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इसके पीछे है कुछ खास मकसद, आखिर क्यों भाजपा को घेर रही शिवसेना

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या पहुंचकर भाजपा व पीएम नरेंद्र मोदी को यूं ही नहीं ललकारा है। इसके सियासी सबब हैं। दरअसल, उद्धव ठाकरे राम मंदिर के बहाने उत्तर भारत में शिवसेना की जड़े जमाना चाहते हैं।इससे शिवसेना को उसे महाराष्ट्र में उत्तर भारत विरोधी होने के आरोपों से भी राहत मिलेगी। राम मंदिर का चैपिंयन बनकर वह यूपी, बिहार समेत हिंदी भाषी राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाएगी। इसी को संगठन में तब्दील करेगी। शिवसेना हिंदुत्व को लेकर भाजपा से बड़ी लाइन खींचना चाहती है। राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा की घेराबंदी उसके लिए सबसे मुफीद मौका है।

शिवसेना दावा करती रही है कि वर्ष 1992 में उसी ने विवादित ढांचा ढहाया था। महाराष्ट्र में हिंदुत्व के मुद्दों पर शिवसेना मुखर रहती है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना भागीदार है लेकिन भाजपा से उसकी तल्खी किसी से छिपी नहीं है। वह रामजन्म भूमि मुद्दे को आक्रामक ढंग से उठाकर भाजपा को बैकफुट पर पहुंचा देना चाहती है। इसी रणनीति के तहत उद्धव ठाकरे पहली बार अयोध्या आए। हजारों शिवसैनिक भी अयोध्या पहुंचे।

भाजपा की केंद्र सरकार को बताया कुंभकर्ण

उद्धव ने भाजपा की केंद्र सरकार को एक तरह का कुंभकर्ण बताया। राम मंदिर पर चार साल से नींद में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने राम जन्मभूमि को लेकर अध्यादेश लाने पर शिवसेना के समर्थन की बात करके भाजपा को राम मंदिर निर्माण के कानूनी विकल्पों पर विचार के लिए मजबूर करने की कोशिश की है।

उन्होंने सरकार से राम मंदिर निर्माण की तारीख बताने के लिए भी कहा है। उन्होंने 56 इंच के सीने के बजाय दिल में मंदिर के लिए मजबूती की बात करके पीएम मोदी की घेराबंदी की है।

रोड शो के दौरान रथ से गिरे अमित शाह

शनिवार को रोड शो के दौरान अशोकनगर के तुलसी पार्क में अपने रथ से उतरते समय पैर फिसलने से अचानक लड़खड़ा कर पैरों के बल नीचे गिर पड़े. हालांकि, इस घटना में उन्हें कोई चोट नहीं आई है. रोड शो के अंतिम मुकाम तुलसी पार्क पर रथ से उतरते समय शाह का पैर फिसल गया और लड़खड़ा कर पैरों के बल नीचे जमीन पर गिर पड़े. गिरते ही वहां खड़े सुरक्षा गार्ड की मदद से तुरंत उठ खड़े हुए. शाह ने अशोकनगर शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरने वाला यह रोड शो भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में किया था. करीब डेढ़ घंटे तक चले इस रोड शो के दौरान शाह का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया. बाद में शाह ने शिवपुरी जिले के करैरा में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में आयोजित जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल बाबा दिन में सरकार बनाने के सपने देख रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘राहुल बाबा, सपने देखना बुरी बात नहीं, लेकिन दिन में सपने मत देखो. देश में चुनाव का इतिहास उठाकर देख लो. वर्ष 2014 में जब से देश में (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी की सरकार आई है, हमने हर चुनाव जीता है'. शाह ने कहा, मैं करेरा की जनता को बताना चाहता हूं कि देश में जहां-जहां भी चुनाव हुए, हर जगह से कांग्रेस गई और भाजपा आई है. अब मध्यप्रदेश की बारी है.
उन्होंने कहा कि दूरबीन से देखने पर भी देश के किसी राज्य में बमुश्मिल से कहीं कांग्रेस की सरकार दिखती है. शाह ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में ही किसानों की याद आती है. उन्होंने पूछा कि अरे राहुल बाबा आपको यह भी मालूम है कि आलू जमीन में होता है, या फैक्ट्री में होता है. जिसे ये नहीं मालूम कि आलू कहां होता है, वो कभी किसान का भला कर सकते हैं क्या. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में आपके सामने दो पार्टियां हैं. एक है भारतीय जनता पार्टी और दूसरी है कांग्रेस. भारतीय जनता पार्टी में सब कुछ तय है. हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शिवराज सिंह चौहान जी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा प्रमुख ने कहा, ‘‘अब करैरा सहित प्रदेश के लोग कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि राहुल बाबा आपका सेनापति कौन है''. सभा में उपस्थित लोगों को 'अबकी बार, 200 पार' का संकल्प दिलाते हुए शाह ने कहा कि आने वाली 28 तारीख को मध्यप्रदेश में मतदान है. हमें सिर्फ सरकार बनाने के लिए जीत नहीं चाहिए. हमें ऐसी प्रचंड जीत चाहिए कि सामने वाले की बोलती बंद हो जाए. 

