परेशानी से बिना किसी तरह की सर्जरी के निजात मिल सकती है।

56 इंच का सीना चाहते हैं तो अपनाएं ये पांच असरदार टिप्स

चौड़ा सीना पाने के लिए कुछ खास कसरत करने की जरूरत है। जानिए कौन कौन सी कसरत कर के पा सकते हैं आप मजबूत सीना।जिम में सीना चौड़ा करने की कसरत करने के लिए केबल प्रेस करें। इससे न तो आपको चोट लगेगी और सीने की मांस पेशियों पर दबाव भी बढ़ेगा।फिटनेस वाइकिंग’ साइट के मुताबिक पुश अप्स लगाने से सीने की मसल्स पर जोर पड़ता है और वे मजबूत होती हैं। लेकिन ध्यान रहे भार हाथों और पैर के अंगूठों के बीच बराबर का भार पड़े।साधारण पुश अप्स कर के अगर आपने खुद को तैयार कर लिया है तो अब वक्त है थोड़ी और मेहनत करने का। एक हाथ से पुश अप्स लगाने से सीने पर और जरूर पड़ेगा। इसके लिए किसी डिब्बे का भी सहारा ले सकते हैं।चौड़ा सीना पाने के लिए सबसे जरूरी है बेंच प्रेस कसरत। शुरुआत में हल्के वजन की बेंच का इस्तेमाल करिए और फिर समय के साथ धीरे धीरे वजन बढ़ाइए। इसके लिए ट्रेनर की मदद लेना बेहतर रहेगा।डंबल फ्लाई करने से भी सीने की मसल्स मजबूत होती हैं। ध्यान रहे आप ऐसी बेंच पर लेटें जिसपर कमर सीधी रहे न कि मुड़े।वर्कआउट करने के एक घंटे के भीतर पौष्टिक खाना खा लें।प्रोटीन और कार्बोहायड्रेट से भरा खाना जरूर खाएं। इससे शरीर को ताकत मिलेगी और मांसपेशियां मजबूत बनेंगी।जिम में कसरत करने के बाद शरीर को आराम करने का भी पर्याप्त समय मिले क्योंकि तभी मांस पेशियां बढ़ पाएंगी।

रोजाना सादा पानी पीने के बजाय आजमाएं ये 9 ड्रिंक्स

शरीर के लिए पानी बहुत जरूरी है इसकी कमी होने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। कई तरह का स्वास्‍थ्य समस्याओं से बचने के लिए भी पानी अधिक मात्रा में पीना जरूरी है। यही कारण है कि डॉक्टर्स रोजाना 7 से 8 गिलास पानी पीने के लिए कहते हैं। लेकिन कई लोगों के लिए सादा पानी पीना अधिक मात्रा में पीना बहुत मुश्किल होता है। तो सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति में क्या किया जा सकता है?
क्रेजी फ्रीलांसर के मुताबिक, जानिए रोजाना अधिक मात्रा में पानी पीने के लिए किन फंडो को अपनाना चाहिए।नींबू अदरक का पानी हेल्‍थ के लिए भी फायदेमंद है और ये स्वादिष्ट भी होता है। सादे पानी के बजाय नींबू के साथ अदरक की कुछ टुकड़े पानी में मिलाकर लिए जा सकते हैं। फोटोः क्रेजी फ्रीलांसरकई लोगों को स्ट्राबेरी मिंट वाटर बहुत स्वादिष्ट लगता है। जो लोग सादा पानी नहीं पी सकते उनके लिउ स्ट्राबेरी मिंट फ्लेवर फायदेमंद हो सकता है। इस फ्लेवर से मुंह के नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया को मारा जा सकता है। इस ड्रिंक के सेवन से याददाश्त भी बेहतर होती है।

लंबे समय तक चाहते हैं जीना तो खूब खाएं लाल मिर्च

यदि आप लंबे समय तक जीना चाहते हैं तो खूब लाल मिर्च खाइए, इससे कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिसके कारण जिंदगी लंबी होती है। ऐसा हम नहीं बल्कि शोधकर्ताओं का कहना है।

वरमोंट विश्वविद्यालय में मेडिसीन विभाग के प्रोफेसर बेंजामिन लिटेनबर्ग के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक दल ने अपने निष्कर्ष में पाया कि लाल मिर्च के सेवन से मृत्यु दर में 13 फीसद की कमी आती है जो मुख्यत: हृदय रोग या स्ट्रोक के कारण होती है। जो लोग नियमित रूप से तीखे लाल मिर्च का सेवन करते हैं उनके शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है।

हालांकि शोधकर्ताओं को उस प्रणाली का पता लगाने में सफलता नहीं मिल पाई है, जिससे लाल मिर्च खाने से जीवन लंबा होता है। अमेरिका के वरमोंट विश्वविद्यालय के मुस्तफा चोपान ने बताया कि ट्रांजिएंट रिसेप्टर पोटेंसियल (टीआरपी) चैनल्स, जो कैप्सीचीन जैसे एजेंटों के प्राथमिक रिसेप्टर्स होते हैं, जोकि मिर्च का प्रमुख तत्व है। उसकी जीवनकाल को बढ़ाने में कोई भूमिका हो सकती है।

चोपान ने बताया कि माना जाता है कि कैप्सीचीन ही मोटापे को घटाने और धमनियों में रक्त प्रवाह को नियंत्रिण करने में सेलुलर और आणविक तंत्र में अपनी भूमिका निभाता है। साथ ही इसमें माइक्रोबियल विरोधी गुण होते हैं जो ‘संभवत: आंतों के माइक्रोबायोटा में बदलाव कर अप्रत्यक्ष तौर पर उस व्यक्ति के जीवनकाल को बढ़ाने में योगदान करता है।

इस शोध के लिए दल ने 16,000 अमेरिकियों का 23 सालों तक अध्ययन किया। वरमोंट विश्वविद्यालय का यह शोध प्लोस वन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। मसालों और मिर्ची को शताब्दियों से रोगों के इलाज में लाभकारी माना जाता रहा है।

आंखों की खूबसूरती बढ़ा देगा यह आईमेकअप लुक

आंखों का मेकअप करना हर लड़की को पसंद होता है। सिर्फ आंखों का मेकअप करके चेहरे पर सुंदरता लाई जा सकती है।जब आप तैयार हों, तो हमारे बताएं गए अनुसार ही आंखों का मेकअप करें, आपको अपना चेहरा जरूर प्‍यारा नज़र आएगा।

कई लोग आंखों का मेकअप करना जरूरी नहीं समझते हैं या फिर वो गलत तरीके से मेकअप कर लेते हैं। मान लीजिए उनकी आंखें बहुत छोटी हैं और वो मेकअप भी लाइट ही करती है, ऐसे में आंखें सुंदर ही नहीं लगती या बड़ी आंखों पर हैवी मेकअप कर लेती है जिससे वो छोटी लगने लग जाती है।

आंखों का मेकअप करना एक आर्ट है जिसे सीखने में सेंस और टाइम दोनों की जरूरत होती है। आइए जानते हैं 

लुक 1: इस तरह के आई मेकअप को आप ब्राउन और पिंक शेड में करें। इससे आंखों में नेचुरलपन भी रहेगा और ड्रामा भी शो होगा। बस आपको ध्‍यान इस बात का रखना होगा कि आप बहुत ज्‍यादा ओवर न कर लें।

लुक 2: इस तरह का लुक बहुत नेचुरल लगता है आप इसे दीवाली की शाम जरूर ट्राई कर सकती हैं जिसमें क्‍लासिक विंडेज आईलाईनर और न्‍यूट्रल आईशैडो के साथ आंखों को सुंदर बनाया जा सकता है। आप पलकों के ऊपर मोटा सा लाइनर लगाएं और मस्‍कारा भी लगाएं।

लुक 3: पर्पल, सिल्‍वर और ब्रो। जी हां, से तीन शेड जब आप मेकअप टूल के रूप में इस्‍तेमाल करें, तो बहुत अच्‍छा लुक देते हैं।

लुक 4: आप देख सकते हैं कि इस तरह के आईमेकअप में गोल्‍ड फ्वाइल आईशैडो का इस्‍तेमाल किया गया है। इससे आंखों में उभार आता है और वो बहुत अच्‍छी दिखती हैं। सबसे अच्‍छी बात ये है कि आप इसके साथ ओंठो पर डार्क मेकअप भी कर सकती हैं।

