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इस राज्य में छिपा है कुबेर का खजाना

मध्य प्रदेश को कुबेर का खजाना कहा जाता है। यहां ऐसी बहुत सी जगह हैं जिसे देखकर आप कहीं और जाने का इरादा भूल जाएंगे, क्योंकि प्रकृति ने यहां खूबसूरती बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां की नदियां, पहाडियां, झरने और जंगले काफी खूबसूरत हैं इसलिए देश-दुनिया के पर्यटक और प्रकृति के दीवाने इन्हें देखने के लिए यहां आते हैं।

छिंदवाड़ा से करीब 50 किमी दूर मोहखेड़ के पास देवगढ़ किला स्थित है। यह 18वीं शताब्दी का बना हुआ है। यह मध्यभारत के बड़े राजवंश का केन्द्र बिंदु था और गोंडवंश के राजाओं की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था। इसका उत्पादन प्रतापी राजा जाटव के द्वारा हुआ, यह किला पहाड़ी पर बनाया गया है और गहरी खाई से लगा हुआ है।

इस किले में आप उत्तर दिशा से प्रवेश कर सकते है, यह किला ऐतिहासिक महत्ता की कहानी को बखान करता है। इस किले में एक तालाब है जो मोतीटांका के नाम से जाना जाता है। देवगढ़ के नीचे धुरवा राजाओं की समाधि है। यहां आकर यहां के इतिहास को जानने का पूरा मौका मिलता है। अगर आप भी इतिहास को जानने के शौकीन हैं तो यहां पर एक बार जरूर जाएं।

पर्यटन को बढ़ावा देती हैं ये खास शाही ट्रेनें

भारतीय पर्यटन स्थलों की तरह ही कुछ खास ट्रेन भी हैं जो देखने लायक हैं। ये ट्रेनें सफर को तो आसान बनाती ही हैं साथ ही इन्हें देखने के लिए भी पर्यटक इन ट्रेनों में आते हैं। भारतीय रेलवे ने कुछ बहुत ही बेहतरीन रॉयल ट्रेनें दी हैं, यहां आने पर आपको ऐसा लगेगा मानों आप किसी महल में आ गए हों। यह ट्रेनें ज्यादातर इंडिया ट्रैवल को प्रोमोट करती हैं। चलिए आपको बताते हैं इन खास शाही ट्रेनों के बारे में....

पैलेस आँन विल्स :-

पैलेस आंन विल्स की शुरूआत 1983 में हुई थी। यह भारत की बहुत पुरानी रॉयल ट्रेनों में से एक है। इस ट्रेन को शुरूआत करने का खास उद्देश्य राजपूत वंश और राजस्थान को दर्शाना था। इस ट्रेन में लगभग 14 कोच बने हुए हैं, जो आपको पर्यटन का अलग अनुभव कराऐंगे। इस ट्रेन में दो बहुत ही बेहतरीन रेस्टोरेंट द महाराजा और द महारानी हैं। इन्हें राजस्थानी लुक दिया गया है। यह ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुक और आगरा तक जाती है।

रॅायल राजस्थान आँन विल्स :-

भारतीय रेलवे ने रॉयल राजस्थान आंन विल्स को पर्यटकों के आराम के लिए बनाया है। इसे 2009 में शुरू किया गया था और यह बिल्कुल पैलेस आंन विल्स जैसी दिखाई देती है। इसमें स्वर्ण महल और शीश महल दो बेहतरीन डाइनिंग कार है। यह ट्रेन दिल्ली से शुरू होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा तक जाती है।

द गोल्डन चौरिओट :-

द गोल्डन चौरिओट एक लक्जरी ट्रेन है जो साउथ इंडिया की कुछ जगहों को कवर करती है। पैलेस आंन विल्स की सफलता के बाद इसकी शुरूआत की गई थी। इसमें लगभग 11 कोच हैं जो बहुत ही रॉयल लुक देती है। इस ट्रेन की देखभाल कर्नाटक स्टेट टूरिज्म और डेवलपमेंट द्वारा की जाती है। ये ट्रेन अक्टूबर- मार्च के बीच चलती है। इस ट्रेन के दो रूट है, रूट 1- बैंगलोर, मैसूर, नागरहोले नेशनल पार्क, हसन, होसपेट, हम्पी, चेन्नई, बादामी और गोवा। रूट 2- बैंगलोर, चेन्नई, पांडीचेरी, थन्जावूर, मदूरई और कोची।

महाराजा एक्सप्रेस :-

महाराजा एक्सप्रेस की शुरूआत 2010 में हुई थी। यह सेंट्रल और नार्थ- वेस्ट इंडिया को कवर करती है। महाराजा एक्सप्रेस को अक्टूबर-अप्रैल तक आंपरेट किया जाता है और इसका मेजर लोकेशन राजस्थान है।

इस छोटे से पर्यटन स्थल पर बहुत कुछ है देखने लायक

राजस्थान का मेनाल छोटा सा स्थान है पर यह अपने प्राकृतिक सौन्दर्य, अलौकिक, नैसर्गिक वैभव, वाटरफॉल और मंदिर के कारण बहुत प्रसिद है। इस जगह पर पर्यटन और आस्था दोनों का संगम भी देखने के मिलता है। चित्तौड़ राजमार्ग पर बूंदी से करीब 100 किलोमीटर और चित्तौड़ से 70 किलोमीटर की दूरी पर मेनाल स्थान है।

मेनाल की ग्रेनाइट की सख्त चट्टानों से 100 फीट गहरा पानी नीचें की और गिरता है। इस नदी का पानी जिस जगह पर गिरता है, ठीक उसी स्थान पर नदी के पाट के दाहिनी ओर महानाल मठ और शिवालय है। यहां पर महानाल मंदिर में बहुत सारे अन्य मंदिर भी बने हैं। इन मंदिरों का निर्माण अजमेर और दिल्ली के चौहान वंशी राजाओं ने करवाया था। महानालेश्वर मंदिर शिव को समर्पित है।

यह मंदिर भूमिज शैली में बनाया गया है और इसके सामने एक छतरी के नीचे नंदी की बड़ी सी मूर्ति बनी हुई है। इस मंदिर की दीवारों पर शेरों, अप्सराओं, हाथियों आदि की जीवंत कलात्मक मूर्तियां लगाई गई हैं और पास के पत्थरों पर बेल-बूटे बने हैं। यहां पर घुमने के लिए बहुत सारे मशहूर स्थान हैं, जैसे कि  तारागढ़ किला, बूंदी महल, रानीजी-की-बावडी आदि। इन महलों की दीवारों पर रासलीला की कहानियों के दृश्यों को दर्शाते चित्र बने हैं। यहां की ये सभी चीजें पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं और इन्हें देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।

खतरों से खेलने का शौक है तो जाएं इन जगहों पर

अगर आप राइड करने के शौकीन हैं तो आप इन जगहों पर जाकर राइट्स का मजा पलक झपकते ही कुछ सेकंडों में ले सकते हैं। दिल थामने और सांसें रोकने जैसा है इन रोलर कोस्टर की राइड लेना। ऐसे राइड्स कई-कई फीट ऊंचे हैं, लेकिन इनकी राइड लेने में महज कुछ सेकंड का ही वक्त लगता है। इससे आप इनकी स्पीड का अंदाजा लगा सकते हैं। दुनिया भर में मशहूर इन राइड्स को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया हैं। तो आइए जानते हैं यह राइड किन-किन देशों में हैं और कितनी डरावनी हैं...
 
एक्स 2 सिक्स फ्लैग्स मैगिक माउंटेन, लांस एंजेल्स :-

लांस एंजेल्स का यह राइड बिल्कुल 4डी राइड जैसा ही है। इसकी सीटें आगे-पीछे होती है और खुद ही घूमती जाती हैं।

फॉर्मूला रोशा, आबू-धाबी :-

आबू-धाबी में बनी फॉर्मूला रोशा राइड दुनिया के सबसे तेज रोलर कोस्टर में शामिल है। इसकी स्पीड 240 किमीध्घंटा होती है जिसके कारण इसकी 1 राइड लेने के लिए सिर्फ 5 सेकेंड लगते हैं। इस राइड को लेने के लिए चश्मे और हेलमेट लेकर ही इसमें बैठा जा सकता है।

लीप ऑफ फेथ, बहामास :-

बहामास में बने इस लीप ऑफ फेथ में स्वीमिंग करने के लिए एक ट्यूब में नीले रंग का पानी और आसपास शॉर्क देखने को मिलती है। इस ट्यूब में स्वीमिंग करते हुए इन शॉर्क को देखने पर डर लगता हैं।

स्कैड टावर, डेनमार्क :-

डेनमार्क में बनी 100 फीट की ऊंचाई पर इस राइड को लेना बहुत ही डरावना हो सकता हैं। इस राइड के नीचे आने की स्पीड 88 किमीध्घंटा हैं। इस राइड के नीचें डर को थोड़ा कम करने के लिए नेट लगाया गया हैं।

अल्पाइन स्लाइड, न्यू जर्सी :-

कुछ लोगों के लिए यह राइड डरावनी भी हो सकती है। पर कुछ लोग मौज मस्ती के लिए चिल्लाते नजर आते हैं।

कई धार्मिक तीर्थ केंद्रों का घर है आंध्र प्रदेश

अगर आप किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जाना चाहते हैं तो आप आंध्र प्रदेश जा सकते हैं। आंध्र प्रदेश कई धार्मिक तीर्थ केंद्रों का घर है। तिरुपति, भगवान वेंकटेश्वर का निवास, दुनिया में सबसे समृद्ध और सबसे अधिक दर्शनीय धार्मिक केंद्र है। श्रीशैलम, श्री मल्लिकार्जुन का निवास, भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, अमरावती का शिव मंदिर पंचाराममों में से एक तथा यादगिरिगुट्टा, विष्णु के अवतार श्री लक्ष्मी नरसिंह का निवास स्थान है।

वारंगल में रामप्पा मंदिर और हज़ार स्तंभों का मंदिर, कतिपय बारीक़ मंदिर नक्काशियों के लिए प्रसिद्ध हैं। राज्य में अमरावती, नागार्जुन कोंडा, भट्टीप्रोलु, घंटशाला, नेलकोंडपल्ली, धूलिकट्टा, बाविकोंडा, तोट्लकोंडा, शालिगुंडेम, पावुरालकोंडा, शंकरम, फणिगिरि और कोलनपाका में कई बौद्ध केंद्र हैं।

