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सोनिया के करीबी जनार्दन द्विवेदी के बेटे समीर भाजपा में शामिल, कहा- मोदी के कामों ने पार्टी में आने की प्रेरणा दी

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। दिल्ली विधानसभा चुनाव से चार दिन पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी के बेटे समीर मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गए। अगस्त में भाजपा सरकार ने जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था, तब जनार्दन द्विवेदी ने मोदी सरकार की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया जी हमेशा से इसके खिलाफ थे। समीर ने कहा, ''मैं पहली बार किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बन रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों को देखकर मैंने भाजपा में जाने का फैसला किया।ÓÓ बेटे के भाजपा में शामिल होने पर जनार्दन ने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर वह शामिल हो रहे हैं तो यह उनका अपना फैसला है। 
दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने से पहले कांग्रेस ने अपनी तैयारियों के लिए कई समितियों का गठन किया और चुनाव प्रबंधन समिति व प्रचार समिति में पूर्व महासचिव जनार्दन द्विवेदी को बतौर सदस्य जगह दी गई। 


द्विवेदी हाल के दिनों में कई मुद्दों को लेकर पार्टी के लिए अहम साबित हुए हैं।

30 मार्च 2018 को जनार्दन को संगठन महासचिव पद से हटाया गया था। इसका लेटर भी खुद उनके हस्ताक्षर से जारी किया गया था। इसके साथ ही माना जा रहा था कि जनार्दन सक्रिय राजनीति को अलविदा कह देंगे।

भागवत के साथ मंच पर दिखाई दिए थे
दिसंबर में दिल्ली के लाल किला मैदान में गीता प्रेरणा महोत्सव में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ जनार्दन ने भी मंच साझा किया था, जिसके बाद उनके कांग्रेस छोडऩे की बात तेजी से फैली थी। कयास लगाए जा रहे थे कि जनार्दन जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं। 

ये लोग बाटला हाउस के आतंकियों के लिए रो सकते हैं, लेकिन दिल्ली का विकास नहीं कर सकते : मोदी

मोदी ने सोमवार को दिल्ली के कड़कडड़ूमा में और मंगलवार को द्वारका में चुनावी रैली को संबोधित किया
दिल्ली विधानसभा चुनाव के तहत 70 सीटों पर 8 फरवरी को मतदान होगा, नतीजे 11 फरवरी को आएंगे
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर द्वारका में हुई जनसभा में केजरीवाल सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा- दिल्ली में ऐसा नेतृत्व चाहिए जो सीएए, अनुच्छेद 370 जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के तमाम फैसलों पर देश का साथ देने वाला हो। ये लोग बाटला हाउस के आतंकियों के लिए रो सकते हैं, उनका साथ देने के लिए सुरक्षाबलों को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं, लेकिन दिल्ली का विकास नहीं कर सकते हैं। रैली के दौरान मंच पर हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (जजपा) नेता दुष्यंत चौटाला भी मौजूद थे। हरियाणा में भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जजपा के समर्थन से सरकार बनाई है। दिल्ली की 70 सीटों पर 8 फरवरी को मतदान होगा। नतीजे 11 फरवरी को आएंगे। 

बजट सत्र : लोकसभा में अनुराग ठाकुर-प्रवेश वर्मा के भाषण के दौरान हंगामा, विपक्ष ने "गोली मारना बंद करो" के नारे लगाए, वॉकआउट किया

 दशक का पहला बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू, संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा
लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल ने हंगामा किया, प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग की
विपक्षी दलों ने सीएए-एनआरसी और कोरोनावायरस के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग को लेकर राज्यसभा में नोटिस दिया
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। संसद के बजट सत्र में सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के मुद्दे पर हंगामा हुआ। कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और राजद समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के भाषण का विरोध किया। लोकसभा में 'गोली मारना बंद करो, देश को तोडऩा बंद करोÓ के नारे लगाए। इसके साथ ही सीएए-एनआरसी पर प्रधानमंत्री मोदी से जवाब की मांग की। इसके बाद जब भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा भाषण दे रहे थे, तो विपक्ष विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर गया। ठाकुर ने पिछले हफ्ते एक रैली में देशद्रोहियों को गोली मारने के नारे लगवाए थे। इसके बाद से दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों के पास फायरिंग की 3 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्मा ने शाहीन बाग को लेकर विवादित बयान दिया था। विपक्ष ने राज्यसभा में इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। लोकसभा में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जामिया छात्रों के साथ मारपीट के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा- जामिया में छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट हुई। बेटियों को मारा गया, लेकिन सरकार को शर्म नहीं आई। सरकार छात्रों पर अत्याचार कर रही है।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सीएए-एनआरसी का विरोध करते हुए कहा- देश का आम आदमी संविधान बचाने के लिए विरोध कर रहा है।
 प्रदर्शनकारी संविधान हाथ में लेकर, राष्ट्रगान गाकर इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन उन पर गोलियां चलवाई जा रही हैं। भारत के लोगों को बेरहमी से मारा जा रहा है। 