लुक 5: सब्‍सटेल रोज गोल्‍ड आईशैडो वाला लुक आंखों पर फबता है। अगर आप इस बार अनारकली सूट को पूजा के दौरान पहनने वाली हैं तो इसे ही एप्‍लाई करें। यकीन मानिए, आपकी आंखें बोल उठेगी।

लुक 6: यह रोज गोल्‍ड से थोड़ा बोल्‍ड मेकअप होगा। इसे हालो आईशैडो भी कहा जाता है। आईशैडो के लिए डार्क पिंक शेड और डीप गोल्‍ड शेड का इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

लुक 7: अगर आप थोड़ी सी भी डेयरिंग और मेकअप में ट्वीस्‍ट को पसंद करने वाली हैं तो आप ब्राइट क्रिम्‍सन आईशैडो लुक को ट्राई कर सकती हैं। जब आप इस लुक को दे रही हों तो लिपस्टिक की तरह ही लगाएं और बाद में उसी रंग की लिपस्‍टि‍क को होंठो पर एप्‍लाई करें।

लुक 8: यह शैम्‍पेन पिंक आईशैडो, आंखों पर फ्लोरल लुक दे देता है। अगर आप इसी रंग की ड्रेस पूजा के दौरान पहनने वाली हैं तो यह मेकअप आप पर बहुत फबेगा।

मुंहासों को रातों रात दूर करने के 6 तरीके

यहाँ हमें मुंहासों को रातों रात दूर करने के उपाय बताए हैं। ये सभी उपाय सुरक्षित हैं तथा हमने इनकी जांच की है। नए मुहांसे पर आप इनका प्रयोग प्रभावकारी होता है। मुंहासों को हाथ न लगायें और फोड़े नहीं।

यह इन्हें दूर करने का आसान तरीका दिखता है परन्तु ऐसा करने से समस्या बढ़ जाती है तथा इससे मुंहासों के दाग पड़ जाते हैं। इसके अलावा मुंहासों को फोड़ने से जलन होती है और खून भी निकलता है।

क्या आप ऐसा चाहते हैं? नहीं न? अत: प्लीज़ इन्हें हाथ न लगाएं। बल्कि ये उपाय करें। ये वास्तव में बहुत अच्छे से काम करते हैं। धैर्य रखें तथा मुंहासों को जल्दी दूर करने के लिए इन उपायों को अपनाएँ।

1. टी ट्री ऑइल

यह निश्चित रूप से मुंहासों और फुंसियों को दूर करने का उत्तम तरीका है। इससे हमें रातों रात परिणाम दिखाई दिए। जब आप इसका उपयोग करेंगे तो थोड़ी जलन महसूस होगी हालाँकि इसका अर्थ यह है कि यह अपना काम कर रहा है।

2. टूथपेस्ट

यह एक अन्य आश्चर्यजनक उपचार है। टूथपेस्ट में हाइड्रोजन पेरोक्साइड होता है जो मुंहासे को सुखाने में सहायक होता है। हमने व्यक्तिगत तौर पर भी इसका उपयोग करके देखा है।

3.कैलामाइन लोशन

कैलामाइन एक प्रकार की मिट्टी होती है जो इसे सुखाती है तथा जलन और खुजली को कम करती है। रातों रात मुंहासों को दूर करने का यह एक प्रभावी तरीका है।

4. मुल्तानी मिट्टी

मुल्तानी मिट्टी चेहरे से अतिरिक्त तेल को सोख लेती है तथा रातों रात मुंहासे को सुखा देती है। मुंहासों को दूर करने के लिए आप इस घरेलू उपाय को अपना सकते हैं।

5. नारियल का तेल

जी हाँ, तेल से भी रातों रात मुंहासों को ठीक किया जा सकता है। मुंहासे पर थोडा सा नारियल का तेल लगायें, इसे रात भर लगा रहने दें और आप देखेंगे कि दूसरे दिन यह गायब हो गया है।

6. एलो वेरा: जेल

एलो वेरा जेल मुंहासों से आराम दिलाता है तथा सूजन को काफी हद तक कम करता है। अत: मुंहासों पर एलो वेरा जेल लगाकर रात भर छोड़ दें और आप देखेंगे कि सुबह यह गायब हो गया है।

रोज़ मेकअप करने वाली लड़कियों को ध्‍यान रखनी चाहिये ये बातें

कुछ लोग कहते हैं कि अगर मेकअप का रोज़ इस्तेमल किया जाए तो यह त्वचा के लिए हानिकारक होता है।

लेकिन अगर आप त्वचा की अच्छे से देखभाल करती हैं और सही मेकअप का इस्तेमल करती हैं तो आपको यह परेशानी नहीं होगी।

आज हम आपको कुछ ऐसी ही स्किन केयर टिप्स देने जा रहें हैं। इन स्किन केयर टिप्स को रोज़ अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप मेकअप के हानिकारक प्रभाव से अपनी स्किन को बचाया जा सकता है। तो आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ खास टिप्स।

1. क्लेन्ज़ किसी भी तरह का मेकअप करने से पहले आप अपने चेहरे को अच्छे से साफ़ करें। इससे आपके चेहरे पर लगी गन्दगी अच्छे से साफ़ हो जाती है और मेकअप लगाने से आपको कोई नुक्सान नहीं होगा

2. मॉइस्चराइज़ जो भी मेकअप आप करें और वह अच्छा लगे इसके लिए जरुरी हैं कि आपकी त्वचा मॉइस्चराइज़ लगे। त्वचा अगर अच्छे से मॉइस्चराइज़ होगी तो आपका मेकउप बिलकुल नेचुरल लगेगा।

3. मेकअप हटाए हमेशा याद रखें सोने से पहले मेकअप हटा दें, क्योंकि ज्यादातार परेशानी तभी होती हैं जब आप काफी देर तक मेकअप लगा कर रखती हैं। या फिर मेकअप लगाए हुए सो जाती हैं। serum

4. सीरम सीरम या फेस आयल उनके लिए बहुत जरुरी हैं जो मेकअप करते हैं यह त्वचा को नमी देता हैं और सूखने से बचाता हैं।

5. नाइट क्रीम हानिकारक सूरज की किरणों से हुए नुक्सान से नाइट क्रीम आपकी त्वचा को बचती है। यही नहीं मेकअप के हानिकारक प्रभाव से भी आपकी त्वचा सुरक्षित रहती है।

6. डे क्रीम दिन के वक़्त अच्छे एसपीएफ़ की डे क्रीम आपने मेकअप के साथ लगाए जिससे आपकी त्वचा को सूरज की किरणों से ज्यादा नुक्सान ना हो पाये।

7. एक्स्फोलीऐशन अगर आप चाहती हैं कि आपका मेकअप और अच्छा लगे तो आप अपनी त्वचा को एक्स्फोलीऐट करें इससे आप डेड स्किन हट जायेगी और आपकी त्वचा और चमकदार दिखेगी।

8. आई क्रीम आँखों के नीचे की त्वचा बहुत नाज़ुक और पतली होती है, यही कारण हैं इसे ज्यादा हाइड्रेशन की जरूरत होती है। इसीलिए हमेशा मेकअप करने से पहले आई क्रीम का इस्तेमाल करे।

 

दाग-धब्‍बे हटाने के लिये रात में सोने से पहले लगांए नींबू और गुलाब जल

अगर आप रात में सोने जा रही हैं तो, चेहरे पर नींबू का रस और गुलाब जल लगा कर सोइये और सुबहा चेहरा धो लीजिये। इससे आप को हफ्तेभर में ही रिजल्‍ट मिलेगा और चेहरा बेदाग बन जाएगा।

बेदाग और चमकदार त्‍वचा पाना हर लड़की का सपना होता है। चेहरे पर निकलने वाले मुंहासे और फुंसियां, मानों चेहरे की सुंदरता को हर लेते हैं।

इसलिये अगर आप रात में सोने जा रही हैं तो, चेहरे पर नींबू का रस और गुलाब जल लगा कर सोइये और सुबहा चेहरा धो लीजिये।