अयोध्या की हर गली में कैसा है माहौल

अयोध्या की सड़कें चारों तरफ विश्व हिंदू परिषद के 'चलो अयोध्या' और शिवसेना के 'पहले मंदिर, फिर सरकार' के पोस्टरों से पटी हुई हैं। शिवसेना और वीएचपी के भगवा झंडे भी लगे हुए हैं। वीएचपी की धर्मसभा करीब 5 घंटे तक चलेगी। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। वहीं स्थानीय लोग किसी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं।वीएचपी के धर्मसभा कार्यक्रम के लिए बड़े भक्तमाल की बगिया में शनिवार को तैयारियां युद्धस्तर पर की गई हैं। अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास ने इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने बताया, 'सुप्रीम कोर्ट कहता है कि यह मुद्दा उनकी प्राथमिकता सूची में नहीं है। हमारे लिए राम मंदिर से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।' अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय भी इस दौरान मौके पर पहुंचे और स्थितियों का जायजा लिया। इसमें 100 से ज्यादा संत बुलाए गए हैं। राम भद्राचार्य, स्वामी परमानंद, हंसदेवाचार्य और राम भद्राचार्य के साथ राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास भी मौजूद रहेंगे। आयोजकों ने तीन लाख से अधिक भक्तों के आने का दावा किया है। वीएचपी के प्रांत संगठन मंत्री (अवध) भोलेंद्र ने एक बयान में कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए यह अंतिम धर्मसभा होगी। इसके बाद कोई धर्मसभा नहीं होगी और मंदिर निर्माण शुरू होगा। 

अयोध्या में होने वाली धर्मसभा में काशी नगरी के वीएचपी कार्यकर्ता अलग ही दिखेंगे। वाराणसी और आसपास के जिले से करीब 50 हजार वीएचपी कार्यकर्ता शनिवार को बस-ट्रेन एवं अन्य साधनों से रामनगरी के लिए रवाना हुए। कार्यकर्ता अपने साथ त्रिशूल, भस्म, बाघ अंबर आदि ले गए हैं। धर्मसभा में उमड़ने वाली भीड़ में ये जटा-जूटधारी भगवान शिव का रूप धारण कर पहुंचेंगे। इस बीच वाराणसी आए ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम के चिंदानंद सरस्वती ने कहा कि जैसे मक्का मुसलमानों के लिए आस्था का विषय है, वैसे ही राम मंदिर हिंदुओं के लिए।

सीपी जोशी की सफाई, बोले- BJP ने किया गलत इस्तेमाल

इस बार फिर विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के बड़े नेता का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयान देना पार्टी पर भारी पड़ता दिख रहा है. नेता के बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को डैमेज कंट्रोल करने के लिए आगे आना पड़ा और उन्होंने सफाई दी कि सीपी जोशी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है.

जोशी के विवादित बयान के बाद राजनीति गरमा गई है और बीजेपी ने इस पर हमला तेज कर दिया. इस पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस नेता का बयान चौंकाने वाला है. सीपी जोशी को धर्म के बारे में ऐसी बात नहीं करनी चाहिए.

खेद जताएं जोशी

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से ठीक पहले इस बयान को पार्टी के खिलाफ जाता देख कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सामने आना पड़ा और उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जोशी जी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है और जोशी को खेद जताने को कहा.

उन्होंने ट्वीट किया, सीपी जोशी जी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है. पार्टी के नेता ऐसा कोई बयान न दें जिससे समाज के किसी भी वर्ग को दुःख पहुंचे. कांग्रेस के सिद्धांतों, कार्यकर्ताओं की भावना का आदर करते हुए जोशीजी को जरूर गलती का अहसास होगा. उन्हें अपने बयान पर खेद प्रकट करना चाहिए.

निर्देश के बाद जताया खेद

राहुल गांधी की ओर से खेद जताने को लेकर हिदायत देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने भी ट्वीट करते हुए अपने बयान पर खेद जताया. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के सिद्धांतों एवं कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेरे कथन से समाज के किसी वर्ग को ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं.

