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करवा चौथ पर इस तरह जीतें पिया का दिल

रवा चौथ के मौके पर हाथों पर सजाएं मेहंदी
करवा चौथ के मौके पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। ऐसे में हाथों पर मेहंदी सजाना भी सबसे अहम माना जाता है। मेहंदी सिर्फ शादियों के मौके पर ही नहीं बल्कि त्योहारों के मौके पर भी लगवायी जाती है। वैसे तो बहुत सी महिलाएं पैरों पर भी मेहंदी लगवाती हैं लेकिन हाथों पर मेहंदी लगवाने का चलन सबसे ज्यादा फेमस है। कहते हैं कि हाथों पर मेहंदी का रंग जितना गहरा चढ़ता है, लड़की को उसका पति उतना ही ज्यादा प्यार करता है। ऐसे में इस बार करवा चौथ के मौके पर अगर आप भी मेहंदी लगवाए तो कुछ इसतरह लगवाए 
 वाइट मेहंदी 
अगर आप भी एक ही जैसी मेहंदी लगाकर-लगाकर बोर हो चुकी हैं और कुछ एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो इस बार आप वाइट मेहंदी लगवा सकती हैं। नैचरल हिना यानी प्राकृतिक मेहंदी जहां हाथों पर रंग छोड़ देती है वहीं, सफेद मेहंदी को आप आसानी से धो सकती हैं। सफेद मेहंदी हाथों पर 3 से 10 दिन तक रहती है। इसे बनाने में ग्लिटर और गिलडिंग पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है।  अगर भी इसको लगने की प्लानिंग कर रही हैं तो हम आपको बता रहे हैं  सिंपल लेकिन लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स के साथ लगाए जिसके जरिए आप मोह लेंगी अपने पिया का दिल
शेडेड मेहंदी 
मेहंदी आर्ट की बात करें तो इसमें शेडिंग टेक्नीक इन दिनों सबसे ज्यादा ट्रेंड में है और आम मेहंदी से अलग लुक भी देता है। लड़कियों और महिलाओं के बीच यह डबल शेड टोन भी काफी पॉप्युलर है। शेडिंग टेक्नीक के लिए डार्क और लाइट कलर की मेहंदी का इस्तेमाल किया जाता है। ... 
नेट मेहंदी 
मेहंदी डिजाइन्स की बात करें तो इन दिनों नेट डिजाइन वाली मेहंदी काफी ट्रेंड कर रही है। हालांकि इसे बनाने में थोड़ा वक्त लगता है इसलिए यह डिजाइन बनवाने के लिए आपको धैर्य के साथ बैठना होगा। लेकिन बनने के बाद यह हाथों पर बेहद खूबसूरत लगता है। आप चाहें तो पूरे हाथ पर नेट डिजाइन बनवा सकते है 
थोड़ाफ्लोरल मेहंदी 
मेहंदी डिजाइन्स की बात करें तो यह सबसे फेमस डिजाइन है जिसमें छोटे-छोटे फूलों से लेकर बड़े-बड़े फूलों के पैटर्न को मेहंदी के जरिए हाथों पर उकेरा जाता है। शादी-ब्याह जैसे ट्रडिशनल मौकों से लेकर तीज-त्योहार तक फ्लोरल मेहंदी डिजाइन हमेशा ही महिलाओं और लड़कियों की पहली पसंद होता है।  । 
ग्लिटर मेहंदी 
अगर आप अपनी मेहंदी में थोड़ी वरायटी लाना चाहती हैं तो इसके लिए आप ग्लिटर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इस तरह की मेहंदी आमतौर पर शादियों के मौके पर लगायी जाती है ताकि मेहंदी के साथ-साथ हाथों पर भी चमक आ जाए। स्पार्कल और ग्लिटर की मदद से मेहंदी में एक्स्ट्रा चार्म आ जाता है।

पटाखो की नहीं होगी इस तरह बिक्री

देशभर में पटाखों के उत्पादन, उनको बेचने और स्टॉक पर पाबंदी की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिवाली पर लोग रात 8-10 बजे तक ही पटाखे चला सकेंगे। यह आदेश सभी धर्मों के त्यौहारों पर लागू होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि जो पटाखें चलाए जाएं वो कम धुएं और आवाज वाले हों ताकि प्रदूषण ना फैले। सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर से भी कुछ शर्तों के साथ रोक हटाई है। इसके तहत पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है।ससे पहले जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने कहा, हालांकि यह मामला सोमवार की सूची में शामिल था, लेकिन इस पर निर्णय 23 अक्टूबर को सुनाया जाएगा।

