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भूलकर भी ना करें ये 15 गलतियां धनतेरस पर

 समृद्धि और सेहत की मनोकामना पूरी करने का दिन धनतेरस आ गया है. धनतेरस के दिन सौभाग्य और सुख की वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है. वैसे हर पूजा के कुछ नियम होते हैं और धनतेरस के दिन भी कई बातों और सावधानियों को ध्यान में रखना जरूरी है. पूजा में मूर्तियों के स्थान का ध्यान रखें. उदाहरण के तौर पर, एक ही भगवान की मूर्ति साथ-साथ ना रखें. लक्ष्मी मां की मूर्ति हमेशा भगवान गणेश (बाएं) और मां लक्ष्मी सरस्वती (दाएं) के बीच में होनी चाहिए.और दिवाली की पूजा में यह बात ध्यान में रखें कि मूर्तियां बैठी हुई मुद्रा में हों और कमरे के दरवाजे की तरफ उनका मुख ना हो. मूर्तियों का चेहरा भी एक-दूसरे की तरफ नहीं होना चाहिए. मूर्तियों को उत्तर-पूर्वी दिशा में रखना सबसे शुभ है. कलश पूजा कमरे के पूर्व या उत्तर दिशा में रखें.धनतेरस के दिन स्नान करने और पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करें. वास्तु के अनुसार, धनतेरस की पूजा ईशान कोने में होनी चाहिए. यह कोना घर के उत्तर-पूर्व में पड़ता है. इसे सकारात्मक ऊर्जा का कोना कहा जाता है.अगर आप किसी वजह से इस कोने का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं तो आप पूजा के लिए पूर्व दिशा का इस्तेमाल कर सकते हैं. उत्तर, पूर्व, उत्तर-पूर्व दिशाएं सामान्यत: समृद्धि और कार्य के लिए वास्तु में शुभ मानी गई हैं. आपको  पूजा कक्ष में काले या गहरे रंगों का पेन्ट नहीं कराना चाहिए.दिवाली से पहले हर कई घर के कोने-कोने की सफाई करता है लेकिन अगर आपके घर में धनतेरस के दिन तक कूड़ा-कबाड़ या खराब सामान पड़े हुए हैं तो आप वास्तव में अपने घर आने वाली सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा डाल रहे हैं. घर की साफ-सफाई के साथ यह भी जरूरी है कि आपके घर में कोई भी पुराना या बेकार सामान ना पड़ा रहे. नई ऊर्जा के लिए घर से सारी बेकार वस्तुएं या इस्तेमाल में ना हो रहीं चीजों को फेंक दें.घर के मुख्य द्वार या मुख्य कक्ष के सामने तो बिल्कुल भी बेकार वस्तुएं ना रखें. मुख्य द्वार को नए अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. धनतेरस के दिन तक घर की साफ-सफाई ना जारी रखें. ध्यान रखें कि घर के किसी कोने में इस दिन गंदगी ना रहे.अगर आप धनतेरस पर सिर्फ कुबेर की पूजा करने वाले हैं तो ये गलती ना करें. आज धन्वन्तरी देवता की उपासना भी जरूरी है अन्‍यथा पूरे साल बीमार रहेंगे.इस दिन शीशे के बर्तन ना खरीदें. शीशे का संबंध राहु ग्रह से माना गया है इसलिए धनतेरस के दिन शीशा खरीदकर राहु के आगमन को न्योता देना है.दीपावली के लिए शॉपिंग बाद में करने की सोच रहे हैं तो फिर आप एक गलती करने वाले हैं. गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां और अन्य पूजन सामग्री भी इसी दिन क्रय करें. क्‍योंकि दिवाली के दिन आज खरीदी गई लक्ष्‍मी गणेश की मूर्ति की ही पूजा होती है.दिन के समय या शाम के समय सोएं नहीं, ऐसा करने से घर में दरिद्रता आती है. हालांकि दोपहर में आप थोड़ा सा आराम कर सकते हैं.