विवाद बढ़ने पर सीपी जोशी ने ट्वीट कर बीजेपी पर उनके बयान को तोड़-मोड़कर पेश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया है, वो इसकी कड़ी निंदा करते हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी ने राजस्थान के नाथद्वारा में गुरुवार को एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि ब्राह्मण ही धर्म के बारे में बोल सकता है. उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की जाति पर सवाल खड़े करते हुए कहा, आपको पता है कि उमा भारती और पीएम मोदी किस जाति के हैं. साथ ही उन्होंने राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं साध्वी ऋतंभरा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह किस जाति की हैं, यह लोग धर्म के बारे में क्या जानते हैं.

हताशा में है कांग्रेस-गोयल

जोशी के बयान पर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा है कि जोशी का बयान दिखाता है कि कांग्रेस हताशा में है. कांग्रेस के एक नेता नहीं बल्कि सभी नेता चाहे वो सीपी जोशी हो या राज बब्बर हो, जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे साफ लगता है कि कांग्रेस में हताशा आ गई है. उन्होंने कहा कि उनके नेता हताशा से भरे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान तीनों राज्यों से कांग्रेस इस बार भी चुनाव हार रही है.

उन्होंने आगे कहा कि सीपी जोशी की जात-पात की बात करना और मोदी और उमा भारती की जाति का पूछना तथा यह कहना कि केवल में ब्राह्मण ही धर्म के अधिकारी हैं, धर्म की बात कर सकते हैं. मैं समझता हूं कि वह मर्यादाओं को लांग रहे हैं. सबसे निचले स्तर की राजनीति कर रहे हैं.

कांग्रेस बनवाएगी अयोध्या में राम मंदिर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी जोशी ने बुधवार को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाएगी. जोशी ने नाथद्वारा में कहा, भारतीय जनता पार्टी चुनावी मौसम में राम मंदिर का मुद्दा उठाकर लोगों को भ्रमित कर रही है. इस मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद कांग्रेस भव्य मंदिर बनाएगी.

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव के दौरान लोगों को भ्रमित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही, जबकि तथ्य यह है कि यह मामला बीते चालीस साल से अदालत में है. जोशी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने पूरे कार्यकाल में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार साल से अधिक समय में कुछ नहीं कर पाए. राम मंदिर दीवानी का  मामला है, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा.

एटीएम हो सकती है बंद, नोटबंदी जैसी होगी कैश किल्लत

 कैश के लिए एटीएम पर निर्भर रहनेवालों लोगों के लिए एक बुरी खबर है. एटीएम संचालकों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (कैटमी) ने बुधवार को कहा कि देश में चल रहे कुल 2,21,492 एटीएम मशीनों में से आधी यानी 1.13 लाख मशीनें मार्च 2019 तक बंद हो सकती हैं. उद्योग संगठन ने कहा कि एटीएम के बंद होने से हजारों रोजगार प्रभावित होंगे. साथ ही सरकार के वित्तीय समावेश के प्रयासों पर भी प्रतिकूल असर होगा. 

एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन नियमों के गैर -व्यवहारिक नियमों और कैश लोडिंग और कैश मैनेजमेंट के बदले हुए मानकों को लादने के कारण एटीएम मशीनों को बंद करना पड़ेगा. 

आंकड़ों के मुताबिक जिन एटीएम मशीनों में सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना है उनमें एक लाख करीब ऑफ साइट एटीएम और करीब 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम मशीनें हैं. कैटमी ने कहा कि अगर यह एटीएम मशीनें बंद होती हैं, तो एक बार फिर एटीएम के बाहर लोगों की लंबी लाइन देखने को मिल सकती है, जब नोटबंदी के तुरंत बाद कैश के लिए लोग भटक रहे थे. इनमें भी एक बड़ी संख्या गांवों और कस्बों के एटीएम की संख्या है, जो बंद हो सकते हैं. 

 कैश के लिए एटीएम पर निर्भर रहनेवालों लोगों के लिए एक बुरी खबर है. एटीएम संचालकों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (कैटमी) ने बुधवार को कहा कि देश में चल रहे कुल 2,21,492 एटीएम मशीनों में से आधी यानी 1.13 लाख मशीनें मार्च 2019 तक बंद हो सकती हैं. उद्योग संगठन ने कहा कि एटीएम के बंद होने से हजारों रोजगार प्रभावित होंगे. साथ ही सरकार के वित्तीय समावेश के प्रयासों पर भी प्रतिकूल असर होगा. 

एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन नियमों के गैर -व्यवहारिक नियमों और कैश लोडिंग और कैश मैनेजमेंट के बदले हुए मानकों को लादने के कारण एटीएम मशीनों को बंद करना पड़ेगा. 

आंकड़ों के मुताबिक जिन एटीएम मशीनों में सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना है उनमें एक लाख करीब ऑफ साइट एटीएम और करीब 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम मशीनें हैं. कैटमी ने कहा कि अगर यह एटीएम मशीनें बंद होती हैं, तो एक बार फिर एटीएम के बाहर लोगों की लंबी लाइन देखने को मिल सकती है, जब नोटबंदी के तुरंत बाद कैश के लिए लोग भटक रहे थे. इनमें भी एक बड़ी संख्या गांवों और कस्बों के एटीएम की संख्या है, जो बंद हो सकते हैं. 