इससे आप को हफ्तेभर में ही रिजल्‍ट मिलेगा और चेहरा बेदाग बन जाएगा। इस चीज़ की एक अच्‍छी बात है कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसमें बिल्‍कुल भी कैमिकल नहीं है। तो आइये जानते हैं कि इसे बनाते कैसे हैं।

एक कटोरी में एक ही मात्रा में नींबू का रस और रोज वॉटर मिक्‍स कर लें। फिर इसे मिक्‍स कर के ठंडा होने के लिये फ्रिज में रख दें। फिर कॉटन बॉल का यूज कर के इस घोल को प्रभावित एरिया पर लगाएं।

इस मिश्रण को चेहरे पर लगा कर रातभर के लिये छोड़ दें और फिर अगली सुबह धो लें। आप मानें चाहे नहीं लेकिन आपको इसका रिजल्‍ट एक ही हफ्ते में दिख जाएगा, आपके दाग धब्‍बे सब गायब हो जाएंगे।

जींस को हर वक्त नया बनाए रखने के लिये अपनाएं ये तरीके

जींस आज एक ऐसा कपडा है जो सबके लिए आवश्यक है और हर एक की अलमारी में यह पाया जाता है। आप ठाट बाट से रहें या न रहें जींस एक ऐसा परिधान है जिसे आप दिन भर पहने रहना अवश्य पसंद करेंगे। जींस आपके व्यक्तित्व में निखार लाती है परन्तु यदि आपकी जींस गंदी है या उसमें से बदबू आ रही है और उसमें झुर्रियां भी हैं तो यह बहुत गंदी दिखती है।

फेडेड जींस फैशन में है परन्तु गलत जगह पर जींस का कलर फेड होने से जींस पर धब्बे दिखते हैं और कपडा पुराना दिखता है। यदि आपको जींस पसंद है तो यहाँ हम आपको जींस को नया बनाये रखने के कुछ तरीके बता रहे हैं।
हैंड वॉश तकनीक – जहाँ तक संभव हो जींस को हाथों से धोएं क्योंकि ऐसा करने से कपडा सिकुड़ता नहीं है। जींस को हाथों से ही धोना चाहिए। इससे जींस पर तनाव नहीं पड़ता।

जींस जितनी रफ दिखती है उतनी होती नहीं अत: आपको इसकी उचित देखभाल करनी चाहिए। एक बाल्टी लें तथा उसे पानी से भर लें। इस बाल्टी में 2-3 चम्मच डिटर्जेंट मिलाएं और जींस को इसमें भिगो दें। अब इसे हाथ से धोएं और 60 मिनिट बाद निचोड़ लें। इससे जींस फ्रेश (नई) रहती है।

जींस को फ्रीजर में रखें – आपने जींस को फ्रीजर में रखने के बारे में सुना होगा। इससे जींस से आने वाली बदबू दूर हो जाती है और जींस में उपस्थित बैक्टीरिया और हानिकारक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। जींस लें तथा इसकी अच्छी सी तह बनायें। अब इसे एक प्लास्टिक बैग में रखें और चरों तरफ से सील कर दें।

जींस को बहुत अधिक तापमान पर रखने की प्रक्रिया को जींस को स्टरलाईजिंग करना कहते हैं क्योंकि इससे जींस में उपस्थित बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और जींस पूरे दिन फ्रेश रहती है। इससे उस बदबू से भी छुटकारा मिलता है जो अक्सर जींस को बिना धोये पहनने के कारण आती है।

टैग चेक करें – आपकी जींस पर लगा हुआ टैग इसके रख रखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जींस में लगा हुआ टैग आपको बताता है कि आपकी जींस में में किस कपडे का उपयोग किया गया है और इसे किस किस प्रकार धोना चाहिए। यदि यह प्री वॉश/ प्री डिस्ट्रेस्ड है तो इसका अर्थ यह है कि जींस का पहले भी उपयोग किया जा चुका है और इसे पहले धोया जा चुका है।

 ऐसी स्थिति में जींस को ठंडे पानी में रखें ताकि यह सिकुड़े नहीं। यदि आपकी जींस पर कच्चा, सूखा या भसगल वॉश लेबल लगा हुआ है तो इसका अर्थ है कि जींस को अभी तक धोया नहीं गया है और इसका रंग अभी पूरी तरह सेट नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में जींस पर लगे हुए दिशा निर्देशों का पालन करें।

यदि आपकी जींस पर सन्फोरिज्ड टैग लगा हुआ है तो इसका अर्थ है आपकी जींस इस प्रकार बनी हुई है कि यह सिकुड़ेगी नहीं। अधिकाँश जींस में सन्फोरिज्ड टैग लगा हुआ होता है जिनमें कपडा बहुत कम सिकुड़ता है।

अनसन्फोरिज्ड टैग/श्रिंक टू फिट का अर्थ है कि जींस बताये गए साइज से कुछ इंच बड़ी है जो धोने के बाद सिकुड़ जायेगी। ऐसी स्थिति में जींस को गर्म पानी में भिगोयें इससे जींस सिकुड़ेगी। एक बार जब यह बताये हुए साइज की हो जाती है तो आप इसका उपयोग प्रतिदिन कर सकते हैं।

ड्राई क्लीन – आपको जींस को हमेशा ड्राई क्लीन करना चाहिए क्योंकि जींस से धूल, कीटाणु और दाग निकालने का यह उत्तम तरीका है। जींस के किनारों पर जमने वाला तेल ड्राई क्लीन से आसानी से निकल जाता है।

ड्राई क्लीन एक महंगा विकल्प है परन्तु महीने में एक बार इसे किया जा सकता है। इससे जींस अच्छी रहती है और हमेशा नई दिखती है।

गर्मी से बचाएं – एक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी जींस को गर्मी से बचाएं क्योंकि इससे कपडे पर प्रभाव पड़ता है। आपको जींस को हवा में सुखाना चाहिए और उसे सीधे सूरज की रोशनी में नहीं रखना चाहिए।

जींस को हवा में सुखाने में दो दिन तक का समय लग सकता है अत: आपको उसके अनुसार प्लान बनाना चाहिए।

आप फेब्रिक सॉफ्टनर्स का उपयोग भी कर सकते हैं जो आपके डेनिम को सॉफ्ट बनाता है तथा उसे लम्बे समय तक फ्रेश रखता है।

सौंदर्य को बढ़ाने के लिए भी लाभकारी है नारियल पानी

हम आपको बताते हैं कि नारियल पानी सौंदर्य के लिए कितना लाभकारी होता है। नारियल पानी पोटेशियम, क्लोराइड्स और मैग्निशियम से भरपूर होता है जो हमारे सौंदर्य को निखारने के लिए उपयोगी है।

नारियल पानी आपकी स्किन को मॉइश्चराइजर करता है और साथ ही चेहरे के दाग-धब्बों को भी दूर करता है। नारियल पानी त्वचा को टैनिंग और सन बर्न से भी बचाने में मददगार साबित होता है। इसमें पोटेशियम की प्रचुर मात्रा होती है, जिससे त्वचा को पौष्टिक तत्व और ऑक्सीजन मिलता है।

गर्भावस्था में नारियल पानी के सेवन से कब्ज, जी मिचलाना और एसिडिटी से निजात मिलती है। वहीं मुंहासे की समस्याओं को दूर करने के लिए भी नारियल पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। रोजाना रात को नारियल पानी की कुछ बूंदें कॉटन से चेहरे पर लगाएं और कुछ ही हफ्तों के भीतर आपकी स्किन सॉफ्ट हो जाएगी।

लो ब्लड प्रेशर के पीछे भी इसी तरह के कारण हो सकते हैं

मन और शरीर में चलने वाली उथल-पुथल का असर स्वास्थ्य पर पड़ना बहुत स्वाभाविक है। लो ब्लड प्रेशर के पीछे भी इसी तरह के कारण हो सकते हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार तथा अन्य तरह से सतर्कता रखकर बहुत हद तक इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

ऐसे उपजती है तकलीफ

ब्लड प्रेशर का लो होना या हाइपोटेंशन की तकलीफ का मतलब है रक्त के दबाव का 90/60 से भी कम होना। यूं सामान्य तौर पर थोड़ा-बहुत या बिना लक्षणों के ब्लड प्रेशर का लो हो जाना कोई समस्या पैदा नहीं करता लेकिन यदि इसके लक्षण स्पष्ट नजर आने लगें और बार-बार यह तकलीफ उभरने लगे, तो यह किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा हो सकता है। जैसे- मस्तिष्क, हृदय तथा अन्य प्रमुख अंगों तक रक्त के प्रवाह का अपर्याप्त होना। खासकर उम्र के बढ़ने पर इस तरह की समस्याओं के उपजने का खतरा और बढ़ सकता है।

कई बार बहुत देर तक बैठे या लेटे रहकर उठने पर या लंबे समय तक खड़े रहने पर भी ब्लड प्रेशर लो हो सकता है। इसे पोस्चरल हाइपोटेंशन कहा जाता है। कई सारी अन्य ऐसी स्थितियां हैं, जो लो ब्लड प्रेशर का कारण बन सकती हैं। इनमें गर्भावस्था, हार्मोनल समस्याएं जैसे थाइरॉइड या डायबिटीज आदि, कुछ विशेष औषधियां, अल्कोहल का अधिक सेवन, हृदय संबंधी अनियमितताएं, रक्त वाहिकाओं का चौड़ा होना या फैलना और लिवर डिसीज आदि शामिल हैं। वहीं दुर्घटना, बीमारी या किसी अन्य कारण से ब्लड प्रेशर का एकदम से बहुत लो हो जाना खतरे का संकेत भी हो सकता है।

लक्षणों को लेकर रहें सतर्क

लो ब्लड प्रेशर के ऐसे केसेस जहां लक्षण नहीं होते, सामान्य तौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन इसके लक्षणों का उभरना सतर्क हो जाने का इशारा हो सकता है। लक्षणों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

जमीन पर बैठकर खाने के फायदे तमाम

कहते हैं वक्‍त के साथ खुद को बदलने में ही समझदारी है, मगर जमाने के साथ कई चीजें यूं ही नहीं चली आ रही हैं। उनके पीछे कुछ वजहें छिपी हैं, उनके कुछ महत्‍व हैं। अब जैसे कि जमीन पर बैठकर खाने की भारतीय परंपरा को ही ले लीजिए। जमीन पर बैठकर खाने के पीछे कई फायदेे भी छिपे थे जिनसे आपको रूबरू कराते हैं... आपने सुखासन योग के बारे में तो सुना ही होगा, जिसमें पालथी मारकर बैठते हैं। नीचे बैठकर खाते समय भी हम पालथी मारकर बैठते हैंं जिससे हमारा शरीर लचीला बनता है और मन शांत रहता है। इसके अलावा जमीन पर बैठने से तनाव भी खत्‍म होता है।

मौजूदा जीवनशैली को देखते हुए लोगों में मोटापे की समस्‍या आम हो गई है, मगर आप यह जानकर जरूर हैरान रह जाएंगे कि जमीन पर बैठकर खाने से हमारा वजन भी नियंत्रित रहता है। पालथी मारकर बैठने से आपका दिमाग शांत रहता है और पूरा ध्‍यान खाने पर होता है। ऐसे में आप जरूरत से ज्‍यादा खाने से भी बचते हैं।

- जमीन पर बैठकर खाते समय हमारा शरीर आगे की तरफ झुकता है और फिर सीधी मुद्रा में आता है। ऐसे में हमारे शरीर में पाचन क्रिया भी सही रहती है और आप अपच की परेशानी से बच जाते हैं। इसलिए अगर मोटापे की समस्‍या से परेशान हैं तो फिर से जमीन पर बैठकर खाना शुरू कर दीजिए।

- जमीन पर बैठकर खाने से हमारे शरीर में खून का बहाव भी सही होता है और इस तरह दिल बड़ी आसानी से पाचन में मदद करने वाले सभी अंगों तक खून पहुंचाता है, लेकिन जब आप कुर्सी पर बैठ कर खाना खाते हैं तो यहां ब्लड सर्कुलेशन विपरीत होता है। इसमें सर्कुलेशन पैरों तक होता है, जो कि खाना खाते समय जरूरी नहीं होता है।- इस पारंपरिक तरीके को अपनाने से आप समय से पहले बुढ़ेे भी नहीं हो सकते, क्योंकि इस मुद्रा में बैठकर खाने से रीढ़ की हड्डी और पीठ से जुड़ी कोई समस्‍या नहीं हो सकती है। साथ ही जो लोग कंधों को पीछे धकेलते हुए गलत मुद्रा में बैठने के कारण किसी तरह के दर्द से परेशान होते हैं, वो समस्या भी इस आसन में बैठकर खाने से दूर हो जाती है।

- पद्मासन और सुखासन एक ऐसी मुद्रा है ,जो आपके पूरे शरीर को लाभ पहुंचाती है। ये केवल आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में ही मदद नहीं करते, बल्कि आपके जोड़ों को कोमल और लचीले बनाए रखने में भी मदद करते हैं। गठिया व हड्डियों की कमजोरी जैसे अपक्षयी रोगों से भी बचाते हैं। लचीलेपन के साथ जोड़ों में चिकनाई आती है, जिससे जमीन पर बैठने में आसानी होती है।

- एक और फायदा जो जमीन पर बैठकर खाने से होता है, वो हमारे शरीर से नहीं बल्कि हमारे पारिवारिक प्रेम से जुड़ा हुआ है। जमीन पर अपने परिवार के साथ बैठकर खाने से आपसी प्रेम व सामंंजस्‍य बढ़ता है। यह एक पारिवारिक गतिविधि का हिस्‍सा होता है जब सभी लोग एक साथ बैठकर हंसी- खुशी खाना खाते हैं।

 

बिना एक्सरसाइज के ऐसे घटाएं वजन

यूं तो वजन घटाने का सबसे बेहतर तरीका है एक्सरसाइज! लेकिन ऐसे ट्रिक्स भी हैं जिन्हें आप ट्राय कर सकते हैं और आपको इसके लिए पसीना बहाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी...

EAT WITH DIM LIGHTS AND SOFT MUSIC

हलकी रोशनी में सॉफ्ट म्यूजिक के साथ खाना खाएं। इससे आप कम कैलोरीज लेंगे। इस तरह के रिलैक्सिंग माहौल में आपका ध्यान इधर-उधर नहीं भटकता और इसलिए आप पूरी तरह खाने पर ध्यान दे पाते हैं। नतीजा , आप अपना खाना ज्यादा एन्जॉय करते हैं और 'माइंडलेस ईटिंग" से भी बचते हैं। तो जब भी खाना खाएं अपने कमरे के सबसे डिम लाइट्स ऑन करें और हल्का म्यूजिक प्ले करते हुए खाने का आनंद लें।

CHANGE THE SIZE OF YOUR PLATE

बिना ज्यादा मेहनत किए खुद को ज्यादा खाने से रोकने का ये भी एक बेहतरीन तरीका हो सकता है। आप अपनी प्लेट की साइज छोटी रखें, आपका वजन भी अपने आप कम होगा। बड़ी प्लेट में हम अकसर ज्यादा खाना सर्व करते ही हैं। प्लेट बड़ी होने की वजह से खाना हमे ज्यादा नहीं मालुम पड़ता। इसलिए कोशिश करें कि छोटी प्लेट ही उठाएं। बिना कोई खास मेहनत किए ही हम वजन कम कर पाएंगे।

THINK ABOUT FOOD

डिनर पार्टी में शामिल होना है और आप दिन भर से वहां परोसे जाने वाले खाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ऐसा सोचते रहें। लम्बे वक्त तक खाने के बारे में सोचने से आपके ऐपटाईट हारमोन कम हो जाते हैं और आप कम खाना खाते हैं। आपके अंदर पेट भरे होने जैसी फीलिंग पैदा होती है और आप ज्यादा नहीं खा पाते।

DO A LITTLE WORK IN THE HOUSE

यहें कोई वर्कऑउट की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि घर के रोज के काम करने की बात कर रहे हैं। घर के काम करने से काफी कैलोरीज जलती हैं। हर हफ्ते 25 से 35 मिनट तक गार्डनिंग करके आप 200 कैलोरी घटा सकते हैं। हर हफ्ते अपनी गाड़ी खुद साफ करें। ऐसा करने से पैसे के साथ हफ्ते में 100 कैलोरी आसानी से घटा पाएंगे। तो कुछ घर के काम खुद करें और अपने साईज में फर्क देखें!

