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मुस्लिम समाज के लोगो ने किया एक हिंदु पंडित की अंत्योष्टी का इंतजाम, हिंदु मुस्लिम एकता का संदेश

जम्मू कश्मीर
 
कश्मीर के मुस्लमानों ने एक हिन्दु पंडित का अंतिम संस्कार किया जिससे हिन्दु मुस्लिम एकता का संदेश दिया मिला हैं। कश्मीरी पंडित 
के अंतिम संस्कार का हिन्दु रिति रिवाज से सारा कार्य मुस्लिम समाज के लोगों ने किया और दाह संस्कार में करीब तीन हजार मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे। 

राज्य के पुलवामा गांव के मुस्लिम समाज ने दुनिया में धर्म समानता को लेकर उदाहरण पेश किया हैं। पचास वर्ष के पंडित तेज किशन की मौत त्रिचल पुलवामा में हो गयी। तेज किशन डेढ़ साल पहले से लकवा नामक बीमारी से झूझ रहे थे। उनके हालात अधिक बिगडने के कारण बुधवार को श्रीनगर के अस्पताल ले जाया गया, जहां आज सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली।

कश्मीरी पंडित तेज किशन की मौत होने की बात फैलते ही उनके घर पर स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया। उनके अंतिम संस्कार के कार्य का प्रबंधन भी मुस्लिम लोगो ने किया। 

उनके आवास पर मौजूद कश्मीरी पंडितों ने कहा सहायता के लिये मुस्लिम भाईयों का धन्यवाद करते हैं, हम उनके भाईचारे के इस जुनून को कभी नहीं भूलेंगे और अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने वाले मुस्लिमों ने कहा कि सभी पंडित हमारे भाई हैं। कोई भी नियम हमें अलग नही कर सकता।

स्थानीय लोगों से ​मिली जानकारी के अनुसार जब कश्मीर के पंडितों ने घाटी को छोड़कर जाना शुरू किया तो उस समय पंडित तेज किशन ने अपना पैतृक स्थान छोड़ने का फैसला लिया था। 

आज मलमास खत्म, सूर्य करेंगे उच्च राशि में प्रवेश, 18 अप्रेल से शुरू होंगे विवाह जून तक शादियों के कई मुहूर्त

कार्यालय संवाददाता
जयपुर। आज रात दो बजकर चार मिनट पर सूर्यदेव मीन राशि से अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मलमास समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।  विवाह मुहूर्त 18 अप्रेल से शुरू होंगे जो कि चार जुलाई तक रहेंगे। सूर्य प्रवेश काल की संवत 2074 की कुंडली मकर लग्न की बनी है। जिसके स्वामी शनि देव हैं। द्वादश भाव में बैठकर वर्ष के राजा मंगल से षडाष्टक योग बना रहे हैं। इसके प्रभावत से भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान आदि विकासशील देशों में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक स्थितियां संघर्षपूर्ण रहने की संभावना है। जब सूर्य का प्रवेश गुरु की राशि धनु मीन में होता है। तब मलमास या खर मास कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस काल में सभी मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। गुरु की राशि में सूर्य का भ्रमण होता है। तब ग्रह नक्षत्रों पर मांगलिक कार्य नहीं करते हैं। उल्लेखनीय है कि अप्रेल, मई और जून में शादियों के सबसे ज्यादा मुहूर्त हैं। शहर सहित ग्रामीण अंचलों में गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा शादियां होती हैं। इस साल रबी सीजन की फसल गेहूं, चना, सरसों की पैदावार अच्छी हुई है। किसानों को मंडी मे बेचने के बाद फसलों के रुपए मिलने लगेंगे। इसके साथ शादियों के मुहूर्त अधिक होने से बाजार में भी व्यापार बढेगा। इस वर्ष अप्रेल में 4, मई में 8, जून में 9 और जुलाई में 3 मुहूर्त रहेंगे। 4 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा, यह 31 अक्टूबर तक रहेगा। इस समय विवाह, यज्ञोपवीत आदि मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं। 5 से 20 सितंबर तक श्राद्ध पक्ष रहेंगे। इनमें भी मांगलिक कार्य वर्जित हैं। इसके बाद नवंबर दिसंबर में फिर शुभ मुहूर्त रहेंगे। 

महाशिवरात्रि व्रत कथा

समस्त शास्त्रों के मतानुसार शिवरात्रि व्रत सबसे उत्तम है। शास्त्रों में इस व्रत को 'व्रतराज' कहा जाता है जो चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। आप में क्षमता हो तो अपने पूरे जीवन काल तक इस व्रत को करें अन्यथा 14 वर्ष के उपरांत संपूर्ण विधि-विधान से इसका उद्यापन कर दें। जगत की भलाई के लिए मां पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया, ‘ऐसा कौन सा उत्तम व्रत है, जिससे करने से भू वासी आपकी अनुकंपा पा सकें?’
शिवरात्रि व्रत कथा
प्राचीन काल में एक शिकारी जानवरों का शिकार करके अपने कुटुम्ब का पालन पोषण करता था। एक रोज वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिन भर भागदौड़ करने पर भी उसे कोई शिकार प्राप्त न हुआ। वह भूख-प्यास से व्याकुल होने लगा। शिकार की बाट निहारता निहारता वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष पर अपना पड़ाव बनाने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को इस बात का ज्ञात न था।
पड़ाव बनाते बनाते उसने जो टहनियां तोड़ी, वे संयोग से शिवलिंग पर जा गिरी। शिकार की राह देखता देखता वह बिल्व पेड़ से पत्ते तोड़ तोड़ कर शिवलिंग पर अर्पिक करता गया। दिन भर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए। इस तरह वह अनजाने में पुण्य का भागी बन गया।
रात्रि का एक पहर व्यतीत होने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने आई। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, ‘शिकारी मुझे मत मारो मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे पास वापिस आ जाऊंगी, तब तुम मुझे मार लेना।’ 
शिकारी को हिरणी सच्ची लगी उसने तुरंत प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गई। कुछ समय उपरांत एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी बहुत खुश हुआ की अब तो शिकार मिल गया। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। 
 मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, ‘हे  शिकारी  ! मैं थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।’
शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार अपने शिकार को उसने स्वयं खो दिया उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, ‘हे शिकारी ! मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मार।’
शिकारी हंसा और बोला, ‘सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे।’
उत्तर में मृगी ने फिर कहा, ‘जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान मांग रही हूं। हे शिकारी ! मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं।’
मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के आभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य  करेगा।
शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला,’ हे शिकारी  भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊंगा।’
मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना-चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, ‘मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।’
उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गए। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।
थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेम भावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आंसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया। देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।

12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

महाशिवारात्रि हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती की पूजा के पावन दिन को विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। पुराणों में उल्लेख है कि सृष्टि के आरंभ में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की मध्य रात्रि में भगवान शंकर का ब्रहमा से रूद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय के बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुये ब्रहांमण्ड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से नष्ट कर दिया था। जिस कारण इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया है। कुछ जगह ऐसे भी प्रमाण मिलते है कि इसी दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था।
पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि सभी व्रतों में सर्वोपरि है। विधि-विधान से शिवजी का पूजन और रात्रि जागरण का विशेष महत्व वर्णित है। उपवास से जहॉ तन की शुद्धि होती है, वहीं पूजन व अर्चना से मानसिक उर्जा प्राप्त होती है और रात्रि जागरण से स्वंय का आत्म साक्षात्कार होता है।
24 फरवरी दिन शुक्रवार को विधिपूर्वक व्रत रखने से तथा शिवपूजन, रूद्राभिषेक, शिवरात्रि व्रत कथा, शिव स्त्रोत का पाठ एंव पंचाक्षरी मन्त्र का पाठ करते हुये रात्रि जागरण करने से जातक को अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है। व्रत के दूसरे दिन यथाशक्ति वस्त्र, भोजन व दक्षिणा ब्राहमण को दान करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि व्रत के विषय में ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक इस व्रत का विधि-विधान से पालन करता है, उसे लगभग सभी भोगों की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों को क्षय करने वाला होता है। इस व्रत को जो भी जातक 14 वर्षो तक लागातार करता है, उसके बाद उदापन करता है। उसकी हर मनोकामना भगवान शंकर पूर्ण करते है।
चार पहर पूजन मुहूर्त
प्रथम पहर हर-सांय 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक।
द्वितीय पहर-रात्रि 9 बजे से 12 बजे तक।
तृतीय पहर -12 बजे से 3 बजे तक।
चतुर्थ पहर-रात्रि 3 बजे से प्रातः 6 बजे तक।
महाशिवरात्रि व्रत का संकल्प 

व्रत का संकल्प सम्वत्, अपना नाम, मास, तिथि, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति का ध्यान, व अपने गोत्र को मन में उच्चारण करते हुये। महाशिवरात्रि के व्रत का संकल्प लेते हुये हाथ में जल, अक्षत व पुष्प आदि लेकर सारी सामग्री शिवलिंग पर चढ़ा दें।

महाशिवरात्रि व्रत सामग्री 
शिवरात्रि पूजन में निम्न सामग्री एकत्रित करनी चाहिए। गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, चावल, रोली, कलावा, जनेउ की जोड़ी, फूल, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा, शमी पत्र, आक का पुष्प, दूर्वा, धूप, दीप, चन्दन, नैवेद्य आदि।
महाशिवरात्रि व्रत की विधि 
प्रातःकाल स्नान-ध्यान करके मन में भगवान शंकर नाम लेकर व्रत का संकल्प करें। ईशान कोण में अपना मुख करके भगवना शिव का विधिवत पूजन करके भस्म का तिलक लगायें। इस व्रत में चारों पहर पूजन किया जाता है। प्रत्येक पहर में आरती व ऊॅ नमः शिवाय अथवा शिवाय नमः का जाप करना चाहिए। अगर शिव मंदिर में जाप सम्भव न हो तो अपने घर में भी कर सकते है। चारों पहरों में शिव का जाप करने से मनोकामनायें सिद्ध होती है। अगर सम्भव हो तो शिवरात्रि के दिन रूद्राभिषेक अवश्य करें।

ठीक नहीं है सितारे, सोमवार को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा

ग्रहण योग बनने के कारण ज्यादातर मामलों सोमवार ठीक नहीं है। इस अशुभ योग का असर लगभग हर राशि पर रहेगा। इसके प्रभाव से नौकरीपेशा और बिजनेस करने वाले लोगों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। सोचे हुए काम पूरे नहीं हो पाएंगे। कुछ लोगों को मेहनत का फायदा भी नहीं मिल पाएगा। विवाद के योग बन रहे हैं और चोट भी लग सकती है। सोमवार को मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को खासतौर से संभलकर रहना होगा।

 

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मेष - पॉजिटिव -आज आप कड़ी मेहनत के लिए तैयार रहें। दिनभर बहुत व्यस्त भी रहेंगे। आपकी छोटी-बड़ी परेशानियां भी सुलझती जाएंगी। आपकी बनाई योजनाएं सफल हो सकती है। आप जितना संतुलित व्यवहार रखेंगे, आपके लिए उतना ही अच्छा रहेगा। बिजनेस में नए कॉन्ट्रेक्ट मिल सकते हैं। आपको फायदा भी होगा। आमदनी बढ़ेगी। भरोसेमंद व्यक्ति का सहयोग भी मिल सकता है। अच्छे कामों की योजना बनेगी। सम्मान होगा। कला की तरफ रुझान बढ़ेगा।


नेगेटिव -फालतू दिखावा न करें। किसी भी तरह का कर्जा लेने से बचें। खरीददारी या बिजनेस के सौदों में भी कर्ज को लेकर सावधान रहें। क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने से बचें। जिम्मेदारियों और भाग-दौड़ के कारण अपने मन के काम नहीं कर पाएंगे। अपने से बड़े लोगों से अनबन या मनमुटाव हो सकता है। कोई बात कहने में सावधानी रखें। आज आपकी बातों का गलत मतलब भी निकाला जा सकता है। पुराने दुश्मनों का भी सामना करना पड़ सकता है।

क्या करें और क्या नहीं -किसी गरीब को 1 गिलास दूध दान दें।


लव-जीवनसाथी के लिए समय निकालें। आपका मूड रोमांटिक रहेगा।

करियर-लेन-देन सावधानी से करें। उधार लेन-देन से बचें। स्टूडेंट्स थोड़े परेशान भी रहेंगे। किसी बात को लेकर लगातार तनाव रहेगा।

हेल्थ-सेहत के मामले में दिन ठीक है। सेहत सामान्य रहेगी।

 

वृष - पॉजिटिव -कामकाज के लिहाज से दिन भर चहल-पहल भी रहेगी। आपके कामकाज की जांच हो सकती है। कार्यक्षेत्र से जुड़े जितने भी काम होंगे, वो आपके फेवर में रहेंगे। अपने साथ काम करने वाले लोगों और अन्य लोगों से तालमेल बना कर चलेंगे। इससे आपको फायदा भी होगा। आपके रोजमर्रा के कामकाज भी समय पर पूरे हो जाएंगे। पार्टनर से सहयोग और प्रेम मिलेगा। निजी और पारिवारिक जीवन पर ध्यान दें। प्रेमी, संतान और करीबी लोगों के प्रति आपका व्यवहार ज्यादा ही पजेसिव हो सकता हैं। पार्टनरशिप के ऑफर भी मिल सकते हैं। जीवनसाथी से तालमेल रहेगा। छिटपुट धार्मिक काम निपटा लेंगे। बिजनेस और नौकरी में नई योजना पर काम शुरू हो सकता है।