धनतेरस के दिन संभव हो सके तो रात्रि जागरण करें. एक दीये को जलाए रखें. 

धनतेरस के दिन घर में बिल्कुल कलह ना करें. मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो घर की स्त्रियों का सम्मान करें.धनतेरस के दिन किसी को भी उधार देने से बचें. इस दिन अपने घर से लक्ष्मी का प्रवाह बाहर ना होने दें.भूलकर भी धनतेरस के दिन लोहा ना खरीदें. घर में लक्ष्‍मी जी का नहीं, दरिद्रता का वास हो जाएगा.
धनतेरस के दिन अधिकतर लोग समृद्धि की कामना करते हैं लेकिन इस दिन सेहत का वरदान भी मांगना चाहिए. मां लक्ष्मी सेहत, समृद्धि और संपन्नता की देवी हैं.नकली फूलों से सजावट ना करें-
आजकल नकली फूलों से बनी हुई सजावट की चीजों का खूब इस्तेमाल होने लगा है. नकली फूलों से सजावट करने से बचें और आम के पत्तों और असली फूलों से मां लक्ष्मी को प्रसन्न करें.सोने, चांदी या मिट्टी की बनी हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा करें. नकली मूर्तियों की पूजा ना करें. स्वास्तिक और ऊं जैसे शुभ प्रतीकों को कुमकुम, हल्दी या किसी शुभ चीज से बनाएं. नकली प्रतीकों को घर में ना लाएं. मिट्टी के बने हुए दीयों का इस्तेमाल सबसे शुभ होता है.


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वास्तु टिप्सः घर में इस जगह लगाएं आईना, चमक उठेगी किस्मत

,नई दिल्ली। आईना हम सभी के घर का एक मुख्य सामान है। लेकिन ये सिर्फ चेहरा संवारने या खुद को देखने का जरिया नहीं है। बल्कि वास्तु शास्त्र में इससे आपकी किस्मत और स्वास्थ्य का संबंध भी बताया गया है। अगर आपने घर में आईना गलत जगह लगा रखा है तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आइए, जानते हैं आईने से जुड़े ये वास्तु टिप्स...

आईने को घर की उत्तर, पूर्व और उत्तर पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

वास्तु शास्त्र के मुताबिक आईना गोल आकार का नहीं होना चाहिए। इसकी जगह आयताकार और वर्गाकार आईना शुभ माना जाता है।

बेडरुम में आईना रखना अशुभ माना जाता है। अगर आपके बेडरुम में आईना है तो उसे हटा दें और यदि आप हटा नहीं सकते तो उसे ऐसी जगह लगाएं कि उसमें आपके बेड की छवि ना दिखे और ना ही सुबह उठते हुए आपको आईने में अपनी छवि ना दिखाई दे।

घर में टूटा हुआ आईना रखना नकारात्मकता की निशानी है। इससे पारिवारिक सदस्यों के बीच कलह रहने लगती है। साथ ही इसमें चेहरा देखने से स्वास्थ्य प्रभावित होता है।


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करियर को मिलेगी नई उड़ान, इन उपायों को आजमाएं

जहां हम कार्य करते हैं वहां का वास्तु भी हमारे करियर पर प्रभाव डालता है। पूरी मेहनत करने के बाद भी करियर में आपेक्षित सफलता न मिल रही हो या फिर करियर में उपलब्धियां हाथ नहीं आ रहीं तो ऐसे स्थिति हमारे आसपास का वातावरण और नकारात्मकता भी कारण हो सकते हैं। वास्तु में करियर को नई उड़ान देने के कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं, आइए जानते हैं इनके बारे में।