तृणमूल ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ही सवाल उठाए

ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण में सीएए, एनआरसी और कश्मीर में प्रतिबंधों को शामिल नहीं करने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी इसमें संशोधन की मांग कर रही है। तृणमूल सांसदों ने शुक्रवार को संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान भी प्रदर्शन किया था।

विपक्ष सीएए-एनआरसी के विरोध में

विपक्ष ने संसद द्वारा पारित नागरिकता कानून को असंवैधानिक करार दिया है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर इसी महीने सुनवाई होने वाली है। विपक्षी पार्टियों ने उन मुख्यमंत्रियों से एनपीआर लागू नहीं करने का आग्रह किया है, जो नागरिकता कानून का विरोध कर रहे हैं।

बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू 

इस दशक का पहला बजट सत्र 31 जनवरी से शुरू हुआ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश किया। सोमवार से लोकसभा और राज्यसभा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं।

सबरीमाला : धर्मस्थलों पर महिलाओं से भेदभाव: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- वकीलों में मतभेद, बहस के मुद्दे अब हम तय करेंगे

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेसी)। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने सोमवार को सबरीमाला और अन्य धर्मस्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे पर सुनवाई की। इस दौरान वरिष्ठ वकीलों ने बेंच से कहा कि वह सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मामले में दूसरे मामलों को नहीं जोड़ सकती। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, पूर्व अटॉर्नी जनरल के पाराशरण और पूर्व सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने विरोध जाहिर किया। इन लोगों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े इस बड़े मुद्दे का फैसला कर सकती है। 9 जजों की बेंच ने कहा- दोनों पक्षों के वकीलों में बहस के मुद्दे को लेकर मतभेद हैं। सभी वकीलों ने हमें सुझाव दिया कि हम मुद्दे तय करें और हम यह करेंगे। सुप्रीम कोर्ट 6 फरवरी को समयसीमा और मुद्दे तय करेगी।
9 सदस्यीय बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस आर भानुमती, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एमएम शांतानागौर, जस्टिस एसए नजीर, जस्टिस सुभाष रेड्डी, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। बेंच सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के खतना और पारसी महिलाओं के गैर-पारसी से शादी करने पर अग्निमंदिर (पूजा स्थल) में जाने से रोक समेत 7 ऐसे मुद्दों की सुनवाई कर रही है, जो आस्था और मौलिक अधिकारों से जुड़े हुए हैं।

हमें सबरीमाला पर पुनर्विचार नहीं, बड़ा मुद्दा तय करना है: सीजेआई
चीफ जस्टिस ने कहा- 5 जजों की बेंच ने सवाल तय किए। उन पर विचार जरूरी है। हम यहां सबरीमाला पुनर्विचार के लिए नहीं, बल्कि बड़े मुद्दे को तय करने के लिए बैठे हैं, जिसमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग जैसी मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिद में प्रवेश मांग रही हैं। इसके साथ ही दाउदी बोहरा में महिलाओं का खतना और पारसी महिलाओं के दूसरे धर्म में शादी करने पर अगियारी पर रोक को चुनौती दी गई है। एक वर्ग का कहना है कि मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में तो प्रवेश कर सकती है लेकिन वो पुरुषों के साथ इबादत नहीं कर सकतीं।

वकील फली नरीमन ने 5 जजों की संविधान पीठ के फैसले को बड़ी बेंच को भेजने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सबरीमाला में महिलाओं के जाने पर पुनर्विचार करते हुए दूसरे धर्मों की परंपराओं को इसमें जोड़ दिया गया। इसकी जरूरत नहीं थी। इस पर बेंच ने कहा कि हम इस मुद्दे पर भी विचार करेंगे। 

ये ऐसे मुद्दे, जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा: सिब्बल

वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा- ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका असर सभी धर्मों पर पड़ेगा। आप जो भी बोलेंगे उसका असर सभी पर होगा। इसका असर जाति व्यवस्था पर भी पड़ेगा, आप इसे कैसे तय करेंगे? इस पर सीजेआई ने कहा- हम इस आपत्ति को एक मुद्दे के रूप में समझेंगे और सुनेंगे भी... हम केवल उन लेखों की व्याख्या तय करने जा रहे हैं जो सबरीमाला और अन्य मामलों में भी लागू किए गए हैं। सीजेआई ने गुरुवार को कहा था कि अदालत सुनवाई के दौरान महिला अधिकारों, धार्मिक विश्वास जैसे बिंदु पर न्यायिक समीक्षा की गुजाइंश पर विचार करेगी। 

मोदी ने शाहीन बाग में 50 दिन से जारी प्रदर्शन पर कहा- यह संयोग नहीं, प्रयोग है

दिल्ली के कड़कडड़ूमा में मोदी की पहली रैली, दूसरी और आखिरी रैली मंगलवार को द्वारका में
दिल्ली में 8 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान, नतीजे 11 फरवरी को आएंगे
जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के कड़कडड़ूमा स्थित सीबीडी ग्राउंड में हुई चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा- सीलमपुर हो, जामिया हो या फिर शाहीन बाग बीते कई दिनों से सीएए को लेकर प्रदर्शन हुए। क्या ये प्रदर्शन सिर्फ एक संयोग हैं। नहीं, ये संयोग नहीं, ये प्रयोग हैं। इसके पीछे राजनीति का एक ऐसा डिजाइन है, जो राष्ट्र के सौहार्द को खंडित करने का इरादा रखता है।
उन्होंने कहा- आप और कांग्रेस राजनीति का खेल खेल रहे हैं। संविधान और तिरंगा सामने रखकर ज्ञान बांटा जा रहा है और मुख्य मुद्दों से ध्यान बंटाया जा रहा है। यह मानसिकता यहीं रोकना जरूरी है। साजिश करने वालों की ताकत बढ़ी तो कल किसी और गली और किसी और सड़क को रोका जाएगा। दिल्ली में अराजकता को नहीं बढऩे दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को द्वारका में दूसरी रैली को संबोधित करेंगे। इस बार मोदी की दिल्ली में केवल 2 चुनावी सभाएं ही रखी गई हैं। दिल्ली की 70 सीटों पर 8 फरवरी को मतदान होगा। नतीजे 11 फरवरी को आएंगे। कड़कडड़ूमा की रैली में मंच पर मोदी के साथ दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की फोटो नजर आईं। सभा स्थल पर अमित शाह की तस्वीर नहीं लगाई गई। राजनीतिक गलियारों में हलचल है कि अगर दिल्ली के नजीते उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए तो हार का ठीकरा नड्डा के सिर फोड़ा जाएगा। सभा स्थल पर मीडिया को पब्लिक से बात नहीं करने दी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था तीन स्तरों पर है।

 सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि शाम पांच बजे के बाद ही मीडिया पब्लिक से बातचीत कर पाएगी। दरअसल, इस समय के बाद प्रधानमंत्री मोदी सभा स्थल से रवाना हो जाएंगे। इस बार सभा स्थल पर चुनिंदा मुस्लिम ही नजर आ रहे हैं। 

चिली में आग में दम घुटने से एक और प्रदर्शनकारी की मौत, पुलिस झड़प में एक घायल

जयपुर टाइम्स
सैंटियागो (एजेंसी)। चिली की राजधानी में सुपरमार्केट में आग लगने से एक और व्यक्ति की दम घुटने से मौत हो गई। इसके साथ ही इस प्रदर्शन में आग से झुलस कर या दम घुटने से मरने वालों की संख्या चार हो गई है। इसके साथ पुलिस की झड़पों में एक व्यक्ति घायल हो गया। इस प्रदर्शन मेंआग से मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। बता देंं कि अक्टूबर 2019 में सैंटियागो सुपर बाजार के अंदर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों के बाद आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी। अब प्रदर्शनां में मरने वालों की संख्या दस के पार पहुंच गई है। बता दें कि चिली में मेट्रो किराया वृद्धि के खिलाफ लोगों का गुस्सा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आया था। देखते ही देखते यह विरोध प्रदर्शन देश के कई स्थानों पर फैल गया। चिली को लैटिन अमेरिका का सबसे अस्थिर देशों में गिना जाता है। यहां किराए में वृद्धि की वजह से हो रहे प्रदर्शन को आम जनता के बीच असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। 6 अक्टूबर 2019 से चिली में प्रदर्शनकारी मेट्रो में किराए वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन काफी शांतिपूर्वक शुरू था, लेकिन इस आंदोलन ने बड़ा रुप ले लिया। इसमें काफी संख्या में लोगों की मौत भी हुई। पिछले दिनों उग्र होते इस प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने कर्फ्यू भी लगा दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं।


