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छात्रवृति के ऑनलाइन आवेदन भरने की तिथि 15 फरवरी

जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा दी जाने वाली उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति वर्ष 2017-18 की ऑनलाइन आवेदन की तिथियां 31जनवरी से बढाकर 15 फरवरी 2018 तक कर दिया है। विद्यार्थी विभागीय वेबसाइट www.sje.rajasthan.gov.in पर क्लिक कर छात्रवृति के आवेदन पत्र भर सकेंगे।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक डॉ0 समित शर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य के मूल निवासियों के अनुसूचित जाति, जनजाति, विशेष समूह योजना, अन्य पिछडा वर्ग, विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्धघुमंतू, मुख्यमंत्री सर्वजन उच्च शिक्षा उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना
के अंतगर्त राज्य के राजकीय एवं निजि मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं एवं राज्य के बाहर की राजकीय एवं राष्ट्रीय स्तर की राजकीय मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के पाठयक्रमों में प्रवेशित एवं अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को छात्रवृति दी जाती है।

उन्होंने बताया कि 15 फरवरी 2018 तक विद्यार्थी के द्वारा पेपरलेस ऑनलाईन आवेदन पत्र पंजीकरण कराया जा सकेगा तथा 28 फरवरी 2018 तक शिक्षण संस्थाओं को विद्यार्थियों से प्राप्त आवेदन पत्रों की गहन जांच कर पात्र आवेदन पत्र स्वीकृृतकर्ता अधिकारियों को फारवर्ड कर सकेंगे।

पुलिस और फायर ब्रिगेड में पदों पर वैंकेसी, ऐसे करें आवेदन

पटना। बिहार में पुलिस और फायर ब्रिगेड में इस महीने (फरवरी) बडे पैमाने पर चालकों की बहाली होगी। इसके लिए केन्द्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) विज्ञापन निकालेगा। चालक सिपाही के 700 और अग्निक चालक (फायर मैन चालक) के 969 पदों के लिए एक साथ परीक्षा ली जाएगी। जल्द ही ऑनलाइन फॉर्म भरने की तारीख घोषित होगी। 

चालक सिपाही और अग्निक चालक पद के इच्छुक अभ्यर्थियों को अब लिखित परीक्षा भी देनी होगी। पहले सिर्फ शारीरिक और वाहन चलाने की परीक्षा होती थी। बहाली के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के तहत पहले लिखित परीक्षा होगी। हालांकि इसके आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार नहीं होगी। अभ्यर्थियों को सिर्फ यह परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद शारीरिक और फिर वाहन चलाने की परीक्षा में शामिल होना होगा।

पड़ोसियों के साथ बनाए रखें सामंजस्य

अरस्तू ने ठीक ही कहा है, ‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।’ वस्तुत: समाज के अभाव में मनुष्य का सर्वांगीण विकास बिल्कुल संभव नहीं है। समाज में पड़ोसियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अत: नीचे दी गई कुछ बातों को ध्यान में रखकर पड़ोसियों के साथ मधुर व्यवहार को कायम रखा जा सकता है-

21वीं सदी की इस दौड़ में जातीयता की भावना को दूर रख एक ही जाति ‘इंसान’ के सिद्धांत के आधार पर पड़ोसियों के साथ अपनापन बनाए रखें।

धर्म के नाम पर भी किसी तरह का भेदभाव न करें। घरेलू बातों का आदान-प्रदान यथासंभव न करने का प्रयास करें। आर्थिक मामलों में न तो पड़ोसियों को बड़ा या छोटा मानें और न ही स्वयं को असहाय मानकर पड़ोसियों से दूर रहें बल्कि मित्रवत व्यवहार रखें।


जमीन-संबंधी छोटे-मोटे मामलों को नजरअंदाज करने का प्रयास करें।


पड़ोसियों से जलन की भावना तो मन में बिल्कुल न आने दें।


संकट तथा बीमारी आदि में समय-समय पर पड़ोसियों से कुशलक्षेम अवश्य पूछें।


बच्चों के झगड़ों का निपटारा करने में खुद को न उलझाएं।


रुपए-पैसे, घरेलू सामग्रियों एवं भोज्य-पदार्थों का आदान-प्रदान कम से कम करें।

दुख में भी सुख तलाश करने वाले लोग ही कर पाते हैं मानवता की सेवा

भगवान कृष्ण कहते हैं कि जिसका मन वश में है, जो राग-द्वेष से रहित है, वही स्थायी प्रसन्नता को प्राप्त करता है। जो व्यक्ति अपने मन को वश में कर लेता है, उसी को कर्मयोगी भी कहा जाता है। इस संसार में मनुष्य दो प्रकार के हैं। एक तो दैवीय प्रकृति वाले, दूसरे आसुरी प्रकृति वाले। इसी तरह से हमारे मन में दो तरह का चिंतन चलता है। सकारात्मक एवं नकारात्मक। सकारात्मक सोच वाले खुश और नकारात्मक सोच वाले दुखी देखे जाते हैं।


हमारी सोच ही हमें सुखी और दुखी बनाती है। हमारी सोच या चिंतन जैसा होता है, वह हमारे चेहरे पर, हमारे व्यवहार, हमारे कार्यों में दिखने लगता है। जब हमारे अंदर भय और शंकाएं प्रवेश कर जाती हैं तो हमारी आंखों व हमारे हाव-भाव से इसका पता चलने लगता है और हमारे भीतर जब खुशियां प्रवेश करती हैं या हमारा चिंतन हास्य या खुशी का होता है तो हमारे सारे व्यक्तित्व से खुशी झलकती है। 

 

जब हम मुस्कराहट के साथ लोगों से मिलते हैं तो सामने वाला भी हमसे खुशी के साथ मिलता है। जब हम दुखी होते हैं या गुस्से में होते हैं तो दूसरे लोग हमें पसंद नहीं करते और वे हमसे दूर जाने का प्रयास करते हैं। बहुत से लोगों की सोच या चिंतन अपना दुख बताने की होती है। ऐसे लोग खुद तो दुखी रहते ही हैं, दूसरों को भी दुखी करते हैं। हमारा चिंतन यदि सकारात्मक है तो हममें दया, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार और सद्गुण देने वाली शक्ति का संचार होता है। यदि हमारा चिंतन नकारात्मक है तो हम राग-द्वेष के बंधन में बंधते चले जाते हैं।


महाभारत में श्रीकृष्ण ने सकारात्मक चिंतन के कारण ही दुर्योधन के सामने पांडवों को पांच गांव देने का प्रस्ताव रखा था, पर नकारात्मक सोच वाले दुर्योधन ने प्रस्ताव ठुकराकर युद्ध करने का निश्चय किया, जिसका परिणाम भारी जन-धन की हानि के रूप में सामने आया। इसलिए हम कह सकते हैं कि दुख और सुख का एकमात्र कारण हमारा चिंतन है। जो दुखों में भी सुखों की तलाश करते हैं, वही सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा कर पाते हैं और संसार को खुशियां बांटते हैं। हमारा चिंतन सकारात्मक ही हो।

भारी पड़ सकती हैं महिलाओं पर ये गलतियां

वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोई को घर का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। घर में कई बीमारियों और परेशानियों का कारण किचन से जुड़े वास्तुदोष हो सकते हैं। आप किस दिशा में मुंह करके खाना बनाते हैं, किस दिशा में मुंह करके खाना खाते हैं इन सब बातों का वास्तु के अनुसार बहुत असर पड़ता है। यदि घर की रसोई गलत दिशा में हो तो घर-परिवार के सदस्यों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, अगर गलत दिशा में मुंह रखकर खाना बनाया जाता है तो भी घर में अशांति, झगड़े, धन हानि और बीमारियां बढ़ने लगती हैं। इन सबका सबसे बुरा प्रभाव घर की महिलाओं पर पड़ता है। उनके विचारों में नकारात्मकता बढ़ने लगती हैं। अनजाना डर भी बना रहता है। जिससे घर में विवाद और तनाव बढ़ने लगता है।

अगर वास्तु से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो परिवार के लोगों को कई परेशानियों से बचाया जा सकता है। आईए जानें ये बातें- वास्तु के अनुसार घर का किचन पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच वाले कोण में होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर उस घर में आशांति और अन्य तरह की परेशानियां होने लगती हैं। इस समस्या से बचने के लिए महिलाओं को घर के आग्नेय कोण यानि पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच वाले हिस्से में ही किचन बनवाना चाहिए और सही दिशा में मुंह रखकर खाना बनाना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर मुंह करके खाना बनान से बिजनैस में लगातार नुक्सान हो सकता है। साथ ही धन-संपत्ति की हानी हो सकती है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुंह कर खाना पकाने से घर की सुख-शांति भंग होती     है। घर में लड़ाई-झगड़ों की संभावना बढ़ने लगती हैं पश्चिम-दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाने से घर के सदस्यों को त्वचा और हड्डी के रोग होने का डर रहता है। दक्षिण दिशा का ओर मुंह करके खाना बनाने से घर की महिलाओं को कई तरह के रोगों से जूझना पड़ सकता है।

घर-परिवार में सुख-शांति हेतु पूर्व दिशा की ओर खाना बनाना सबसे अच्छा माना जाता है। 

वास्तु के अनुसार अगर खिड़की पूर्व दिशा की ओर हो तो ये बहुत घर के सदस्यों के लिए शुभ रहता है।

एेसे व्यक्ति न करने योग्य इंसान पर भी कर लेते हैं विश्वास

विदुर जी जिन्हें महाभारत में बहुत महानता प्राप्त हुई। उनकी नीतियां महाभारत के समय में भी बहुत उपयोगी साबित हुई थी। वे महाराज धृतराष्ट्र के महामंत्री थे तथा इन्होंने महाभारत के युद्ध को टालने का हरसंभव प्रयास किया था परंतु इसमें असफल रहे। लेकिन युद्ध के बाद पांडवों ने उनकी ही आज्ञा तथा सलाह-मशविरा लेकर शासन आरंभ किया और आदर्श राज्य की स्थापना की। यदि व्यक्ति आज भी इनकी बातों पर ध्यान दे तो शीघ्र ही सफलता प्राप्त हो सकती है। उनके इन उपदेशों को विदुर नीति के नाम से जाना जाता है। आगे जानें विदुर जी नीतियों के श्लोक के बारे में-

श्लोक- एकं हन्यान्न वा हन्यादिषुर्मुक्तो धनुष्मता।
बुद्धिर्बुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद् राष्ट्रम सराजकम्।। 

अर्थ: किसी धनुर्धर वीर के द्वारा छोड़ा हुआ बाण संभव है किसी एक को भी मारे या न मारे। मगर बुद्धिमान द्वारा प्रयुक्त की हुई बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।

श्लोक-अनाहूत: प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते।
अविश्वस्ते विश्वसिति मूढ़चेता नराधम:।।

अर्थ: मूढ़ चित्त वाला नीच व्यक्ति बिना बुलाए ही अंदर चला आता है, बिना पूछे ही बोलने लगता है तथा जो विश्वाश करने योग्य नहीं हैं उनपर भी विश्वास कर लेता है।

श्लोक- त्रिविधं नरकस्येदं द्वारम नाशनमात्मन: । 
काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्।। 

अर्थ- काम, क्रोध, और लोभ– ये आत्मा का नाश करने वाले नरक के तीन दरवाजे हैं, अतः इन तीनों को त्याग देना चाहिए। 

महाभारत में विदुर जी ने धृतराष्ट्र को बताया था कि यदि किसी व्यक्ति के मन में काम, क्रोध अथवा लोभ का भाव आ जाए तो उसे नींद नहीं आती है। जब तक ऐसे व्यक्ति की इच्छाएं तृप्त नहीं हो जाती है, तब तक वह सो नहीं सकता है। काम, क्रोध तथा लोभ की भावना व्यक्ति के मन को अशांत कर देती है और वह किसी भी कार्य को ठीक से नहीं कर पाता है। यह भावना स्त्री और पुरुष दोनों की नींद उड़ा देती है। इसके साथ ही कामभाव व्यक्ति को सदैव पतन की ओर ले जाता है। अतः अपने जीवनसाथी के अतिरिक्त अन्य किसी के प्रति कामभाव नहीं रखना चाहिए और उसमें भी अति कामभाव से सदा दूर ही रहना चाहिए। 
 

चाणक्य नीति- इन 4 से मिलता है केवल पलभर का आनंद

वस्तुएं होती हैं जिनसे केवल पल दो पल का खुशी व आनंद मिलता है। ये चीजें कुछ ही समय में नष्ट हो जाती है। इन में से 4 का वर्णन आचार्य चाणक्य जी ने अपनी एक नीति में किया है। जिस से व्यक्ति को सिर्फ कुछ ही समय के लिए खुशी एवं आनंद मिलता है। ये बातें वो 4 बातें-


आकाश में घिरे हुए बादलों की छाया
जब भी आकाश में बादल घिर आते हैं तो उसकी छाया बहुत ही सुखद लगती है। सूर्य की गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन छाया का ये आनंद पलभर का ही होता है। बादल पलभर में ही चले जाते हैं और सूर्य की गर्मी फिर से बढ़ जाती है।


 
किसी बुरे व्यक्ति की सेवा से मिला लाभ

यदि किसी बुरे व्यक्ति की सेवा करके कोई लाभ प्राप्त किया गया है तो वह भी पलभर का ही आनंद देता है। बुरे व्यक्ति की न तो दुश्मनी अच्छी होती है और न ही दोस्ती। ऐसे लोगों से दूर रहने में ही भलाई है। गलत काम करने वाले व्यक्ति की संगत से लाभ मिल सकता है लेकिन हम बड़ी-बड़ी परेशानियों में भी उलझ सकते हैं। इनसे बचना चाहिए।


दुष्ट इंसान का प्रेम
यदि कोई व्यक्ति दुष्ट स्वभाव का है तो उसका प्रेम पलभर के लिए ही होता है। दुष्ट स्वभाव के लोग पलभर में ही प्रेम भूलकर दुष्टता कर सकते हैं। इन लोगों का प्रेम थोड़े समय के लिए ही आनंद दे सकता है। यदि लंबे समय तक सुखी रहना चाहते हैं तो इन लोगों के क्षणिक प्रेम में नहीं उलझना चाहिए और इनसे दूर रहना चाहिए।

 

भगवान शिव को करना चाहतें है प्रसन्न तो परिक्रमा करते समय रखें इन बातों का ध्यान

 

शिवलिंग को भगवान शंकर का ही स्वरूप माना जाता है। ग्रथों में इसके पूजन के बारें में विस्तार में बताया गया है। इसमें शिवलिंग की पूजा और परिक्रमा को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं जिससे भगवान शंकर जल्द प्रसन्न होकर इंसान की समस्त मनोकामनाएं पूरी करते हैं। तो अगर आप भी भगवान शंकर को प्रसन्न करना चाहते हैं तो शिवलिंग की पूजा और परिक्रमा के इन नियमों को ध्यान में रख कर ही शिवलिंग की पूजा अर्चना करें। 

ये हैं नियम शिवलिंग की पूजा और परिक्रमा के नियम:
परिक्रमा के दौरान शिवलिंग के चारों ओर घूमने से भगवान शिव नाराज होते हैं। क्योंकि असल में शिवलिंग के नीचे का हिस्सा जहां से शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल बाहर आता है वह पार्वती का भाग माना जाता है। इसलिए शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग की परिक्रमा के दौरान आधी परिक्रमा की जाती है और फिर वापस लौटकर दूसरी परिक्रमा पूर्ण की जाती है। 


शिवपुराण के अनुसार कोई भी शिवलिंग की जल की निकासी यानि कि निर्मली को लांघता है तो वह पापी कहलाता है और उसके भीतर की समस्त शक्ति छीन जाती है। इसलिए निर्मली तक परिक्रमा करनी चाहिए, यानि की आधी परिक्रमा। ये भी ध्यान रखें कि कभी भी जलधारी के सामने से शिवलिंग की पूजा भी न करें।


शिवलिंग के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने से दोष लगता है और व्यक्ति पुण्य के बजाए पाप का भागी बन जाता है।


शिवलिंग पर हल्दी या मेहंदी न चढ़ाएं, क्योंकि यह देवी पूजन की सामग्री है।


शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।


शिवलिंग की पूजा करते समय मुंह दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए।


पूजा करते समय शिवलिंग के ऊपरी हिस्से को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

अनमोल वचन: सच की विजय देर से होती है

 श्री राम जी कहते हैं-रामेश्वर में मेरे बनाए सेतु के दर्शन करने वाला संसार सागर से तर जाएगा। भगवान शंकर जी की कृपा उस पर सदैव बनी रहेगी। —विजय शंकर 

सामग्री आवश्यक नहीं, प्रेमपूर्वक बोलकर भी अतिथि का सत्कार करना पर्याप्त है।  —हितोपदेश 

यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है, दरवाजे खोल दो तो कोई पूछने नहीं आएगा।

ऐसी कोई भी वस्तु नहीं जो अभ्यास से प्राप्त न हो सकती हो। —संत ज्ञानेश्वर 


पैसे से दुख कभी खरीदा नहीं जाता और दुख का कोई खरीदार नहीं होता।

हम दबाव में अनुशासन नहीं सीख सकते।  —महात्मा गांधी

अन्याय की बुनियाद पर स्थापित राज्य कभी नहीं टिकता।    —सेनेका 

क्रूरता एवं दुर्बलताओं से ही समस्त अत्याचार जन्म लेते हैं।  —सेनेका 

सच की विजय देर से होती है।

अनमोल वचन: सच की विजय देर से होती है


प्रभु श्री राम जी कहते हैं-रामेश्वर में मेरे बनाए सेतु के दर्शन करने वाला संसार सागर से तर जाएगा। भगवान शंकर जी की कृपा उस पर सदैव बनी रहेगी।  —विजय शंकर 

सामग्री आवश्यक नहीं, प्रेमपूर्वक बोलकर भी अतिथि का सत्कार करना पर्याप्त है। —हितोपदेश 

यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है, दरवाजे खोल दो तो कोई पूछने नहीं आएगा।

ऐसी कोई भी वस्तु नहीं जो अभ्यास से प्राप्त न हो सकती हो। —संत ज्ञानेश्वर 


पैसे से दुख कभी खरीदा नहीं जाता और दुख का कोई खरीदार नहीं होता।

हम दबाव में अनुशासन नहीं सीख सकते।  —महात्मा गांधी

अन्याय की बुनियाद पर स्थापित राज्य कभी नहीं टिकता।    —सेनेका 

क्रूरता एवं दुर्बलताओं से ही समस्त अत्याचार जन्म लेते हैं।  —सेनेका 

सच की विजय देर से होती है। —गीता 

इसलिए तो बच्चों पर नूर-सा बरसता है, शरारतें करते हैं, साजिशें नहीं करते।


महंगी से महंगी घड़ी पहन कर देख लो, वक्त फिर भी व्यक्ति के हिसाब से नहीं चलता। —कृष्ण सेठी, जालंधर
 

मन के शीशे को पहले साफ कर लो, फिर तुम्हारे विचार शुद्ध-पवित्र हो जाएंगे तब प्रभु भक्ति में आपका मन लगने लग जाएगा। —संत सुभाष शास्त्री


अपने भीतर जो दायरा बना कर बैठे हो-उस दायरे से बाहर निकलो। अपने भीतर उत्साह को जाग्रत करो। परिश्रम कर के आगे बढ़ो। —श्री-श्री रविशंकर 


सुंदरता तब ही अच्छी लगती है जब मन के भाव भी शुद्ध पवित्र हों। आपके मन के भाव ही आपके चेहरे पर झलकते हैं। हमारा चेहरा बोलता है। —रामानुजाचार्य 


हम अपने शत्रु का कभी भला नहीं सोचते-भगवान श्री राम जी के पास उनके शत्रु का भाई विभीषण शरण में आया तो भगवान ने उसे अपने गले लगा लिया। —संत मोरारी बापू 

संतों के दर्शन करो-सत्संग में जाया करो। बड़े बुजुर्गों का सत्कार करो उनसे आशीर्वाद लो। हंस बन जाओगे।  —अतुल कृष्ण भारद्वाज 


आलसी व्यक्ति नाली के कीड़े की तरह वासना, भोग के सुख को ही जीवन का लक्ष्य मानता है। आलसी व्यक्ति जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता।  —डा. रामचरण महेंद्र —अमरनाथ भल्ला, लुधियाना