कार्यक्षेत्र में आपके बैठने की जगह आपकी कार्यकुशलता पर सीधा प्रभाव डालती है। जहां आप बैठते हैं अगर उसके पीछे दीवार आपके करीब है तो यह आपको सकारात्मकता प्रदान करती है। पीछे की इस दीवार पर पहाड़ों के दृश्य वाले पोस्टर लगाएं। कार्यालय के प्रवेश द्वार की ओर अपनी पीठ रखते हुए बैठने से बचें। अपने बैठने के स्थान के पीछे बहते पानी के दृश्य वाली तस्वीरें न लगाएं। ऑफिस में आपके सामने की जगह खुली होनी चाहिए। ऐसा करने से आगे बढ़ने की सोच और नए विचारों का आपको साथ मिलेगा। ऑफिस में अनुपयुक्त या टूटे फर्नीचर का इस्तेमाल न करें। कार्यस्थल पर बैठते समय आपका चेहरा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। अपने आसपास का वातावरण सदैव स्वच्छ रखें। बीम के नीचे कभी न बैठें।

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने  से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


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जानें, किस चीज को कहां रखेंगे तो होगा फायदा या नुकसान

भारतीय शास्त्रों में से एक शास्त्र ‘वास्तु शास्त्र’ है, जिसकी जड़ें प्राचीन काल से ही भारत में मौजूद हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में ही जैसे-जैसे मनुष्य ज्ञान बटोर रहा है, उसे वास्तु शास्त्र के बारे में पता लग रहा है। केवल वास्तु शास्त्र ही नहीं, पड़ोसी देश चीन के जाने-माने ‘फेंग शुई’ विज्ञान को भी बड़े स्तर पर भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। फेंगशुई के अनुसार बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। ऐसी ही पांच चीजें हैं यदि उन्हें सही स्थान और दिशा में रखा जाए तो सकारात्मक ऊर्जा के साथ-साथ सुख-समृद्धि का भी आगमन होता है। 

1. ताजे फूलों को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यदि ये फूल मुरझाने लगें तो इन्हें घर में न रखें। मुरझाए और सूखे फूलों को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा और रोगों का आगमन होता है। 
 


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दिशा के हिसाब से करेंगे ये काम तो हर हाल में होगी बल्ले-बल्ले


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र समय पैसे की कमी बनाए रखती हैं पर्स में रखी ये चीजें

पर्स चाहे छोटा हो या बड़ा, वह एक सच्चे संगी की भूमिका अदा करता है। धन से लेकर किमती और अवश्यकता के अनुरूप सभी सामान पर्स में सहज कर रखा जाता है। लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है की उसका पर्स सदा हरे-भरे नोटों से भरा रहे लेकिन हर किसी के मन की ये इच्छा पूरी नहीं हो पाती। क्या आप जानते हैं कुछ ऐसा सामान भी है जिसे पर्स में रखने से नकारात्मकता में वृद्धि होती है। जिससे जितना भी पैसा पर्स में आ जाए उसे छू मंतर होते देर नहीं लगती। कुछ लोग अपने किसी खास पर्स को बहुत लकी-अनलकी मानते हैं। वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता पर्स में रखा सामान उसमें शुभता-अशुभता की छाप छोड़ता है। ज्योतिष और वास्तु विद्वानों के अनुसार पर्स में रखी कुछ ऐसी चीजें हैं, जो पैसे की कमी के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालती हैं। बचें इस दुष्प्रभाव से-


कुछ ऐसे किमती कागजात होते हैं, जो रूपए-पैसे से भी अधिक महत्व रखते हैं। उन्हें अकसर व्यक्ति अपनी पर्स में संभाल कर रख लेता है। उनका महत्व खत्म होने पर भी उसे बाहर नहीं करता बल्कि पर्स में ही रखी रखता है। पुराने और बेकार के कागजों को पर्स में रखने से अलक्ष्मी का वास होता है।


पैसे की कमी का सबसे बड़ा कारण है फटे और बेतरतीब ढंग से रखे गए नोट। इन्हें कभी भी मोड़ कर न रखें और फटे नोटों को भी पर्स से हटा दें। सिक्के और नोट दोनों ही अलग-अलग स्थानों पर रखें।