 

सही आहार से कम करें आर्थराइटिस का दर्द

आर्थराइटिस की वजह से होने वाला जोड़ों का दर्द रोगी के जीवन का ढर्रा ही बदल देता है। मगर अपने खानपान में कुछ परिवर्तन करके रोगी इस दर्द से काफी हद तक राहत पा सकता है। एक नजर डालते हैं ऐसे खाद्य पदार्थों पर, जो जोड़ों के दर्द में राहत प्रदान कर सकते हैं।

***

* फाइबर

आर्थराइिटस के कारण होने वाली जोड़ों की सूजन को कम करने में फाइबर की प्रचुरता वाला आहार कारगर हो सकता है। शोधों में पाया गया है कि भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) का स्तर घट जाता है। सीआरपी सूजन का सूचक होता है। फल और हरी सब्जियां फाइबर का श्रेष्ठ स्रोत होती हैं। खास तौर से गाजर, संतरे, स्ट्रॉबेरी का सेवन बढ़ाने से जोड़ों की सूजन में काफी लाभ होते पाया गया है।

अच्छी वसा

यह तो आप जानते ही होंगे कि सारी वसा स्वास्थ्य के लिए खराब नहीं होती। आर्थराइिटिस की सूजन को कम करने में ओमेगा-3 फैटी एसिड लाभदायक होते हैं। इन्हें मछली, अलसी, अखरोट, सोयाबीन, पालक आदि के माध्यम से लिया जा सकता है। इसके अलावा ऑलिव ऑइल भी फायदा दे सकता है। यह भी पाया गया है कि धीमी आंच पर, देर तक पकाया गया भोजन आर्थराइटिस के रोगियों के लिए, तेज आंच पर झटपट पकाए गए भोजन की तुलना में बेहतर होता है। कारण यह कि तेज आंच पर झटपट पकाए गए भोजन में 'एडवांस्ड ग्लायकेशन एंड प्रोडक्ट्स" निर्मित हो जाते हैं, जो जोड़ों सहित पूरे शरीर में सूजन बढ़ाने का काम करते हैं।

* फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रॉकली आदि

फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रॉकली व इनसे मिलती-जुलती सब्जियों में मौजूद सल्फोराफेन नामक यौगिक ऑस्टियो आर्थराइटिस के कारण होने वाली कार्टिलेज (उपास्थि/ नर्म हड्डी) की क्षति को कम करता है।

* प्याज-लहसुन

प्याज, हरी प्याज और लहसुन में 'डायएलाइल डायसल्फाइड" नामक यौगिक होता है, जो अन्य रोगों के अलावा आर्थराइटिस में भी लाभप्रद होता है। यह यौगिक कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाने वाले एन्जाइम्स पर लगाम लगाता है और इस प्रकार जोड़ों में दर्द कम करने में योगदान करता है।

* अदरक

अदरक में दर्द व सूजन दूर करने के गुण होते हैं। इसका प्रभाव नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेट्री ड्रग्स से मिलता-जुलता होता है। हां, यदि आप रक्त को पतला करने वाली दवाई लेते हैं, तो अदरक का सेवन अपने डॉक्टर से पूछकर करें क्योंकि यह इस दवाई के कार्य को प्रभावित कर सकता है।

* हल्दी

हल्दी के फायदों की लंबी सूची में एक फायदा यह भी है कि इससे जोड़ों की सूजन व दर्द में राहत मिलती है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन जोड़ों की बीमारियों से संबद्ध सूजन को नियंत्रित करने में मददगार होता है।

* विटामिन-सी

विटामिन-सी में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट्स ऑस्टियोआर्थराइटिस को तेजी से बढ़ने नहीं देते। इसलिए आर्थराइटिस के रोगियों को संतरे, टमाटर, अमरूद, स्ट्रॉबेरी, कीवी आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

* विटामिन-डी

शोध में पाया गया है कि आहार में विटामिन-डी का सेवन करने वाले लोगों में रूमेटॉइड आर्थराइटिस होने की संभावना कम हो जाती है और यह ऑस्टियो आर्थराइटिस की बढ़त को भी रोकता है। तैलीय मछलियों में विटामिन-डी पाया जाता है।

इसके अलावा कुछ डेयरी उत्पादों में भी प्रोसेसिंग के दौरान विटामिन-डी जोड़ा जा सकता है। मगर दिक्कत यह है कि खुद डेयरी उत्पाद आर्थराइटिस का दर्द व सूजन बढ़ा सकते हैं। इसलिए विटामिन-डी के लालच में इनका सेवन करना उल्टे नुकसान कर सकता है। बेहतर यही है कि विटामिन-डी को ध्ाूप के माध्यम से ही ग्रहण किया जाए।

 

लिप बाम के भी हैं खतरे हजार, लगाने से पहले बरतें ये सावधानी

होंठ चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं, लेकिन आपके फटे होंठ हो तो आपको शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है। ऐसे में फटे होंठों से निजात पाने के लिए सब लिप बाम लगाना शुरू कर देते हैं पर आपको यह बात जानकर हैरानी होगी कि बार-बार लिप बाम लगाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। होंठ जरा सा सूखता नहीं कि जल्दी से पैंट या पर्स के पॉकेट से डिब्बी निकालते हैं और उंगली अंदर डालकर बाम निकाल लेते हैं और होठों पर मल लेते हैं। इससे आपको कई तरह के इंफेक्शन हो सकते हैं। 
काम के दौरान हमारी उंगलियों पर बीमारियां फैलाने वाले कई बैक्टीरिया और वायरस चिपक जाते हैं। जरा सोचिए, आप टॉयलेट का हैंडल, फ्लश, मोबाइल आदि यूज करते हैं और उसके तुरंत बाद उसी हाथ से बाम भी निकालकर लगा लेते हैं, जिसके बाद यही बैक्टीरिया आपके मुंह से होते हुए शरीर में प्रवेश कर जाता है और आपको बीमार कर देता है। 
आपके लिए अच्छा यही होगा कि पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साफ  करें और उसके बाद ही लिप-बाम लगाएं। कई मामलों में लिप बाम से एलर्जी होता भी देखा गया है। लिप बाम में जिन केमिकल फ्रेग्नेंस का इस्तेमाल किया जाता है, उससे होंठों को नुकसान पहुंचता है। साथ ही लिप बाम का अच्छा ब्रांड की इस्तेमाल करें।

जोड़ों के दर्द से पाएं मुक्ति

गुलाब के फूल में कई औषधीय गुण होते है। जिससे आप कई तरह की बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।
गुलाब बेहद ही खूबसूरत फूल है और इसे सुंदरता और कोमलता का प्रतीक माना जाता है। गुलाब जितना दिखने में खूबसूरत होता है उससे कही अधिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। गुलाब के फूल में कई औषधीय गुण मौजूद होते है। जिससे आप कई तरह की बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।  
विटामिन सी
अगर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो गुलाब आपके लिए मददगार हो सकता है। गुलाब में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। गुलकंद बनाकर रोजाना सेवन करने से जोड़ो और हड्डियों में खास किस्म की लचक और शक्ति बनी रहती है।
वजन कम करना
गुलाब में मौजूद लैक्सेटिव और ड्यूरेटिक गुण मेटाबॉलिज्म ठीक रखता है और पेट के टॉक्सिन हटाता है। सही मेटाबॉलिज्म से शरीर में कैलोरी लॉस तेजी से होता है और वजन पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। 
सेहत में फायदेमंद
 गुलाब का फूल आपके दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। अर्जुन की छाल और देसी गुलाब दोनों को पानी में उबालकर काढ़े जैसा बना लें। फिर इस काढ़े को चाय की तरह पीने से दिल से जुड़ी बीमारियां दूर रहती है। यदि किसी की दिल की धड़कन बढ़ रही हो तो वह सूखी पंखुड़ियों को उबालकर पी सकता है।
डिहाइड्रेशन में लाभ
यदि आप थकान महसूस करते है तो गुलकंद खाए ये शरीर को स्फूर्ति देता है। इससे थकान और शरीर का दर्द दोनों दूर होता है। गुलकंद का सेवन आपको डिहाइड्रेशन से बचाता है। इससे शरीर को ठंडक मिलती है जिससे आप तरोताजा महसूस करते है।

