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सोमवार का गुडलक: दूर होगी घर-परिवार से दरिद्रता

सोमवार दिनांक. 30.04.18 को वैशाख के अंतिम दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन सत्यविनायक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन में पवित्र सरिताओं में मुख्यतः नर्मदा, शिप्रा व गंगा नदी में प्रातः काल में स्नान करने का शास्त्रों में विधान है। जिससे सब पापों से निवृत्ती मिलती है। पद्म पुराण के अनुसार वैशाख मास में प्रात: स्नान करने पर अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। इस दिन मिष्ठान, सत्तू, जलपात्र, वस्त्र दान करने व पितृ तर्पण करने से बहुत पुण्य प्राप्ति होती है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु के नवे अवतार बुद्ध का जन्म हुआ था। इस पूर्णिमा को सत्यविनायक पूर्णिमा भी कहते हैं।


श्रीकृष्ण के बचपन के दरिद्र मित्र ब्राह्मण सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उनको सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की दरिद्रता दूर हुई थी व सुदामा सर्वसुख सम्पन्न व ऐश्वर्यशाली हो गए थे। इस दिन यमराज व चित्रगुप्त की पूजा करने का विधान है। इस व्रत से यमराज की प्रसन्नता से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन यमराज के निमित्त जलपूर्ण कलश व पकवान दान करने से गोदान के समान फल मिलता है। पांच ब्राह्मणों को मीठे तिल दान देने से सब पापों का क्षय होता है। इस दिन पानी में तिल मिलाकर स्नान किया जाता है। घी, चीनी व तिलों से भरा पात्र भगवान सत्यनारायण को चढ़ाया जाता है। घी, चीनी व तिलों से अग्नि में आहुति दी जाती है। तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। तिल घी व शहद का तर्पण किया जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण का व्रत करने से सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है, सर्व कार्यों में जीत मिलती है, सर्व रोगों का नाश होता है, पारिवारिक संबंध सुदृढ़ होते हैं।

   
पूजन विधि: घर की उत्तर दिशा में सफ़ेद कपड़ा बिछाकर दो कलश स्थापित करें। पीतल का कलश भगवान नारायण के लिए और स्टील का कलश यमराज के लिए। जल भरे पीतल व स्टील के कलश पर नारियल रखकर दोनों का दशोंपचार पूजन करें। केसर मिले गौघृत का दीप करें, चंदन से धूप करें, सफ़ेद व पीले रंग के फूल चढ़ाएं, चंदन से तिलक करें, दूध-शहद चढ़ाएं। घी, तिल व शहद अर्पित करें व मावे की मिठाई का भोग लगाएं तथा 1-1 माला इन विशिष्ट मंत्रों को जपें। पूजन के बाद सामाग्री ब्राह्मणों को दान करें।


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सत्यविनायक पूर्णिमा: यमराज देंगे अकाल मृत्यु से मु्क्ति का वरदान

 वैशाख के अंतिम दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन सत्यविनायक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन में पवित्र सरिताओं में मुख्यतः नर्मदा, शिप्रा व गंगा नदी में प्रातः काल में स्नान करने का शास्त्रों में विधान है। जिससे सब पापों से निवृत्ती मिलती है। पद्म पुराण के अनुसार वैशाख मास में प्रात: स्नान करने पर अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। इस दिन मिष्ठान, सत्तू, जलपात्र, वस्त्र दान करने व पितृ तर्पण करने से बहुत पुण्य प्राप्ति होती है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु के नवे अवतार बुद्ध का जन्म हुआ था। इस पूर्णिमा को सत्यविनायक पूर्णिमा भी कहते हैं।श्रीकृष्ण के बचपन के दरिद्र मित्र ब्राह्मण सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उनको सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की दरिद्रता दूर हुई थी व सुदामा सर्वसुख सम्पन्न व ऐश्वर्यशाली हो गए थे। इस दिन यमराज व चित्रगुप्त की पूजा करने का विधान है। इस व्रत से यमराज की प्रसन्नता से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन यमराज के निमित्त जलपूर्ण कलश व पकवान दान करने से गोदान के समान फल मिलता है। पांच ब्राह्मणों को मीठे तिल दान देने से सब पापों का क्षय होता है। इस दिन पानी में तिल मिलाकर स्नान किया जाता है। घी, चीनी व तिलों से भरा पात्र भगवान सत्यनारायण को चढ़ाया जाता है। घी, चीनी व तिलों से अग्नि में आहुति दी जाती है। तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। तिल घी व शहद का तर्पण किया जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण का व्रत करने से सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है, सर्व कार्यों में जीत मिलती है, सर्व रोगों का नाश होता है, पारिवारिक संबंध सुदृढ़ होते हैं।

  पूजन विधि: घर की उत्तर दिशा में सफ़ेद कपड़ा बिछाकर दो कलश स्थापित करें। पीतल का कलश भगवान नारायण के लिए और स्टील का कलश यमराज के लिए। जल भरे पीतल व स्टील के कलश पर नारियल रखकर दोनों का दशोंपचार पूजन करें। केसर मिले गौघृत का दीप करें, चंदन से धूप करें, सफ़ेद व पीले रंग के फूल चढ़ाएं, चंदन से तिलक करें, दूध-शहद चढ़ाएं। घी, तिल व शहद अर्पित करें व मावे की मिठाई का भोग लगाएं तथा 1-1 माला इन विशिष्ट मंत्रों को जपें। पूजन के बाद सामाग्री ब्राह्मणों को दान करें।


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आज सूर्य बदलेंगे घर, कौन होगा बेघर

 रात 12 बजे सूर्यदेव भरणी नक्षत्र में प्रविष्ट करने जा रहे हैं। 11 मई की शाम 06:13 तक यहीं पर वास करेंगे। सूर्य के घर बदलने का प्रभाव हर नामाक्षर और नक्षत्र वाले व्यक्तियों पर होगा। आईए जानें आपके नामाक्षर पर क्या शुभ प्रभाव पड़ेगा और अशुभता से बचने के लिए क्या करना होगा-


भरणी, कृतिका और रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक या जिनका नाम ल, अ, ई, उ, ए और व अक्षर से शुरू होता है, उन्हें 11 मई तक ज्वलंतशील चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए अथवा उनका उपयोग करते हुए बेहद सतर्कता रखने की जरूरत है। यदि कोई नई प्रॉपर्टी लेने की सोच रहे हैं तो 11 मई तक इंतजार करें। सूर्य के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए 11 मई तक हर रोज सुबह घर के सभी खिड़कियां और दरवाजें खोल दें, जिससे सूर्य की सकारात्मकता घर में प्रवेश करेगी। कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी में भी बैठें।


मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक या जिनका नाम व, क, घ, ङ, छ, ह और ड से आरंभ होेता है। उनके मिजाज कुछ बिगड़े-बिगड़े रहेंगे, बोरियत के चलते किसी काम में मन नहीं लगेगा। समय पर कोई भी काम पूरा नहीं कर पाएंगे। इस अशुभता से बचने के लिए रात को सोने से पहले अपने पिलो के पास 5 मूली या 5 बादाम रखें। सुबह शुद्ध होकर मूली-बादाम किसी भी धार्मिक स्थान पर रख आएं।


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शनिवार का गुडलक: नृसिंह जयंती पर होगा हर दुख का अंत

शनिवार दिनांक 28.04.18 को वैसाख शुक्ल चतुर्दशी के उपलक्ष्य में नृसिंह जयंती पर्व मनाया जाएगा। विष्णु पुराण के अनुसार विष्णु के प्रमुख दस अवतारों में से नृसिंह देव चौथा अवतार माने जाते हैं। इस अवतार में भगवान विष्णु आधे मनुष्य अर्थात नर व आधे शेर अर्थात सिंह के रूप में अवतरित हुए थे। शास्त्रनुसार कश्यप ऋषि व उनकी दैत्य पत्नी दिति के दो पुत्र हिरण्याक्ष व हिरण्यकश्यप थे। विष्णु के वराह अवतार में हरिण्याक्ष के वध से क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भाई की मृत्यु का बदला विष्णु जी से लेने के लिए ब्रह्मदेव का कठोर तप करके उनसे अजय होने का वरदान प्राप्त किया और स्वर्ग पर अधिपत्य स्थापित करके तीनों लोकों पर स्वामित्व बना लिया। हिरण्यकश्यप अपनी शक्ति के अहंकार में प्रजा पर भी अत्याचार करने लगा।


हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद अपने पिता से पूर्णतः अलग था। वो बचपन से ही विष्णु भगवान का भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद का मन विष्णु भगवान की भक्ति से हटाने का बहुत प्रयास किया परंतु असफल रहा। क्रोधित हिरण्यकश्यप ने एक द्वार से सटे खंबे से प्रह्लाद को बांधकर खंबे पर अपने गदा से प्रहार किया। तभी खंभे को चीरकर नृसिंह देव प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप को उठाकर महल की दहलीज पर ले आए। नृसिंह भगवान ने उसे अपनी गोद में लिटाकर अपने नाखूनों से उसका सीना चीरकर वध कर दिया। वध का स्थान न दहलीज था न घर के भीतर था, न बाहर, नृसिंह जी की गोद थी। न धरती थी न ही आकाश, उस समय गोधुलि बेला थी यानी न दिन था और न रात। नृसिंह जी आधे मानव व आधे पशु थे, नृसिंह जी के नाखून थे, न अस्त्र और न ही शस्त्र था। अतः यह दिन नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान नृसिंह के निमित व्रत पूजन व उपाय से सर्व मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, समस्त दुखों का निवारण होता है तथा दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है। 


पूजन विधि: घर के पश्चिम में नीले कपड़े पर नृसिंह देव का चित्र स्थापित करके पंचोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीपक करें, लोहबान धूप करें, बरगद के पत्ते चढ़ाएं, काजल चढ़ाएं, नारियल, बादाम व मिश्री चढ़ाएं, उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं व एक माला इस विशिष्ट मंत्र की जपें। पूजन के बाद भोग को पीपल के नीचे रख दें।


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ईश्वर को पाने का चमत्कारी मंत्र

शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र एक एेसा महामंत्र है जिसकी मान्यता ॐ के समान मानी जाती है। यह मंत्र सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। इस मंत्र की उपासना से जो फल प्राप्त होता है, उसका शब्दों में वर्णन करना सम्भव नहीं है। गायत्री मंत्र 24 अक्षरों का होता है, इसलिए इसे 24 वर्णीय मंत्र कहा जाता हैं। वेदों व शास्त्रों में कहा गया है कि गायत्री मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के जीवन की हर समस्या का अंत हो जाता है। 


गायत्री मंत्र
'ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्' 


वेदों में गायत्री मंत्र के जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। इसके अनुसार सूर्योदय से थोड़ी देर पूर्व मंत्र का जाप शुरू कर देना चाहिए। फिर दोपहर में भी गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। 


तीसरा समय शाम सूर्यास्त के कुछ देर पूर्व मंत्र जाप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप किया जा सकता है। 


किसी आकस्मिक काम के कारण जाप में बाधा आने पर हाथ-पैर धोकर फिर से जाप करें। इन तीनों समय के अतिरिक्त मौन रहकर या मानसिक रूप से भी जाप कर सकते हैं क्योंकि गायत्री मंत्र का जाप तेज आवाज में नहीं किया जाता।


इस मंत्र के नियमित जप से त्वचा में चमक आती है। आंखों की रोशनी बढ़ती है। सिद्धि प्राप्त होती है। गुस्सा शांत होता है। ज्ञान की वृद्धि होती है। कामों में आ रही रुकावटें दूर होने लगती है और कामयाबी मिलने लगती है।

इस मंत्र के निरंतर जाप से व्यापार तथा नौकरी में हो रहे नुकसान से छुटकारा मिलता है। 


यह मंत्र चौबीस अक्षर का है इसलिए इसे चौबीस शक्तियों-सिद्धियों का प्रतीक माना गया है। जिस कारण शास्त्रों में इसे सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला बताया है।


छात्रों के लिए यह मंत्र बहुत ही फलदायी माना गया है। यदि किसी विद्यार्थी का मन पढ़ाई आदि में न लगता हो तो उसे 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे विद्यार्थी के मन में एकाग्रता पैदा होने लगती है। 


स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है कि गायत्री सदबुद्धि का मंत्र है, इसलिए उसे मंत्रों का मुकुटमणि कहा गया है।


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ये बात पीठ में खंजर नहीं घुपवाएगी

चाणक्य की ही तरह आचार्य शुक्राचार्य भी एक प्रसिद्ध नीतिकार थे। फ़र्क सिर्फ इतना है कि शुक्राचार्य को दैत्यों का गुरु माना जाता था। परंतु वह अपने समय के प्रचंड विद्वानों और समस्त धर्म ग्रंथों के ज्ञाता थे। उनके द्वारा कही गई बातें शुक्र नीति में दर्ज हैं जिनमें मनुष्य की हर समस्या का हल छुपा है।


तो आईए जानते हैं, इनके द्वारा बताई गई एेसी बातें जो यदि इंसान अपने पल्ले बांध ले, तो वह सभी परेशानियों से मुक्त हो जाता है। 

श्लोक
दीर्घदर्शी सदा च स्यात, चिरकारी भवेन्न हि। 
अर्थ
भविष्य की सोचें, लेकिन भविष्य पर न टालें। 


भावार्थ- मनुष्य को अपना प्रत्येक कार्य भविष्य को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। यानि उसे ध्यान रखना चाहिए कि आज वह जो भी कार्य कर रहा है, उसका भविष्य में क्या परिणाम होगा। साथ ही जो काम आज करना है, उसे आज ही करें। आलस्य करते हुए उसे अपने किसी भी काम को भविष्य पर न टालें।

श्लोक
यो हि मित्रमविज्ञाय यथातथ्येन मन्दधिः।
मित्रार्थो योजयत्येनं तस्य सोर्थोवसीदति।।

अर्थ
मित्र बनाते समय सावधानी रखें 


भावार्थ- बिना सोचे-समझे किसी से भी मित्रता कर लेना, कई बार हानिकारक हो सकता है, क्योंकि मित्र के गुण-अवगुण, उसकी अच्छी-बुरी आदतें हम पर समान रूप से असर डालती हैं। इसलिए बुरे विचारों वाले या बुरी आदतों वाले लोगों से मित्रता नहीं करनी चाहिए।

 

श्लोक
नात्यन्तं विश्वसेत् कच्चिद् विश्वस्तमपि सर्वदा। 
अर्थ
हद से ज्यादा किसी पर भरोसा न करें 


भावार्थ- शुक्र नीति के अनुसार किसी व्यक्ति पर विश्वास करना ठीक है लेकिन अंधविश्वास करना उचित नहीं होता। शुक्राचार्य ने यह स्पष्ट कहा है कि किसी भी व्यक्ति पर हद से ज्यादा विश्वास करना घातक हो सकता है। कई लोग ऊपर से आपके भरोसेमंद होने का दावा करते हैं लेकिन भीतर ही भीतर आपसे बैर भाव रख सकते हैं। 


श्लोक
अन्नं न निन्घात्।।
अर्थ
अन्न का अपमान कभी न करें
 

भावार्थ- अन्न प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का आधार होता है, इसलिए जो भी भोजन आपको प्रतिदिन के आहार में प्राप्त हो उसे परमात्मा का प्रसाद समझते हुए ग्रहण करें। शास्त्रों में वर्णित है कि अन्न का अपमान करने वाला मनुष्य नर्क में घोर पीड़ा भोगता है।

 

श्लोक
धर्मनीतिपरो राजा चिरं कीर्ति स चाश्रुते।
अर्थ
मनुष्य को सम्मान धर्म से प्राप्त होता है


भावार्थ- जो मनुष्य अपने धर्म में बताए अनुसार जीवनयापन करता है, उसे कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ता। धर्म ही मनुष्य को सम्मान दिलाता है। इसलिए कभी भी अपने धर्म का अपमान नहीं करना चाहिए। 


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गुरुवार का गुडलक: एक हजार गौदान का फल पाएं

गुरुवार दिनांक 26.04.18 को वैसाख शुक्ल एकादशी के उपलक्ष्य में मोहिनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। इस एकादशी में स्नान करने के लिए कुश व तिल के लेप का प्रयोग करते हैं। इस दिन श्री हरि के मोहिनी स्वरूप के पूजन का विधान है। सीता की खोज करते समय श्री राम ने भी इस व्रत को किया था। श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को मोहिनी एकादशी की कथा कही व यही कथा महर्षि वशिष्ठ ने श्री रामचंद्र जी से कही थी।

 

जिसके अनुसार सरस्वती के तट पर भद्रावती नगरी में चंद्रवंशी राजा "द्युतिमान" के राज्य में धनपाल नामक अत्यंत धर्मालु वैश्य रहता था। धनपाल के पांच पुत्र थे परंतु सबसे छोटा पांचवा पुत्र धृष्टबुद्धि महापापी था। वह पितृ आदि को नहीं मानकर कुकर्मों में लिप्त होकर पिता के धन को नष्ट करता था, इसी कारण धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया था। भूख-प्यास से अति दु:खी होकर वो चोरी करने लगा और पकड़ा गया। राजा ने उसे नगर निकाला दे दिया। वह वन में बहेलिया बनकर पशु-पक्षियों को मार-मारकर खाने लगा। एक दिन भूख-प्यास से व्यथित होकर घूमता हुआ कौडिन्य ऋषि के आश्रम में पहुंचा, जहां ऋषि गंगा में स्नान कर आ रहे थे। ऋषि के भीगे वस्त्रों के छींटे उस पर पड़ने से उसे सद्‍बुद्धि प्राप्त हुई।

 

उसने कौडिन्य से हाथ जोड़कर अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा जिस पर ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का विधिवत व्रत करने का आदेश दिया। धृष्टबुद्धि ने ऋषि के निर्देश का पालन किया जिससे उसके सब पाप नष्ट हो गए। मोहिनी एकादशी के विधिवत पूजन, व्रत व उपाय से निंदित कर्मों से छुटकारा मिलता है, मोह बंधन से मुक्ति मिलती है, एक हजार गौदान का फल प्राप्त होता है। पैसे की कमी दूर होती है, पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है व रोजगार में वृद्धि होती है। 

 

पूजन विधि: घर के ईशान कोण में पीले कपड़े पर पीतल के कलश में जल और पीपल के 11 पत्ते रखकर उस पर श्रीराम का चित्र स्थापित कर विधिवत पूजन करें। गाय के घी में हल्दी मिलाकर दीप जलाएं, चंदन से धूप करें, पीले फूल चढ़ाएं, केसर से तिलक करें व 11 केले का भोग लगाएं तथा किसी माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद केले पीली आभा लिए गाय को खिला दें।


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गुरुवार में है कुछ खास, जानें अपना राशिफल

मेष:- आप अपने अच्छे व्यवहार से दूसरों को इम्प्रेस करने वाले हैं। रूटीन लाइफ में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है। जिससे आपका दायरा बढ़ेगा। कई लोगों से मुलाकात और बातचीत होती रहेगी। कुछ नए दोस्त भी बन सकते हैं। आपकी जो महत्वाकांक्षा है, उसके पूरा होने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा। पुराने प्रेमी से मुलाकात होगी मन में उथल-पुथल बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में नए सिरे से शुरुआत करने का मन बनायेंगे। बिजनेस पार्टनर से सहयोग और पैसा मिलेगा।
 

वृष:- आज का दिन आपके जीवन में ढेर सारी सौगात लेकर आया है। आज आपको कोई बड़ा राजनीत्तिक ऑफर मिल सकता है। इसे आप सहर्ष स्वीकार कर लेंगे लेकिन थोड़ा संतोष जरूर रखें। महत्वाकांक्षाओं और सपनों के पूरा होने का समय आ गया है।  बिजनेस के लिए समय अच्छा है। आज अचानक धन लाभ होगा। विद्यार्थी पढ़ाई में मन न लगने के कारण कुछ परेशान हो सकते हैं। भविष्य की दृष्टि से आज निवेश करना फायदेमंद रहेगा। लोभ लालच की स्थिति से बचें।


मिथुन:- आज आपकी सोच रचनात्मक रहेगी। आज आपके पेंडिग कार्य पूरे होने का योग है। जो काम बहुत खास है, उन पर तुरंत ध्यान दें। सम्मानित लोगों से सम्मान मिल सकता है। उनका सहयोग और सलाह भी मिलेगी। आपकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हो सकती है जो आपसे पद और प्रतिष्ठा में बडे हैं। पूरा दिन कामकाज में ही बीतेगा। आपके लिए ये ही अच्छा रहेगा। दाम्पत्य जीवन में सुख मिलेगा। रोमांस के लिहाज से अच्छी स्थिति बन सकती है। 

 
कर्क:- आज किसी संवेदनशील विषय पर किस्मत का साथ मिलेगा। आपके लिए आज का दिन ठीक ठाक रहेगा। करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं। ऊर्जा का प्रवाह भी बना रहेगा। आप कुछ ऐसा काम कर सकते हैं, जो आगे चलकर आपको तरक्की देगा।आपका प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जो आने वाले दिनों में आपके करियर के लिए खास हैं। सोच-समझ कर वाणी का प्रयोग करें। आज प्रेम-प्रसंग के क्षेत्र में कुछ नई संभावनाएं बनेंगी। 


सिंह:- आज आप अपने काम को और भी बेहतर बनाने में लगे रहेंगे लेकिन जब तक काम बन न जाये उसकी चर्चा किसी से न करें। किसी खास विषय पर प्लानिंग बनाएंगे। कोई पुराना काम पूरा कर सकते हैं। भाईयों से लंबी बातचीत होगी। अपना नजरिया सकारात्मक रखेंगे, तो नतीजा अच्छा रहेगा। किसी के लिए आप कोई गिफ्ट खरीद  सकते हैं। बच्चों के साथ तालमेल बना रहेगा। कोर्ट कचहरी के मामलों में सावधानी रखें। आपके शत्रु गुप्त रूप से षड्यंत्र करने की कोशिश कर सकते हैं। 


कन्या:- आज का दिन बढ़िया है। व्यक्तित्व और जीवनशैली में अच्छे बदलाव हो सकते हैं। ससुराल पक्ष के लोग या माता पिता आपकी मदद कर सकते हैं। आज का दिन आपके लिए बहुत जोरदार है क्योंकि इस राशि के प्रेमी जोड़ो को विवाह के लिए माता-पिता की अनुमति मिल सकती है। सकारात्मक रहना अच्छा रहेगा। पुराने वादे आज पूरे हो जाएंगे। पार्टनर की सहमति से बिजनेस से जुड़ा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।


तुला:- आज आपका ट्रांसफर होने वाला है, लम्बी दूरी की यात्रा यानि विदेश यात्रा का योग बन रहा है। कोर्ट-कचहरी और विवादों के मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि छोटी सी भूल बड़ी समस्या पैदा कर सकती है। कार्यस्थल पर आपकी कोई खास बातचीत असर दिखा सकती है। आज धन का सदुपयोग करने की कोशिश करें। छोटी बहन या बुआ को गिफ्ट देने से समस्या कम होगी। स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा रहेगा। लव लाइफ के लिए दिन थोड़ा मिलाजुला रहेगा।
 

वृश्चिक:- आज का दिन बेनिफिट और प्रोग्रेस लेकर आया है। आर्थिक रूप से फायदा मिलेगा। कहीं से ढेर सारा धन लाभ हो सकता है। आप पर कई तरह की जिम्मेदारियां भी रहेंगी, जिन्हें आप अच्छे से पूरा करेंगे। दोस्तों के साथ संबंधों में थोड़े प्रैक्टिकल रहेंगे। आज आप अपने ही मन का काम करते रहेंगे लेकिन सहयोगपूर्ण रवैया रखेंगे तो फायदे में रहेंगे। शिक्षा और राजनीति में आज आप बहुत हद तक सफल रहेंगे। आर्थिक स्थिति में वृद्धि होगी। कुंवारों का विवाह तय होने के आसार हैं।


धनु:- आज कुछ खट्टी कुछ मीठी दोनों तरह की यादें सताती रहेंगी। दोस्त की मदद से लाभ होगा। स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई और तैयारियों से खुश रहेंगे। आपको अपनी दादी या नानी का आशीर्वाद लेना चाहिये, इससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। प्रॉपर्टी और वाहन की सेल पर्चेज के बारे में योजना बन सकती है। लव मेट से खटपट होने के कारण मेंटली अपसेट रहेंगे, पर शांत रहें जल्द ही सब ठीक हो जायेगा।


मकर:- आज नए कांट्रेक्ट और एग्रीमेंट करने के लिये दिन बेहद महत्वपूर्ण है। सगे भाई-बहनों के साथ समय व्यतीत करेंगे। जिससे मन प्रसन्न रहेगा। आज बच्चों को भी थोड़ा समय दीजिये क्योंकि उन्हें आपकी जरूरत है। सांझेदारी के बिजनेस में हाथ न डालें, वरना नुकसान हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अनुकूल है। किसी मित्र के जरिये आज नया  जॉब ऑफर मिल सकता है। 

कुम्भ:- आज का दिन काफी अनुकूल है। स्टूडेंट्स को कम मेहनत में भी अच्छी सफलता मिलेगी। अपने करियर को संवारने का एक नया मौका मिलेगा। इस राशि वाले डिजाइनरों को आज पदोन्नति का मौका मिल सकता है। नए क्रियेशन्स करने पर तारीफ के हकदार बनेंगे। थकान भरी दिनचर्या के बावजूद देर रात तक नींद उड़ी रहेगी। सफलता की खुशी आपको सोने नहीं देगी। बच्चे आज कोई अच्छी खबर देंगे। लवमेट के साथ रिलेशन्स मधुर होंगे।

मीन:- आपको शासन सत्ता के केंद्र में रहने का मौका मिलेगा। इस मौके का फायदा उठाते हुए आप अपनी कोई पेंडिंग योजना पूरी कर सकतें हैं। व्यावसायिक यात्रा आपके करियर के लिए महत्वपूर्ण होगी। घरेलू मोर्चे पर मामला कुछ तनाव पूर्ण हो सकता है। आपकी समझदारी इसी में है की टेंशन और विवाद से दूर रहें। सेहत ठीक रहेगी। कुछ अनजाने लोगों से मुलाकात हो सकती है। जिससे आप मिलेंगे, उसी से दोस्ती भी हो जाएगी।


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एक तस्वीर जो बदल देगी आपकी जिंदगी

वास्तु शास्त्रियों के अनुसार पक्षी शुभता के प्रतीक हैं। माना जाता है कि इनमें अनिष्ट करने वाले तत्वों को काबू करने की शक्तियां होती हैं, इसलिए इनकी दृष्टि को बहुत शुभ माना जाता है। घर व दुकान में पक्षियों के चित्र आदि लगाने से सफलता के मार्ग में आने वाली सभी परेशानियां खत्म होने लगती हैं। इससे निश्चित ही सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है। इन्हें लगाने से पूर्व सही दिशा का चयन करना भी अति आवश्यक है। जैसे हमेशा पक्षियों की तस्वीरें या मूर्ति एेसी जगह पर लगाएं जहां बार-बार आपकी नज़र पड़े। 


 
किसी भी पक्षी की तस्वीर या मूर्ति लगाने के विभिन्न शुभ-अशुभ प्रभाव होते हैं। फिनिक्स पक्षी सफलता प्रदान करने वाली ऊर्जा, प्रसिद्धि और विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी तस्वीर को घर के दक्षिणी भाग में रखने से सफलता के रास्ते में आ रही कठिनाईयों से बाहर निकलने में आसानी होती है। यह व्यक्ति को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। जिससे उस व्यक्ति में अपने काम के प्रति एक नई उमंग उत्पन्न होने लगती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वास्तव में फिनिक्स नाम का कोई पक्षी नहीं है, बल्कि यह एक कल्पानाकृति है, जिसे सफलता का रूप माना जाता है।   

 

असली पक्षियों को पालना भी घर में शुभता लेकर आता है। सुबह शाम घर की छत पर पानी से भरा कटोरा रखें और सतनाजा डालें। जब पक्षी आपके घर की छत पर चहकेंगे तो घर के इिर्द-गिर्द फैली नकारत्मकता का नाश होगा और सकारात्मकता का संचार होगा। वास्तु के अनुसार जब पक्षी भोजन करके उड़ेगे तो घर की नकारात्मकता भी साथ ले जाएंगे। रूपए-पैसे से संबंधित समस्याएं भी खत्म होती हैं।


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बुधवार का गुडलक: किसी को भी कर लें वश में

बुधवार दिनांक 25.04.18 को धनु राशि, दशमी तिथि व मूल नक्षत्र के साथ-साथ गजकर्ण और वृद्धि योग है। बुधवार व केतु का नक्षत्र मूल आद्य शक्ति मूल प्रकृति देवी को समर्पित है। आज के योग में महादेवी के देवी गोमती के स्वरूप का पूजन करना अच्छा रहेगा। देवी भागवत पुराण के अनुसार शक्ति-पीठों की संख्या 108 हैं। देवी भागवत में वर्णित, राजा जन्मेजय द्वारा पूछे जाने पर व्यास जी द्वारा जिन 108 शक्ति पीठों का वर्णन किया गया उनमें से गोमती शक्ति पीठ सातवें स्थान पर है। देवी गोमती शक्ति पीठ गोमान्त में स्थित है। शास्त्रों ने गोमान्त क्षेत्र को क्राचांच द्वीप कहा है। इस शक्ति पीठ का वर्णन महाभारत में आया है। 


गोमान्त राज्य वर्तमान में भारत के पश्चिमी तट गोवा राज्य में स्थित है। महाभारत में गोमान्त को यदुवंश के साम्राज्य द्वारका का विस्तार कहा है। गोमान्त शक्ति पीठ का उल्लेख प्राचीन भारत के साथ मंडक, शांड, विदर्भ के साथ किया है। मग्ध के राजा जरासंध के निरंतर हमले के कारण मथुरा के यादव वहां से भाग गए। वे दूर दक्षिण तक गोमांत तक पहुंचे थे। हरिवंश पुराण के अनुसार जरासंध वृहद्रथ-वंश का सबसे प्रतापी राजा था। वो जन्म के समय दो टुकड़ों में विभक्त था। जरा नामक राक्षसी ने उसे जोड़ा था तभी उसका नाम जरासंध पड़ा। 


भविष्य पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने देवी गोमती की कृपा से ही जरासंध पर विजय प्राप्त की थी। राजा भोज ने अपने काल में गोमती शक्ति पीठ के मंदिर का निर्माण करवाया था। देवी गोमती के विशेष पूजन व उपाय से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है, पूरी दुनिया आपके वशीभूत होती है व दुर्भाग्य से छुटकारा मिलता है।
 

पूजन विधि: घर के ईशान कोण में हरे कपड़े पर मूंग भरा कांसे का कलश स्थापित करें, कलश पर 7 अशोक के पत्ते और नारियल रखकर विधिवत पूजन करें। कांसे के दिये में गौघृत का दीप करें, सुगंधित धूप करें, गोलोचन से तिलक करें, फूल चढ़ाएं व साबूदाने की खीर का भोग लगाएं। किसी माला से 108 बार इस विशेष मंत्र का जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप वितरित करें। 


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बुधवार का गुडलक: वामन अवतार से मिलेगा निरोगी काया का वरदान

बुधवार दि॰ 28.03.18 को चैत्र शुक्ल द्वादशी के उपलक्ष्य में वामन द्वादशी पर्व मनाया जाएगा। श्रीमद्भगवदपुराण के अनुसार उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में इसी शुभ तिथि को श्रवण नक्षत्र के अभिजित मुहूर्त में भगवान विष्णु का वामन अवतार हुआ था। दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद ऋषि कश्यप के कहने पर माता अदिति के पुत्र प्राप्ति हेतु पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं। तब विष्णु चैत्र शुक्ल द्वादशी पर माता अदिति के गर्भ से प्रकट होकर अवतार लेते हैं व बटुक ब्राह्मण रूप धारण करते हैं। महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं। महर्षि पुलह वामन को यज्ञोपवीत, अगस्त्य मृगचर्म, मरीचि पलाश दण्ड, आंगिरस वस्त्र, सूर्य छत्र, भृगु खड़ाऊं, गुरु जनेऊ व कमण्डल, अदिति कोपीन, सरस्वती रुद्राक्ष माला व कुबेर भिक्षा पात्र भेंट करते हैं।


वामन अवतार पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं। उस समय राजा बलि नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम यज्ञ कर रहे होते हैं। वामन अवतार राजा बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं। बलि दैत्यगुरु शुक्राचार्य के मना करने पर भी अपने वचन पर अडिग रहते हुए, विष्णु को तीन पग भूमि दान देते हैं। भगवान एक पग में स्वर्ग व दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लेते हैं। अब तीसरे पग हेतु राजा बलि अपना सिर भगवान के आगे कर देते हैं। वामन अवतार राजा बलि को पाताल लोक में साथ रहने का वचन देते हुए बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार करते हैं। वामन द्वादशी के विशेष पूजन, व्रत व उपाय से निरोगी काया प्राप्त होती है, व्यावसायिक सफलता मिलती है व पारिवारिक कटुता दूर होती है। 


विशेष पूजन विधि: पूर्वमुखी होकर हरे वस्त्र पर वामन अवतार का चित्र स्थापित करके विधिवत दशोपचार पूजन करें। कांसे के दिए में गौघृत का दीप करें, चंदन से धूप करें, तुलसी पत्र चढ़ाएं, रक्त चंदन चढ़ाएं, मौसम्बी का फलहार चढ़ाएं, मिश्री का भोग लगाएं। तथा रुद्राक्ष माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें।


पूजन मुहूर्त: प्रातः 09:25 से प्रातः 10:25 तक।
पूजन मंत्र: ॐ तप रूपाय विद्महे श्रृष्टिकर्ताय धीमहि तन्नो वामन प्रचोदयात्।


आज का शुभाशुभ


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स्त्री व पुरुष दोनों की बर्बादी का कारण बनते हैं ये 5 काम

शास्त्रों की मानें तो कुछ एेसे बुरे काम बताए गए हैं जो लंबे समय तक किसी से छिपाए नही जा सकते। आजकल के समय में चाहे कोई कितना भी इन कामों को छिपाने की कोशिश करे, फिर भी किसी न किसी तरह से समाज को इन कामों के बारे में पता लग ही जाता है। जब ये काम घर-परिवार और समाज में सभी को मालूम हो जाते हैं तो स्त्री हो या पुरुष, दोनों को ही अपमानित होना पड़ता है और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां जानिए महाभारत, रामायण और गरुड़ पुराण में बताए गए 5 कामों के बारें में।

 

झूठ बोलना
सभी जानते हैं कि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ और बोलना पड़ते हैं, फिर भी झूठ अधिक समय तक छिप नहीं सकता है। महाभारत में कर्ण ने परशुराम से झूठ बोला था कि वह ब्राह्मण है। परशुराम में कर्ण को ब्राह्मण समझकर उसे सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान दिया, लेकिन एक दिन परशुराम को ये सच्चाई मालूम हो गई कि कर्ण ब्राह्मण नहीं है। इसके बाद परशुराम ने शाप दे दिया था कि कर्ण को जिस समय इन अस्त्र-शस्त्र की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी, उसी समय वह इन्हें चलाना भूल जाएगा। इसी शाप के कारण कर्ण महाभारत युद्ध में अर्जुन के सामने इन शक्तियों को भूल गया था और अर्जुन के बाण से मारा गया था। इसीलिए हमें भी झूठ बोलने से बचना चाहिए।


धोखा देना 
महाभारत युद्ध दुर्योधन और मामा शकुनि के धोखे और कपट का भी परिणाम था। कौरवों ने पांडवों के साथ कई बार कपट किया था और अंत में पांडवों के हाथों सभी कौरव मारे गए। भगवान भी कपटी लोगों की मदद नहीं करते हैं। इसीलिए कपट से बचना चाहिए। कपट भी लंबे समय तक छिप नहीं सकता है। दूसरों को धोखा देना पाप है और इस पाप की सजा अवश्य मिलती है।

 

हत्या करना
ये ऐसा पाप है, जिसकी सजा अवश्य मिलती है। शास्त्रों के अनुसार किसी की भी हत्या करना अक्षम्य पाप है। अक्षम्य यानी जिसके लिए क्षमा नहीं किया जा सकता है। हत्या कभी भी छिप नहीं सकती है। हमारे सामने इस संबंध में कई उदाहरण आते रहते हैं, जहां ये बात साबित हो जाती है कि कितनी भी पुख्ता योजना क्यों न हो, हत्या सामने आ ही जाती है। हत्या के दोषी को देर से सही पर सजा जरूर मिलती है। इस पाप को छिपाने की सभी कोशिशें असफल हो जाती हैं।