अधिकतर लोगों की आदत होती है, जब वह नोट गिनने लगते हैं तो अपनी उंगलियों पर थूक लगा लेते हैं। ऐसा करने से धन का निरादर होता है, मां लक्ष्मी भी रूष्ट होती हैं।


पर्स में खाने की चीजें नहीं रखनी चाहिए। गुटखा-सुपारी जैसे मादक पदार्थ तो बिल्कुल नहीं अन्यथा आपके पास पैसा कभी भी नहीं रुकेगा। 


मृत व्यक्तियों के चित्र रखना शुभ नहीं होता। संत-महात्मा के चित्र रखे जा सकते हैं। यदि कोई संत या महात्मा देह त्याग चुके हैं तब भी उनके चित्र या फोटो पर्स में रखे जा सकते हैं क्योंकि शास्त्रों के अनुसार देह त्यागने के बाद भी संत-महात्माओं को मृत नहीं माना जाता।
 


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सुख-शांति चाहिए तो घर में कभी नहीं रखें ये वस्तुएं

शीशा घर को सजाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहते है ना घर की किसी भी दीवार पर शीशा लगाने से आपका कमरा बड़ा तो लगता ही साथ ही कमरे को नया लुक भी मिल जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि घर में टूटा हुआ शीशा नहीं रखना चाहिए। यदि आपके घर में आइना, खिडकी या दरवाजे का शीशा टूट जाता है तो उसे जल्द ही बदल लेना चाहिए। 

वास्तुशास्त्र में कई चीजों को नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है जो घर में कलह और धन की कमी लाने का काम करता है। ऐसी चीजों को घर में नहीं रखना ही अच्छा होता है। जानकारी के अभाव में अक्सर लोग इन्हें अपने घर में संभालकर रखते हैं और खुद परेशानियों का सामना करते रहते हैं। 


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घर में होगा वाटर फाउंटेन तो ऐसे मिलेगा हर समस्या से छुटकारा

घर में इनकम बढाने के लिए हर व्यक्ति जीवन में दौलत-शोहरत और सुख-शांति चाहता है लेकिन सबको पूरा मुकाम मिल जाए यह जरूरी नहीं। ऐसे में पैसा कमाने और उसे लंबे समय धनी बने रहना बिना किसी प्रयासों के संभव नहीं है। ऐसे में चीनी ज्योतिष पद्धति फेंग शुई के अनुसार घर में पानी का सोता यानी वाटर फाउंटेन रखना बेहद शुभ होता है। कहते हैं किसी भी घर में अगर मुख्य द्वार के पास बहते हुए पानी का सोता मिल जाए तो उस घर में धन की कभी कमी नहीं रहती। 

वाटर फाउंटेन को हमेशा घर के मेन गेट के सामने ही रखना चाहिए। अगर यह संभव नहीं हो तो इसे गेट के दाईं ओर रख सकते हैं। 
वाटर फाउंटेन को दक्षिण-पूर्वी दिशा में रखने से कभी भी घर में वित्त से जुडी समस्याएं सामने नहीं आती और मां लक्ष्मी की हमेशा उस जातक पर कृपा बनी रहती है। 
वाटर फाउंटेन में पानी की धार घर के अंदर की ओर हो ना कि बाहर की ओर। ऐसा करने के घर में सम्पपन्नता बनी रहती है और लक्ष्मी चिरकाल तक घर में ही निवास करती है।
करियर में बेहतरीन उठान और प्रगति के लिए फाउंटेन को उत्तकर दिशा में रखा जाना चाहिए। इससे करियर संबंधी बाधाएं जल्दीत दूर होती हैं और नौकरी के अवसर बढने लगते हैं। 


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वास्तु दोष खत्म करते हैं ये मंत्र, दिलाते हैं धन और प्रमोशन