र्कोर्ट ने 28 अगस्त को फैसला सुरक्षित दरअसल, वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर देशभर में पटाखों पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पीठ ने इस मुद्दे पर याचिकाकर्ता, पटाखा निर्माता केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दलीलों को सुनने के बाद कहा था कि पटाखों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और इसके व्यापार के बीच एक संतुलन रखना होगा।

पीठ का कहना था कि जहां पटाखा निर्माताओं को अपने जीविकोपार्जन का मूल अधिकार प्राप्त है वहीं 130 करोड़ लोगों को भी अच्छे स्वास्थ्य का मूल अधिकार प्राप्त है।रख लिया था। बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने 2017 में दिल्ली-एनसीआर में दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर पासुनवाई के दौरान पटाखा निर्माताओं ने दलील दी थी कि दीपावली के बाद बढ़ने वाले वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ पटाखे जिम्मेदार नहीं हैं और सिर्फ इस वजह से पूरे उद्योग को बंद करने का आदेश देना न्यायसंगत नहीं होगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने बच्चों में श्वसन संबंधी दिक्कतों के बढ़ने पर चिंता जताते हुए पटाखों पर पूरी तरह से या फिर आंशिक प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।बंदी लगा दी थी।

भाजपा लेगी संघ का सहारा

मालवा-निमाड़ के आदिवासी जिले झाबुआ और धार की विधानसभा सीटों को लेकर भाजपा ज्यादा चिंतित है। विधानसभा चुनाव में टिकट को लेकर इस बार रणनीतिकार लगातार मंथन कर रहे हैं और मौजूदा कुछ विधायकों के टिकट इस बार दोनों जिलों में काटे जाएंगे, या फिर उन्हें दूसरी विधानसभा सीटों से लड़ाया जाएगा।

संगठन को चार सीटों को लेकर फीडबैक मिला है कि, यदि चेहरे नहीं बदले तो पार्टी को उसकी कीमत चुनाव में चुकाना होगी। आदिवासी अंचल कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है। पहले यहां के लोग चुनाव में 'पंजे' के अलावा कोई दूसरे चुनाव चिन्ह पर विश्वास ही नहीं करते थे। भाजपा ने यहां अपनी जमीन तैयार करने के लिए काफी मेहनत की।
18 साल पहले भाजपा ने झाबुआ में हिंदू संगम के जरिए आदिवासी परिवारों में पैठ बनाई और उसका राजनीतिक फायदा भी मिला। तब झाबुआ जिले की सभी सीटें भाजपा ने जीती थीं, लेकिन बाद में आरएसएस की गतिविधियां कमजोर पड़ती गई। हालांकि इसके बाद भाजपा को कभी आदिवासी जिलों की विधानसभा सीटों पर 'शून्य" का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन दोनों जिलों की ज्यादातर सीटों का मिजाज 'एक बार इसको, एक बार उसको मौका दो" जैसा है।

इस बार परेशानी की वजह भी यही है। पिछली बार दोनों जिलों में भाजपा के प्रत्याशी ज्यादा जीते थे, ऐसे में इस बार उन सीटों पर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ एंटीइंकमबेंसी जनता में नजर आ रही है। झाबुआ जिले में सरकार ने विकास के कई काम करवाए हैं। सड़कों का जाल गांवों तक बिछा है, आवास योजना का भी लाभ काफी दिया गया। इतने कामों के बावजूद फीडबैक भाजपा के पक्ष में नहीं होने से रणनीतिकार आश्चर्यचकित हैंकुक्षी और गंधवानी सीट को लेकर भाजपा ने विशेष रणनीति तैयार की है और यहां पार्टी दमदार उम्मीदवार खोज रही है। जिले की दूसरी पांच सीटों में से तीन पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। उधर, झाबुआ जिले की तीन सीटों पर भी लड़ाई चेहरे की है।

थांदला विधानसभा सीट के लिए पिछली बार कांग्रेस और भाजपा दोनों ही उम्मीदवार के चयन पर गच्चा खा गई थी और जीत भाजपा के बागी उम्मीदवार कलसिंह भाबर को मिली थी। बागी उम्मीदवार की भाजपा में घर वापसी हो गई, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी इस बार उन्हें ही मैदान में उतार सकती है। पेटलवाद सीट के लिए निर्मला भूरिया पर संगठन फिर विश्वास जता सकता है। झाबुआ सीट पर संघ की पसंद को संगठन तवज्जो देगा, क्योंकि यहां लोगों के बीच भी संघ का नेटवर्क है। आलीराजपुर जिले की दोनों सीटों के मामले में संगठन को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।दोनों ही जिलों में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने कमान संभाल ली है और बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। नाराज नेताओं को मनाया जा रहा है और बैठकों के माध्यम से घर बैठे कार्यकर्ताओं को मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उधर, संभागीय संगठन मंत्री जयपाल सिंह चावड़ा के दौरे भी लगातार दोनों जिलों में होते रहे हैं और वे पदाधिकारियों से संपर्क में रहते हैं। संभाग में सबसे ज्यादा वे इन जिलों की सीटों पर ही फोकस कर रहे हैं।

मंदिर निर्माण आंदोलन अब दूसरे स्टेज की तरह, : गिरिराज


केंद्र सरकार के मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को एक बार फिर एक बयान देकर विवाद की स्थिति खड़ी कर दी। पश्चिम यूपी के बागपत जिले में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत के सभी मुसलमान भगवान श्री राम के वंशज हैं, इसीलिए किसी को भी राम मंदिर का विरोध नहीं करना चाहिए। सिंह ने इस बयान में कहा कि मुसलमानों को यह समझना होगा कि अगर वह राम मंदिर निर्माण का समर्थन नहीं करेंगे तो इससे हिंदुओं के मन में उनके लिए नफरत पैदा होगी और इसके बढ़ने पर परिणाम कैसे होंगे? बागपत के कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा कैंसर के दूसरे स्टेज की तरह बन गया है, ऐसे में अगर अभी इसका समाधान नहीं हुआ तो कभी नहीं हो सकेगा। गिरिराज ने कहा कि इस देश में जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कानून बनाने की एक बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में हिंदूओं की जनसंख्या घट रही है और इस पर चिंता करना जरूरी 
गिरिराज ने कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनना चाहिए और अल्पसंख्यक दर्जे की परिभाषा भी बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां पर अल्पसंख्यक 95 फीसदी तक हैं, वहां पर उन्हें अल्पसंख्यक ही कहा जा रहा है। ऐसे में इसपर विचार करना जरूरी है। साथ ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की भी जरूरत है और इसका उल्लंघन करने वाले लोगों से वोट करने का अधिकार छीनकर इनपर ऐक्शन भी लेना चाहिए। बता दें कि गिरिराज सिंह ने यह बयान उस वक्त दिया है, जबकि प्रदेश के अलग-अलग हिस्से में राम मंदिर को लेकर तमाम सियासतों का दौर जारी है। वहीं इस बयान की प्रासंगिकता इसलिए भी है, क्योंकि 22 अक्टूबर को हिंदूवादी नेता प्रवीण तोगड़िया भी मंदिर मुद्दे पर सियासत करने में जुटे हुए हैं। 
 

सबरीमाला पहुंची 9 साल की बच्ची ने कहा, 'अब 41 साल बाद आऊंगी मंदिर'