 अधिकारियों ने इस पूरे मामले को शांत करने के लिए कई उपायों का प्रस्ताव भी रखा है। इसके बाद भी यह आंदोलन दोबारा से शुरू हो चुका है। स्?थानीय पुलिस ने 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को लूट और अन्?य गंभीर अपराधों के आरोप में हिरासत में जा चुके हैं।। स्?थानीय अधिकारियों ने बताया कि बिगड़ती कानून व्?यवस्?था को ध्?यान में रखते हुए यहां कई बार कफ्यु लगाया।  

रविशंकर प्रसाद ने कहा- सरकार शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत को तैयार नागरिकता कानून पर शंकाएं दूर करेंगे

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने  सीएए को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्वीट किया कि वह तय रूपरेखा के तहत शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेंगे। इस दौरान उनकी सीएए को लेकर शंकाएं भी दूर की जाएगी। शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ 15 दिसंबर से प्रदर्शन चल रहा है। इससे पहले, गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक चुनावी रैली के दौरान सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन पर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि बाबरपुर में ईवीएम का बटन इतने गुस्से के साथ दबाना कि करंट शाहीन बाग के अंदर लगे। वहीं, भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा था- सत्ता में आए तो सरकारी जमीन पर बनी मस्जिदें हटा देंगे, एक घंटे में शाहीन बाग भी साफ हो जाएगा।
 दिल्ली में सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की जगहें लगातार बढ़ रही हैं। शाहीन बाग और जामिया यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ विरोध दिल्ली में 20 जगहों तक पहुंच चुका है। दक्षिण पूर्व जिला में गेट-7 जामिया यूनिवर्सिटी, शाहीन बाग रोड नंबर 13, लाला लाजपत राय मार्ग निजामुद्दीन, दक्षिण जिला में दांडी पार्क हौज रानी मालवीय नगर, मध्य जिला में तुर्कमान गेट, उत्तर जिला में इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन के पास, डेयरी वाला पार्क आजाद मार्केट जंगल वाली मस्जिद, शाही ईदगाह के ईस्ट गेट पर विरोध प्रदर्शन लगातार चल रहे हैं। 

गरीबों को 2 रु किलो आटा मिलेगा 5 साल में 10 लाख नौकरियों का वादा

निर्भया के दुष्कर्मियों को होने वाली फांसी टली

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। निर्भया के गुनहगारों को डेथ वॉरंट के हिसाब से 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाए या नहीं। इस पर पटियाला हाउस कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। दोषियों में शामिल अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और विनय शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान तिहाड़ प्रशासन ने कहा- चार दोषियों में से सिर्फ विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। ऐसे में दोषियों को अलग-अलग फांसी दे सकते हैं। तीन दोषियों मुकेश, पवन और अक्षय को 1 फरवरी को फांसी पर लटकाया जा सकता है। इस पर दोषियों के वकील एपी सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने फांसी को अनिश्चितकाल के लिए टालने की मांग की। एपी सिंह ने कहा कि एक दोषी की याचिका लंबित होने से बाकी दोषियों को फांसी देना गैर-कानूनी होगा। उन्होंने गुरुवार को भी कोर्ट से 1 फरवरी को फांसी पर रोक लगाने की मांग की थी। इसके लिए दिल्ली प्रिजन मैनुअल का हवाला दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि अभी दोषियों के पास दया याचिका समेत कानूनी विकल्प हैं। इस पर अदालत ने तिहाड़ प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। पटियाला हाउस कोर्ट ने 17 जनवरी को दूसरा डेथ वॉरंट जारी किया था।

एनडीए सरकार ने लगाई घाटे पर लगाम, अब राजकोष को साधने की बड़ी चुनौती

ते बजट का विश्लेषण बताता है कि वर्ष 2018-19 में बजट अनुमानों के राजस्व की तुलना में वास्तविक राजस्व प्राप्तियों में 1.70 लाख करोड़ रुपये की कमी रही। यह कमी बजट अनुमानों के 11 प्रतिशत के बराबर थी। केंद्र सरकार की प्रत्यक्ष करों की प्राप्ति का लक्ष्य 13.35 लाख करोड़ रुपये था, जबकि नवंबर तक इसकी प्राप्तियां छह लाख करोड़ रुपये ही थी और सरकार की संबंधित एजेंसी की ओर से यह संकेत दिया गया कि प्रत्यक्ष करों की प्राप्तियां काफी कम रह सकती हैं। मात्र कॉरपोरेट करों की दर में कमी के चलते 1.45 लाख करोड़ रुपये का राजस्व का नुकसान हो सकता है। उधर जीएसटी की प्राप्तियां भी बहुत प्रोत्साहन देने वाली नहीं है। सरकार के बजट में कुल खर्च और उधार को छोड़ सभी प्राप्तियों के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इस राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है। यह उधार आम जनता से लिया जाना होता है, लेकिन इसमें एक बड़ा हिस्सा बैंकों और वित्तीय संस्थानों का भी होता है। इसके अलावा सरकार रिजर्व बैंक के माध्यम से अतिरिक्त नोट छापकर भी घाटे को पूरा करती है। इस प्रक्रिया को घाटे का मौद्रिकीकरण कहते हैं। अधिक राजकोषीय घाटे का मतलब है अधिक मुद्रास्फीति। ज्यादा राजकोषीय घाटा होने पर मौद्रिकृत घाटा भी बढ जाता है और इस कारण करेंसी का सर्कुलेशन बढ जाता है, जिससे मुद्रास्फीति यानी कीमतों में वृद्धि होती है। यूपीए सरकार के समय वर्ष 2011-12 तक आते-आते राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.7 प्रतिशत तक पहुंच गया था। नतीजन यूपीए के कार्यकाल में मुद्रास्फीति दो अंकों (13 प्रतिशत) तक पहुंच गई।   नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सत्ता संभालने के बाद आर्थिक नीति में स्पष्टता लाते हुए सबसे पहला फैसला यह किया गया कि राजकोषीय घाटा एक सीमा में रखा जाए। यूपीए सरकार के अंतिम बजट और यूं कहें कि 2014-15 के अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने राजकोषीय घाटे का अनुमान जीडीपी का 4.1 प्रतिशत रखा और उससे पिछले साल यानी 2013-14 का राजकोषीय घाटा कम करके दिखाया गया था। हालांकि उस समय के आर्थिक विश्लेषकों का यह मानना था कि वह राजकोषीय घाटा वास्तविक नहीं था और वास्तव में घाटा उससे कहीं ज्यादा था। यह काम आंकड़ों की हेराफेरी और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से अग्रिम डिविडेंट लेकर किया गया था। ऐसे में एनडीए सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने एक चुनौती थी कि इस प्रकार की वित्तीय फेरबदल के मद्देनजर राजकोषीय घाटे को कैसे सीमित रखा जा सकता है। अरुण जेटली ने उस चुनौती को स्वीकार किया और 2014- 15 के पूर्ण बजट (जो जुलाई 2014 में प्रस्तुत किया गया था) उसमें उस वर्ष के राजकोषीय घाटे को चिदंबरम के अंतरिम बजट के अनुरूप जीडीपी के 4.1 प्रतिशत पर ही रखा। उसके उपरांत एनडीए सरकार ने राजकोषीय घाटे को निरंतर घटाते हुए वर्ष 2015-16, 2016-17, 2017-18 और 2018-19 में इसे क्रमश: जीडीपी के 3.9, 3.5, 3.2 और 3.3 प्रतिशत पर रखा। घाटे पर लगाम लगाने का असर यह हुआ कि कीमतें नियंत्रण में आने लगीं और मोदी सरकार के कार्यकाल में उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि 2018-19 में मात्र 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत था, क्योंकि इसके कारण ब्याज दरों के घटने का रास्ता साफ हो गया था। नीतिगत ब्याज दर का सीधा संबंध मुद्रास्फीति के साथ होता है। जब मुद्रास्फीति कम होती है तो रिजर्व बैक ब्याज दरों को घटाता है। ब्याज दर घटने से एक ओर निवेश लागत कम हो जाती है, जिससे निवेश बढता है। दूसरी तरफ घरों, कारों और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के लिए उधार सस्ता हो जाता है और ईएमआइ घट जाती है। इससे भी अर्थव्यवस्था में मांग बढती है। महंगाई घटने से लोगों का जीवन बेहतर होता है। यानी मोदी सरकार के पहले चरण में एक ओर कीमतें नियंत्रण में रहीं, दूसरी तरफ जीडीपी ग्रोथ भी बेहतर हो गई थी। जैसाकि अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2019-20 का राजकोषीय घाटा जो मात्र 3.4 प्रतिशत अनुमानित था, वह 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि इससे महंगाई भी बढ सकती है। उधर देश मांग में धीमेपन के चलते लगातार ग्रोथ के घटते अनुमानों से जूझ रहा है। वर्ष के प्रारंभ में सात प्रतिशत के आसपास संभावित ग्रोथ का आकलन किया जा रहा था, जो घटकर पांच प्रतिशत पर आ गया है। ऐसे में बढते राजकोषीय घाटे के चलते नीतिगत ब्याज दर में कमी की संभावनाएं घटती जा रही हैं, जिसके चलते निवेश और उपभोक्ता मांग में वृद्धि की उम्मीद भी कम हो जाएगी। ऐसे में वर्ष 2020-21 का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने एक चुनौती होगी कि राजकोष को किस तरह से संतुलन में रखा जाए और कम से कम अगले साल राजकोषीय घाटा सीमा में रहे। स्पष्ट है कि धीमेपन के चलते प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की प्राप्ति उम्मीद से कम है और साथ ही निवेश को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाने के कारण भी राजस्व कम हो जाएगा। उधर जीएसटी वसूली भी उम्मीद से कम हो रही है, जिसका दोहरा नुकसान केंद्र सरकार को 
हो रहा है। 


एक ओर उसका स्वयं का राजस्व कम हो रहा है, दूसरी ओर उसे राज्यों को कम प्राप्ति का भी मुआवजा देना प? रहा है। गौरतलब है 2019-20 में उसे पहले से कहीं ज्यादा राज्यों को भरपाई करनी होगी। इनवेस्टमेंट इंफोर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (आइसीआरए) के अनुसार नौ ब?े राज्यों के लिए ही भरपाई की राशि पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी होकर 70 हजार करो? रुपये तक पहुंच सकती है। अन्य राज्यों के राजस्व की भरपाई के लिए राशि को मिला लिया जाए तो केंद्र सरकार के लिए स्थिति और विकट हो सकती है। आज जबकि कॉरपोरेट का व्यवसाय ब? रहा है, लेकिन कॉरपोरेट टैक्स की प्राप्तियां नहीं ब? पा रही हैं? इसका कारण यह है कि तकनीकी कंपनियां, ई-कामर्स कंपनियां और ब?ी विदेशी सॉफ्टवेयर कंपनियां टैक्स नहीं देती हैं। यह सर्वविदित है कि देश का खुदरा व्यापार लगातार ब?ी विदेशी ई-कामर्स कंपनियों के हाथ में जाता जा रहा है। इसी प्रकार ट्रैवल, टैक्सी आदि सेवाओं के क्षेत्र में भी ब?े कॉरपोरेट एग्रीगेटर आ गए हैं। वास्तव में ये कंपनियां अपनी आर्थिक ताकत के बल पर डिस्काउंट देते हुए बाजार और डाटा पर कब्जा कर रही हैं। इस प्रकार उनका मूल्यन लगातार ब? रहा है। यानी प्रोमोटरों को तो खासा लाभ हो रहा है, लेकिन ये कंपनियां आयकर देने से बच रही हैं। विशेषज्ञों की ओर से लगातार यह सुझाव दिया जा रहा है कि ऐसी कंपनियों पर उनके व्यवसाय की मात्रा के आधार पर न्यूनतम टैक्स दर लगाकर उनसे आयकर वसूला जाए। हमें समझना होगा कि पिछले लंबे समय से सरकारी खजाने को इस कारण नुकसान हो रहा है। ऐसी चिंता भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में जताई जा रही है। 'ओईसीडीÓ देशों में इसके बारे में प्रयास शुरू हो चुके हैं और फ्रांस ने इस बाबत पहल की है। भारत को भी इसके बारे में विचार करना होगा, तभी सरकारी राजस्व में आ रही कमी की भरपाई हो पाएगी।  

अनुराग ठाकुर के बयान का वीडियो वायरल, चुनाव आयोग ने रिठाला विधानसभा के रिटर्निंग अफसर से रिपोर्ट मांगी

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की दिल्ली में हुई रैली पर चुनाव आयोग ने रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय मंत्री की रिठाला में हुई रैली का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसमें वह यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि देशद्रोहियों को गोली मार दो। अनुराग के बयान पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। पार्टी ने कहा था कि एक केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री का यह बयान ध्रुवीकरण की कोशिश है। इसी को लेकर दिल्ली के निर्वाचन अधिकारी ने रिठाला विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर से रिपोर्ट मांगी है। इस रैली के बाद जब अनुराग ठाकुर से नारे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने रिपोर्टरों को पूरा वीडियो देखकर दिल्ली की जनता का मूड भांपने की सलाह दी। दूसरी तरफ भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा है कि दिल्ली के शाहीन बाग और कोलकाता के पार्क सर्कस में धरने पर बैठे ज्यादातर लोग बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठिए हैं। उन्होंने सोमवार को कहा, "यह लोग (प्रदर्शनकारी) बच्चों और महिलाओं को ढाल बना रहे हैं। हालिया वीडियो में साफ हुआ है कि वे भारत को बांटना और असम को देश से तोडऩा चाहते हैं। क्या इस देश के लोग कभी देश को बांटना चाहेंगे? राहुल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी सीएए के विरोध में प्रस्ताव पास करने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ममता की सरकार संविधान के तहत बनी है और सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास कर उन्होंने उसी संविधान का अपमान किया है। पिछले महीने कपिल मिश्रा ने भी कनॉट प्लेस में हुई भाजपा की तिरंगा रैली में यही नारा लगवाया था। हालांकि, दिल्ली भाजपा ने कपिल के बयान से पल्ला झाड़ लिया था। कपिल को भाजपा ने मॉडल टाउन से टिकट दिया है। पिछले हफ्ते ही चुनाव आयोग ने उन पर ट्वीट में आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने के लिए 48 घंटे का बैन लगाया था। कपिल ने कहा था कि 8 फरवरी (दिल्ली चुनाव) के दिन भारत बनाम पाकिस्तान का मुकाबला होगा। 

मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने उग्रवादी संगठन उल्फा को बातचीत का न्योता दिया, कहा- केंद्र सरकार समझौते के लिए तैयार

जयपुर टाइम्स
दिसपुर (एजेंसी)। असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने उग्रवादी संगठन उल्फा-आई के लीडर परेश बरुआ को बातचीत के लिए न्योता दिया है। असम और नॉर्थ ईस्ट में लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में शामिल इस संगठन ने गणतंत्र दिवस के पर डिब्रूगढ़ में तीन जगहों पर धमाके किए थे। हालांकि, इनमें कोई हताहत नहीं हुआ। सीएम शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार भी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है। एक दिन पहले ही केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के प्रतिनिधियों ने सोमवार को असम समझौते पर दस्तखत किए। इसके तहत अब असम से अलग बोडोलैंड बनाने की मांग खत्म होगी। बोडो उग्रवादियों के सरकार से समझौते के बाद उल्फा-आई संगठन के प्रमुख परेश बरुआ ने कहा था कि इससे आने वाले समय में असम में शांति स्थापित होगी। खासकर बोडोलैंड के क्षेत्र में। बरुआ ने एक चैनल से बातचीत में समझौते का स्वागत करते हुए कहा था कि राज्य में इसे लेकर कोई अलग विचार नहीं है। बोडो लोग अपने अधिकारों को लेकर दशकों से लड़ रहे हैं। हम अपनी जमीन पर एकता के साथ रहेंगे। बरुआ के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि वे भी केंद्र सरकार की तरफ की से शांति समझौते की पहल पर विचार कर सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो संगठन के प्रतिनिधियों ने सोमवार को असम समझौता-2020 पर दस्तखत किए। इसके साथ ही करीब 50 साल से चला आ रहा बोडोलैंड विवाद खत्म हो गया है। इस मौके पर गृह मंत्री ने घोषणा की कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के 1,550 सदस्य 30 जनवरी को 130 हथियार सौंपकर आत्मसमर्पण कर देंगे। समझौते में असम के संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंड ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी), ऑल बोडो स्टूडेंट एसोसिएशन (एबीएसए) शामिल हुए।