जाने-अनजाने में इंसान से घर के निर्माण समय कुछ एेसी गलतियां हो जाती हैं, जिससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। जिस कारण उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई बार घर में रखे साज-सजावट के सामान से भी कई प्रकार के वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति वास्तु में बताए गए कुछ उपायों को अपनाए तो वो इन सबसे छुटकारा पा सकता है। इतना ही नहीं वास्तु दोषों के प्रभावों से मुक्ति पाने के विए कुछ मंत्रो का उच्चारण किया जाता है। तो आईए जानें किन मंत्रों के जाप से धन और सुख की प्राप्ति की जा सकती है।

उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। आकाश और पाताल को भी इसमें दिशा स्वरूप शामिल किया गया है। इस प्रकार चार दिशा, चार विदिशा और आकाश, पाताल को जोड़कर इस विज्ञान में दिशाओं की संख्या कुल दस माना गया है। मूल दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य को विदिशा कहा गया है।


पूर्व दिशा
वास्तु शास्त्र में यह दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्योदय होने की दिशा है। इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं। 

मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्य नमः या  ॐ इंद्राय नमः का जाप करने से इस दिशा के वास्तु दोष का नाश होता है। 


पश्चिम दिशा
इस दिशा के स्वामी शनिदेव हैं। यदि इस दिशा में वास्तु दोष हो तो ॐ शनि शनैश्चाय नमः का नियमित का जाप रपना चाहिए। 


उत्तर दिशा
यदि वास्तु दोषों के कारण घर की उत्तर दिशा प्रभावित हो जाए तो इसका अधिकतर प्रभाव घर की महिलाओं पर पड़ता है। साथ ही उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो यदि इस दिशा को वास्तु मुक्त करना हो तो निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए। 

 


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नवरात्रों में इस जगह स्थापित करें मां की प्रतिमा, सुख-समृद्धि का होगा वास

देवी दुर्गा हिंदुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें देवी और शक्ति भी कहते हैं, इन्हें आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित भी बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रूपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। इसलिए व्यक्ति को इनकी पूजा सच्चे व शुद्ध ह्रदय से करनी चाहिए। बल्कि यदि इंसान  वास्तु में बताई कुछ बातों का ध्यान रखे तो पूजा में ध्यान केंद्रित भी होता है और पूजा का फल भी जल्दी प्राप्त होता है।


वास्तु के अनुसार माता 
वास्तुशास्त्र के अनुसार, ध्यान का क्षेत्र उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को माना गया है। यह दिशा मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा यानी इंट्यूशन से जुड़ी है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके माता का ध्यान करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है। इसलिए नवरात्र काल में माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इस ही दिशा में करनी चाहिएं।


माता की मूर्ति को लकड़ी के पाटे पर ही रखें। अगर चंदन की चौंकी हो, तो आैर भी अच्छा रहेगा। वास्तुशास्त्र में चंदन शुभ और सकारात्मक उर्जा का केंद्र माना गया है। इससे वास्तुदोषों का शमन होता है।


स्थापना करने का शुभ मुहूर्त और विधि
अखंड ज्योति को पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए। इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से घर के अंदर सुख-समृद्धि का वास होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।


शाम के समय पूजन स्थान पर इष्ट देव के सामने प्रकाश का उचित प्रबंध होना चाहिए। इसके लिए घी का दीया जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।


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कल घर की दक्षिण दिशा में करें पूजन, आंखों के रोग होंगे दूर