नेगेटिव -ओवर पजेसिव होने से नुकसान भी होगा। कुछ कामों में लापरवाही की वजह से भी आप परेशान हो सकते हैं। किसी खास मामले पर आप फैसला नहीं ले पाएंगे।


क्या करें और क्या नहीं -आंकड़े का फूल साथ रखें।


लव-लव लाइफ की पुरानी समस्या आज सुलझ सकती है। भावनात्मक रूप से जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा।

करियर-प्रोफेशनल लाइफ अच्छी रहेगी। नया वाहन खरीद सकते हैं। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा है। कम मेहनत में भी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। 

हेल्थ-जोड़ों का दर्द रहेगा। बदन दर्द भी हो सकता है।

मिथुन - पॉजिटिव -रोजमर्रा के कामकाज पर ध्यान दें। चलते काम को निपटाने के लिहाज से आप में कॉन्फिडेंस बहुत रहेगा। चलते काम में आपको अच्छी सफलता मिलेगी। घर-परिवार के मामलों में आप थोड़े व्यस्त भी रहेंगे। किसी महत्वपूर्ण मामले पर परिवार के साथ विचार-विमर्श भी होगा। नए काम की प्लानिंग भी बनेगी। जो भी बात हो, खुले तौर पर करें। दूसरों को भी ध्यान से समझने की कोशिश करें। खर्च पर नियंत्रण रखें। आमदनी बढ़ेगी। महत्वपूर्ण यात्रा के योग बन सकते हैं।


नेगेटिव -दोस्तों पर खर्चा ज्यादा हो सकता है। एक्स्ट्रा काम करने की कोशिश करेंगे, तो थकान भी होगी। खुद के साथ जबरदस्ती करेंगे तो नुकसान ही होगा। कोई नया प्रयोग करने के लिए दिन ठीक नहीं है। आलस्य न करें। दूसरों के कामों में दखल देने से धन हानि हो सकती है। किसी से फालतू ही उलझने से बड़ा विवाद हो सकता है। फालतू खर्चा भी रहेगा। किसी बात का डर भी बना रहेगा।


क्या करें और क्या नहीं -गाय का चारा डालें।


लव-समय अनुकूल है। इस राशि के अविवाहित लोग किसी को विवाह प्रस्ताव भी दे सकते हैं। साथ काम करने वाले अपोजिट जेंडर से अट्रैक्शन बढ़ेगा।

करियर-प्रोफेशनल लाइफ अच्छी है। लेन-देन में सावधानी रखें। फायदा भी होगा। स्टूडेंट्स का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा। साथियों से मदद मिलेगी। 

हेल्थ-आपकी सेहत भी सामान्य रहेगी। छोटी-मोटी चोट भी लग सकती है।

कर्क - पॉजिटिव -रोजमर्रा के काम से धन लाभ होगा। पार्टनर की भी मदद मिलेगी। बार-बार नए विचार आएंगे। अपने दायरे के लोगों से जुड़ने की कोशिश करें। पैसों के उलझे मामलों को सुलझाने पर ध्यान देंगे। कर्क राशि वाले लोगों के लिए चंद्रमा की स्थिति अच्छी रहेगी। धन लाभ होगा। कामकाज में मन लगेगा। परिवार में सुख-शांति रहेगी। पारिवारिक कामों में मन भी लगेगा। शुभ कामों पर ध्यान देंगे। लेन-देन के काम आज ही पूरे कर लें।


नेगेटिव -कोई चीज कहीं रख कर भूल भी सकते हैं। किसी को प्रेम प्रस्ताव देने से भी बचें। लेन-देन के काम कल पर टालेंगे तो परेशान हो सकते हैं। नई जानकारी और सोच आप पर हावी हो सकती है। आपके कामों में कई तरह की रुकावटें भी आएंगी। पैसों से जुड़े मामलों पर कुछ विवाद हो सकता है। बोलचाल में आप अपने मुख से निकलने वाले शब्दों पर ध्यान दें। आपकी बात का गलत मतलब भी आज निकाला जा सकता है। आपकी आलोचना भी हो सकती है। आज कोई नया फैसला भी करने से बचें।

क्या करें और क्या नहीं -नारियल पानी पिएं।


लव-पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करें। कोई पुरानी बात भी याद आ सकती है, जो आपके संबंध और मधुर कर देगी।

करियर-ऑफिस और बिजनेस में सावधानी जरूरी है। स्टूडेंट्स को कोई महत्वपूर्ण सफलता मिलने के योग नही है। समय सामान्य रहेगा।

हेल्थ-मसालेदार चीजों से बचने की कोशिश करें। अपना ध्यान रखें।

सिंह - पॉजिटिव -किसी न किसी तरह से फायदा होता रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को साथ के लोगों से मदद मिलेगी। बिजनेस में किसी और की गलती का फायदा आपको मिलेगा। इससे आप खुश भी हो जाएंगे। अधूरे काम भी पूरे हो जाएंगे। जिम्मेदारियों वाले काम निपटा लेंगे। गुस्से पर कंट्रोल करें। दोस्तों की मदद से फायदा होगा। पुराने दोस्तों या रिश्तेदारों से भी मुलाकात हो सकती है।


नेगेटिव -आज आपको अपनी इमेज की भी चिंता रहेगी। इस वजह से आप किसी ऐसे काम में रिस्क नहीं लेंगे जिसका नेगेटिव असर आपकी इमेज पर पड़ता हो। आज आप ज्यादा संवेदनशील न रहें। पैसों की स्थिति को लेकर मानसिक उथल-पुथल रहेगी। पैसों के मामले में एक्स्ट्रा सावधानी रखें। कोई कर्जा चूकाना हो या किश्त भरनी हो तो उसे लेकर लापरवाही भी हो सकती है। पैसों के मामलों को लेकर किसी के साथ विवाद हो सकता है। आपके दुश्मन भी सक्रिय रहेंगे। किसी के भरोसे रहने से आपके खास काम भी अधूरे रह सकते हैं।


क्या करें और क्या नहीं -गुड़-चने खाएं।


लव-पार्टनर के साथ कहीं घूमने भी जा सकते हैं। कुछ खास बातें होंगी। संबंध पहले से और अच्छे भी हो जाएंगे।

करियर-निवेश के मामले में सावधान रहें। कार्यक्षेत्र में भी सहयोग मिलेगा। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा है। करियर से जुड़ी परेशानियां निपट सकती हैं।

हेल्थ-सिर और बदन दर्द से भी परेशान रहेंगे।

कन्या - पॉजिटिव -आज आपके साथ कुछ अच्छा हो सकता है। सुख के साधन मिलेंगे। किसी खास मामले में कोई फैसला नहीं कर पा रहे थे, तो आज परिस्थितियां आपसे ये काम करवा सकती है। बिजनेस और नौकरी से संबंधित किसी बड़े फैसले के लिए दिन अच्छा है। परिस्थिति और उसके हर पहलू को आप फटाफट समझ जाएंगे। किसी के साथ पैसों का कोई महत्वपूर्ण एग्रीमेंट भी हो सकता है। मनमर्जी से काम करने की इच्छा भी होगी। अपनी जरूरतों को भूलकर दूसरों के कामों को प्राथमिकता देनी होगी। हर काम एकाग्रता से करें। प्रेमी और परिवार के साथ अच्छा समय भी बीतेगा। सुख के साधन खरीदेंगे। आसपास के कुछ लोग भी आपको सहयोग करेंगे। पिछले कामों में सफलता मिलेगी। कोई बड़ी टेंशन भी खत्म हो सकती है।


नेगेटिव -आप थोड़े मूडी रहेंगे। इसका नेगेटिव असर भी आपके खास रिश्तों पर भी हो सकता है। बात-बात पर गुस्सा करने से आपके काम बिगड़ सकते हैं। हो सकता है, आपको दोस्तों और भाइयों का सहयोग नहीं मिले। वाहन से भी चोट लग सकती है। सावधान रहें। आप बातों -बातों में अपनी कमजोरी भी किसी के सामने जाहिर कर सकते हैं। किसी से बदला लेने की भावना भी आपके मन में रहेगी।


क्या करें और क्या नहीं -किसी मंदिर में अनाज दान दें।


लव-किसी को लव प्रपोजल भी दे सकते हैं। आपके लिए दिन अच्छा है।

करियर-वाणी पर कंट्रोल करें। ऑफिस में विवाद हो सकते हैं। सावधान रहें। स्टूडेंट्स के लिए समय थोड़ा नेगेटिव भी रहेगा। समय पर सहयोग नहीं मिलने से आपका मूड भी खराब हो सकता है।

हेल्थ-ब्लड प्रेशर भी कम-ज्यादा हो सकता है। सावधान रहें।

तुला - पॉजिटिव -काम का बोझ और परेशानियां भी आज खत्म हो जाएंगी। आपका साहस और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। दिन पहले से अच्छा रहेगा। नौकरी की तलाश में हैं, तो खुद कोशिश करें। जो भी कोशिश आप करेंगे, उसमें आपको सफलता मिल सकती है। अपनी बात रखने और तर्क देने में आप सफल रहेंगे। आपका पहला प्रभाव बहुत अच्छा पड़ेगा। जो भी समस्या होगी, वह शाम तक सुलझ जाएगी। कोई परिचित व्यक्ति आपकी परेशानी दूर कर देगा। काम-धंधा भी संतोषजनक रहेगा। मूड भी अच्छा हो जाएगा। इनकम में आ रही रुकावटें खत्म हो जाएंगी। नौकरी मिलने से लेकर प्रमोशन तक कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। कोई भी फैसला सोच-समझ कर ही लें।


नेगेटिव -नशे से दूर रहें। कोई ऐसा काम हाथ में न लें, जो लंबे समय तक चले। कोई अप्रिय स्थिति भी आज पैदा हो सकती है। स्टूडेंट्स के लिए समय थोड़ा नेगेटिव हो सकता है। समय पर सहयोग नहीं मिलने से मूड भी खराब हो सकता है। आपको लेकर किसी को गलतफहमी भी हो सकती है। इससे कोई समस्या हो सकती है।


क्या करें और क्या नहीं -शनि देव को तेल चढ़ाएं।


लव-लव लाइफ अच्छी रहेगी। जीवनसाथी से सहयोग और प्यार भी मिलेगा। 

करियर-मेहनत ज्यादा रहेगी, लेकिन उसका फायदा भी आपको ही मिलेगा। इससे आपकी ही उन्नति होगी। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा है। साथ काम करने वाले लोगों से मदद मिलेगी। बेरोजगार लोगों को जॉब भी मिल सकती है।

हेल्थ-ज्यादा गर्म और ज्यादा ठंडी चीजें खाने से बचें। मुख और गले के रोग हो सकते हैं

वृश्चिक - पॉजिटिव -आत्मविश्वास रखें। जो भी फैसला करेंगे, वह अच्छा होगा। आज आप भावुक कम और व्यावहारिक ज्यादा रहेंगे। दोस्तों के साथ ज्यादा समय बीतेगा। कई तरह की जिम्मेदारियां भी पूरी करेंगे। अपनी व्यावहारिकता से आपको सफलता मिलेगी। मन में किसी तरह की उत्सुकता रहेगी। आपका रवैया दूसरों के लिए उदारता भरा रहेगा। सोचे हुए काम भी पूरे होंगे। बिजनेस और नौकरी के सोचे हुए कुछ काम पूरे होने से खुशी मिलेगी। वाहन खरीदने का भी मूड बना सकते हैं। पारिवारिक जीवन में खुशियां रहेंगी। संतान की उन्नति से खुशी बढ़ेगी।


नेगेटिव -कई तरह की उलझनों और कामकाज में आप फंस सकते हैं। थकान भी महसूस करेंगे। सावधानी से काम करें। ज्यादा उत्सुकता आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। ज्यादा आक्रामक होने के कारण भी आप करियर में आगे बढ़ने के मौके भी गंवा सकते हैं। किसी की देखा-देखी करेंगे तो इसमें फंस सकते हैं।


क्या करें और क्या नहीं -काले मोजे न पहनें।


लव-दाम्पत्य जीवन में नई खुशियां भी मिल सकती हैं। पार्टनर से सहयोग और प्यार मिलेगा।

करियर-बिजनेस के सिलसिले में यात्रा हो सकती है। बिजनेस अच्छा चलेगा। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा है। पढ़ाई में भी मन लगेगा। मेहनत का नतीजा भी आपके ही फेवर में रहेगा। 

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धनु - पॉजिटिव -कुछ उलझनें सुलझ सकती हैं। धनु राशि वाले लोगों के लिए समय अच्छा है। करियर में आगे बढ़ने के मौके भी मिल सकते हैं। योजनाओं पर पूरी कोशिश से काम करेंगे और खुद की मेहनत से खुश रहेंगे। नौकरी में आगे बढ़ने की कोशिश करें। आप आसपास के लोगों से अपनी टेंशन शेयर करेंगे और भावनात्मक रुप से थोड़े हल्के भी हो जाएंगे। घर की सजावट पर ध्यान दे सकते हैं। परिवार में माहौल भी अच्छा रहेगा। कोई पुराना दोस्त भी मिल सकता है। उससे बातें हो सकती हैं। भूमि-भवन और वाहन की परेशानियां खत्म हो जाएंगी। भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा। बिजनेस अच्छा चलेगा। महत्वपूर्ण कागज संभालकर रखें।


नेगेटिव -नौकरी में अपनी स्थिति से आप असंतुष्ट हो सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के तरीकों को लेकर बेचैन या कन्फ्यूज भी हो सकते हैं। आपकी किसी योजना या काम के कारण साथ के लोगों का भी नुकसान हो सकता है। फालतू खर्चों से भी परेशान हो सकते हैं। पैसा नहीं टिकने से भी आप दुखी भी हो सकते हैं।


क्या करें और क्या नहीं -पीला फूल साथ रखें।


लव-लव लाइफ में कुछ भी नया न करें। संबंधों में खटास आ सकती है।

करियर-धन लाभ होगा। काम ज्यादा रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी समय अच्छा है। स्टूडेंट्स का मूड अच्छा रहेगा। आज मेहनत से सफलता प्राप्त करेंगे।

हेल्थ-आंखों में जलन, सिर दर्द या पेट के रोग हो सकते हैं। संभलकर रहें।

ऑनलाइन होंगे देवस्थान विभाग के मंदिर

जयपुर। (योगेश भावरा) देश में जहां तिरुपति तिरुमाला, सत्य साईंबाबा, केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे मंदिरों का पूरा डाटा ऑनलाइन है, राजस्थान में केवल मेंहदीपुर बालाजी मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर सहित प्रमुख मंदिर ही ऑनलाइन हैं।

अब राज्य का देवस्थान विभाग एवं राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल मिलकर देवस्थान विभाग के मंदिरों को ऑनलाइन करने की योजना पर काम कर रहा है, इसके लिए मंदिर प्रबंधकोंं को बेवसाइट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
6 हजार से अधिक हैं मंदिर

राज्य में देवस्थान विभाग के अन्तर्गत बनाए गए राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल को राज्य के मंदिरों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रन्यास मंडल यह कोशिश कर रहा है कि राज्य के प्रमुख मंदिरों की कम से कम चरणबद्ध तरीके से बेवसाइट बनाकर जानकारी डाली जाए। प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन को इसके लिए पत्र भेजे गए हैं कि वे अपने मंदिरों के लिए बेवसाइट बनाने का काम करें। अगर प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत आने वाले मंदिरों का डाटा देखेंं तो जयपुर संभाग को दो भागों में बांटा गया है।

अकेले राजधानी जयपुर में 1162 मंदिर हैं, दौसा में 56, जयपुर संभाग के दूसरे भाग में झुंझुनूं जिले में 137, सीकर में 169, अलवर में 266 मंदिर हैं। भरतपुर संभाग के जिलों में भरतपुर में 316, सवाईमाधोपुर में 111, करौली में 94, धौलपुर में 47 मंदिर हैं। जबकि जोधपुर संभाग के जिलों मेंं जोधपुर में 485, पाली में 338, बाड़मेर में 58, जालौर में 125 मंदिर, सिरोही में 218 और जैसलमेर में 76 मंदिर हैं। उदयपुर संभाग के उदयपुर जिले में 531, चित्तौडग़ढ़ में 95, प्रतापगढ़ में 43, राजसमंद में 50, कोटा संभाग में कोटा जिले में 320, बंूदी में 129, झालावाड़ में 87, बारां में 75 मंदिर हैं। जबकि अजमेर संभाग के जिलों में अजमेर में 327, नागौर में 167, टोंक में 63, और भीलवाड़ा में 114 मंदिर हैं। ऋ षभदेव में 11, डूंगरपुर में 50 और बांसवाड़ा में 74 मंदिरों को मिलाकर कुल 6484 मंदिर राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत रजिस्टर्ड हैं।
केवल बड़े मंदिर ही वेबसाइटों पर 

जयपुर में गोविंददेवजी और मोतीडूंगरी जैसे प्रसिद्ध मंदिर हैं तो मेहंदीपुर बालाजी, श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा, करौली का कैलादेवी मंदिर, राणी दादी मंदिर झुुंझुनूं, खाटूश्याम मंदिर जैसे कुछ बड़े मंदिरों की ही वेबसाइटें हैं। जिनसे पर्यटक राजस्थान के प्रमुख मंदिरों के बारे में जानकर अपने यात्रा शेडयूल में शामिल कर लेते हैं किन्तु अन्य मंदिरों की जानकारी ऑनलाइन मिलना संभव नहीं है। इसलिए अब देवस्थान विभाग इस योजना पर काम कर रहा है कि मंदिरों का ऑनलाइन डाटा इक_ा किया जाए। राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास मंडल की वेबसाइट पर केवल मंदिरों की सूची और नाम पते ही हैं।
अधिकांश छोटे मंदिरों में आर्थिक अभाव

हालांकि देवस्थान विभाग की यह भी परेशानी है कि अधिकांश मंदिरों में आर्थिक संसाधनों का अभाव है। ऐसे में इन मंदिरों को वित्तीय सहायता पहली प्राथमिकता है किन्तु वित्तीय सहायता देना हर मंदिर के लिए संभव नहीं है।

देवस्थान विभाग के मंत्री राजकुमार रिणवा एवं राजस्थान प्रन्यास मंडल के चेयरमैन एसडी शर्मा ने अधिकारियों के साथ इस पर मंथन किया है कि किस तरीके से इन मंदिरों को संजीवनी दी जाए और इनमें आर्थिक संसाधन जुटाए जाएं।

यह भी जानकारी नहीं कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति 

राज्य सरकार को अभी तक यह भी नहीं पता है कि किस मंदिर के पास कितनी संपत्ति है और किस मंदिर में ज्यादा संसाधन हैं और किस मंदिर में कम। राज्य सरकार को इन मंदिरों का कैटेगराइजेशन करना होगा और इनमें उपलब्ध संसाधनों का ब्यौरा जिला कलेक्टरों एवं अन्य एजेंसियों के माध्यम से जुटाना होगा तभी मंदिरों के संसाधनों की जमीनी हकीकत का पता चल पाएगा।

राज्य के बाहर के मंदिरों की पूरी जानकारी नहीं

राजस्थान सरकार के प्रन्यास मंडल के अन्तर्गत मथुरा, वृंदावन, आगरा, लखनऊ, हाथरस, सहित अन्य शहरों में बने मंदिरों की संपत्तियां भी है, किन्तु इनके बारे में पूरी जानकारी ही देवस्थान विभाग के पास नही है, तो संसाधनों के बारे में और मंदिरों की जमीनों के बारे में भी डाटा एकत्रित करना टेढ़ी खीर है। इसके लिए बड़ी मैनपॉवर की जरूरत है, जो पहले से ही मंदिरों में नहीं है।

लकी हो सकता है शुक्रवार, इन 8 राशियों के लिए अच्छा रहेगा दिन

वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए शुक्रवार लकी साबित हो सकता है। इन राशि वालों को दिनभर सितारों का साथ मिलेगा। जिससे नौकरीपेशा और बिजनेस करने वाले ज्यादातर लोगों के काम पूरे हो जाएंगे। आयुष्मान योग और सूर्य-चंद्रमा की अच्छी स्थिति के कारण ऐसा होगा। मेष, सिंह, धनु और मकर राशि वाले लोगों को संभलकर रहना चाहिए। विवाद, नुकसान और फालतू खर्चे के योग बन रहे हैं

 

मेष - पॉजिटिव -धैर्य और साहस के साथ आपको बड़ी सफलताएं मिल सकती है। पुराने काम निपट सकते हैं। आप अपनी कोशिशों में सफल रहेंगे। आपको कई तरह के नए अनुभव मिल सकते हैं। रोमांस के मौके मिलेंगे। अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, तो हर तरह के संबंधों में सुधार आएगा। आज आप अपनी बातों से उन लोगों को मना लेंगे जो आपसे नाराज थे। खरीददारी करते समय ज्यादा खर्चा हो सकता है। यात्रा की योजना भी बन सकती है। सेहत पहले से थोड़ी ठीक रहेगी।


नेगेटिव -आप बड़े सपने देखने और दूर तक पहुंचने में संकोच न करें। किसी दायरे और किसी लिमिट को एक्सेप्ट न करें। एक टेंशन खत्म होगा, तो दूसरा शुरू हो सकता है। परिवार, ऑफिस और बिजनेस में परेशानियों वाला समय हो सकता है। वाहन से सावधान रहना चाहिए। दुर्घटना जैसी स्थिति भी बन सकती है। सावधान रहें। सोचे हुए काम पूरे होने में समय लगेगा।


क्या करें और क्या नहीं -काजु खाएं।


लव-जीवनसाथी से अनबन होगी। पुरानी बातों में उलझने से बचें। छोटी-छोटी गलतियों को इग्नोर करें।

करियर-नौकरीपेशा लोगों का समय ठीक है। बिजनेस में फायदा हो सकता है। स्टूडेंट्स के लिए समय अच्छा है। करियर में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन भी मिलेगा। 

हेल्थ-सेहत में उतार-चढ़ाव रहेंगे। चोट और दुर्घटना का डर रहेगा। सावधान रहें।

2.

वृष - पॉजिटिव -आज आपके एक्टिव होने का समय है। बिजनेस या कार्यक्षेत्र में जमकर कॉम्पिटीशन रहेगा। मेहनत, बुद्धि और वाणी के साथ-साथ हर तरह की पूरी कोशिश करनी पड़ेगी। नौकरी-धंधे में प्रगति होगी। परिवार के साथ समय बीतेगा। पारिवारिक जीवन की समस्या निपट जाएगी। किसी को अपनी बात समझाने में आप बहुत हद तक सफल रहेंगे। आपको कुछ ऐसी समस्याओं का समाधान खोजने में भी मदद मिलेगी, जो कठिन लग रही थी। दूसरों की समस्याएं सुनने पर आप भावुक हो सकते हैं। अधूरा काम निपटाने से आपको फायदा होगा। नए संबंधों की शुरुआत हो सकती है। रोजमर्रा के काम निपटते जाएंगे। कुछ खास मामलों में भी नतीजे मिलने तक धैर्य रखें। दाम्पत्य जीवन ठीक है।


नेगेटिव-कुछ काम पूरे होते-होते रुक भी सकते हैं। आप किसी को खुश करने के लिए ज्यादा पैसा भी खर्च कर सकते हैं। खुद को समय नहीं दे पाने से परेशान रहेंगे। कुछ कामों में आपका मन नहीं लगेगा।


क्या करें और क्या नहीं -खाना खाने से पहले 5 निवाले गाय के लिए निकालें।


लव-वृष राशि वाले लोगों के लिए समय ठीक है। प्रेम संबंधों में कुछ नयापन आ सकता है। 

करियर-नौकरी-धंधा आपके लिए अनुकूल रहेगा। निवेश करने और नई नौकरी की बात करने के लिए समय अच्छा है। नए जॉब के लिए भाग-दौड़ कर लें। नतीजों के लिए धैर्य रखें।

3.

मिथुन - पॉजिटिव -आप खास मामलों में फैसले लेने से पहले किसी अनुभवी की सलाह जरूर लें। आपको मेहनत बहुत करनी पड़ेगी। पैसों के कई मामले निपट जाएंगे। काम-धंधे में सफल रहेंगे। सामूहिक ढंग से किए जाने वाले कामकाज के लिए दिन अच्छा रहेगा। मेहनत के बावजूद आराम करने का मौका भी मिलेगा। जहां तक हो सके, मददगार, विनम्र और सहयोगपूर्ण बने रहें। अपने पैसों से जुड़े कागजों की जांच कर लें। कामकाज से संतुष्ट रहेंगे। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अच्छा है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। आपको कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है।


नेगेटिव -घर की मरम्मत या सजावट पर कुछ पैसा भी खर्च हो सकता है। अनजाने में ही या फालतू ही आप किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति को नाराज कर सकते हैं। सावधान रहें। परिवार में किसी से अनबन भी हो सकती है।


क्या करें और क्या नहीं -पिस्ता खाएं।


लव-विवाह संबंधी बातचीत हो सकती है। प्रेमियों के लिए समय अच्छा है।

करियर-नौकरीपेशा लोगों के लिए अच्छा समय है। बिजनेस करने वाले लोगों को फायदा होगा। स्टूडेंट्स को मेहनत का फायदा मिलेगा।

हेल्थ-खाने-पीने पर ध्यान दें। पुराना रोग भी आपको परेशान करेगा।

कन्या - पॉजिटिव -दिन अच्छा है। चंद्रमा गोचर कुंडली के लाभ भाव में रहेगा। मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी और उसका फल भी मिलेगा। आप जो भी फैसले करेंगे उनका असर लंबे समय तक रहेगा। अपना नजरिया सही रखेंगे तो हर समस्या से निपटने में सफल हो जाएंगे। खुद पर भी भरोसा रखें। कैसी भी स्थिति बने, धीरे-धीरे सब आपके फेवर में हो जाएगा। अपने निजी और पारिवारिक जीवन पर थोड़ा ध्यान दें। बिजनेस करने वाले लोगों को फायदा होगा। नौकरी की परेशानियां भी खत्म हो सकती हैं। परिवार के सदस्यों से सहयोग मिलेगा।


नेगेटिव -दुश्मन आपके खिलाफ कुछ पुराने मामले उठा सकते हैं। आप थोड़े परेशान भी रहेंगे। विरोधियों के सामने आप लगभग अकेले ही रहेंगे। रहन-सहन के स्तर में कुछ बदलाव के बारे में चिंता हो सकती है। सजावटी वस्तुओं पर भी पैसा खर्च होगा।


क्या करें और क्या नहीं -अपने पर्स या पैसे रखने के स्थान पर हल्दी और केसर मिलाकर छिटें


लव-पति-पत्नी के बीच कुछ गलतफहमी भी हो सकती है।

करियर-बिजनेस करने वाले लोगों को फायदा होगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी समय अच्छा है। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा रहेगा। आपको मेहनत का फल भी मिलेगा।

हेल्थ-सेहत ठीक रहेगी। मौसमी बीमारियों से बचकर रहें

तुला - पॉजिटिव -आज आप जितना सोचेंगे और मेहनत करेंगे, उतने काम बनेंगे। सोचे हुए काम पूरे हो जाएंगे। आपके पास कई तरह के काम रहेंगे। महत्वपूर्ण कामकाज की अलग सूची बना लें और उनको निपटाने की पूरी कोशिश करें। कुछ काम से कंपनी या आपकी बिजनेस फर्म को बड़ा फायदा हो सकता है। लोगों से मिलने में और सामाजिक कार्यक्रमों में आप बहुत सफल रहेंगे। पार्टनर के साथ अच्छा टाइम बीतेगा। आप अपने व्यवहार और कोशिशों से दूसरों के साथ जितना तालमेल बनाकर चलेंगे, उतने ही सफल हो जाएंगे। लेखन, कला, चिकित्सा, कानून क्षेत्रों के लोग खासतौर पर सफल रहेंगे। पैसों से जुड़े काम पूरे हो जाएंगे। आत्मविश्वास बढ़ेगा। सेहत पहले से ठीक रहेगी। कोई पुराना दोस्त भी मिल सकता है। दाम्पत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी।


नेगेटिव -किसी न किसी बात के कारण मानसिक उथल-पुथल रहेगी। आप मन ही मन किसी से दुश्मनी भी बढ़ा सकते हैं। किसी के काम या आदतों को लेकर आपको कोई गलतफहमी भी हो सकती है।


क्या करें और क्या नहीं -सिर और पैर के पंजों में थोड़ा-सा तेल लगाएं।


लव -दाम्पत्य सुख अच्छा रहेगा। लव लाइफ के लिए भी समय ठीक है।

करियर-बिजनेस के लिए भी समय अच्छा है। सोच-समझकर निवेश करें। अनुभवी लोगों से सलाह लेकर ही कोई बड़ा काम करें। स्टूडेंट्स को सफलता मिलेगी। 

हेल्थ-आपकी सेहत पहले से ठीक रहेगी।

वृश्चिक - पॉजिटिव -आपके लिए दिन अच्छा रहेगा। जीवन के लगभग हर पहलू को लेकर आपकी सोच सकारात्मक रहेगी। पैसों का कोई मामला है, तो वह सुलझने लगेगा। करियर में आपके साथ कुछ अच्छा भी होगा। अपने से जुड़े हर पहलू पर विचार करें। दूसरों के साथ मिलकर कोई काम करना होगा। किसी की मदद भी करनी पड़ेगी। दोस्त और साथ काम करने वाले लोग आपके लिए सकारात्मक रहेंगे। पैसों और फायदों के लिए दिन अच्छा है। ऑफिस में अधिकारियों का मूड ध्यान में रखकर कोई भी काम करें। आप फायदे में रहेंगे। स्टूडेंट्स को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलेगी।


नेगेटिव -फालतू खर्चा भी कर सकते हैं। सावधान रहें। आज आपकी सेहत में भी थोड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। परिवार में किसी से विवाद भी हो सकता है। दाम्पत्य जीवन ठीक रहेगा। किसी बड़े काम की शुरुआत टाल दें।


क्या करें और क्या नहीं -व्हीकल धुलवाए और ऑयलिंग करें।


लव-पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा। अविवाहित प्रेमियों के लिए समय सामान्य रहेगा।

करियर-आर्थिक स्थिति भी अनुकूल रहेगी। बिजनेस के लिए समय अच्छा रहेगा। स्टूडेंट्स को सफलता मिलेगी। आगे बढ़ने के मौके भी मिल सकते हैं।

हेल्थ-पुराना रोग परेशान कर सकता है। मसालेदार भोजन से बचें। आंख या मुंह के रोग हो सकते हैं।

धनु - पॉजिटिव -मिला-जुला दिन रहेगा। आप सकारात्मक और उत्साहित रहेंगे। नए अनुभव मिलेंगे। लाइफ में होने वाले किसी बड़े बदलाव के संकेत मिल सकते हैं। जो भी होगा, आपके लिए अच्छा रहेगा। आप हर बात शांति से सुनें और उसी तरह सारे काम निपटा लें। रुके हुए काम भी पूरे हो जाएंगे। आप कुछ नए काम भी शुरू हो सकते हैं। परिवार में खुशी का माहौल भी रहेगा। परिवार के साथ समय भी बीतेगा। दोस्त या रिश्तेदार से कोई गिफ्ट मिल सकता है। किसी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।


नेगेटिव -थोड़ा सावधान रहें। किसी भी काम में अति करने से बचें। किसी काम या विचार के कारण ऑफिस में परेशानी हो सकती है। बॉस या अधिकारी आज आपसे किसी बात पर नाराज हो सकते हैं। साथ काम करने वाले कुछ लोग भी आपकी मदद नहीं करेंगे। इसके लिए खुद को तैयार रखें। खर्चा बढ़ सकता है। आत्मविश्वास भी डगमग हो सकता है।


क्या करें और क्या नहीं -धन लाभ की कामना से गणेश मंदिर के दरवाजे पर पीले चावल रखें।


लव-लव लाइफ रोमांचक होगी। दाम्पत्य जीवन भी सुखमय रहेगा। पार्टनर से भावनात्मक सहयोग मिलेगा।

करियर-बिजनेस करने वाले लोगों को फायदा होगा। इस राशि के स्टूडेंट्स को थोड़ा तनाव भी हो सकता है। थोड़े परेशान भी रहेंगे।

हेल्थ-एलर्जी से परेशान रहेंगे। नींद की कमी और सिर दर्द से परेशान रहेंगे।

मकर - पॉजिटिव -कोई बड़ा और महत्वपूर्ण काम सफलता से निपट जाएगा। अपनी बात से दूसरों को सहमत कराने में भी आप पूरी तरह सफल रहेंगे। महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए दिन अच्छा है। प्रेमी, दोस्त, जीवनसाथी हर परिस्थिति में आपका साथ देंगे। कहीं से रिश्तों की बात भी चल सकती है। आपकी सेहत पहले से थोड़ी ठीक रहेगी। जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बीतेगा।


नेगेटिव -निजी मामले आपके दिमाग पर हावी हो सकते हैं। थोड़ी देर अकेले में विचार करके उन्हें निपटाने की दिशा में विचार करें। समस्याओं का समाधान मिल सकने की संभावना कम है। कोई नया काम हाथ में न लें। आपके विरोधी भी सक्रिय हो सकते हैं। भाग-दौड़ बहुत होगी। रिश्तों पर कोई फैसला न करें। आज आप किसी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा न करें।


क्या करें और क्या नहीं -अंकुरित अनाज खाएं।


लव-मकर राशि के लोगों के लिए समय ठीक है। अपने दिल की बात आप किसी से कहना चाह रहे हैं तो कह सकते हैं।

करियर-बिजनेस के लिए समय सामान्य है। जोखिम भरे निवेश करने से बचें। इंटरव्यू में सफलता मिल सकती है।

हेल्थ-सेहत भी ठीक रहेगी। ज्यादा परेशानियां नहीं रहेगी।

 

कुंभ - पॉजिटिव -भविष्य के लिए कोई योजना बना लें। आप अपनी सोच का दायरा भी बढ़ाएं। बड़े नजरिए के साथ आप अच्छा महसूस करेंगे। आप हर स्थिति में समझौते का मन बनाकर रखें और विवादों का निपटारा बातचीत से कर लें। प्रेमी और जीवनसाथी के साथ आज खूब निभेगी। कई लोगों से मुलाकात होगी। इससे आपको फायदा होगा। कोई प्रेम प्रसंग भी शुरू हो सकता है। कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। रुके हुए कामकाज भी पूरे हो सकते हैं। ऑफिस में समय सामान्य रहेगा। माता-पिता से पूरा सहयोग भी मिलेगा।


नेगेटिव -अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। आपका दिमाग विचारों में उलझा रहेगा। कुछ मामलों में आप सच्चाई से दूर रहेंगे। किसी भी स्थिति में अति करने से बचें। बिजनेस में भी किसी तरह का नुकसान हो सकता है। आप भावुक होकर कोई भी फैसला न लें।


क्या करें और क्या नहीं -गुनगुने पानी से गरारे करें।


लव-अपने दिल की बात बताने के लिए समय अच्छा है। आप पार्टनर से दिल की बातें शेयर करेंगे। इससे आपको भावनात्मक संतुष्टि मिलेगी।

करियर-सुस्ती और आलस्य से कार्यक्षेत्र पर असर पड़ेगा। इंटरव्यू की तैयारी कर लें। सफलता भी मिलेगी।

हेल्थ-ब्लड प्रेशर के रोगियों को सावधान रहना होगा। पुरानी परेशानियां रहेंगी।

 

मीन - पॉजिटिव -किस्मत का साथ मिलेगा। एक्स्ट्रा पैसा कमाने, नए लोगों से मिलने और पुराने दोस्तों से रिश्ते ताजा करने के मौके मिलेंगे। आपके लिए सोच-विचार और प्लानिंग का दिन है। परेशानियों से निपटने में सफल रहेंगे। बिजनेस में अच्छी-खासी सफलता भी मिल सकती है। महत्वपूर्ण और समर्थ लोगों से मुलाकात हो सकती है। आप थोड़ा ज्यादा बोलने के मूड में भी रहेंगे। विपरीत लिंग के लोगों के साथ संबंधों में सुधार होगा। नए विचार मन में आएंगे। आपका मूड रोमांटिक है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा। मांगलिक कार्यक्रम में जाने के योग है।


नेगेटिव -नए विषयों पर बात शुरू हुई तो आप बातों में ही उलझ सकते हैं। जिम्मेदारियों को लेकर सावधान रहें। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा न करें। आपका मन काम में कम और बातचीत में ज्यादा रहेगा। आप भावुकता में आकर किसी न किसी तरह की गलती भी कर सकते हैं।


क्या करें और क्या नहीं -आज कोई खट्टी चीज न खाएं।


लव -जीवनसाथी के साथ मामूली कहा-सुनी हो सकती है। संबंध फिर सामान्य भी हो जाएंगे।

करियर-पैसे के मामलों में किसी पर भरोसा न करें। साझेदारी में नुकसान हो सकता है। स्टूडेंट्स को कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

हेल्थ-पिता की सेहत की चिंता रहेगी। इस राशि के लोग भी मौसमी बीमारियों से परेशान रहेंगे।

रात में नहीं आती है नींद, तो यह उपाय आजमाएं

अमूमन फेंगशुई के ड्रैगन, कछुए और सिक्कों को देखा है। और इन सभी के बारे में यह भी सुना होगा। अगर कोई आपको फेंगशुई के पौधे उपहार में देता है, तो वह आपके घर के लिए भाग्यशाली माना जाता है। और फेंगशुई के अनुसार कछुए को घर में रखना आपकी प्रगति व स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभ संकेत होता है।

घर के कोने में सोने की जगह बनायें: फेंगशुई के तरीके पूरी तरह से जीवन का दर्पण होती हैं। फेंगशुई के अनुसार, आपके सोने का स्थान तय करता है कि आपका अगला दिन कैसा बीतेगा। इसलिए आपके बेडरूम का संभावित स्थान आपके घर का कोना होना चाहिए।

चीन में लोग इस बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं और उनका विश्वास है कि ऐसा करने से भरपूर नींद आती है और इस प्रकार से आप स्वस्थ शरीर पा सकते हैं।

घर के आस-पास पौधे लगायें: फेंगशुई का मानना है कि अपने घर के आसपास पेड़ लगाने से आप स्वस्थ जीवन और सकारात्मकता पा सकते हैं। लेकिन अगर आप पेड़ नहीं लगा सकते तो अपने घर में लकड़ी से बने बड़े फर्नीचर को जरूर रखें।

तीन टांगों वाला मेढक: फेंगशुई में तीन टांगों वाला मेढक बहुत भाग्यशाली माना जाता है। मुंह में सिक्के लिए हुए तीन टांगों वाले मेढक की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है। इसे घर के भीतर मुख्य दरवाजे के आसपास रखना चाहिए।

जूतों को बाहर ही रखें: फेंगशुई के अनुसार आपको जूतों के साथ घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यह माना जाता है कि जूते अपने साथ पूरे दिन की चिंता और तनाव लेकर आते हैं, और उन्हें घर के अंदर ले जाने का मतलब है, उन सभी बुरी ऊर्जा का स्वागत करना और इन बुरी एनर्जी को दूर रखने का अर्थ है अच्छा स्वास्थ्य।

घर को व्यवस्थित रखें: फेंगशुई के अनुसार इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि आपका घर व्यवस्थित रहे। खासतौर पर रात को घर को व्यवस्थित रखने से जब आप सुबह नींद से जागते हैं तो आपको चीजें आसानी से अपनी जगह पर मिल जाती हैं।

 

सुल्तान ने की थी नापाक हरकत, रानी पद्मावती हो गईं अमर पिछले दिनों 'रानी पद्मावती' का जिक्र काफी रहा।

पिछले दिनों 'रानी पद्मावती' का जिक्र काफी रहा। वह इसलिए कि वीरांगना रानी के जीवन पर निर्देशक संजय लीला भंसाली फिल्म बना रहे हैं। फिल्म की शूटिंग के दौरान निर्देशक पर इतिहास से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे। यह तो बात हुई बीते दिनों की।

लेकिन रानी पद्मावती कौन थीं? दरअसल रानी पद्मावती चित्तौड़ की रानी थी। राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी रानी पद्मावती बेपनाह खूबसूरत थीं, जिनका विवाह चित्तौड़ के राजा रतन सिंह से हुआ था।

इतिहास में दर्ज है कि 12वीं-13वीं सदी में दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी था। यह सुल्तान वीरांगना रानी की खूबसूरती पर मोहित था। किंवदंती है कि खिलजी ने आईने में रानी को देखा था और वो उन पर मोहित हो गया था।

पद्मावती को हासिल करने के लिए खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। और रानी पद्मावती के पति राजा रतन सिंह को बंधक बना लिया था। और पद्मावती की मांग करने लगा।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि इसके बाद चौहान राजपूत सेनापति गोरा और बादल ने खिलजी को हराने के लिए संदेश भिजवाया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, 'अगली सुबह पद्मावती उसके हवाले कर दी जाएगी। इसके लिए अगली सुबह 150 पालकियां खिलजी के शिविर की ओर भेजी गईं।'

पालकियों को वहीं रोक दिया गया। जहां रतन सिंह बंदी बनाए गए थे। इसके बाद पालकियों से सशस्त्र सैनिक निकले और रतन सिंह को छुड़ा कर ले गए।

खिलजी को जब इस बात का पता चला तो वह बौखला गया। उसने चित्तौड़ किले पर चढ़ाई कर दी। लेकिन वह किले के अंदर न जा सका। तब खिलजी ने किले की घेराबंदी कर दी। समय बीतता गया। किले में रहने वाले लोगों को राशन की समस्या आ गई।

 तब हार मान कर रतन सिंह ने द्वार खोलने का आदेश और खिलजी से लड़ते हुए मारे गए। इसके बाद चित्तौड़ की महिलाओं ने आग जलाई और अपनी इज्जत बचाने के लिए रानी पद्मावती के साथ जौहर किया था।

 

आखिर इंसान क्रोध में क्यों चीखते-चिल्लाते हैं?

एक सिद्ध बौद्ध भिक्षु अपने शिष्यों के साथ नगर भ्रमण पर निकले। उन्होंने देखा कि वहां एक ही परिवार के कुछ लोग आपस में बात करते हुए एक दूसरे पर क्रोधित हो रहे थे।

यह दृश्य देखकर एक शिष्य से रहा नहीं गया। उसने तुरंत बौद्ध भिक्षु से पूछा क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं? शिष्य कुछ देर सोचते रहे, तभी एक शिष्य ने उत्तर दिया क्योंकि हम क्रोध में शांति खो देते हैं । पर जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने की क्या जरूरत है। जो कहना है वो आप धीमी आवाज में भी तो कह सकते हैं।'

बौद्ध भिक्षु ने फिर से प्रश्न किया तब कुछ और शिष्यों ने भी अपने-अपने विवेक से उत्तर देने का प्रयास किया पर इस जवाब से लोग संतुष्ट नहीं हुए।

 तब बौद्ध भिक्षु ने समझाया कि 'जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं ऐसी परिस्थिति में वह एक दूसरे पर बिना चिल्लाए बात नहीं सुन सकते उनको क्रोध आएगा और उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी इसलिए वह तेजी से चीखते चिल्लाते हैं।'

संक्षेप में:

जब दो लोग प्रेम में होते हैं तब वे चिल्लाते नहीं बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं, क्योंकि उनके दिल करीब होते हैं, उनके बीच की दूरी नाम मात्र की रह जाती है।

और जब वे एक दूसरे को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं तो वे बोलते भी नहीं, वे सिर्फ एक दूसरे की तरफ एक टक देखते रहते हैं।

 

जन्म कुंडली से पता कीजिए दुर्घटना योग, यहां हैं समाधान

सड़क पर दौड़ते वाहनों के बीच, दुर्घटना कभी भी हो सकती है। ऐसा जन्म कुंडली में दुर्घटना योग के कारण भी हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार दुर्घटना का योग हर व्यक्ति के साथ नहीं होता। यह व्यक्ति विशेष की कुंडली पर निर्भर करता है।

कोई भी व्यक्ति अपनी कुंडली के जरिए यह जान सकता है कि उसके साथ भविष्य में कभी कोई दुर्घटना हो सकती है या नहीं?

- यदि लग्न या दूसरे भाग मे राहु ग्रह और मंगल ग्रह हो तो ये मिलकर दुर्घटना या किसी भी घटना के योग बनते हैं।

- यदि लग्न में शनि या मंगल दोनो में से कोई भी स्थित हो तो ये अशुभ होने के संकेत देते हैं।

- कुंडल में यदि शनि ग्रह और मंगल ग्रह दोनों मिलते हैं तो दुर्घटना होने का योग बनता है।

- तीसरे भाव में अगर शनि या मंगल ग्रह किसी ने भी अपनी स्थिति बना रखी हो तो ये हानि के संकेत देते हैं।

दुर्घटना योग का ऐसे करें समाधान

- हनुमान मंदिर में मिट्‍टी के दिये मूर्ति के सामने जलाएं। जिसमें चमेली के तेल का उपयोग किया गया हो।

  नारियल पर मौली धागा बांधकर हनुमान जी को चढ़ाएं। हनुमान जी की पूजा के दौरान लाल पुष्प का प्रयोग करें।

- घर की छत पर लाल झंडा फहराएं । बाद में एक नींबू पर लाल सिंदूर लगा कर उस नींबू को चौराहे पर फेंक दें।

 

 

धर्म की दुनिया में यहां होते हैं हैरतंगेज चमत्कार

कहते हैं धर्म में तर्क की कोई जगह नहीं होती। यह सच भी है। क्योंकि धर्म पूरी तरह से आस्था, विश्वास से जुड़ा हुआ है। हालांकि यह अलग बात हैं आस्था के इस रूप कई उपाय आजमाए जाते हैं। जो काफी हद तक वैज्ञानिक पहलुओं पर खरे उतरते हैं।

हम विज्ञान के युग में रहते हैं। जहां आस्था के रूप में ऐसे कई घटनाक्रम अमूमन होते रहते हैं। कुछ घटनाक्रम दशकों पहले हुए, जिनका जिक्र समय-समय पर किया जाता रहा है। क्या ऐसा ही कुछ भविष्य में होगा? यह कोई नहीं जानता। लेकिन, दशकों पहले क्या हुआ था, उसके बारे में जान सकते हैं।

- 22 साल पहले यानी 21 सितंबर 1995 को हुई थी। एक ऐसी घटना, जिसके सामने विज्ञान भी निरुत्तर है। हुआ यूं कि इस दिन भगवान श्री गणेश दूध पी रहे थे। भक्त उन्हें चम्मच से दूध पिला रहे थे। हो सकता है यह दृश्य हममे से कई लोगों ने देखा भी हो!

आस्था से जुडे़ इस पूरे घटनाक्रम को अगले दिन यानी 22 सितंबर 1995 को दुनियाभर के हर दैनिक अखबार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। आस्था के इस रूप को कुछ विशेषज्ञों ने मास हाइपनोसिस थ्योरी नाम दिया। जिसे 'साइको-मैकेनिक रिएक्शन' नाम से भी जानते हैं। यह तो बात हुई बीते समय की लेकिन वर्तमान में ऐसा ही चमत्कार देख सकते हैं। उज्जैन (मप्र) स्थित भगवान काल भैरव मंदिर में भगवान कालभैरव का रोज मदिरापान करते हैं। भक्त उन्हें एकटक देखते हैं। मदिरा का प्याला खाली हो जाता है। आस्था से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम साक्षात् देखा जा सकता है।

 

रईस और काबिल बना सकती हैं देवी सरस्वती की ये 5 बातें

कहते हैं रईस तो हर कोई बन सकता है, लेकिन काबिल बहुत कम होते हैं। यदि आप रईस और काबिल दोनों बनने की ख्वाहिश रखते हैं तो मां सरस्वती की आराधना नियमित करें। क्यों कि देवी सरस्वती विद्या और संगीत की देवी हैं। जब यह दोनों विद्याएं मां के भक्तों को मिल जाती हैं, तो वह रईस और काबिल दोनों बन सकते है्। इनके अलावा...

- विद्या मिलने पर कोई व्यक्ति हुनरवान बनता है। हुनर जब आता है, तो पैसा आता है। इस तरह वह रईस बन जाता है। और दुनिया उसे एक काबिल इंसान के तौर पर पहचानती है।

- देवी सरस्वती की वंदना हम बचपन से करते हैं। जिन पर मां सरस्वती की कृपा दृष्टि रहती है वह इंसान विद्या और संगीत में निपुण हो जाता है।

- दुनिया में अच्छे विचार और मधुर वाणी दोनों एक साथ बहुत कम लोगों को ही मिलती है। जो लोग देवी के भक्त होते हैं, उन्हें यह सहज रूप में मां कि आशीर्वाद के रूप में मिल जाती है।

- मां की यदि अनुपम कृपा बरस जाए तो भक्त अमर भी हो सकता है। इसका प्रमाण हैं। आल्हा जो आज भी मैहर की शारदा भवानी के मंदिर में सबसे पहले पूजा कर और आशीर्वाद लेते हैं।

- मां सरस्वती की कृपा के बारे में आप इसी बात से जान सकते हैं कि महाकवि कालिदास, वरदराजाचार्य, वोपदेव आदि मंद बुद्धि के लोग सरस्वती उपासना के सहारे उच्च कोटि के विद्वान् बने थे।

 

इन 8 आदतों को सुधार कर, कीजिए कई परेशानियों को दूर

आदतें जाने-अनजाने में ही सही रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र में ऐसी ही कुछ आदतों की सुधारने की सलाह दी गई है। ऐसी ही 9 आदतें बताईं गई हैं।

ये नौ आदतें नवग्रहों के सम्मान से संबंधित हैं। यदि आप अपनी जिंदगी में इन आदतों को आत्मसात करते हैं, तो आपका घर भी संवर जाता है।

- थूकने की आदत: इसे तुरंत सुधारें क्योंकि यह आदत आपके यश, सम्मान और प्रतिष्ठा को कम करती है। थूकने का जहां सही स्थान हैं यानी वॉश बेसिन वहीं थूकें, हर जगह नहीं।

- झूठे बर्तन छोड़ने की आदत: यदि ऐसा करते हैं तो संभल जाएं। क्योंकि यह आदत आपकी सफलता में बाधक होती है। यदि बर्तन को साफ रखते हैं तो चंद्र और शनि हमेशा खुश रहेंगे।

- अतिथि को पिलाएं स्वच्छ जल: अतिथि भगवान का अंश होता है। इसलिए अतिथि को स्वच्छ जलपान ही कराएं। ऐसा करने पर राहु का दुष्प्रभाव आप की राशि पर नहीं पड़ता है। ऐसे में आपको अचानक आने वाले संकटों से मुक्ति मिले

- घरेलू पौधे में नियमित पानी डालें: यदि घर की परेशानियां दूर कर, सुकून चाहते हैं तो पौधों में पानी नियमित रूप से डालें। ऐसा करना बुध, सूर्य और चन्द्रमा का सम्मान करना है। जब यह ग्रह खुश रहते हैं तो आपको परेशानियां नहीं छूतीं।

-चप्पल, जूते, मोज़े इधर-उधर न फेंकें: इस बात पर जरूर गौर कीजिए यदि ऐसा करते हैं तो आपके शत्रु आपको परेशान करेंगे। यदि आप इन्हें व्यवस्थित रखते हैं तो राहु और शनि प्रसन्न रहेंगे। तब आपके घर और जिंदगी में ऐसी समस्या नहीं आएगी।

- नहाते समय पैरों की करें सफाई: नहाते समय अपने पैरों को अच्छी तरह से धोयें, कभी भी बाहर से आयें तो पांच मिनट रुक कर मुंह और पैर धोयें। ऐसा करने पर चिड़चिड़ापन कम होगा, दिमाग की शक्ति बढे़गी और क्रोधधीरे-धीरे कम होने लगेगा। और जीवन में स्वाभाविक है आनंदमय बीतेगा।

- खाली हाथ घर न आएं: ऑफिस, दुकान, बिजनेस, यात्रा या अन्य जगह से जब घर आएं तो कुछ न कुछ लेकर आएं। यदि खाली हाथ आते हैं तो लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। ऐसा ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है। और कुछ न कुछ लेकर आते हैं तो घर में खुशियों का प्रवेश होता है। साथ ही घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है।

 

महाभारत प्रसंग: इन 6 दोषों के कारण होती है उम्र कम

महाभारत के प्रसंग में विदुर का जिक्र किया गया है। कहा जाता है कि विदुर ने महाभारत के युद्ध को रोकने के लिए कई कोशिशें की थीं। लेकिन वे असफल रहे थे। महात्मा विदुर की विदुर नीति भी काफी विख्यात हुई। एक बार धृतराष्ट्र ने महात्मा विदुर से पूछा कि मनुष्य की उम्र कम होने का क्या कारण है। इस पर विदुर ने मनुष्य की उम्र कम होने के 6 कारण बताए। उनके अनुसार ये ही वे कारण हैं जिनकी वजह से मनुष्य पूरी आयु नहीं पा सकता। आगे की स्लाइड में पढ़ें ये कारण: 

 धृतराष्ट्र:  शतायुरुक्त: पुरुष: सर्ववेदेषु वै यदा।
नाप्नोत्यथ च तत् सर्वमायु: केनेह हेतुना।।
(महाभारत)

विदुर कहते हैं-

अतिमानोअतिवादश्च तथात्यागो नराधिप।
क्रोधश्चात्मविधित्सा च मित्रद्रोहश्च तानि षट्।।
एत एवासयस्तीक्ष्णा: कृन्तन्यायूंषि देहिनाम्।
एतानि मानवान् घ्नन्ति न मृत्युर्भद्रमस्तु ते।।
 

धृतराष्ट्र विदुर से पूछते हैं कि वेदों में मनुष्य की आयु 100 साल बताई गई है तो क्यों वह पूरी उम्र तक जी नहीं पाता?इस पर विदुर ने इन 6 दोषों रुपीं तलवारों को मनुष्य की उम्र कम होने का कारण बताया
 घमंड: विदुर के अऩुसार जो व्यक्ति घमंड करता हैं और दूसरों का अपमान कर दूसरों को नीचा दिखाता है ऐसे व्यक्ति की उम्र कम होती है। ज्यादा होलने वाला: जो इंसान ज्यादा बोलता है और अपनी वाणी से किसी को भी अपशब्द बोलता है। वाणी को नियंत्रण में नहीं रखता ऐसे शख्स की आयु भी कम होती है। त्याग: जो किसी के लिए त्याग नहीं करता। दूसरों के सुख के लिए खुद दुख नहीं सहता ऐसे व्यक्ति की उम्र भी कभी बढ़ती नहीं है।
लालची: जो इंसान लालची होता है और अपना हित देखकर दूसरों का बुरा करता है ऐसे इंसान की उम्र कभी ज्यादा नहीं होती।
क्रोध: गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है। गुस्से में ही मनुष्य बड़ी गलती कर बैठता है। 
दोस्त को धोखा देने वाला: जो इंसान अपने दोस्त को धोखा देकर अपना हित साधता है ऐसा व्यक्ति कभी आगे नहीं बढ़ सकता। वह अकेला रह जाता है। 

यदि सपने में मिल जाए दैवीय शक्ति तो

कहा जाता है कि सपनों की एक खास बात यह है कि सपने में व्यक्ति मरता नहीं है। सपने में इंसान को तो कई दैवीय शक्ति भी मिल जाती हैं। वैसे सपनों के मनोविज्ञान के अनुसार सपने में यदि दैवीय शक्ति मिलती हैं तो ऐसा सपना भविष्य के लिए शुभ होता है।

सपनों की तह में जाएं तो भारतीय दर्शनशास्त्र कहता है कि सपने भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हैं। जो हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहते हैं। जब व्यक्ति नींद में होता है तो सूक्ष्म आकार होकर इंसान की आत्मा अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करती है।

मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कभी-कभी स्वप्न भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी संकेत देते हैं। स्वप्नों से भविष्य संकेत की पुष्टि कई प्राचीन ग्रंथों द्वारा होती है। ननिहाल में भरत ने एक स्वप्न देखा था जिसका परिणाम सामने आया।

त्रिजटा ने भी लंका के विध्वंस होने का स्वप्न देखा था। गौतम बुद्ध के जन्म से कुछ दिन पहले उनकी माता रानी माया ने स्वप्न में एक सूर्य सा चमकीला, 6 दांतों वाला सफेद हाथी देखा था, जिसका अर्थ राज्य के मनीषियों ने एक उच्च कोटि के जगत प्रसिद्ध राजकुमार के जन्म का सूचक बताया, जो सत्य हुआ। बाद में इसी राजकुमार ने बौद्ध धर्म की नींव रखी।

वैसे सुषुप्ति अवस्था में देखे गये स्वप्न सुबह तक याद नहीं रहते। यह आवश्यक नहीं कि स्वप्न में देखा गया सब कुछ अर्थपूर्ण हो। चिकित्सा शास्त्रियों के अनुसार जो व्यक्ति अनावश्यक इच्छाओं, चंचल भावनाओं, उच्च आकांक्षाओं और भूत-भविष्य की चिंता से अपने को मुक्त रखते हैं, वही गहरी निद्रा ले पाते हैं। गहरी नींद वाले लोगों का स्वास्थ्य अमूमन बेहतर रहता है।

महर्षि वेदव्यास ब्रह्मसूत्र के जरिये कहते हैं मस्तिष्क में पिछले जन्मों का ज्ञान सुषुप्त अवस्था में रहता है। शुद्ध आचरण वाले धार्मिक और शांत चित्त व्यक्ति के सपने, दैविक संदेशवाहक होने के कारण, सत्य होते हैं। स्वप्न भावी जीवन यात्रा से जुड़े शुभ और अशुभ प्रसंग विपत्ति, बीमारी और मृत्यु की पूर्व सूचना देते हैं।

देवी-देवताओं से इसलिए हार जाते थे दैत्य

अहंकार जिसे अंग्रेजी में ईगो भी कहते हैं। यह मुख्य वजह थी, पौराणिक समय में देवताओं से दैत्यों के हारने की। ऐसी कई हिंदू पौराणिक कहानियां हम अमूमन पढ़ते है। जिसमें दैत्य कठिन तप करते हैं। उन्हें ब्रह्माजी और शंकर जी वरदान स्वरुप कई शक्तियां देते हैं।  और इस तरह शक्तियां पाकर वह स्वयं को ईश्वर घोषित करते हैं। और वास्तविक ईश्वर की चुनौती देते हैं। वह लोगों पर अत्याचार करते थे। और जब अत्याचार की अति हो जाती तो ईश्वर कभी मानव रूप में तो कभी दिव्य रूप में स्वयं आकर इन अहंकारी दैत्यों का अंत करते थे।

पौराणिक कथाओं में ऐसी कई कहानियां हैं जो इस बात की ओर इंगित करती है कि अहंकार इंसान के अस्तिव को भी नष्ट कर सकता है। आधुनिक संदर्भ में यह बात एक तरह से सीख लेने की है  वैसे पौराणिक कहानियों के खलनायक जैसे मधु-कैटभ, हिरण्याक्ष-हिरण्याकश्यपु, रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद, राजा बालि दैत्य कुल में जन्में ऐसे कई पात्र हैं। जिनका अंत अहंकार के कारण ही हुआ था।

 

राशिफल: शनिदेव व सूर्यदेव का साथ, किस राशि पर भारी पड़ेगा शनिवार

दैनिक शुभाशुभ: 19.11.16 शनिवार चंद्र कर्क राशि व वृष नक्षत्र, भाग्यांक 5, शुभरंग हरा, शुभदिशा उत्तर, राहुकाल दिन 1:30 से शाम 3 तक।

उपाय: सभी 12 राशियों के व्यक्ति दुर्भाग्य से बचने के लिए काले शिवलिंग पर तेल का दीपक करें। 
मेष: स्वास्थ्य नरम रहेगा। व्यवसाय में मन नहीं लगेगा। धन के लेन-देन में धोखा मिलेगा। पब्लिक रिलेशन संबंधित कार्य सफल होंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा उत्तर, शुभ समय दिन में 01:30 से शाम 03:00 तक।

वृष: कार्यक्षेत्र में प्रैशर बढ़ेगा। प्रेम संबंधों के चलते करियर पर ध्यान नहीं जाएगा। समय मौज में बीतेगा। राजनीति में सक्रियता बढ़ेगी।  
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।

मिथुन: सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी। करियर में उन्नति होगी। अधिकारीगण सहयोग करेंगे। अल्टरनेटिव वर्क में समस्याएं आएंगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 1, शुभ रंग लाल, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय प्रातः 07:30 से प्रातः 09:00 तक।

कर्क: बिना कोशिश के लंबित मसले हल होंगे। टैंशन मिटेगी। कार्यक्षेत्र में अधिक श्रमवश थकान रहेगी। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव रहेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 7, शुभ रंग कबूतरी, शुभ दिशा उत्तर-पूर्व, शुभ समय प्रातः 09:00 से प्रातः 10:30 तक।

सिंह: यश बढ़ेगा। विरोधी पक्ष कमज़ोर होंगे। विपरीत स्थितियों पर जीत मिलेगी। व्यवसाय विस्तार होगा। पार्टनर संग डेट पर जाएंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 6, शुभ रंग गुलाबी, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।

कन्या: आय वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में मेहनत का लाभ मिलने से उत्साहित रहेंगे। स्टूडैंट्स की करियर एजुकेशन की समस्या हल होंगी। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 1, शुभ रंग लाल, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय प्रातः 07:30 से प्रातः 09:00 तक।

तुला: आय वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में परफैक्ट माहौल रहने से उत्साहित रहेंगे। आर्थिक दबाव के विपरीत कार्यक्षेत्र में एक्टिव रहने को महत्व देंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।

वृश्चिक: करियर हेतु चिंतित रहेंगे। सहकर्मी असहयोग करेंगे। व्यावसायिक लाभ अपेक्षाकृत कम होगा। परिस्थितियां जल्द पक्ष में होंगी। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा उत्तर, शुभ समय दिन में 01:30 से शाम 03:00 तक।

धनु: व्यावसायिक समस्या का समाधान होगा। दांपत्य सुखी रहेगा। करियर में वरिष्ठों के अनुभव से लाभ मिलेगा। बिज़नैस प्लान बनाएंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक।

मकर: रोज़गार के अवसर मिलेंगे। पर्सनल परेशानियां दूर होंगी। उत्तम धन लाभ होगा। सीनियर के दबाववश गलत काम करना पड़ेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय प्रातः 10:30 से दोपहर 12:00 तक।

कुंभ: प्रोफैशनल व पर्सनल में भेद करें। कॉन्फिडैंस में कमी आएगी। कार्यशैली लाभकारी रहेगी। एक्टिव रहने से तकनीकी मसले हल होंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय प्रातः 10:30 से दोपहर 12:00 तक।

मीन: आर्थिक विकास होगा। सम्मान बढ़ेगा। सहकर्मी सहयोग करेंगे। प्रोफैशनल घटनाक्रम में फंसे रहेंगे। हाई प्रोफाइल लोगों के साथ पार्टी करेंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक।

खास बर्तनों में करें भोजन, छूटेगा रोगों का साथ मिलेगा श्री और समृद्धि का साथ

प्राचीनकाल से लेकर अब तक भोजन के लिए उपयोग होने वाले बर्तनों में काफी बदलाव आया है। पहले स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बर्तनों का चुनाव किया जाता था लेकिन अब फैशन क्या चल रहा है, इस ओर ध्यान दिया जाता है और उसी के अनुरूप रसोई के लिए बर्तन खरीदें जाते हैं। आज अधिकतर बर्तन एल्युमिनियम या प्लास्टिक के होते हैं। जो न तो स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं और न ही शास्‍त्रों में अच्छे माने गए हैं। आईए जानें किन बर्तनों में खाना खाने से छूटता है रोगों का साथ एवं मिलता है श्री और समृद्धि का साथ...

सोने चांदी के बर्तन: चांदी के बर्तनों में भोजन करना तन, मन और धन के लिए अनुकुल माना गया है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है जिससे शरीर की गर्मी का नाश होता है। सोने के बर्तनों में भोजन करने से शरीर ठोस, सशक्त और पराक्रमी बनता है। पुरूषों के लिए सोने के बर्तनों में भोजन करना लाभदायक माना गया है। 

लोहे के बर्तन: प्राचीनतम तथा मूल चिकित्‍सा प्रणाली में बताया गया है लोहे के बर्तनों में खाना खाने से शरीर में लौह तत्व बढ़ता है। जिससे हिमोग्लोबिन का स्तर और पाचन क्रिया सही रहती है। लोहे व स्टील निर्मित पत्रों का उपयोग खान-पान तक ही सीमित है व इन्हे शुभ कार्यों में उपयोग में नहीं लिया जाता। 

कांसे के बर्तन: इन बर्तनों में भोजन करने से अनेकों रोगों का नाश होता है। इस धातु में खट्टास वाले भोज्य पदार्थ नहीं डालने चाहिए, वो विषैले हो जाते हैं।

पीतल के बर्तन: पीतल के बर्तनों में श्री हरि विष्णु को भोग अर्पित करने से बरकत बढ़ती है।
 
तांबे के बर्तन: पूजा पाठ के लिए अधिकतर तांबे के बर्तन उपयोग में लाए जाते हैं। माना जाता है की इससे दैवीय शक्तियों की कृपा प्राप्त होती है। तांबे के बर्तन में रखा गया पानी अमृत के समान असर करता है लेकिन दूध शरीर को हानि पंहुचाता है।
 
मिट्टी के बर्तन: मिट्टी के बर्तनों में पका भोजन स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। मटके का पानी पीने से अनेक रोग दूर होते हैं।
 
पत्तल में खाना: शास्‍त्रों में कहा गया है पत्तल पर भोजन करने से तन और मन स्वस्थ रहता है। देवी-देवताओं को पत्तल पर भोग अर्पित किया जाए तो वो अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं।

स्वयं को परखें इस कसौटी पर, जानें कितने विद्वान हैं आप

कालिदास एक बार भ्रमण करते-करते एक गांव में पहुंच गए। बहुत प्यास लगी थी तो एक घर के द्वार पर जाकर पानी मांगा। वहां मौजूद स्त्री और अपने ज्ञान के चलते ख्याति अर्जित कर चुके कालिदास के बीच रोचक संवाद हुआ। एक नजर इसी संवाद पर-

 
कालिदास बोले- माते पानी पिला दीजिए, बड़ा पुण्य होगा।

स्त्री बोली- बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो, मैं अवश्य पानी पिला दूंगी।

कालिदास- मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।

स्त्री- तुम मेहमान कैसे हो सकते हो? संसार में 2 ही मेहमान हैं। पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ, कौन हो तुम?

कालिदास बोले- मैं सहनशील हूं। अब आप पानी पिला दें। 

स्त्री ने कहा- नहीं, सहनशील तो 2 ही हैं। पहली धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ, तुम कौन हो?

कालिदास बोले- मैं हठी हूं।

स्त्री ने कहा- फिर झूठ। हठी तो 2 ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण, कौन हैं आप?
(कालिदास पूरी तरह अपमानित और पराजित हो चुके थे)

कालिदास ने फिर कहा-फिर तो मैं मूर्ख ही हूं।

स्त्री फिर बोली- नहीं, तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो। मूर्ख तो 2 ही हैं। पहला राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है और दूसरा दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए गलत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।

(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे।)

माता ने कहा- उठो वत्स। (आवाज सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थीं, कालिदास पुन: नतमस्तक हो गए।)

माता ने कहा- शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया तथा अहंकार कर बैठे इसलिए तुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए यह स्वांग करना पड़ा।

कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वह आगे चल पड़े।

सीख: विद्वता पर कभी घमंड न करें, यही घमंड विद्वता को नष्ट कर देता है।

छोटी सी इलायची दिखा सकती है बड़े-बड़े कमाल, जानकर हैरान जाएंगे आप करें उपाय

छोटी सी इलायची लगभग हर भारतीय घर की रसोई में मौजुद रहती है। इससे न केवल  व्यंजनों का स्वाद बढ़ता है बल्कि यह आपके जीवन में भी बड़े-बड़े कमाल कर सकती है। तंत्र शास्त्र में इलायची के कुछ ऐसे उपाय बताय गए हैं जिन्हें करने के बाद आप हैरान जाएंगे...

* सुंदर सुशील जीवन संगिनी की चाह रखते हैं तो बृहस्पतिवार को सुबह पांच छोटी इलायची पीले रंग के वस्त्र में बांधकर किसी गरीब को दें।

* पर्स को धन से भरा रखना चाहते हैं तो 5 छोटी इलायची पर्स में रखें।

* नौकरी में उन्नति नहीं मिल रही है तो रात को सोने से पहले हरे रंग के कपड़े में एक छोटी इलायची बांधे। उसे अपने तकिए के नीचे रख लें। सुबह यह इलायची किसी बाहर के व्यक्ति को दे दें।

* परिक्षा में अच्छे अंक चाहिए या पढ़ाई से संबंधित किसी भी समस्या का हल। छोटी इलायची को दूध में उबालकर 7 सोमवार किसी गरीब को पिलाएं।

* थोड़ा सा जल लेकर उसमें 2 बड़ी इलायची डालें, तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। इस जल को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं। वाहन सुख प्राप्त होगा साथ ही रोग व शोक समाप्त होने लगेंगे।
स्नान करते वक्त शुक्र के इस श्लोक का पाठ करें
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा  

* जब भी कोई दरिद्र, असहाय या हिजड़ा दिखे तो उसे एक सिक्का और हरी इलायची दें। जब भी मौका मिले ऐसा करते रहा करें। धन संबंधित परेशानी नहीं सताएगी।

जवानी में करेंगे ये काम, मृत्यु के समय होगा सौ बिच्छुओं के डंक जितना कष्ट!

मृत्यु मानव जीवन का अटल सत्य है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता। ध्यान और तप के बल पर व्यक्ति की उम्र लंबी तो हो सकती है लेकिन वो अमर नहीं हो सकता। गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी प्राणी की मृत्यु का समय पास आता है तो यमराज के दो दूत मरन अवस्था में पड़े प्राणी के पास आ जाते हैं। पापी मनुष्य को यम के दूतों से भय लगता है। जिन लोगों ने जीवन भर अच्छे कर्म किए होते हैं उन्हें मरने के समय अपने सामने दिव्य प्रकाश दिखता है और उन्हें मृत्यु से भय नहीं लगता। पापी पुरुष के प्राण नीचे के मार्ग से निकलते हैं।

जिस जीव ने धरती पर जन्म लिया है, उसे एक दिन जाना भी है। कहते हैं अंतिम वक्त पर जब आत्मा शरीर का त्याग करती है, तो उस समय सौ बिच्छुओं के डंक जितना कष्ट झेलना पड़ता है। जवानी में यदि अच्छे कर्म करके अपनी आत्मा को पवित्र और स्वच्छ रखेंगे तो मृत्यु के समय होने वाले कष्ट से बचा जा सकता है। 

* सर्वप्रथम अपने लाइफस्टाइल में सुधार लाएं, यदि आप रात को देर तक जागते रहते हैं और सुबह देर से जगते हैं तो आप अपने स्वास्थ्य के साथ तो खिलवाड़ कर रहे हैं। आत्मा के कारक देव भगवान सूर्य नारायण का भी अपमान होता है। अंतिम समय में काया को अनेको व्याधियां झेलनी पड़ती हैं। प्रात: जल्दी उठकर सूर्य नमस्कार करें और अर्ध्य दें। 

* शास्‍त्र कहते हैं ब्रह्मचर्य का पालन करने से तन और मन स्वस्थ रहते हैं। जो लोग जवानी के जोश में दिन और समय का ध्यान रखे बिना स्त्री संग अधिक करते हैं, उनकी आत्मा पर पाप लगता है। मृत्यु के समय इस लोक में और परलोक सिधारने पर उस लोक में यातनाएं सहनी पड़ती हैं।

* मद‌िरा का सेवन मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। नशे में रत होकर वह गलत काम करने लगता है। जिसका खामियाजा उसे लोक-परलोक में उठाना पड़ता है।

* धार्मिक दृष्टि से आहार शुद्ध और पवित्र होना आवश्यक है। उपनिषदों में कहा गया है कि ‘जैसा अन्न वैसा मन’ अर्थात हम जैसा भोजन करते हैं, उसी के अनुसार हमारा मानसिक विकास होता है। भोजन करते समय किसी भी अपवित्र खाद्य पदार्थ को ग्रहण करना निषिद्ध है। यही कारण है कि भोजन करने से पूर्व भगवान को भोग लगाने का विधान है जिससे कि हम केवल शुद्ध और उचित आहार ही ग्रहण करें। श्रीमद्भागवद गीता के अनुसार सात्विक भोजन करने वाला दैवी सम्पत्ति का स्वामी होता है जबकि राजसिक और तामसिक भोजन करने वाला आसुरी सम्पत्ति का मालिक होता है। 
 
* नास्तिक और वैष्णव निंदा करने वाला न केवल अपने जीवनकाल में दुख भोगता है बल्कि मृत्यु के समय और मरणोपरांत भी पीड़ा में रहता है।

* जो व्यक्ति अपने जन्मदाता (माता-पिता) को दुख देता है, उनका आदर-सम्मान नहीं करता। यमराज उन्हें घोर यातना देते हुए मृत्यु के द्वार तक ले जाते हैं।

* जो लोग जवानी में अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए छल कपट और बेईमानी का रास्ता चुनते हैं। वह जीवन भर तो सुखी रहते हैं लेकिन अंत समय उन्हें बहुत यातनाएं सहनी पड़ती हैं। वह मृत्यु को पुकारते हैं लेकिन यम उन्हें असहनीय दर्द देते हैं।

दैवीय शक्तियों को आकर्षित करते हैं ये भोजन, इच्छा के अनुसार होंगे सारे काम

कहते हैं किसी भी इंसान के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है। उसे उसके मन पंसद भोज्य पदार्थ खिलाने से वो शीघ्र प्रसन्न हो जाता है। देवी-देवताओं की कृपा बनी रहे इसके लिए हर मनुष्य भरपूर प्रयास करता है लेकिन हर बार उन्हें मनचाहा फल प्राप्त नहीं होता। तो क्यों न दैवीय शक्तियों को भी उनके मनपंसद भोजन से प्रसन्न किया जाए। वैसे तो उन्हें यह भोग प्रतिदिन अर्पित किया जाए तो वह शीघ्र प्रसन्न होते हैं, लेकिन हर रोज ऐसा करना संभव न हो तो उन्हें उनके प्रिय दिन-वार पर भोग अवश्य चढ़ाएं। 

* सनातन संस्कृति में कोई भी शुभ काम करना हो तो उसका आरंभ श्री गणेश को नमस्कार करने के उपरांत किया जाता है। उन्हें मोदक बहुत प्रिय हैं। विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए बप्पा को मोदक का भोग खिलाएं।
 
* महालक्ष्मी को चावल से बने भोज्य पदार्थ बहुत प्रिय हैं विशेषकर खीर तो उन्हें बहुत भाती है। धन-धान्य और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी को ये भोग लगाएं।

* घर और दुकान में लाख यत्न करने पर भी किसी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है तो विष्णु भगवान को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। साथ में उन्हें पीली दाल, गुड़ अथवा लड्डूओं का भोग लगाएं। बृहस्पतिवार को अवश्य करें ये उपाय। 

* विद्या की देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए खिचड़ी का भोग लगाएं। 
 
* धन के देवता कुबेर को पीले रंग के लड्डू बहुत भाते हैं। इसके अतिरिक्त पीले रंग की खीर और कस्टर्ड भोग स्वरूप अर्पित किया जा सकता है।
 
* हनुमान जी बल, बुद्धि और विद्या के देवता हैं। उनकी कृपा दृष्टि चाहते हैं तो उन्हें केसरी रंग के मिष्ठान और गुड़-चने का भोग लगाएं। 

* धरती के संचालक ने देवी दुर्गा को जगत माता का दर्जा दिया है। वो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। उन्हें खुश करने के लिए खिचड़ी और खीर का भोग लगाएं।
 
* न्याय के देवता शनि को काले तिल, दाल और सरसों के तेल का भोग अर्पित करें।
 
* देवों के देव महादेव को दूध और दूध से बने पदार्थ बहुत अच्छे लगते हैं। 
 
* तन, मन और धन के लिए महाकाली को मिष्ठान, चावलों की खीर और शाक का भोग लगाएं।

* बाल गोपाल को माखन मिश्री का भोग लगाएं।

शनिवार को करें खास उपाय: जिनके पास पैसा आता तो है परन्तु टिक नहीं पाता

घोड़े की नाल, नाव की कील अथवा अन्य माध्यमों से उपलब्ध लोहे के छल्ले, कड़े आदि का प्रचलन सर्वविदित है। इन सबसे व्यक्ति को आशातीत लाभ मिलता आ रहा है। इस उपाय में किसी जोखिम अथवा विपरीत प्रभाव का भय नहीं है परन्तु सर्वाधिक प्रयोग होने वाले इस उपाय की उपयोग विधि अधिकांश लोगों को ज्ञात नहीं है और इस कारण ही वे लाभ नहीं उठा पाते।

यदि घोड़े की नाल अथवा नाव की कील का विधि-विधान से उपयोग किया जाए तो धन लाभ की संभावना निश्चित रूप से बढ़ जाती है। किसी शनिवार को यदि आपको घोड़े की नाल कहीं पड़ी मिल जाए तो उसे चुपचाप उठा कर अपने घर के बाहर कहीं छिपा कर रख दें। किसी भी रंग के घोड़े की नाल की उपयोगिता बराबर ही होती है। इतना अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि नाल का कोई भी हिस्सा खंडित न हो। खास उपाय में डर्बी घोड़े की नाल प्रयोग की जाती है। यह तुलनात्मक रूप से बड़ी होती हैं। घर के बाहर रखी नाल को किसी शनि के नक्षत्र तथा होरा में घर के अंदर ले आएं। उसे राख, नींबू, साबुन, ब्रश आदि से साफ कर चमका लें। इसके बाद नाल सरसों के तेल में डुबो कर अगले शनि के नक्षत्र तथा होरा आने तक कहीं सुरक्षित स्थान पर रखी रहने दें। इस शनि होरा काल में नाल निकाल कर कपड़े से पोंछ कर साफ कर लें। प्रयोग में आया तेल किसी भी शनिवार को दान कर दें। नाल को यथा श्रद्धा कच्चे दूध, गंगाजल, घी, दही, शहद आदि से स्नान करा कर धूप-दीप से उसकी आरती उतारें। अब यह नाल घर के मुख्य द्वार के अंदर की तरफ कील से गाड़ दें। नाल का खुला हिस्सा नीचे की ओर रहना चाहिए परन्तु कई बार जब नाल की इस स्थिति से लाभ न हुो तो खुला हिस्सा ऊपर दें और आशातीत फल प्राप्त हुए। किसी शनिवार को अकस्मात यदि आपको दूसरी नाल मिल जाए तो उसे उपरोक्त विधि से पहले वाली नाल निकाल कर वहां ठोक दें। पुरानी नाल कहीं बहते पानी में बहा दें। नाल की प्राप्ति यदि आपके लिए दुर्लभ हो तो किसी शनिवार को यह किसी घोड़े वाले से भी प्राप्त की जा सकती है।

नाल का दूसरा उपाय उंगली तथा हाथ का क्रमश: छल्ला और कड़ा बनाने में किया जाता है। पहले की तरह इसमें भी घोड़े की नाल को साफ करके पहले तेल में डुबो कर रख दें। अगले शनि के नक्षत्र तथा होरा में इसे निकाल कर किसी सुनार के पास ले जाएं और इसे पिटवा कर अपनी मध्यमा उंगली के आकार का छल्ला अथवा कड़ा जो भी पहनना आपको अच्छा लगे, बनवा लें।