लड़कियों में मोटापा, यानी बीमारियों को न्यौता

टाइम्स रिपोर्टर
जयपुर। खान-पान में अनियमितता के कारण आजकल लड़कियों में मोटापा बढ़ता जा रहा है जो गंभीर बीमारियों की जड़ भी मानी जा रही है। मोटापे को बढऩे देने से पहले ही उसके लिए विचार करना और उसके रोकथाम के उपाय करना ही उसका सबसे बड़ा उपचार है। यह बात मुरलीपुरा स्थित एमडीडी हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. सविता शर्मा ने कही। विश्व मोटापा दिवस पर उन्होंने कहा कि आजकल देखा जा रहा है कि नाबालिग बच्चों को असाधारण वनज बढ़ रहा है। खासतौर पर लड़कियों में कुछ अधिक। कहा कि जरूरी नहीं कि खान पान में गड़बड़ी के कारण ये बीमारियां केवल वयस्क को जकड़ती है, बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं और लड़कियों में आज के परिवेश का असर कुछ अधिक ही असर हो रहा है। जिससे उनमें पीसीओडी, मासिक धर्म की अनियमितता, थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार होने में उनको बहुत ही कम समय लग रहा है। डॉ. एस डी शर्मा ने कहा कि मोटापे का सबसे मुख्य कारण तनावयुक्त जीवनशैली है। अनियमित जीवनशैली भी इन गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है।
 उन्होंने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर के साथ ही डायबिटीज के रोगी भी शहर में हर सातवां व्यक्ति बनता जा रहा है। दोनों डाक्टरों ने महिलाओं और लड़कियों को इन गंभीर बीमारियों से बचने के भी उपाय बताए। 

बाईं ओर करवट ले कर सोने के फायदे

सोना हमारी दिनचर्या का एक बहुमूल्य अंग माना गया है। सोते वक्त हम जिस भी पोजिशन में लेटते हैं उसका भी हमारे शरीर पर काफी गहरा प्रभाव पड़ता है। इंसान का एक ही करवट में रातभर लेटे रहना नामुमकिन है, आप को जिस भी करवट आराम मिलता है उस ओर सो सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाएं ओर करवट कर के लेटने से आपको कई फायदे हो सकते हैं?

बाएं ओर करवट लेट कर सोने से कई बीमारियां, दिल का रोग, पेट संबन्धित खराबी, थकान, पेट का फूलना और अन्य शारीरिक समस्याएं हल हो सकती हैं। वहीं अगर आप बाएं की जगह दाएं ओर करवट ले कर सोते हैं, तो शरीर से टॉक्सिन ठीक प्रकार से फ्लश नहीं हो पाएगी, जिस वजह से पेट की बीमारी, दिल पर ज्यादा लोड पडऩा और हार्ट रेट का बढऩा हो सकता है।

जो लोग रात को सीधे सोते हैं, उन्हें उस दौरान ठीक से सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। यह पोजीशन उन लोगों के लिये अच्छी नहीं मानी जाती जिन्हें अस्थमा या स्लीप एपनिया की बीमारी है। इसलिये आपको बाएं ओर करवट ले कर सोने की आदत डालनी चाहिये।

घातक बीमारियां होती हैं दूर - बाएं ओर करवट लेने से शरीर में जमा टॉक्सिन धीरे धीरे लसीका तंत्र दृारा निकल जाता है। इसलिये खाना हज्म हो जाये इसके लिये मुनासिब ये है कि बायीं करवट सोया जाये ताकि लीवर और हाजमे के सिस्टम पर कोई दबाव न पड़े और वह अपना काम आसानी से कर ले।

लीवर और किडनियां अच्छे से काम करती हैं - हमारे शरीर से गंदगी निकालने का सबसे ज्यादा कार्य लीवर और किडनियों का ही है। इसलिये सोते समय इन पर ज्यादा प्रेशर नहीं डालना चाहिये।

पाचन सुधारे - बाएं ओर सोने से पेट और अग्न्याशय अपना काम जो कि खाना पचाने का कार्य है, उसको आराम से करने लगते हैं। अग्न्याशय से एंजाइम सही समय पर निकलना शुरु होता है। खाया गया भोजन भी आराम से पेट के जरिये नीचे पहुंचता है और आराम से खाना ह$जम हो जाता है। जिन लोगों का हाज्मा गड़बड़ रहता है और बदहजमी की शिकायत रहती है, उन्हें डाक्टर बायीं करवट लेटने की सलाह देते हैं।

सुबह पेट आराम से साफ होता है - बाएं ओर सोने की वजह से ग्रेविटी, भोजन को छोटी आंत से बड़ी आंत तक आराम से पहुंचाने में मदद करती है। इस वजह से सुबह के समय आपका पेट आराम से साफ होगा।

दिल पर $जोर कम पड़ता है - बाएं करवट सोने से दिल पर जोर कम पड़ता है क्योंकि उस समय दिल तक खून की सप्पलाई काफी अच्छी मात्रा मे हो रही होती है। अब अगर दिल स्वस्थ रहेगा तो खून व आक्सीजन की सप्लाई आसानी से शरीर और दिमाग तक भी पहुंचेगा।

एसिडिटी और सीने की जलन - इस पोजीशन में सोने पर जो पेट का एसिड होता है, वह ऊपर की जगह नीचे की ओर ही जाता है, जिससे एसिडिटी और सीने की जलन नहीं होती।

वसा का पाचन और फैटी लिवर से बचाव - हम सभी जानते हैं कि लीवर बाइल जूस निकालता है और गॉल ब्लैडर अच्छी पाचन क्रिया के लिये जिम्मेदार है। बाएं ओर करवट कर के सोने से ये दोनों ही अपने काम ठीक प्रकार से करते हैं। इससे ज्यादा बाइल जूस निकलता है जिससे वसा ठीक प्रकार से पचता है। साथ ही लीवर में फैट जमा नहीं हो पाता।

सुंदर त्वचा पाने के लिए अपनाइए

देश के जाने माने योग गुरु को बाबा रामदेव की कही हर बात को लोग अपनी जिंदगी में जरुर शामिल करते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि बाबा रामदेव दवाई खाने के हक में ना बोल कर अपनी बीमारी को प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीके से ठीक करने के लिये जोर देते हैं।

इस लेख में आज हम आपको बाबा रामदेव के बताए गए कुछ बहुत ही आसान से नुस्खों के बारे में बताएंगे जो कि आपके चेहरे को सुंदर और गोरा बनाने में मदद करेगें। हांलाकि बाबा रामदेव के बताए गए ये टिप्स किसी जादू की छड़ी की तरह तुरंत काम नहीं करेंगे, इन्हें काम करने में हफ्ते-दो हफ्ते या 1 महीना भी लग सकता है।

लेकिन इन नुस्खों से पाए गए रिजल्ट लंबे समय तक के लिये बरकरार रहेंगे। तो अगर आप सुंदर बनने के लिये बाजारू प्रोडक्ट का प्रयोग नहीं करना चाहती हैं तो, इसके लिये आपको अपनाने चाहिये बाबा रामदेव के बताए गए ये नुस्खे।
कपालभाति और प्रणायाम करें - यह सांस लेने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके दृारा $फेफड़े बिल्कुल साफ हो जाते हैं। इसमें ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन अंदर जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर आती है। अगर आप इसे 6 महीने तक करेंगी तो आपकी स्किन में शाइन आएगी। इसे दिन में 2 बार 15 मिनट के लिये जरुर करें।

ताजा जूस पीजिये - बाबा रामदेव कहते हैं कि आपको कोल्ड्रिंक आदि छोड़ कर रोज ताजा जूस पीना चाहिये। इससे आपकी स्किन ग्लो करेगी।

अपने चेहरे को रगड़ें - नहाने के बाद या नहाते समय अपने चहरे को मुलायम तौलिये से 1-2 मिनट के लिये हल्के हल्के रगडिये। इससे आकपी स्किन टाइट बनेगी और कोमल भी हो जाएगी।

हमेशा अच्छा सोचें - अपने दिमाग में हमेशा अच्छा विचार लाएं। इससे आप अंदर से खुश रहेंगी और चेहरे पर भी वह चीज साफ दिखेगी।

एलोवेरा मसाज - अपचे चेहरे, गरदन और हाथों को एलोवेरा के गूदे से दिन और रात के वक्त मसाज करें। इससे चेहरे पर एक्स्ट्रा शाइन आएगी।

