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150 सांसद नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाए, भारत ने कहा- यह हमारा आंतरिक मामला

जयपुर टाइम्स
लंदन (एजेंसी)। यूरोपियन पार्लियामेंट (यूरोपीय संसद) के 150 से ज्यादा सांसदों ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ तैयार प्रस्ताव किया है। इसमें कहा गया कि इससे भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव हो सकता है। इससे बहुत बड़ी संख्या में लोग स्टेटलैस यानि बिना नागरिकता के हो जाएंगे। उनका कोई देश नहीं रह जाएगा। सांसदों की तरफ से तैयार पांच पन्नों के प्रस्ताव कहा गया कि इसे लागू करना दुनिया में बड़े मानवीय संकट को जन्म दे सकता है। इस पर भारत ने कहा कि सीएए हमारा आंतरिक मामला है।
सीएए संबंधी प्रस्ताव पर बहस होने से पहले सरकार के सूत्रों ने कहा है कि यूरोपीय संसद को लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए सांसदों के अधिकारों पर सवाल खड़े करने वाली कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। इधर, भारत आए यूरोपीय संघ के सदस्यों ने कहा- यूरोपीय संसद एक स्वतंत्र संस्था है। काम और बहस के मामले में इसे स्वायत्तता हासिल है। सीएए पर प्रस्ताव का मसौदा संसद के राजनीतिक समूहों ने तैयार किया है।
'नागरिकता कानून अल्पसंख्यकों के खिलाफÓ : सांसदों ने प्रस्ताव में आरोप लगाया कि भारत सरकार द्वारा लाया गया यह कानून अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। यह कानून धार्मिकता के आधार पर भेदभाव करता है। ऐसा करना मानवाधिकार और राजनीतिक संधियों की भी अवमानना है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौते के अनुच्छेद-15 का भी उल्लंघन बताया गया, जिस पर भारत ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था। इस पर बुधवार को बहस होगी। इसके एक दिन बाद वोटिंग की जाएगी। यूरोपीय सांसदों के इस प्रस्ताव में भारत सरकार पर भेदभाव, उत्पीडऩ और विरोध में उठी आवाजों को चुप कराने का आरोप लगाया गया है। वहीं, इसमें कहा गया कि नए कानून से भारत में मुस्लिमों की नागरिकता छीनने का कानूनी आधार तैयार हो जाएगा। साथ ही, नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के साथ मिलकर सीएए कई मुस्लिमों को नागरिकता से वंचित कर सकता है। सांसदों ने यूरोपीय संघ से इस मामले में दखल देने की मांग भी की। 

अदनान सामी को पद्मश्री दिए जाने पर कांग्रेस ने कहा- यह एनआरसी और मोदी सरकार की चमचागिरी का जादू

 जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। गायक अदनान सामी को पद्मश्री दिए जाने को कांग्रेस ने मोदी सरकार की चमचागिरी करने का परिणाम बताया। कांग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा, करगिल युद्ध में शामिल रहे हमारे जवान और सेना के पूर्व अफसर मोहम्मद सनाउल्लाह को घुसपैठिया घोषित कर दिया गया। वहीं, भारत के खिलाफ युद्ध लडऩे वाले पाकिस्तानी वायुसेना के पायलट के बेटे को पद्मश्री दिया जा रहा है। यह एनआरसी और सरकार की चमचागिरी करने का जादू है। अदनान सामी का जन्म लंदन में हुआ था। उनके पिता पाकिस्तानी एयरफोर्स में पायलट थे। उन्होंने 2015 में भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दिया था। जनवरी 2016 में सरकार ने उन्हें भारतीय नागरिता प्रदान कर दी। अदनान उन 118 हस्तियों में शामिल हैं जिन्हें शनिवार को पद्मश्री दिए जाने की घोषणा की गई थी। गृह मंत्रालय की सूची में उनका घर महाराष्ट्र में दर्शाया गया है।  
शेरगिल ने ट्वीट में 3 सवाल किए, पहला, क्यों सनाउल्लाह जैसे भारतीय सेना के अफसर को एनआरसी के द्वारा विदेशी घोषित किया जाता हैं वहीं, एक पाकिस्तानी पायलट के बेटे को पद्मश्री दिया जा रहा है? दूसरा, क्या पद्मश्री के लिए समाज में योगदान जरूरी है या सरकार का गुणगान? तीसरा, क्या पद्मश्री के लिए नया मानदंड है कि करो सरकार की चमचागिरी, मिलेगा तुमको पद्मश्री 
दिग्विजय ने अदनान को पद्मश्री दिए जाने पर खुशी जाहिर की
वहीं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। दिग्विजय ने ट्वीट किया, "पद्मश्री से सम्मानित सभी हस्तियों को बधाई। मैं सिंगर और संगीतकार अदनान सामी को पद्मश्री दिए जाने से बहुत खुश हूं। मैंने सरकार से उन्हें भारतीय नागरिकता दिए जाने की सिफारिश की थी और मोदी सरकार ने उन्हें यह प्रदान की। सरकार को किसी भी व्यक्ति को बिना धार्मिक पक्षपात के नागरिकता देने का अधिकार है। फिर सीएए क्यों? सिर्फ भारतीय राजनीति का ध्रुवीकरण करने के लिए। अगर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के उत्पी?ित मुस्लिम समुदाय भारतीय नागरिकता की मांग करते हैं, तब मोदी सरकार क्या करेगी?"
 