इसलिए तो बच्चों पर नूर-सा बरसता है, शरारतें करते हैं, साजिशें नहीं करते।


महंगी से महंगी घड़ी पहन कर देख लो, वक्त फिर भी व्यक्ति के हिसाब से नहीं चलता। —कृष्ण सेठी, जालंधर
 
मन के शीशे को पहले साफ कर लो, फिर तुम्हारे विचार शुद्ध-पवित्र हो जाएंगे तब प्रभु भक्ति में आपका मन लगने लग जाएगा। —संत सुभाष शास्त्री


अपने भीतर जो दायरा बना कर बैठे हो-उस दायरे से बाहर निकलो। अपने भीतर उत्साह को जाग्रत करो। परिश्रम कर के आगे बढ़ो।  —श्री-श्री रविशंकर 


सुंदरता तब ही अच्छी लगती है जब मन के भाव भी शुद्ध पवित्र हों। आपके मन के भाव ही आपके चेहरे पर झलकते हैं। हमारा चेहरा बोलता है।  —रामानुजाचार्य 


हम अपने शत्रु का कभी भला नहीं सोचते-भगवान श्री राम जी के पास उनके शत्रु का भाई विभीषण शरण में आया तो भगवान ने उसे अपने गले लगा लिया। —संत मोरारी बापू 

संतों के दर्शन करो-सत्संग में जाया करो। बड़े बुजुर्गों का सत्कार करो उनसे आशीर्वाद लो। हंस बन जाओगे। —अतुल कृष्ण भारद्वाज 


आलसी व्यक्ति नाली के कीड़े की तरह वासना, भोग के सुख को ही जीवन का लक्ष्य मानता है। आलसी व्यक्ति जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकता। —डा. रामचरण महेंद्र —अमरनाथ भल्ला, लुधियाना

इन पौधों को घर में रखने से धन संबंधी समस्या होंगी खत्म

 व्यक्ति को हर तरफ से नुक्सान का सामना करना पड़ता है, जैसे आमदनी में घाटा, नौकरी व बिजनैस में नुक्सान आदि। परंतु इन सब बातों का कारण घर से जुड़े पेड़-पौधों से हो सकता है, इसके बारे में व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। वास्तु की माने तो पेड़-पौधे भी धन-संपत्ति के मामले में घर पर बहुत प्रभाव डालते हैं। तो आईए जानें एेसे पेड़-पौधों के बारे में जिनकी जड़ तक लक्ष्मी जी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। घर की उत्तर या पूर्व दिशा में या फिर उत्तर-पूर्व के कोने में कम ऊंचाई वाले पौधे जैसे तुलसी, गेंदा, आंवला, चम्पा, चमेली, शंखपुष्पी, बहेड़ा आदि लगाने चाहिए। ये पौधे घर में बरकत बढ़ाते हैं। इनसे दरिद्रता और दुर्भाग्य भी खत्म हो जाता है। इनके अलावा ये हवा और वातावरण को शुद्ध करते हैं। उत्तर-पूर्व दिशा में ये छोटे पौधे होने से उगते सूर्य की सकारात्मक और शक्तिशाली किरणें आसानी से घर में प्रवेश कर सकती हैं। इनमें से कुछ पौधोंं की जड़ को घर में पैसों के साथ रखने से धन संबंधी का फायदा तो होता ही है। इसके साथ मां लक्ष्मी के प्रसन्न होने से घर की बरकत भी बढ़ने लगती है।

 

वास्तु-फेंगशुई: घर में न लगाएं ये फूल, कभी उन्नति नहीं कर पाएगा परिवार

फूलों से मानसिक असंतुलन को संतुलित किया जा सकता है क्यों कि यह प्रेम के प्रतीक होते हैं। फिर चाहे फूल कृत्रिम ही क्यों न हों? यह जीवन में सक्रियता को बढ़ावा देते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक होते हैं। फूल मन को सुगंध देते हैं इसके अलावा भी घर के वास्तु में भी सहायक हैं।

लाल रंग के फूल दक्षिण दिशा और पीले रंग के फूल दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व में होना चाहिए। ऐसा होने पर व्यक्ति उत्साहित रहता है।

ताजे फूल शयन कक्ष में नहीं रखना चाहिए। सूखे फूलों को गुलदस्ते में से निकाल देना चाहिए। गुलदस्ते में फूल ताजे ही लगाएं। इसे दक्षिण में ही रखें। ऐसा करने से आपको सम्मान की प्राप्ति होती है।

परिवार के सदस्यों के बीच संबंध सुधारने के लिए बैंगनी रंग के, बैंगनी गुलदस्ते में अग्नि कोण (संबंध क्षेत्र) में रखना ठीक रहता है। ध्यान रखें फूल अगर सूख जाएं तो इन्हें निकाल कर ताजे फूलों का उपयोग ही करना चाहिए।


फूल पौधे के तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। लकड़ी तत्व का अर्थ है। विकास, उन्नति, फैलाव आदि। इसलिए ताजे फूलों को व्यवसाय या कार्यालय में रखना पसंद करते हैं। इसके नकारात्मक ऊर्जा संतुलित रहती है।

विज्ञान कहता है कि ताजे फूल वातावरण को शुद्ध करते हैं। ये दरवाजे के पास रखे होना चाहिए। जिससे दरवाजे से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होती है।

बोनसाई पौधे भले ही खूबसूरत हों पर इन्हें घर में नहीं रखना चाहिए। अगर इन्हें रखते हैं तो घर के अंदर के विकास को रोक देते हैं। इसलिए इनका उपयोग वास्तु और फेंगशुई दोनों में ही वर्जित माना गया है।

विवाह उपरांत कई वर्ष इसी स्थान पर रहे थे शिव-पार्वती

हिन्दू धर्म में भगवान शिव की ही प्रतिमा एवं लिंग रूप में पूजा की जाती है। शिवलिंग को सृष्टि की सर्वव्यापकता का प्रतीक माना जाता है इसलिए देवों के देव भगवान शिव जी को समस्त जगत का स्वामी कहा जाता है। देश-विदेश में भगवान भोलेनाथ के कई प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, ऐसा ही एक प्राचीन स्थान लुधियाना से 35 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ रोड पर नीलों नहर पुल से आगे समराला से पहले गांव चहिलां में प्राचीन श्री मुक्तेश्वर महादेव शिव मंदिर (मुक्तिधाम) के नाम से विख्यात है। 


इस मंदिर के संबंध में प्रचलित प्राचीन कथा के अनुसार भगवान शंकर एवं माता पार्वती के विवाह उपरांत दोनों इसी स्थान पर कई वर्षों तक यहां रहे। यहां उन्होंने प्रथम युगल नृत्य किया। तत्पश्चात इन दोनों की युगल शक्ति इस धरती पर समा गई। तब माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि आने वाले समय में इस स्थान का क्या महत्व होगा। 


इस पर भगवान शिव ने कहा कि जो भी कोई यहां आकर अपने पापों की क्षमा मांगेगा, मैं उसके पाप नष्ट करके उसे मुक्ति प्रदान करूंगा। यह स्थान आने वाले समय में मुक्तिधाम के नाम से जाना जाएगा। भगवान भोलेनाथ ने कहा कि मैं इस मंदिर में निवास करके यहां आने वाले लोगों का उद्धार करूंगा। यहां मेरा शीश एवं जटाओं के रूप में एक शिवलिंग होगा। यहां वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और मैं खुद सदा विराजमान रहेंगे तथा यहां के सरोवर में स्नान करने वाले को सुख-शांति, समृद्धि प्राप्त होगी। 


यहां  स्थापित मूर्तियां अति प्राचीन बताई जाती हैं। इतिहास में इस जगह को मुक्ति मठ के नाम से जाना जाता है। यहां पहले बहुत सुंदर सरोवर थे, जिनके अवशेष अब भी देखने को मिलते हैं।  


मंदिर के पुजारी पंडित सुरेश ने बताया कि इस मंदिर में भगवान शंकर सबसे छोटे 3 इंच के शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। यहां भगवान शिव और पार्वती का स्थान होने के कारण भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। सावन माह में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। शिवलिंग को हर दिन कई प्रकार के सुगंधित फूलों से सजाया जाता है।