अमूमन ग्रामीण भागों के एटीएम में कैश की कमी और अनियमितता रहती है. यही नहीं सरकार के प्रधानमंत्री जनधन योजना के लाखों लाभार्थी भी इस संभावित संकट से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि सरकार ने जनधन योजना के लाभार्थियों को एटीएम से योजना की सब्सिडी राशि निकालने की छूट दे रखी है. इससे इन खाता धारकों की परेशानी बढ़ेगी. बताया जा रहा है कि सर्विस प्रोवाइडर और बैंकों के बीच एटीएम की सर्विस के लिए जो करार किया गया था. वह पुराना हो गया है. पुराने करार में नये खर्च और लागत को कोई जगह नहीं दी गयी है. 

अभी देश में 2.38 लाख एटीएम, बंद हो सकती हैं 1.13 लाख

3,500 करोड़ खर्च आयेगा सिस्टम अपग्रेड, कैश लॉजिस्टिक्स और नोटों के कैसेट बदलने में

नोटबंदी के बाद एटीएम के सर्विस प्रोवाइडर घाटे में 

कैटमी के एक वरिष्ठ सदस्य ने आगे बताया कि एटीएम मैनेजमेंट सर्विस प्रोवाइडर नोटबंदी के बाद लगातार घाटे में हैं. नोटबंदी के फैसले के बाद सर्विस प्रोवाइडरों को ब्राउन लेवल एटीएम और व्हाइट लेबल एटीएम में बदलाव करना पड़ा था, इस काम ने उन्हें बहुत अधिक वित्तीय दबाव में ला दिया.

सर्विस प्रोवाइडर पहले से ऊंची लागत से परेशान

सर्विस प्रोवाइडर पहले से ही ऊंची लागत को लेकर परेशान हैं. गाइडलाइन के मुताबिक अगर उन्हें एटीएम सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करना पड़ा, तो परेशानी और बढ़ सकती है. लिहाजा वह घाटे में पैसा लगाने के बजाय एटीएम बंद करना पसंद करेंगे.

सेंट्रल बैंक ने नयी सर्विस के लिए दिये मात्र 100 करोड़ रुपये

जानकारी के मुताबिक अप्रैल में सेंट्रल बैंक ने सर्विस प्रोवाइडरों और कैश मैनेजमेंट संभालनेवाले दूसरी श्रेणी के ठेकेदारों के लिए मात्र 100 करोड़ रुपये आवंटित किये. इसी पैसे में ही उन्हें सीसीटीवी, जीपीएस कनेक्टिविटी, ट्यूबलेस टायर्स, हूटर और वायरलेस सिस्टम और कैश सप्लाई वैन का भी खर्च निकालने को कहा गया.

जिंदगी के 10 साल छीन रही है यह दूषित हवा

अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं और इन दिनों प्रदूषित हुई हवा को लेकर चिंतित हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा सकती है। एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने दिल्ली की दूषित हुई हवा पर रिसर्च किया है। सोमवार को सामने आई इस नई स्टडी के मुताबिक दिल्ली के प्रदूषण के चलते यहां रहने वाले लोगों की उम्र औसतन 10 साल कम हो रही है। शिकागो (अमेरिका) की एक यूनिवर्सिटी 'मिल्टन फ्राइडमैन प्रफेसर इन इकॉनमिक्स' से जुड़े मिशेल ग्रीनस्टोन और उनकी टीम ने एयर क्वॉलिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) पर यह स्टडी की है। इस स्टडी में उनकी टीम ने दिल्ली एनसीआर में खराब हुई हवा का जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। इस स्टडी को एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (EPIC) के साथ मिलकर किया गया। 
 

एयर क्वॉलिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) 
AQLI एक ऐसा इंडेक्स है, जिसमें वायु प्रदूषण का जीवन पर पड़ने वाले असर का आकलन किया गया है। दिल्ली में साल 2016 से वायु प्रदूषण ने विशेष रूप से अपनी ओर ध्यान खींचा, जब यहां औसतन 113 माइक्रोग्रामप्रतिक्यूबिक मीटर 
पलूशन पाया गया। EPIC इंडिया के कार्यकारी निदेशक केन ली ने बताया, 'साफ हवा की जो गुणवत्ता के जो मानक वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने तय किए हैं, अगर दिल्ली को उस आधार पर हवा मिले, तो यहां रहने वाले लोग 10 ज्यादा जी सकेंगे। 