विशाखापट्नम कई पर्यटन आकर्षणों का केंद्र है, गोल्डन बीच, बोर्रा में एक लाख वर्ष पुराने चूना-पत्थर की गुफाएं, सुरम्य अरकु घाटी, हार्सले पहाड़ियों के हिल-रिसॉर्ट, पापी कोंडलु के संकरे रास्ते से गोदावरी नदी में नौका-दौड़, इट्टिपोतला, कुंतला के झरने और तालकोना में समृद्ध जैव-विविधता, इस राज्य के कुछ प्राकृतिक आकर्षणों में शामिल हैं।

टिक्कर-ताल घूमने वाले सैलानियों को मिलेगा पूरा नैटवर्क

नई दिल्ली : मोरनी के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल टिक्कर ताल में घूमने आने वाले बाहरी सैलानियों के साथ-साथ खंड की आधा दर्जन पंचायतों के गॉंवों को भारत संचार निगम ने टावर लगाने तैयारी कर दी है। अब यहांं आने वाले सैलानियों को मोबाइल नैटवर्क के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। प्राप्त जानकारी अनुसार भारत संचार निगम ने यहॉं मोरनी के पर्यटन स्थल टिक्कर ताल में आने वाले सैलानियों व स्थानीय ग्रामीणों की मांग पर बराट गांव की पहाड़ी पर बी.एस.एन.एल. का टावर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर है क्योंकि यहां पहले किसी भी मोबाइल कंपनी का नैटवर्क न होने के कारण स्थानीय लोग आपातकालीन स्थिति में भारी परेशानी का सामना करते थे। इसके अलावा यहां आने वाले सैलानियों को भी मुश्किल का सामना करना पड़ता था। यहां नैटवर्क सुविधा न होने के कारण जो सैलानी यहां कई दिनों का कार्यक्रम बनाकर आते थे उनको भी यहां नैटवर्क न होने के कारण अपनी योजना बदलनी पड़ती थी और सैलानी अन्य पर्यटन स्थलों की ओर रूख कर लेते थे। इस बारे विधायक लतिका शर्मा से फरियाद कर चुके थे जिसके लिए विधायक ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री से मिलकर टिक्करताल सहित कई जगह मोबाइल टावर लगवाने की मांग की थी जिस पर निगम ने यहां टिक्करताल में टावर लगाने का काम शुरू कर दिया ।

विदेश घूमने के है इच्छुक, ताे सिंगापुर और कतर के इस खास ऑफर का ले मजा

नई दिल्लीः भारतीय जल्द ही सिंगापुर और कतर जैसे देशाें में बिना वीजा अप्लाई किए अपना हॉलिडे प्लान कर सकते हैं। एेसा इसलिए क्याेंकि ये दाेनाें ही देश भारतीय पासपाेर्ट धारकाें काे 96 घंटे की वीजा मुक्त पारगमन सुविधा देने जा रहे है। यानिकी भारतीय पासपाेर्ट धारक 96 घंटे बिना वीजा के सिंगापुर और कतर में अपना वेकेशन इंज्वाय कर सकते हैं।

किन लाेगाें काे है लाभ?
सिंगापुर के नियमाें के तहत सिर्फ वे लाेग जिनके पास ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, अमरीका, जर्मनी या स्विट्जरलैंड जैसे देशों द्धारा जारी किया गया वीजा या एक लंबी अवधि का पास (एक महीने की एक न्यूनतम वैधता के साथ) है। वे लाेग सिंगापुर के चार दिन के प्रवास वीजे का बिना भुगतान किए लाभ ले सकते हैं। सिंगापुर के फ्री वीजा का इस्तेमाल इन स्थलों में जाने के लिए या वापसी यात्रा पर किया जा सकता है।

96 घंटे का वीजा फ्री ट्रिप
सिंगापुर में प्रवेश के समय यात्री के पास अगले 96 घंटे के दाैरान की यात्रा की वैध हवाई टिकट हाेनी चाहिए। सिंगापुर में यह चार दिवसीय प्रवास पारगमन योजना पिछले सप्ताह ही शुरू की गई थी, जाे किसी भी परिस्थिति में बढ़ाई नहीं जाएगी। वहीं, कतर पर्यटन प्राधिकरण ने भी ऐसी ही एक योजना जारी की है, जाे मंगलवार से लागू की गई। यहां किसी भी देश के यात्रियाें काे 96 घंटे के लिए रहने के लिए एक मानार्थ पारगमन वीजा देने की घोषणा की गई है। लेकिन पारगमन वीजा के लिए यात्री काे कतर की यात्रा की कंफर्म टिकट और आगे की यात्रा की टिकट की पुष्टि करनी हाेगी।

पैराग्लाइडिंग के लिए जन्नत है यह जगह, पायलट तैयार बस आपका है इंतजार

नई दिल्ली : पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया भर में पहचान बना चुकी बीड़-बिलिंग घाटी में अब 71 लोग टेंडम फ्लाइट से पर्यटकों को हवा ही सैर करवा सकेंगे। प्रदेश पर्यटन विभाग की एडवेंचर स्पोर्ट्स कमेटी ने कांगड़ा में पैराग्लाइडिंग स्थलों का दौरा कर टेंडम फ्लाइट के लिए लोगों का रजिस्ट्रेशन किया है।

माउंटेनरिंग इंस्टीच्यूट मनाली की स्पेशल टीम ने तकनीकी रूप से पायलटों की जांच की है। बीड़ में टेंडम फ्लाइट के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए 90 पायलट पहुंचे थे। जिनमें से विभाग की टीम ने 64 पायलटों का सही पाए जाने पर रजिस्ट्रेशन किया है। इसके अलावा धर्मशाला में टीम ने सात लोगों की रजिस्ट्रेशन की है। बता दें कि जिले में टेंडम फ्लाइट के लिए पहले से ही प्रशिक्षित पायलट पंजीकृत हैं। लेकिन जो पायलट बचे हुए थे उनका टेस्ट लेकर कुल 71 और पायलटों को पंजीकृत कर लिया गया है।

मनाली से लेह घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर जरूर पढ़े

केलांग (लाहौल-स्पीति): देश-विदेश से मनाली पहुंच रहे सैलानियों के लिए राहत भरी खबर है। दरअसल देश की सहरदी सामरिक सड़कों को चकाचक कर सेना की मुश्किलें जल्द कम होने वाली हैं। 14 से 18 हजार फुट की ऊंचाई से होकर गुजरने वाली 485 किलोमीटर लंबी मनाली-लेह सड़क मार्ग के डबल लेन का काम अपने अंतिम चरण में है। अब अब 20 घंटों में नहीं बल्कि 14 घंटों में मनाली से लेह पहुंचा सकेगा। सैन्य वाहनों के ईंधन का खर्चा भी घट जाएगा।

बताया जा रहा है कि अब महज 20 किलोमीटर टारिंग का काम बाकी रह गया है। सड़क चकाचक होने सैन्य वाहन लेह 6 घंटे जल्दी पहुंचेंगे। अरबों रुपए के इस महत्वपूर्ण सडक प्रोजेक्ट को साल 2012 तक पूरा किया जाना था। लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मनाली-लेह मार्ग को समय पर पूरा नहीं किया जा सका है। बर्फबारी के कारण साल के 6 महीनों तक मनाली-लेह सड़क मार्ग के निर्माण कार्य को जारी रख पाना मुमकिन नहीं है।

खास बात यह है कि श्रीनगर-जोजिला-लेह के बाद मनाली-लेह मार्ग देश का दूसरा ऐसा इकलौता सामरिक मार्ग है जो हिमपात के कारण साल में करीब 6 महीनों तक हर तरह के वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो जाता है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल के पर्यटन कारोबार को भी गति मिलेगी। 

केदारनाथ धाम रहस्यमयी चमत्कारों से भरा है

नई दिल्ली। इस मंदिर के कपाट शीत ऋतु में बंद होते हैं, लेकिन भक्तों का कहना है मंदिर से घंटियों की आवाज आती है, शिवलिंग पर ताजा बेल पत्रों का चढ़ावा भी मिलता है। बाबा केदारनाथ का मंदिर। 12 ज्योतिर्लिगों में से एक केदारनाथ पर्वतराज हिमालय की केदार चोटी पर स्थित है। बात 2013 की है जब केदारनाथ के समीप स्थिर मन्दाकिनी नदी ने एक प्रलय का रूप ले लिया था। जो कुछ भी इनके रास्ते में आता वो इसे अपने साथ बहा ले जाती थी। 

मंदाकिनी के विकराल प्रलयकारी रूप ने आस-पास के सभी देवालयों को अपने साथ बहा लिया और उसकी लहरें बार बार केदारनाथ धाम पर चोट कर रहीं थीं। मन्दाकिनी नदी का साहस इतना बढ़ चुका था की वह केदारनाथ को भी अपने साथ बहा ले जाना चाहती थी। लेकिन तभी इस तबाही को रोकने के लिए मंदिर के आगे कुछ शिलाएं प्रकट हुई जिन्होंने मंदिर को मन्दाकिनी की चोटों से बचा लिया और मंदाकिनी का अहंकार चूर कर दिया। 
भक्तों की माने तो यह स्वयं भगवान शंकर थे जिन्हें देवालय की रक्षा के लिए प्रकट होना पड़ा।

केदारनाथ के दर्शन को आने वाले भक्तों द्वारा आज यह शिला भीम शिला के रूप में पूजी जाती है। इसके अलावा जैसा कि आप सभी जानते हैं। महादेव अर्थात शिव जी की सवारी थी नंदी बैल। जिसकी प्रतिमा इस मंदिर के बाहर स्थित है, लेकिन मन्दाकिनी की तेज लहरें इस मूर्ति को बहाना तो दूर खरोंच भी नहीं पंहुचा सकीं। इस मंदिर के कपाट शीत ऋतु में बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन भक्तों का कहना है कि इस काल में भी मंदिर से घंटियों की आवाज आती है और शिवभलग पर ताजा बेल पत्रों का चढ़ावा भी मिलता है, दर्शनार्थियों का मानना है कि इस काल में देवता महादेव की अर्चना करने आते हैं।

यही नहीं छ: माह पश्चात जब मंदिर के कपाट खुलते है तब भी मंदिर के अंदर स्थित दीप जल रहा होता है। इसके अलावा मंदिर में नंदी की मूर्ति को कोई क्षति नहीं हुई बल्कि पांडवों समेत सभी मूर्तियां खंडित हो चुकीं हैं।आखिर चमत्कार हैं खुद प्रभु, जिनका देवालय मंदाकिनी के आये जल प्रलय में मलवे से पट गया, लेकिन अभी भी इसमें स्थित शिवलिंग के दर्शन सा$फ मिलते हैं, जैसे महादेव मंदाकिनी के अहंकार को तोडने के लिए मंद-मंद मुस्कुरा रहे हों।

पर्यटन के नक्शे पर उभर रही ये Valley, विदेशी सैलानियों को खूब भा रही

कुल्लू: भारत-चीन युद्ध के बाद जब देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू मनाली की वादियों में सुकून की तलाश में आए तो उस समय दुनिया भर की निगाहें भारत की ओर थीं। इसलिए पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ मीडिया भी मनाली की वादियों में आया। यही वह समय था जब मनाली का प्राकृतिक सौंदर्य दुनिया की नजरों में आया। धीरे-धीरे विदेशी सैलानी मनाली की ओर आकर्षित होने लगे। देखते ही देखते मनाली पश्चिमी हिमालय का टूरिस्ट हब बन गया। बेशक मनाली आज भीड़ भरा है लेकिन आज भी मनाली की वादियां पर्यटकों को लुभाने में सफल दिख रही हैं।

मनाली के साथ-साथ मणिकर्ण का कसोल हो या फिर बंजार घाटी की तीर्थन घाटी, दोनों पड़ाव प्रकृति प्रेमियों, एडवैंचर प्रेमियों को खूब भा रहे हैं। भले ही दोनों वादियां प्रदेश सरकार के पर्यटन मानचित्र पर दर्जा हासिल नहीं कर पाई हैं लेकिन अति वशिष्ठ लोगों की यहां आवाजाही इस स्थान को नई पहचान दे रही है। 

ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क का प्रवेश द्वार
दुनिया का श्रेष्ठतम एवं यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शुमार ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क का प्रवेश द्वार भी तीर्थन घाटी के गुशैणी में है। इस पार्क की विशेषता यह है कि यहां दुनिया के विलुप्त होते वन्य पशु, पक्षी, वन, वनस्पति इसे वशिष्ठता प्रदान करते हैं। विलुप्तता के कगार पर खड़ा सुंदरतम पक्षी जुजुराणा भी भारत के इस पार्क में पाया जाता है। इसके अलावा घोरल, काला भालू, भूरा भालू, बर्फानी चीता व कस्तूरी मृग जैसे कई दुर्लभतम पशु भी इस क्षेत्र में पाए जाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और दुनिया भर के अनुसंधानकर्त्ताओं के लिए यह बेहतरीन प्रयोगशाला साबित हो रहा है।

क्या खास है तीर्थन घाटी में 
यहां की साफ-सुधरी आबोहवा, प्रदूषण मुक्त वातावरण, एकांत व शांत माहौल यहां की खासियत है। घाटी में ट्रैकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों के लिए दुनिया भर के लोग यहां पहुंच रहे हैं। कुछ नई सड़कों के निर्माण से घाटी के कई गांवों तक अब पर्यटक पहुंच रहे हैं और यहां की सांस्कृतिक विरासत से रू-ब-रू हो रहे हैं। अभी तक तीर्थन घाटी के पर्यटन को सरकार रूप से सुदृढ़ नहीं किया गया है लेकिन घाटी के कई युवा आज पर्यटन के नए अध्याय का सूत्रपात कर रहे हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब प्रकृति सुंदरता से भरी तीर्थन घाटी दुनिया के बेहतरीन पर्यटन स्थलों में शुमार होगी। 

सेल्फी कि चाह हैं तो एक बार यहां जरूर जाये

बात करें सेल्फी की तो इसनें आज के समय की फोटोग्राफी को एक अलग ही पहचान दी है। आज के दौर में सेल्फी का चलन बहुत ज्यादा बढ़ गया है। मौका मिला नहीं कि सेल्फी लेते कोई भी कहीं भी देखा जा सकता है। बात करें भारत की तो यहां पर सेल्फी का क्रेज भले ही विदेशों से आया है पर भारत में भी लोग सेल्फीज़ पर सबसे ज्यादा लाईक्स पाने के लिए क्या कुछ नहीं करते।

अक्सर देखा भी गया है सबसे ऊंची इमारत पर खडें होकर सेल्फी लते हुए कभी एयरक्राफ्ट में बैठकर। अक्सर सोशल मीडिया पर ऐसी फोटोज वायरल होती रहती है, जहां अपने साथ फोन ले जाना या फोटो खींचना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस तरह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सेल्फी लेने का बुखार किस हद तक लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

अगर आप भी सेल्फी के दीवानें है। और आप कुछ ऐसी जगहों को सर्च कर रहे है जहां का नजारा आप अपनें सेल्फी में लेना पंसद करते है तो ऐसी ही कुछ जगहों के बारे में हम आपको बतानें जा रहे है जो किसी जन्नत से कम नहीं है। जानिए भारत में ऐसी कौन-कौन सी जगह हैं जहां की सेल्फी आपके ट्रिप को यादगार और खुशनुमा बना देंगी....

कच्छ, गुजरात

कच्छा का रण कहा जाने वाला गुजरात स्थित कच्छ फोटोग्राफी के लिए सबससे बेस्ट जगहों में से एक है। कभी खत्म न होने वाली यह जगह बेहद शांति का अहसास करवाती है। गुजरात का यह मरुस्थल सूर्योदय और सूर्यास्त के अपने खास दिलकश नजारे की वजह से दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 45652 वर्ग किमी. के क्षेत्रफल में फैले गुजरात के कच्छ जिले का अधिकांश हिस्सा रेतीला और दलदली है। इसके अलावा यहां पर अनेक ऐतिहासिक इमारतें, मंदिर, मस्जिद, हिल स्टेशन आदि पर्यटन स्थल भी हैं जहां आप घूम सकते हैं। तो ऐसी खूबसूरत जगह पर कम से कम एक सेल्फी तो बनती है।

फूलों की घाटी, उत्तराखंड

हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड प्रकृति की एक अनूठी तस्वीर बयां करता है। यह प्रकृति के एक अनुपम उपहार की तरह ही है। यहां पर स्थित फूलों की घाटी कुछ खास है। नेशनल पार्क बन चुका यह क्षेत्र देश के साथ-साथ विदेशियों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित करता है। लगभग 90 किमी के एरिया में फैला यह क्षेत्र राष्ट्रीय धरोहरों में भी शामिल है। 3 किमी लंबी और आधा किमी चौड़ी फूलों की घाटी में मस्ती करते हुए सेल्फी लेना आपके लिए यादगार साबित होगा।

पेनोंग झील, लद्दाख

लद्दाख देखने में तो वैसे ही इतना सुंदर है जिसे देखकर लगता है कि यह प्रकृति का अनमोल तोहफा है। यह सबसे खूबसूरत जगह है। इस झील को देखने के लिए दुनियाभर से पर्यटक आते रहते है। ये झील बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित है। आप भी एक बार यहां जाएं और सेल्फी जरुर लें। ये आपको लिए एक यादगार पल होगा।

बनारस, उत्तर प्रदेश

बनारस को मंदिरों का शहर कहा जाता है और अपनी धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण एक विशिष्ट पहचान रखता है। अपने समृद्ध इतिहास के लिए गलियों में बसने वाला असली बनारस और हमेशा भीड़ से घिरे गंगा तट सेल्फी के लिए अच्छा स्पॉट बन गया है। अगर आपकी धार्मिक स्थलों में रुचि है तो आप यहां घूमने भी आ सकते हैं। इस शहर की पौराणिक मान्यता तो है ही, साथ ही रास्तों पर घूमते हुए आपको कई बार ऐसे मौके मिलेंगे, जहां आपका मन कैमरा क्लिक करने का करेगा। खास तौर पर बनारसी पान की दुकानें, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें और शाम की गंगा आरती। यहां पर सेल्फी लेने में शर्माने या पीछे हटने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।

जैसलमेर, राजस्थान

जैसलमेर की अपनी ही एक बेहद खास पहचान है। राजस्थान के सबसे किनारे छोर में बसा जैसलमेर अपने रेतीले धोरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां जितनी भी दूर तक आपकी नजर जाएगी वहां तक आपको रेत के टीलें ही दिखायी देंगे। तेज हवा, आंधियों के चलते टीले भी दिनभर अपनी जगह बदलते रहते हैं। शांति और सुकून ऐसा जो आपको किसी भी जगह नही मिल सकता है। यहां पर आप ऊंट की सवारी करते हुए सेल्फी लेना न भूलें। जिसका अपना ही अलग मजा है। यहां की एक खास बात ये भी है कि दिन में ये टीले जितने गर्म होते हैं रात को उतने ही ठंडे। एक ही दिन में सर्दी और गर्मी का ऐसा अनूठा और कहीं देखने को नहीं मिल सकता है।
पिछोला झील, उदयपुर

पिछोला झील एक कृत्रिम झील है जिसे 1362 ई. में विकसित किया गया था, और पिछोली नामक गांव के नाम पर इसका नाम रखा गया है। ये झील उदयपुर की पीने और सिंचाई की आवश्यकताओं को तो पूरा करती ही है साथ ही इस कृत्रिम झील की खूबसूरती रेतीले राजस्थान को भी ठंडक पहुंचाती है। यहां की खूबसूरती देखनी हो, तो झील किनारे के घाट या झील के बीचों-बीच बने होटल की छत से देखिए, नजारा यादगार बन जाएगा। झील में विभिन्न प्रजाति के पक्षियों का डेरा हमेशा बना रहता है। आप यहां से पक्षियों के साथ सेल्फी ले सकते है। जो कि एक यादगार पल होगा।

नूरानंग झरना, अरुणाचल प्रदेश

अगर आप वाटर फॉल्स के दीवाने हैं तो ये जगह आपके लिए एकदम मुफीद है। नूरानंग झरना अरुणाचल प्रदेश राज्य के तवांग शहर से 35 किमी की दूरी पर स्थित है। इस झरने को जुंग झरने के नाम से भी जाना जाता है। नूरानंग झरने का सफ़ेद ठंडा पानी 100 मीटर से भी अधिक ऊंचाई से मूसलधार बारिश के रूप में गिरता है। हरियाली और हिमालय के पर्वत नूरानंग झरने को एक ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल बनाते हैं। वैसे इसकी खूबसूरती का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म कोयला के कुछ सीन भी यहां फिल्माये गये थे।