रविवार को 9 साल की पद्मापूर्णी मंदिर में दर्शन के लिए हाथ में पोस्टर लेकर पहुंची। इस पोस्टर में लिखा था कि मैं 9 साल की हूं और सबरीमाला में यह मेरी तीसरी यात्रा है, अब मैं यहां तब आऊंगी जब मैं 50 साल की हो जाऊं। पद्मापूर्णी ने कहा कि वह मंदिर के लोगों के बीच परंपरा को बचाए रखने का संदेश देना चाहती है और इसीलिए उसके परिवार के लोग यह पोस्टर लेकर मंदिर में पहुंचे हैं। पद्मापूर्णी ने कहा, 'मैं इस बात से बिल्कुल दुखी नहीं हूं कि मैं अगले 4 दशक तक सबरीमाला मंदिर में दर्शन करने नहीं जा सकूंगी। अयप्पा मेरे दिल में हैं और वह हमेशा मेरे साथ रहेंगे।
 सबरीमाला में 5वें दिन भी रार जारी, मंदिर जा रहीं सबरीमाला मंदिर में जारी है गतिरोध 
पद्मापूर्णी की यह तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है, जबकि केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को दर्शन की अनुमति देने को लेकर तमाम विवाद चल रहे हैं। मंदिर के कपाट खुले 6 दिन हो रहे हैं और 10 साल से 50 साल के बीच की आयु वाली किसी भी महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया है। शुरुआत में तो प्रदर्शनकारी इस तरह हावी रहे कि मंदिर की ओर जाने वाले सरकारी और निजी वाहनों को रोककर महिलाओं को वापस भेजा गया। अगले कुछ दिनों में पुलिस भारी सुरक्षा के बीच महिलाओं को मंदिर के द्वार तक लेकर गई तो वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों के सामने झुकना पड़ा था। 
 4 महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने लौटायारी, मंदिर जा रहीं 4 महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने लौटाया 

मुस्लिम थी इसलिए मकान मालिकों ने किराए पर घर देने से किया इनकार

बेंगलुरु बेंगलुरु में धार्मिक भेदभाव का एक मामला सामने आया है। यहां एकमुस्लिम महिला को दो मकान मालिकों ने सिर्फ इसलिए किराए पर कमरा देने से इनकार कर दिया क्योंकि वह मुस्लिम हैं। एक संगठन चलाने वाली हिना रहमान (काल्पनिक नाम) ने अपने फेसबुक वॉल और ट्वीटर पर इस बारे में लिखा। हिना की यह पोस्ट सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। कुछ लोग इसका समर्थन कर रहे हैं तो कुछ आलोचना कर रहे हैं। हिना ने कहा कि उन्‍हें किराए पर घर चाहिए था। उनके परिजनों की मांग के अनुरूप ऑनलाइन पोर्टल 'नेस्टअवे' पर उन्हें घर का विज्ञापन नजर आया। उन्होंने मकान मालिकों से संपर्क किया। पहले तो बातचीत में वह घर किराए पर देने के लिए राजी हो गए लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि वह मुस्लिम है उन लोगों ने किराए पर घर देने से इनकार कर दिया। 
हिना ने ट्वीट किया, 'हम लोग मुस्लिम थे, इसलिए बेंगलुरु के दो लोगों ने हम लोगों को किराए पर घर देने से इनकार कर दिया। घर के हिंदू मालिकों ने बिना मेरे बारे में जाने कल्पना के आधार पर मुझे जज कर लिया।' नेस्टअवे को टैग करते हुए हिना ने लिखा, 'आप क्यों ऐसे लोगों के घरों को अपने लिस्ट में रखे हैं जो आपके ब्रांड के सिद्धांतों के खिलाफ हैं? कम से कम अपने ग्राहकों के प्रति ईमानदार रहिए। मैं इस मामले पर आपके विचार जानने की इच्छुक हूं।' 
हिना के ट्वीट पर लोगों ने दोनों हिंदू मकान मालिकों को आड़े हाथों लिया और पोर्टल से मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें। वहीं नेस्टअवे की तरफ से हिना को रिप्लाई किया गया है । उसने कहा, 'जो कुछ हुआ, उसके लिए वह माफी मांगते है। एक कंपनी होने के नाते हम आपके साथ हैं। हम सबको एक समान मानते हैं और किसी भी तरह के भेदभाव का समर्थन नहीं करते हैं। हम इन दोनों लोगों के विज्ञापन को अपनी साइट से हटा रहे हैं। भविष्य में ये दोनों मकान मालिक कभी भी हमारी वेबसाइट में विज्ञापन पोस्ट नहीं कर सकेंगे। हम आपको आपकी मांग की अनुरूप घर दिलाने में सपॉर्ट करेंगे।' 

कड़े सुरक्षा बंदोबस्तों व विरोध प्रदर्शन के बीच खुले सबरीमाला मंदिर के कपाट

तिरुवनंतपुरम। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के कपाट खुल गए। इस दौरान पारंपरिक पूजा विधि से आरती की गई। जानकारी के मुताबिक भक्त रात 10.30 बजे तक भगवान अयप्पा के दर्शन कर सकेंगे। हालांकि इसे लेकर सुबह से ही तनाव बना हुआ था। इससे पहले उग्र प्रदर्शनकारी हिंसा पर उतर आए थे। प्रदर्शनकारियों ने मीडिया के वाहनों को भी निशाना बनाया। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था। प्रशासन ने पंपा, नीलक्कल,सनिधनम और इलावुंगल में धारा 144 लगा दी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर आयु की महिलाओं के मंदिर के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटाने के फैसला के बाद पहली बार मंदिर के कपाट खुले हैं। हालांकि कोर्ट के फैसले के बावजूद महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को रोकने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट के फैसले के चलते हर उम्र की महिला श्रद्धालु भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में जुटने लगी हैं। वहीं, दूसरी ओर वो लोग भी वहां डेरा जमाए बैठे हैं, जो महिलाओं के प्रवेश के सख्त खिलाफ है।

दिनभर हुए उग्र प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने बसों पर पथराव किया, मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया। यही नहीं प्रदर्शनकारियों ने मीडिया की गाड़ी पर हमला किया। महिला पत्रकारों को भी डराया-धमकाया। 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दिनभर जा रहा। पंबा से तकरीबन 30 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

 

 

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

इस बीच मंदिर परिसर के बाहर विरोध-प्रदर्शन और तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। 800 पुरुष और 200 महिलाओं सहित एक हजार सुरक्षाकर्मियों को निलेक्कल और पंपा बेस कैंप पर तैनात किया गया था। 500 सुरक्षाकर्मियों को सन्निधानम में तैनात किया गया था।

मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं को रोका

मंदिर तक जाने वाले रास्ते से ही 10 से 50 वर्ष के उम्र के बीच की महिलाओं को वापस लौटाया जा रहा था। भगवान अयप्पा की सैकड़ों महिला भक्त निलक्कल में कई वाहनों को रोक-रोकर चेक कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं को आगे जाने से रोक दिया। जिसके चलते तनाव और बढ़ गया था।हालात न बिगड़ें इसके लिए पुलिस भी पूरी सावधानी बरत रही थी। ऐसी ही एक महिला श्रद्धालु माधवी को उसके बच्चों के साथ बीच रास्ते से ही वापस लौटा दिया गया। इस दौरान उसकी बच्ची रोती रही, लेकिन किसी का भी दिल नहीं पिघला। बता दें कि मंदिर परिसर से करीब 20 किलोमीटर दूर निलक्कल बेस कैंप में भगवान अयप्पा के बहुत सारे भक्त ठहरे हुए थे।

मामले में भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की पाबंदी को लेकर मचे बवाल पर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया है, लेकिन अब आप कह रहे हैं कि यह हमारी परंपरा है। तीन तलाक भी इसी तरह की परंपरा थी, लेकिन जब इसे खत्म किया गया तो सब लोग प्रशंसा कर रहे थे। वहीं, हिंदू अब सड़कों पर आ गए हैं।'

 

 

हयात होटल में गुंडागर्दी का आरोपी हैं लग्जरी कार और हथियारों का शौकीन

लख्रनऊ। जधानी के पांच सितारा होटल हयात में बसपा के पूर्व सांसद राकेश पांडे के बेटे आशीष ने जमकर गुंडागर्दी की। उसने खुलेआम पिस्तौल लहराकर एक युवती और उसके साथी को धमकाया और गालियां दी। रविवार तड़के हुई इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। पुलिस मामला दर्ज कर आशीष की तलाश में छापेमारी कर रही है। वहीं पीड़ित ने एक समाचार चैनल को बताया कि बंदूक लिये व्यक्ति उसके पास आया और उसे अपशब्द कहा। पीड़ित ने दावा किया, ''बंदूक लिए एक व्यक्ति ने मुझे अपशब्द कहे और धमकी देकर चला गया। मैं भयभीत हो गया और डर गया। होटल के कर्मचारी घटनास्थल पर मौजूद थे। उन्होंने हस्तक्षेप का प्रयास किया लेकिन ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि वे भी डर गये थे।

दिल्ली में गुंडागर्दी: आरोपी आशीष है लग्जरी कार और हथियारों का शौकीन

उधर, पीड़ित के पिता और कांग्रेस के पूर्व विधायक करन सिंह का कहना है कि घटना के बाद से उनका बेटा ''सदमे में था, इसलिए पहले पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। सिंह ने कहा कि उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज कराया है और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, ''हमने पुलिस को अपना पहलू बता दिया है और लिखित में अपना बयान दर्ज कराया है। हम घटना के बाद से ही सदमे में हैं। मेरे बेटे को बंदूक दिखाई गई और वह डरा हुआ था, इसलिए हमने पहले शिकायत दर्ज नहीं कराई। पूर्व कांग्रेस विधायक ने कि वह हिंसा में विश्वास नहीं करते। उन्होंने कहा, ''बंदूक दिखाए जाने के बाद मेरा बेटा डर से कांप रहा था। हम हिंसा में विश्वास नहीं करते और लड़ाई-झगड़े से दूर रहते हैं। पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है और हमें उन पर विश्वास है।

इस वीडियो में गुलाबी रंग की पैंट पहने आशीष पिस्तौल लेकर एक युवती को धमकाते हुए दिखाई दे रहा है। आशीष के साथ तीन लड़कियां भी हैं, जिनमें से एक गालियां भी दे रही है। पुलिस के मुताबिक यह वीडियो 13/14 अक्टूबर की सुबह 3:40 बजे का है। घटना होटल के पी लेवल गेस्ट एलिवेटर एरिया के पास की है। स्पेशल कमिश्नर आरपी उपाध्याय के मुताबिक आशीष के दोस्त साहिल गिरधर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। 

वॉशरूम में घुसने पर विवाद

यह विवाद महिला वॉशरूम में घुसने को लेकर शुरू हुआ। दरअसल, आशीष अपनी महिला मित्र के साथ होटल में आया था। आरोप है कि वह महिला बाथरूम में घुस गया था, जिसका वहां मौजूद एक अन्य युवती ने विरोध किया तो वह धमकी देने लगा। आशीष ने युवती के साथी को भी धमकाया। युवती का साथी मॉडल टाउन में कांग्रेस के एक नेता का बेटा है। इस घटना के कई चश्मदीद गवाह हैं, जो विडियो में नजर आ रहे हैं, जो विडियो वायरल हो रहा है, संभवत: वह आरोपी की कार के अंदर बैठे किसी साथी ने बनाया है। 

भारतीय रेलवे लेह में बनाएगा दुनिया का सबसे  ऊंचा रेलवे ट्रैक, दिल्ली से एक दिन में सीधा पहुंचाएगी ट्रेन

जम्मू। रेलवे ने चेनाब पर बनने वाले सबसे ऊंचे रेल ब्रिज के साथ ही जम्मू-कश्मीर के लेह में भी दुनिया के सबसे ऊंचे रेल ट्रैक बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है। बिलासपुर-मनाली-लेह के पहले फेज का फाइनल लोकेशन सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने सामरिक दृष्टि से इस प्रोजेक्ट की पहचान की है। प्रोजेक्ट की लागत 83,360 करोड़ रुपये आंकी गई है।

यह ब्रॉड गेज लाइन होगी। योजना पूरी होने के साथ भारतीय रेलवे चीन संघाई-तिब्बत रेलवे को पीछे छोड़ देगा। इस ट्रैक की ऊंचाई समुद्र तल से 3300 मीटर होगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर रेलवे हिमाचल प्रदेश के मंडी, मनाली, कुल्लू, कियलॉंग, टन्डी, कोकसर, डच, उपसी और कारु को भी जोड़ेगा। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्वेश चौबे ने बताया कि रेललाइन की कुल लंबाई लगभग 465 किलोमीटर होगी। इस रूट पर कुल 30 रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। जिस तरह से कश्मीर में ट्रेन चलाई गई है उसी तरह बिलासपुर और लेह दोनों ओर से पटरियों को बिछाने का काम शुरू किया जाए।

सामरिक दृष्टिकोण से अहम

ट्रैक बन जाने से चीन की सीमा तक सेना को रसद पहुंचाना आसान हो जाएगा। अंतिम लोकेशन सर्वे का काम रेल मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम राइट्स ने पूरा किया है। सर्वे तीन चरणों में किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने देश की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए कुल चार प्रोजेक्ट की पहचान की है। इसमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश में मीसामारी-तेंगा-तवांग 378 किलोमीटर, असम और अरुणाचल प्रदेश में 249 किलोमीटर नार्थ लखीमपुर-बामे सलापत्थर, 227 किलोमीटर पासीघाट-तेजू-परशुरामकुड-रूपई और पंजाब-हिमाचल और लद्दाख इलाके में बनने वाले सबसे ऊंचा ट्रैक।

एक दिन में दिल्ली से लेह

यात्री 1100 किलोमीटर की दूरी ट्रेन से महज एक दिन में पूरा कर सकेंगे। यहां जाने के लिए महज पांच महीने ही सड़क के रास्ते खुले रहते है। ट्रैक बन जाने से प्रतिदिन ट्रेन लेह के लिए चलेगी।

सुरंगों के भीतर बनेंगे स्टेशन

इस रूट की सबसे लंबी सुरंग लगभग 27 किलोमीटर की होगी। 465 किलोमीटर लंबे ट्रैक में 244 किलोमीटर का हिस्सा सुरंग में होगा। पूरे रेल रूट पर 124 बड़े ब्रिज और 396 छोटे ब्रिज भी होंगे। सुरंगों की संख्या काफी अधिक होने से कुछ रेलवे स्टेशन सुरंगों के भीतर ही बनेगी।  इस रूट पर 75 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी।

गुरुग्राम: गोलीबारी से पहले गनर का रहस्यमय FB पोस्ट, 4 डॉट लिख काटा

गुरुग्राम। गुरुग्राम में जज की पत्नी और बेटे पर फायरिंग मामले में पुलिस की जांच जारी है. इस बीच, एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है. आरोपी गनर ने हत्या को अंजाम देने  से पहले फेसबुक पर रहस्यमय पोस्ट किया था. गनर महिपाल ने शुक्रवार रात में कागज पर डॉट बनाकर कुछ लिखा. एक जगह पर चार डॉट है, इसमें ऐसा लग रहा कि  किसी का नाम लिखा है, लेकिन उसे फिर पेन से काट दिया है. पुलिस इसे डिकोड करने की कोशिश कर रही है।

पुलिस गनर के लिखे से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या फायरिंग करने से पहले प्लानिंग की गई थी.  गोलीकांड के बाद जज कृष्णकांत की दुनिया ही  उजड़ गई है. उनकी पत्नी रितु (45) की मौत हो चुकी है, जबकि बेटा ध्रुव (18) को डॉक्टरों ने 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया है।

उधर, गोलीकांड में पुलिस की तफ्तीश अब आरोपी कॉन्स्टेबल महिपाल की मां और उसके ममेरे भाई राजेश तक पहुंच गई है. गुरुग्राम पुलिस ने नारनौल से इन दोनों को  हिरासत में ले लिया है. गुरुग्राम पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।

महिपाल को हरियाणा पुलिस की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिपाल कुछ वक्त से एक धर्म प्रचारक के संपर्क में था. इस शख्स  से प्रभावित होकर उसने ईसाई धर्म अपनाने का फैसला किया था।

हरियाणा पुलिस में हेड कांस्टेबल महिपाल पिछले दो वर्षों से जज के निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था. शनिवार को दोपहर उसने गुरुग्राम के सरे बाजार में जज  कृष्णकांत की पत्नी और बेटे को गोली मारी थी. इस वक्त वह जज की पत्नी को खरीदारी करवाने के लिए आर्केडिया मार्केट लेकर आया था. रविवार को डीसीपी सुलोचना  ने कहा था कि यह अब तक साफ नहीं है कि आरोपी ने जज की पत्नी और बेटे को क्यों मारा।
 

MeToo: एमजे अकबर ने प्रिया रमानी को सफाई देने के लिए अपनाया कानूनी रास्ता, किया मानहानि का मुकदमा

नई दिल्ली। मीटू कैंपेन के तहत यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने अपनी सफाई देने के बाद कानूनी रास्ता अपनाया है। उन्होंने आरोप  लगानेवाली एक पत्रकार प्रिया रमानी पर मानहानि का केस किया है। अकबर ने सोमवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अपने वकीलों के माध्यम से यह केस  किया।


बता दें कि एमजे अकबर पर करीब एक दर्जन महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इसके बाद विपक्षी दल जोर-शोर से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे  थे। फिर रविवार को अकबर ने खुद सामने आकर सफाई दी थी। इस्तीफे की मांग को नजरअंदाज करते हुए विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा था कि उनके खिलाफ  आरोप झूठे और निराधार हैं। उन्होंने आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही थी।

अकबर ने सफाई देते हुए कहा था, ‘कुछ हिस्सों को सबूत के बिना आरोप लगाने का संक्रामक बुखार हो गया है। मामला जो भी हो, अब मैं लौट (विदेश दौरे से) आया हूं  और आगे की कार्रवाई के लिए मेरे वकील इन बेसिरपैर के बेबुनियाद आरोपों का पता लगाएंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लेंगे।’

प्रिया रमानी के आरोपों पर दी थी सफाई
‘मिंट लाउंज’ की पूर्व संपादक प्रिया रमानी ने सबसे पहले अकबर पर इल्जाम लगाया था। फिर अकबर ने अपने बयान में रमानी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा  था, ‘प्रिया रमानी ने अपना अभियान एक साल पहले एक पत्रिका के आलेख के साथ शुरू किया था। हालांकि उन्होंने मेरा नाम नहीं लिया था, क्योंकि वह जानती थीं कि  वह झूठी कहानी है। जब हाल ही में उनसे पूछा गया कि उन्होंने मेरा नाम क्यों नहीं लिया तो उन्होंने एक ट्वीट में जवाब दिया, ‘उनका नाम कभी नहीं लिया, क्योंकि  उन्होंने कुछ नहीं किया’ अगर मैंने कुछ नहीं किया तो फिर कहां और कौन सी कहानी है?’

बता दें कि प्रिया रमानी ने एक साल पहले आलेख लिखा था और अब उन्होंने मीटू कैंपेन में अकबर का नाम लिया है। अकबर ने कहा, ‘कोई कहानी नहीं है, बल्कि  संकेत, कल्पना और अपमानजनक आक्षेप उस बात को लेकर लगाए जा रहे हैं जो कभी हुई ही नहीं है। कुछ तो बिल्कुल सुनी सुनाई अफवाहें हैं, जबकि अन्य खुले आम  इस बात की पुष्टि कर रहीं हैं कि मैंने कुछ नहीं किया।’
 

राममंदिर बयान पर बढ़े विवाद पर थरूर ने दी सफाई

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अयोध्या में राममंदिर को लेकर दिए अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद सफाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया ने राजनीतिक सेवा  के चलते मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। उन्होंने ट्वीट किया, "मैंने कहा था- ज्यादातर हिंदू अयोध्या में राममंदिर का निर्माण चाहते हैं। लेकिन अच्छा हिंदू  किसी दूसरे का धार्मिक स्थान तोड़कर वहां मंदिर निर्माण नहीं चाहता।"

कार्यक्रम में मैंने अपनी राय रखी, पार्टी की नहीं- थरूर
थरूर ने रविवार को चेन्नई में हुए 'द हिंदू लिट फॉर लाइफ डायलॉग 2018' में बाबरी विवाद को लेकर कहा था- 'हिंदू के मुताबिक, ज्यादातर हिंदू मानते हैं कि  अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है। कोई अच्छा हिंदू ऐसी जगह पर राममंदिर का निर्माण नहीं चाहता, जहां किसी और के पूजा स्थल को तोड़ा गया हो।"

कांग्रेस हिंदुओं के धैर्य की परीक्षा न ले- भाजपा

थरूर के इस बयान पर भाजपा नेता जीवीएल नरसिंह राव ने कहा- कांग्रेस हिंदुओं के धैर्य की परीक्षा न ले। कांग्रेस हमेशा रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण में बाधा  डालती रही है।

 राव ने कहा- राहुल गांधी कभी राम भक्त बन जाते हैं तो कभी खुद को शिव भक्त कहलाने लगते हैं। लेकिन उनकी पार्टी बार-बार राममंदिर के निर्माण को बाधित  करने का प्रयास कर रही है। राहुल राममंदिर पर कांग्रेस की राय स्पष्ट करें।