WHO के मुताबिक, PM 2.5 की सुरक्षित सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर सालाना होनी चाहिए। भारतीय मानकों के आधार पर इस सीमा को 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक बढ़ाया गया है। 

इंडेक्स के आधार पर, साल 1998 में दिल्ली समेत उत्तर भारतीय राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार पहले से ही हवा में घुले हुए इन छोटे-छोटे कणों से जूझ रहे थे। WHO के आधार पर उस समय इन राज्यों में रहने वाले लोगों की आयु पर 2 से 5 साल का प्रभाव पड़ रहा था। अब दो दशक बाद प्रदूषण के ताजा हालात को देखें, तो यहां तब की अपेक्षा पलूशन में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। उत्तर प्रदेश में हवा का स्तर खराब होने के चलते यहां रहने वाले लोगों की जिंदगी में 8.6 साल की कमी आ रही है। 

1998 में जहां प्रदूषण के चलते नागरिकों की जिंदगी में 2.2 साल की कटौती हो रही थी। 2 दशक बाद वह कटौती बढ़कर 4.3 साल हो गई है। इन दो दशकों में हवा में आए ये छोटे-छोटे कण 69 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। 

 

पूर्व मंत्री मंजू वर्मा ने किया सरेंडर

आर्म्स एक्ट मामले में फरार चल रही पूर्व समाज कल्याण मंत्री ने मंगलवार को मंझौल कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस से बचने के लिए पूर्व मंत्री सलवार सूट में चेहरा ढंककर सरेंडर करने पहुंची थी। अपने अधिवक्ता के साथ वह एक लग्जरी कार में बैठ सीधे कोर्ट परिसर पहुंची। हालांकि पेशी के दौरान वह कोर्ट परिसर में ही बेहोश हो गई। आनन-फानन इलाज के लिए चिकित्सकों जो बुलाया गया। 

पिछले बहुत दिनों से वह पुलिस को चकमा देकर फरार चल रही थी। मलूमहो कि इसी मामले में पूर्व मंत्री के पति चन्द्रशेखर वर्मा इसी कोर्ट में 29 अक्टूबर को सरेंडर किया था। फिलहाल वह अभी बेगूसराय मंडल कारा में बंद हैं।

मालूम हो कि चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व मंत्री के पति का नाम आया था। इसके बाद सीबीआई टीम ने 17 सितंबर को पूर्व मंत्री के चेरियाबरियारपुर थाना क्षेत्र के श्रीपुर पंचायत के अर्जुन टोल स्थित आवास पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान सीबीआई ने 50 गोली बरामद की थी। सीबीआई के डीएसपी ने पूर्व मंत्री व उनके पति के खिलाफ चेरियाबरियारपुर थाने में आर्म्स एक्ट मामले में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजू वर्मा की गिरफ्तारी नहीं होने पर सरकार को फटकार लगाते हुए बिहार पुलिस के डीजीपी को कोर्ट में पेश होकर जवाब देने को  कहा था।

आर्म्स एक्ट मामले में थी तलाश
मंजू वर्मा के बेगूसराय जिले के चेरियापरियारपुर स्थित ससुराल से सीबीआई को तलाशी में दर्जनों गोलियां मिली थीं। आर्म्स एक्ट के इस मामले में मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा ने बीते 29 अक्टूबर को सरेंडर किया था। मंजू वर्मा की गिरफ्तारी नहीं होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए 27 नवम्बर तक मंजू वर्मा की गिरफ्तारी नहीं होने पर डीजीपी को हाजिर होने का आदेश दिया था। इसके बाद पुलिस ने मंजू वर्मा की तलाश में दबिश बढ़ा दी थी। बिहार और इसके बाहर दर्जनों ठिकानों पर मंजू वर्मा की तलाश में छापेमारी की गई लेकिन वह हाथ नहीं आईं। पिछले दिनों ही उनके घर की कुर्की जब्ती की गई थी। 

एडीजी ने कहा पुलिस की दबिश से किया सरेंडर
एडीजी मुख्याल एसके सिंघल ने बताया कि मंजू वर्मा ने पुलिस की दबिश के चलते  सरेंडर किया है। हम लगातार उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रहे थे। बिहार के अलावा हैदराबाद, दिल्ली समेत कई शहरों में छापेमारी की गई थी। इसके अलावा पटना एयरपोर्ट प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया गया था। एडीजी के मुताबिक उनकी चल संपत्ति को जहां कुर्क किया गया था वहीं मंगलवार को पुलिस उनके बैंक खातों को फ्रीज करनेवाली थी। यदि इसके बाद भी वह सामने नहीं आती तो हम उनकी अचल संपत्ति को भी जब्त करते।
मुजफ्फरपुर कांड:पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के प्रतिनिधि पुलिस हिरासत में

बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का नाम आया था। इसके बाद सीबीआई ने पूर्व मंत्री के चेरियाबरियारपुर थाना क्षेत्र की श्रीपुर पंचायत के अर्जुन टोल स्थित आवास पर 17 सितंबर को छापेमारी की थी। इसमें सीबीआई टीम ने उनके आवास से 50 कारतूस बरामद की थी। इस मामले में चेरियाबरियारपुर थाने में सीबीआई के अधिकारी ने पूर्व मंत्री और उनके पति के खिलाफ आर्म्स एक्ट में नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी।

भारत ये खतरनाक हेलीकॉप्टर खरीदने की कर रहा है तैयारी

भारत ने अमेरिका से 24 मल्टी रोल MH 60 रोमियो एंटी सबमरीन हेलीकॉप्टर  (Multi-Role MH-60 Romeo Anti-Submarine Helicopters) की मांग की है. रक्षा उद्योग के सूत्रों ने कहा कि हेलीकॉप्टर की अनुमानित कीमत 2 बिलियन डॉलर है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को पिछले 1 दशक से इस खास हेलीकॉप्टर की जरूरत थी. पिछले दिनों सिंगापुर में सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस की सफल मुलाकात के बाद इस मामले से जुड़े लोगों ने कहा, 'कुछ महीनों में डील फाइनल होने की उम्मीद है'. सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत ने अमेरिका को एक पत्र भेजा है. जिसमें तत्काल 24 मल्टी रोल एमएच 60 रोमियो सी-हॉक हेलीकॉप्टर की जरूरत बताई है. गौरतलब है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में और मजबूती आई है और ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिका की हाईटेक मिलिट्री हार्डवेयर के दरवाजे भारत के लिए खोलने के फैसले के बाद इसे और बल मिला है.  

सिंगापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस के बीच मुलाकात के दौरान भी द्विपक्षीय रक्षा संबंध शीर्ष एजेंडे में शामिल था. सूत्रों का कहना है कि MH 60 हेलीकॉप्टर की डील में ऑफसेट की जरूरत भी शामिल हैं. सूत्रों ने संकेत दिया है कि भारत इस डील पर लॉन्ग टर्म प्लान के साथ आगे बढ़ना चाहता है. इस प्लान में 123 हेलीकॉप्टरों का भारत में निर्माण भी शामिल है. आपको बता दें कि वर्तमान में अमेरिकी नेवी के बेड़े में शामिल एमएच 60 रोमियो सी-हॉक हेलीकॉप्टर की गणना दुनिया के सबसे अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर में होती है. रक्षा उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक इस हेलीकॉप्टर को जहाज, युद्धपोत और विमान वाहक पोत आदि से ऑपरेट किया जा सकता है. इससे भारतीय नेवी की ताकत बढ़ेगी. खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए इसकी तत्काल जरूरत है.
 

17 नवंबर को सबरीमाला मंदिर में करूंगी प्रवेश, तृप्ति देसाई का एला

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर चल रहे विवाद पर महिला कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर को मंदिर में प्रवेश के लिए जाएंगी। इसके लिए उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की मांग भी की है। तृप्ति ने एलान किया है कि वह 17 नवंबर से शुरू हो रहे वार्षिक मंडल मकरविल्लक्कु में मंदिर में प्रवेश करेंगी। तृप्ति देसाई ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश को लेकर धमकियां मिल रही हैं। इसके चलते उन्होंने सीएम पिनराई विजयन से सुरक्षा की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री विजयन ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें कि तृप्ति देसाई भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक भी हैं। इस ब्रिगेड के माध्यम से ही वह महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।    


बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि शीर्ष अदालत अपने 28 सितंबर को दिए आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हो गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि पुनर्विचार के लिए दाखिल 49 याचिकाओं पर 22 जनवरी को खुली अदालत में सुनवाई होगी।

चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस रोहिंग्टन फली नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की मौजूदगी वाली पांच सदस्यीय पीठ ने इन याचिकाओं पर चेंबर में सुनवाई की। इसके बाद पीठ ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत की उपयुक्त पीठ इन याचिकाओं और सबरीमाला से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर 22 जनवरी को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगी। इससे पहले 9 अक्तूबर को पुनर्विचार याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।

बता दें कि 28 सितंबर को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी आयु वर्ग की महिलाओं के लिए खोलने का आदेश दिया था। संविधान पीठ ने मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की सदियों पुरानी प्रथा को असंवैधानिक व भेदभावपूर्ण बताया था। हालांकि इस निर्णय के बावजूद भगवान अयप्पा के भक्तों ने हिंसक आंदोलन चलाकर मंदिर के कपाट खुलने पर भी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया था।

ये भी कहा पीठ ने-

- 28 सितंबर को दिए गए आदेश पर फिलहाल किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी
- पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई का मतलब पिछले फैसले को खारिज करना नहीं
- पुरानी याचिकाओं पर ही सुनवाई होगी किसी नई याचिका को अभी प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी
 

माला लखानी फैशन डिजाइनर के हत्यारे,सिर्फ 6 घंटे में पकड़े गए, वजह बनी रहस्य

 दिल्ली के पॉश इलाके वसंतकुंज में महिला फैशन डिजाइनर माला लखानी के हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर दिल्ली पुलिस ने महज छह घंटे में मामला का खुलासा कर दिया, हालांकि हत्या की वजह का पता नहीं चल पाया है। माना जा रहा है कि दोपहर तक दिल्ली पुलिस पत्रकार वार्ता कर हत्या की वजह का भी खुलासा कर देगी।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि माला लखानी के जानकार राहुल और अनवर ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उनकी हत्या की। राहुल फैशन डिजाइयर के घर में कपड़े की वर्क शॉप में टेलर था। राहुल ने फैशन डिजाइनर को वर्क शॉप में सिले हुए कपड़े देखने के बहाने बुलाया था। 

राहुल ने साथियों के साथ मिलकर माला लखानी की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस दौरान नौकर बहादुर अपनी मालकिन को बचाने आया तो उसे भी मार डाला। जानकारी के मुताबिक, हत्या से पहले माला लखानी चीखी-चिल्लाई थी। इस पर वहां पहुंचे नौकर बहादुर ने कातिलों से बोला 'क्यों मार रहे हो मेरी मेडम को' तो उन्होंने नौकर को भी मार दिया। इस हत्या में राहुल का साथ अनवर और उसके दोस्तों ने भी दिया। अनवर को दोस्तों के नाम रहमत और वसीम हैं। बता दें कि बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली के पॉश इलाके वसंतकुंज में दिल्ली की नामी फैशन डिजाइनर माला लखानी सनसनीखेज हत्या कर दी गई। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, 53 वर्षीय महिला फैशन डिजाइनर माला लखानी की उनके ही घर में हत्या कर दी गई, साथ ही उनके नौकर बहादुर का शव भी घर पर ही मिला था। पूरा मामला बुधवार रात 11-12 बजे के बीच का है। 

डबल मर्डर से बृहस्पतिवार सुबह इलाके में अफरातफरी का माहौल रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस माला लखानी के घर के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, माला लखानी दिल्ली के ही ग्रीन पार्क इलाके में अपना बुटीक चलाती थीं।  दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल गिरफ्तार किए गए तीनों लोग गार्ड का काम करते हैं।  मृतक फैशन डिजाइनर की पहचान माला लखानी के रूप में हुई है, जबकि उनके नौकर की अभी पहचान बहादुर के रूप में हुई है। इस मामले में घर के आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, माला लखानी और उनके नौकर बहादुर की हत्या चाकू से गोदकर गई है, इस मामले में फिलहाल पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, पुलिस अभी हत्या की वजह का खुलासा नहीं कर रही है। 

राफेल डील जांच मामले में ,जाने हुआ क्या ?

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय वायु सेना के लिये फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के मामले की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई खत्म हो गई है। करीब चार घंटे तक चली बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। बता दें कि भोजनावकाश के बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई थी। जिसके बाद एयर वाइस मार्शल चलपति ने कोर्ट पहुंचकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सवालों का जवाब दिया।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों पर कोई भी बहस तभी हो सकती है जब इस सौदे के तथ्य जनता के सामने आने दिये जायें। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं।’’ 

पीठ ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक किये बगैर इसकी कीमतों पर किसी भी तरह की बहस का सवाल नहीं है। हालांकि, पीठ ने अटार्नी जनरल को स्पष्ट किया कि यदि वह महसूस करेगी कि ये तथ्य सार्वजिनक होने चाहिए, तभी इनकी कीमतों पर बहस के बारे में विचार किया जायेगा।

केंद्र की ओर से जब अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बहस शुरू की तो पीठ ने 36 राफेल विमानों की खरीद के मामले में भारतीय वायु सेना के किसी अधिकारी से भी सहयोग का आग्रह किया है। पीठ ने कहा, ‘‘हम वायु सेना की जरूरतों पर विचार कर रहे हैं और हम राफेल विमान के बारे में वायु सेना के किसी अधिकारी से जानना चाहेंगे। हम इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी को नहीं बल्कि वायु सेना के अधिकारी को सुनना चाहते हैं।’’ 

वेणुगोपाल ने कहा कि वायु सेना के एक अधिकारी कुछ मिनटों में ही यहां पहुंचने वाले हैं। अटार्नी जनरल ने बहस के दौरान राफेल विमानों की कीमतों से संबंधित गोपनीयता के प्रावधान का बचाव किया और कहा, ‘‘यदि कीमतों के बारे में सारी जानकारी सार्वजनिक कर दी गयी तो हमारे शत्रु इसका लाभ ले सकते हैं। 