ये साइट दे रही है फ्री में पूरी दुनिया घूमने का मौका, बस करना होगा एक काम

लंदन: अगर आप घूमने का शौक रखते हैं और पैसों की कमी के कारण अपने इस शौक को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो आपके पास एक अच्‍छा मौका है। फेसबुक पर मिस ट्रैवल डॉट कॉम नाम की साइट के जरिए आप भी पूरी दुनिया बिना पैसों के घूम सकते हैं। 

जेसिका का हुआ पूरा सपना
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में रहने वाली 21 साल की जेसिका नाम की लड़की का सपना इस साइट ने पूरा किया है और वह एक भी रुपए खर्च किए बिनी  ढाई हफ्ते के लक्जरी हॉलिडे पर गई। जेसिका पेशे से जिम ट्रेनर है । उसने बताया कि उसने इस साइट की वजह से फ्री में सारी दुनिया घूमने वाली एक लड़की के बारे में सुना था। जिसके बाद उसने साइट को खुद आजमाने के बारे में सोचा। 
 
अमेरिकी यूवक ने दिया कैलिफोरनिया चलने का न्योता
साइट पर अकाउंट बनाते ही किस्मत से जेसिका को एक अमेरिकी यूवक ने अपने साथ कैलिफोरनिया चलने का न्योता दिया। जेसिका को पहले तो उस लड़के पर थोड़ा शक हुआ लेकिन वॉट्स ऐप पर बात करने के बाद दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। जेसिका ने बताया कि उस अमेरिकी यूवक के साथ वो कैलिफोरनिया के फाइव स्टार होटल हिलटन इन में रुकी थीं। लेकिन दोनों के कमरे अलग-अलग थे। उनका कहना है कि कुछ लोग साइट पर सिर्फ शारीरिक रिश्तें को बनाने के लिए आते हैं। उनसे बचना चाहिए। जेसिका अब अपनी अगली ट्रीप पर जानें के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका कहना है कि जैसे ही उनको कोई अच्छा ऑफर मिलेगा वो फिर से हॉलिडे पर जाने को तैयार हो जाएगी और पूरी दुनिया घूमकर आएगी। 

ये है मौत की नदी जो भी गया, लाश भी नहीं मिली

यॉर्कशायर: इंग्लैंड में बहने वाली व्हार्फ नदी (बोल्टन स्ट्रिड)इतनी सुंदर दिखाई देती है कि कोई भी इसकी खूबसूरती को देख इसकी तरफ खींचा चला जाता है।लेकिन इस नदी में जो भी गया वो कभी लौटकर वापस नहीं आया और न ही उसकी डेड बॉडी मिल पाई।बोल्टन अब्बे क्षेत्र में बहने वाली इस नदी की चौड़ाई महज 6 फीट है लेकिन इसकी गहराई ज्यादा होने के कारण इसके पास गया शख्स कभी लौटकर नहीं आया।

जानकारी मुताबिक,ये नदी जब यॉर्कशायर में बहती है तब इसका बहाव काफी धीमा होता है लेकिन जैसे ही ये बोल्टन अब्बे एरिया में आती है, इसका बहाव काफी तेज हो जाता है। ऐसे में कोई भी शख्स अगर बोल्टन अब्बे एरिया में इस नदी के अंदर जाने की कोशिश करता है, इसके तेज बहाव के कारण वह नदी में समा जाता है और  नुकीले पहाड़ों से टकरा जाता है और उसकी बॉडी खाई में समा जाती है। इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासन ने भी नदी में घुसने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। 

ऐसा कहा जाता है कि इस क्षेत्र पर पहले लेडी अलाइस डि रोमिल्ली नाम की महिला का अधिकार था।1154 में इस नदी में गिरने के कारण उसके बेटे की मौत हो गई थी जिसके चलते महिला ने आसपास के पूरे क्षेत्र को बोल्टन प्रायरी ईसाई मठ बनाने के लिए दे दिया।

हिमाचल में करें सर्दी का Welcome, आपको मिलेगा Special Winter Package

शिमला/मनाली: विंटर सीजन में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को लुभाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एच.पी.टी.डी.सी.) ने विंटर सीजन के आगमन को देखते हुए विंटर पैकेज भी जारी कर दिया है। पैकेज के तहत 16 नवंबर से पर्यटकों को चयनित एच.पी.टी.डी.सी. के चयनित होटलों में 20 से 40 प्रतिशत तक किराए में छूट प्रदान की जाएगी।

विंटर पैकेज का लुत्फ पर्यटक 31 मार्च, 2017 तक उठा सकेंगे। इस सीजन के दौरान पर्यटकों के हिमाचल आगमन को यादगार बनाने के लिए खास तैयारियां की जाएंगी। क्रिसमस के उपलक्ष्य पर और नववर्ष की पूर्व संध्या पर होटलों में कार्यक्रम होंगे। होटल इंडस्ट्री स्टेक होल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम.के. सेठ ने कहा कि विंटर सीजन के दौरान विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटकों के स्वागत के लिए होटल प्रबंधन तैयार हैं। उन्होंने कहा कि शिमला-परवाणु हाईवे पर चल रहे फोरलेन के कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि विंटर सीजन के दौरान शिमला व आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को यहां पहुंचने में कोई परेशानी न हो। 

स्नो कटर से हटाई जाएगी बर्फ 
शिमला में बर्फबारी की स्थिति से निपटने के लिए शिमला नगर निगम व्यापक प्रबंध करेगा। इसके लिए नगर निगम के परिधि में आने वाले क्षेत्रों में सड़कों से स्नो कटर से बर्फ को हटाया जाएगा। इसके अलावा बर्फ हो हटाने के लिए अतिरिक्त लेबर भी तैनात की जाएगी। बर्फबारी होने की स्थिति में उत्पन्न होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए शिमला के हर वार्ड में नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। 

मौसम देख कर ही मढ़ी से आगे भेजे जाएंगे पर्यटक
पर्यटन नगरी मनाली में सर्दियों ने दस्तक दे दी है। लाहौल सहित कुल्लू-मनाली की उंची चोटियों में बर्फ  के फाहे गिरने का क्रम शुरू हो गया है। मनाली की एस.डी.एम. मनाली ज्योति राणा ने कहा कि रोहतांग दर्रे में अचानक होने वाली बर्फबारी से निपटने की तैयारियां कर ली गई हैं। प्रशासन ने रैस्क्यू टीम का गठन कर लिया है। मढ़ी में पहले से ही स्थापित पुलिस चौकी में तैनात कर्मी मौसम की परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। मौसम देख कर कर ही मढ़ी से आगे पर्यटकों को भेजा जाएगा। नवम्बर 15 को मढ़ी में रैस्क्यू पोस्ट स्थापित की जाएगी लेकिन अगर मौसम पहले ही खराब हो गया और दर्रे में बर्फबारी हो गई तो उसे इससे पहले भी स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने पर्यटकों से भी आग्रह किया कि वे प्रशासन का सहयोग करें और मौसम की परिस्थितियां देखकर ही रोहतांग दर्रे का रुख करें।

इन जगहों पर घूमने जा रहे हैं तो यहां एक बार सुबह की सैर पर जरूर जाएं

सुबह-सुबह ठंडी और ताजी हवा का सेवन करना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। ना सिर्फ बुजुर्गाें के लिए बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए सुबह टहलना बहुत ही अच्छा होता है। हम आपको उन खास जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जो सुबह घूमने के हिसाब से बेहतर हैं अगर आप इन जगहों पर घूमने के लिए जा रहे हैं तो यहां एक बार सुबह की सैर पर जरूर जाएं......

मरीन ड्राइव- मुंबई :-

मुंबई की यह जगह आपको बॅालीवुड फिल्मों में ज्यादातर देखने को मिलेगी। यह जगह बाॅलीवुड के रोमांटिक शूटिंग प्वाइंट में से एक है। यहां बहुत सारे फेमस बाॅलीवुड स्टार भी रहते हैं जैसे- शाहरूख, सलमान। आप यहां सुबह की खूबसूरती का मजा उठाने जा सकते हैं।

लाॅ कॅालेज रोड- पुणे :-

अगर आप पुणे घूमने जा रहे हैं तो यहां आकर आप अपने दिन की अच्छी शुरूआत लाॅ काॅलेज रोड पर टहल कर करें। यहां की सुबह की सैर बहुत ही खास है। चारों ओर सफाई के कारण यहां घूमना सभी को अच्छा लगता है।

लोधी गार्डन की सैर- दिल्ली :-

टहलने के शौकीन लोगों के लिए दिल्ली का लोधी गार्डन जन्नत है। यह गार्डन बहुत ही बड़ा है जिसके कारण लोग यहां वाॅकिंग, योगा, मेडिटेशन आराम से कर पाते हैं। आपको यहां हर वर्ग के लोग दिख जाएंगे। यह गार्डन बड़ा होने के साथ-साथ साफ सुथरा भी बहुत है।

कब्बन पार्क-बैंगलुरू :-

बैंगलुरू का यह पार्क बहुत ही साफ-सुथरा है और इसके अंदर आपको खाने का कुछ भी सामान ले जाना हो तो आराम से ले जा सकते हैं। यह पार्क इतना सुंदर है कि आप तरह-तरह के फोटो भी ले सकते हैं। यह बहुत ही अच्छी जगह है जहां आप अपने दोस्तों और फैमिली के साथ समय बीता सकते हैं।

शायद अब तक होंगे आप अनजान जंतर-मंतर की इन 5 बातों से

जयपुर की शान कहा जानें वाला जंतर-मंतर आज जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। देश से ही नहीं बल्कि विदेशो से भी यहां बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखनें के लिए आते है। जयपुर के इस पर्यटन स्थल के बारे में आपनें जितना सुना और देखा है शायद वो कहीं से सुनी बाते है लेकिन आज जिन बातों से हम आपको रुबरु करा रहे है उनके बारे में आप शायद अनजान हो। तो क्या हैं ये जरूरी और दिलचस्प जानकारियां, आईए जानते हैं....