बेसन पैक - बाबा रामदेव प्राकृतिक और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट चीज़े ही लगाने को बोलते हैं। बेसन चेहरे के लिये बहुत अच्छा होता है। आप इससे रोजाना अपने चेहरे को धो सकती हैं। या फिर इसे गुलाब जल के साथ मिक्स करें और $फेस पैक की तरह चेहरे पर लगाएं। इसे डेली 2 हफ्तों के लिये लगाएं और फर्क देखें।

नींबू का प्रयोग - बाबा जी बताते हैं कि चेहरे पर पड़े दाग-धब्बे, सन टैभनग और भपपल आदि को प्राकृतिक रूप से खतम करने के लिये नींबू को दिन में एक बार चेहरे पर रगडऩा चाहिये और बाद में हल्के गरम पानी से धो लेना चाहिये।

कच्चा दूध का प्रयोग - रात को रोजाना सोने से पहले, चेहरे पर कच्चा दूध लगा कर सो जाएं। फिर सुबह ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। इससे आपके चहरे पर तुरंत ही ग्लो आएगा। रोजाना ऐसा करने से चेहरा गोरा बनेगा।
खूब पानी पीजिये - आपको दिन में 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिये। इससे त्वचा लचीली बनेगी और अंदर से शाइन करेगी।

अच्छे से सोएं - सोने का एक रूटीन बनाएं। आपको 8 घंटे की नींद जरुर लेनी चाहिये। रामदेव जी बताते हैं कि इंसान को रात में 10 या ज्यादा से ज्यादा 11 बजे तक सो जाना चाहिये नहीं तो आंखों के नीचे काले घेरे पड़ जाते हैं। साथ ही सुबह जल्दी उठना चाहिये। 

सर्दियों में दमकती त्वचा के लिए रखे इन बातों का ख्याल

सर्दियां आ गयी है, और हमारी मुश्किलें बढ़ गयी है। हां मैं स्किन के रूखेपन और बाकि समस्यायों को बढ़ने की ही बात कर रही हूं। वैसे तो सर्दियां हमे खासतौर से पसंद होती है। लेकिन ठंडी बढ़ते ही जो मुश्किलें हमे झेलनी पड़ जाती है ,उससे निजात कैसे पाए और ऐसा क्या करे। आप सभी को ये समस्याएं सताने लग गयी होंगी। तो क्यों ना आज मैं आपकी प्रॉब्लम को दूर करने के लिए कुछ उपाय ही बता दू। तो आइये जानते है, ठण्ड कौन कौन सी मुश्किलें आती है, और आप इनसे कैसे निजात पा सकते है। 

ठण्ड में कई बार आपके स्किन की पपड़ी बन कर निकलती होगी, उसे स्केलिंग कहते है ,जिसमे खुजली भी काफी होती है।  स्किन का पपड़ी बनकर निकलना और खुजली जैसी समस्‍याओं से बचने के लिए सर्दियों में अपनी स्किन का विशेष ध्‍यान रखें।  लंबे समय तक हॉट शावर लेने से परहेज करें।  दरअसल ये आपकी स्किन ड्राई होने लगती है।  इसके बजाए हल्‍के गर्म पानी से नहाये। सर्दियों में स्किन पर रोजाना क्रीम बेस्‍ड मॉइश्‍चराइज़र जरूर लगाएं।  स्किन पर मॉइश्‍चराइज़र लगाने का सबसे सही समय नहाने के तुंरत बाद का होता है।

बार-बार हाथ धोने से कीटाणु तो शरीर तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन आपको बता दें कि पानी और हर प्रकार का साबुन स्किन को ड्राई कर देते हैं।  माइल्‍ड साबुन और मॉइश्‍चराइज़र का इस्‍तेमाल कर आप ड्राइनेस से लंबे समय तक दूर रह सकते हैं।

स्किन के नैचुरल मॉइश्‍चराइज़र को बनाए रखने के लिए साबुन का इस्‍तेमाल कम करें।  हमेशा अपने चेहरा ढककर बाहर निकलें, साथ ही SPF वाली पेट्रोलियम बेस्‍ड बाम का इस्‍तेमाल करें।

सर्दियों में अगर होंठ फट रहे हैं तो इन पर पेट्रोलियम जैली या ग्लिसरीन लगाएं।  घर से निकलते समय होंठों पर लिप बाम लगाना न भूलें।

ड्राई स्किन से बचने के लिए मसाज सबसे अच्‍छा उपाय है. नारियल के तेल से स्किन की मालिश करें, इससे रक्‍त का प्रवाह सही तरीके से होता है और स्किन मुलामय और चमकदार बनी रहती है।

चुकंदर के रस में नींबू और अदरक मिला कर पिएं, होगा फायदा ही फायदा

जैसा ही हम सभी जानते हैं कि चुकंदर का जूस स्वास्थ्य के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है। इसके रस में एंटी ऑक्सीडेंट, कैल्शियम, मिनरल, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन की भरपूर मात्रा होती है। इस जूस को एक गिलास में डालें और फिर उसमें आधा नींबू निचोड़े और आधा चम्मच अदरक का ताजा जूस घिस कर निकालें और चुकंदर के जूस में मिलाएं। इस जूस को हर रोज सुबह खाली पेट पियें।  

हाई बीपी को कम करे - यह प्राकृतिक पेय हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार होता है क्योंकि इसमें नाइट्रेट कंपोनेंट होता है जो कि खून की धमनियों को चौडा कर खून के फ्लो को हेल्दी तरीके से शरीर के अंगो तक पहुंचाता है।
स्ट्रोक से बचाए - यह पेय, दिमाग तक खून को पहुंचाता है, जिससे खून जम नहीं पाता और आदमी स्ट्रोक से बचा रहता है।

इम्यूनिटी बढ़ाए - यह हर्बल ड्रिंक पोषण और एंटीऑक्सीडेंट से भरा होता है, जो कि शरीर की हर कोशिका तक पहुंचता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और बीमारियों से बचाता है।

पाचन क्रिया सुधारे - यह पेट के एसिड लेवल को घोल देता है, जिससे अपच और पेट भूलने की समस्या से राहत मिलती है।

चेहरे की रंगत निखारे - चुकंदर, नींबू और अदरक का जूस रोजाना पीने से आपके चेहरे में निखार आता है और त्वचा की कोशिकाओं को पोषण मिलता है।  यह प्राकृतिक पेय आंत से टॉक्सिक और दूषित पदार्थ को निकाल कर बाहर करता है, जिससे कोलोन की अच्छी सफाई हो जाती है और शरीर स्वस्थ रहता है। 

यह ड्रिंक प्राकृतिक रूप से मोटापा भी घटाता है। यह शरीर में मेटाबॉलिज्म को तेज करता है , जिससे कैलोरी$ज बड़ी ही तेजी के साथ बर्न होने लगती हैं। और मोटापा घटता है।

वेडिंग सीजन : शादी के कुछ हफ्ते पहले तक रखे इन ध्यान

शादियों का सीजन आ चुका  है,  मार्किट और बैंक्वेट हॉल सज कर तैयार हो चुके है। इन दिनों  शादियों की तैयारी  ज़ोरो पर है।  शादी की शॉपिंग तो परवान छड़ी हुई है। हो भी क्यों ना, एक नयी दुल्हन बनने जा रही लड़की के लिए ये दिन कुछ खास ही होता है। अक्सर ऐसा होता है की, लडकिया शादी की तैयारियों में खुद का डाइट सही रखना भूल जाती है। जिसके वजह से चेहरे की दमक गायब होने लग जाती है। आप होने वाली दुल्हनों को शादी से पहले इन बातों का  ज़रूरी है। तो आइये जानते है। 

प्रोपर प्रोटीन डाइट -

दिनभर भूखा रहने और रात को लंच के दौरान जमकर खाने की बजाए, दिन में थोड़ा-थोड़ा खाती रहें. ऐसा खाना खाएं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट कम हो और प्रोटीन भरपूर मात्रा में हो.

सही प्लानिंग करे -

अपनी शारीरिक जरूरतों के अनुसार आगे की योजना बनाएं और इसके अनुसार कार्य करें। अगर आप बाहर खाना खाने जा रही हैं तो मैन्‍यूकार्ड को अच्‍छे से पढ़ लें और मैन्‍यू को देखकर ललचाने से बचें।  अधिक कैलोरी वाला खाना खाने की बजाए लो फैट वाला खाना ऑर्डर करें।

ग्रिल्ड फ़ूड खाये -

 शादी से 3 हफ्ते पहले हेल्‍दी रहने के लिए ग्रील्ड सब्जियों और चिकन सबसे अच्‍छे ऑप्‍शन हैं।  भूना, बेक और उबला हुआ खाना खाएं, तले हुए खाने से बचें. अगर आपको लगे कि आपका खाना बेहद रूखा है तो इसमें नीबू का रस डाला जा सकता है। 

मॉर्निंग एक्ससरसिस जरुरी - 

एक्‍सरसाइज करने का सबसे उत्तम समय मोर्निंग है. इस दौरान हवा शक्तिवर्धक होती है, हर तरफ शांति होती है और सबसे बड़ी बात नींद के बाद आप ऊर्जा से भरपूर होते हैं।  ऐसे में कार्डिंयो या एक्‍सरसाइज करने के लिए सुबह का समय ही तय करें। 
विटामिन सप्लीमेंट ले -
 हां, एक अच्‍छी नींद बेहद महत्वपूर्ण है।  आप शादी के चलते थकान महसूस कर रही हैं, तो विटामिन सप्लीमेंट ट्राई करें। 

दाल का बॉडी स्क्रब, जिससे चेहरा बने गोरा और बॉडी बने सुंदर

दाल तो हर किसी के घर में रहती है। आप इसे खाने के साथ साथ चेहरे और शरीर के लिये स्क्रब भी बना सकती हैं। स्क्रब बनाने के लिये दाल को पानी में कुछ देर के लिये चाहे तो भिगो कर रखें या फिर उसे हल्का सा उबाल लें। दाल का स्क्रब लगाने से पिगमेंटेशन और डेड स्किन साफ हो जाएगी।

दाल और बेसन : बेसन और किसी भी उबली दाल को मिक्स कर के पेस्ट बनाएं और बॉडी पर स्क्रब करें। इससे आपको डेड स्किन से छुटकारा मिलेगा और चमकती हुई त्वचा सामने आएगी।

आलू और दाल : आलू एक प्राकृतिक ब्लीच की तरह काम करता है। इसका पेस्ट बनाइये और इसमें दाल मिलाइये और इससे सन टैनिंग दूर कीजिये। 

एलो वेरा जैल और दाल : एलोवेरा जैल और दाल का पेस्ट बना कर अपनी बॉडी तथा चेहरे पर लगाएं और साफ रंगत पाएं।

दाल और दूध : दाल को हल्का सा पका लें और उसमें दूध मिक्स करें। यह पेस्ट थोड़ा गाढा ही होना चाहिये। इसको अपनी बॉडी पर लगाएं और चमकदार त्वचा पाएं। 

दाल और घी : पकी हुई दाल और घी का पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। इससे डेड स्किन निकलेगी और और घी की मदद से चेहरे को फैट मिलेगा जिससे त्वचा मुलायम बनेगी।

हल्दी और दाल : चेहरे और शरीर के लिये हल्दी सबसे बेस्ट पदार्थ है। आपको करना सिर्फ इतना है कि दाल का पेस्ट बना कर उसमें आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। इससे आपका चेहरा चमक उठेगा।

हमारे शरीर से होठों का रंग कुछ अलग होता है, आइए जानते क्यों ?

शरीर से होठों का रंग अलग होता है, लेकिन ऐसा क्यों होता है ये हम नही जानते  तो हम बता तो रहे हैं पढ़िए यहां हमारे शरीर का ऐसा अंग जिसके बिना आप अपने प्यार का इज़हार नहीं कर सकते हैं? जी हां हम आपके होठों की बात कर रहे हैं। आप इन  होठों को मिलाए बिना अक्षर ‘P’ नहीं बोल सकते हैं। ये दोनो के मिले बगैर नही होता हमें पता है आप कोशिश भी कर रहे होंगे।

हमारे होठों के बारे में एक खास बात ये है कि इसका  रंग शरीर के रंग से से बहुत ही अलग होता है। आप ये भी सोच रहे होंगे कि शरीर के और भी कई अंग ऐसे हैं जिनका कलर बॉडी के कलर से अलग होता है। तो फ़िलहाल हम होंठ की बात कर रहे हैं।  मित्रो हम जाननेगे  ऐसा क्यों होता है।

क्या आपको पता है कि आपके स्किन की जो बाहरी परत है उसे ‘Epidermis’ और भीतरी परत को ‘Dermis’ कहते हैं। Epidermis में एक और परत होती है जिसे ‘Stratum corneum’ कहते हैं। इस परत का काम आपकी स्किन का बचाव करना होता है। यह बात तो स्किन की हो गयी।

हमारी स्किन की तरह होंठों में भी यही तीन परतें होती हैं पर ‘Stratum corneum’ की परत स्किन में जितनी मोटी होती है, होठों में उतनी मोटी नहीं होती है। हम ये भी कह सकते हैं कि होंठों में यह परत बहुत ही पतली होती है। जिससे होठों का रंग शरीर के रंग से अलग होता है। ये शरीर के किसी अंग से मेल नही खाता है।

अगर आप भी है दोमुंह बालों से परेशान तो अपनाइए ये घरेलु टिप्स

लंबे, घनें, मुलायम बालों का शौक किसे नहीं होता। लड़कियां बालों को घना, मुलायम करनें के लिए न जानें क्या क्या उपाय करती है। इन समस्याओं में से ही एक समस्या है, बालों का दोमुंह होना। यह समस्या आम होनें के साथ ही गंभीर भी है, यदि इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो।

बालों का दोमुंहा होनें के पीछ कई कारण होते है। नियमित खानपान, प्रदूषण, हार्मान्स, आदि। लेकिन ये समस्या इतनी भी गंभीर नहीं है कि इसका कोई इलाज ना किया जा सकें। आज हम लेकर आए है इस समस्या के कुछ ऐसे घरेलु उपाय जो आप आसानी से अपना सकती है। तो आइए जानते है इन उपायों के बारे में।

पपीते और दही है बेहद असरकारक-  

दोमुंह बालों के लिए 150 ग्राम पपीता, और आधा कप दही ले। दोनों को अच्छी तरह मिलाकर सिर पर लगाए। कुछ घंटे बाद ही इसे पानी से धो लें।

अंडे और जैतून का तेल-

इसके लिए अंडे का पीला भाग लें, साथ ही तीन चम्मच जैतून का तेल इसमें मिलाएं। इसी में ही एक चम्मच शहद मिलाएं। पैक को बालों में 20 से 30 मिनट तक लगा रहने दें। फिर शैंपू से धो लें।

विंटर्स में ऐसे बचाए अपनें गुलाबी होंठों को फटनें से

सर्दियों में होंठों के फटनें, कटनें जैसी समस्या आम है। अक्सर इसके चलते कभी कभी होंठो से खून भी आने लगता है। सर्दियों ममें ठंडी और रुखी हवाएं चलना इस समस्या का प्रमुख कारण है। ऐसे में आवश्यक है कि सर्दी आते ही आप अपनें कोमल होंठों की देखभाल करना शुरु कर दें।

ऐसे में कुछ टिप्स हम आपके लिए लेकर आए है जिनके द्दारा आप अपनें गुलाबी होंठों को फटनें से बचा सकती है। तो आइए जानते है कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में।

= होंठों पर शहद लगाना भी बेहद कारगर होता है।

= इलायची में एक चमच मक्खन मिला कर होंठों पर लगाएं। इससे भी आपके होंठ नहीं फटेगें।

= इसके अलावा दूध में गुलाब की पंखुड़ियां को पीसकर होंठो पर लगाए। यह सर्दियों में होंठों को नरम ,मुलायम और गुलाबी रंगत देनें में फायदेमंद साबित होगा।

= सर्दियों में होंठों को फटने से बचानें के लिए होंठों पर देशी गाय का घी लगाए। इसमें पाई जानें वाली चिकनाहट आपके होंठो में नमी को बनाए रखेगी।

= होंठों के लिए नारियल तेल चमत्कारिक होता है। इससे होंठो की चमक बरकरार रहेगी।