Updated -

mobile_app
liveTv

बाबा भीमराव अंबेडकर की 130 वीं जयंती मनाई, बाबा साहेब की शिक्षा को जीवन में उतारने का आह्वान


सरदारशहर। शहर में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 130 वी जयंती  समारोह पूर्वक मीणा गेस्ट हाउस में मनाई गई। कार्यकम का शुभारंभ बाबा साहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुवे आरक्षित कर्मचारी अधिकारी सयुंक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष रामनिवास मीणा ने कहा कि निजीकरण ही आरक्षण समाप्ति की ओर उठाया गया कदम है। अतः हमें निजीकरण का विरोध करते हुवे नीजि क्षेत्र में आरक्षण की मांग करनी चाहिए। वर्तमान भारत सरकार की नीतियां आरक्षित वर्ग के खिलाफ हैं। गौरीशंकर मेघवाल ने बाबासाहेब के शिक्षित बनो नारे के महत्व पर प्रकाश डाला। जितेंद्र शर्मा व संपत जांगिड़ ने बाबा साहेब को राष्ट्र निर्माता बताया। बीरबल सिद्ध व रामेश्वर पुनिया ने बाबा साहेब को सभी वर्गों का कल्याण करने वाला व संविधान निर्माता बताया। राकेश किलानिया ने बाबा साहेब की शिक्षा को जीवन मे उतारने का आव्हान किया। कार्यक्रम में पार्षद सुनील मीणा, कांग्रेस के आदिवासी विभाग के जिलाध्यक्ष रोहितास मीणा, आशाराम मेघवाल, हरिसिंह, भानुप्रकाश दानोदिया आदि ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर पूर्व पार्षद मूलचंद मीणा, चंपालाल, गोविंद, ओंकार मेघवाल, ओमप्रकाश मीणा सहित अनेक लोग उपस्थित थे। 
कार्यकम का संचालन रामनिवास मीणा ने किया।

भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 130 वी जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई।

तारानगर

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 130 वीं जयंती डॉ आंबेडकर स्टेच्यू सर्किल तारानगर में अनुसूचित जाति जनजाति कार्यसमिति के द्वारा धूमधाम से मनाई गई। राकेश जांगिड़ भाजपा नेता व समिति के प्रदेश संयोजक उपनेता प्रतिपक्ष त्रिलोक रैगर ने भारतीय संविधान के शिल्पकार 'भारत रत्न' बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर  की जयंती पर उन्हें सादर नमन किया ।
 त्रिलोक रैगर ने कहा बाबासाहेब ने सबको समान अधिकार दिलाने, भेदभाव रहित समाज बनाने, वंचित एवं शोषित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्ती भूमिका निभाई है। 
 हम सभी बाबासाहेब के सिद्धांतों, आदर्शों एवं विचारों का अपने जीवन में अनुसरण करने का संकल्प लें।और कहा की बाबा साहेब ने कहा था शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो को अपना मूल मन्त्र मानकर आगे बढ़ना चाहिये तथा दलित समाज में राजनैतिक चेतना और सामाजिक बुराइयों को त्याग कर एकजुट रहो संविधान को अंगीकृत करते समय 25 नवंबर 1949 को बाबा साहेब ने कहा था कि सामाजिक आर्थिक जीवन मे असमानता के अंतर्विरोधो से भरा जीवन कब तक जीते रहेंगे तथा उनका यह संदेश सामाजिक उत्थान व समानता को बढ़ाने की प्रेरणा देता है । 
विश्वव्यापी महामारी कोरोना को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम को सोशल डिस्टेंसिंग का पालना करते हुए आयोजन किया और लोगो से मास्क पहने कर व घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की और अपने वार्ड मोहल्लों में 45 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाने के प्रेरित किया ।
इस अवसर पर राकेश जांगिड़ भाजपा प्रत्याशी विधानसभा क्षेत्र तारानगर , त्रिलोक रैगर प्रदेश संयोजक अनुसूचित जाति जनजाति  कार्यसमिति उपनेता प्रतिपक्ष , हरि इन्दोरिया शहर अध्यक्ष पार्षद , सुरेन्द्र रैगर , राकेश कौशिक , अमर चंद , भुरा राम सब्लानिया , शंकर लाल कान खेड़िया , शिवलाल , श्यामलाल , चुन्नी लाल , नोरंग , खेमचंद , राकेश जागरवाल , राजेन्द्र , किशोर , राहुल , अशोक , सन्नी कुमार , हितेश  सहित समिति के कार्यकर्ता मौजूद थे ।

महात्मा ज्योतिबा राव फूले की जयंती मनाई

रतनगढ़-अजाक संघ द्वारा रविवार को मेघवाल गेस्ट हाऊस में महात्मा ज्योतिबा राव फूले का जन्मदिन मनाया। फूले के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि से शुरू हुए कार्यक्रम में संगठन के अध्यक्ष अशोक आलड़िया ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फूले ने महिला शिक्षा, छुआछूत, भेदभाव को समाज से दूर करने के लिए अनेक कार्य किए थे। वक्ताओं ने फूले के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस मौके पर समाजसेवी वेदप्रकाश पंवार, मंगतुराम मंडीवाल, राकेशकुमार नायक, महावीरप्रसाद आलड़िया, संदीपकुमार धानिया, भोलाराम इंदलिया, शिवकुमार गाडगिल, खिराज पटीर सहित कई लोग उपस्थित थे। इसीक्रम में एक निजी कंप्यूटर सेंटर पर युवा शक्ति ग्रुप के सदस्यों ने महात्मा ज्योतिबा राव फूले की जयंती मनाई। इस अवसर पर सेंटर के संस्थापक दातारसिंह, जयप्रकाश माली, श्रवण मेघवाल, सांवरमल, साहिल खान, अनिलकुमार, देवकीनंदन मेघवाल, पवनकुमार, महिपाल राठौड़ सहित कई लोग उपस्थित थे।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का हुआ अनावरण

संविधान की तरफ अंगूली उठाने वालों की अंगूली काट ली जाएगी-विधायक गोविन्दराम मेघवाल

राजलदेसर-वार्ड 23 स्थित अंबेडकर सामुदायिक भवन में रविवार को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का अनावरण खाजूवाला विधायक गोविंदराम मेघवाल ने किया।पालिकाध्यक्ष गंगा देवी की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में मुख्यवक्ता समता सैनिक दल के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल बौद्ध, राजेन्द्र बापेऊ तथा भीम आर्मी प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान मेहरा थे।समारोह को सम्बोधित करते हुए खाजूवाला विधायक गोविन्द राम मेघवाल ने कहा कि देश के संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर के  बताए मार्ग पर चलने से ही देश का विकास सम्भव है, बाबा साहेब समाज के सच्चे मार्गदर्शक थे।बाबा साहेब के बनाए हुए संविधान पर पूरा देश चल रहा है संविधान की तरफ अंगूली उठाने वालों की अंगूली काट ली जाएगी।उन्होंने शिक्षा पर जोर देते  हुए अपने बचो को पढ़ाने के लिए लोगो को प्रेरित किया।समारोह को बीदासर प्रधान सन्तोष मेघवाल,पूर्व प्रधान व जिला परिषद सदस्य सन्तोष तालणिया,फकीरचंद दानोदिया, अंजू खेड़ीवाल,अजाक तहसील अध्यक्ष अशोक आलड़िया ने भी सम्बोधित किया,तथा नानूराम सुणिया ने शाब्दिक स्वागत किया।समारोह में 10वी तथा 22वी में 70 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।समारोह में आये हुए अतिथियों व मूर्ति प्रेरक रामकुमार  बोयल का समारोह समिती के सदस्यों द्वारा माला व साफा पहनाकर अभिनंदन कीया गया।इस दौरान पांचीलाल मेहरा,रतनलाल बारुपाल,भोजराज,कालूराम,सांवरमल,किशन बारुपाल,केशराराम बारुपाल,पूर्व पार्षद मोहनलाल बारुपाल,सहित कई लोग उपस्थित थे।सन्चालन रिखाराम तालणिया ने किया।

पीसीसी सचिव तुनवाल का कांग्रेस कार्यकर्ता व प्रजापति समाज के लोगो ने किया अभिनंदन

रतनगढ़-प्रदेश कांग्रेस के सचिव तथा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय प्रभारी ललित तुनवाल जयपुर से सुजानगढ़ जाते समय बुधवार को रतनगढ़ रुके। रतनगढ़ में संगम चौराहे के पास स्थित निजी होटल पर कांग्रेस नेताओं एवं प्रजापति समाज के लोगों ने तुनवाल का अभिनंदन किया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में तुनवाल ने कहा कि उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को विजयी बनाकर कड़ी से कड़ी को जोड़े, ताकि क्षेत्र का चहुमुखी विकास हो सके। संगठन की नियुक्ति पर बोलते हुए कहा कि राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी का गठन हो चुका है और उपचुनाव के बाद संगठन की नियुक्तियां होने की पूरी संभावनाएं हैं। समारोह को पीसीसी सदस्य रमेशचंद्र इंदौरिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष रमेश कुमावत, प्रजापति समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष विष्णु लुहानीवाल, पार्षद राजेन्द्र बबेरवाल, ओबीसी प्रकोष्ठ प्रदेश महासचित सीताराम प्रजापत, कांग्रेस सेवादल यंग ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष रामवीरसिंह राईका ने भी संबोधित किया। इस दौरान काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

पर्यटन एवं देवस्थान मंत्री महाराजा विश्वेन्द्र सिंह

जयपुर टाइम्स
महाराजा विश्वेन्द्र सिंह का जीवन परिचय:-
पिता का नाम:- महाराजा सवाई ब्रजेन्द्र सिंह 
माता का नाम:- महारानी विदेह कौर 
जन्म तिथि:- 23 जून 1962
जन्म स्थान:- भरतपुर
शिक्षा:- मैट्रिक सैन्ट्रल स्कूल भरतपुर
पत्नि नाम:- श्रीमती दिव्या सिंह
विवाह की तिथि:- 15.02.1989
संतान:- 1 पुत्र, कु. अनिरूद्व सिंह
व्यसाय:- सामाजिक कार्यकर्ता
राजनितिक अनुभव:- 
1989-90, 1999-2004, 04-2009:- सदस्य नौंवी, तेरहवी एवं चौदहवीं लोक सभा
1993-98:- सदस्य, दसवीं राजस्थान विधानसभा
1994-95:- सदस्य पुस्तकालय समिति
1999-2004:- सदस्य, विज्ञान एवं प्रौद्ययोगिनी तथा पर्यावरण एवं वन संबधी स्थायी समिति, लोकसभा
2004, 2007-09:- सदस्य कार्मिक एवं जन अभियान तथा विधि एवं न्याय संबधी स्थायी समिति, लोकसभा
2014-15:- सदस्य, प्राक्कलन समिति ख
2016-18:- सदस्य, नियम समिति, विधानसभा
अन्य अनुभव:-1988-89 जिला प्रमुख, जिला परिषद भरतपुर
2001:- कोषाध्यक्ष, राजस्थान राष्ट्र भाषा प्रचार समिति
2003:- सदस्य जिला अकाल रात एवं समीक्षा समिति
2008:- सलाहकार मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार
पसंदीदा  काम:- वन्य जीव संरक्षण को प्रोत्साहन देना
पसंदीदा खेल:- टेनिस एवं स्क्वैश
विदेश यात्रा:-इंग्लैण्ड, स्वीडन, नार्वे, स्पेन व जापान
स्थाई पता:- मोती महल भरतपुर
वर्तमान पदनाम:- 11 दिसम्बर 2018 को पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के लिए सदस्य निर्वाचित
केबिनेट मंत्री राजस्थान सरकार 24 दिसम्बर 2018
पर्यटन विभाग, देवस्थान विभाग
वर्तमान पता:- 18 डी सिविल लाईन, जयपुर
विश्वेन्द्र सिंह ऐसे सरल स्वभाव के धनी है जिनसे जनता कभी भी इनसे बिना किसी की पहल के कभी भी मिल सकती है। कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह भरतपुर के विकास में कोई कमी नही छोडगें। उन्होंने अभी से बंद पडे उद्योग जीईडब्ल्यू, डालमिया, चिनार और अन्य बंद पडे उद्योगों को खुलवाने के लिए पहल शुरू कर दी है एवं अन्य प्रदूषित मुक्त उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए योजना बना रखी है। जिससे भरतपुर मे पैसा आयेगा और यहां के नव युवक युवतियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होगें जिससे बेरोजगारों को रोजगार के लिए बाहर जाना नही पडेगा। 
कैबिनेट मंत्री महाराज विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि संभाग स्तर के अधिकारी भरतपुर में लगाये जायेगें जिससे लोगों की जयपुर के चक्कर के नही लगाने पडे। उन्होंने कहा कि भरतपुर एनसीआर में शामिल तो कर लिया लेकिन भाजपा सरकार ने अभी तक एनसीआर का जो लाभ भरतपुर को मिलना चाहिये था वो नही मिला है जबकि एनसीआर के बराबर के टैक्स भरतपुर की जनता को चुकाने पड रहे है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि चम्बल लिफट परियोजना गहलोत सरकार ने चालू की थी लेकिन भाजपा सरकार के आने पर इस योजना को खटाई में डाल दिया जिससे भरतपुर शहर व गांवो को पानी उपलब्ध नही हो पाया था। उन्होनें कहा कि 6 माह के अंदर कस्बे व गांवो के अंदर चम्बल का पानी पहुचाया जायेगा। इसके लिए चम्बल परियोजना के कार्य में तेजी लाई जायेगी। उन्होंने जल महलो और किले को पर्यटन के रूप में विकसित करने की बात कही। धार्मिक पर्यटन के रूप में डीग कांमा को भी गोवर्धन, वृंदावन, मथुरा की तरह ही विकसित किया जायेगा। 

स्‍वामी विवेकानंद के कुछ ऐसे विचार, जो जीवन को बना देंगे सफल

नई दिल्‍ली : आज स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती है. उनका जन्‍म 1863 में आज ही के दिन कोलकाता में हुआ था. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार...

1. उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते.

2. आप जो भी सोचेंगे. आप वही हो जाएंगे. अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे. अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे. 
3. एक विचार चुनिए और उस विचार को अपना जीवन बना लिजिए. उस विचार के बारे में सोचें उस विचार के सपने देखें. अपने दिमाग, अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लें बाकी सारे विचार छोड़ दें. यही सफलता का रास्ता हैं.

4. एक नायक की तरह जिएं. हमेशा कहें मुझे कोई डर नहीं, सबको यही कहें कोई डर नहीं रखो
5. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारे भीतर मौजूद हैं. हम ही मूर्खतापूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आंखों को ढक लेते हैं...और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अंधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है.

6. अगर आप पौराणिक देवताओं में यकीन करते हैं और खुद पर यकीन नहीं करते हैं तो आपको मुक्ति नहीं मिल सकती है. अपने में विश्वास रखो और इस विश्वास पर खड़े हो जाओ, शक्तिशाली बनो, इसी की हमें जरूरत है.

7. ताकत ही जीवन है और कमजोरी मौत है

सर्दियों में हो गले में दर्द और खराश तो छुटकारा दिलाएंगी ये 5 तरह की चाय

जयपुर : सर्दियों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है गले में दर्द और खराश का होना, ऐसे में हमें समझ ही नहीं आता कि आखिर हम ऐसा क्या करें कि इस छोटी, लेकिन दर्द भरी समस्या से राहत मिल सके. तो हम आपको बता दें कि सर्दियों में होने वाली इन छोटी-छोटी समस्याओं का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं बल्कि आपके अपने घर में ही है. जी हां, सर्दियों में चाय तो हम सभी पीते हैं और यही चाय आपके गले के दर्द और खराश का इलाज कर सकती है, इसके बारे में भी हम सब जानते हैं, बस यह पता नहीं होता कि चाय में हम क्या मिलाएं जो हमें इस समस्या से राहत दिलाएगी. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सर्दियों में अपनी चाय में आप क्या मिला सकते हैं, जिससे आपको इन छिटपुट समस्याओं से बिना डॉक्टर के पास जाए राहत मिल सकती है.

हल्दीः
हल्दी में काफी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सिडेंट के गुण पाए जाते हैं. सर्दियों में रोज अपनी चाय में एक चुटकी मिलाकर पीने से शरीर में गर्मी बनी रहेगी जिससे सर्दी, खांसी जैसे सर्दियों में होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिलता है. बता दें तासीर काफी गरम होती है, जिससे सर्दी का खतरा कम होता है.

मुलेठीः
सर्दियों में आप सुबह की चाय में मुलेठी डालकर भी पी सकते हैं. बता दें प्राकृतिक मिठास होने के कारण यह चाय में मसाले के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके एंटी-डायबिटिक और एंटीऑक्सिडेंट गुण मेटाबोलिक सिंड्रोम के इलाज में भी मददगार होते हैं. इसके साथ ही यह वजन घटाने में भी काफी सहायक होती है.

अदरकः
अदरक की चाय, सर्दियों में लोगों को सबसे अधिक पसंद आने वाली चाय में से एक होती है. यही नहीं खाने में भी यह मसाले के तौर पर काफी इस्तेमाल किया जाता है. बता दें स्वाद के साथ ही इसमें कई तरह के प्राकृतिक औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. तो अगर आप सर्दी-खांसी से परेशान हैं तो बेझिझक सुबह और शाम को अदरक की चाय पीएं.

कालीमिर्च
कालीमिर्च भी गले की खराश और बंद नाक का रामबाण इलाज होती है. ऐसे में काली मिर्च की चाय बनाने के लिए आप कालीमिर्च पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं इसमें पाया जाने वाला पिपराइन त्वचा के लिए भी बेहद अच्छा माना जाता है.

कब्ज से हैं परेशान है ,तो करे ये

कब्ज एक ऎसी बिमारी है, जिसके बारे में सबके सामने खुल कर बात नहीं कर सकते हैं। कॉन्स्टिपेशन के समय होने वाली परेशानियां सिर्फ वही समझ सकता है जो इस दौर से गुजर चूका है। हालांकि यह दिक्कत अधिकत्तर लोगों को आती है पर जल्द ही ठीक भी हो जाती है। पर कुछ लोग ऎसे भी है जिन्हें इस समस्या का सामना लंबे समय तक करना पडता है। आज हम कब्ज से परेशान लोगों के लिए लेकर आएं है कुछ घरेलू उपाय जो उनका पेट साफ रखने में काफी मदद करेगा।
जैतून का तेल 
आपने अक्सर देखा होगा कि जब कोई मशाीन जाम हो जाती है तो उस पर तेल लगाना पडता है। उसी तरह अपने शरीर को भी तेल की जरूरत होती है। हर रोज सुबह उठ कर दो चम्मच जैतून का तेल पी लो, उससे आपका पेट साफ हो जाएगा।
वर्कआउट 
सुबह उठ कर थोडा वर्कआउट करने की आदत डालें, इससे आपके शरीर की पाचन शक्ति मजबूत होगी। बॉडी स्ट्रेच करने जैसी कसरत से आपका पेट साफ होने की संभावना बढ जाती है।
दही
दही में बहुत तरह के लाभदायक बैक्टेरिया होते हैं। अपने खाने के साथ दही का सेवन हर रोज करें।

आज के समय में बच्चों की परवरिश एक चुनौती:- डा. डिम्पल डागुर

भरतपुर । आज हम जो कुछ हैं, वह हमारी परवरिश के कारण हैं। बच्चे के लिए उसके माता-पिता सबसे पहले आदर्श होते हैं। उनके व्यवहार व आचरण का बच्चे के कोमल मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे व्यक्ति जो समाज में अनुकरणीय माने जाते हैं, उनका बचपन किसी ना किसी रूप में विलक्षण था जिसमें उनके माता-पिता की परवरिश का बहुत बड़ा योगदान था। बच्चों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से सबल बन सकें, उनको ऐसे संस्कार दे सकें जिससे वे अपने जीवन को साहस और उमंग से जी सकें तथा आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना कर सकें। उक्त वाक्य डा. डिम्पल डागुर ने जयपुर टाईम्स से खास मुलाकात में कहें। डा. डागुर ने बताया कि संयुक्त परिवारों की घटती संख्या, तकनीक का अंधाधुंध उपयोग व भागमभाग वाली जीवन शैली आदि कारणों की वजह से आज के समय में बच्चों की परवरिश एक चुनौती बन गयी है। माता-पिता बच्चों को जीवन मूल्य सिखाने के बजाय उनको सुख-सुविधा देना चाहते हैं, इसी में वे अपनी कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैंप् बच्चे क्या चाहते हैं। उनकी योग्यता कितनी है। इन पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय माता-पिता अपने मत और इच्छा बच्चों पर थोप देते हैंप् इसी क्रम में स्वयं माता-पिता का आचरण जो कि वे बच्चों से चाहते हैं, भिन्न हो जाता है जिससे बच्चे की मनोदशा भ्रामक हो जाती है, उसको स्पष्ट मार्गदर्शन अनुभव नहीं होता है। इस असमंजस की स्थिति में उनकी मानसिक ऊर्जा खर्च हो जाती है। कम उम्र में डिप्रेशन, तनाव, चिंता, नशीले पदार्थों का सेवन, मोबाइल एडिक्शन, आदि मानसिक परेशानियाँ इस युग में बढ़ती जा रही हैं। इसका अर्थ यह है कि बच्चों ने चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना सही ढंग से नहीं सीखा है और वे इतने हताश और कुंठित हो जाते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं। क्या कहीं आप भी अपने बच्चों की परवरिश इसी तरह से तो नहीं कर रहे हैं। बच्चों से परस्पर संवाद करते समय आपकी प्रतिक्रियाएं बिना सोचे समझे होती हैं या सूझ-बूझ भरी होती हैं। ये सब प्रतिक्रियायें बाल मन पर गहरा प्रभाव छोडती हैं एवं एक विशिष्ट वातावरण प्रदान करती हैंप् मनोविज्ञान में स्वयं की प्रतिक्रिया का ज्ञान और उपयोग माइंडफुलनेस नामक तकनीक के रूप में जाना जाता है जिससे हमारे सामाजिक सम्बन्ध सोहाद्र्रपूर्ण व अर्थपरक बन जाते हैंप् इस तकनीक में स्वयं की प्रतिक्रिया को जाना जाता है और परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया दी जाती है। इस तकनीक के प्रयोग से माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण या परवरिश स्वस्थ तरीके से कर सकते हैंप् इस क्रम जब भी बच्चों से संवाद होता है तो प्रतिक्रिया बिना सोचे समझे नहीं होनी चाहिए अपितु बच्चों के उचित पालन-पोषण के लिए जो प्रतिक्रियाएं जरूरी हैं उनको दिया जाये जैसे बच्चों को मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाया जाये जिससे उनके जीवन में कोई भी उतार-चढ़ाव आये तो वे संभल सके और दूसरे लोगों को भी संभाल सकें। परवरिश में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण हैं। जुड़ाव पहला पहलू है जिसमें बच्चा माता-पिता के साथ कैसा महसूस करता है-जैसे बच्चा माता-पिता के साथ रहने पर इतना आश्वस्त हो जाता है कि वह अपनी हर बात उनके साथ साझा कर लेता है, अपने हर भाव को अभिव्यक्त कर लेता हैय उसका उनके लिए कितना महत्व है अर्थात माता-पिता बच्चों से क्या चाहते हैं और इसको वे किस तरह से व्यक्त करते हैं जैसे उसकी पढाई, उसका कक्षा में स्थान, या उसकी उमंग और आन्तरिक प्रसन्नताप् पालन-पोषण के सम्बन्ध में माता-पिता का बच्चों के साथ जुड़ाव निम्न प्रकार से अच्छा हो सकता है- 1. प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति- जब भी बच्चे से मिलें तब ऐसी अभिव्यक्ति दें जैसे कि आपको दुनिया-जहाँ की खुशियाँ मिल गयी हैं जिससे बच्चे को एक सुरक्षा एवं स्नेह के वातावरण का एहसास हो। 2. श्रवण- बच्चे की हर बात को ध्यान और गंभीरता से सुना जाये। 3. स्पर्श- इसमें विभिन्न शारीरिक स्पर्श आते हैं जैसे उनको गले लगाना, लाड़ करना आदि। 4. प्रशंसा- उनके प्रत्येक अच्छे व्यवहार को अविलम्ब प्रशंसा दें। 5. उपेक्षा- बच्चों के वह व्यवहार जो उनके पालन-पोषण की दृष्टि से सही नहीं हैं, उनको तवज्जो न दें। जब आप बच्चे के साथ एक जुड़ाव विकसित कर लेते हैं, तब आप बच्चे को समझ पाते हैं, उनकी क्या-क्या कमियाँ हैं जिनको दूर किया जा सकता है और उसके लिए क्या-क्या कदम उठाये जा सकते हैं, उनका ज्ञान होने लगता हैप् इसी प्रकार बच्चे में कौन-कौन से क्षमताएँ हैं जिनको उभार कर मजबूत बनाया जा सकता है, का भान हो जाता है। परवरिश का दूसरा पहलू है सकारात्मक पक्षों पर ध्यान। इसके अंतर्गत बच्चों के उन पहलुओं पर ध्यान दें जो सकारात्मक हैं और जिन्हें हम बढ़ाना चाहते हैंप् जिस प्रकार हम मिट्टी में बहुत सारे बीज डालते हैं लेकिन जिन बीजों को खाद और पानी मिलता है, वही बीज बड़े होकर वृक्ष बनते हैंप् इसी प्रकार बच्चे के जिस व्यवहार पर हमारा ध्यान ज्यादा रहेगा, वाही व्यवहार बच्चे के अंदर विकसित होगाप् अत: उसके सकारात्मक पक्षों पर ध्यान दें, न कि नकारात्मक पर।

युवा निवेशक इन 6 तरीकों से करें बचत-निवेश, नहीं होगी पैसे की कमी

नई दिल्ली । आजकल के दौर में कॉलेज की शिक्षा पूरी करते ही छात्रों को नौकरी मिल जाती है। 21-22 साल की उम्र से ही युवाओं के हाथ हर महीने के रूप में अच्छी-खासी रकम आने लगती है। ऐसे में युवा निवेशकों को शुरुआत से ही की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि बेहद कम समय में न सिर्फ वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके, बल्कि एक अच्छा-खासा फंड भी तैयार हो सके। हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिससे आप बेहतर तरीके से निवेश को अंजाम दे सकेंगे। 
1. शुरुआत में आपको एक इमरजेंसी फंड (कॉन्टिजेंसी फंड) तैयार करना चाहिए, जो कम से कम छह महीने तक आपका खर्च वहन करने में सक्षम हो। अगर आप किसी ऐसी इंडस्ट्री में हैं, जहां नौकरी को हमेशा खतरा रहता है, तो आपका यह फंड और बड़ा होना चाहिए। इसका मकसद यही है कि अप्रत्याशित खर्च आपकी वित्तीय योजनाओं को पटरी से न उतार पाए। 
2. आप एक हेल्थ कवर लें। अगर आपके पास कंपनी का दिया हुआ कवर है, तो भी एक इंडिविजुअल कवर लें। 
3. अगर आपके ऊपर कोई वित्तीय रूप से निर्भर है, तो आपको एक पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस कवर भी लेना चाहिए। इसके लिए आप एक टर्म इंश्योरेंस लें। 
4. आप अपने भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों की पहचान करें। अपने लक्ष्य को निर्धारित करें, ताकि आप निवेश का एक प्लान बना सकें और बिना नाकामी के उसे हासिल कर सकें। 
5. तीन से चार सालों में पूरी होने वाली कम अवधि के लक्ष्यों के लिए आप डेट म्यूचुअल फंड या बैंक डिपॉजिट का सहारा ले सकते हैं।
6. लंबी अवधि के लक्ष्य (पांच से साल साल से अधिक) को हासिल करने के लिए आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर विचार करना चाहिए। अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड का चयन करना चाहिए। अगर आप बेहद कम रिस्क लेना चाहते हैं, तो आपको लार्जकैप स्कीम का चयन करना चाहिए। अगर आपका रिस्क प्रोफाइल मोडरेट है, तो आप मल्टीकैप में निवेश का चुनाव करें। और अगर आप आक्रामक इन्वेस्टर हैं, तो मिड और स्मॉल कैप स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। 

प्रेग्नेंसी के दौरान रखें दांतों का खास ख्याल

जयपुर । प्रेग्नेंसी में महिला को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना होता है। यदि मां के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होगी तो इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। समय-समय पर चेकअप करवाने में किसी तरह की लापरवाही बरतना भी नुकसानदेह हो सकता है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान डेंटल केयर भी जरूरी है। इस समय शरीर में होने वाले हार्मोन के उतार-चढ़ाव का प्रभाव दांतों पर भी पड़ता है।

जरूरी है रेगुलर चेकअप : सीनियर कॉस्मोटोलॉजिस्ट और डेंटिस्ट डॉ. ज्योति शर्मा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान कमजोर दांत, मसूड़ों में दर्द जैसी परेशानियों से बचने के लिए रेगुलर चेकअप करवाना जरूरी है। साथ ही महिलाओं को अपने स्तर पर भी ओरल केयर करनी चाहिए और कुछ समस्या हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। मुंह में पनपने वाले बैक्टेरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जो गर्भस्थ शिशु के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। 
इन बातों का रखें ध्यान ..
रेगुलर हो ब्रशिंग : दांत साफ करने में कोई आलस नहीं करना चाहिए। इसके अलावा समय.समय पर फ््लॉसिंग पर भी ध्यान दें। ब्रशिंग न करने से मुंह में संक्रमण फैलने का डर रहता है जिससे बचने के लिए दांतों की सफाई जरूरी है।
न खाएं एंटीसेप्टिक्स : प्रेग्नेंसी के दौरान दांतों में दर्द की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे को नुकसान होने की संभावना हो सकती है। तकलीफ होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।
कैविटी से रखें दूरी : मीठे पदार्थों के अधिक सेवन से दांतों की कैविटी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे दांतों में इनेमल खत्म होना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में आइसक्रीमए अचारए चीनीए चॉकलेट्स जैसी चीजों का सेवन कम से कम करें।
हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी : दांतों में सडऩए मुंह से बदबू या मसूढ़ों से खून आने की परेशानी हो तो इससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए। रोज ब्रशिंग व मसूढ़ों की मसाज करना चाहिए। ऑयल पुलिंग थेरेपी भी एक अच्छा विकल्प है।
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट : मुंह से अमलता को दूर करने के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे दांत के सडऩे की समस्या से छुटकारा पाया जा सता है।