छल्ले अथवा कड़े का जोड़ खुला ही छोडऩा है। अंगूठी अथवा कड़े बनने का कार्य शनि की होरा काल में ही पूरा हो जाए तो अच्छा है अन्यथा शनि का नक्षत्र तो उस समय तक रहना ही चाहिए। इस कार्य के लिए यदि किसी सुनार से पहले ही मिल कर पूर्वनियोजित व्यवस्था करवा लें तो आपका कार्य निश्चित समय में ही पूरा हो जाएगा।
अब इस छल्ले, अंगूठी अथवा कड़े को जो भी आपने बनवाया हो, घर लाकर कच्चे दूध, गंगा जल तथा तुलसी में डुबो दें। शनि के अगले नक्षत्र तथा होरा तक इसे ऐसा ही पड़ा रहने दें। शनि की होरा में इसे निकाल कर चाहे तो इसकी प्राण-प्रतिष्ठा भी कर लें और धूप-दीप दिखाकर अपने दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में इसे धारण कर लें। यदि कड़ा बनवाया हो तो दाईं कलाई में पहन लें।

शनि का प्रकोप दूर करने का इससे सरल परन्तु उतना ही सुलभ व सस्ता उपाय दूसरा नहीं मिलेगा। यह उपाय उन व्यक्तियों के लिए बहुत लाभकारी है जिन्हें प्राय: शिकायत रहती है कि उनके पास पैसा आता तो है परन्तु टिक नहीं पाता।    

पंचांग (18 नवम्बर 2016, शुक्रवार)

18 नवम्बर 2016, शुक्रवार

मार्गशीर्ष कृष्ण तिथि पंचमी (18-19 मध्य रात 3.33 तक)  

सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :-
सूर्य वृश्चिक में
चंद्रमा मिथुन में
मंगल मकर में
बुध वृश्चिक में
गुरु कन्या में
शुक्र धनु में
शनि वृश्चिक में
राहू सिंह में
केतु कुम्भ में
विक्रमी सम्वत् : 2073, मार्गशीर्ष प्रविष्ट: 4, राष्ट्रीय शक सम्वत: 1938, दिनांक: 27  (कार्तिक), हिजरी साल : 1438, महीना : सफर, तारीख: 17, सूर्योदय: 7.01 बजे, सूर्यास्त:  5.24 बजे (जालंधर समय), नक्षत्र: पुनर्वसु (18-19 मध्य रात 4.17 तक),  योग: साध्य (प्रात: 7.44 तक तथा बाद में योग शुभ), चंद्रमा रात 10.32 तक मिथुन राशि पर तथा उसके बाद कर्क राशि पर प्रवेश करेगा।  दिशा शूल: पश्चिम एवं नैर्ऋत्य दिशा के लिए, राहू काल:  प्रात: 10.30 से दोपहर 12.00 बजे तक।  

गणेश पूजा के साथ दोपहर 3.45 पर भगवान बद्रीनाथ के कपाट हुए बंद

बदरीनाथ: भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को विधि विधान और गणेश पूजा के साथ दोपहर 3:45 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पहले दिन गणेश मंदिर के कपाट बंद किए गए हैं। 12 नवंबर को गणेश मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया प्रात: अभिषेक व महाभिषेक पूजा के साथ शुरू हुई। श्री बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी के संरक्षण में धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल व वेदपाठियों द्वारा वेद मंत्रोच्चार के बीच गणेश मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। 

प्रत्येक दिन की तरह इस बार भी दिनभर सभी प्रकार की पूजाओं में भगवान गणेश का पूजन किया गया। सायंकालीन आरती के बाद गणेश भगवान को उनके प्रार्थना मंडप स्थित शीतकालीन निवास स्थान पर विराजित किया गया। इसके साथ ही पंचपूजाओं में प्रथम दिन की पूजाएं पूरी हुईं। इस अवसर पर वेदपाठी सत्य प्रसाद चमोला के साथ कई लोग मौजूद रहे। 

राशिफल: गुरु-मंगल में बने नव-पंचम योग किस राशि को मिलेगा भाग्य का संयोग

दैनिक शुभाशुभ: 17.11.16 गुरुवार चंद्र मिथुन राशि व मृगशीर्ष नक्षत्र, भाग्यांक 3, शुभरंग पीला, शुभदिशा उत्तरपूर्व, राहुकाल दिन 1:30 से शाम 3 तक। उपाय: सभी 12 राशियों के व्यक्ति भाग्य उदय के लिए पीपल के पेड़ पर हल्दी की गांठें चढ़ाएं। 

 
मेष: कार्यक्षेत्र में अनुकूलता रहेगी। अधिकारी पक्ष से सहयोग मिलेगा। विलासिता के साधनों पर खर्च बढ़ेगा। कार्य क्षेत्र में विस्तार होगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 3, शुभ रंग पीला, शुभ दिशा उत्तरपूर्व, शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।
 
वृष: अनुकूल समाचार मिलेंगे। सभी क्षेत्रों में सफलता मिलेगी। शैक्षिक कार्य सफल रहेंगे। बिज़नैस में लाभ होगा। आय वृद्धि के योग हैं।
शुभाशुभ: शुभ अंक 9, शुभ रंग नारंगी, शुभ दिशा दक्षिण, शुभ समय सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक।
 
मिथुन: व्यस्तता के बावजूद प्रसन्न रहेंगे। पार्टनर से नोक-झोंक होगी। आर्थिक क्षेत्र में तरक्की संभव है। नौकरी में स्थान परिवर्तन के योग हैं।
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक।
 
कर्क: प्रयास उपरांत निराशा हाथ लगेगी। नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी। सामाजिक कलह होने के योग हैं। परिचितों से उपहार मिलेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा उत्तर, शुभ समय सायं 06:00 से सायं 07:30 तक।
 
सिंह: लंबित कार्य बनेंगे। वित्तीयपक्ष सुधरेगा। निजी संबंध सहायक रहेंगे। संगीत के प्रति आकर्षित रहेंगे। एजुकेशन में अच्छे रिज़ल्ट्स मिलेंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग आसमानी, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।

कन्या: आत्मविश्वास व मान सम्मान बढ़ेगा। परीक्षा में सफलता निश्चित है। अकस्मात धन प्राप्ति होगी। कास्मैटिकस् में दिलचस्पी बढ़ेगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक।
 
तुला: मानसिक परेशानियां कम होंगी। विरोधी परास्त होंगे। सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। मूड में उतार-चढ़ाव रहेगा। धर्मकार्य में श्रद्धा बढ़ेगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 9, शुभ रंग नारंगी, शुभ दिशा दक्षिण, शुभ समय सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक।
 
वृश्चिक: आत्मबल बढ़ेगा। विरोधी शांत होंगे। कार्यक्षेत्र में सफलता से खुश रहेंगे। स्वजनों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 3, शुभ रंग पीला, शुभ दिशा उत्तरपूर्व, शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।

धनु: अध्ययन में रुचि बढ़ेगी। नौकरी में प्रमोशन के योग हैं। वाहन सुख का विस्तार होगा। पूर्व निर्धारित कार्यों में सफल रहेंगे। पूंजी निवेश होगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 6, शुभ रंग गुलाबी, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।

मकर: भविष्य की चिंता सताएगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक मंदी रहेगी। मैंटल डिप्रैशन रहेगा। शिक्षा में व्यवधान आएंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
 
कुंभ: कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा। प्रभावशाली व्यक्ति का सान्निध्य प्राप्त होगा। स्टूडैंट्स को एजुकेशन में सफलता मिलेगी। मन प्रसन्न रहेगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
 
मीन: मानसिक तनाव बढ़ेगा। आर्थिक क्षेत्र में परेशानी आएगी। पार्टनर से तालमेल बिगडेगा। आध्यत्मिकता बढ़ेगी। धार्मिक यात्रा के योग हैं। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 6, शुभ रंग गुलाबी, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।

नर को नारायण बनाता है ओंकार प्राणायाम

योगाभ्यास में ओम के उच्चारण का अनन्य महत्व है। इसमें ओंकार का उच्चारण सुनना व बोलना दोनों का अंतर्भाव होता है। इसका लाभ उसे ही मिलता है जो स्वयं इसका अनुभव लेता है। ओंकार प्राणायाम का अधिक लाभ सामूहिक रीति से एक लय व सुरताल में करने से होता है।

ओंकार प्राणायाम को ओंकार साधना/प्रणव साधना/प्रणवोच्चार कहते हैं। इस प्राणायाम के द्वारा सर्वशक्तिमान परमात्मा को संबोधित करते हैं। ओंकार ही उस परमात्मा का प्रतीक हो सकता है। ओम शब्द साढ़े तीन (३½) मात्रा का एकाक्षर है, यह नाम वैज्ञानिक दृष्टि से परिपूर्ण व सिद्ध है।

अकार-1 मात्रा-कंठमूल से उत्पत्ति-ब्रह्म-उत्पत्ति।
ऊकार-1 मात्रा-होंठों से उत्पत्ति-विष्णु-स्थिति।
मकार-1 मात्रा-बंद होंठों से उत्पत्ति-शिव-लय।
हलंत-1/2 मात्रा।

ओंकार सभी अक्षरों को व्याप्त करता है। जैसे सारी सृष्टि का प्रतिनिधित्व परमात्मा करता है वैसे ही सारे अक्षरों का प्रतिनिधित्व ओंकार करता है।

ओंकार प्राणायाम कैसे करें?
यह प्राणायाम किसी एकांत जगह पर करें। स्थान का बार-बार बदलाव न करें। पद्मासन या सुखासन में बैठे जिसमें सिर, गर्दन, पीठ, कमर सीधी एक रेखा में रहे। शांति से आंखें बंद का अवयव ध्यान कर सारी इंद्रियां अपने स्थान पर सजग हैं, इसका ध्यान रखें। सहज रीति से 2-3 बार लम्बी सांस लें व शीघ्रता से श्वास छोड़ दें। इसे ही दीर्घ श्वसन कहते हैं। ऐसे 3-4 बार दीर्घ श्वसन करने के बाद यथासंभव लम्बा श्वास लें। श्वास को बिना रोके, मुंह खोल कर कंठ से स्पंदन हो, ऐसा ओंकार का उच्चारण करें।
इस ओंकार उच्चारण की अनुभूति स्वयं ही करें। शुरूआत में बराबर व दीर्घ ओंकार उच्चारण नहीं होता पर धीरे-धीरे अभ्यास से दीर्घ उच्चारण होने लगता है। ओंकार के उच्चारण से एक दीर्घ कंपन उत्पन्न होता है, जो नाभि चक्र, मुख गुहा, कान के पास व सहस्राधार से होकर पूरे शरीर में अनुभव होता है। शारीरिक लाभ की दृष्टि से कंपन जरूरी है। यह ओंकार की साधना जब तक साधक को  आनंद दे, तब तक वह करे।
 
लाभ : ओंकार प्राणायाम से साधक को शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक लाभ होता है।
 
* शरीर का सबसे छोटा हिस्सा ऊतकों को नवनिर्मित करने का कार्य ओंकार प्राणायाम करता है। ओंकार से प्रत्येक  ऊतक चैतन्य से परिपूर्ण हो जाती है, इससे चेतना की जागृति होती है।
* शरीर की आंतरिक इंद्रियों की सफाई होती है।
* सूक्ष्म मल दूर होता है।
* शरीर स्वस्थ, सुंदर व पवित्र बनता है।
* कंठनाली में स्वरतंतु की ट्यूनिंग होती है।
* फुफ्फुस की कार्यक्षमता बढ़ती है।
* श्वसन विकार दूर होते हैं।
* रक्तशुद्धि होती है।
* हृदय को विश्राम मिलता है।
* मज्जा संस्थान सक्रिय होता है।
* पाचन क्रिया व उत्सर्जक क्रिया सुधरती है।
* मन के मल, मोह, अहंकार, मद से छुटकारा मिलता है।
* मन शांत, प्रसन्न रहता है।
* मन की  आकलन शक्ति बढ़ती है।
* मन रिक्त, स्वच्छ, पवित्र व हल्कापन महसूस करता है। इतना ही नहीं, एक मंगलमय वातावरण निर्मित होता है।
* हमारे दैनंदिन व्यवहार में आने वाले तनाव के कारण आने वाली निराशा, उदासी व अशांति ओंकार के स्पष्ट व दीर्घ उच्चारण से नष्ट होती है। ओंकार के नियमित उच्चारण से रक्तदान, दमा आदि तकलीफें दूर होती हैं।
* अत: स्रावी संस्थान चुस्त होता है।
* नर को नारायण बनाने की क्रिया ओंकार प्राणायाम में है।
* बुद्धि तीव्र, निर्णायक क्षमता व स्मरण शक्ति बढ़ती है।
 
* शरीर, मन व बुद्धि को स्वस्थ रखने वाला अष्टांगों का सार ओंकार है। ओंकार से अष्टांग योग का भी पालन हो जाता है। जिस प्रकार मन पर उत्तम संस्कार होने के लिए जप, तप, कीर्तन, भजन आदि कर्म साधन प्रचलित हैं, उसी प्रकार ध्यान की कल्पना करें तो ओंकार एक साधना प्रतीत होती है किन्तु इसका नियमित अभ्यास आवश्यक है। अत: ऊषा काल में, ब्रह्म मुहूर्त में किसी रम्य स्थान में जाकर सूर्योदय के समय प्रसन्नचित्त बैठ कर यदि ओंकार का नियमित अभ्यास किया जाए तो यह उच्चारण सुमधुर, हृदय को प्रसन्न करने वाला होता है।

अत: प्रत्येक योग प्रेमी को नियमित रूप से श्रद्धा भाव से ओंकार का उच्चारण करना चाहिए।