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कौन हैं वो 4 जज, जिनकी एक प्रेस कांफ्रेंस से हिल गई मोदी सरकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस ने न सिर्फ देश को हिला दिया बल्कि मोदी सरकार में भी इसको लेकर हड़कंप मच गया। जजों के मीडिया के सामने आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को तलब किया। आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश की शीर्ष अदालत के वरिष्ठ जज ऐसे मीडिया के सामने आए हैं और कोर्ट प्रशासन के कामकाज पर आरोप लगाया है। इन जजों ने न्यायपालिका में जारी भ्रष्टाचार पर अपनी बात रखी और देश के प्रति अपने फर्ज के लिए भी अपनी निष्ठा जाहिर की।

जस्ती चेलमेश्वर
प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर के घर में हुई, बाकि के तीनों जज इनके ही घर पर इकट्ठे हुए। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस चेलमेश्वर केरल और गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वकालत उनको विरासत में मिली है। 1976 में उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की। अक्तूबर, 2011 में वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। चेलमेश्वर और रोहिंगटन फली नरीमन की 2 सदस्यीय बेंच ने उस विवादित कानून को खारिज किया जिसमें पुलिस के पास किसी के खिलाफ आपत्तिजनक मेल करने या इलेक्ट्रॉनिक मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार करने का अधिकार था। उनके इस फैसले की देशभर में जमकर तारीफ हुई और बोलने की आजादी को कायम रखा। जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइन्ट्मन्ट्स कमीशन (NJAC) का समर्थन भी इन्होंने किया था। इतना ही नहीं वे पहले से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था की आलोचना भी कर चुके हैं।

भारत भी कमजोर नहीं: सेना प्रमुख

नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि चीन ताकतवर देश होगा, लेकिन भारत भी कमजोर देश नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत किसी को भी अपने क्षेत्र में घुसपैठ की अनुमति नहीं देगा। आर्मी चीफ ने चीन की तरफ से मिलने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की रणनीति पर बात की।
रावत ने कहा, 'अब समय आ गया है कि भारत अपना ध्यान उत्तरी सीमा की ओर केंद्रित करे। देश इसके साथ ही चीन की आक्रामकता से निपटने में भी सक्षम है।' सेना प्रमुख ने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के आक्रामक चीन के प्रयासों के बीच कहा कि भारत अपने पड़ोसियों को देश से दूर होकर चीन के करीब नहीं जाने दे सकता। डोकलाम मुद्दे पर रावत ने कहा, 'हम सीमा पर होनेवाली गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। किसी भी तरह की हलचल हुई तो हम तैयार हैं।' 
सेना प्रमुख  ने मीडिया कॉन्फ्रेंस में कहा, 'चीन एक शक्तिशाली देश है, लेकिन हम कमजोर देश नहीं हैं।' भारत में चीनी घुसपैठ से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में कहा, 'हम किसी को भी हमारे क्षेत्र में घुसपैठ की अनुमति नहीं देंगे।' रावत ने आतंकवाद से निपटने को लेकर पाकिस्तान को दी गई अमेरिका की चेतावनियों के बारे में कहा कि भारत को इंतजार करना होगा और इसका असर देखना होगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी केवल इस्तेमाल करके फेंकने की चीज हैं। भारतीय सेना का नजरिया यह सुनिश्चित करना रहा है कि उसे दर्द का एहसास हो। 

कल्वे जव्वाद का बड़ा बयान: यूपी में भड़क सकता है सांप्रदायिक दंगा

लखनऊः सिया धर्म गुरू कल्वे जव्वाद ने शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी द्वारा मदरसाें पर लगाए गए आराेप पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मौलाना सैयद कल्बे जव्‍वाद ने कहा कि शिया समुदाय वसीम रिजवी के बेबुनियाद बयान की निंदा करता है। 
इस दाैरान मौलाना ने यूपी सरकार से सवाल किया कि आखिर सरकार द्वारा वसीम रिजवी को छूट दिए जाने का कारण क्‍या है? अभी तक उनके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल क्‍यों नहीं की है। जबकि उसका अपराध और भ्रष्टाचार साबित हो चुका है। मौलाना ने अधिक कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे बयानों से देश का माहौल खराब हो सकता है और प्रदेश में दंगों की स्थिति पैदा हो सकती है। 
मौलाना ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वसीम रिजवी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करते हैं तो हम लखनऊ से दिल्ली तक विरोध करने पर मजबूर होंगे। मौलाना ने कहा कि पांच साल तक मदरसे आजम खां के अधीन रहे हैं, जिसका मतलब है कि आजम खां के समय से आतंकवादी बनाए जा रहे हैं। उन्‍होंने शिया मदरसों के जिम्मेदारों से भी कहा कि वह इस मामले पर क्‍यों चुप हैं। 
क्या कहा था रिजवी ने?
गाैरतलब है कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने कहा है कि मदरसों की शिक्षा मुस्लिम बच्चों को समाज की मुख्यधारा से दूर कर रही है। मदरसों को मिलने वाली फंडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनके पास आतंकी संगठनों से पैसा आ रहा है। इतना ही नहीं रिजवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर मदरसों को खत्म करने की पैरवी की है। 
 

जजों के आरोप से सरकारी हलचल तेज, पीएम ने की कानून मंत्री से बात

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर सनसनीखेज आरोप लगाए जाने के बाद न्यायपालिका से लेकर सरकार तक में हलचल मच गया है। जजों के आरोपों और चिट्ठी के बाद पीएम मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से फोन बात की है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक सरकार का मानना है कि उसे इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि यह शीर्ष अदालत का अंदरुनी मामला है और इसमें सरकार पक्ष नहीं है।
चीफ जस्टिस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देंगे जवाब
वहीं, पूरे मामले को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की है। अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उम्मीद है कि वह जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दे सकते हैं। उनके साथ अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी रहेंगे।

'स्‍टील बुलेट' से बचाव का जवानों के पास क्‍या है कोई विकल्‍प

 दिल्‍ली । कश्‍मीर में आतंकियों ने अपनी रणनीति बदल ली है। इस रणनीति में उनकी मदद पाक आर्मी कर रही है। यह मदद आतंकियों की सिर्फ रणनीति बनाने तक ही सीमित नहीं है बलिक उन्‍हें हाईटैक वैपन और बुलेट मुहैया करवाने तक है। इसी मदद के चलते अब इन आतंकियों के पास घातक स्‍टील बुलेट पहुंच गई हैं। आतंकियों द्वारा इस्‍तेमाल की जा रही स्‍टील बुलेट (Armour Piercing, AP)अब भारतीय सुरक्षाबलों के लिए घातक साबित हो रही है। यह बुलेट जवानों द्वारा इस्‍तेमाल की जाने वाली बुलेट प्रूफ शील्ड को भेदने में कारगर हैं। यह इसलिए भी बेहद खतरनाक हैं क्‍योंकि देश के जवानों के अलावा देश के गणमान्‍य लोग भी बचाव के लिए बुलेट प्रूफ शील्‍ड का ही इस्‍तेमाल करते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि इससे बचाव के लिए भारत के पास मौजूदा समय में क्‍या विकल्‍प हैं।

जवानों की बुलेट प्रूफ शील्‍ड चीरकर पार हुई बुलेट

आपको बता दें कि 31 दिसंबर 2017 को आतंकियों से मुकाबले के दौरान सीआरपीएफ के जो पांच जवान शहीद हुए थे उनके शरीर से यही बुलेट बरामद हुई हैं। ये बुलेट उनके द्वारा इस्‍तेमाल की गई बुलेट प्रूफ शील्‍ड को पार करती हुई उनके शरीर में घुस गई थी। यह इसलिए भी खास है क्‍योंकि इस तरह की बुलेट का सेनाओं के पास भी होना कोई आम बात नहीं है। ऐसा पहली बार हुआ है कि आतंकियों ने इस तरह की बुलेट का इस्‍तेमाल किया हो।एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक इन बुलेट को बनाने में जिस स्‍टील का इस्तेमाल किया गया वह चीन द्वारा पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्टरी को दिया गया था।

आतंकियों के पास कहां से आई स्‍टील बुलेट

स्‍टील बुलेट की बात सामने आने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आतंकियों के पास इस तरह की बुलेट पाकिस्‍तान आर्मी की तरफ से आई होंगी। मुमकिन है कि चीन की तरफ से इस तरह की बुलेट की सप्‍लाई की गई हो। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राज काद्यान भी इससे इत्तफाक रखते हैं। दैनिक जागरण से बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि बहुत हद तक इस तरह की बुलेट की सप्‍लाई चीन ने पाकिस्‍तान आर्मी को की होगी। इसके बाद ही यह आतंकियों के पास पहुंची होगी।

दो करोड आबादी, एक करोड़ वाहनों ने छुटाए पुलिस के पसीने

नई दिल्ली: दिल्ली में दो करोड़ आबादी और एक करोड़ वाहनों के कारण ट्रैफिक की गंभीर समस्या पैदा हो गई है जिसे सुलझाने में ट्रैफिक पुलिस के पसीने छूट रहे हैं और इस समस्या से निजात पाने के लिए वह जल्दी ही एक सख्त ट्रैफिक नीति बनाने जा रही है।   दिल्ली यातायात पुलिस के विशेष आयुक्त दीपेन्द्र पाठक ने आज यहां पुलिस के वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में यहां यातायात की गंभीर होती समस्या के बारे में पत्रकारों के सवाल पर कहा कि दिल्ली की आबादी लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में यह दो करोड़ के करीब है। वहीं दूसरी ओर शहर में वाहनों की संख्यां बढ़कर एक करोड पर पहुंच गयी है। इसके अलावा पडोसी राज्यों से 15-20 लाख वाहन हर रोज राजधानी में आते जाते हैं ऐसे में ट्रैफिक को नियंत्रित कर पाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।
 पाठक ने सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की कमी,यातायात नियमों की अनदेखी और अवसंरचना निमार्ण संबंधी खामियों को यातायात की समस्या का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि इनमें से किसी एक समस्या के निदान से काम नहीं चलेगा यातायात को नियंत्रित और सुचारित करने के लिए सभी का समाधान करना होगा।  हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि यातायात नियमों की अनदेखी एक चलन बनता जा रहा है। ये नियम सिर्फ सड़कों पर वाहनों के चलने के लिए नहीं बनाए गए बल्कि सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों तथा वाहन चलाने वालों की सुरक्षा भी इससे जुड़ी है ऐसे में इनका सख्ती से पालन होना जरुरी है इसलिए यातायात की नयी नीति तैयार की जा रही है जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वालों और पार्किंग माफियाओं के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे। 
पाठक ने कहा कि वैसे यातायात पुलिस अपनी तरफ से ट्रैफिक नियंत्रण और निगरानी के हर संभव प्रयास कर रही है। शहर में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां यातायात नियंत्रण के विशेष उपाय किए गए हैं। भीड़-भाड़ वाले चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों से वाहनों पर नजर रखी जा रही है। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ हर संभव कार्रवाई की जा रही है। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक बनाने के लिए स्कूलों ,कालेजों और सार्वजनिक स्थलों पर समय समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

आंगनवाड़ी वर्करों ने किया प्रदर्शन, पैंशन के लाभ की मांग

जम्मू: आंगनवाड़ी वर्करों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। आंगनवाड़ी वैलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले प्रदर्शन कर रही वर्करों ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है और उन लोगों से काम तो लिया जाता है पर सुविधाओं के नाम पर उनके हिस्से में सिर्फ अनदेखी आ रही है। वर्करों ने मांग की कि हैल्पर और वर्कर की सैलरी बढ़ाई जाए और आर्डर नम्बर 268 को वापिस लिया जाए। एसोसिएशन की प्रधान ने कहा कि सरकार उन्हें भी कर्मचारी घोषित करे और पैंशन लाभ दे। वर्करों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि अब उन्हें निकालने की बातें की जा रही हैं और उसके लिए उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है पर वे लोग अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगी।

‘हुनर हाट’से मिले तीन लाख रोजगार,अब लगेगा‘हुनर हब’: नकवी

नई दिल्ली I देश में लोकप्रिय‘हुनर हाट‘ के जरिए पिछले एक वर्ष में तीन लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया कराने के बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अब कारीगरों और शिल्पकारों को खास प्रशिक्षण देने के लिए हर राज्य में‘हुनर हब‘ स्थापित करने जा रहा है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने गुरुवार को बताया कि आने वाले दिनों में देश के सभी राज्यों में हुनर हब स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें कारीगरों को मौजूदा जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘हुनर हाट,‘‘मेक इन इंडिया’और‘स्टैंड अप इंडिया’का विश्वसनीय ब्रांड बन गया है और पिछले एक साल में इससे तीन लाख से ज्यादा कारीगरों को रोजगार मिला है। नकवी ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में पांच हुनर हाटों को मिली लोकप्रियता और सफलता के बाद अब छठां हाट अगले माह फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में आयोजिति किया जाएगा।
बाबा खड़क सिंह मार्ग पर लगने वाला यह दिल्ली में तीसरा हुनर हाट होगा। आने वाले दिनों में जयपुर, चंडीगढ़, कोलकाता, लखनऊ और भोपाल आदि स्थानों पर भी इसे लगाया जाएगा। नकवी ने कहा कि उनके मंत्रालय द्वारा देश भर में आयोजित किए जा रहे‘हुनर हाट’में जहां एक तरफ लाखों लोगों ने कारीगरों और दस्तकारों के हस्तनिर्मित सामानों की खरीदारी की है वहीं इन कारीगरों को देश-विदेश से बड़े आर्डर भी मिले हैं। ये हाट देश की लुप्त हो रही धरोहर को पुनर्जीवित करने का भी एक मजबूत अभियान साबित हुए हैं।
मुंबई के मरीन लाइन्स के इस्लाम जिमखाना में 4 से 10 जनवरी तक आयोजित पांचवें हुनर हाट को पूरी तरह सफल करार देते हुए उन्होंने बताया कि पांच लाख से भी ज्यादा लोगों ने इसमें कारीगरों और खानसामों के सामान की खरीदारी की। इसमें लगभग सभी राज्यों से आए 130 से ज्यादा दस्तकारों, शिल्पकारों, खानसामों ने भाग लिया जिनमे बड़ी संख्या में महिला कारीगर भी शामिल थी। पहली बार पारसी शिल्पकार (गारा एम्ब्रोइडरी, लकड़ी की बनी कृतियां तथा रोगन आर्ट) भी इस हुनर हाट में प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपलब्ध थे। 

‘मेक इन इंडिया ’बेअसर, मोबाइल में चीन की हिस्सेदारी बढ़ी

नई दिल्ली । 'मेक इन इंडिया के तहत देश में मोबाइल और टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण में तेजी लाने के बावजूद इस क्षेत्र में चीन निर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी में बढोतरी का रुख बना हुआ है। देश में मोबाइल हैंडसेट निर्माण क्षेत्र की समस्याओं पर ब्रॉडबैंड इंंडिया फोरम द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। आईआईएम कलकत्ता और थॉट आर्बिट्रेेज रिचर्स इंस्टीट्यूट (टारी) ने तैयार की है। भारत में मोबाइल फोन और टेलीकम्युनिकेशन उपकरणों के निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेक इन इंडिया के तहत दिए जा रहे प्रोत्साहन के बावजूद देश का मोबाइल हैंडसेट और दूरसंचार उपकरण निर्माण उद्योग आयात पर आधारित है। देश के कुल आयात में इस उद्योग की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और अभी यह 26.4 प्रतिशत है। इसमें चीन निर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। वर्ष 2012-13 में चीनी उत्पादों की हिस्सेदारी 64.3 प्रतिशत थी जो वर्ष 2016-17 में बढ़कर 69.4 प्रतिशत पर पहुंच गई।
रिपोर्ट के अनुसार, आयात पर निर्भरता के कारण भारतीय विनिर्माता उत्पादों का मूल्य संवर्धन बहुत कम कर पा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि मोबाइल औरटेलीकम्युनिकेशंस उपकरण की'मेक इन इंडियाÓअभियान में भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन देश में मोबाइल फोन के उपयोग में हो रही बढोत्तरी की पूर्ति आयात के जरिए पूरी की जा रही है। इसमें कहा गया है कि मोबाइल प्रौद्योगिकी के खोजकर्ता स्टैंडर्ड इसेंशल पेटेंट (एसईपी) धारक अकसर यह कहते हैं कि शोध एवं विकास पर किए गए निवेश पर उनको पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है जबकि मोबाइल फोन निर्माता कहते हैं कि लाइसेंस प्रौद्योगिकी के लिए उन्हें अधिक रॉयल्टी देनी पड़ रही है। इसके विपरीत रिपोर्ट तैयार करने के दौरान 10 प्रमुख कंपनियों के वित्तीय लेखा जोखा का आंकलन करने पर यह पाया गया है कि वर्ष 2013 से 2016 के दौरान रॉयल्टी में कमी आई है। वर्ष 2013 में कंपनियां 3.35 प्रतिशत रॉयल्टी दे रही थीं जो वर्ष 2016 में घटकर 2.64 प्रतिशत पर आ गई। 

डॉक्टरों के खिलाफ एक्शन ले सरकार, डाक्टर्स की हड़ताल पर हाईकोर्ट सख्त

जयपुर टाइम्स
जयपुर (कासं.)। डाक्टरों की हड़ताल के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने डाक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार डाकटर हड़ताल पर नहीं जा सकते। सरकार इस मामले में चाहे जो कार्रवाई करे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में डाक्टरों की हड़ताल का सोमवार को 10वां दिन है। हड़ताल के कारण सैकड़ों ऑपरेशन टाले जा चुके हैं। मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं होईकोर्ट के आदेश के बाद चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने डाक्टरों से काम पर लौटने की अपील की। 
डाक्टरों की हड़ताल पर क्रिसमस हॉलिडे पर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। सीजे प्रदीप नंद्राजोग की खंडपीठ ने सरकार से इस बारे में रिपोर्ट मांगी थी। सरकार ने कहा कि राज्य में रेस्मा लागू है। फिर भी डाक्टर काम पर नहीं लौट रहे हैं। सेवारत चिकित्सको के अधिवक्ताओ की ओर से कहा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने डाक्टरों की धड़पकड़ चालू रखी। इसका महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने विरोध करते हुए कहा, हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक भी चिकित्सक की गिरफ्तारी नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने कहा कि डाक्टरों से काम पर लौटने के लिए कहा गया था और उनकी गिरफ्तारी पर रोक भी लगाई गई थी। डाक्टर काम पर नहीं लौटे, उन्होंने कोर्ट की अवमानना की है। इसलिए सरकार हड़ताली डाक्टरों के खिलाफ जो एक्शन लेना है ले।

इतनी मौतें, अब तो हठ छोड़े सरकार : सचिन
जयपुर (कासं.)। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने राज्य सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। पायलट ने कहा कि राज्य सरकार का दिल प्रदेश के अस्पतालों में सैंकड़ों मौतें देख कर भी नहीं पसीज रहा है। अकेले अजमेर जिले में ही अब तक दर्जनों मरीजों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे और चिकित्सा मंत्री की हठधर्मिता के चलते चिकित्सकों से किया समझौता लागू नहीं किया जा रहा है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट से चिकित्सकों ने संवाद किया । पायलट ने कहा कि पिछले दिनों जब चिकित्सकों की हड़ताल के बाद उनसे समझौता कर लिया गया था तो उस पर अमल क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिकित्सकों के खिलाफ द्वेषतार्पूण कार्रवाई क्यों की जा रही है। क्या सिर्फ सरकार के अहम को संतुष्ट करने के लिए चिकित्सकों से बदला लिया जा रहा है।
 पायलट ने कहा कि राज्य सरकार का अहंकार मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। प्रदेश के अस्पतालों में सैकड़ों मरीजों की मौतें हो चुकी है। अजमेर में ही दर्जनों बच्चे, जवान और बुजुर्ग मरीज समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण मौत के मुंह में चले गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इतने संकटपूर्ण हालात के बावजूद सरकार अपने हठ पर अड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह संवदेनहीनता जितनी बढ़ेगी मरीजों की जान पर खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री अपनी हठधर्मिता छोड़े और तुरन्त चिकित्सकों से संवाद कायम करें जिससे मरीजों को राहत मिल सके और चिकित्सा व्यवस्था फिर से पटरी पर लौट सके।