भारत की कश्मीर नीति पर पूरा भरोसा, हमेशा निभाएंगे साथ

में भारत की नीतियों पर शक नहीं, जिन्हें है, वे कश्मीर का दौरा करें। यह वक्तव्य रूस की ओर से तब आया है जब पाकिस्तान चीन के जरिये कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की लगातार कोशिश में है। गौरतलब है कि बीते 17 जनवरी को रूस के उपराजदूत से जब यह पूछा गया कि क्या वह कश्मीर की यात्रा करना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि दोस्त के तौर पर आमंत्रित करेंगे तो निश्चित तौर पर जाएंगे, मगर बिना गए भी भारत की कश्मीर नीति का हम समर्थन करते हैं। यह उन लोगों को कड़ा संदेश हो सकता है जो भारत के इस फैसले को संदेह से देखते हैं। रूस का यह बयान भारत की नैसर्गिक मित्रता की बात को एक बार फिर साबित करता है। वैसे इस मामले में दुनिया अब यह जान गई है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इससे दूर ही रहना चाहिए। पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पाकिस्तान ने इसके खिलाफ दुनिया में गोलबंदी करने का प्रयास किया, पर वह पूरी तरह विफल रहा। भारत का आंतरिक मामला बताते हुए किसी ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। हालांकि कुछ देश पाकिस्तान के साथ खड़े दिखाई दिए मसलन चीन और मलेशिया जैसे देश। चीन इस मामले में खुलकर नहीं बोला और अक्टूबर में भारत के महाबलिपुरम में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा अनुच्छेद 370 से दूर ही रही। जाहिर है चीन की इस चुप्पी ने पाकिस्तान को मनोवैज्ञानिक लाभ नहीं दिया। ऐसा भारत की मजबूत विदेश नीति के कारण हुआ। भारत और रूस के बीच संबंध भरोसे और एक-दूसरे के विश्वास का है जो बीते 70 वर्षों में कभी डगमगाया नहीं। अनुच्छेद 370 पर साथ खड़ा होने वाला रूस कल भी भारत के साथ था और आज भी है। दुनिया की परवाह किए बिना रूस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की दोस्ती निभाता रहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस (सोवियत संघ) ने 22 जून, 1962 को अपने 100वें वीटो का इस्तेमाल कर कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया था। दरअसल सुरक्षा परिषद में आयरलैंड ने कश्मीर मसले को लेकर भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन जो सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य थे, के अलावा चिली समेत वेनेजुएला ने उसका समर्थन किया था। तब भारत की कूटनीति वैश्विक मंच पर उतनी सशक्त नहीं थी। उस प्रस्ताव के पीछे पश्चिमी देशों की भारत के खिलाफ साजिश थी जिसमें चीन बराबर का हकदार था। सभी की मंशा थी कि कश्मीर को भारत से छीना जाए और पाकिस्तान को थमा दिया जाए, लेकिन नैसर्गिक मित्र रूस के रहते इसकी कोई संभावना नहीं थी। लिहाजा उनकी साजिश नाकाम हुई। यहां रूस की भारत के पक्ष में सशक्त भूमिका देखी जा सकती है। इतना ही नहीं इसके पहले 1961 में रूस ने अपने 99वें वीटो का प्रयोग करते हुए गोवा मामले में भारत का साथ दिया था। गौरतलब है कि जब भी भारत पर कोई भी समस्या आई सुरक्षा परिषद में मॉस्को ने दिल्ली का साथ दिया और पाकिस्तान समेत चीन को उसकी हैसियत समझाता रहा। देखा जाए तो रूस ने परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रम से लेकर विकास के अनेकों कार्य में भारत का अक्सर साथ दिया है। भले ही शीत युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया में बदलाव आया हो, पर 1990 से पहले और बाद में दोनों परिस्थितियों में आपसी संबंध बने रहे। गौरतलब है कि भारत और रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) की दोस्ती की कहानी 13 अप्रैल, 1947 को तब शुरू हुई जब भारत ने आधिकारिक तौर पर दिल्ली और मॉस्को में मिशन स्थापित करने का फैसला किया था। भले ही मौजूदा समय में भारत की अमेरिका से नजदीकी हो, लेकिन रूस से तनिक मात्र भी दूरी नहीं ब?ी। कश्मीर में यूरोपीय सांसदों की एक टीम ने अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद दौरा किया था। कई जानकारों ने माना है कि भारत सरकार को उन्हें इसकी इजाजत नहीं देनी चाहिए थी। जाहिर है भारत को यह विश्वास दिलाने की कत्तई जरूरत नहीं थी कि अनुच्छेद 370 की मुक्ति के बाद वहां मानवाधिकार और आम जिंदगी का क्या हाल है। यह निहायत भारत का आंतरिक मामला है और इसका समाधान केवल अपनी नीतियों से ही तय करना है। यह समझ से परे है कि यूरोपीय संघ के 23 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे का क्या पैगाम है। जाहिर है जो विश्वास करते हैं वे सीमा पार रहकर भी भरोसा करेंगे और जिन्हें संदेह है वे कश्मीर में घूमकर भी छींटाकशी करेंगे। इसमें कोई दुविधा नहीं कि अनुच्छेद 370 के हटने से वैश्विक स्तर पर थो?ी बहुत सुगबुगाहट हुई, पर भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के चलते किसी ने खुलकर जुबान नहीं खोली। यदि यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक जाता भी है तो अब केवल सात दशकों का मित्र रूस ही नहीं ब्रिटेन, फ्रांस के साथ अमेरिका का भी साथ मिल सकता है। चीन जानता है कि पाकिस्तान के आतंकियों के समर्थन में जितना बचाव एवं वीटो करना था अब वह कर चुका है। उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि पुलवामा घटना के बाद अजहर मसूद के मामले में चीन को कैसे किनारे लगाते हुए अन्य स्थायी सदस्यों ने मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया था। फिलहाल भारत और रूस के संबंधों की सारगर्भिता को केवल कश्मीर मामले से ही आंकना सही नहीं होगा। भारत के औद्योगीकरण में योगदान, अंतरिक्ष तथा सैन्य सहयोग और सोवियत संघ के विघटन के बाद भी भारत के प्रति न बदलने वाले उसके मिजाज समेत कई मापदंड इसमें समावेश लिए हुए हैं जो आज भी नैसर्गिक मित्रता की अभिव्यक्ति बने हुए हैं।  