विमानों की कीमतों के विवरण का खुलासा करने से इंकार करते हुये वेणुगोपाल ने कहा कि कीमतों के मुद्दे पर वह न्यायालय की और अधिक मदद नहीं कर सकेंगे। 

अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘मैंने खुद भी इसका अवलोकन नहीं करने का निर्णय किया क्योंकि इसके लीक होने की स्थिति में मेरा कार्यालय इसके लिये जिम्मेदार होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह विषय विशेषज्ञों के लिये है और, ‘‘हम लगातार कह रहे हैं कि इन विमानों की पूरी कीमत के बारे में संसद को भी नहीं बताया गया है।’’ 

उन्होंने कहा कि नवंबर, 2016 की विनिमय दर के आधार पर सिर्फ लड़ाकू विमान की कीमत 670 करोड़ थी। भारत ने अपनी वायु सेना को सुसज्जित करने की प्रक्रिया में उड़ान भरने के लिये तैयार अवस्था वाले 36 राफेल लड़ाकू विमान फ्रांस से खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे की अनुमानित लागत 58,000 करोड़ रुपये है।

वेणुगोपाल ने कहा कि पहले इन विमानों को जरूरी हथियार प्रणाली से लैस नहीं किया जाना था और सरकार की आपत्ति इस तथ्य को लेकर ही है कि वह अंतर-सरकार समझौता और गोपनीयता के प्रावधान का उल्लंघन नहीं करना चाहती।

सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त रक्षा सचिव से पूछा कि ऑफसेट के दिशानिर्देशों में 2015 में बदलाव क्यों किए गए थे। इसमें क्या देश हित है? साथ ही कहा कि क्या होगा यदि ऑफसेट पार्टनर कोई उत्पादन नहीं करता? अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र से पूछा कि डेसॉल्ट ने अभी तक ऑफसेट पार्टनर का विवरण क्यों नहीं दिया है? सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के ऑफसेट के दिशानिर्देशों के बदवाल के बारे में भी पूछा है। वहीं एयर फोर्स ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 1985 के बाद से हमें कोई नया विमान नहीं मिला है। 

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन,

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार के निधन से सियासी गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री  और विपक्ष के नेताओं ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता एच. एन. अनंत कुमार के निधन की सूचना से दुखी हूं. यह हमारे देश और खासकर कर्नाटक के लोगों के लिए सार्वजनिक जीवन का एक बड़ा नुकसान है. मैं उनके परिजनों, सहकर्मियों और असंख्य सहयोगियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.   

बता दें कि अनंत कुमार पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे. वह कैंसर से पीड़ित थे. उन्होंने 59 साल की उम्र में बेंगलुरु में अंतिम सांस ली. अनंत कुमार कर्नाटक के बेंगलुरु साउथ से सांसद थे. वह केंद्र सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर अनंत कुमार के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने लिखा कि अहम सहयोगी और दोस्त के निधन से दुखी हूं. अनंत कुमार के परिवार और समर्थकों के लिए संवेदनाएं. उन्होंने कर्नाटक में पार्टी को मजबूत किया. पीएम ने कहा कि अनंत  कु मा र   अ प ने   अच्छे  कामों के लिए याद किए जाएंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर अनंत कुमार के निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में सोमवार की सुबह अनंत कुमार जी के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं. उनके परिवार और दोस्तों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ईश्वर उनकी आत्म को शांति दे.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने भी अनंत कुमार के निधन पर शोक जताया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री और अपने दोस्त अनंत कुमार के निधन के बारे में जानकर दुखी हूं. मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध, जनवादी, जिन्होंने सांसद और केंद्रीय मंत्री के तौर पर देश के लिए बड़ा योगदान दिया है. मैंने अपने एक बड़े दोस्त को  खो दिया है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.

वहीं गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि सरकार और पार्टी में अनंत कुमार के साथ काम करने की तमाम यादें मेरे दिमाग में हैं. ये यादें मेरे साथ हमेशा बनी रहेंगी. उनके निधन से बीजेपी को बड़ा नुकसान हुआ है. साथ ही यह मेरा व्यक्तिगत नुकसान भी है. 

राजनाथ सिंह ने कहा कि वरिष्ठ सहयोगी और अपने दोस्त अनंत कुमार के निधन से बहुत दुखी हूं. वह अनुभवी नेता थे जिन्होंने अपनी पूरी क्षमता के साथ राष्ट्र की सेवा की. लोगों के कल्याण के लिए उनके जुनून और भक्ति सराहनीय थी. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं.