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यूपी में तीसरे चरण का मतदान खत्म, 61.16 फीसदी वोटिंग

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली (हिसं)। यूपी में तीसरे चरण का मतदान खत्म हो गया है। लगभग 61.16 फीसदी वोटिंग हुई है। अभी आखिरी तस्वीर आनी बाकी है। आज 12 जिलों की जनता 69 सीटों पर मतदान किया। आज जिन जगहों पर वोट डाले गए हैं उनमें ज्यादातर इलाके सपा के गढ़ माने जाते हैं। इस दौर की 69 सीटों में से सपा को पिछली बार 55, बसपा को 6, बीजेपी को 5, कांग्रेस को 2 और अन्य को 1 सीट मिली थीं।दागियों की बात करें तो बीजेपी  के 21, बीएसपी 21, सपा 13, और कांग्रेस के 5 उम्मीदवारों पर आपराधिक केस हैं। इस चरण के लिए कुल 25 हजार 603 मतदान बूथ बनाए गए हैं। इटावा सीट पर सबसे ज्यादा 21 प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि बाराबंकी की हैदरगढ़ सीट पर सबसे कम तीन उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश विधानसभा के बाकी चार चरणों का चुनाव 23 और 27 फरवरी, चार और आठ मार्च को होगा। वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी।

पूजा घर में मृतकों की तस्‍वीर रखना अशुभ है क्‍योंकि.

हिंदू धर्म में जीवन के विभिन्‍न मोड़ पर अलग-अलग रीति रिवाजों का पालन किया जाता है। पर्व के अलावा सामान्‍य जीवन में भी ये परंपराएं व रीतियां मानी जाती हैं।आदर्श हिंदू जीवन शैली में प्रतिदिन पूजा पाठ करना अनिवार्य है, यही कारण है कि प्रत्‍येक हिंदू के घर में पूजा घर होता है।एक बात आपने देखी होगी कि पूजा घर में आमतौर पर लोग किन्‍हीं मृतकों की तस्‍वीरें भी लगा दिया करते हैं। ये मृतक परिजनों के अलावा अन्‍य भी हो सकते हैं।लेकिन वास्‍तु के अनुसार यह ठीक नहीं है। वास्‍तु को मानने वाले यह बात जानते हैं कि पूजा घर में पुरखों की तस्‍वीरें लगाना निषेध है।

यदि पूजा घर में मृत व्‍यक्ति की तस्‍वीर रखी जा रही है तो इसका अर्थ ये हुआ कि आप अनजाने में ही परेशानियों को आहूत कर रहे हैं। तमिल विचारधारा के अनुसार मृतक देवदूत बनकर स्‍वर्ग में गति पाते हैं।इस लिहाज से वे मृतकों को भगवान का दर्जा दे देते हैं। हिंदू मान्‍यताओं के अनुसार मृत्‍यु के बाद आत्‍मा शरीर को त्‍यागकर दूसरे शरीर का वरण कर लेती है।

हिंदू धर्म में शरीर नश्‍वर है इसलिए उसका दाह संस्‍कार किया जाता है जबकि आत्‍मा पूजनीय है। इधर, वास्‍तु-शास्‍त्र कहता है कि देवों की तस्‍वीरों को उत्‍तर अथवा उत्‍तर पूर्व की दिशा में रखना चाहिए। पूजा घर की दिशा सदा उत्‍तर पूर्व होना चाहिए।

मृत पूर्वजों की तस्‍वीरों को दक्षिण पश्चिम या दक्षिण, पश्चिम में लगाना चाहिए। यदि उक्‍त क्रम का पालन नहीं किया गया तो परिवार में क्‍लेश, मानसिक कष्‍ट, संकट और दुविधा की आशंका बनी रहती है।

 

घर में बांसुरी रखने से होते हैं ये लाभ

यदि घर में रहने वाले लोग प्रतिदिन आपस में लड़ाई-झगड़ा करते हैं तो समझ लेना चाहिए कि यह वास्तुदोष के कारण हो रहा है। लड़ाई-झगड़ा नकारात्मक ऊर्जा से उत्पन्न होता है। ऐसे में घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश करवाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए आपको घर में इन वस्तुओं को रखना होगा। इन वस्तुओं को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

बांसुरी भगवान कृष्ण का बहुत ही प्रिय वाद्य यंत्र है, बांसुरी भी एक अवतार है जो मानव के सौभाग्य और ऐश्वर्य का सूचक भी है। वास्तुशास्त्र के अनुसार बांसुरी को आप घर में किसी भी दिशा में लगाएं तो आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार यदि आप मोर पंख को अपने घर के अंदर साफ शुद्ध स्थान में रखते है तो निश्चित रूप से आपके घर के साथ ही साथ आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी।

यदि आप कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोण पर आलमारी रखते है तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

घर के मुख्य द्वार पर गणेश प्रतिमा नहीं लगानी चाहिए बल्कि अगर यहां चांदी का स्वास्तिक लगाते हैं तो घर के अंदर नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होगा।

आपके मकान के मुख्य द्वार के सामने शौचालय या रसोईघर का दरवाजा होना या मुख्य द्वार के आगे दीवार या खंभा होना ठीक नहीं माना जाता है।

घर में रखें तांबा और देखें ये चमत्कारी प्रभाव

तांबे को वास्तु शास्त्र में सोने और चांदी के बराबर ही माना जाता है। तांबा घर में उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा को सबसे ज्यादा कम करता है। तांबा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करता है जिससे आपके घर में अगर वास्तुदोष हो तो वो दूर हो जाता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। वहीं तांबे से वास्तुदोष को कैसे दूर किया जा सकता है इसके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं....

वास्तु के अनुसार यदि आपके घर में वास्तुदोष है और नकारात्मक ऊर्जा आपको नुकसान पहुंचा रही है तो चोकोर तांबे का टुकड़ा घर में रखें। इससे वास्तुदोष दूर होता है।

यदि आपका मुख्य द्वार गलत दिशा में बना हुआ है तो दरवाजे पर तांबे के सिक्के लटका दें। ये नकारात्मक ऊर्जा को रोकते हैं इसके अलावा इससे वास्तुदोष भी समाप्त हो जाता है।

यदि आपके घर की दक्षिण दिशा में वास्तुदोष है तो दक्षिण में तांबे का ठोस पिरामिड रखने से लाभ मिलता है।

वहीं अगर आप अपने घर में तांबे का कोई पिरामिड रखना चाहते हैं तो इसे पश्चिम दिशा में रखें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा हमेशा बनी रहेगी।

वास्तु के अनुसार बनाएं टॉयलेट

घर में यदि टॉयलेट सही दिशा में हो, तो कई तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं। यह समस्याएं आपकी निजी जिंदगी से जुड़ी होती हैं। यदि आप इन जगहों से वास्तुदोष दूर करते हैं, तो आपकी यह समस्याएं दूर हो जाएंगी।

घर में टॉयलेट अगर वास्तु के लिहाज से सही जगह बनी हो, तो कई समस्याएं अपने आप ही दूर हो जाती है। इसलिए टॉयलेट को पूर्व-पश्चिम दिशा में नहीं बनवाना चाहिए।
टॉयलेट को अटैच नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा करने पर घर में मानसिक तनाव और कई तरह की बीमारियां घर के किसी न किसी भी सदस्य को बनी रहती हैं।
बोरिंग को उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में ही बनाएं। इससे घर के आर्थिक हालात सुधरेंगे। घर में समृद्धि लाने के लिए आप इस हिस्से में अंडरग्राउंड वॉटर टैंक भी बनवा सकते हैं।
यदि घर में पूजा घर और टॉयलेट्स बराबर में बने हुए हैं। यह वास्तु के हिसाब से बिल्कुल गलत है। इसे एक दूसरे के विपरीत ही बनवाएं।
घर के मंदिर में ऊर्जावान 91 ग्रिड पिरामिड रखना चाहिए। इसके अलावा मंदिर में मूर्ति का मुंह दक्षिण या पश्चिम की तरफ रखें, जबकि पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व की तरफ होना चाहिए। बाथरूम में नमक का कटोरा रखें। इससे घर की नेगेटिव एनर्जी को ठीक करने में मदद मिलेगी।
रसोईघर की दीवार पर पूरब दिशा में एक बड़ा शीशा टांगने से घर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होंगी। घर की बाहरी दीवार पर अष्टकोणीय शीशा इस तरह टांगें कि इसमें पेड़ों का अक्स दिखाई दे। इससे द्वार वेध दोष दूर होगा।
 

घर में पीढ़ियों तक वास करेंगी धन की देवी, सही दिशा में रखें घरेलू पौधे

प्राय: लोग अपने घरों की फुलवारी में या लॉन में छोटे-छोटे पौधे लगाया करते हैं। भवन में छोटे पौधों का अपने आप में बहुत महत्व होता है। घर में लगाए जाने वाले छोटे पौधों में कई पौधे ऐसे होते हैं जिनका औषधीय महत्व है। साथ ही उनका रसोई या सौंदर्यवद्र्धन संबंधी महत्व भी है।

आज के समय में स्थान के अभाव में प्राय: लोग गमलों में ही पौधे लगाते हैं या लॉन तथा ड्राइंगरूम में सजाकर रख देते हैं। इन पौधों एवं लताओं की वजह से छोटे फ्लैटों में निवास करने वाले खुद को प्रकृति के नजदीक महसूस करते हैं एवं स्वच्छ हवा तथा स्वच्छ वातावरण का आनंद उठाते हैं।

तुलसी का पौधा इसी प्रकार का एक छोटा पौधा है जिसके औषधीय एवं आध्यात्मिक दोनों ही महत्व हैं। प्राय: प्रत्येक हिन्दू परिवार के घर में एक तुलसी का पौधा अवश्य होता है। इसे दिव्य पौधा माना जाता है।

माना जाता है कि जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है वहां भगवान विष्णु का निवास होता है। साथ ही वातावरण में रोग फैलाने वाले कीटाणुओं एवं हवा में व्याप्त विभिन्न विषाणुओं के होने की संभावना भी कम होती है। तुलसी की पत्तियों के सेवन से सर्दी, खांसी, एलर्जी आदि बीमारियां भी नष्ट होती हैं।

वास्तुशास्त्र के अनुसार छोटे-छोटे पौधों को घर की किस दिशा में लगाया जाए ताकि उन पौधों के गुणों को हम पा सकें, इसकी विवेचना यहां की जा रही है।

* तुलसी के पौधों को यदि घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जाए तो उस स्थान पर अचल लक्ष्मी का वास होता है अर्थात उस घर में आने वाली लक्ष्मी टिकती है।

* घर की पूर्वी दिशा में फूलों के पौधे, हरी घास, मौसमी पौधे आदि लगाने से उस घर में भयंकर बीमारियों का प्रकोप नहीं होता।

* पान का पौधा, चंदन, हल्दी, नींबू आदि के पौधों को भी घर में लगाया जा सकता है। इन पौधों को पश्चिम-उत्तर के कोण में रखने से घर के सदस्यों में आपसी प्रेम बढ़ता है।

* घर के चारों कोनों को ऊर्जावान बनाने के लिए गमलों में भारी प्लांट को लगाकर भी रखा जा सकता है। दक्षिण-पश्चिम कोने में अगर कोई भारी प्लांट है तो उस घर के मुखिया को व्यर्थ की चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

* कैक्टस ग्रुप के पौधे जिनमें नुकीले कांटे होते हैं उन्हें घर के अंदर लगाना वास्तुशास्त्र के अनुसार उचित नहीं।

* पलाश, नागकेसर, अरिष्ट, शमी आदि का पौधा घर के बगीचे में लगाना शुभ होता है। शमी का पौधा ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जो घर से निकलते समय दाहिनी ओर पड़ता हो।

* घर के बगीचे में पीपल, बबूल, कटहल आदि का पौधा लगाना वास्तुशास्त्र के अनुसार ठीक नहीं। इन पौधों से युक्त घर के अंदर हमेशा अशांति का अम्बार लगा ही रहता है।

* फूल के पौधों में सभी फूलों, गुलाब, रात की रानी, चम्पा, जास्मीन आदि को घर के अंदर लगाया जा सकता है किन्तु लाल गेंदा और काले गुलाब को लगाने से चिंता एवं शोक की वृद्धि होती है।

* शयनकक्ष के अंदर पौधे लगाना अच्छा नहीं माना जाता। बेल (लतरने) वाले पौधों को अगर शयनकक्ष के अंदर दीवार के सहारे  चढ़ाकर लगाया जाता है तो इससे दाम्पत्य संबंधों में मधुरता एवं आपसी विश्वास बढ़ता है।

* अध्ययन कक्ष के अंदर सफेद फूलों के पौधे लगाने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। अध्ययन कक्ष के पूर्व एवं दक्षिण के कोने में गमले को रखा जाना चाहिए।

* रसोई घर के अंदर गमलों में पुदीना, धनिया, पालक, हरी मिर्च आदि के छोटे-छोटे पौधों को लगाया जा सकता है। वास्तुशास्त्र एवं आहार विज्ञान के अनुसार जिन रसोई घरों में ऐसे पौधे होते हैं वहां मक्खियां एवं चीटियां अधिक तंग नहीं करतीं तथा वहां पकने वाली सामग्री सदस्यों को स्वस्थ रखती है।

* घर के अंदर कंटीले एवं वैसे पौधे जिनसे दूध निकलता हो, नहीं लगाने चाहिएं। ऐसे पौधों के लगाने से घर के अंदर वैमनस्य का भाव बढ़ता है एवं वहां हमेशा अशांति का वातावरण बना रहता है।

* बोनसाई पौधों को घर के अंदर लगाना वास्तुशास्त्र के अनुसार उचित नहीं क्योंकि बोनसाई को प्रकृति के विरुद्ध छोटा कद प्रदान किया जाता है। जिस प्रकार बोनसाई का विस्तार संभव नहीं होता, उसी प्रकार उस घर की वृद्धि भी बौनी ही रह जाती है।
 
* भगवान शिव को बेल बहुत प्रिय है। अनुश्रुति के अनुसार बेल वृक्ष पर साक्षात भगवान शिव वास करते हैं। जिस घर में ये वृक्ष होता है उस घर में मां लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं।

दांपत्य जीवन को ऐसे बनाएं खुशहाल

वास्तुदोष के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याएं व्यक्ति को परेशान कर देती है। ये समस्याएं घर-गृहस्थी की सुख शांति से संबंधित हो सकती है और कार्य-व्यापार से जुड़ी हुई भी। यहां वास्तुदोष के दूर करने के लिए कुछ खास उपाय दिए जा रहे हैं। जो सभी के लिए अत्यंत लाभप्रद साबित होंगे।

शयनकक्ष में पलंग दीवार से मिला हुआ नहीं होना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में कठिनाई आती है।
यदि मकान का मुख्य द्वार दक्षिण दिश में है तो द्वार की चौखट के नीचे चांदी का लंबे आकार का पत्तर दबा दें
मुख्य द्वार पर गमले में आम का पौधा लगाकर रखें या द्वार की चौखट पर घोड़े की नाल या पंच धातु से निर्मित पिरामिड लगाकर भी दक्षिण दिशा के द्वार के दोष से मुक्त हुआ जा सकता है।
शयनकक्ष में कभी भी झूठे बर्तन न रखें, क्योंकि इसके प्रभाव से घर की किसी स्त्री का स्वास्थ्य सदा खराब रहता है। संभव है परिवार में क्लेश भी बना रहता है।
भंडारगृह या रसोईघर में कभी कोई बर्तन खाली न रखें। इसमें आप आटा, दाल, चावल या कुछ और रख सकते हैं। इससे आपके घर में अन्न की कमी नहीं होती।
जलीय पौधे जैसे मनीप्लांट आदि को ईशान, उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं। इससे आर्थिक पक्ष ज्यादा मजबूत होगा।
कोई भवन यदि सड़क के तेज घुमाव पर स्थित है तो यह अशुभ होता है। इस अशुभता से बचने के लिए सामने वृक्षों की कतार लगा देनी चाहिए।
घर में जो लोग स्वर्गवासी हो चुके हैं, उनकी तस्वीरें सदा दक्षिण दिशा में ही लगाएं।
अपने घर में तुलसी के पौधे को जरूर लगाएं। शास्त्रानुसार जो स्त्री अपने गृह में नित्य तुलसी के पौधे की पूजा करती है, वह सौभाग्यशाली होती है।
घर में टूटे शीशे की पेंटिंग या चित्र आदि न लगाएं। टूटे शीशों को तुरंत बदलवा देना चाहिए। ऐसा शीशा दुर्भाग्य प्रदान करता है।
 

घर मे हों मुस्कुराते बच्चों के चित्र

वास्तुदोष के कारण आपकी जिंदगी में कई परेशानियां आती हैं। दरअसल, ये समस्याएं घर-गृहस्थी, कार्यस्थल और आपके घर की बनावट से संबंधित हो सकती हैं। आप वास्तुदोष को दूर कर जिंदगी को खुशियों से भर सकते हैं। यहां आपको कुछ उपाय दिए जा रहे हैं। जिन्हें आजमाकर आप अपनी वास्तुदोष संबंधी परेशानियों को दूर कर सकते है।

घर के जो लोग स्वर्गवासी हो चुके हैं, उनकी तस्वीरें हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार पर ही लगाएं।
घर के किसी भी कमरे में युद्ध, महाभारत, किसी पिशाच या जादूगर की तस्वीर नहीं लगाएं, इससे हानि होती है। मुस्कुराते हुए बच्चे की या कोई सकारात्मक पेटिंग्स लगा सकते हैं।
शयनकक्ष में कभी भी झूठे बर्तन न रखें, क्योंकि इसके प्रभाव से घर की किसी स्त्री का स्वास्थ्य हमेशा खराब रहता है। संभव है परिवार में क्लेश भी बना रहे।
घर और अपने कार्यस्थल पर जल से भरा कोई पात्र, जग या मछलीघर रखना बहुत ही अच्छा है। इससे आर्थिक पक्ष प्रबल होता है।
घर में निवास करने वालों की आरोग्य-वृद्धि एवं सुख-शांति के लिए खिड़की और दरवाजे पूर्व व उत्तर में बनवाएं। इससे घर का वातावरण शुद्ध रहता है।
यदि किचन आग्नेय दिशा में नहीं है तो भोजन हमेशा पूर्व की ओर मुंह करके बनाएं और चूल्हा आग्नेय कोण में रखें।
किचन में जल का प्रबंध हमेशा उत्तर दिशा में करें। इससे कभी अन्न संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भवन के आग्नेय कोण में कभी आईना न लगाएं बल्कि हमेशा उत्तर-पूर्व में लगाएं। ध्यान रखें आईना जितना कम वजन का होगा, उतना ही अधिक लाभ देगा।
 

इस स्थान पर न रखें पलंग, दांपत्य जीवन में बढ़ेगी दूरियां

फेंगशुई के सरल उपायों के कारण इसका चलन अन्य देशों सहित भारत में भी बढ़ता जा रहा है। फेंग मतलब वायु और शुई यानि जल अर्थात फेंगशुई शास्त्र जल व वायु पर आधारित है। जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के लिए फेंगशुई में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं। जिन पर अमल करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है। आइए जाने फेंगशुई के कुछ आसान टिप्स-

 
* कई लोग शयन कक्ष में खिड़की के पास पलंग लगाते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। खिड़की के पास पलंग लगाने से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव अौर अविश्वास में बढ़ौतरी होती है। खिड़की के पास बिस्तर लगाना पड़े तो सिरहाने अौर खिड़की के मध्य पर्दा अवश्य लगाएं।
 
* जिस चादर में छेद या कटी-फटी हो बेडरुम में उसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। जिस चादर में लड़ाई-झगड़े या नेगेटिविटी के चित्र हों उसका भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
 
* पलंग के नीचे कोई भी सामान नहीं रखना चाहिए। पलंग के नीचे सामान रखने से पति-पत्नी के संबंधों में तनाव बढ़ता है। पलंग के नीचे का स्थान खाली रखने से कमरे में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। 
 
* कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें शयनकक्ष में नहीं रखना चाहिए जैसे टीवी, कंप्यूटर आदि। इनसे निकले वाली तरंगे कमरे में नकारात्मकता फैलाती है। इन चीजों को कमरे में रखना पड़े तो इन्हें केबिनेट के अंदर या ढंककर रखना चाहिए। 
 
* हल्के रंग शांति अौर प्यार बढ़ाते हैं। शयनकक्ष की दीवारों में हल्के रंगों का प्रयोग करना चाहिए। पति-पत्नी के कमरे में गहरे अौर काले रंग का प्रयोग कभी भी नहीं करना चाहिए। 

धन स्थिर रखने के लाजबाव उपाय

आधुनिक युग में धन की आवश्यकता सभी लोगों के लिए है। सभी व्यक्ति धन कमाने के लिए मेहनत करते हैं। पर मेहनत करने पर भी आपके पास धन स्थिर नहीं हो पा रहा हो, तो इसके पीछे वास्तुदोष भी हो सकता है। जिसे आप इन आसान से उपायों को आजमाकर स्थिर कर सकते हैं।

घर में अधिक कबाड़ एकत्रित न होने दें।
शाम के समय घर की लाइट जरूर जलाएं। इस समय घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है।
घर में सूखे फूल न रखें, इससे घर में मृत्यु और नकारात्मक ऊर्जा आएगी और घर की सुख-प्रगति में बाधा आती है ताजे फूल ही रखें।
अगर घर के किसी हिस्से में वास्तु दोष हो तो उस दिशा में समुद्री नमक या स्फटिक पत्थर रखें और नमक का पोंछा लगाएं।
उत्तर-पूर्व में सीढियां हों तो उत्तर की दीवार पर आईना लगाएं।
शयन कक्ष में बैठकर खाना न खाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा आती है।
टॉयलेट पूर्व में हो, तो अगर संभव हो तो हटा दें अगर नहीं तो सीट के ऊपर एक सेल्फ लगाएं और उसके ऊपर एक बाउल में समुद्री नमक रखें।
घर के मुख्य द्वार पर पीले रंग की लाइट लगाएं।
मुख्य द्वार दक्षिण-पश्‍िचम में हो, तो हर कार्य में देरी होती है अतः मुख्य द्वार पर एक ताम्बे का स्वस्तिक लगाएं।
खाना-पीना उत्तर की ओर मुख करके खाएं, इससे सकारात्मक ऊर्जा आएगी।
जो व्यक्ति श्रेष्ठ धन की इच्छा रखते हैं वे रात्रि में सत्ताइस हकीक पत्थर लेकर उसके ऊपर लक्ष्मीजी का चित्र स्थापित करें, तो निश्चय ही उसके घर में अधिक उन्नति होगी।
ध्यान रखें कि आपके घर के किसी भी नल से पानी बहना या टपकना नहीं चाहिए। पानी के बहने या टपकने से आपकी जेब हल्की हो सकती है।
किसी भी शुक्रवार को रात्रि में पूजा उपासना करने के पश्चात एक सौ आठ बार ऊं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करें। धन से जुड़ी हर समस्या हल हो जाएगी।
अगर आपका व्यवसाय होटल या भोजन सामग्री के साथ जुड़ा हुआ है तो वहां के प्रवेश द्वार का मुख दक्षिण दिशा में होना चाहिए।
घर का कीमती समान और तिजोरी ऐसी अलमारी में रखे जो सदा पश्चिम या दक्षिण की दीवार की तरफ लगी होनी चाहिए ताकि उसके दरवाजे पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ खुलें।
 

Mirror भी लाता है बैड लक, जानिए कुछ टिप्स जो बढ़ाएंगे आपका गुड लक

घर में आईना रखने के लिए भी सही दिशा का चुनाव करना चाहिए । वास्तु के अनुसार घर में आईने को सही दिशा में न लगवाया जाएं तो ये नुक्सानदायक भी साबित हो सकता है । आईना घर में सही स्थान पर ही लगाना चाहिए नहीं तो घर के सदस्यों को कई शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है । घर में आईना लगाने से पहले इन बातों का रखें ख्याल गुज लक रहेगा आपके साथ।

 * तिजोरी या गल्ले के नीचे और ऊपर की तरफ मिरर लगाने से इनकम बढ़ती है।

 * घर और दुकान के दाएं बाएं खूबसूरत पौधे सजाएं।

 * सीढ़ियों का सीधा चढ़ाव अशुभ होता है, थोड़ा शेप देकर इसका निर्माण करवाना चाहिए। यदि आपके घर अथवा दुकान में सीधी सीढ़ियां जाती हैं तो 6 रोड वाला विंड चाईम लगाकर उसकी नकारात्मकता को दूर किया जा सकता है।

* घर में किसी भी शयन कक्ष में दीवार के चारों चरफ आईने नहीं लगाने चाहिए इससे घर के सदस्यों में समस्याएं बढ़ सकती हैं ।
 
 * शयन कक्ष में आईना इस प्रकार लगाएं ताकि उस आईने में आपका बैड नजर न आए। 
 
 *  घर की दीवारों पर आईना न तो ज्यादा ऊंचा लगवाएं और न ही ज्यादा नीचे एेसे करने से घर के सदस्यों को शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है ।
 
 * आईना एेसी जगह लगाएं जिसमें घर का प्रवेश द्वार दिखाई न दें ।
 
 * घर में आईना उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से आय में वृद्धि के साथ-साथ सभी संकट भी समाप्त होने शुरु हो जाते है ।
 
 *  अगर आप अपने भाग्य में बृहत्तरकरण लाना चाहते है तो आईने को इस तरह लगाएं कि उसमें किसी शुभ वस्तु की छाया नजर आ रही हो।

 *  टूटे हुए आईने को घर में न रखें इसे अशुभ माना जाता है।

 *  आईना बाथरूम के बीच वाली दीवार पर लगा सकते है । आईने की सफाई का भी विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।

खुशहाली के लिए लगाएं रत्नों का पौधा

रत्नों का पौधा सुनने में भी भले ही काल्पनिक लगे किन्तु वास्तविकता यही है कि चीनी पद्धति में इस पौधे का अधिक महत्व है। यह पौधा तरह-तरह के रत्नों और स्फटिकों का बना होता है। इसमें कई वैरायटीज होती हैं।

- नवरत्न पेड़ नवग्रहों की शांति, सुख तथा पारिवारिक शांति के लिए उपयोग किया जाता है। एमेथिस्ट का पेड़ दिमाग का संतुलन बनाए रखता है। रंग-बिरंगे रत्नों से सजे इस पौधे को यदि घर के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में रखा जाए तो निश्चित रूप से जीविका चलाने वाले व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसे घर में दक्षिण-पूर्व दिशा में भी रखा जा सकता है। इसे व्यवसायिक स्थल पर रखने से सम्पदा मिलती है। इसे बैठक में भी रखा जा सकता है. इसका एक ओर महत्वपूर्ण कार्य नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना भी है।

- चीनी संस्कृति और फेंगशुई में ड्रैगन को बहुत सम्मान दिया जाता है और इसे शुद्ध मानते हैं।

- कई पीढिय़ों से ड्रैगन शक्ति, अच्छे भाग्य और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ड्रैगन एक कीमती कास्मिक ची बनाता है, जिसे शेंग ची भी कहते हैं, जिससे घर और कार्यस्थल पर भाग्य साथ देता है। डबल ड्रैगन को यूं तो किसी भी दिशा में रखा जा सकता है, लेकिन पूर्व दिशा में रखना सबसे ज्यादा कारगर माना गया है।

- यह ड्रैगन लकड़ी, सेरेमिक व धातु में उपल्बध है। दो ड्रैगन का जोड़ा समृद्धि का प्रतीक है। इनके पैर के पंजों में ज्यादा मोती सबसे ज्यादा ऊर्जा संजोये है। फेंगशुई में ड्रैगन को चार दिव्य प्राणियों में गिना जाता है। ड्रैगन येंग यानी पुरुषत्व, हिम्मत और बहादुरी का प्रतीक है। लकड़ी के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व या पूर्व में, सेरेमिक, क्रिस्टल के ड्रैगन को दक्षिण- पूर्व, उत्तर-पूर्व वया उत्तर पश्चिम में रखें।

- छात्र इसे अपनी पढ़ाई की टेबल पर रखें। घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में इसे रखने से अच्छे सलाहकार, दोस्त व बढिय़ा नेतृत्व करने वाले साथी मिलेंगे। एक्वेरियम के पास रखने से भाग्य साथ देता है।

 

कुछ इस तरह पाएं दांपत्य जीवन में खुशहाली

फेंगशुई का विज्ञान इसी बात पर जोर देता है कि अधिक से अधिक सकारात्मक ऊर्जा पाने के लिए ऐसे उपाय अपनाए जाए। जिनमें कम से कम साजो-समान, प्रयास या समय खर्च करना पड़े।

इसी क्रम में इस विज्ञान के अनुसार सुंदर तस्वीरों के माध्यम से भी अच्छी ऊर्जा का संचार घर में किया जा सकता है। इस उपाय के भारतीय संदर्भ में योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर श्रेष्ठ मानी जाती है।

भगवान श्रीकृष्ण भारतीय जनमानस के बीच कर्म के साथ ही प्रेम और आनंद की प्रतिमूर्ति माने जाते हैं। इसलिए बंशी बजाते भगवान श्रीकृष्ण की राधा के साथ मूर्ति को घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में लगाना रिश्तों में प्रेम बढ़ाने वाला माना गया है।

इस तस्वीर में कुछ और विशेषता भी होनी चाहिए। जैसे राधा और कृष्ण किसी बगीचे में खड़े हों और उनके आस-पास तस्वीर में मोर भी शामिल हो। फेंगशुई के नियमानुसार ऐसी तस्वीर परिवार और संबंधों की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है।

क्योंकि फेंगशुई में जहां बंसी का उपयोग घर के बीम और गार्डर का दोष मिटाने में भी उपयोग किया जाता है, वहीं इसकी मधुर ध्वनि सकारात्मक ध्वनि तरंगों का संचार करने वाली होती है। भगवान श्रीकृष्ण और राधा की तस्वीर ईश्वर और भक्ति का प्रतीक है।

यह प्रेम, भावना और समर्पण का सूचक है। इसलिए प्रेम-भाव में डूबी श्रीकृष्ण-राधा की तस्वीर घर में लगाने से दांपत्य संबंधों में मधुरता आती है, नीरसता का अंत होता है। इसी प्रकार श्रीकृष्ण के मुकूट का मोर पंख सुख-समृद्धि का सूचक है, जिसका सकारात्मक प्रभाव घर-परिवार में खुशहाली लाता है।

पढ़ें: क्या बर्तन में धरती को कैद कर सकते हैं? लेकिन इन्होंने ऐसा किया!

इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर कर्म के लिए ही प्रेरित नहीं करती, बल्कि दांपत्य जीवन में स्नेह और ह्रश्वयार कीभावना पैदा करती है। वहीं माता राधिका की तस्वीर से समर्पण भावना जागती है।

 

बहुत ही चमत्कारी होता है शंख, घर में रखने से होते हैं ये लाभ

जिस घर में शंख होता है उस घर से दुख, दरिद्रता और बीमारियां कोसों दूर रहती है। अगर घर में रोज शंखनाद किया जाए तो कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। आप जरूर जानना चाहेंगे शंख के लाभों के बारे में, आइए आपको बताते हैं इसे लाभ...

शंख के जल से शिव, लक्ष्मी आदि का अभिषेक करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है।

मोती शंख एक बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का शंख माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार यह शंख बहुत ही चमत्कारी होता है। इसे घर में रखने से धन-संपत्ति बढ़ने लगती है ओर परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बना रहता है।

शंख की पूजा करने के बाद आप उस शंख को लाल कपड़े में लपेट कर अपनी दुकान की या घर की तिजोरी में रखें, ऐसा करने से आपकी जेब व तिजोरी कभी खाली नहीं रहेगी।

सुबह-सुबह शंख पूजा के बाद शंखनाद अवश्य करें, अगर आपके घर में किसी व्यक्ति को खांसी, पीलिया, ब्लडप्रेशर, दमा आदि बीमारियां है तो इसकी आवाज से इन बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।

अगर इस नुकसान से बचना है तो फल के छिलकों को न डालें कूडेदान में

वास्तुशास्त्र का अर्थ होता है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन। यदि ये तरंगें संतुलित रूप से आपको प्राप्त हो रही हैं, तो घर में सुख और शांति बनी रहेगी। ऐसे में वास्तु को अपने अनुसार बनाए रखने के लिए कुछ विशेष प्रयासों को किया जाना आवश्यक है। इन प्रयासों के माध्यम से आप अपने घर को वास्तुदोष से बचा सकते हैं।

फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडेदान में ना डालें बल्कि बाहर फेंकें। ऐसा करने से आपको मित्रों से लाभ होगा और आपका दोस्ती का रिश्ता मजबूत होगा।

मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जाऐंगे।

सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही या प्याज मांगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है।

छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं।

माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।

महीने में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाऐं उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाऐं तो धन लाभ होगा।

कुछ इस तरह तलाशें खुशियां

हमारे आस-पास कई तरह की समस्याएं हैं। इन समस्याओं का निराकरण भी हमारे आस-पास मौजूद है। जरूरत है तो बस इसे जानने की और जानकर दूर करने की ताकि आपका परिवार और आपका घर, कार्यालय खुशियों से हमेशा भरा रहे।

1. यदि आपके निवास में कोई पिछला द्वार है तो वह मुख्यद्वार से छोटा और एक सीध में नहीं होना चाहिए।

2. कार्यालय की दक्षिण दिशा में लाल रंग का अधिकाधिक प्रयोग करने से व्यवसाय खूब फलता-फूलता है।

3. गृह- आवास में दक्षिण-पश्चिम, आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य कोण में दर्पण का होना अशुभ माना गया है। यदि इस दिशा में कहीं भी दर्पण लगा हो तो तुरंत हटा दें।

4. शयनकक्ष में दर्पण तथा जल से भरा पात्र रखना शुभकर नहीं है। इससे पति-पत्नी के संबंधों में मनमुटाव उत्पन्न हाे सकता है। दोनों के संबंधों में दरार भी पड़ सकती है।

5. आर्थिक संकट से उबरने के लिए मकान में, उत्तर दिशा में छोटा-सा एक्वेरियम (मछलीघर) या सजावटी फव्वारा (जो जल खींचता और छोड़ता हो) रख सकते हैं।

 

वास्तु और फेंगशुई के ये अनोखे उपाय देते हैं समृद्धि

वास्तु नियमों के अनुसार पूर्व दिशा और उत्तर दिशा, ज्यादा ऊर्जावान दिशाएं मानी गईं हैं। इन्हीं दिशाओं से स्वास्थ्य, समृद्धि और रचनात्मक शक्ति का विकास होता है। फेंगशुई के अनुसार काष्ठ तत्व को घर या दफ्तर के पूर्व दिशा में स्थापित करने से यह दिशा ऊर्जावान होती है। जानें ऐसे ऐसे ही कुछ उपायों को, जो बना सकते हैं आपको समृद्ध।
1. अगर आप घर, कार्यालय, शो-रूम आदि के पूर्वी हिस्से में लकड़ी का फर्नीचर या लकड़ी से निर्मित वस्तुएं,
अलमारी, शो पीस, पेड़-पौधे या लकड़ी के फ्रेम से जड़े हुए चित्र लगाते हैं, तो आपको सकारात्मक लाभ मिलता है।
2. घर, दुकान व कार्यालय में कुछ अच्छी ऊर्जाओं को संचारित करना चाहते हैं, तो काष्ठ और लकड़ी के पेड़ पौधे या वस्तुएं रखकर इन्हें सुधार सकते हैं।
3. नुकीले औजार जैसे कैंची, चाकू आदि कभी भी इस प्रकार नहीं रखे जाने चाहिए कि उनका नुकीला सिरा बाहर की ओर हो।
4. शयन कक्ष में पौधा नहीं रखना चाहिए, किन्तु बीमार व्यक्ति के कमरे में ताजे फूल रखने चाहिए। इन फूलों को रात को कमरे से हटा दें।
5. मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए चंदन आदि से बनी अगरबत्ती जलाएं। इससे मानसिक बेचैनी कम होती है।
 

घर में रखें ये चीजें, कभी नहीं होगी पैसों की कमी

कई बार व्यक्ति को कड़ी मेहनत करने के बाद भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। घर में धन टिकता नहीं है। इन परेशानियों का कारण घर का वास्तु दोष भी हो सकता है। इनसे मुक्ति पाने के लिए वास्तु में कुछ उपाय बताए गए हैं। जिनको अपनाने से घर में धन संबंधी समस्या खत्म हो जाएगी अौर धन में वृद्धि होगी। 

 
* धन की कमी न हो इसके लिए पानी से भरी सुराही घर की उत्तर दिशा में रखने से लाभ होगा। सुराही न होने पर मिट्टी का एक छोटा घड़ा भी रख सकते हैं। घड़ा या सुराही खाली न रहे इसलिए पानी खत्म होने पर उन्हें फिर से भर दें।
 
* घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में राम भक्त हनुमान की पंचस्वरूप वाली प्रतिमा या चित्रपट लगाकर नियमित रुप से पूजा करें। ऐसा करने से घर में सदैव धन का आगमन रहेगा। 
 
* घर के जिस हिस्से में पारिवारिक सदस्य अधिक समय व्यतीत करें, वहां चांदी, पीतल या तांबे से निर्मित पिरामिड रखना चाहिए। ऐसा करने से आय के साधनों में वृद्धि होती है। इसके साथ ही घर में धन की कभी कमी नहीं होती। 
 
* घर के मुख्य द्वार पर देवी लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर या स्वास्तिक का चिंह या चित्रपट लगाएं। इससे घर में धन की कमी नहीं होगी। 
 
* वास्तु के अनुसार धातु से निर्मित कछुअा अौर मछली घर में रखना शुभ होता है। ऐसा करने से धन से संबंधित सभी समस्याएं समाप्त होने लगती है।
 
* घर में आर्थिक तंगी का कारण वास्तुदोष भी होता है। वास्तुदोष से मुक्ति के लिए घर में वास्तु देवता का चित्रपट या प्रतिमा रखने से लाभ होता है अौर घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती। 

बीमारी और कंगाली लाते हैं ये वास्तुदोष देखें, कहीं आपके घर में तो नहीं हैं

घर में रोग और आर्थिक परेशानी सदा बनी रहती है तो इसका कारण वास्तुदोष भी हो सकता है। किसी भी तरह की नकारात्मकता घर के मुख्य द्वार से घर में प्रवेश करती है। घर के आस-पास का वातावरण भी पारिवारिक सदस्यों के जीवन पर बहुत प्रभाव डालता है। मुख्य द्वार के समीप कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो नकारात्मक ऊर्जा में बढ़ौतरी करती हैं, जिससे पारिवारिक सदस्यों को बीमारी और कंगाली के दौर से गुजरना पड़ता है। 

* मुख्यद्वार के सामने मंदिर हो तो वहां दैवीय शक्तियां वास नहीं करती। दरिद्रता और रोग अपना बसेरा बनाए रहते हैं।

* घर के सामने वृक्ष या खंभा होने पर बच्चों को कोई न कोई दुःख रहता है। वे शांति से जीवन यापन नहीं कर पाते। अगर है तो प्रतिदिन मुख्यद्वार पर स्वास्तिक और ओम जैसे शुभ चिह्न बनाएं। ऐसा करने से नेगेटिव एनर्जी घर में प्रवेश नहीं करती।

* घर में सौभाग्य को न्यौता देने के लिए घर के मुख्य द्वार पर रंगोली सजानी चाहिए, फूलों का गुलदस्ता या छोटी घंटियां लगानी चाहिए। 

* घर के मुख्य द्वार के सामने जूते, चप्पल उतारना अशुभ  होता है, जो सकारात्मक ऊर्जा को अंदर आने से रोकता है। इसी प्रकार मुख्य द्वार के पीछे भी किसी प्रकार की कोई चीज लटकाना अशुभ होता है।

* आजकल रोजमर्रा की अधिकतर वस्तुएं पैकिंग में आती हैं। इस कारण हर घर में रोजाना काफी कूड़ा निकलता रहता है। दिन भर निकलने वाले ऐसे कुड़े को कभी भी घर के ईशान कोण और मुख्य द्वार के सामने एकत्रित नहीं करना चाहिए। इन दो स्थानों को छोड़कर घर से निकलने वाला सभी प्रकार का कूड़ा कचरा घर में कहीं पर भी डस्टबिन में रखा जा सकता है।

* घर के मुख्य द्वार पर व उसके आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई होनी चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने में किसी प्रकार की रूकावट पैदा न हो। दरवाजा खोलते या बंद करते समय आवाज करता हो तो कब्जों में तेल डाल देना चाहिए नहीं तो परिवार के सदस्यों में खटपट बनी रहती है।

* घर के मुख्यद्वार के साथ जुड़े हॉल का फर्श खराब हो या उसमें कबाड़ भर रखा हो तो उस घर के सदस्यों को मानसिक अशांति रहती है। बच्चों और अभिभावको में आपसी समझ की कमी रहती है।

* कुछ मकान बहुत सुंदर नजर आते हैं एक ही नजर में किसी का भी मन मोह लेते हैं लेकिन कमपाऊण्ड वॉल, सिक्यूरिटी का कमरा, रंग रोगन या घर का कोई कोना टूटा फूटा हो और वहां कबाड़ रखा हो तो ऐसे घरों में रहने वालों को शत्रु परेशान करते रहते हैं।

खुशहाल जीवन के लिए करें इस भावना का त्याग, होगी सुख की प्राप्ति

सृष्टि की किसी भी वस्तु का अधिक मात्रा में उपभोग करना अनुचित होता है और इस  तथ्य के बावजूद हमें इस सृष्टि से ऊपर उठने के लिए सृष्टि की सारी वस्तुओं का उपभोग  करने की आवश्यकता होती है। सृष्टि ने हर व्यक्ति को अपना जीवन सही तरीके से जीने हेतु और उसकी सारी जरूरतों को पूरा करने हेतु उसे कई सारे साधन प्रदान किए हैं। यहां हमें इस तथ्य को समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि इंसान की जरूरतें सीमित  होती हैं किन्तु उसकी इच्छाएं असीम होती हैं। मायाजाल की उपज इंसान की जरूरतों  से नहीं अपितु उसकी इच्छाओं से होती है।
 
अगर जाल में फंसा कोई कीटक खुद के शरीर को जोर से हिलाने लगे तो वह कीटक उस जाल में अधिक उलझकर रह जाता है और फंस जाता है। मायाजाल का बिलकुल  यही कार्य होता है। इंसान की इच्छाओं का कोई अंत नहीं होता। आपकी इच्छाएं जितनी तीव्र होती हैं उतनी ही तीव्रता से आप आपके इन्द्रियों के प्रति आसक्ति रखते हैं। जितनी तीव्रता से आप अपने इन्द्रियों के प्रति आसक्ति रखते हैं आपकी भौतिक संपत्ति एवं भौतिक विशेषताएं उतनी तेजी से नश्वरता की ओर बढ़ती जाती हैं। जब हम रेत को हमारी मुट्ठी में पकड़ने का प्रयास करते हैं तो बिलकुल ऐसा ही होता है। हम जितनी मजबूती से हमारी मुट्ठी में रेत को पकड़ने का प्रयास करते हैं उतनी ही तेजी से रेत हमारी मुट्ठी से छूटने लगती है।
 
अगर आप आपकी इच्छाओं का पीछा करते रहे तो वे आपको आजीवन उनका पीछा करने पर मजबूर करते रहेंगे। वही इच्छा उसका स्वरुप बदलकर आप में जागृत होती रहेगी। आज आपको गाड़ी की इच्छा होगी कल आपको उससे बड़ी गाड़ी की इच्छा होगी एवं परसों आपको उससे भी बड़ी और आरामदेह गाड़ी की इच्छा होगी। ऐसा करते-करते  जब आपका शरीर छोड़ने का समय आएगा तब भी आपकी इच्छाओं की तृप्ति नहीं होगी अपितु आपकी इच्छाएं और प्रबल होंगी। आप अपनी इच्छाओं के पीछे भागकर खुद के लिए जितना इकठ्ठा करते जाते हैं उतना ही आप आध्यात्मिक उन्नति की सीधी के  निचले स्तरों की और बढ़ने लगते हैं, जिसके कारण आपको दोबारा जन्म लेना पड़ता  है और यह जन्म आपके वर्तमान स्वरुप से निचले स्वरुप में होता है। जिसमें आपको वर्तमान जीवन से कई गुना अधिक दुखों और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
 
आपके पास अगर कोई भौतिक वस्तु जरूरत से अधिक मात्रा में होती है तो वास्तव में वह किसी और का हिस्सा है जिसका उपभोग आप कर रहे हैं। अर्थशास्त्र का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसके अन्तर्गत संसाधनों की क्षमता सीमित होती है अपितु मानवी इच्छाएं असीम होती हैं। हर जाति-धर्म एवं अर्थशास्त्र के मूलभूत सिद्धांत समान हैं। इसी कारण से यह समझना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है कि अगर आप आपकी जरूरत से अधिक मात्रा में किसी भौतिक वस्तु का उपभोग कर रहे हैं तो आप किसी और के हिस्से पर कब्जा जमा रहे हैं और जाने-अनजाने में उस जीव के दुःख का कारण बन रहे हैं। कर्म सिद्धांत कहता है की हम जो देते हैं वही पाते हैं।
 
बिलकुल यही कारण है की पतंजलि अष्टांग योग में अपरिग्रह अर्थात भौतिक वस्तु को इकट्ठा करके न रखने के सिद्धांत का यम के तौर पर उल्लेख किया गया है। क्या आप किसी ऐसे सामान्य इंसान को जानते हैं जोकि अपने जीवन से अत्यंत सुखी एवं संतुष्ट हो ? अगर इस सवाल पर आपका जवाब हां है तो मेरी सलाह है की आप उसे ही अपना गुरु बना लीजिए चूंकि इस सृष्टि में सही तरीके से जीने की कुंजी उसी के पास आपको मिलेगी और अगर ऊपर पूछे गए प्रश्न पर आपका उत्तर न है तो में आपसे ध्यान आश्रम आने का निवेदन करता हूं।

दीवाली के बाद हो जाए कुछ ऐसा, समझ जाएं लक्ष्मी छोड़ने वाली हैं आपका घर

लक्ष्मी के प्रिय दिनों में दीवाली अत्यधिक महत्व रखती है। इस दिन महालक्ष्मी का अपने घर में बसेरा बनाने के लिए हर व्यक्ति भरपूर प्रयत्न करता है। क्या आपके घर में मां का प्रवेश हुआ है या नहीं इस लेख के मध्ययम से हम अपने पाठकों को बताते हैं की घर में होने लगे कुछ ऐसा तो समझ जाएं मां लक्ष्मी छोड़ने वाली हैं आपका बसेरा।   

वास्तुशास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति के निवास या कार्यक्षेत्र का देव स्थान दूषित होता है अर्थात किसी के घर में उत्तर-पूर्व कोण में शौच बना हो, ईशानकोण में सूर्य का प्रकाश न आता हो यां ईशानकोण अत्यधिक भारी हो गया हो। जिस स्थल का उत्तर-पश्चिम कोण बंद हो अर्थात जहां वायु का आवागमन बंद हो। जिस स्थान पर पूर्व व पश्चिम दिशाएं बंद हो व प्रकाश के आवागमन में बाधा आती ऐसे स्थान का स्वामी लक्ष्मीहीन होकर दुर्भाग्य को पाता है। शकुनशास्त्र के अनुसार घर में कुछ ऐसे संकेत मिलते हैं जिनसे जाना जाता हे की मां लक्ष्मी छोड़ने वाली हैं आपका बसेरा। 
 
* घर से सोने का चोरी हो जाना।
 
* घर की महिला का बार-बार गर्भपात होना।
 
* नमकीन प्रदार्थों में काली चींटियों का पड़ जाना।
 
* बार-बार दूध का उबल कर जमीन पर बह जाना।
 
* घर में अचानक से घड़ियों का चलते-चलते बंद हो जाना।
 
* घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में सीलन आना।
 
* घर में आए हुए अतिथियों को निराश होकर घर से चले जाना।
 
* शुभ कार्य में घर आए हुए किन्नरों का घर से रूठ कर चले जाना। 
 
* घर के पालतू पशुओं की बेवजह या समय से पहले मृत्यु हो जाना। 
 
* घर में पड़े हुए कांच या चीनि मिट्टी के बर्तनों का बार-बार तड़क कर टूट जाना।
 
* टॉइलेट या वाशरूम नियमित साफ करने के बावजूद भी घर में दुर्गंध का फैलना।
 
* घर में त्यौहार, पर्व या पूजा अनुष्ठान के वक्त आकस्मिक घर की महिलाओं का रजस्वला हो जाना।

खुद बनाएं अपना lucky charm, दुकान-ऑफिस या यात्रा पर निकलने से पूर्व करें उपाय

कई बार बनते-बनते काम बिगड़ जाते हैं अथवा सफलता के आसार होने पर भी असफलता का मुंह देखना पड़ता है। शास्त्रों के अनुसार, घर से निकलते वक्त अथवा यात्रा के लिए जाना हो तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिससे की आपकी यात्रा बिना किसी विध्न-बाधा के सफल हो जाए। ज्योतिशास्त्री कहते हैं की सप्ताह के प्रत्येक दिन के हिसाब से कुछ खास खाकर घर से निकला जाए तो सफलता सदा आपके साथ रहेगी। आपको कभी भी नाकामयाबी नहीं देखनी पड़ेगी।
 
सोमवार: आईने में अपना चेहरा देख कर घर से निकलें।
 
मंगलवार: गुड़ खाकर घर से निकलें।
 
बुधवार:  खड़ा धनिया खाकर घर से निकलें।
 
गुरुवार: जीरा खाकर घर से निकलें।
 
शुक्रवार: दही खाकर घर से निकलें।
 
शनिवार: अदरक खाकर घर से निकलें।
 
रविवार:  पान खाकर घर से निकलें।

चाहे रेल यात्रा हो, बस यात्रा हो या विमान यात्रा, प्रत्येक व्यक्ति किसी लम्बी यात्रा पर जाने से पूर्व यही कामना करता है कि उसकी यात्रा सफल और मंगलमय हो। यहां प्रस्तुत हैं भारत के विभिन्न राज्यों की चंद परम्पराएं जिनका पालन लोग आज फेसबुक और ट्विटर के युग में भी घर से निकलने से पूर्व करते हैं।

बिहार :  दूर्वा तथा अक्षत  
बिहार के कुछ हिस्सों में लम्बी यात्रा पर जाने से पूर्व संबंधित व्यक्ति को घर की कोई वृद्ध महिला दूर्वा (घास) तथा अक्षत (चावल) के कुछ दाने आशीर्वाद के रूप में साथ रखने के लिए देती है और उसकी मंगलमय यात्रा की कामना करती है।
 
दक्षिण भारत : जेब में नीम के कुछ पत्ते
दक्षिण भारतीय राज्यों में लम्बी यात्रा पर जाते समय लोग अपनी जेब में नीम के कुछ पत्ते रख लेते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी यात्रा सुखद रहेगी और इसमें कोई बाधा नहीं आएगी।
 
पूर्वोत्तर : मछली का दर्शन 
यहां के निवासी यात्रा पर निकलने से पहले मछली का दर्शन करना पसंद करते हैं ताकि यात्रा के दौरान कोई बाधा उनके रास्ते में न आए।
 
उत्तर प्रदेश : दही में मीठा बूरा या चीनी
यहां के लोग घर से निकलने से पूर्व दही में मीठा बूरा या चीनी डाल कर खाते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उनकी यात्रा मंगलमय और सुखद होगी।
 
बंगाल : दही का तिलक
यहां के निवासी लम्बी यात्रा पर निकलते हैं तो उस समय घर की कोई वयोवृद्ध महिला उस व्यक्ति के माथे पर दही का तिलक लगाती है और यात्रा में सफलता का आशीर्वाद देती है।

संकट की पूर्व सूचना देता है तुलसी का पौधा

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है? आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वह पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर, परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता अगर ज्योतिष की मानें तो ऐसा बुध के कारण होता है। बुध का प्रभाव हरे रंग पर होता है और बुध को पेड़-पौधों का कारक ग्रह माना जाता है। 

* बुध ऐसा ग्रह है जो अन्य ग्रहों के अच्छे और बुरे प्रभाव जातक तक पहुंचाता है। अगर कोई ग्रह अशुभ फल देगा तो उसका अशुभ प्रभाव बुध की कारक वस्तुओं पर भी होता है। अगर कोई ग्रह फल देता है तो उसके शुभ प्रभाव से तुलसी का पौधा उत्तरोत्तर बढ़ता रहता है। बुध के प्रभाव से पौधे में फल-फूल लगने लगते हैं।

* घर में तुलसी के पौधे की उपस्थिति एक वैद्य समान तो है यह वास्तु के दोष भी दूर करने में सक्षम है। हमारे शास्त्र इसके गुणों से भरे पड़े हैं, जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आती है यह तुलसी...। तुलसी हमारे घर या भवन के समस्त दोष को दूर कर हमारे जीवन को निरोग एवं सुखमय बनाने में सक्षम है। माता के समान सुख प्रदान करने वाली तुलसी का वास्तुशास्त्र में विशेष स्थान है। हम ऐसे समाज में निवास करते हैं कि सस्ती वस्तुएं एवं सुलभ सामग्री को शान के विपरीत समझने लगे हैं और महंगी चीजों को हम अपनी प्रतिष्ठा मानते हैं।

* वास्तु दोष को दूर करने के लिए तुलसी के पौधे अग्निकोण अर्थात दक्षिण-पूर्व से लेकर वायव्य उत्तर-पश्चिम तक के खाली स्थान में लगा सकते हैं। यदि खाली जमीन न हो तो गमलों में भी तुलसी को स्थान देकर सम्मानित किया जा सकता है।

* तुलसी का गमला रसोई के पास रखने से पारिवारिक कलह समाप्त होती है। पूर्व दिशा की खिड़की के पास रखने से पुत्र यदि जिद्दी हो तो उसका हठ दूर हो जाता है। यदि घर की कोई संतान अपनी मर्यादा से बाहर है अर्थात नियंत्रण में नहीं है तो पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे में से तीन पत्ते किसी न किसी रूप में संतान को खिलाने से संतान आज्ञानुसार व्यवहार करने लगती है।

* कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो अग्निकोण में तुलसी के पौधे को कन्या नित्य जल अर्पण कर एक प्रदक्षिणा करने से विवाह जल्दी और अनुकूल स्थान में होता है। सारी बाधाएं दूर होती हैं।

* यदि कारोबार ठीक नहीं चल रहा हो तो दक्षिण-पश्चिम में रखे तुलसी के गमले पर प्रति शुक्रवार को सुबह कच्चा दूध अर्पण करें और मिठाई का भोग रखकर किसी सुहागिन स्त्री को मीठी वस्तु देने से व्यवसाय में सफलता मिलती है।

* नौकरी में यदि उच्चाधिकारी की वजह से परेशानी हो तो आफिस में खाली जमीन या किसी गमले आदि जहां पर भी मिट्टी हो वहां सोमवार को तुलसी के सोलह बीज किसी सफेद कपड़े में बांध कर सुबह दबा दें। सम्मान की वृद्धि होगी। नित्य पंचामृत बना कर यदि घर की महिला शालीग्राम जी का अभिषेक करती है तो घर में वास्तु दोष हो ही नहीं सकता।

शरीर के इस हिस्से में होती है सबसे अधिक चुंबकीय व विद्युतीय शक्ति

घर में ड्राइंग रूम होता है। किचिन होती है और ऐसे ही कई रूम होते हैं, पर इनमें कभी-कभी वास्तुदोष भी होता है, जो हमें दिखाई नहीं देता।

कुछ इस तरह के वास्तुदोषों को दूर करने के लिए हम कई तरह के उपाय करते हैं। हम विषय विशेषज्ञ को बुलाते हैं, पर आप यहां दिए जा रहे टिप्स आजमाकर अपने घर के वास्तु दोष को स्वयं ही दूर कर सकते हैं।

वास्तु के लिहाज से सुबह जब उठते हैं तो शरीर के एक हिस्से यानी पैरों में सबसे अधिक चुंबकीय और विद्युतीय शक्ति होती है, इसलिए शरीर के उस हिस्से का पृथ्वी से स्पर्श करा कर पंच तत्वों की शक्तियों को संतुलित किया जाता है।
यदि ड्रांइगरूम को भोजनालय की तरह उपयोग में लाना है तो डायनिंग टेबल, ड्रांइग रूम या भोजन कक्ष के दक्षिण-पूर्व में रखनी चाहिए।
समान रेखाओं में पूर्व या उत्तर की ओर मार्ग वाले स्थल का चयन भवन निर्माण की दृष्टि होता है।
पश्चिम दिशा में वृक्ष लगाना अच्छा होता है। भवन की पूर्व दिशा में ऊंचे वृक्ष या भवन नहीं होना चाहिए।
यदि आपके घर में तनाव रहता है तथा आप हर समय किसी न किसी प्रकार की चिंता में घुले रहते हैं तो मानसिक शांति के लिए ड्राइंग रूम में हल्के नीले रंग के सोफासेट का प्रयोग करें।
छत पर पानी की टंकियां आदि उत्तर-पश्चिम दिशा या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही रखना चाहिए।
घर के मुख्‍य द्वार को ऐसे बनाएं कि‍ प्रवेश करने वाले व्‍यक्ति‍ की छाया उस पर न पड़े।
फर्श का पोंछा लगाते समय आप जि‍स कीटनाशक का प्रयोग करें उसमें पहले थोड़ा सा सेंधा नमक मि‍ला लें।
दंपति का बेडरूम उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से कटा हो तो पति-पत्नी में से किसी एक को सेहत संबंधी परेशानी बनी रहती है। छोटा सा शीशा टांग देने से दंपति ऊर्जावान अनुभव करने लगता है।

फव्वारा जिंदगी को मैनेज कर बढ़ाता है व्यवसाय

पृथ्वी के पांचों तत्वों में संतुलन बनाना जीवन के विकास के लिए आवश्यक रहता है। फव्वारा पानी तत्व को बढ़ावा देता है। फव्वारा व्वसाय को भी बढ़ावा देता है।

व्यवसाय से धन प्राप्त होता है। फेंगशुई का फव्वारा मुख्यद्वार के पास रहना चाहिए। फव्वारे घरों में रहते हैं और कार्यालय में भी। पानी धन का प्रतीक होता है। पानी का बहना धन की बर्बादी है।

फव्वारे से हम कैसे अपनी जिंदगी को मैनेज कर सकते हैं। इसके लिए हमें इन बातों पर ग़ौर करने की जरुरत है।

व्यक्ति जब तनाव में घर लौटता है तो उसको फव्वारा देखकर सुकून मिलता है। खुशी मिलती है। पानी की शुष्कता तनाव मुक्त कर देती है।
कार्यालय में टेबिल पर फब्वारा कार्य से होने वाले तनाव को कम करता है, और इसके लिए शक्ति को बढ़ावा देता है।
फव्वारा धन क्षेत्र में रखना चाहिए। यह हमेशा बहता रहना चाहिए। रुका हुआ फव्वारा धन की हानि करता है।
यह मुख्य द्वार के बायीं और रहना चाहिए। मुख्य द्वार के सामने नहीं रहना चाहिए।
फव्वारा में पानी ऊपर की ओर जाना चाहिए और यहां लाइट्स होनी चाहिए।
फव्वारा गोल आकार का होना चाहिए। यह चतुर्भुज नहीं होना चाहिए। दरअसल चतुर्भुज के कोनों से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है।
फव्वारा कभी भी खराब नहीं रहना चाहिए वरना धन के प्रवाह में कमी आ जाएगी।

वास्तु अनुरूप कुछ इस तरह बनाएं घर का भंडारण कक्ष

भवन निर्माण में भंडार गृह या भंडारण कक्ष (स्टोर रूम) मुख्य योजना का एक अहम हिस्सा रहता है। भंडार गृह बनाने के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं कि वर्षभर के लिए अन्न का भंडारण किया जा सके और जरूरी वस्तुओं का संचय भी हो सके।

यदि आपके पास पर्याप्त जगह है तो अन्न के भंडारण और अन्य वस्तुओं के संचय के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए जाने चाहिए लेकिन अगर जगह का अभाव है तो एक ही कक्ष से दोनों उपयोग लिए जा सकते हैं। यहां भंडार गृह संबंधी प्रमुख वास्तु सुझाव दिए जा रहे हैं जो पारिवारिक समृद्धता को संभव बनाते हैं।

भंडार गृह में न रखें अनुपयोगी चीजें

अन्नादि के भंडार कक्ष का द्वार नैर्ऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में होना चाहिए।
अगर वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में अन्ना कक्ष या अन्न भंडार गृह बनाया जाता है तो अन्न की कभी कमी नहीं होती है। घर में धन-धान्य बना रहता है।
अन्न का वार्षिक संग्रहण दक्षिणी अथवा पश्चिमी दीवार के समीप किया जाना चाहिए।
अन्न कक्ष या अन्ना भंडार गृह में डिब्बे या कनस्तर को खाली नहीं रहने दें। अगर कोई डिब्बा पूरी तरह खाली हो रहा हो तो भी उसमें कुछ मात्रा में अन्न बचा देना चाहिए। यह समृद्धि के लिए जरूरी माना जाता है।
अन्न भंडार कक्ष में घी, तेल, मिट्टी का तेल एवं गैस सिलेन्डर आदि को आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखना चाहिए।
अन्न के भंडार कक्ष में ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में शुद्ध और पवित्र जल से भरा हुआ मिट्टी का एक पात्र रखा जाना चाहिए। इस बात का खयाल रखें कि यह पात्र खाली न हो।
अन्न कक्ष में अगर विष्णु और लक्ष्मी का चित्र या प्रतिमा हो तो उससे समृद्धि प्राप्त होती है।
रोज उपयोग में आने वाले खाद्यान्न को कक्ष के उत्तर-पश्चिमी भाग में रखा जाना चाहिए।
पूर्व दिशा में अगर भंडार गृह हो तो घर के मुखिया को अपनी आजीविका के लिए ज्यादा यात्रा करनी पड़ती है। वह अक्सर घर से बाहर ही रहता है।
आग्नेय कोण में अगर भंडार कक्ष का निर्माण किया जाए तो मुखिया की आमदनी हमेशा कम ही पड़ती है।
दक्षिण दिशा में भंडार कक्ष बनाने पर घर के सदस्यों के बीच आपसी मतभेद हो सकते हैं। इस तरह के भंडार कक्ष से घर में अशांति बनी रहती है।
संयुक्त भंडार कक्ष भवन के पश्चिमी अथवा उत्तर-पश्चिमी भाग में बनाया जाना चाहिए।
संयुक्त भंडार गृह में अन्ना वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में रखा जाना चाहिए।
अगर संयुक्त रूप से भंडार कक्ष का उपयोग किया जाता है तो उसमें ऐसी चीजें नहीं रखना चाहिए जो हमारे लिए पूरी तरह अनुपयोगी हैं।
संयुक्त भंडार गृह में अन्य चीजों का भंडारण दक्षिणी और पश्चिमी दीवार की ओर किया जाना चाहिए।
संयुक्त भंडारगृह के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जल का पात्र रखना शुभकर रहता है और परिवार में शांति और समृद्धि में वृद्धि करता है।

वास्तु से सुधारें रिश्ते ताकि न रहे किसी तरह की शंका

वास्तु के जरिए आप अपनी तमाम समस्याओं को दूर कर सकते हैं फिर चाहे वह आपकी जिंदगी से जुड़ीं हों या आपके प्रोफेशन से यहां तक कि वास्तु के जरिए आप अपने रिश्तों को सुधार सकते हैं।

यहां कुछ ऐसे ही टिप्स दिए जा रहे हैं। जिन्हें आजमाकर आप इन तमाम समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

ईशान कोण खंडित होने से पिता-पुत्र आपसी मामलों को लेकर सदैव लड़ते-झगड़ते रहते हैं। इसलिए इन्हें सुधार सकते हैं।
आवासीय भवन में वास्तु दोष हो तो पारिवारिक व व्यक्तिगत रिश्तों में मतभेद और तनाव उत्पन्न हो जाते हैं। वास्तु के माध्यम से पिता पुत्र के संबंधों को अति मधुर बनाया जा सकता है।
भवन का भाग ईशान (उत्तर-पूर्व) में उठा होना अशुभ हैं। अगर यह उठा हुआ है तो पुत्र संबंधों में मधुरता व नजदीकी का अभाव रहेगा।
उत्तर-पूर्व (ईशान) में रसोई घर या शौचालय का होना भी पुत्र संबंधों को प्रभावित करता है। दोनों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती है।
ईशान में निर्माण के दौरान अधिक ऊंचाई देना या भारी रखना भी पुत्र और पिता के संबंधों को कलह और परेशानी में डालता रहता है।
ईशान (उत्तर-पूर्व) में स्टोर रूम, टीले या पर्वतनुमा आकृति के निर्माण से भी पिता-पुत्र के संबंधों में कटुता रहती है तथा दोनों एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं।
इलैक्ट्रॉनिक आइटम या ज्वलनशील पदार्थ तथा गर्मी उत्पन्न करने वाले अन्य उपकरणों को ईशान (उत्तर-पूर्व) में रखने से पुत्र, पिता की बातों की अवज्ञा करता रहता है और समाज में बदनामी की स्थिति ला देता है।
इस दिशा में कूड़ेदान बनाने या कूड़ा रखने से भी पुत्र, पिता के प्रति दूषित भावना रखता है। यहां तक कि मारपीट की नौबत आ जाती है।
यदि कोई भूखंड उत्तर व दक्षिण में संकरा तथा पूर्व व पश्चिम में लंबा है तो ऐसे भवन को सूर्यभेदी कहते हैं यहां भी पिता-पुत्र के संबंधों में अनबन की स्थिति सदैव रहती है।
अगर आप घर के अंदर कांच लगाना चाहते है तो कांच को कभी भी अपने बेडरूम में न रखें या ऐसी जगह न रखें जिससे मिरर में बेड दिखे। इससे घर में बीमारी आती है और निगेटिव एनर्जी भी फैलती है।
आप जहां भी काम करते है, उस जगह पर सकारात्‍मक ऊर्जा का होना अति आवश्‍यक है ताकि आप ज्‍यादा से ज्‍यादा मन लगाकर काम कर सकें। ऑफिस में मिरर को अपने साथ रखें, इससे आपको एनर्जी मिलेगी।

घर बना रहे हैं? जमीन की जांच तो कर लीजिए

घर बनाना हो या बड़ी सी इमारत, सबसे पहली जरूरत जमीन की ही होती है। जमीन खरीदने से पहले कई तरह के सवाल आते हैं? जैसे कि क्या यह जमीन अच्छी साबित होगी या नहीं?

इस उलझन से निपटने के लिए कई लोग तो वास्तु विशेषज्ञ की राय ले लेते हैं, वास्तु में पुराने तरीकों की मदद से आप स्वयं यह पता लगा सकते हैं कि वह जगह आपके लिए लाभकारी रहेगी या नहीं?

1. जमीन पर मकान बन जाने पर सूरज की किरणें घर में सीधे प्रवेश करें और रोज सुबह आपको उगते हुए सूरज के दर्शन हो सकें।

2. जहां जमीन खरीद रहे हैं। वहां दक्षिण-पश्चिम कोने की तरफ से ऊंची होनी चाहिए और उत्तर-पूर्व की तरफ से नीची। इसी तरह दक्षिण-पूर्व कोना दक्षिण-पश्चिम से नीचा हो, लेकिन यह उत्तर-पूर्व से ऊंचाई पर हो।

3. जमीन की जांच करने के लिए, जमीन में 2 फीट गहरा और चौड़ा गड्ढा खोदें। अब उसे उसी मिट्टी से भरें, जो गड्ढा खोदते वक्त आपने बाहर निकाली थी। अगर वह मिट्टी गड्ढा भर जाने के बाद भी बच जाती है, तो समझिए कि वह जगह आपके लिए लाभ के बहुत अवसर लेकर आएगी।

अगर गड्ढा भर जाने के बाद मिट्टी न बचे, तो इसका मतलब यह होगा, न लाभ और न ही हानि। अगर गड्ढा न भरे और मिट्टी कम पड़ जाए, तो इसका मतलब यह है कि उस जगह पर आपको हानि होगी।

4. जमीन के शुभ-अशुभ होने की जांच पानी से भी की जा सकती है। 2 फीट गहरे और चौड़े गड्ढे को पानी से भरें। पानी भरने के बाद किसी दिशा में 400 कदम चलकर फिर वापस वहीं आएं। अगर आपके वापस आने तक पानी उतना ही है, तो वह जमीन आपके लिए बेस्ट है। अगर पानी थोड़ा-सा ही कम हुआ है तो अच्छा, लेकिन अगर पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो वह आपके लिए नुकसानदायक जमीन होगी।

5. जमीन को जोतकर देखें। अगर वहां हड्डी व बाल मिलते हैं, तो वह जगह आपके लिए हानि देने वाली होगी। अगर दीमक या कीटों की मात्रा भी ज्यादा है, तो वह जमीन भी नुकसान के सिवाय आपको कुछ और नहीं दे सकती।

वास्तुशात्र :हल्के रंगों से घर को पेंट करना इसलिए होता है शुभ

घर का वास्तु ठीक हो तो आपको परेशानियां स्पर्श भी नहीं कर सकती हैं। इन आसान से वास्तु टिप्स को आजमाकर आप हमेशा खुशी और हर्षोउल्लास से अपनी ज़िंदगी को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से जी सकते हैं।

1. घर के मुख्य द्वारा की सजावट करें ऐसा करने से आपके धन की वृद्धि होती है।
2. घर की खिड़कियों में सुंदर कांच लगाएं, आपके संबंधों में मधुरता आएगी।
3. घर में दर्पण कुछ इस तरह से लटकाएं कि उसमें लॉकर या केश बॉक्स का प्रतिबिम्ब बने ऐसा करने से आपकी धन दौलत और शुभ अवसरों पर दो गुनी वृद्धि होती है।
4. अपने मास्टर बेडरूम को हल्के रंगों से पेंट करना चाहिए जैसे समुंदरी हरा, हल्का गुलाबी और हल्का नीला ये वो रंग हैं जो बेडरूम के लिहाज से अच्छे रहते हैं।
5. घर में रखी बेकार की वस्तुओं को समय-समय पर फेंकते रहना चाहिए। क्यों कि वास्तु के अनुसार घर में पड़ी वस्तुओं से प्रेम में बाधा पहुंचती है।

जानिए कैसे घर में सौभाग्यशाली का प्रतीक होती है विंड चाइम

विंड चाइम को अक्सर कई घरो के बाहर देखा होगा। या फिर किसी कमरें की खिड़की के बाहर लटकाए हुए। यह एक प्रकार का पॉप्युलर फेंगशुई यंत्र है। जिसे घर में सुख-शांति के लिए लगाया जाता है। इसे घर में लगानें से आपको अपने जीवन में सकारात्मक परिणामों की अनुभूति का अहसास होगा। लेकिन सही परिणाम मिलनें के लि आवश्यक है कि आप उसका उपयोग सही तरह से करें।

इसका उपयोग करनें के कई तरीके है। विंड चाइम के द्दारा हम अपने घर में से कई ऐसी नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव को कम कर कर सकते है। इसके लिए आवश्यक है कि विंड चाइम को कहां कैसे और किस रुप में लगाई जाए। तो आइए एक बार में लगी रॉड पर ध्यान देना। तो आइए जानते है कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में जो आपकी मदद करेगी विंड चाइम को सही रुप में आपके घर में लगानें के लिए।

कैसे करें घर पर इसका उपयोग-

- विंड चाइम किसी भी धातु, लकड़ी या फिर सिरेमिक पाइप से बनी होती है। इसमें लगाई गई घंटियों को इस तरह से लगाया जाता है कि हवा के झौंके से वह बजनें लगें। ध्यान रहे की इसमें लगे पाइप खोखले होने चाहिए जिससे इसमें से निगेटिव ऊर्जा निकल कर पॉजिटिव हो जाएं।

- जो लोग समाज में अपनी लोकप्रियता और सम्मान चाहते हैं वह सेरेमिक से बनी हुई 2 या 9 रॉड के विंड चाइम को लिविंग रूम के दक्षिण-पश्चिम कोने में लगाएं।

- फेंगशुई और वास्तु दोनों में ही विंड चाइम को खुशहाली लाने वाली ध्वनि तरंगों का साधन माना गया है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला खूबसूरत शो पीस है। इसकी ध्वनि से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

- फेंगशुई में मान्यता है पांच या सात पाइप वाली विंड चाइम नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। छह या आठ पाइप वाली विंड चाइम ड्रॉइंग रूम के उत्तर-पश्चिम में लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

- गार्डन में पेड़-पौधों के बीच विंड चाइम की मधुर आवाज कानों को सुकून देती है। आप चाहें तो गार्डन एंट्रेंस पर भी विंड चाइम को लगा सकती हैं।

- अगर विंड चाइम बांस की बनी हो, तो इसमें रॉड की संख्या 3 या 4 होनी चाहिए। इससे उसका अधिकतम लाभ प्राह्रश्वत होता है।

- लकड़ी और बांस से बने विंड चाइम घर को बहुत ही सौम्य लुक देते हैं। इन्हें पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व दिशा में लटकाना अति शुभ माना जाता है। यह घर-गृहस्थी के लिए अच्छे माने जाते हैं।

- अगर पीतल या स्टील की बनी विंड चाइम खरीद रहे हैं, तो इसमें रॉड की संख्या 6 या 7 होनी चाहिए, यह घर में संपन्नता लाती है।