शनिवार दि॰ 10.03.18 चैत्र कृष्ण नवमी पर मूल नक्षत्र व सिद्धि योग है। आज महाविद्या देवी तारा का पूजन करना श्रेष्ठ है। आद्यशक्ति ने हयग्रीव के वध हेतु नीलवर्ण धारण किया था। देवी प्रकाश बिंदु रूप में आकाश के तारे की भांति स्थित हैं, इसी कारण इन्हें तारा कहते हैं। समुद्र मंथन के समय महादेव के हलाहल विष पीने पर, उनकी शारीरिक पीड़ा के निवारण हेतु, इन्हीं देवी तारा ने माता स्वरूप में महादेव को अमृतमय दुग्ध स्तनपान कराया था। जिससे महादेव को समस्त शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिली थी। देवी तारा अपने तीन स्वरूप से विख्यात हैं, उग्र तारा, नील सरस्वती व एक-जटा। त्रीनेत्री देवी उग्र तारा का स्वरूप अत्यंत ही भयानक हैं। दिगंबरा देवी बाघाम्बर पहन कर घोर महा-श्मशान में ज्वलंत चिता पर निवास करती हैं। देवी, नर खप्पर व हड्डियों की मालाओं से अलंकृत हैं व सर्पों को आभूषण के रूप में धारण करती हैं। नील-सरस्वती स्वरूप में संपूर्ण ब्रह्माण्ड में जो भी ज्ञान फैला हुआ है उसे एकत्रित करने पर देवी तारा के रूप का निर्माण होता है। समस्त ज्ञान नील-सरस्वती का मूलरूप ही हैं। एकजटा स्वरूप में पिंगल जटा जुट वाली यह तारा सत्व गुण सम्पन्न हैं व अपने भक्त को मोक्ष प्रदान कर मोक्षदात्री बन जाती हैं। सर्वप्रथम ज्वलंत चिता में उग्र तारा प्रेत को जलाती हैं, द्वितीय नील सरस्वती, शव को शिव बनाती हैं। तीसरे एकजटा जीवित शिव को अपने पिंगल जटा में धारण कर मोक्ष प्रदान करती हैं। देवी तारा के विशेष पूजन व उपाय से नेत्र विकारों से मुक्ति मिलती है, आर्थिक सफलता मिलती है व शिक्षा क्षेत्र में सफलता मिलती है।


विशेष पूजन: घर की दक्षिण दिशा में नीला वस्त्र बिछाकर देवी तारा का चित्र स्थापित पर उनका दशोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीप करें, लोहबान की धूप करें, तेजपत्ता चढ़ाएं, सुरमा चढ़ाएं, लौंग, नारियल, काली मिर्च, बादाम चढ़ाएं व रेवड़ियों का भोग लगाकर 108 बार विशिष्ट मंत्र जपें। इसके बाद रेवड़ियां प्रसाद स्वरूप में किसी कुंवारी को बांट दें।


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बिना तोड़-फोड़ एेसे कर सकते हैं घर के वास्तु दोष नष्ट

कई बार वास्तु दोष के कारण घर की सुख-समृद्धि भंग होने लगती है। इसके कारण हमेशा घर-परिवार को समस्यों का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन वास्तु दोषों को दूर करने के लिए तोड़-फोड़ करने की कोई जरूरत नहीं होती, बिना किसी तोड़-फोड़ के भी दूर हो सकते हैं। 


आगे जानें छोटे-छोटे उपाय जिन्हें अपनाकर वास्तु दोष को किया जा सकता है नष्ट-


पानी में हल्दी घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने घर में छिड़काव करें।


अपने घर के पूजास्थल पर रोज एक घी का दीपक जलाएं।


घर के उत्तर-पूर्वी कोने की सफाई का विशेष ध्यान रखें। इससे घर के शुभत्व में वृद्धि होती है।


पूजास्थल के देवताओं पर चढ़ाएं पुष्प व हार दूसरे दिन हटा देना चाहिए।


घर के उत्तर-पूर्वी कोने में अधिक वजन या मशीनरी ना रखें।


अपने घर के उत्तर कोण में तुलसी का पौधा लगाएं।


वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को नींद नहीं आती है तो या उसका स्वभाव चिड़चिड़ा रहता है, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर रखकर सोना चाहिए। इससे उसके स्वभाव में बदलाव आएगा और उसे अच्छी नींद आएगी।


घर की दीवारों पर सुन्दर, हरियाली वाले और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं।