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दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अक्टूबर में सुनवाई करेगी

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 खत्म करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने येचुरी को अपनी पार्टी के पूर्व विधायक युसुफ तारिगामी से मिलने के लिए जम्मू-कश्मीर जाने की इजाजत दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर 5 जजों की संविधान पीठ अक्टूबर के पहले हफ्ते में शुरू करेगी। माकपा नेता सीताराम येचुरी और कांग्रेस कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला समेत 10 से ज्यादा लोगों ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दायर की हैं। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि येचुरी पार्टी के महासचिव के नाते अपने दोस्त और पूर्व विधायक से मिल सकते हैं, इसके अलावा राजनीतिक मकसद से कहीं न जाएं। येचुरी ने तारिगामी से मिलने की मांग की थी। ेपूनावाला ने याचिका में कहा है कि स्थानीय नेताओं को नजरबंद करना गलत है। यह अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन है। नेशनल कांफ्रेंस सांसद मोहम्मद अकबर लोन, रिटायर्ड जस्टिस हसनैन मसूदी, पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार की ओर से भी याचिका दाखिल की गई हैं। वकील एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि राज्य में संचार पर पाबंदियां पत्रकारों के पेशेवर कर्तव्यों को पूरा करने की राह में बाधक बन रही हैं। अकबर लोन और मसूदी ने कहा है कि अनुच्छेद 370 अंवैधानिक तरीके से खत्म किया गया।

राहुल ने कहा- कश्मीर हमारा आंतरिक मसला

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। अनुच्छेद 370 खत्म करने के 23 दिन बाद पू्र्व कांग्रेस ने खुलकर कश्मीर मुद्दे पर अपनी बात रखी। आज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि हमारे सरकार से कई मुद्दों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन यह साफ है कि कश्मीर हमारा आतंरिक मसला है। पाकिस्तान यहां हिंसा फैलाने के लिए आतंकियों का समर्थन कर रहा है। 
दूसरी ओर, कांग्रेस ने कहा है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर राहुल के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा है। 
राहुल ने ट्वीट किया, ''मैं इस सरकार से कई मुद्दों पर सहमत नहीं हूं, लेकिन यह साफ कर देना चाहता हूं कि कश्मीर हमारा आतंरिक मामला है। इसमें पाकिस्तान समेत किसी भी देश के दखल की जरूरत नहीं है। जम्मू-कश्मीर में हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। पाकिस्तान यहां हिंसा फैलाने के लिए आतंकियों को उकसा रहा है। दुनियाभर में पाकिस्तान को आतंकियों का समर्थक माना जाता है।

शाहजहांपुर में यात्रियों से भरे दो वाहनों पर ट्रक पलटा, 16 की मौत

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में मंगलवार सुबह एक ट्रक टेंपो को टक्कर मारते हुए सड़क किनारे खड़े यात्रियों से भरे वैन पर पलट गया। हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच जख्मी हैं। हादसे के बाद ट्रक चालक फरार हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए कलेक्टर शाहजहांपुर को पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने का निर्देश दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर सुबह 10 बजे एक तेज रफ्तार खाली ट्रक जा रहा था। इसी दौरान अचानक सामने से यात्रियों से भरी टेंपो आ गई। ट्रक ड्राइवर ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन वह टेंपो को टक्कर मारते हुए सड़क किनारे खड़े यात्रियों से भरे एक अन्य वाहन पर पलट गया। 

नए कश्मीर का उदय धारा 370 का हटाया जाना आजाद भारत के इतिहास की सबसे महान घटना

श्मीर कभी महान शासक ललितादित्य और कनिष्क के कारण भी जाना जाता था, लेकिन इसी कश्मीर में सिकंदर ने 1393 से 1413 तक इतने कत्ल किए कि घाटी धर्मांतरित होकर लगभग हिंदूविहीन हो गई थी। यह भी कभी कश्मीर का वर्तमान था। तलवार के घाट उतारे गए उन्हीं हिंदुओं के वशंज अभी कल तक निजामे मुस्तफा के नारे लगाते सुनाई देते थे। स्मृतिलोप का प्रभाव इतना भयंकर हो गया था कि वे अपने ही इतिहास के शत्रु हो गए थे। सूफियों का हिंदू परंपराओं से सामंजस्य इसलिए हुआ ताकि प्रताडि़त हिंदू समाज को धर्मांतरित कराने का रास्ता बनाया जा सके, लेकिन फिर असहाय हिंदू समाज पर तलवारों ने अपना काम किया। कहने का तात्पर्य यह कि कश्मीर का इतिहास कोई 1946 की अमृतसर संधि से प्रारंभ नहीं हुआ जब अग्रेजों ने कश्मीर को महाराजा गुलाब सिंह को 75 लाख रुपये के राजस्व पर हस्तगत कर दिया था। उस संधि से कश्मीर और जम्मू एक राज्य के अधीन आए जिसमें फिर लद्दाख भी सम्मिलित हुआ। उसी समय से जम्मू और कश्मीर का स्वरूप सामने आया है। जो अब अतीत है वह वर्तमान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उठाए गए इस प्रश्न का कोई जवाब विरोधी पक्ष के पास नहीं है कि जब आपका प्रचंड बहुमत था तो अनुच्छेद 370 को स्थायी क्यों नहीं कर दिया गया? अनुच्छेद 370 का हटाया जाना आजाद भारत के इतिहास की सबसे महान घटना है। 1971 की विजय को हम महानतम उपलब्धि मानते रहे, लेकिन वह विजय वार्ताओं की मेज पर अर्थहीन हो गई। संविधान का अनुच्छेद 370 जैसे हमारे भाग्य के साथ रफू कर दिया गया था। 5 अगस्त वह दिन है जब इतिहास ने करवट ली। इसके लिए यह देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऋणी रहेगा। सदन में हुई चर्चाओं में आपत्तियां सामने आईं कि विपक्ष को विश्वास में लेकर निर्णय लिया जाना चाहिए था। आखिर अनुच्छेद 370 को संविधान में जोड़ते वक्त कौन सी बहस सुनी गई थी? बाबा साहब आंबेडकर ने तो साफ मना कर दिया था। सरदार पटेल ने भी कहा था कि नेहरू इस जिद के लिए पछताएंगे। दरअसल यह धार्मिक अलगाववाद को प्रश्रय देने वाला अनुच्छेद बनकर रह गया था। यह एक कैंसर था जिसे देश रूपी शरीर से निकाल फेंकना जरूरी था। यह अनुच्छेद कश्मीर में नेहरू की जनमतसंग्रह की घोषणा का परिणाम था जिसका निहितार्थ यह था कि कश्मीर का भविष्य अनिर्णीत और अनिश्चित है। इस विभाजित मानसिकता का प्रभाव शेष जम्मू-कश्मीर पर तो नहीं, लेकिन कश्मीर घाटी पर बहुत बुरा पड़ा। जब कश्मीर को विवादित मानकर पाकिस्तान से समझौता वार्ताएं चल रही हों तब आम कश्मीरी के लिए अपने को भारत का नागरिक न मानने का आधार मिल जाना स्वाभाविक था। आखिर जब कश्मीर का भविष्य तय करने की वार्ताएं हों तब कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, यह कहने का क्या अर्थ था? दुर्भाग्य से इस पर कभी विचार ही नहीं किया गया। अनुच्छेद 370 हटा तो अनिश्चितता का कोहरा भी पूरी तरह साफ हो गया है। अनुच्छेद 370 था तो मजहबी अलगाववाद था। अब आतंकवाद स्वयं लक्ष्यविहीन हो चुका है। अब वार्ताएं होंगी, पर गुलाम कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान की वापसी के लिए होंगी। इसी के साथ पाकिस्तान द्वारा चीन को हस्तगत की गई 5200 किमी की शख्शगम घाटी को लेकर भी वार्ताएं होंगी। वास्तव में अब यह अहसास हो रहा है कि 1971 की विजय के बाद इंदिरा गांधी और 1984 के प्रचंड बहुमत के बाद राजीव गांधी भी तो इस अनुच्छेद को हटा सकते थे। 
हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि यह अनुच्छेद 370 ही था जिसके चलते कश्मीर की भारत से आजादी के पैरोकार मुखर होने लगे थे, लेकिन अब सब कुछ बदल गया है। चूंकि बदले हुए परिदृश्य में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर घाटी को अशांत करने के हर संभव प्रयास हो सकते हैं इसलिए सतर्कता आवश्यक है। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाना प्रतीक्षित था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि स्थिति सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर बतौर पूर्ण राज्य बहाल हो सकता है। यह वह मास्टरट्रोक है जिसकी कल्पना किसी को नहीं थी। इससे कश्मीरी आतंकवाद का बुलबुला फूट गया है। मात्र चार जिलों श्रीनगर, कुलगाम, पुलवामा, अनंतनाग के प्रायोजित आतंकवाद से कश्मीर की मात्र 35 लाख आबादी और 7.5 प्रतिशत क्षेत्रफल ही प्रभावित है। भविष्य में स्थिरता की दृष्टि से पश्चिम कश्मीर के जिलों कुपवाड़ा, उड़ी, पुंछ, राजौरी को मिलाकर 15 लाख की आाबादी के लिए लद्दाख की तरह केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की आवश्यकता पड़ सकती है। यह क्षेत्र गुलाम कश्मीर की सीमा पर स्थित है। इसका मिजाज घाटी से अलग है और यह इलाका पाकिस्तानपरस्त नहीं है, बल्कि यह कश्मीर घाटी को उसके पाकिस्तानी संपर्कों से काटता है। इस इलाके में रहने वाले गुज्जर बकरवालों को केंद्र के सहारे की जरूरत पड़ सकती है। 
जब भी कभी जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए तो पश्चिमी कश्मीर सीमा क्षेत्र को केंद्र शासित बनाए रखना जरूरी होगा। यह परिवर्तन घाटी को सीमाओं से दूर कर जम्मू कश्मीर राज्य को मध्य में ले आएगा।

 


चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की घोषणा
उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की 'चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफÓ की घोषणा का निहितार्थ पूरी दुनिया के साथ पाकिस्तान ने भी समझा होगा। भारत अपनी सेनाओं को ब?ी भूमिका के लिए तैयार कर रहा है। जहां तक पाकिस्तान से हुए द्विपक्षीय समझौतों यथा शिमला समझौते और लाहौर घोषणा का प्रश्न है तो अब उनके निहितार्थ बदल जाएंगे।

मोदी ने यूएन महासचिव गुटेरेस और ब्रिटिश पीएम से मुलाकात की

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद एहतियातन नजरबंद किए गए मुख्यधारा के नेताओं पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। इनकी नजरबंदी चरणबद्ध तरीके से खत्म की जा सकती है। जी-7 सम्मेलन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश लौटने के बाद सरकार विपक्षी नेताओं से बात कर सकती है। साथ ही राज्य के हालात की समीक्षा के बाद अन्य पाबंदियां हटाई जाएंगी। सूत्रों ने बताया कि अलगाववादियों पर तो नहीं, लेकिन नजरबंद मुख्य धारा के नेताओं की पर सरकार विचार कर रही है। हालांकि अंतिम फैसला राज्य की ताजा स्थिति पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा। अनुच्छेद 370 खत्म करने से पहले और बाद में सरकार ने अब तक विपक्ष के साथ कोई संवाद नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार अब विपक्षी नेताओं से बात करेगी। फिलहाल यह तय नहीं है कि सर्वदलीय बैठक के जरिये बातचीत होगी या सरकार के प्रतिनिधि विभिन्न दलों के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। सूत्रों का कहना है कि पीएम सोमवार शाम स्वदेश लौटेंगे। इसके बाद भावी रणनीति तैयार होगी। 

विपक्ष का एक धड़ा नाराज 
सरकार के लिए राहत की बात यह है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मामले में विपक्ष का एक बड़ा हिस्सा शांत है। हालांकि विपक्ष का एक धड़ा नाराज भी है। नाराज धड़े का मुख्य फोकस मुख्यधारा के नेताओं की नजरबंदी पर है। कांग्रेस, द्रमुक को छोड़ कर ज्यादातर दल सियासी नुकसान के डर से इस मुद्दे से दूरी बना रहे हैं। मालूम हो कि अनुच्छेद 370 खत्म करने के साथ ही केंद्र ने उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन सहित कई नेताओं को नजरबंद कर दिया। 

जेटली का 66 साल की उम्र में निधन

मोदी ने कहा- उन्होंने देश को आर्थिक मजबूती दी

मैंने अपना अमूल्य मित्र खो दिया : मोदी

नई दिल्ली. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली एम्स में निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। उन्होंने दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली को कैंसर हो गया था। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। पिछले दिनों राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। मोदी फिलहाल यूएई में हैं। उन्होंने जेटली की पत्नी और बेटे से फोन पर बात की। दोनों ने मोदी से अपना विदेश दौरा रद्द न करने की अपील की। मोदी यूएई दौरे के बाद जी-7 समिट में हिस्सा लेने दोबारा फ्रांस जाएंगे। उन्हें बहरीन भी जाना है।  इस बीच भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि रविवार सुबह 10 बजे तक जेटली का पार्थिव शरीर उनके घर पर रहेगा। इसके बाद पार्थिव देह को पार्टी कार्यालय में रखा जाएगा। दोपहर बाद निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार होगा।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, ‘‘जेटली के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। वे गजब के वकील, सुलझे हुए सांसद और उत्कृष्ट मंत्री थे। देश को बनाने में उन्होंने अहम योगदान दिया। उनके जाने से राजनीति और बुद्धिजीवियों की दुनिया में एक खालीपन आ गया है।’’

 

केंद्र ने एजेंसियों का इस्तेमाल चिदंबरम की छवि बिगाड़ने के लिए किया : राहुल

नई दिल्ली (एजेंसी )। आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम के खिलाफ ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की साजिश बताया है। राहुल ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार चिदंबरम की छवि खराब करने के लिए एजेंसियों और बिना रीढ़ की मीडिया के एक वर्ग का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं ताकत के इस गलत इस्तेमाल की निंदा करता हूं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद देर रात ईडी और सीबीआई चिदंबरम के घर पहुंची थी, लेकिन वे नहीं मिले। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा, “चिदंबरमजी राज्यसभा के एक सम्मानित सदस्य हैं, जिन्होंने दशकों से वित्त मंत्री और गृह मंत्री के तौर पर देश की पूरी ईमानदारी से सेवा की। वे बेहिचक सच बोलते हैं और इस सरकार की नाकामियों को सामने लाते हैं। लेकिन, डरपोकों के लिए सच असुविधा का कारण बनता है और इसीलिए एजेंसियां शर्मनाक तरीके से उनके पीछे पड़ी हैं। हम उनके साथ खड़े हैं और सच के लिए लड़ते रहेंगे, फिर चाहे जो भी नतीजा हो।

70 साल बाद अनुच्छेद 370 हटा

 जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे

नई दिल्ली (एजेंसी )। केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद 370 हटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया था। शाह के प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी। 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने विलय संधि पर दस्तखत किए थे। उसी समय अनुच्छेद 370 की नींव पड़ गई थी, जब समझौते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था। 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया। जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए। आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है। 

नवी मुंबई के पास झरने के नीचे नहा रही 4 कॉलेज छात्राएं बहीं

मुंबई (एजेंसी )। महाराष्ट्र के नवी मुंबई के पास पिकनिक मनाने गईं चार छात्राएं पानी के तेज बहाव में बह गईं। घटना शनिवार सुबह खारघर में ड्राइविंग रेंज के नजदीक हुई। पुलिस के मुताबिक, कॉलेज के छात्राएं और कुछ महिलाएं यहां पहाड़ से गिरने वाले झरने में नहा रही थीं। घटना की सूचना मिलने के बाद खारघर फायर ब्रिगेड ने तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान चेंबूर नाका के पास छात्रा नेहा जैन (19) का शव मिला। अन्य तीन छात्राओं की खोज जारी है। सभी छात्राएं मुंबई के चेंबूर की रहने वाली थीं। महाराष्ट्र में पिछले दो दिन से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते झरने का बहाब तेज हो गया था और प्रशासन ने यहां पर्यटकों के आने-जाने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर छात्राओं और महिलाओं का ग्रुप झरने पर पिकनिक मनाने के लिए पहुंच गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई

मध्यस्थता पैनल समझौता नहीं करा सका

नई दिल्ली (एजेंसी ) । अयोध्या भूमि विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए गठित मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैनल किसी स्थायी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया। अब इस मामले की 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी कहा कि अब इस मामले की सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता है। पैनल ने गुरुवार को बंद लिफाफे में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलिफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। अदालत ने एक याचिका पर 11 जुलाई को पैनल से यह रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को सभी पक्षों के बीच दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश सदन में आखिरी मीटिंग हुई थी। 18 जुलाई को मध्यस्थता पैनल ने स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। तब सीजेआई ने कहा था कि अभी मध्यस्थता की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा रहा, क्योंकि ये गोपनीय है। पैनल जल्द अंतिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दे।

फाउंडर के विधायक दोस्त ने कहा- सिद्धार्थ को परेशान नहीं किया जाता तो वे जिंदा होते

मेंगलुरु (एजेंसी )। कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ की मौत के मामले में श्रृंगेरी के विधायक टीडी राजेगौड़ा ने बुधवार को कहा कि सिद्धार्थ आयकर विभाग के उत्पीड़न से परेशान थे। राजेगौड़ा ने बताया कि सिद्धार्थ 40 साल से पारिवारिक मित्र और सहयोगी थे। राजेगौड़ा के मुताबिक सिद्धार्थ लापता होने से 4-5 दिन पहले परेशान थे। कर्ज चुकाने के लिए वे अपनी संपत्तियां बेचना चाहते थे। उनकी संपत्तियों की वैल्यू देनदारियों से ज्यादा है। अगर उन्हें परेशान नहीं किया जाता तो वे आज जिंदा होते। राजेगौड़ा का कहना है कि सिद्धार्थ ने देश की अर्थव्यवस्था और कर्नाटक के लिए भी काम किया था। उन्होंने ग्रामीण इलाके के 30-35 हजार गरीब लोगों को रोजगार दिया था। सिद्धार्थ का शव बुधवार को मेंगलुरु की नेत्रावती नदी में मिला। वे सोमवार को लापता हुए थे। 27 जुलाई को स्टाफ के नाम लिखे पत्र में सिद्धार्थ ने आयकर विभाग के पूर्व डीजी द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इस साल जनवरी में आयकर विभाग ने सिद्धार्थ के शेयर अटैच किए थे। उनका कहना था कि इस कार्रवाई की वजह से नकदी का संकट हो गया। हालांकि, आयकर विभाग ने मंगलवार को प्रेस रिलीज में कहा था कि सिद्धार्थ के खिलाफ कार्रवाई नियमानुसार की गई थी।

राज्यसभा में तीन तलाक बिल पेश

कानून मंत्री बोले- यह लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान का मामला

नई दिल्ली  (एजेंसी ) । कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में तीन तलाक बिल पेश कर दिया। अब बिल पर 4 घंटे चर्चा होगी। रविशंकर ने कहा, ‘‘यह (तीन तलाक बिल) लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान का मामला है। तीन तलाक कहकर बेटियों को छोड़ दिया जाता है, इसे सही नहीं कहा जा सकता।’’ भाजपा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सामाजिक कूप्रथा को खत्म करने के लिए हम यह बिल लेकर आए हैं। यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है। लोकसभा में बिल के पक्ष में 303 और विरोध में 82 मत पड़े थे। तब कांग्रेस, तृणमूल, सपा और डीएमके समेत अन्य पार्टियों ने बिल का विरोध करते हुए वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट किया था। इससे पहले 16वीं लोकसभा में भी ट्रिपल तलाक बिल पास हो चुका था, लेकिन तब यह राज्यसभा में अटक गया था। राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है। साथ ही सहयोगी दल जदयू ने भी इस बिल का विरोध किया है। यही कारण है कि भाजपा ने सभी सदस्यों को राज्यसभा में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।