राजपथ पर इस बार काफी कुछ दिखाई देगा पहली बार

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। इस बार की गणतंत्र दिवस की परेड न सिर्फ हमारे लिए बल्कि हमारे पड़ोसियों के लिए भी खास होने वाली है। भारत के पड़ोसी देशों के लिए यह परेड इस लिहाज से भी खास है क्योंकि इसमें उनके दिलों को दहलाने का पूरा प्रबंध किया गया है। इस बार काफी कुछ ऐसा है जो इस परेड में पहली बार दिखाई देने वाला है। इस बार पाकिस्तान उन बहादुर कमांडो की उस टुकड़ी को देख सकेगा जिसने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी कैंपों को तबाह किया था। इसके अलावा दुश्मन का दिल दहला देने और अचूक निशाना लगाने वाली ऑटोमैटिक तोप भी पहली बार इस परेड की शोभा बढ़ाएगी। इसके अलावा पहली बार सेना की पुरुषों की टुकड़ी की कमान एक महिला सैन्य अधिकारी के हाथों में होगी। 27 मार्च 2019 दिन बुधवार को कुछ ऐसा हुआ था जिसकी सूचना पूरी दुनिया को पीएम नरेंद्र मोदी की जुबानी मिली थी। यह सूचना थी मिशन शक्ति की। इस मिशन के तहत भारत ने पहली बार जमीन से अंतरिक्ष में अचूक निशाना लगाकर एक सेटेलाइट को नष्ट कर दिया था। यह उपलब्धि भारत के लिए बेहद खास थी। भारत ने पहली बार अपनी इस क्षमता का सफलतापूर्वक परिक्षण किया था। इस सेटेलाइट को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड लॉन्च कॉम्पलेक्स से किया गया था। इस अभूतपूर्व मिशन को जिस बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर ने अंजाम दिया था उसको राजपथ पर इस बार पहली बार देखा जा सकेगा। एक आम आदमी के लिए इस मिसाइल को देखना और इसकी उपलब्धि के बारे जानना अपने आप में काफी खास है।  27 मार्च 2019 दिन बुधवार को कुछ ऐसा हुआ था जिसकी सूचना पूरी दुनिया को पीएम नरेंद्र मोदी की जुबानी मिली थी। यह सूचना थी मिशन शक्ति की। इस मिशन के तहत भारत ने पहली बार जमीन से अंतरिक्ष में अचूक निशाना लगाकर एक सेटेलाइट को नष्ट कर दिया था। यह उपलब्धि भारत के लिए बेहद खास थी। भारत ने पहली बार अपनी इस क्षमता का सफलतापूर्वक परिक्षण किया था। इस सेटेलाइट को डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड लॉन्च कॉम्पलेक्स से किया गया था। इस अभूतपूर्व मिशन को जिस बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर ने अंजाम दिया था उसको राजपथ पर इस बार पहली बार देखा जा सकेगा। एक आम आदमी के लिए इस मिसाइल को देखना और इसकी उपलब्धि के बारे जानना अपने आप में काफी खास है।  राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना में शामिल कर लिया गया है। इसको भारत की जरूरत के हिसाब से तैयार किया गया है। राफेल के मिलने के बाद भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। वहीं दुश्मनों के दिल में भी डर पैदा हो गया है। 
यह लड़ाकू विमान कई खूबियों वाले राडार वार्निग रिसीवर, लो लैंड जैमर, दस घंटे तक की डाटा रिकार्डिग, इजरायली हेल्मेट उभार वाले डिस्प्ले, इन्फ्रारेड सर्च एवं ट्रैकिंग सिस्टम जैसी क्षमताओं से लैस है। इसका रडार सिस्टम 100 किलोमीटर की रेंज में एक साथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है। इसके अलावा इसमें लगा ह्यूमन मशीन इंटरफेस इसे दूसरे विमानों से ज्यादा सक्षम बनाता है। यही राफेल इस बार एयरफोर्स की झांकी का सबसे बड़ा आकर्षण है, जो पहली बार परेड का हिस्सा बन रहा है।   हाल ही में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए अमेरिकी हेलीकॉप्टर अपाचे और चिनूक पहली बार गणतंत्र दिवस परेड के दौरान राजपथ के ऊपर उड़ान भरते दिखाई देंगे। इसके अलावा इस कुछ दूसरे विमान भी इस फ्लाइंग पास्ट का हिस्सा बनेंगे। यह दोनों हेलीकॉप्टर हमला करने  के अलावा तेजी से सेना का साजो-सामान और जवानों को पहुंचाने में सक्षम हैं। इस बार वायुसेना दिवस पर पहली बार देशवासियों ने इन्हें देखा था। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अपाचे दो टर्बोशाफ्ट इंजन और चार ब्लेड वाला अटैकिंग हेलीकॉप्टर है। यह अपने आगे लगे सेंसर की मदद से रात में भी आसानी से उड़ान भर सकता है। इसको दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाले अटैकिंग हेलीकॉप्टर का दर्जा हासिल है। भारत को मिलाकर दुनिया की करीब 15 वायुसेना अपाचे का इस्तेमाल करती हैं। जहां तक इसका सौदा अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ 2015 में हुआ था। इसके तहत भारत को 15 हेलीकॉप्टर मिलने हैं जिनमें से अभी तक केवल चार ही हासिल हुए हैं। किसी भी मौसम में उड़ान भरने की क्षमता और दुर्गम इलाकों में पहुंच ही इसको दूसरे हेलीकॉप्टरों से अलग करती है।  29 सितंबर 2016 को जिस पैरा कमांडो के जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइल की थी और कई आतंकी कैंपों को तबाह किया था, पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाई देने वाली है। पाकिस्तान न तो कभी इस तारीख को और न ही इन जवानों को भूल पाएगा। इन जवानों ने पाकिस्तान से उरी हमले का बदला लिया था।  सीआरपीएफ की महिला बटालियन इस बार पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह के दौरन राजपथ पर खतरनाक स्टंट करती दिखाई देगी। इस तरह के खतरनाक करतब पहले राजपथ पर सीमा सुरक्षा बल के जवान किया करते थे, लेकिन अब यही यह महिलाएं करने वाली हैं। हैरतअंगेज तरह से एक ही बाइक पर छह महिला जवान जब अत्याधुनिक वैपन हाथों में लिए दिखाई देंगी तो यकीनन हर कोई दांतों तले अंगुली दबा लेगा।  इस बार गणतंत्र दिवस समारोह पर निकलने वाली परेड में पहली बार जवान एक खास सूट पहने नजर आएंगे। यह सूट खासतौर पर केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और परमाणु हमले से उनकी रक्षा करता है। इसको सीबीआरएएन सूट कहा जाता है। दिसंबर 2010 में पहली बार भारतीय सेना में इस क्षमता से लैस आठ व्हीकल्स को खरीदा गया था। इन्हें डीआरडीओ के सहयोग से ऑर्डिनेंस फैक्टरी में बनाया जा रहा है। इस तरह के व्हीकल्स और सूट का इस्तेमाल भारत को मिलाकर कुल दस देश करते हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ के भी कुछ देश इसका इस्तेमाल करते हैं।  कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्माणाधीन स्वदेशी विमानवाहक (ढ्ढठ्ठस्रद्बद्दद्गठ्ठशह्वह्य ्रद्बह्म्ष्ह्म्ड्डद्घह्ल ष्टड्डह्म्ह्म्द्बद्गह्म्-ढ्ढ्रष्ट-1) विक्रांत के मॉडल की पहली बार झलक इसी गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर देखने को मिलेगी। इसके इसी वर्ष भारतीय नौसेना में शामिल होने की उम्मीद भी की जा रही है। वर्ष 2003 में सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। करीब छह वर्ष बाद इसका निर्माण भी शुरू कर दिया गया था।   

प्रियंका के घर में घुसपैठ करने वाली कार को सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी की गाड़ी समझा था

नई दिल्ली.(एजेसीं)। प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा में तैनात एजेंसियों से घुसपैठ करने वाली गाड़ी को पहचानने में गफलत हुई थी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और दिल्ली पुलिस ने घुसपैठ करने वाली गाड़ी को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और प्रियंका के भाई राहुल गांधी की कार समझ लिया था। हालांकि दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ दोनों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों ने कहा- गाड़ी इसलिए बेरोक-टोक अंदर पहुंच गई, क्योंकि सुरक्षा टीमों ने इसे राहुल गांधी की कार समझा था।
     इस मुद्दे पर जहां राजनीति गर्मा रही है, तो वहीं दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ भी घटना के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। सीआरपीएफ सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने गाड़ी को अंदर आने की इजाजत दी, क्योंकि परिसर की सुरक्षा के लिए वही जिम्मेदार है। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ जिम्मेदार है और उसकी टीम की मंजूरी के बाद ही वाहन को अंदर जाने दिया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि अंदर तैनात सीआरपीएफ स्टाफ ने कार से बाहर निकलने पर भी यात्रियों की जांच नहीं की। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय ने सोमवार को सीआरपीएफ के पास इस घटना की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि पिछले हफ्ते (नवंबर में) कुछ अज्ञात लोगों ने बिना इजाजत उनके घर में प्रवेश किया। इन लोगों ने प्रियंका गांधी के साथ सेल्फी खिंचवाने की मांग भी की। संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- इस मामले में तीन लोगों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, सीआरपीएफ भी घटना की जांच कर रहा है। सुरक्षा में चूक के मुद्दे पर उन्होंने कहा- सुरक्षाकर्मियों को सूचना मिली थी कि प्रियंका गांधी के घर राहुल गांधी आने वाले हैं। वह भी काले रंग की सफारी में सवार थे। यह एक संयोग था कि दोनों ही कारें एक ही रंग की थी, इसलिए यह घटना हुई। बावजूद इसके हमने जांच के आदेश दे दिए हैं। शाह ने बताया- एक ही समय में काले रंग की टाटा सफारी वहां पहुंचने पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे नहीं रोका। गाड़ी बिना रोक-टोक के घर में प्रवेश कर गई।केंद्र सरकार ने हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा को दिए गए एसपीजी कवर को वापस ले लिया था। तीनों कांग्रेस नेताओं के सुरक्षा कवर की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने यह फैसला किया। सरकार ने उन्हें जेड प्लस सुरक्षा देने का फैसला किया है, जिसके तहत अब सीआरपीएफ के जवान गांधी परिवार के सदस्यों की सुरक्षा करते हैं।

मुस्लिम पक्ष को मंदिर निर्माण से आपत्ति नहीं, लेकिन मस्जिद के लिए 6 दिसंबर को रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगा

लखनऊ (एजेसीं)।. अयोध्या मामले में रिव्यू पिटीशन लगाने की समय सीमा खत्म होने के अंतिम दिन यानी 6 दिसंबर को मुस्लिम पक्ष पिटीशन दाखिल करेगा। अयोध्या मामले में 9 नवंबर को फैसला आया था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी थी और अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन मस्जिद के लिए देने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन लगाने के लिए एक महीने का समय होता है। यह समय 6 दिसंबर को खत्म हो रहा है, क्योंकि 7 और 8 दिसंबर को शनिवार-रविवार होने से कोर्ट बंद है। मुस्लिम पक्ष की ओर से 1973 से इस मामले की पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील जफरयाब जिलानी बातचीत में कहा कि हम समय सीमा के अंतिम दिन याचिका दायर कर देंगे। जिलानी ने कहा कि हमें तो मस्जिद की जमीन से मतलब है। मंदिर या उससे बनाने के लिए ट्रस्ट बनने से हमें कोई आपत्ति नहीं। उसकी जो प्रक्रिया चल रही है, वह चलती रहे। हम तो फैसले के खिलाफ अपनी बात कहेंगे। रिव्यू पिटीशन में देरी के सवाल पर जिलानी कहते हैं कि तैयारी में समय लगता है। हम कोई कमी नहीं छोडऩा चाहते। रिव्यू पिटीशन में राजीव धवन ही हमारे वकील रहेंगे। उन्हीं की सलाह पर हम रिव्यू पिटीशन लगा रहे हैं।

फरयाब जिलानी से बातचीत के संपादित अंश
 
क्या मस्जिद शिफ्ट की जा सकती है? पांच करोड़ और पांच एकड़ का पहले कब ऑफर मिला था?  -नहीं। 2013 में यह वफ्फ एक्ट में सेक्शन 1004-ए में जोड़ा गया कि आप मस्जिद शिफ्ट नहीं कर सकते। 1986 में ताला खुलने से पहले उस समय के चेयरमैन फरहत अली से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री वीर बहादुर ने कहा था कि आप मुकदमा वापस ले लीजिए। हम आपको मस्जिद बनाने के लिए 5 करोड़ रुपए और 5 एकड़ जमीन दे रहे हैं, लेकिन ये मानना संभव नहीं था।

इस फैसले को आप किस तरह देखते हैं? -देखिए, हम देश के समझदार नागरिक हैं और वकील भी हैं। ऐसा नहीं है कि हम इस फैसले से हतप्रभ रह गए हों। गलत फैसले होते रहते हैं। यह पहली बार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट में भी फैसला आया था तो हमने अपील की थी। यहां अपील का अधिकार नहीं है तो रिव्यू करेंगे। ऐसा नहीं है कि इसमें सब कुछ हमारे खिलाफ रहा हो। बहुत कुछ हमारे हक में भी है।

क्या आप ट्रस्ट बनने पर स्टे मांगेंगे? - पूरे जजमेंट पर स्टे का तो सवाल ही नहीं उठता। अभी तो वे 3 महीने में ट्रस्ट बनाएंगे। ट्रस्ट के बाद वे मंदिर बनाने की कार्यवाही करेंगे। मंदिर बनाने के लिए आधी जमीन यानी 880 स्क्वायर यार्ड उनके पास है ही। हमारा विवाद तो अंदर की जमीन पर है। स्टे की जरूरत तो हमें मंदिर बनना शुरू होने के बाद होगी। पहले रिव्यू पिटीशन पर विचार होगा। रजिस्ट्रार, चीफ जस्टिस के सामने फाइल रखेंगे। इसके बाद बेंच बनेगी, क्योंकि बेंच के एक जज रिटायर होने के कारण बेंच में 4 जज ही बचे हैं। रजिस्ट्री में फाइलिंग के बाद हमारे सामने समय की पाबंदी खत्म हो जाएगी। इसके बाद पांचों जज चेंबर में डिस्कस करेंगे कि कोर्ट में सुना जाए या न सुना जाए। इसके बाद चीफ जस्टिस जैसा ऑर्डर करेंगे, वैसा होगा।