1. जयपुर के जंतर मंतर को यूनेस्को की वैश्विक धरोहरों की सूची में शामिल किया गया है।

2. जयपुर का जंतर मंतर 5 प्रमुख वेधशालाओं में से एक है। इसका निर्माण सन् 1728 से 1734 के दौरान जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह(द्वितीय) द्वारा करवाया गया था जो कुशल शासक होने के साथ ही एक खगोलशास्त्री भी थे। 18 वीं शताब्दी के शुरुआत में उन्होंने भारत के दिल्ली, मथुरा, जयपुर, वाराणसी और उज्जैन इन 5 शहरों में जंतर मंतर बनवाए।

3. भारत की अलग-अलग जगहों में 5 वेधशालाएं बनाई गईं, इन सब में जयपुर की जंतर- मंतर वेधशाला सबसे बड़ी है। यहां जो यंत्र स्थापित किये गये हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं- चक्र यंत्र, दक्षिण भित्ति यंत्र, दिगम्शा यंत्र, दिशा यंत्र, कनाली यंत्र और मिस्र यंत्र।

4. जंतर मंतर का निर्माण समय और अंतरिक्ष के अध्ययन के लिए करवाया गया था। जयपुर की यह रचना उन्नीस वास्तु खगोलीय उपकरणों का एक परिसर है, जो अब भी चल रहा है और इसका गणना और शिक्षण के लिए अब भी इस्तेमाल किया जाता है। यह निरीक्षण और सूर्य के चारों ओर कक्षाओं का अध्ययन करने के लिए प्रयोग किया जाता है। यहाँ की कुछ रचनाएं पत्थर, संगमरमर और तांबे से बनी हुई हैं।

5. दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्यघड़ी जयपुर के जंतर मंतर में ही स्थित है जिसे बृहत् सम्राट यंत्र कहा जाता है। यह उपकरण दो सेकंड की सटीकता पर स्थानीय समय बताता है। यह रचना लगभग 27 मीटर ऊंची है। इस विशाल सम्राट यंत्र की प्रसिद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण है इसकी सटीकता। एक छोटा यंत्र सही समय नहीं बता पा रहा था, इसलिए इसके आकार को बढ़ाना ही एक मात्र उपाय बचा था।

बेहतर होटल के लिए जान लें ये बातें

अगर आपको घूमने या किसी काम से शहर या देश जाना पड़ रहा है और रहने के लिए होटल में रूम बुक कर रहे हैं, तो पहले इसे जरूर पढ़ लें। यहां बताई जा रही जानकारी, सही होटल चुनने और आपके बजट के साथ-साथ से‍हत का ख्याल रखने में भी मददगार होंगी।

-  होटल ऑन लाईन बुक कर रहे हैं, तो एक ही बार में किसी होटल को बुक करने से पहले, अन्य होटल्स से उसकी प्राइस और उनकी सुविधाओं की तुलना करके चैक कर लें। 

- होटल के कमरों की साफ-सफाई जरूर चैक करें और बेडशीट एवं अलमारियां भी साफ-सुथरी हों, इसे भी जांच लें, ताकि आपको किसी तरह की एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या न हो। वहीं बाथरूम और अन्य जरूरी सुविधाएं भी जांच लें।

- चेक इन करते वक्त लंच या डिनर के बारे में जांच लें। और अगर आपको सही लगे तो आप बाहर से भी खाना ऑर्डर कर सकते हैं या बाहर ही खाकर आ सकते हैं। क्योंकि कई होटल्स इसके लिए बहुत ज्यादा चार्ज करते हैं।

- वैसे तो 5 सितारा होटलों में कपड़े प्रैस करने की सुविधा उपलब्ध होती है लेकिन अगर न हो तो आप होटल मैनेजमेंट से इसके लिए कह सकते हैं।

- होटल रूम में अगर फ्रिज है तो आप उसमें अपनी खाद्य और पेय सामग्री रख सकते हैं। लेकिन होटल द्वारा सर्व की जाने वाली इन ड्रिंक्स के लिए आपसे अलग से चार्ज भी किया जा सकता है, ये बात ध्यान रखें। इसलिए लेने से पहले कन्फर्म कर लें।

- सुबह की चाय आप चाहें तो खुद बनाकर पी सकते हैं, जिसके लिए गर्म पानी हेतु केटल, टी बैग्स और शुगर रूम में उपलब्ध होता है और इसके लिए आपको अलग से चार्ज भरने की भी जरूरत नहीं होती है। लेकिन अगर आप चाहें तो अलग से चाय मंगवा सकते हैं, जो कि आपके बिल में एड हो जाएगा।

- बाथरूम में उपलब्ध करवाया जाने वाला सामान जैसे साबुन, शैंपू, तौलिया आदि का चार्ज वैसे तो रूम चार्ज में ही शामिल होता है। पर कुछ होटल्स इसके लिए अलग से चार्ज करते हैं। इसका पहले से पता कर लें।

- अगर आपको सुबह जल्दी किसी मीटिंग के लिए या बाहर कहीं जाना है तो इसके बारे में होटल को जरूर सूचित करें। क्योंकि कई होटल्स द्वारा दी जाने वाली सर्विस में वेकअप कॉल्स भी शामिल हैं। ऐसे में आप सही समय पर तैयार हो पाएंगे।

- अगर कोई चीज आपको परेशान कर रही है तो आप बिना किसी शर्म या झिझक के प्रबंधन से इसके बारे में बात करें। क्योंकि होटल की पहली जिम्मेदारी आपकी सुविधा का खयाल रखते हुए आपको सबसे अच्छी सर्विस देना है।

- अगर आप अपनी रूम-की रूम में ही छोड़ आये हैं या कहीं खो गई है तो तुरंत होटल प्रबंधन को इसकी सूचना दें। इससे न केवल आप कई परेशानियों से बच सकते हैं बल्कि प्रबंधन आपका रूम खोलने में उचित मदद भी कर पाएगा।

- होटल्स में मौजूद सुविधाएं जैसे स्विमिंग पूल, गेम ज़ोन आदि का इस्तेमाल करने से पहले जानकारी कर लें कि इनका चार्ज अलग से तो नहीं वसूला जाएगा। क्योंकि कुछ होटल्स में ये फ्री होती हैं जबकि कुछ इसके लिए अलग से चार्ज करते हैं।     

- एक बात जान लें कि जब तक आप होटल में रुके हुए हैं आपकी छोटी से छोटी चीज की जिम्मेदारी होटल की है। लेकिन आपके होटल छोड़ते ही उनकी ये जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसलिए होटल छोड़ने से पहले अपना सारा सामान अच्छी तरह से जांच लें। क्योंकि कोई भी होटल वहां छूटे हुए आपके  किसी भी सामान की जिम्मेदारी नहीं लेता है।

विश्व की सर्वश्रेष्ठ पैराग्लाइडिंग साइट बिलिंग ने भी दिए हैं कई जख्म

पालमपुर: खेल साहसिक है, ऐसे में खतरा भी नाम में ही छुपा है। रोमांच व खतरे का चोली दामन का साथ रहा है। विश्व की सर्वश्रेष्ठ पैराग्लाइडिंग साइट में से एक मानी जाने वाली बिलिंग ने भी कई जख्म दिए हैं। अब तक बिलिंग से उड़ान भरने वाले 4 पायलट मौत का शिकार बने हैं तो शुक्रवार को एक अन्य पायलट इस साहसिक खेल का निवाला बना। यद्यपि बताया जा रहा है कि इंगलैंड के इस पायलट इयान मीकॉम ने बिलिंग से उड़ान नहीं भरी थी तथा इयान ने मंडी जनपद के अंतर्गत आने वाले बरोट क्षेत्र के झटींगरी से टेक ऑफ किया था परंतु लॉक न खुल पाने के कारण सीधा नीचे जा गिरा तथा उसकी मौत हो गई।

बिलिंग टेक ऑफ प्वाइंट से वर्ष 2002 में उड़ान भरने वाला पायलट अभी तक लापता है। ब्रिटेन के ज्योल किचिन का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इसी कड़ी में वर्ष 2004 में एक और दुर्घटना सामने आई तथा चंडीगढ़ के के.के. टंडन की भी ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो चुकी है जबकि वर्ष 2009 में रूस के फ्री फ्लायर एलैक्सी फ्री फ्लाइंग के  दौरान लापता हो गए थे तथा वर्ष 2010 में एक भेड़पालक को उनका शव धौलाधार की पहाडिय़ों में मिला था।

इसी वर्ष क्रैश लैंडिंग करने वाले एक पायलट के बचाव में गए एक अन्य पायलट की भी खाई में गिरकर मौत हो गई थी। रूस के पायलट यूडेन रैस्क्यू अभियान के दौरान पैर फिसलने के कारण गहरी खाई में जा गिरे थे जिस कारण उनकी भी मौत हो गई। यद्यपि कई सौभाग्यशाली रहे तथा विकट परिस्थितियों में पहुंचने के बाद भी सुरक्षित रैस्क्यू कर लिए गए। वर्ष 2009 में रशियन पायलट खाइल व डेनिस लैंडिंग के दौरान घायल हो गए थे तो दमित्री आदि हिमानी चामुंडा की ऊंची पहाड़ियों में जा अटका था जिसे बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। वर्ष 2015 में यू.के. की महिला पायलट रूथ चर्चिल बंदला पालमपुर में कै्रश लैंडिंग करने पर विवश हुई थी। उसे पीठ व गर्दन पर चोटें आई थीं, वहीं इसी वर्ष दक्षिण अफ्रीका का क्रिस वान नार्ड जोगिंद्रनगर के अप्पर कोहल में क्रैश लैंडिंग के दौरान घायल हो गया था।

पर्यटन का भरपूर आनंद उठाना है तो जाएं इन 5 पर्यटन स्थलों पर

भारत में बहुत सारे पर्यटन स्थल हैं लेकिन युवाओं, बच्चों और बुजुर्गां की पसंद अलग-अलग होती है। जहां बुजुर्ग किसी धार्मिक स्थल की यात्रा करना पसंद करते हैं वहीं युवा वर्ग को गोवा जैसी जगहों पर मस्ती करना पसंद आता है। हम आपको बता रहे हैं भारत की उन जगहों के बारे में जहां जाकर युवा वर्ग पर्यटन का भरपूर आनंद उठा सकता है।

डल झील :-

डल झील श्रीनगर में है और इसे श्रीनगर का श्रृंगार भी कहा जाता है। यह लेक मुगल गार्डन और होटल से घिरा हुआ है। यह कश्मीर का बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहां आकर नौका विहार करने पर एक अलग ही अनुभव होता है। जो यहां बिताए पलों को यादगार बना देता है।

गोवा :-

गोवा अपने आकर्षक बीच और पॅापुलक चर्च के लिए टूरिस्ट की पसंदीदा जगह है। गोवा देश के पश्चिम में स्थित है और आबादी के नाम पर इंडिया का सबसे छोटा राज्य है। पणजी गोवा की राजधानी है और देश में अपनी सबसे ज्यादा जीडीपी के कारण इसे भारत का सबसे अमीर राज्य भी माना जाता है।

ऊटी :-

ऊटी को हिल स्टेशनों की रानी भी कहा जाता है। ऊटी नीलगिरि जिले की राजधानी है और भारत में सबसे खूबसूरत पहाड़ी में से एक है। नीलगिरि को ब्लू पर्वत के रूप में भी जाना जाता है। यह समुद्र के स्तर से लगभग 2240 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

कूर्ग :-

कूर्ग को भारत के स्कॉटलैंड के नाम से जाना जाता है। कूर्ग पुरानी दुनिया के आकर्षण का प्रतीक है जो बिखरे हुए गांवों और बस्तियों का एक आदर्श रूप है। यहां आकर आप कोडागू ट्रैकिंग, मछली पकड़ने और रीवर राफ्टिंग का भरपूर मजा ले सकते हैं।

कुफरी :-

अगर आप स्कीइंग के शौक़ीन हैं तो कुफरी आपके लिए एक बेहतरीन स्थल है जहां आप जी भर कर स्कीइंग कर सकते हैं। इसके अलावा आप यहां के दर्शनीय स्थलों की भी सैर कर सकते हैं।

आंध्र प्रदेश का पर्यटकों की संख्या 23 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश का वर्ष 2016 में पर्यटकों की संख्या को 23 प्रतिशत बढ़ाकर 15 करोड़ करने का लक्ष्य है। उसे राज्य में होने वाले त्योहारों और पर्यटन के प्रचार के लिए किए गए प्रयासों से इसके पूरे होने की उम्मीद है। वर्ष 2015 में राज्य में कुल 12.2 करोड़ पर्यटक आए थे जो 2014 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक था।

राज्य के पर्यटन आयुक्त आर. पी. खजुरिया ने एक बयान में कहा, इस साल राज्य में पहले ही 9.8 करोड़ पर्यटक आ चुके हैं जबकि हमारा मुख्य पर्यटन मौसम अभी शुरू होना बाकी है इसलिए हम इस साल 15 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में विसाकहा उत्सव, लियापक्षी उत्सव, अराकू उत्सव और फ्लामिंगू उत्सव राज्य में आयोजित होने हैं और इसमें बहुत पर्यटक आते हैं।

पानी में तैरनें वाले दुनिया के मशहूर रेस्टोरेंट

रेस्टोरेंट एक ऐसा नाम है जहां अक्सर आप फैमिली, फ्रैड्स के साथ जाना पसंद करते है। रेस्टोरेंट तो आपनें कई देखे होंगें जिनका खाना भी आपको बेहद स्वादिष्ट लगा होगा। लेकिन आज हम कुछ ऐसे रेस्टोरेंट के बारे में बात कर रहे है जिनकी सुंदरता और खाना तो मशहूर है हि साथ ही अपनें कुछ अलग अंदाज ले लोगो को अपनी ओर आकर्षित भी करते है। जी हां ये रेस्टोरेंट जमीन पर नहीं बल्कि पानी में बनें हुए है।

तो आइए जानते है ऐसे ही रेस्टोरेंट के बारे में जहां जाकर आप एक अलग ही मजा ले सकते है।

जंबो किंगडम रेस्टोरेंट, हांगकांग-

जंबो किंगडम रेस्टोरेंट हांगकांग दुनिया का सबसे बड़ा पानी में तैरनें वाले रेस्टोरेंट कहा जाता है। इस रेस्टोरेंट में एक साथ 2300लोग लंच, डिनर कर सकते है। इस रेस्टोरेंट में शोपिंग मॉल और पार्क भी बने हुए है। यह रेस्टोरेंट पिछले 30 साल से लोगों की सेवा कर रहा है।

द म्यूरिनसेल कैफे, ऑस्ट्रिया-

ऑस्ट्रिया के ग्रैज में द म्यूरिनसेल कैफे भी पॉप्युलर रेस्टोरेंट में से एक है। इस रेस्टोरेंट को न्यूयॉर्क के एक ऑर्टिस्ट बिटो अकॉनसी नें बनाया है। यह जगह ड्रिंक, कॉफी कॉकटेल के लिए सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है।

बीबीक्यू डोनट रेस्टोरेंट, जर्मनी,

फ्लोटिंग रेस्टोरेंट में जर्मनी का बीबीक्यू डोनट अपने आप में एक बेहद खूबसूरत जगह है। इस रेस्टोरेंट में एक तैरनें वाला टेबल है जहां पर खाना सर्व किया जाता है।

सी पैलेस, एम्सटर्डम(नीदरलैंड)-

यह यूरोप का सबसे पहला फ्लोटिंग चाइनिंज रेस्टोरेंट है। यहां पर वैसे तो कई रेस्टोरेंट पानी में तैरनें वाले है लेकिन इस रेस्टोरेंट की कई खास बाते है जो इसे उनसे थोड़ा अलग बनाती है। चाइनीज आर्टिटेक्चर का एक शानदार नमूना है 

कैट बा बे रेस्टोरेंट, वियतनाम,-

इस रेस्टोरेंट को घर की तरह ही बनाया गया है. वियतनाम का फ्लोटिंग रेस्टोरेंट कैट बा बे मुख्य रुप से सी फूड के लिए मशहूर है। यह रेस्टोरेंट देखनें में बेहद शानदार है।

वेवी लेक रेस्टोरेंट, केरल(भारत)-

तिरुअंनतपुरम से करीब 8 किमी पर पानी में तैरनें वाला यह रेस्टोरेंट एक झील पर बना हुआ है। केरल का यह फ्लोटिंग रेस्टोरेंट दुनियाभर में प्रसिध्द है। इस रेस्टोरेंट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें परोसे जाने वे खानें में उन्हीं इनग्रेडिएंट का इस्तेमाल किया जाता है जिनका उत्पादन वहां के स्थानीय स्तर पर होता है।

मन मोह लेगी मनाली की सुन्दरता

दशहरे की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं ऐसे में अगर आप कहीं बाहर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो मनाली एक अच्छा पर्यटन स्थल हो सकता है। यहां की सुन्दरता आपके मन को मोह लेगी। यहां आकर आप सारी परेशानियों को भूलकर शांति का अनुभव करेंगे। मनाली की ऊंचाई 1,950 मीटर या 6,398 फीट है। यह कुल्लू घाटी के उत्तरी छोर के निकट व्यास नदी की घाटी में स्थित, भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य की पहाड़ियों का एक महत्वपूर्ण हिल स्टेशन है। मनाली को देवताओं की घाटी के रूप में जाना जाता है। पुराने मनाली गांव में ऋषि मनु को समर्पित एक अति प्राचीन मंदिर हैं।

मनाली अपने चमकदार गोम्पाओं या बौद्ध मठों के लिए जाना जाता हैं। मनाली साहसी खेलों जैसे स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कायाकिंग और माउन्टेन बाइकिंग के लिए मशहूर हैं। यॉक स्कीइंग इस क्षेत्र का एक अनोखा खेल है। मनाली में प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा आपको धार्मिक तीर्थ स्थान और तिब्बती बौद्ध मंदिर भी देखने को मिलेंगे।

भारत के ये शहर है हनीमून के लिए बेहतर च्वॉइस

आजकल कपल्स शादी के बाद अपनें हनीमून के लिए कई जगहों के बारे में सोचते है। की टूर एंड ट्रैवल्स कंपनियों के जेब पर भारी पड़नें वाले पैकेज की ओर आकर्षित होते है। लेकिन कुछ जगह भारत की ऐसी है जिनकी तरफ आपका ध्यान नहीं जाता। यकीन मानिए इन जगहो को बतौर हनीमून डेस्टिंनेशन के तौर पर सिलेक्ट करना आपके लिए एक अच्छा अनुभव हो सकता है।

तो आइए आज हम आपको बतानें जा रहे देश के ही कुछ ऐसी जगहों के बारे में जिन्हें आप अपने हनीमून के लिए चुनाव कर सकते है।

ऑली(उत्तराखंड)- बर्फीला स्वर्ग कहा जाने वाला ऑली एक खूबसूरत स्थल है इसे बर्फ का कटोरा भी कहा जाता है। शानदार मौसम वाली यह जगह, उत्तराखंड की जान है। जोशीमठ में पहले वाले ऑली की खूबसूरत ठंड और भी बढ़ जाती है। यूं तो गर्मियों में आपको यहां फूल मिलेगें। पर सर्दियो में यहां आकर आपक बर्फ पर खेले जाने वाले हर खेल के साथ अच्छी स्नोफॉल का मजा ले सकते है। इसकी यहीं खासियत आपके हनीमून का मजा दोगुना कर देंगे।

गोवा- गोवा हनीमून के लिए एक बेहतर विकल्प है। यहां के बीच आपको एक अलग ही माहौल में नजर आएगें। बेहद खूबसूरत जगह है गोवा। पुर्तगालियों के समय के बने बंगलों में जहां आप नाइट स्टे कर सकते है वहीं यहां पर रोमांस का मजा लेना एक अलग ही अनुभव होगा।

अंडमान और निकोबार द्दीप समूह- शानदार हनीमून के लिए इससे बेहतर जगह शायद ही हो। एक तरफ प्रवाल रीफ तो दूसरी तरफ शानदार जंगल। एक तरफ घनघोर बारिश तो दूसरी तरफ आपको समुंद्र का शांत माहौल मिलेगा। यहां आपको किसी विदेशी आईलैंड से कम फील नहीं आएगा।

पुड्डुचेरी- अगर आप पुड्डुचेरी पहुंच जाते है तो समझिए कि आप पेरिस से भी बेहतर जगह आ गए। प्योर फ्रेंच स्टाइल में पड्डुचेरी आपका इंतजार कर रहा है। यहां फ्रेंच कॉलोनी, शानदार बीच, मार्केट सबकुछ इस जगह को एक अलग ही खूबसूरती में पेश करते है।

रणथंबौर- प्रकृति की गोद में हनीमून का मजा लेना आपके लिए एक अलग अनुभव हो सकता है। जी हां हम बात कर रहे है रणथंबौर नेशनल पार्क की। यहां आप बाघों को निहार सकते है तो अनगिनत प्रजाति की पक्षियों से भी मिल सकेंगे। प्रकृति की गोद में हनीमून का मजा ही अलग होता।

लद्दाख- रोमांच के साथ रोमांस पसंद करनें वाले कपल्स के लिए इससे बेहतर जगह नहीं हो सकती। पहाड़ों पर चढ़नें का मजा और ठंड के बीच का पहाडी जीवन। यहां का एडवेंचर ओर रोमांस वाला माहौल आपके लिए परफेक्ट हो सकता है।

जैसलमेर- जैसलमेर राजस्थान का वो शहर है जहां पर मोहब्बत हवाओं में रेत की तरह बिखरी है। यहां की खूली हवाएं दूर तक बिखरा रेगिस्तान और उसमें आपका हनीमून यादगार बन सकता है।

अलेप्पी- शांत रोमांस के लिए अलेप्पी से बेहतर जगह नहीं है। यहां मन को शांति मिलने वाली शांति मिलेगी। यहां का प्राकृतिक मनोरंगम दृश्य आपको एक अलग ही अहसास देंगे। जहां के सूर्यग्रहण को देखनें का अपना ही अलग मजा है।

आसान नहीं है इन सड़कों पर चलना, जरा सी चूक से जा सकती है जान

विश्व का सबसे बड़ा रोड नेटवर्क भारत में है लेकिन यह जितना बड़ा हैं, उतना ही खतरनाक भी है, इन सड़कों को पार करना खतरे से खाली नहीं है। अगर इंसान थोड़ा सा चूक जाए तो उसकी जान जाने का खतरा रहता है। ये सड़के देखने में जितनी सुंदर लगती हैं इन पर चलना उतना ही कठिन है। इन सड़कों के बारे में जानने के बाद आप इन्हें एक बार जरूर देखना चाहेंगे।

जोजिला पास :-

जोजिला की सड़क का सफर भले ही 9 कि.मी. है लेकिन पूरे रास्ते पर आपको भगवान का नाम लेकर ही जाना पड़ेगा। खराब मौसम भूस्खलन, बर्फ के कीचड़ से भरे इस रास्ते पर आपको सुरक्षा के कम ही इंतजाम देखने को मिलेंगे।

नाथु ला पास :-

नाथु-ला सड़क पूरे साल बर्फबारी से ढकी रहती है, बारिश और बर्फबारी के दौरान यह सड़क काफी स्लिपरी हो जाती है।

खर्दंगला पास :-

यहां आए दिन दुर्घटना होती हैं, लेह से 39.7 कि.मी. दूर, खर्दुंगला पास खतरनाक हवाओं और ढ़लानों के कारण जानलेवा बन गई हैं।

किन्नौर रोड़ :-

इस रोड़ को हैंगिंग ड्राइव भी कह सकते हैं, यहां पहाड़ियों की नुकीली चट्टानें आपके ऊपर मुंह फैलाए मौत के स्वागत में खड़ी रहती है।

लेह मनाली हाईवे :-

लेह मनाली सबसे खतरनाक हाईवे में से एक है। खराब मौसम, अनियंत्रित टू-वे ट्रैफिक और बिल्कुल खड़ी ढ़ालें इसे खतरनाक बना देते है।

इंडिया के लो कोस्ट हॉलीडे Destineshns

जब कभी भी हम कहीं घूमने का प्लान बनाते हैं तो सबसे पहले हमारे कौतूहल का विषय उस ट्रिप के बजट का आता है। अगर ट्रिप बजट से बाहर होता है तो लोगों के पास मन मारकर आईडिया कैंसिल करने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं रह जाता। लेकिन अगर आप इसके बारे में विस्तार से अध्ययन करेगें तो ऐसे कई लो बजट के डेस्टनेशन्स है जो आपकी जेब पर भारी नहीं पडेगें। 

हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बताएंगे, जहां आप दस हजार तक के बजट में भी आराम से छुट्टियां एंजॉय कर सकते हैं। तो आइए जानते है इन जगहों के बारें में।

ऋषिकेश

उत्तराखंड की जन्नत में बसा ऋषिकेश यूथ के बीच एक हॉलीडे डेस्टिनेशन के रूप में काफी प्रसिद्ध हो रहा है। एडवेंचर पसंद करनें वालो के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आप बंजी जंपिंग और रिवर राफ्टिंग, जंगल सफारी, जैसे कई रोमांचकारी स्पोर्ट्स का मजा ले सकते हैं। दिल्ली से ऋषिकेश का सफर करीब 300 किलोमीटर का है। ऐसे में कम बजट में हॉलीडे के लिए ये एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित होगी।

तवांग

असम का यह क्षेत्र पहाड़ी एरिया है। जहां पर बर्फ और नेचर का पूरा मजा लिया जा सकता है। यहां पहुचनें के लिए तेजपुर रेलवे स्टेशन से आसानी से अरुणाचल प्रदेश के इस शहर पर पहुचं सकते है। इसके लिए आपको रेलवे स्टेशन से दो बसें बदलनी पडेंगी। जिसका टिकट मात्र 200 रुपए है। यानी बस टिकट पर कुल खर्च 400 रुपए आएगा। दस हजार के बजट में आप इस खूबसूरत जगह पर कम से कम चार दिन का ट्रिप प्लान कर सकते हैं। ये एरिया पहाड़ी है। इसलिए यहां बर्फ और नेचर का भी मजा लिया जा सकता है।

कुल्लु

नॉर्थ इंडिया के लोगों को हिमाचल की दिलकश वादियां हमेशा से ही आकर्षित करती आई हैं। हिमाचल प्रदेश की तलहटी में बसा कुल्लु भी एक लो कोस्ट डेस्टिनेशन का बेहद खूबससूरत ट्रिप साबित हो सकता है। एक बार आने के बाद आपका यहां से जाने का मन ही नहीं करेगा। यहां आप पांच हजार के मामूली से बजट में दो-चार दिनों का हॉलिडे आराम से एंजॉय कर सकते हैं।

नैनीताल

कुल्लु की तरह नैनीताल भी लोगों के फेवरेट हिल स्टेशनों में से एक है। हर साल लाखों टूरिस्ट अपने परिवार और दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाने नैनीताल आते हैं। दिल्ली से ये खूबसूरत हिल स्टेशन केवल 320 किमी की दूरी पर स्थित है। ट्रेन से बेहद कम खर्चे में यहां आसानी से जाया जा सकता है।

अकेले ट्रैवलिंग के लिए देश की ये जगह है सबसे बेहतर

ट्रैवलिंग सभी लोगो द्दारा पंसद किया जाता है। दोस्तो के साथ परिवार, रिश्तेदारों के साथ घूमने का अपना ही अलग मजा है। लेकिन वहीं बात करें सोलो ट्रैवलिंग की तो इसका धीरे धीरे चलन बढता जा रहा है। परिवार रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ किया जानें वाला ट्रैवल जहां लोगो द्रारा पंसद किया जाता है, वहीं अब सोलो ट्रैवल को भी पसंद किया जा रहा है। विदेशी ही नहीं बल्कि भारतीय भी अपनी अकेली जिदंगी को सफर के रुप में जीने के लिए अकेले ही निकल पड़ते है।

भारत की गिनती दुनिया के कुछ ऐसो देशो में की जाती है, जहां आप अकेले घूमनें का लुत्फ उठा सकते है। यहां घूमने के लिए पर्यटक कहीं भी, किसी भी दिशा में जा सकता है। क्योंकि भारत में घूमने के लिए इतनी सारी जगहें हैं कि ये सिलसिला कभी खत्म होने का नाम ही नहीं लेता।

वैसे तो अकेले घूमनें का ये आइडिया थोड़ा अटपटा लगें लेकिन अपनी कंपनी को इजॉय करते हुए घूमने से आपको बहुत कुछ ऐसा मिल सकता है जिसे आप ग्रुप में ट्रैवल करके हासिल नही कर पाते।

सोलो ट्रैवलिंग की सबसे बड़ी खासियत ये है कि जिन्हें ट्रैवल का बेहद शौक होता है और नई नई चीजो को संस्कृतियों को जानने का मजा लेते है वहीं अकेले होने पर नए-नए लोगों को करीब से जानने का मौका मिलता हैसोलो ट्रैवलिंग में आप पूरी तरह अपनी मर्जी के मालिक होते हैं और अपने फैसले खुद ले सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इंडिया की कुछ ऐसी ट्रैवलिंग डैस्टिनेशन्स के बारे में जो सोलो ट्रैवल पसंद करने वालों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं......

उदयपुर-

राजस्थान का उदयपुर शहर अपनी खूबसूरत झीलों और प्राचीर मिनारों के लिए विश्वसस्तर पर जाना जाता है। अपने शानदार किलों, मंदिरों, महलों, संग्रहालयों, और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर यह शहर भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यह शहर अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा के लिए प्रसिध्द है। आज उदयपुर विश्व के सोलो डेस्टिनेशनंस में शामिल है जो अपनी अनूठी वास्तुकला के चलते देश दुनिया के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

खजुराहो

खजुराहो मध्‍यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक सुरम्‍य स्‍थल है जो विंध्‍य पर्वत श्रृंखला की पृष्‍ठभूमि में स्थित है। खुजराहो का नाम दुनिया के नक्‍शे पर विश्‍व धरोहर के रूप में जाना जाता है, यहां का प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर ही इस गांव की शान है। खजुराहो के पर्यटन में सबसे प्रमुख मंदिर है जहां पत्‍थरों पर खुदाई करके, बलुआ पत्‍थर से मूर्तियों को तैयार किया गया था, आज भी यह मूर्तियां सारी दुनिया में विख्‍यात है।

अनूठी और जूनून से भरी ये मूर्तियां देखने में वाकई खास लगती है। यहां का अन्‍य आकर्षण खजुराहो नृत्‍य महोत्‍सव है। यह महोत्‍सव हर साल 25 फरवरी से 2 मार्च तक चलता है। इस सप्‍ताह में सारी दुनिया से पर्यटक इसका हिस्‍सा बनने यहां आते हैं।

त्रिउंड

हिमाचल प्रदेश में त्रिउंड मेकलियोदगंज का प्रमुख पर्यटन स्थल है और यह हिमालय की धौलाधर की पहाड़ियों पर समुद्र से 2827 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। त्रिउंड से मेकलियोदगंज तक ट्रैकिंग के रास्ता 9 किलोमीटर का है। इसके बाद त्रिउंड से मेकलियोदगंज तक ट्रैकिंग करते हुए पहुचना होता है। त्रिउंड से मून चोटी और इन्द्र दर्रे का दिलकश नज़ारा देखने को मिलता है ।

पुष्कर

पुष्‍कर भारत के सबसे पवित्र शहरों में से एक है। यह अजमेर से 14 किमी. दूर है। इस छोटे से शहर में 400 से अधिक मंदिर और 52 घाट हैं। पुष्‍कर में विश्वस्तर का इकलौता भगवान ब्रह्म्मा का मंदिर है, जहां सिर्फ ब्रह्म्मा जी की पूजा होती है। पुष्‍कर के अन्‍य प्रसिद्ध मंदिरों में वारह मंदिर, अप्‍टेश्‍वर मंदिर और सावित्री मंदिर हैं।

टैली घाटी-

जाइरो की टैली घाटी साहसिक लोगों को प्रकृति के हर पहलू को जीने के पर्याप्त मौके देती है। यह ट्रैकिंग के लिये प्रसिद्ध है और एक आदर्श पर्यटन स्थल है। यहाँ के चीड़ के सुन्दर जंगल और बाँस, ऑर्किड और देवदार के पेड़ पर्यटकों को अट्रैक्ट करने के लिए काफी हैं। प्रसिद्ध टैली घाटी वन्य जीव अभ्यारण्य अरुणाचल प्रदेश के जाइरो से 30 किमी की दूरी पर स्थित है। सी लेवल से 1780 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ये स्थल अपनी खूबसूरती की वजह से यूनेस्को की विश्व विरासत स्थलों की सूची में पहले ही जगह बना चुका है।

इन बातों का रखेगें ध्यान तो नहीं होगें ट्रैवलिंग के दौरान परेशान

ट्रैवल के दौरान अक्सर कुछ परेशानियां ऐसी होती है जिनका आना या होना आप बिल्कुल भी नहीं सोचते। लेकिन अगर पहले से ही इनकी तैयारी कर ली जाए तो आपका टूर बेहद ही मजेदार बन जाता है। जैसे की हर एक बढ़िया ट्रिप के लिए एडवांस बुकिंग आपके द्दारा की जाती है, उसी तरह उस ट्रीप के लिए पहले से ही प्री प्लानिंग करना बेहद जरुरी है।

ट्रिप के दौरान जो सबससे जरुरी होता है वह है बैग। जिसमें आप अपना  उस ट्रिप से संबधित जरुरत का सामान कैरी करके ले जाते है। ट्रिप की पलानिंग के बीच ही बैग पैक करना इसी का बेहद खास हिस्सा है। इसलिए जब भी आप कहीं घूमने के लिए पैकिंग करें तो इन 5 बातों पर ज़रूर गौर करें,  ताकि आपको कोई परेशानी न हो।

कपड़ों को रोल करें

बैग में कपड़ों को तह करने के बजाय रोल करके रखें ताकि आप कम जगह में ज्यादा कपड़े रख सकें। इस तरह से कपड़ों में रिंकल्स भी नहीं आएंगे और आपको ज्यादा बैग कैरी करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही मौसम के हिसाब से कपड़े पैक करें।

दवाईयां

नार्मली काम में ली जाने वाली दवाइयां जैसे पेन किलर, एंटाएसिड, एंटीफंगल/एंटीबैक्टेरियल क्रीम, एंटीसेप्टिक, बैंडेज आदि हमेशा अपने साथ रखें। अगर डॉक्टर की सलाह पर कोई दवा ले रहें हैं, तो उसे साथ ले जाना हर्गिज़ न भूलें।

सॉफ्ट कॉपी साथ रखें

अगर आप घूमने के लिए देश से बाहर जा रहे हैं तो अपने पासपोर्ट, वीज़ा, आईडी कार्ड आदि की स्कैन्ड कॉपी अपनी ईमेल आईडी पर सेव कर लें। साथ ही इनकी फोटो अपने फोन में भी सेव रखें। ताकि अगर गलती आपका सामान या पर्स कहीं खो जाता है, तो आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इससे आप बाद में अपने ओरिजनल डाक्यूमेंट्स फिर से बनवा सकेंगे।

ज़रूरी एप डाउनलोड करें

ट्रिप पर निकलने से पहले मैप, फ्लाइट ट्रैकर, लैंग्वेज ट्रांसलेटर, फूड स्पॉटिंग, करेंसी कन्वर्टर जैसे जरूरी एप्स डाउनलोड करना न भूलें। फोन को पर्याप्त रीचार्ज करवाकर रखें, क्योंकि अगर रीचार्ज खत्म हो गया तो हो सकता है कि वहां आपको रीचार्ज करवाने का मौका न मिले। साथ ही,चार्जर, पावर बैंक और एक अच्छा सा कैमरा साथ ले जाना न भूलें।

मिक्स एंड मैच करें

ट्रिप में कोशिश करें कि कम से कम कपड़े और फुटवियर्स साथ ले जाने पड़ें। इसलिए चूज करते समय ध्यान रखें कि आसानी से एक-दूसरे के साथ मैच किया जा सके। हो सकता है कि ट्रिप में आपको कपड़े प्रेस करने का मौका ही न मिले। इसलिए ऐसे कपड़े पैक करें जो जल्दी सूखें और उन्हें बिना प्रैस के भी पहना जा सके। 

शांतिप्रिय है तो इन देशों की जरुर करें सैर

आज की बिजी लाइफस्टाइल में लोगों के पास इतना भी टाइम नहीं है कि वे अपने लिए कुछ पल सुकून के लिए निकाल सकें। आज की बात करें तो सभी लोग जॉब करना पसंद करते है। जिनमें महिलाएं भी प्रमुख है। वर्किंग लोगो की सभी की इच्छा होती है कि कुछ समय काम से फ्री होकर हॉलीडे को जाया जाए।

जिससे उन्हें थोड़ा शांति मिल सकें। इसके लिए वे या तो वीकेंड पर कहीं जाना पसंद करते है। या फिर साल में 2,3 बार एक ऐसे ट्रिप का प्लान बनाते है जो कुछ दिनों के लिए उन्हें बिल्कुल फ्रैश कर दें।

तो आइए आज हम आपको कुछ ऐसे ही शहरों के बारे में बतानें जा रहे है जहां की शांति आपको इन शहरों की तरफ खींच लाएगी। दुनिया के ये देश है अपनी शांति के लिए विख्यात। आइए जानते है इनके बारें में।

स्वीट्जलैंड- ये देश जितना सुंदर है उतनी ही यहां शांति भी है यहांके लोग भी काफी पैसे वाले है।

स्लोवेनिया- इस देश के लोग बेहद शांतिप्रिय होते है। इसी वजह से यहां आपराधिक मामलों की संख्या बेहद कम है।   

जापान- जापान टेक्नोलॉजी मे सबसे आगे है इसके अलावा यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी अच्छा विकास देखनें को मिला है। सरकार नें भी देश में शांति बनाए रखनें के लिए डिफेंस फोर्स बना रखी है।

पुर्तगाल- पर्यटको की दृष्टि से ये देश काफी ज्यादा लोकप्रिय है। इस देश में नियम कानून बेहद सख्त है। यहां हमेशा शांति बनी रहती है।

कनाडा- यहां क्राइम रेट कम है इसके अलावा इसका एक मात्र पड़ोंसी देश अमेरिका है। जो खुद भी संपन्न है यहां बेरोजगारी बहुत ही कम है और साक्षरता की दृष्टि से ये बेहद संपन्न है। 

डेनमार्क- यहां आपराधिक गतिविधियां बेहद कम है। क्योंकि यहां के लोग संपन्न है। खानें पीने के मामले में भी इसे काफी अच्छा माना जाता है। प्रदूषण का यहां स्तर बेहद कम है।

ऑस्ट्रिया- यातायात के बढिया साधन, कड़ें कानून अच्छा खानपान और काफी सुंदर देश है ये यहां के लोग खुद शांति बनाए रखते है। इसी वजह से यहां क्राइम रेट बेहद कम है।

चेक रिपब्लिक- सुंदर शहर के अलावा यहां शांति भी बहुत है। आतंकवाद का यहां नामोनिशान नहीं है। घूमनें के लिए यहां पूरी दुनिया से लोग आते है।

आइसलैंड- आइसलैंड दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश है, यहां की जनसंख्या बहुत ही कम है इसके अलावा जेंडर इक्वेलिटी भी अन्य देशों के मुकाबले सही है। लोग यहां पढ़े लिखे है। यहीं कारण है जो यहां शांति बनाए रखते है।

नवरात्र, दशहरे की छुट्टियों में कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं तो जाएं इन जगहों पर

सप्ताह के आखिर में त्योहारों के कारण तीन-चार दिन की छुट्टियां एक साथ पड़ रही हैं, अगर आप नवरात्र, दशहरा की इन छुट्टियों में कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं तो देश की इन जगहों पर जा सकते हैं। अभी हल्की गर्मी भी पड़ रही है, ऐसे में ये जगह आपके लिए बेस्ट रहेगी...


कश्मीर :-

कश्मीर को धरती के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है, सफेद बर्फ से ढ़के पहाड़, सेब के बगीचे और रंगीन फूलों के बीच समय बिताना आपके लिए बहुत ही यादगार रहेगा।

मनाली :-

मनाली एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है, हिमाचल प्रदेश में बसा मनाली अपनी खूबसूरती और हरियाली से लोगों को अपनी ओर खींचता है। मनाली जो दिल्ली से साढ़े पांच सौ किलोमीटर की दूरी पर है उसे रंगबिरंगे फूलों की घाटी भी कहा जाता है।

ऊंटी :-

ऊंटी को हिल स्टेशनों की रानी भी कहा जाता है, यह नीलगिरी जिले की राजधानी है और भारत में सबसे खूबसूरत पहाड़ी जगहों में से एक है। नीलगिरी की व्याख्या ब्लू पर्वत के रूप में की गई है।


देहरादून :-

देहरादून अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ियों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, यहां आकर आप राफ्टिंग, ट्रेकिंग आदि का भरपूर आनंद उठा सकते हैं। इसके अलावा अगर आप खेलों के शौक़ीन हैं तो यहां आपके लिए बेहद रोमांचक खेल भी उपलब्ध हैं।

शिमला :-

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी है और भारत का एक बहुत ही बड़ा टूरिस्ट हब है। शिमला फोटोग्राफरों को बहुत आकर्षित करता है।