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पर्यटन एवं देवस्थान मंत्री महाराजा विश्वेन्द्र सिंह

जयपुर टाइम्स
महाराजा विश्वेन्द्र सिंह का जीवन परिचय:-
पिता का नाम:- महाराजा सवाई ब्रजेन्द्र सिंह 
माता का नाम:- महारानी विदेह कौर 
जन्म तिथि:- 23 जून 1962
जन्म स्थान:- भरतपुर
शिक्षा:- मैट्रिक सैन्ट्रल स्कूल भरतपुर
पत्नि नाम:- श्रीमती दिव्या सिंह
विवाह की तिथि:- 15.02.1989
संतान:- 1 पुत्र, कु. अनिरूद्व सिंह
व्यसाय:- सामाजिक कार्यकर्ता
राजनितिक अनुभव:- 
1989-90, 1999-2004, 04-2009:- सदस्य नौंवी, तेरहवी एवं चौदहवीं लोक सभा
1993-98:- सदस्य, दसवीं राजस्थान विधानसभा
1994-95:- सदस्य पुस्तकालय समिति
1999-2004:- सदस्य, विज्ञान एवं प्रौद्ययोगिनी तथा पर्यावरण एवं वन संबधी स्थायी समिति, लोकसभा
2004, 2007-09:- सदस्य कार्मिक एवं जन अभियान तथा विधि एवं न्याय संबधी स्थायी समिति, लोकसभा
2014-15:- सदस्य, प्राक्कलन समिति ख
2016-18:- सदस्य, नियम समिति, विधानसभा
अन्य अनुभव:-1988-89 जिला प्रमुख, जिला परिषद भरतपुर
2001:- कोषाध्यक्ष, राजस्थान राष्ट्र भाषा प्रचार समिति
2003:- सदस्य जिला अकाल रात एवं समीक्षा समिति
2008:- सलाहकार मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार
पसंदीदा  काम:- वन्य जीव संरक्षण को प्रोत्साहन देना
पसंदीदा खेल:- टेनिस एवं स्क्वैश
विदेश यात्रा:-इंग्लैण्ड, स्वीडन, नार्वे, स्पेन व जापान
स्थाई पता:- मोती महल भरतपुर
वर्तमान पदनाम:- 11 दिसम्बर 2018 को पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के लिए सदस्य निर्वाचित
केबिनेट मंत्री राजस्थान सरकार 24 दिसम्बर 2018
पर्यटन विभाग, देवस्थान विभाग
वर्तमान पता:- 18 डी सिविल लाईन, जयपुर
विश्वेन्द्र सिंह ऐसे सरल स्वभाव के धनी है जिनसे जनता कभी भी इनसे बिना किसी की पहल के कभी भी मिल सकती है। कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह भरतपुर के विकास में कोई कमी नही छोडगें। उन्होंने अभी से बंद पडे उद्योग जीईडब्ल्यू, डालमिया, चिनार और अन्य बंद पडे उद्योगों को खुलवाने के लिए पहल शुरू कर दी है एवं अन्य प्रदूषित मुक्त उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए योजना बना रखी है। जिससे भरतपुर मे पैसा आयेगा और यहां के नव युवक युवतियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होगें जिससे बेरोजगारों को रोजगार के लिए बाहर जाना नही पडेगा। 
कैबिनेट मंत्री महाराज विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि संभाग स्तर के अधिकारी भरतपुर में लगाये जायेगें जिससे लोगों की जयपुर के चक्कर के नही लगाने पडे। उन्होंने कहा कि भरतपुर एनसीआर में शामिल तो कर लिया लेकिन भाजपा सरकार ने अभी तक एनसीआर का जो लाभ भरतपुर को मिलना चाहिये था वो नही मिला है जबकि एनसीआर के बराबर के टैक्स भरतपुर की जनता को चुकाने पड रहे है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि चम्बल लिफट परियोजना गहलोत सरकार ने चालू की थी लेकिन भाजपा सरकार के आने पर इस योजना को खटाई में डाल दिया जिससे भरतपुर शहर व गांवो को पानी उपलब्ध नही हो पाया था। उन्होनें कहा कि 6 माह के अंदर कस्बे व गांवो के अंदर चम्बल का पानी पहुचाया जायेगा। इसके लिए चम्बल परियोजना के कार्य में तेजी लाई जायेगी। उन्होंने जल महलो और किले को पर्यटन के रूप में विकसित करने की बात कही। धार्मिक पर्यटन के रूप में डीग कांमा को भी गोवर्धन, वृंदावन, मथुरा की तरह ही विकसित किया जायेगा। 


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स्‍वामी विवेकानंद के कुछ ऐसे विचार, जो जीवन को बना देंगे सफल

नई दिल्‍ली : आज स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती है. उनका जन्‍म 1863 में आज ही के दिन कोलकाता में हुआ था. उनके विचार आज भी प्रासांगिक बने हुए हैं. स्वामी जी के विचार किसी भी व्यक्ति की निराशा को दूर कर सकते हैं. उसमें आशा भर सकते हैं. प्रस्तुत हैं स्वामी जी के कुछ ऐसे ही विचार...

1. उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते.

2. आप जो भी सोचेंगे. आप वही हो जाएंगे. अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे. अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे. 
3. एक विचार चुनिए और उस विचार को अपना जीवन बना लिजिए. उस विचार के बारे में सोचें उस विचार के सपने देखें. अपने दिमाग, अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लें बाकी सारे विचार छोड़ दें. यही सफलता का रास्ता हैं.

4. एक नायक की तरह जिएं. हमेशा कहें मुझे कोई डर नहीं, सबको यही कहें कोई डर नहीं रखो
5. ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारे भीतर मौजूद हैं. हम ही मूर्खतापूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आंखों को ढक लेते हैं...और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अंधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है.

6. अगर आप पौराणिक देवताओं में यकीन करते हैं और खुद पर यकीन नहीं करते हैं तो आपको मुक्ति नहीं मिल सकती है. अपने में विश्वास रखो और इस विश्वास पर खड़े हो जाओ, शक्तिशाली बनो, इसी की हमें जरूरत है.

7. ताकत ही जीवन है और कमजोरी मौत है


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सर्दियों में हो गले में दर्द और खराश तो छुटकारा दिलाएंगी ये 5 तरह की चाय

जयपुर : सर्दियों की सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है गले में दर्द और खराश का होना, ऐसे में हमें समझ ही नहीं आता कि आखिर हम ऐसा क्या करें कि इस छोटी, लेकिन दर्द भरी समस्या से राहत मिल सके. तो हम आपको बता दें कि सर्दियों में होने वाली इन छोटी-छोटी समस्याओं का इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं बल्कि आपके अपने घर में ही है. जी हां, सर्दियों में चाय तो हम सभी पीते हैं और यही चाय आपके गले के दर्द और खराश का इलाज कर सकती है, इसके बारे में भी हम सब जानते हैं, बस यह पता नहीं होता कि चाय में हम क्या मिलाएं जो हमें इस समस्या से राहत दिलाएगी. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सर्दियों में अपनी चाय में आप क्या मिला सकते हैं, जिससे आपको इन छिटपुट समस्याओं से बिना डॉक्टर के पास जाए राहत मिल सकती है.

हल्दीः
हल्दी में काफी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सिडेंट के गुण पाए जाते हैं. सर्दियों में रोज अपनी चाय में एक चुटकी मिलाकर पीने से शरीर में गर्मी बनी रहेगी जिससे सर्दी, खांसी जैसे सर्दियों में होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिलता है. बता दें तासीर काफी गरम होती है, जिससे सर्दी का खतरा कम होता है.

मुलेठीः
सर्दियों में आप सुबह की चाय में मुलेठी डालकर भी पी सकते हैं. बता दें प्राकृतिक मिठास होने के कारण यह चाय में मसाले के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके एंटी-डायबिटिक और एंटीऑक्सिडेंट गुण मेटाबोलिक सिंड्रोम के इलाज में भी मददगार होते हैं. इसके साथ ही यह वजन घटाने में भी काफी सहायक होती है.

अदरकः
अदरक की चाय, सर्दियों में लोगों को सबसे अधिक पसंद आने वाली चाय में से एक होती है. यही नहीं खाने में भी यह मसाले के तौर पर काफी इस्तेमाल किया जाता है. बता दें स्वाद के साथ ही इसमें कई तरह के प्राकृतिक औषधीय गुण भी मौजूद होते हैं. तो अगर आप सर्दी-खांसी से परेशान हैं तो बेझिझक सुबह और शाम को अदरक की चाय पीएं.

कालीमिर्च
कालीमिर्च भी गले की खराश और बंद नाक का रामबाण इलाज होती है. ऐसे में काली मिर्च की चाय बनाने के लिए आप कालीमिर्च पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं इसमें पाया जाने वाला पिपराइन त्वचा के लिए भी बेहद अच्छा माना जाता है.


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कब्ज से हैं परेशान है ,तो करे ये

कब्ज एक ऎसी बिमारी है, जिसके बारे में सबके सामने खुल कर बात नहीं कर सकते हैं। कॉन्स्टिपेशन के समय होने वाली परेशानियां सिर्फ वही समझ सकता है जो इस दौर से गुजर चूका है। हालांकि यह दिक्कत अधिकत्तर लोगों को आती है पर जल्द ही ठीक भी हो जाती है। पर कुछ लोग ऎसे भी है जिन्हें इस समस्या का सामना लंबे समय तक करना पडता है। आज हम कब्ज से परेशान लोगों के लिए लेकर आएं है कुछ घरेलू उपाय जो उनका पेट साफ रखने में काफी मदद करेगा।
जैतून का तेल 
आपने अक्सर देखा होगा कि जब कोई मशाीन जाम हो जाती है तो उस पर तेल लगाना पडता है। उसी तरह अपने शरीर को भी तेल की जरूरत होती है। हर रोज सुबह उठ कर दो चम्मच जैतून का तेल पी लो, उससे आपका पेट साफ हो जाएगा।
वर्कआउट 
सुबह उठ कर थोडा वर्कआउट करने की आदत डालें, इससे आपके शरीर की पाचन शक्ति मजबूत होगी। बॉडी स्ट्रेच करने जैसी कसरत से आपका पेट साफ होने की संभावना बढ जाती है।
दही
दही में बहुत तरह के लाभदायक बैक्टेरिया होते हैं। अपने खाने के साथ दही का सेवन हर रोज करें।


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आज के समय में बच्चों की परवरिश एक चुनौती:- डा. डिम्पल डागुर

भरतपुर । आज हम जो कुछ हैं, वह हमारी परवरिश के कारण हैं। बच्चे के लिए उसके माता-पिता सबसे पहले आदर्श होते हैं। उनके व्यवहार व आचरण का बच्चे के कोमल मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे व्यक्ति जो समाज में अनुकरणीय माने जाते हैं, उनका बचपन किसी ना किसी रूप में विलक्षण था जिसमें उनके माता-पिता की परवरिश का बहुत बड़ा योगदान था। बच्चों की परवरिश ऐसी होनी चाहिए जिससे बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से सबल बन सकें, उनको ऐसे संस्कार दे सकें जिससे वे अपने जीवन को साहस और उमंग से जी सकें तथा आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना कर सकें। उक्त वाक्य डा. डिम्पल डागुर ने जयपुर टाईम्स से खास मुलाकात में कहें। डा. डागुर ने बताया कि संयुक्त परिवारों की घटती संख्या, तकनीक का अंधाधुंध उपयोग व भागमभाग वाली जीवन शैली आदि कारणों की वजह से आज के समय में बच्चों की परवरिश एक चुनौती बन गयी है। माता-पिता बच्चों को जीवन मूल्य सिखाने के बजाय उनको सुख-सुविधा देना चाहते हैं, इसी में वे अपनी कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैंप् बच्चे क्या चाहते हैं। उनकी योग्यता कितनी है। इन पहलुओं पर ध्यान देने के बजाय माता-पिता अपने मत और इच्छा बच्चों पर थोप देते हैंप् इसी क्रम में स्वयं माता-पिता का आचरण जो कि वे बच्चों से चाहते हैं, भिन्न हो जाता है जिससे बच्चे की मनोदशा भ्रामक हो जाती है, उसको स्पष्ट मार्गदर्शन अनुभव नहीं होता है। इस असमंजस की स्थिति में उनकी मानसिक ऊर्जा खर्च हो जाती है। कम उम्र में डिप्रेशन, तनाव, चिंता, नशीले पदार्थों का सेवन, मोबाइल एडिक्शन, आदि मानसिक परेशानियाँ इस युग में बढ़ती जा रही हैं। इसका अर्थ यह है कि बच्चों ने चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना सही ढंग से नहीं सीखा है और वे इतने हताश और कुंठित हो जाते हैं कि आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं। क्या कहीं आप भी अपने बच्चों की परवरिश इसी तरह से तो नहीं कर रहे हैं। बच्चों से परस्पर संवाद करते समय आपकी प्रतिक्रियाएं बिना सोचे समझे होती हैं या सूझ-बूझ भरी होती हैं। ये सब प्रतिक्रियायें बाल मन पर गहरा प्रभाव छोडती हैं एवं एक विशिष्ट वातावरण प्रदान करती हैंप् मनोविज्ञान में स्वयं की प्रतिक्रिया का ज्ञान और उपयोग माइंडफुलनेस नामक तकनीक के रूप में जाना जाता है जिससे हमारे सामाजिक सम्बन्ध सोहाद्र्रपूर्ण व अर्थपरक बन जाते हैंप् इस तकनीक में स्वयं की प्रतिक्रिया को जाना जाता है और परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया दी जाती है। इस तकनीक के प्रयोग से माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण या परवरिश स्वस्थ तरीके से कर सकते हैंप् इस क्रम जब भी बच्चों से संवाद होता है तो प्रतिक्रिया बिना सोचे समझे नहीं होनी चाहिए अपितु बच्चों के उचित पालन-पोषण के लिए जो प्रतिक्रियाएं जरूरी हैं उनको दिया जाये जैसे बच्चों को मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाया जाये जिससे उनके जीवन में कोई भी उतार-चढ़ाव आये तो वे संभल सके और दूसरे लोगों को भी संभाल सकें। परवरिश में दो पहलू बहुत महत्वपूर्ण हैं। जुड़ाव पहला पहलू है जिसमें बच्चा माता-पिता के साथ कैसा महसूस करता है-जैसे बच्चा माता-पिता के साथ रहने पर इतना आश्वस्त हो जाता है कि वह अपनी हर बात उनके साथ साझा कर लेता है, अपने हर भाव को अभिव्यक्त कर लेता हैय उसका उनके लिए कितना महत्व है अर्थात माता-पिता बच्चों से क्या चाहते हैं और इसको वे किस तरह से व्यक्त करते हैं जैसे उसकी पढाई, उसका कक्षा में स्थान, या उसकी उमंग और आन्तरिक प्रसन्नताप् पालन-पोषण के सम्बन्ध में माता-पिता का बच्चों के साथ जुड़ाव निम्न प्रकार से अच्छा हो सकता है- 1. प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति- जब भी बच्चे से मिलें तब ऐसी अभिव्यक्ति दें जैसे कि आपको दुनिया-जहाँ की खुशियाँ मिल गयी हैं जिससे बच्चे को एक सुरक्षा एवं स्नेह के वातावरण का एहसास हो। 2. श्रवण- बच्चे की हर बात को ध्यान और गंभीरता से सुना जाये। 3. स्पर्श- इसमें विभिन्न शारीरिक स्पर्श आते हैं जैसे उनको गले लगाना, लाड़ करना आदि। 4. प्रशंसा- उनके प्रत्येक अच्छे व्यवहार को अविलम्ब प्रशंसा दें। 5. उपेक्षा- बच्चों के वह व्यवहार जो उनके पालन-पोषण की दृष्टि से सही नहीं हैं, उनको तवज्जो न दें। जब आप बच्चे के साथ एक जुड़ाव विकसित कर लेते हैं, तब आप बच्चे को समझ पाते हैं, उनकी क्या-क्या कमियाँ हैं जिनको दूर किया जा सकता है और उसके लिए क्या-क्या कदम उठाये जा सकते हैं, उनका ज्ञान होने लगता हैप् इसी प्रकार बच्चे में कौन-कौन से क्षमताएँ हैं जिनको उभार कर मजबूत बनाया जा सकता है, का भान हो जाता है। परवरिश का दूसरा पहलू है सकारात्मक पक्षों पर ध्यान। इसके अंतर्गत बच्चों के उन पहलुओं पर ध्यान दें जो सकारात्मक हैं और जिन्हें हम बढ़ाना चाहते हैंप् जिस प्रकार हम मिट्टी में बहुत सारे बीज डालते हैं लेकिन जिन बीजों को खाद और पानी मिलता है, वही बीज बड़े होकर वृक्ष बनते हैंप् इसी प्रकार बच्चे के जिस व्यवहार पर हमारा ध्यान ज्यादा रहेगा, वाही व्यवहार बच्चे के अंदर विकसित होगाप् अत: उसके सकारात्मक पक्षों पर ध्यान दें, न कि नकारात्मक पर।


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युवा निवेशक इन 6 तरीकों से करें बचत-निवेश, नहीं होगी पैसे की कमी

नई दिल्ली । आजकल के दौर में कॉलेज की शिक्षा पूरी करते ही छात्रों को नौकरी मिल जाती है। 21-22 साल की उम्र से ही युवाओं के हाथ हर महीने के रूप में अच्छी-खासी रकम आने लगती है। ऐसे में युवा निवेशकों को शुरुआत से ही की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि बेहद कम समय में न सिर्फ वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके, बल्कि एक अच्छा-खासा फंड भी तैयार हो सके। हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स दे रहे हैं, जिससे आप बेहतर तरीके से निवेश को अंजाम दे सकेंगे। 
1. शुरुआत में आपको एक इमरजेंसी फंड (कॉन्टिजेंसी फंड) तैयार करना चाहिए, जो कम से कम छह महीने तक आपका खर्च वहन करने में सक्षम हो। अगर आप किसी ऐसी इंडस्ट्री में हैं, जहां नौकरी को हमेशा खतरा रहता है, तो आपका यह फंड और बड़ा होना चाहिए। इसका मकसद यही है कि अप्रत्याशित खर्च आपकी वित्तीय योजनाओं को पटरी से न उतार पाए। 
2. आप एक हेल्थ कवर लें। अगर आपके पास कंपनी का दिया हुआ कवर है, तो भी एक इंडिविजुअल कवर लें। 
3. अगर आपके ऊपर कोई वित्तीय रूप से निर्भर है, तो आपको एक पर्याप्त लाइफ इंश्योरेंस कवर भी लेना चाहिए। इसके लिए आप एक टर्म इंश्योरेंस लें। 
4. आप अपने भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों की पहचान करें। अपने लक्ष्य को निर्धारित करें, ताकि आप निवेश का एक प्लान बना सकें और बिना नाकामी के उसे हासिल कर सकें। 
5. तीन से चार सालों में पूरी होने वाली कम अवधि के लक्ष्यों के लिए आप डेट म्यूचुअल फंड या बैंक डिपॉजिट का सहारा ले सकते हैं।
6. लंबी अवधि के लक्ष्य (पांच से साल साल से अधिक) को हासिल करने के लिए आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर विचार करना चाहिए। अपने रिस्क प्रोफाइल के आधार पर आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड का चयन करना चाहिए। अगर आप बेहद कम रिस्क लेना चाहते हैं, तो आपको लार्जकैप स्कीम का चयन करना चाहिए। अगर आपका रिस्क प्रोफाइल मोडरेट है, तो आप मल्टीकैप में निवेश का चुनाव करें। और अगर आप आक्रामक इन्वेस्टर हैं, तो मिड और स्मॉल कैप स्कीम का चुनाव कर सकते हैं। 


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प्रेग्नेंसी के दौरान रखें दांतों का खास ख्याल

जयपुर । प्रेग्नेंसी में महिला को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना होता है। यदि मां के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होगी तो इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। समय-समय पर चेकअप करवाने में किसी तरह की लापरवाही बरतना भी नुकसानदेह हो सकता है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान डेंटल केयर भी जरूरी है। इस समय शरीर में होने वाले हार्मोन के उतार-चढ़ाव का प्रभाव दांतों पर भी पड़ता है।

जरूरी है रेगुलर चेकअप : सीनियर कॉस्मोटोलॉजिस्ट और डेंटिस्ट डॉ. ज्योति शर्मा ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान कमजोर दांत, मसूड़ों में दर्द जैसी परेशानियों से बचने के लिए रेगुलर चेकअप करवाना जरूरी है। साथ ही महिलाओं को अपने स्तर पर भी ओरल केयर करनी चाहिए और कुछ समस्या हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। मुंह में पनपने वाले बैक्टेरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जो गर्भस्थ शिशु के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं। 
इन बातों का रखें ध्यान ..
रेगुलर हो ब्रशिंग : दांत साफ करने में कोई आलस नहीं करना चाहिए। इसके अलावा समय.समय पर फ््लॉसिंग पर भी ध्यान दें। ब्रशिंग न करने से मुंह में संक्रमण फैलने का डर रहता है जिससे बचने के लिए दांतों की सफाई जरूरी है।
न खाएं एंटीसेप्टिक्स : प्रेग्नेंसी के दौरान दांतों में दर्द की समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे बच्चे को नुकसान होने की संभावना हो सकती है। तकलीफ होने पर डॉक्टर से परामर्श लें।
कैविटी से रखें दूरी : मीठे पदार्थों के अधिक सेवन से दांतों की कैविटी होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे दांतों में इनेमल खत्म होना शुरू हो जाते हैं। ऐसे में आइसक्रीमए अचारए चीनीए चॉकलेट्स जैसी चीजों का सेवन कम से कम करें।
हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी : दांतों में सडऩए मुंह से बदबू या मसूढ़ों से खून आने की परेशानी हो तो इससे संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए। रोज ब्रशिंग व मसूढ़ों की मसाज करना चाहिए। ऑयल पुलिंग थेरेपी भी एक अच्छा विकल्प है।
फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट : मुंह से अमलता को दूर करने के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे दांत के सडऩे की समस्या से छुटकारा पाया जा सता है।
 


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इस काम के लिए पुरुष क्यों करे पहल ,

नई दिल्ली। बदलते दौर में प्यार करने की परिभाषाएं बदल रही हैं और प्यार के इजहार की वह परंपरा भी टूट रही है, जिसमें प्यार में इजहार करने का झंडा सिर्फ पुरुष थामे रखता है। महिलाओं में ऑनलाइन प्यार तलाशने का चलन बढ़ा है, मुखर हो रहीं महिलाएं आगे बढ़कर पुरुषों से प्यार का इजहार करने से भी नहीं हिचकिचा रही हैं।

कुछ बरस पहले तक ऑनलाइन डेटिंग करने वालों को हिकारत भरी नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब यह एक ट्रेंड बन गया है। एक अनुमान के मुताबिक, अब हर पांच में से एक रिलेशनशिप ऑनलाइन शुरू हो रहा है, यह वजह है कि ऑनलाइन डेटिंग एप्स की बाढ़ आ गई है। अमेरिका और यूरोप में स्टैब्लिश कई बड़ी डेटिंग कंपनियां भारत में कारोबार खड़ा कर रही हैं। इसी में से एक है, 'बम्बल' जिसमें हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने भी निवेश किया है।


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इस रोग से बचने के लिए करे ये काम

एसीडिटी पेट में उपस्थित ग्रैस्ट्रिक गंथियो द्वारा अतिरिक्त अम्ल के साव्र को दर्शाता है। पेट में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक एसिड पाचन तंत्र के समुचित कार्य के लिए जिम्मेदार है। जटिल खाद्य पदार्थो को पचाने के लिए पेट मे एसिड के एक सामान्य स्तर का होना जरूरी है। अगर एसिड की मात्रा कम होती है तो खाना पूरी तरह पच नही पाता है तथा एसिड को ज्यादा होने पर भी इसके पाचन में असुविधा होती है और हम इसे एसीडिटी कहते है।

एसीडिटी होने के कारण-
तला हुआ तथा ठोस बिना रेशे वाला खाद्य अम्लता यानी एसीडिटी का मुख्य कारण है। तनाव भी इसका एक मुख्य कारण है। ध्रमूपान तथा शराब की अधिकता तंत्रिका तंत्र को कमजोर कर देती है, और परिणाम स्वरूप पेट में उपस्थित श्रेष्म झिल्ली ठीक से काम करना बंद कर देती है और एसीडिटी उत्पन्न होती है। बहुत अधिक तीखा और जल्दी-जल्दी खाने से भी एसीडिटी बढती है।

एसीडिटी को कम करने के घरेलु उपाय मे अपने भोजन के साथ दो चम्मच सफेद सिरके का उपयोग करना भी कारगर साबित होता है।

पुदीने और मुलेठी युक्त हर्बल चाय भी एसीटिडी कम करने का एक और उपाय है क सुबह उठते ही जल का सेवन करना भी एसीडिटी को कम करता है।

एक गिलास पानी मे साबुत जीरे को उबाले तथा छानकर भोजन करते समय साथ मे लें मसालेदार भोजन, अचार तथा तले हुए खाद्य पदार्थो के सेवन से बचे क ककड़ी तरबूज तथा केले जैसे फलो का सेवन भी एसीडिटी को कम करता है तथा यह एक अच्छा घरेलू उपाय भी है।


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 जयपुर की राजकुमारी दीया, 21 साल पहले समाज से लड़कर की थी लव मैरिज,  अब क्यों तलाक मांग रही है

जयपुर के पूर्व राजघराने की बेटी दीया कुमारी एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर खबरों में हैं। 21 साल पहले सारे समाज से लड़कर लव मैरिज कर चर्चा में आई दीया ने अब अपने पति नरेंद्र सिंह से तलाक मांगा है, जिसके बाद से वह खबरों में बनी हुई हैं। दीया ने गांधीनगर स्थित फैमिली कोर्ट में अपने पति नरेंद्र सिंह से तलाक के लिए अर्जी लगाई है। माना जा रहा है कि कोर्ट दीया कुमारी की याचिका पर जल्द सुनवाई कर सकता है।

दीया कुमारी की शादी अगस्त 1997 में हुई थी। शादी के साथ ही एक विवाद भी शुरू हुआ। उन्होंने नरेंद्र सिंह से प्रेम विवाह किया था। विवाद इसलिए हुआ कि दोनों एक ही गोत्र के थे। इसे लेकर राजपूत समाज में आक्रोश भी नजर आया। सगोत्री शादी को लेकर खिलाफत भी शुरू हुई, लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रहीं। आइए जानते हैं दीया की लव स्टोरी के बारे में...

दीया ने अपनी लव स्टोरी को लेकर एक ब्लॉग लिखा था, जिसमें उन्होंने नरेंद्र सिंह के साथ अपने अफेयर की सारी जानकारी शेयर की थी। दीया ने इसमें इस बात का जिक्र किया कि कैसे उनके पति नरेंद्र सिंह से पहली मुलाकात हुई थी। नरेंद्र से जब वह मिली थीं तो उनकी उम्र महज 18 साल थी।

989 में नरेंद्र जब ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड एकाउंटेंट की तैयारी कर रहे थे तो उस दौरान उन्होंने एसएमएस संग्रहालय ट्रस्ट में ट्रेनिंग के लिए अकाउंट सेक्शन में ज्वॉइन किया था। यहां उन्होंने तीन महीने काम किया। इसी दौरान मेरी उनसे महल में पहली मुलाकात हुई। वह कुछ काम से आए थे क्योंकि मैं भी अकाउंट में मदद कर रही थी, जिसमें मुझे उनके साथ कुछ हिसाब देखने के लिए कहा गया था। हम लोगों में बात हुई और मुझे उनसे बात करके बहुत अच्छा लगा था।

नरेंद्र में मुझे जो बात सबसे ज्यादा अच्छी लगी, वो थी उनकी सादगी और ईमानदारी। उनका केयरिंग स्वभाव मुझे अच्छा लगा, जो भारतीय पुरुषों में बहुत कम ही देखने को मिलता है। यह तय था कि यह लव एट फर्स्ट साइट यानी पहली नजर में ही प्यार होने जैसा नहीं था। इसका पहला एहसास मुझे उनकी ट्रेनिंग के तीन महीने बाद हुआ। मेरा उनसे मिलने का मन किया करता था। वो जब  जयपुर आते तो हम अपने दोस्त के यहां मिला करते थे। तब तक हम दोनों में बस अच्छी दोस्ती हुआ करती थी।

इसके बाद जब मुझे अपने माता-पिता के साथ विदेश यात्रा पे जाना पड़ा, तब मुझे नरेंद्र की याद सताने लगी। मेरा हर वक्त उनसे मिलने का दिल करता था। तब मुझे समझ आया कि हमारे बीच सिर्फ दोस्ती ही नहीं है। मुझे तब यह एहसास हुआ की मेरी उनके प्रति कितनी स्ट्रॉन्ग फीलिंग है।

जब मैंने अपनी मां को नरेंद्र के बारे में बताया तो उन्हें इसका गहरा झटका लगा। वह चाहती थीं कि मैं इससे बाहर निकल जाऊं। इसके बाद से मैं जब भी नरेंद्र से मिलती तो हमें बहुत सतर्क रहना पड़ता था। हम अक्सर दिल्ली में मिला करते थे। मैं जब भी दिल्ली जाती तो अपने दोस्त के यहां उनसे मिलती। हमारे बारे में जब नरेंद्र के मां-बाप को मालूम हुआ तो उनका हाल भी मेरी मां की तरह ही था। उन्होंने इस बात को लेकर नरेंद्र से बहुत झगड़ा भी किया।

हम लोगों ने अपने परिवार वालों के लिए एक दूसरे से दूर जाने का फैसला लिया, लेकिन दोनों से ये भी नहीं हो पाया। इसके बाद हम दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। इस बारे में मैंने जब घर पर बताया तो इससे वह बहुत गुस्सा हुए, लेकिन बाद में दोनों शादी के लिए तैयार हो गए। परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुई। इसके बाद राजपूत समाज ने हम दोनों के एक ही गौत्र के होने का विरोध किया। इस विरोध में उनके पिता भवानी सिंह को स्थाई अध्यक्ष पद से तो हटा ही दिया गया था। इसके साथ ही राज परिवार से रिश्ता भी खत्म कर लिया गया। इसके बाद अगस्त 1997 में दोनों की दिल्ली में शादी हुई।

दीया महाराजा भवानी सिंह की इकलौती बेटी है। उन्होंने अपनी पढ़ाई मॉडर्न स्कूल नई दिल्ली और महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल जयपुर से की। आगे की पढ़ाई करने के लिए वह लंदन चली गईं। दीया कुमारी के दो बेटे पद्मनाभ सिंह और लक्ष्यराज सिंह और बेटी गौरवी है। दीया वर्तमान में सवाई माधोपुर से बीजेपी विधायक हैं।


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भारतीय महिला की ब्रिटेन में गे पति ने की हत्या

ब्रिटेन में भारतीय मूल की 34 वर्षीय फार्मासिस्ट की उसके पति ने हत्या कर दी है। महिला अपने मिडिलवारे स्थित घर में मृत पाई गई थी। महिला की हत्या मई में की गई और अब मंगलवार को उसके पति को दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने 30 साल की सजा सुनाई है। दोषी का नाम मितेश पटेल (37) है। मई में जब मृतक महिला जेसिका का शव मिला तो मितेश ने कहा कि उसने अपनी पत्नी की हत्या नहीं की है। लेकिन जब मामले की जांच हुई तो पता चला कि उसने प्लास्टिक के बैग से पत्नी की हत्या की। जेसिका की मौत की वजह दम घुटना बताई गई थी। जांच में पता चला की दोषी पति ने पूरी साजिश के तहत पत्नी की हत्या की है। वह एक अन्य आदमी से ग्रिंडर ऐप पर मिला था। यह ऐप क्विर समुदाय का दुनिया का सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग ऐप है। क्विर यानी गे, ट्रांसजेंडर, बायसैक्सुअल आदि। जांच में पता चला कि मितेश ने इंटरनेट पर कई सर्च किए थे। जैसे- "मैं अपनी पत्नी को मारना चाहता हूं", "इंसुलिन ओवरडोज", "पत्नी को मारने के लिए साजिश", "क्या इसके लिए मुझे कोई साथी मिल सकता है", "यूके से पत्नी को मारने के लिए कोई व्यक्ति" और "कितना मैथाडोन तुम्हें मार सकता है।"

दोषी पति ने जुलाई 2015 में अपने सिडनी स्थित प्रेमी अमित से पत्नी के लिए कहा था कि उसके कुछ ही दिन चिन्हित हैं। जब पुलिस ने मितेश से सवाल किए तो उसने खुद को बेगुनाह बताया लेकिन अभियोजन पक्ष के पास सबूत थे कि मितेश ने अपनी पत्नी को पहले इंसुलिन का इंजेक्शन दिया और बाद में खूब तड़पाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। 

जेसिका के परिवार का कहना है कि वह एक अच्छी लड़की थी और अपने पति से बहुत प्यार करती थी। वह काफी खुश थी। मितेश अपनी पत्नी के साथ एक फार्मेसी स्टोर चलाता था और वह स्टोर के कर्मियों के सामने अपने गे प्रेमी के साथ चैटिंग करता था। उसने ग्रिंडर पर प्रिंस नाम से अपनी प्रोफाइल बनाई थी।

ज्यूरी ने पाया कि उसने अपनी पत्नी को धोखा दिया है। उसकी गे वाली दोहरी जिंदगी ने उसकी पत्नी की जान ली है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी ने पत्नी की मौत के बाद इंश्योरेंस का पैसा लेकर प्रेमी अमित के साथ ऑस्ट्रेलिया जाने की योजना भी बनाई 


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फर्जी से असली बनी राधे मां

पिछले साल अपनी हरकतों के चलते फर्जी बाबाओं की सूची में डाली गईं राधे मां को राहत मिल गई है। उनकी न सिर्फ जूना अखाड़े में वापसी हो गई है, बल्कि उन्हें फिर से महामंडलेश्वर का पदवी भी फिर से मिल गई है।


राधे मां द्वारा दिए गए लिखित माफीनामे के बाद अखाड़े ने यह फैसला लिया है। अखाड़े में वापसी के बाद राधे मां प्रयागराज कुंभ में होने वाली जूना अखाड़े की पेशवाई में शामिल हो सकेंगी। उन्हें सभी शाही स्नानों में भी शामिल होने की पात्रता रहेगी। राधे मां ने आपत्तिजनक डांस करने के मामले में भी लिखित माफी मांगी है और इस तरह की हरकत फिर नहीं करने की भी कसम खाई है।जानकारी के मुताबिक जूना अखाड़ा कुंभ में महामंडलेश्वर के तौर पर राधे मां को जमीन व दूसरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा। गौरतलब है कि पिछले साल राधे मां का नाम अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की सूची में डाला था। ऐसे बाबाओं की संख्‍या दर्जनभर से भी ज्यादा है।

बताया जा रहा है कि राधे मां का निलंबन रद्द करने और महामंडलेश्वर की पदवी वापस देने का फैसला कुछ दिनों पहले ही जूना अखाड़े की बैठक में किया गया, जिसकी औपचारिक घोषणा अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि ने की है। उनके मुताबिक जांच में उनके (राधे मां) खिलाफ कोई गंभीर आरोप नहीं पाए गए। बताया जा रहा है कि अखाड़ा परिषद से पायलट बाबा को भी राहत मिल गई है।