बाबर द्वारा विध्वंस की घटना और 6 दिसंबर की घटना को आप कैसे देखते हैं? क्या दोनों को एक समान मानते हैं?
बाबर के विध्वंस की घटना का कोई सबूत नहीं है। कोर्ट का कहना है कि 12वीं सदी के बाद वहां मंदिर के कोई सबूत नहीं मिलते। कोर्ट ने माना ही नहीं कि बाबर ने विध्वंस किया था। दूसरी घटना को कोर्ट ने माना है। किसी भी मस्जिद में मूर्ति रखकर अगर उसे देवता मान लिया जाएगा तो कोर्ट को इसे तो वेरीफाई करना होगा कि कौन-सी मूर्ति को देवता माना जाए। भले ही हिंदू कानून इसे न मानता हो।

रिव्यू पिटीशन पर मुस्लिम पक्ष कैसे बंट गया? -इतने बड़े देश में 25 करोड़ मुसलमान हैं। आप कैसे सबसे एक जैसी सोच की बात कर सकते हैं? सबकी अपनी-अपनी सोच है। कुछ रिव्यू के साथ हैं तो कुछ नहीं हैं। क्या कश्मीर मसले में सभी एक राय हैं? क्या अयोध्या मामले में सारे हिंदू एक राय हैं? मुसलमानों के कुछ पक्षों का रिव्यू न लगाने का तार्किक आधार है? - तार्किक आधार यही है कि छोड़ दीजिए। सरेंडर कर दीजिए। माहौल ठीक रहे। अमन-चैन रहे। ये तो लोग बहुत पहले से कह रहे हैं। हिंदू विधि के अनुसार मंदिर या देवालय की भूमि, जहां पूजा-अर्चना कभी समाप्त न हुई हो, वहां देवता के अधिकारों को छीना नहीं जा सकता। फिर वादी नंबर एक के अधिकारों पर उसका कालांतर में कभी प्रभाव पड़ेगा? वादी नंबर एक वहां था ही नहीं। अगर वह होता तो उसके अधिकारों पर फर्क पड़ता। मस्जिद के बारे में भी यह फाइंडिंग नहीं है कि मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया है।

क्या बाबर के समय कोई वक्फ किया गया था? अगर किया गया था तो सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहकर वक्फ मानने से इनकार कर दिया? -वे मस्जिद तो मान रहे हैं, लेकिन ये नहीं मान रहे हैं कि उसका उपयोगकर्ता कौन था? जब मस्जिद है तो उसका उपयोगकर्ता तो मुसलमान ही होगा न। मस्जिद का उपयोगकर्ता दूसरा कैसे हो गया। मुस्लिम पक्ष के वकीलों का कहना है कि वो दलीलें मान ली गईं, जिनसे मुकदमे के परिणाम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन ऐसी दलीलें नहीं मानी गईं, जिनसे मुकदमे के परिणाम पर फर्क पड़ता। वादी नंबर-2 लीगल पर्सन नहीं हैं, यह बात कोर्ट ने मान ली। कुछ चीजें जो भविष्य में फैसले पर प्रभाव डाल सकती थीं, वे सभी मानी हैं। कुछ बातें जजमेंट में नहीं आतीं तो दलीलें भविष्य में ओपन टू क्वेश्चन होतीं। क्या ऐसी मूर्ति जिसकी प्राण प्रतिष्ठा न हुई हो और जबरदस्ती रखी गई हो, वो कैसे देवता हो सकती है? ये कोर्ट में अभी भी तय नहीं हुआ है। कोर्ट को इसका कारण बताना होगा।

क्या मुस्लिम पक्ष नमाज पढऩे के सबूत नहीं दे सका? क्या कमी रही आपकी तरफ से? -कोर्ट ने माना है कि मस्जिद थी। अगर मस्जिद थी तो कभी तो नमाज पढ़ी गई होगी। नमाज पढऩे के सबूत नहीं हैं तो मस्जिद में और क्या होता होगा? खास बात यह है कि जब मुगल शासन रहा है तो मुस्लिमों को किसने नवाज पढऩे से रोका होगा? कुछ कॉमन सेंस से भी कोर्ट को अप्लाई कर देखना होगा कि उस दौरान कोई चीन का शासन नहीं था

राजस्थान पुलिस अकादमी बनी देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस अकादमी

जयपुर टाइम्स 

जयपुर (नि.स.) केंद्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 के लिए अराजपत्रित अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु राजस्थान पुलिस अकादमी को देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस अकादमी घोषित किया गया है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इस आशय का आदेश जारी कर पुलिस महानिदेशक राजस्थान एवं निदेशक राजस्थान पुलिस अकादमी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है महानिदेशक पुलिस डॉ. भूपेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि के लिए राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक एवं उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे पूरे राजस्थान पुलिस के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक हेमंत प्रियदर्शी ने इस सफलता का श्रेय पुलिस अकादमी की प्रतिबद्ध टीम को दिया है तथा विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में राजस्थान पुलिस अकादमी राजपत्रित अधिकारियों की श्रेणी में भी देश की सर्वश्रेष्ठ अकादमी बनेगी तथा इसके लिए पूरी टीम द्वारा पूर्ण मनोयोग से काम किया जाएगा।  निदेशक आरपीए हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि इस आदेश में राजस्थान पुलिस अकादमी को अराजपत्रित अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस अकादमी घोषित करने के साथ-साथ राजपत्रित अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु उत्तरी जोन की सर्वश्रेष्ठ अकादमी के रूप में चयनित किया है। राजस्थान पुलिस अकादमी को अराजपत्रित अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु देश की सर्वश्रेष्ठ अकादमी घोषित होने पर गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एक ट्रॉफी तथा आधारभूत ढांचे के विकास हेतु 20 लाख की अनुदान राशि दी जाएगी। इस प्रकार जोनल स्तर पर सर्वश्रेष्ठ घोषित होने पर आधारभूत ढांचे के विकास हेतु ०2 लाख की अनुदान राशि दी जाएगी ।    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा देश की समस्त पुलिस अकादमियों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ पुलिस अकादमी का चयन किया जाता है। इस चयन प्रक्रिया में प्रशिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रशिक्षकों का कौशल, प्रशिक्षुओ का प्रदर्शन, प्रशिक्षण हेतु उपलब्ध आधारभूत ढांचा, प्रशिक्षण में नई तकनीकों का प्रयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक सरोकार के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कुल 28 मापदंडों को आधार बनाया गया है। राजस्थान पुलिस अकादमी ने इन सभी मापदंडों पर देश की सभी पुलिस अकादमियों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

अयप्पा मंदिर में 12 साल की लड़की को दर्शन से रोका, बुकिंग के दौरान 10 साल उम्र दिखाई थी

जयपुर टाइम्स
सबरीमाला (एजेंसी)। 12 साल की एक लड़की को पुलिस ने भगवान अयप्पा के मंदिर में दर्शन करने से रोक दिया। लड़की अपने पिता के साथ पोंबा से दर्शन के लिए आई थी। पुलिस ने बताया कि बुकिंग के दौरान लड़की की उम्र 10 साल दिखाई गई थी। लेकिन, जब उसके आधार कार्ड की जांच की गई, तब पता चला कि वह 12 साल की है। अयप्पा मंदिर 16 नवंबर की शाम दो महीने तक चलने वाले मंडला-मकाराविल्लाक्कू सीजन के लिए खोला गया है। लड़की को पूजा से रोकने के बाद उसके परिजनों को सबरीमाला के मौजूदा हालात के बारे में बताया गया। लड़की के पिता और अन्य संबंंधियों को पूजा करने से नहीं रोका गया। मंदिर की परंपरा का समर्थन करने वाली एक नौ वर्षीय कर्नाटक की लड़की भी मंगलवार को सबरीमाला पहुंची। उसने अपने गले में पोस्टर लटकाया हुआ था। इस पर रुका था कि जब तक मैं 50 साल की नहीं हो जाती, तब तक दर्शन के लिए इंतजार करूंगी। उसके पिता ने कहा कि भक्त वो होते हैं, जो परंपरा का और मान्यताओं की रक्षा करते हैं। सोमवार को 10-50 आयु वर्ग की 2 और शनिवार को इसी आयुवर्ग की 10 महिलाओं को दर्शन करने से रोका गया था। यह महिलाएं आंध्र प्रदेश से सबरीमाला दर्शन के लिए आई थीं। 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में हर आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने का फैसला दिया था। इसके बाद भाजपा समेत कुछ अन्य दक्षिणपंथी संगठनों ने फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। हालांकि, इस साल भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपने आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, इससे जुड़ी अन्य याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच के पास भेज दिया। केरल के मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने यह साफ कर दिया गया है कि सबरीमाला वह जगह नहीं है, जहां आंदोलन किया जाए। हम किसी भी ऐसी महिलाओं को प्रोत्साहन नहीं देंगे, जो केवल पब्लिसिटी के लिए यहां आना चाहती हैं। सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल पुराना माना जाता है। इसमें महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद चला आ रहा है। दक्षिण पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी (भगवान विष्णु का रूप) का पुत्र माना जाता है। 
मान्यता है कि भगवान अयप्पा नित्य ब्रह्मचारी माने जाते हैं। पंरपरा के अनुसार मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं का आना वर्जित किया गया था। 

एयरपोर्ट पर व्यक्ति ने खुद को लुफ्थांसा एयरलाइंस का पायलट बताकर सुरक्षा तोड़ी, गिरफ्तार

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जर्मनी की लुफ्थांसा एयरलाइंस का पायलट बताने वाले एक व्यक्ति को सीआईएसएफ ने गिरफ्तार कर लिया। एयरपोर्ट अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि आरोपी राजन महबूबानी (48) पायलट की वर्दी में था। वह एयर एशिया की फ्लाइट से कोलकाता जाने वाला था। आरोपी दिल्ली के वसंत कुंज का निवासी है। वह जांच से बचने और खुद को स्पेशल दिखाने के लिए यह सब करीब 15 साल से कर रहा था। उड्डयन अधिकारी के मुताबिक, संदिग्ध महबूबानी की जानकारी जर्मन एयरलाइंस के चीफ सिक्योरिटी ऑफिस (सीएसओ) ने सीआईएसएफ को दी थी। आरोपी को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया। सीआईएसएफ के मुताबिक, आरोपी दिल्ली के वसंत कुंज का निवासी है। वह यह सब जांच और लाइन से बचने के लिए और खुद को स्पेशल दिखाने के लिए करता था। वह यह सब करीब 15 साल से कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी एयरपोर्ट पर वीडियो भी शूट कर रहा था। उसके मोबाइल में कई टिक-टॉक वीडियो मिले हैं, जिसमें वह आर्मी समेत कई सारी ड्रेस में वीडियो पोस्ट करता है। वह इन वीडियो को सोशल मीडिया पर भी शेयर करता था। 

हमारे एक पड़ोसी देश का नाम पाकिस्तान है, लेकिन उसकी हरकतें नापाक : राजनाथ

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। दो दिवसीय यात्रा पर सिंगापुर पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारा एक पड़ोसी देश पाकिस्तान है, लेकिन उसकी हरकतें अपने नाम के उलट नापाक हैं। हालांकि वह देश इस तरह से ज्यादा दिन सही सलामत नहीं रह सकेगा। सिंगापुर दौरे पर राजनाथ ने मंगलवार को सुपर प्यूमा हेलिकॉप्टर में उड़ान भी भरी थी। राजनाथ ने सिंगापुर में ही सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धांजलि भी दी थी। राजनाथ ने कहा, ''हमारी सरकार भारत की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं करेगी। हम अपनी सरकार बनाने के लिए राजनीति नहीं करते। 
हमारा उद्देश्य राष्ट्र निर्माण का होता है। अनुच्छेद 370 को लेकर राजनाथ ने कहा कि आजादी के बाद से ही एक पूर्ण राज्य (जम्मू और कश्मीर) देश के बाकी हिस्सों के साथ एकीकृत नहीं था। यह दुर्भाग्यपूर्ण था। लोगों को समझना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए यह 
जरूरी था।
उन्होंने कहा कि आज हमारी अर्थव्यवस्था करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर है। हमारी सरकार का प्रमुख लक्ष्य 2024 तक इसे दोगुने यानी 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाना है।
राजनाथ ने सुपर प्यूमा हेलिकॉप्टर में उड़ान भी भरी। उन्होंने सिंगापुर में ही सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धांजलि भी दी। माना जाता है कि 1945 में सिंगापुर से टोक्यो जाते समय विमान हादसे में सुभाष चंद्र बोस की मौत हो गई थी।
साथ ही राजनाथ  क्रंजी वार मेमोरियल पहुंचकर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। 

मुख्यमंत्री जगनमोहन 10वीं क्लास की परीक्षा में पेपर लीक मामले में पकड़े गए थे : तेदेपा

 जयपुर टाइम्स
हैदराबाद (एजेंसी)। तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के महासचिव नारा लोकेश ने आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी को लेकर विवादास्पद बयान दिया। लोकेश ने दावा किया कि जगनमोहन 10वीं क्लास की परीक्षा के दौरान पेपर लीक मामले में पकड़े गए थे। यह बात उन्होंने सभी सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलने के जगन सरकार के फैसले के सवाल पर कही। तेदेपा महासचिव ने कहा, ''हम पहले भी कह चुके हैं कि अभिभावकों को यह विकल्प दिया जाना चाहिए कि वे अपने बच्चों को अग्रेंजी माध्यम में पढ़ाना चाहते हैं या नहीं।ÓÓ लोकेश ने कहा, ''क्या आप जानते हैं जगनमोहन ने क्या पढ़ाई की है? वे कहते हैं कि उन्होंने बीए या बी.कॉम जैसी कुछ पढ़ाई की है। क्या आप जानते हैं कि वे पास हुए थे या नहीं? वे 10वीं क्लास में पेपर लीक मामले में पकड़े गए थे।ÓÓ आंध्रप्रदेश की जगन सरकार ने अगले सत्र से कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदलने का फैसला किया है। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 13 नवंबर को आईएएस अधिकारी वेत्री सेल्वी को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया। फिलहाल लगभग 34 प्रतिशत सरकारी स्कूल अंग्रेजी माध्यम में ही चल रहे हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चिदंबरम को जमानत नहीं, कोर्ट ने कहा- पूर्व वित्त मंत्री पर गंभीर आरोप

जयपुर टाइम्स
नई दिल्ली (एजेंसी)। आईएनएक्स मीडिया के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम की जमानत याचिका खारिज कर दी।  जस्टिस सुरेश कैत ने कहा- इसमें कोई शक नहीं है कि जमानत लेना उनका अधिकार है, लेकिन ऐसे मामले में अगर जमानत दी जाती है तो यह बड़े पैमाने पर लोगों के हितों के खिलाफ होगा क्योंकि उन पर गंभीर आरोप हैं। दरअसल, चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया घोटाले में सक्रिय और मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। ईडी और सीबीआई अलग-अलग मामलों में उनके खिलाफ जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को उन्हें सीबीआई वाले मामले में जमानत दे दी थी। मगर ईडी केस में जमानत मिलने के बाद ही वे जेल से बाहर आ सकेंगे। इससे पहले सीबीआई ने चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद हैं।

ईडी ने चिदंबरम की जमानत का विरोध किया था
कोर्ट ने हाल ही में चिदंबरम की न्यायिक हिरासत 27 नवम्बर तक बढ़ा दी थी। इस पर चिदंबरम के वकील ने कोर्ट से कहा था कि उन पर देश छोड़कर जाने, गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छे?छाड़ करने जैसे कोई आरोप नहीं हैं। ऐसे में उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए। ईडी ने चिदंबरम की जमानत याचिका का विरोध किया था। एजेंसी ने कोर्ट से कहा था कि चिदंबरम को अगर जमानत मिलती है, वे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं।