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इन उपायों को अपनाएंगे तो आपकी लाइफ भी सकती है Superb

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को खशहाल बनाने में लगा रहता है। इसके लिए वह हर कोशिश करता है। लेकिन कई बार फिर भी सफल नहीं हो पाता। भारतीय वास्तुशास्त्र में इसके लिए अनेक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाने से अपने जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। आईए जानते हैं वे छोटे-छोटे वास्तु उपाय जिनसे हम जिंदगी को खुशहाल बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं।


भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार, जहां तक संभव हो घर में असली पौधे रखें, यह काफी शुभ माना जाता है। यदि कृत्रिम पौधे भी लगाने हों, तो प्राथमिक रंगों (लाल-नीला-हरा) को अधिक महत्त्व दें। सेकेंडरी यानी द्वितीयक रंगों के चुनाव में काफी सावधानी बरतें। गौरतलब है कि द्वितीयक रंगों का निर्माण प्राथमिक रंगों के सहयोग से होता है।


घर का हर कमरा रोशनी से भरा और हवादार होना चाहिए। ताकि सूर्य की रोशनी के साथ सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सके। यदि कमरे में ड्रैसिंग टेबल रखना हो तो उत्तर-पूर्व या पूर्व में रखें। कमरे में सोफा, टीवी और कूलर उत्तर दिशा की ओर रखें।


घर के अंदर प्रवेश द्वार की दाईं ओर फिश पॉट रखें। इससे घर में धन बढ़ता है। यदि पलंग के नीचे जगह हो तो उसमें बिस्तर या ऑफ सीजन के कपड़े रखें। पलंग के नीचे के स्थान को कूड़ाघर न बनाएं। इससे पति-पत्नी के बीच मतभेद की स्थितियां पैदा होती हैं। पर्दों का रंग हल्का होना चाहिए। लेकिन चाहें तो गहरे रंग के पर्दे दक्षिण या पश्चिम में प्रयोग कर सकते हैं। टॉयलेट उत्तर-पूर्व में नहीं होना चाहिए। इससे धन जल्दी खर्च हो जाता है।

ये है देवी-देवताओं को खुश करने की विधि, हफ्ते के इस दिन होगी आपकी इच्छा पूरी

अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए व्यक्ति युगों-युगों से देवी-देवताओं की आराधना करता आ रहा है। सप्ताह के सातों दिनों पर अलग-अलग दैवीय शक्तियों का साम्राज्य स्थापित है। शिव पुराण में वर्णित है कि समस्त देवों की पूजा और उनके फल विभिन्न हैं। भगवान शिव को समर्पित ग्रंथ शिवपुराण की मान्यतानुसार हफ्ते के सातों दिन इस रूप से देव आराधना करने से शिव पूजा के अनुरूप ही फल प्राप्त होता है। मनभावन फल की इच्छा के लिए किस दिन किस देव की उपासना की जाए आईए जानें-


रविवार- शारीरिक रोगों से मुक्ति पाने के लिए सूर्य पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।


सोमवार- धन की इच्छा हो तो लक्ष्मी पूजन करें, ब्राह्मणों को पत्नी सहित घी से पका हुआ भोजन करवाएं।


मंगलवार- रोगों से निजात पाने के लिए काली मां की पूजा करें, उड़द, मूंग और अरहर दाल या ब्राह्मण को अनाज से बना भोजन करवाएं।


बुधवार- पुत्र सुख की कामना है तो श्री विष्णु का पूजन करें।


गुरुवार- लंबी आयु की चाह रखते हैं तो वस्त्र,यज्ञोपवीत और घी मिले खीर से देवताओं विशेष रूप से गुरु का पूजन करें।


शुक्रवार- समस्त भोगों की प्राप्ति के लिए देवताओं का पूजन करें। ब्राह्मणों को अन्न दान करें।


शनिवार- अकाल मृत्यु से स्वयं की रक्षा के लिए रुद्र पूजा, तिल से हवन, दान, ब्राह्मणों को तिल मिला भोजन करवाएं।

जिसके हृदय में प्रभु भक्ति नहीं वहीं मनुष्य है नीच

सारे संसार में परमात्मा एक है और उसी ने सब प्राणियों को पैदा किया है और सारी सृष्टि में व्याप्त है। सब  प्राणी एक ही नूर से उत्पन्न हुए हैं और सबमें उसी प्रभु का नूर मौजूद है। जब जीव एक ही नूर से पैदा हुए हैं तो उनमें कौन अच्छा है और कौन बुरा है।


अवलि अल्ला नूर उपाइया कुदरति के सभ बंदे एक नूर ते सभु जगु उपजिआ कउन भले को मंदे।


संतों का मार्ग आंतरिक अनुभव का मार्ग है पढ़ने लिखने का नहीं भक्ति का मार्ग है। सोच-विचार का नहीं प्रेम का मार्ग है। पोथी पढ़-पढ़ कर जग मर गया पर कोई पंडित नहीं हुआ जो प्रेम का अढ़ाई अक्षर पढ़ लेता है वही पंडित होता है।


पोथी पढि़-पढि़ जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।


कबीर साहब कहते हैं कि ईश्वर प्रेमी को ढूंढता फिर रहा हूं परंतु मुझे सच्चा ईश्वर प्रेमी कोई नहीं मिला। जब एक ईश्वर प्रेमी दूसरे ईश्वर प्रेमी से मिल जाता है तो विषय-वासनाओं रूपी सम्पूर्ण सांसारिक विष प्रेम रूपी अमृत बन जाता है।


प्रेमी ढूंढत मैं फिरौं, प्रेमी मिलै न कोय, प्रेमी कौ प्रेमी मिलै तब विष से अमृत होय।


कबीर साहब ने जात-पात को बढ़ावा नहीं दिया और कहा कि प्रभु की कोई जात नहीं है तो उसको भक्तों और प्रेमियों की क्या जात हो सकती है। कबीर साहब संसार को उपदेश देते हैं मनुष्य को जात-पात के कीचड़ में नहीं डूबना चाहिए।


जात नहीं जगदीश की, हरि जन कि कहा होय, जात-पात के कीच में डूब मरो मत कोय।


कबीर साहब ने अपने जीवन में किसी भी व्यक्ति को नीचा या ऊंचा नहीं माना। उनके अनुसार अगर कोई मनुष्य नीचा है तो वही जिसके हृदय में प्रभु भक्ति नहीं, ‘कहै कबीर मधिम नहीं कोई सो मधिम जा मुखि राम न होई।’’


कबीर साहब ने सारे संसार को आपसी प्रेम, भाईचारा और प्रभु भक्ति का संदेश दिया, इंसानियत व मानवता की भलाई और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा दी।

कानपुर के गंगा मेला में उतरेगा होली का खुमार

कानपुरI  पूरे देश में ज्यादतार जगहों पर होली के त्यौहार की धूम चाहे थम गई हो लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर के औद्योगिक नगर में अभी भी होली की खुमारी बरकरार है। इसकी खुमारी गुरूवार को होने वाले गंगा मेले के साथ उतरेगी। दरअसल, कानपुर में होली खेलने की यह परंपरा देश प्रेम की भावना से प्रेरित है। स्वतंत्रता आंदोलन के रान वर्ष 1942 में हुयी एक घटना से अनुराधा नक्षत्र के दिन होली खेलने की परंपरा की शुरूआत पड़ी जो पिछले आठ दशकों से चली आ रही है। कानपुर में लोग होली के दिन रंग खेले ना खेले मगर अनुराधा नक्षत्र के दिन होली जरूर खेलते हैं।  बरसों से चली आ रही इस परंपरा को हर साल निभाया जाता है। गंगा मेला के दिन यहां भीषण होली होती है। ठेले पर यहां होली का जुलुस निकाला जाता है। ये जुलूूस हटिया बाकाार से शुरू होकर नयागंज, चौक सर्राफा सहित कानपुर के करीब एक दर्जन पुराने मोहल्ले में घूमता हुआ दोपहर दो बजे तक हटिया के रज्जन बाबू पार्क में आकर खत्म किया जाता है। इसके बाद शाम को सरसैया घाट पर गंगा मेला का आयोजन किया जाता है। जहां शहर भर के लोग इकठ्ठा होते है और एक दूसरे को होली की बधाई भी देते हैं।

चाणक्य नीति: इन बातों का पता होगा तो सफलता निश्चित होगी आपकी

अधिक परिश्रम करने पर कभी-कभी व्यक्ति को कुछ कार्यों में असफलता का सामना करना पड़ता है। तो यदि व्यक्ति चाणक्य द्वारा बतीई गई कुछ बातों को अपनाए तो वह अपने जीवन में सफलता पा सकता है। तो आईए जानें वो महत्वपूर्ण बातें-

समय
चाणक्य के अनुसार सफल वही है जिसे इस प्रश्न का उत्तर हमेशा मालूम रहता है कि समय कैसा चल रहा है। समझदार व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है। अभी सुख के दिन हैं या दुख के। यदि सुख के दिन हैं तो अच्छे कार्य करते रहें और यदि दुख के दिन हैं तो अच्छे कामों के साथ धैर्य बनाए रखें। 

शक्ति
सबसे जरुरी बात ये कि हमें अपनी ताकत पहचाननी चाहिए। हमें मालूम होना चाहिए कि हम क्या कर सकते हैं। हमें वही काम करना चाहिए। जिसे लगे कि हां हम इसे कर सकते हैं। यदि शक्ति से अधिक काम हम हाथ में ले लेंगे तो असफल होना तय है।

सच्चे मित्र 
हमें मालूम होना चाहिए कि हमारे सच्चे मित्र कौन हैं और कौन कपटी है। यूं कहलें मित्रों के वेश में शत्रु कौन-कौन है। मित्रों के वेश में छिपे शत्रु का पहचाना बहुत जरूरी है। साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखें कि सच्चे मित्र कौन हैं, क्योंकि सच्चे मित्रों की मदद लेने पर ही सफलता मिल सकती है।

किसके अधीन हैं
हमें अपने कंपनी में काम करते हुए वहां की जरुरत को भी ध्यान में रखना चाहिए। साथ ही इस बात पर भी गौर चाहिए कि हमारा प्रबंधक, कंपनी, संस्थान या बॉस हमसे क्या चाहता है। हमने वो काम करना चाहिए जिससे संस्थान को लाभ मिलता हो।

यह देश कैसा है 
तात्पर्य यह है कि हम जहां काम कर रहे हैं वो जगह कैसी है, वहां के हालात कैसे हैं। कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इस बात का ध्यान रखना जरुरी है। 

हमारी आय और व्यय की सही जानकारी
व्यक्ति को अपनी आय और व्यय का पता होना चाहिए। जो लोग आय से अधिक खर्च करते हैं, वे परेशानियों में अवश्य फंसते हैं। धन-संबंधी सुख पाने के लिए कभी आय से अधिक व्यय नहीं करना चाहिए।

बिल्ली के मुंह में दिखे मास का टुकड़ा तो समस्त कार्य होते हैं सफल

अक्सर हम लोग यह सुनते हैं कि बिल्ली को नैगेटिविटी एनर्जी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता अनुसार शकुन शास्त्र में बिल्ली का विशेष महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि कि अगर बिल्ली रास्ता काट जाए तो अशुभ माना जाता है। इसके अलावा भी बिल्ली को लेकर और भी कई मान्यताएं प्रचलित है, जिन पर लोग सदियों से विश्वास करते आ रहे हैं। तो आईए जानते हैं बिल्ली से संबंधित एेसी बातें जो अशुभ घटनाओं के संकेत देती हैं। 


बिल्ली के बारे में आम धारणा है कि अगर बिल्ली कहीं जाते समय रास्ता काट जाए तो वह काम कभी पूरा नहीं होता है।


यदि बार-बार बिल्ली रोती दिखाई दे रही है तो इसका मतलब आप पर कोई संकट आने वाला है।


अगर बिल्ली रोती या लड़ती हुई दिखाई दे तो उस इंसान के सभी कार्य असफल हो सकते हैं।


शकुन शास्त्र के मुताबिक सोए हुए व्यक्ति को बिल्ली लांगकर भाग जाए तो उस व्यक्ति को मृत्यु कष्ट भोगना पड़ सकता है।


यदि बिल्ली सोए हुए व्यक्ति के पैरों को सूंघ जाए तो उसे कई बीमारियां हो सकती हैं। 


जिस व्यक्ति को यात्रा पर जाते समय बिल्ली के मुंह में मास का टुकड़ा उसके कार्य सफल हो सकते हैं। 


यदि बिल्ली सोती हुई अवस्था में दिखाई दे तो व्यक्ति को भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऋषि विश्वामित्र द्वारा हुआ था नारियल का धरती पर अवतरण

हिंदू धर्म में नारियल को विशेष महत्व प्रदान है। कोई भी धार्मिक कार्य इसके बिना संपन्न नहीं किया जाता। लेकिन शास्त्रों में इसकी उत्तपति की कहानी मिलती है, जिसमें बताया गया है कि नारियल का इस धरती पर अवतरण ऋषि विश्वामित्र द्वारा किया गया था। इसके बार में हर किसी को नहीं पता होगा तो आईए जानें इसके बारे में-


पौराणिक कथा
यह कहानी प्राचीन काल के एक राजा सत्यव्रत से जुड़ी है। सत्यव्रत एक प्रतापी राजा थे, जिनका ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास था। उनके पास सब कुछ था लेकिन उनके मन की एक इच्छा थी जिसे वे किसी भी रूप में पूरा करना चाहते थे।


वे चाहते थे की वे किसी भी प्रकार से पृथ्वीलोक से स्वर्गलोक जा सकें। स्वर्गलोक की सुंदरता उन्हें अपनी ओर आकर्षित करती थी, किंतु वहां कैसे जाना है, यह सत्यव्रत नहीं जानते थे। एक बार ऋषि विश्वामित्र  तपस्या करने के लिए अपने घर से काफी दूर निकल गए थे और लम्बे समय से वापस नहीं आए थे। उनकी अनुपस्थिति में क्षेत्र में सूखा पड़ा गया और उनका परिवार भूखा-प्यासा भटक रहा था। तब राजा सत्यव्रत ने उनके परिवार की सहायता की और उनकी देख-रेख की जिम्मेदारी ली।


जब ऋषि विश्वामित्र वापस लौटे तो उन्हें परिवार वालों ने राजा की अच्छाई बताई। वे राजा से मिलने उनके दरबार पहुंचे और उनका धन्यवाद किया। शुक्रिया के रूप में राजा ने ऋषि विश्वामित्र द्वारा उन्हें एक वर देने के लिए निवेदन किया। ऋषि विश्वामित्र ने भी उन्हें आज्ञा दी। तब राजा बोले की वो स्वर्गलोक जाना चाहते हैं, तो क्या ऋषि विश्वामित्र अपनी शक्तियों का सहारा लेकर उनके लिए स्वर्ग जाने का मार्ग बना सकते हैं? अपने परिवार की सहायता का उपकार मानते हुए ऋषि विश्वामित्र ने जल्द ही एक ऐसा मार्ग तैयार किया जो सीधा स्वर्गलोक को जाता था।


 
राजा सत्यव्रत खुश हो गए और उस मार्ग पर चलते हुए जैसे ही स्वर्गलोक के पास पहुंचे ही थे, कि स्वर्गलोक के देवता इन्द्र ने उन्हें नीचे की ओर धकेल दिया। धरती पर गिरते ही राजा ऋषि विश्वामित्र के पास पहुंचे और रोते हुए सारी घटना का वर्णन करने लगे। देवताओं के इस प्रकार के व्यवहार से ऋषि विश्वामित्र भी क्रोधित हो गए, परन्तु अंत में स्वर्गलोक के देवताओं से वार्तालाप करके आपसी सहमति से एक हल निकाला गया। इसके मुताबिक राजा सत्यव्रत के लिए अलग से एक स्वर्गलोक का निर्माण करने का आदेश दिया गया


 
ये नया स्वर्गलोक पृथ्वी  एवं असली स्वर्गलोक के मध्य में स्थित होगा, ताकि ना ही राजा को कोई परेशानी हो और ना ही देवी-देवताओं को किसी कठिनाई का सामना करना पड़े। राजा सत्यव्रत भी इस सुझाव से बेहद प्रसन्न हुए, किन्तु ना जाने ऋषि विश्वामित्र को एक चिंता ने घेरा हुआ था। उन्हें यह बात सत्ता रही थी  कि धरती और स्वर्गलोक के बीच होने के कारण कहीं हवा के ज़ोर से यह नया स्वर्गलोक डगमगा ना जाए। यदि ऐसा हुआ तो राजा फिर से धरती पर आ गिरेंगे। इसका हल निकालते हुए ऋषि विश्वामित्र ने नए स्वर्गलोक के ठीक नीचे एक खम्बे का निर्माण किया, जिसने उसे सहारा दिया।

दिन के अनुसार करें खरीददारी, धन की देवी लक्ष्मी की होगी अपार कृपा

आजकल ज्यादातर लोग वास्तु व ज्योतिष में विश्वास रखने लगे हैं। इसलिए वे इसमें बताए गए नुस्खों व उपायों के अपनाते हैं। ज्योतिष अौर वास्तु के अनुसार प्रत्येक दिन का किसी न किसी देव व ग्रह से संबंध होता है। इन दिनों में जो कार्य किया जाता है, उसका शुभ-अशुभ प्रभाव भी व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। तो आईए जानें कि किस दिन कौन सा सामान खरीदना शुभ फल देता है अौर कौन सा अशुभ माना जाता है। इन बातों का ध्यान रखकर खरीद-फरोख्त की जाए तो शुभ फलों के साथ धन प्राप्ति के साथ देवी लक्ष्मी की भी अपार कृपा होती है।


रविवार
रविवार के दिन लाल वस्तुएं, गेहूं, पर्स, दवाईयां, कैंची व आंखों या अग्नि से संबंधित सामान खरीदना शुभ होता है। इसके अतिरिक्त लोहे का सामान, फर्नीचर, हार्डवेयर, गार्डनिंग का सामान, व्हीकल ऐसेसरीज या गाड़ियों से संबंधित सामान खरीदना अशुभ होता है।

 
सोमवार
इस दिन चावल, बर्तन, दवाईयां, दूध से निर्मित मिठाईयां एवं डेयरी प्रोडक्ट अौर एक्वेरियम खरीदें। कॉपी-किताबें, अनाज, कला में प्रयोग होने वाली वस्तुएं जैसे संगीत या खेल का सामान, फोर व्हीलर अौर मोबाइल या कंप्यूटर की खरीद न करें।  
 

मंगलवार
मंगलवार को प्रापर्टी, किचन का सामान, लाल रंग की वस्तुएं या लाल अनाज, किसी भी प्रकार के शस्त्र अौर ज्वलनशील वस्तुएं खरीदें। पर्स, तिजोरी, सजावट का सामान, जूते, लोहे का सामान, फर्नीचर अौर मोबाइल न खरीदें।

 
बुधवार
बुधवार वाले दिन स्टेशनरी, कला में काम आने वाली वस्तुएं जैसे संगीत, खेल का सामान, गाड़ी, घर की सजावट से संबंधित सामान की खरीद करें। बर्तन, चावल, दवाईयां, ज्वलनशील वस्तुएं जैसे गैस-लकड़ी, एक्वेरियम की खरीद करना अशुभ होता है।
 

बृहस्पतिवार
इस दिन किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक एवं पूजा-पाठ का सामान, प्रॉपर्टी, फर्नीचर अौर वस्त्र खरीदने शुभ होते हैं। इसके अतिरिक्त आंखों से संबंधित सामान चश्मा, धारदार वस्तुएं, बर्तन, जल से संबंधित शो-पीस खरीदना अशुभ होता है।
 

शिव पूजा में करते हैं इस वस्तु का उपयोग तो नहीं प्राप्त होगा पूजन का फल

आज का शुभाशुभ: सोमवार दि॰ 26.02.18 चंद्र मिथुन राशि व आर्द्रा नक्षत्र, भाग्यांक 3, शुभरंग पीला, शुभदिशा पूर्वोत्तर, राहुकाल: प्रातः 7.30 से प्रातः 9.00 बजे तक। 


आज का महामंत्र: ॥ श्रीं चन्द्राय सत्पतये नमः ॥ इस चंद्र मंत्र से जीवन में शुभता बढ़ती है।


आज का विशेष उपाय: शुभता के लिए शहद मिले दूध से शिवलिंग पर अभिषेक करें। 


मेष: मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। पारिवारिक जीवन सुखी रहेगा। खोई हुई वस्तु मिलेगी। विदेशी व्यापार से जुडे़ लोगों को लाभ मिलेगा।


वृष: कार्यक्षेत्र में व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ेंगे। योजना अनुसार कार्य करेंगे। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। मानसिक रूप से आनंदित रहेंगे।


मिथुन: संतान की चिंता रहेगी। अजीर्णता वश स्वास्थ्य बिगड़ेगा। खर्च अधिक रहेगा। विवाद होगा व मानभंग की स्थिति झेलनी पड़ेगी।


कर्क: स्फूर्ति में कमी आएगी। हृदय विकार की अनुभूति होगी। परिजनों संग विवाद से मन में दुख होगा। सामाजिक मानहानि के योग हैं। 


सिंह: कार्य सफलता से प्रसन्नता रहेगी। भाई-बहन संग मधुर संबंध रहेंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ होगा। मानसिक उद्वेग रहेगा। 


कन्या: मधुर वाणी से लोग प्रभावित होंगे। पारिवारिक वातावरण अच्छा रहेगा। आर्थिक कार्य सुखपूर्वक संपन्न होंगे। नकारात्मकता से दूर रहें।


तुला: आत्मविश्वास से कार्य सिद्ध होगा। आर्थिक योजनाएं सफलतापूर्वक सिद्ध होंगी। मानसिक प्रसन्नता रहेगी। वस्त्राभूषण हेतु खर्च होगा।


वृश्चिक: स्वभाव उग्र रहेगा। वाणी पर संयम रखें। मानसिक चिंता से मन व्यग्र रहेगा। चोट लगने के योग हैं। स्नहीजनों संग विवाद होगा।

 

सिर पर चोट के निशान संग आज भी यहां विराजमान हैं गजानन

वैसे तो भगवान गणेश के विश्वभर में कई प्रसिद्ध मंदिर है। उन्हीं में से एक प्रसद्धि मंदिर तमिलनाडू में स्थित है। यह मंदिर लगभग 273 फुट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सिढ़ियों की चढा़ई करनी पड़ती है। भगवान गणेश का यह मंदिर तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) नामक स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बसा स्थापिक है। 


पहाड़ों में बसा होने के कारण यह मंदिर आकर्षण का केंद्र है। इसके आकर्षण का एक कारण इसकी सुदंरता व एक इससे संबंधित पौराणिक कथा। लोक मान्यताओं के अनुसार है इस मंदिर की कहानी रावण के भाई विभीषण से जुड़ी है।


इतिहास
यहां पर कथा प्रचलित है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने अपने भक्त और रावण के भाई विभीषण को भगवान विष्णु के ही एक रूप रंगनाथ की मूर्ति प्रदान की थी। विभीषण वह मूर्ति लेकर लंका जाने वाला था। वह राक्षस कुल का था, इसलिए सभी देवता नहीं चाहते थे कि मूर्ति विभीषण के साथ लंका जाए। सभी देवताओं ने भगवान गणेश से सहायता करने की प्रार्थना की। उस मूर्ति को लेकर यह मान्यता थी कि उन्हें जिस जगह पर रख दिया जाएगा, वह हमेशा के लिए उसी जगह पर स्थापित हो जाएगी। चलते-चलते जब विभीषण त्रिचि पहुंच गया तो वहां पर कावेरी नदी को देखकर उसमें स्नान करने का विचार उसके मन में आया। वह मूर्ति संभालने के लिए किसी को खोजने लगा।

नेता वही बन सकता है जो हर स्थिति में विवेक से काम ले

अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति टॉमस जैफरसन का जीवन बचपन में बहुत साधारण था। इनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। शायद इसीलिए वे मजदूरों के लिए में दया भाव अधिक रखते थे। वे उनकी मुश्किलों को बहुत अच्छे से जानते थे और चाहते थे कि अमेरिका में एक आदर्श कृषि प्रधान समाज की स्थापना हो। राष्ट्रपति बनने के बाद भी जैफरसन सादगी पसंद करते थे। वे उच्चवर्गीय जीवनशैली से दूर रहकर साधारण लोगों की तरह ही रहे। उन्हीं दिनों जैफरसन एक बड़े होटल में अकेले गए और वहां ठहरने के लिए होटल मालिक से एक कमरा मांगा। वे उस समय किसानों जैसी साधारण वेशभूषा में थे और साथ में चलने वाला राष्ट्रपति का लाव-लश्कर भी नहीं था।


इसलिए होटल मालिक ने उन्हें सामान्य इंसान समझकर कमरा देने से इंकार कर दिया। जैफरसन ने अपना असली परिचय नहीं दिया और चुपचाप वहां से चले गए। उनके जाने के बाद वहीं उपस्थित एक व्यक्ति ने होटल मालिक को उनका असली परिचय दिया, क्योंकि वह जैफरसन को पहचानता था। होटल मालिक को अपनी भूल का अहसास हुआ और उसने तत्काल अपने नौकर को जैफरसन को वापस बुलाने के लिए दौड़ाया।


जैफरसन अधिक दूर नहीं गए थे। नौकर ने उन्हें रोका और अपने मालिक की तरफ से उनसे माफी मांगते हुए होटल चलने की प्रार्थना की, लेकिन जैफरसन ने मना करते हुए कहा, 'जाकर अपने मालिक से कह देना कि तुम्हारे होटल में एक किसान के लिए जगह नहीं है, तो भला उसमें राष्ट्रपति कैसे ठहर सकता है?' यह कहकर जैफरसन दूसरे होटल में चले गए। अपने से ज्यादा जनता का ख्याल रखने वाला ही सच्चे अर्थों में राजा होता है। तुलसीदास ने इसीलिए कहा है, मुखिया मुख सो चाहिए, खानपान को एक। पालइ पोसई सकल अंग, तुलसी सहित विवेक।'


सीख- जो हर निर्णय लेने से पहले सिर्फ अपने बारे में नहीं अपने से जुड़े सभी लोगों के बारे में भी सोचे वही लोकप्रिय नेता बन सकता है।

ग्रहण की काली छाया कहीं कर न दे बर्बाद, शुक्रवार को ये करके हो जाएं आबाद

दिनांक 16 फरवरी 2018 को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकम तिथि और शतभिषा नक्षत्र होने के कारण इस दिन देवी पूजन का विशेष महत्व माना गया है। शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित है। यह दिन शुभता, धन-संपन्नता, प्रेम वात्सल्य तथा सुखी वैवाहिक जीवन को संबोधित करता है। पिछले पंद्रह दिनों में पड़े दो ग्रहणों के कारण संपूर्ण संसार में अशुभता और अनिश्चितता का वातावरण बना हुआ है। एकमात्र लक्ष्मी और गणेश एक ऐसा माध्यम हैं, जो शुभता, स्वास्थ्य और  सौम्यता के कारक हैं। एकमात्र इस शुक्रवार देवी लक्ष्मी के साथ में गणेश जी का पूजन करके आप शुभता प्राप्त कर सकते हैं तथा अशुभता को जीवन से निकाल सकते हैं। 


गणेश जी केतु के अधिपति हैं तथा राहू को दबा कर रखते हैं। शास्त्रों ने उन्हें सूर्य कोटि समप्रभा कहा है। लक्ष्मी जी चन्द्रमा की स्वामिनी हैं। राहू केतू से पड़ने वाले ग्रहण के प्रभाव सू्र्य और चन्द्र पर भी पड़ते हैं। जहां सूर्य आत्मा हैं और चन्द्रमा मन का प्रतीक है। अत: ग्रहण के बाद शुक्रवार को लक्ष्मी विनायक जी का पूजन करके हम अपनी आत्मा, मन, तन और धन की शुद्धि कर सकते हैं तथा पुन: अपने जीवन में शुभता और मंगल को ला सकते हैं। 


इस दिन श्वेत आभा लिए श्रीगणेश-लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। एक नारियल पर यज्ञोपवीत लपेटकर लक्ष्मी विनायक को अर्पित करें। पूजन उपरांत इस जनेऊ संग नारियल को जल प्रवाह करें।