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जानें, किस चीज को कहां रखेंगे तो होगा फायदा या नुकसान

भारतीय शास्त्रों में से एक शास्त्र ‘वास्तु शास्त्र’ है, जिसकी जड़ें प्राचीन काल से ही भारत में मौजूद हैं। लेकिन पिछले कुछ समय में ही जैसे-जैसे मनुष्य ज्ञान बटोर रहा है, उसे वास्तु शास्त्र के बारे में पता लग रहा है। केवल वास्तु शास्त्र ही नहीं, पड़ोसी देश चीन के जाने-माने ‘फेंग शुई’ विज्ञान को भी बड़े स्तर पर भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है। फेंगशुई के अनुसार बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिन्हें घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। ऐसी ही पांच चीजें हैं यदि उन्हें सही स्थान और दिशा में रखा जाए तो सकारात्मक ऊर्जा के साथ-साथ सुख-समृद्धि का भी आगमन होता है। 

1. ताजे फूलों को घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यदि ये फूल मुरझाने लगें तो इन्हें घर में न रखें। मुरझाए और सूखे फूलों को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा और रोगों का आगमन होता है। 
 

दिशा के हिसाब से करेंगे ये काम तो हर हाल में होगी बल्ले-बल्ले

र समय पैसे की कमी बनाए रखती हैं पर्स में रखी ये चीजें

पर्स चाहे छोटा हो या बड़ा, वह एक सच्चे संगी की भूमिका अदा करता है। धन से लेकर किमती और अवश्यकता के अनुरूप सभी सामान पर्स में सहज कर रखा जाता है। लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है की उसका पर्स सदा हरे-भरे नोटों से भरा रहे लेकिन हर किसी के मन की ये इच्छा पूरी नहीं हो पाती। क्या आप जानते हैं कुछ ऐसा सामान भी है जिसे पर्स में रखने से नकारात्मकता में वृद्धि होती है। जिससे जितना भी पैसा पर्स में आ जाए उसे छू मंतर होते देर नहीं लगती। कुछ लोग अपने किसी खास पर्स को बहुत लकी-अनलकी मानते हैं। वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता पर्स में रखा सामान उसमें शुभता-अशुभता की छाप छोड़ता है। ज्योतिष और वास्तु विद्वानों के अनुसार पर्स में रखी कुछ ऐसी चीजें हैं, जो पैसे की कमी के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालती हैं। बचें इस दुष्प्रभाव से-


कुछ ऐसे किमती कागजात होते हैं, जो रूपए-पैसे से भी अधिक महत्व रखते हैं। उन्हें अकसर व्यक्ति अपनी पर्स में संभाल कर रख लेता है। उनका महत्व खत्म होने पर भी उसे बाहर नहीं करता बल्कि पर्स में ही रखी रखता है। पुराने और बेकार के कागजों को पर्स में रखने से अलक्ष्मी का वास होता है।


पैसे की कमी का सबसे बड़ा कारण है फटे और बेतरतीब ढंग से रखे गए नोट। इन्हें कभी भी मोड़ कर न रखें और फटे नोटों को भी पर्स से हटा दें। सिक्के और नोट दोनों ही अलग-अलग स्थानों पर रखें।


अधिकतर लोगों की आदत होती है, जब वह नोट गिनने लगते हैं तो अपनी उंगलियों पर थूक लगा लेते हैं। ऐसा करने से धन का निरादर होता है, मां लक्ष्मी भी रूष्ट होती हैं।


पर्स में खाने की चीजें नहीं रखनी चाहिए। गुटखा-सुपारी जैसे मादक पदार्थ तो बिल्कुल नहीं अन्यथा आपके पास पैसा कभी भी नहीं रुकेगा। 


मृत व्यक्तियों के चित्र रखना शुभ नहीं होता। संत-महात्मा के चित्र रखे जा सकते हैं। यदि कोई संत या महात्मा देह त्याग चुके हैं तब भी उनके चित्र या फोटो पर्स में रखे जा सकते हैं क्योंकि शास्त्रों के अनुसार देह त्यागने के बाद भी संत-महात्माओं को मृत नहीं माना जाता।
 

सुख-शांति चाहिए तो घर में कभी नहीं रखें ये वस्तुएं

शीशा घर को सजाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहते है ना घर की किसी भी दीवार पर शीशा लगाने से आपका कमरा बड़ा तो लगता ही साथ ही कमरे को नया लुक भी मिल जाता है। लेकिन क्या आप जानते है कि घर में टूटा हुआ शीशा नहीं रखना चाहिए। यदि आपके घर में आइना, खिडकी या दरवाजे का शीशा टूट जाता है तो उसे जल्द ही बदल लेना चाहिए। 

वास्तुशास्त्र में कई चीजों को नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है जो घर में कलह और धन की कमी लाने का काम करता है। ऐसी चीजों को घर में नहीं रखना ही अच्छा होता है। जानकारी के अभाव में अक्सर लोग इन्हें अपने घर में संभालकर रखते हैं और खुद परेशानियों का सामना करते रहते हैं। 

घर में होगा वाटर फाउंटेन तो ऐसे मिलेगा हर समस्या से छुटकारा

घर में इनकम बढाने के लिए हर व्यक्ति जीवन में दौलत-शोहरत और सुख-शांति चाहता है लेकिन सबको पूरा मुकाम मिल जाए यह जरूरी नहीं। ऐसे में पैसा कमाने और उसे लंबे समय धनी बने रहना बिना किसी प्रयासों के संभव नहीं है। ऐसे में चीनी ज्योतिष पद्धति फेंग शुई के अनुसार घर में पानी का सोता यानी वाटर फाउंटेन रखना बेहद शुभ होता है। कहते हैं किसी भी घर में अगर मुख्य द्वार के पास बहते हुए पानी का सोता मिल जाए तो उस घर में धन की कभी कमी नहीं रहती। 

वाटर फाउंटेन को हमेशा घर के मेन गेट के सामने ही रखना चाहिए। अगर यह संभव नहीं हो तो इसे गेट के दाईं ओर रख सकते हैं। 
वाटर फाउंटेन को दक्षिण-पूर्वी दिशा में रखने से कभी भी घर में वित्त से जुडी समस्याएं सामने नहीं आती और मां लक्ष्मी की हमेशा उस जातक पर कृपा बनी रहती है। 
वाटर फाउंटेन में पानी की धार घर के अंदर की ओर हो ना कि बाहर की ओर। ऐसा करने के घर में सम्पपन्नता बनी रहती है और लक्ष्मी चिरकाल तक घर में ही निवास करती है।
करियर में बेहतरीन उठान और प्रगति के लिए फाउंटेन को उत्तकर दिशा में रखा जाना चाहिए। इससे करियर संबंधी बाधाएं जल्दीत दूर होती हैं और नौकरी के अवसर बढने लगते हैं। 

वास्तु दोष खत्म करते हैं ये मंत्र, दिलाते हैं धन और प्रमोशन

जाने-अनजाने में इंसान से घर के निर्माण समय कुछ एेसी गलतियां हो जाती हैं, जिससे घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। जिस कारण उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई बार घर में रखे साज-सजावट के सामान से भी कई प्रकार के वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति वास्तु में बताए गए कुछ उपायों को अपनाए तो वो इन सबसे छुटकारा पा सकता है। इतना ही नहीं वास्तु दोषों के प्रभावों से मुक्ति पाने के विए कुछ मंत्रो का उच्चारण किया जाता है। तो आईए जानें किन मंत्रों के जाप से धन और सुख की प्राप्ति की जा सकती है।

उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम ये चार मूल दिशाएं हैं। वास्तु विज्ञान में इन चार दिशाओं के अलावा 4 विदिशाएं हैं। आकाश और पाताल को भी इसमें दिशा स्वरूप शामिल किया गया है। इस प्रकार चार दिशा, चार विदिशा और आकाश, पाताल को जोड़कर इस विज्ञान में दिशाओं की संख्या कुल दस माना गया है। मूल दिशाओं के मध्य की दिशा ईशान, आग्नेय, नैऋत्य और वायव्य को विदिशा कहा गया है।


पूर्व दिशा
वास्तु शास्त्र में यह दिशा बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि यह सूर्योदय होने की दिशा है। इस दिशा के स्वामी देवता इन्द्र हैं। 

मंत्र- ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्य नमः या  ॐ इंद्राय नमः का जाप करने से इस दिशा के वास्तु दोष का नाश होता है। 


पश्चिम दिशा
इस दिशा के स्वामी शनिदेव हैं। यदि इस दिशा में वास्तु दोष हो तो ॐ शनि शनैश्चाय नमः का नियमित का जाप रपना चाहिए। 


उत्तर दिशा
यदि वास्तु दोषों के कारण घर की उत्तर दिशा प्रभावित हो जाए तो इसका अधिकतर प्रभाव घर की महिलाओं पर पड़ता है। साथ ही उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो यदि इस दिशा को वास्तु मुक्त करना हो तो निम्न मंत्रों का जाप करना चाहिए। 

 

नवरात्रों में इस जगह स्थापित करें मां की प्रतिमा, सुख-समृद्धि का होगा वास

देवी दुर्गा हिंदुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें देवी और शक्ति भी कहते हैं, इन्हें आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित भी बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रूपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। इसलिए व्यक्ति को इनकी पूजा सच्चे व शुद्ध ह्रदय से करनी चाहिए। बल्कि यदि इंसान  वास्तु में बताई कुछ बातों का ध्यान रखे तो पूजा में ध्यान केंद्रित भी होता है और पूजा का फल भी जल्दी प्राप्त होता है।


वास्तु के अनुसार माता 
वास्तुशास्त्र के अनुसार, ध्यान का क्षेत्र उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को माना गया है। यह दिशा मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा यानी इंट्यूशन से जुड़ी है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके माता का ध्यान करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है। इसलिए नवरात्र काल में माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इस ही दिशा में करनी चाहिएं।


माता की मूर्ति को लकड़ी के पाटे पर ही रखें। अगर चंदन की चौंकी हो, तो आैर भी अच्छा रहेगा। वास्तुशास्त्र में चंदन शुभ और सकारात्मक उर्जा का केंद्र माना गया है। इससे वास्तुदोषों का शमन होता है।


स्थापना करने का शुभ मुहूर्त और विधि
अखंड ज्योति को पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए। इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से घर के अंदर सुख-समृद्धि का वास होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।


शाम के समय पूजन स्थान पर इष्ट देव के सामने प्रकाश का उचित प्रबंध होना चाहिए। इसके लिए घी का दीया जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।

कल घर की दक्षिण दिशा में करें पूजन, आंखों के रोग होंगे दूर

शनिवार दि॰ 10.03.18 चैत्र कृष्ण नवमी पर मूल नक्षत्र व सिद्धि योग है। आज महाविद्या देवी तारा का पूजन करना श्रेष्ठ है। आद्यशक्ति ने हयग्रीव के वध हेतु नीलवर्ण धारण किया था। देवी प्रकाश बिंदु रूप में आकाश के तारे की भांति स्थित हैं, इसी कारण इन्हें तारा कहते हैं। समुद्र मंथन के समय महादेव के हलाहल विष पीने पर, उनकी शारीरिक पीड़ा के निवारण हेतु, इन्हीं देवी तारा ने माता स्वरूप में महादेव को अमृतमय दुग्ध स्तनपान कराया था। जिससे महादेव को समस्त शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिली थी। देवी तारा अपने तीन स्वरूप से विख्यात हैं, उग्र तारा, नील सरस्वती व एक-जटा। त्रीनेत्री देवी उग्र तारा का स्वरूप अत्यंत ही भयानक हैं। दिगंबरा देवी बाघाम्बर पहन कर घोर महा-श्मशान में ज्वलंत चिता पर निवास करती हैं। देवी, नर खप्पर व हड्डियों की मालाओं से अलंकृत हैं व सर्पों को आभूषण के रूप में धारण करती हैं। नील-सरस्वती स्वरूप में संपूर्ण ब्रह्माण्ड में जो भी ज्ञान फैला हुआ है उसे एकत्रित करने पर देवी तारा के रूप का निर्माण होता है। समस्त ज्ञान नील-सरस्वती का मूलरूप ही हैं। एकजटा स्वरूप में पिंगल जटा जुट वाली यह तारा सत्व गुण सम्पन्न हैं व अपने भक्त को मोक्ष प्रदान कर मोक्षदात्री बन जाती हैं। सर्वप्रथम ज्वलंत चिता में उग्र तारा प्रेत को जलाती हैं, द्वितीय नील सरस्वती, शव को शिव बनाती हैं। तीसरे एकजटा जीवित शिव को अपने पिंगल जटा में धारण कर मोक्ष प्रदान करती हैं। देवी तारा के विशेष पूजन व उपाय से नेत्र विकारों से मुक्ति मिलती है, आर्थिक सफलता मिलती है व शिक्षा क्षेत्र में सफलता मिलती है।


विशेष पूजन: घर की दक्षिण दिशा में नीला वस्त्र बिछाकर देवी तारा का चित्र स्थापित पर उनका दशोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीप करें, लोहबान की धूप करें, तेजपत्ता चढ़ाएं, सुरमा चढ़ाएं, लौंग, नारियल, काली मिर्च, बादाम चढ़ाएं व रेवड़ियों का भोग लगाकर 108 बार विशिष्ट मंत्र जपें। इसके बाद रेवड़ियां प्रसाद स्वरूप में किसी कुंवारी को बांट दें।

बिना तोड़-फोड़ एेसे कर सकते हैं घर के वास्तु दोष नष्ट

कई बार वास्तु दोष के कारण घर की सुख-समृद्धि भंग होने लगती है। इसके कारण हमेशा घर-परिवार को समस्यों का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन वास्तु दोषों को दूर करने के लिए तोड़-फोड़ करने की कोई जरूरत नहीं होती, बिना किसी तोड़-फोड़ के भी दूर हो सकते हैं। 


आगे जानें छोटे-छोटे उपाय जिन्हें अपनाकर वास्तु दोष को किया जा सकता है नष्ट-


पानी में हल्दी घोलकर एक पान के पत्ते की सहायता से अपने घर में छिड़काव करें।


अपने घर के पूजास्थल पर रोज एक घी का दीपक जलाएं।


घर के उत्तर-पूर्वी कोने की सफाई का विशेष ध्यान रखें। इससे घर के शुभत्व में वृद्धि होती है।


पूजास्थल के देवताओं पर चढ़ाएं पुष्प व हार दूसरे दिन हटा देना चाहिए।


घर के उत्तर-पूर्वी कोने में अधिक वजन या मशीनरी ना रखें।


अपने घर के उत्तर कोण में तुलसी का पौधा लगाएं।


वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को नींद नहीं आती है तो या उसका स्वभाव चिड़चिड़ा रहता है, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर रखकर सोना चाहिए। इससे उसके स्वभाव में बदलाव आएगा और उसे अच्छी नींद आएगी।


घर की दीवारों पर सुन्दर, हरियाली वाले और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं।

घर में यहां रखते हैं मृतकों की तस्वीर तो कभी नहीं मिलेगा वास्तु दोष से छुटकारा

आजकल ज्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के मृत लोगों की तस्वीरें लगा लेते हैं क्योंकि उन लोगों से उनकी भावनाएं जुड़ी होती है। इसी कारण वह परिवार के सदस्यों की मौत के बाद उनकी याद के तौर पर उनकी तस्वीरों को घर में लगाते हैं। कुछ लोग तो घर के पूजा स्थल में अपने पूर्वजों के तस्वीरें रख देते हैं। लेकिन शास्त्रों के मुताबिक एेसा करना गलत माना जाता है। इतना ही नहीं एेसा करने पर घर में की जानी वाली पूजा का फल भी नहीं मिलती और सकारात्मकता ऊर्जा भी घर में प्रवेश नहीं करती। तो आईए जानें इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें-

यदि आप घर के किसी मृत सदस्य की तस्वीर को घर में लगाना चाहते हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा शुभ रहती है। यहां मृतकों के तस्वीर लगाई जा सकती है, लेकिन इस बात का ध्यान मंदिर में नहीं लगानी चाहिए। मंदिर में मृतकों के फोटो लगाने से देवी-देवताओं की पूजा सफल नहीं हो पाती है। साथ ही, इससे नकारात्मकता भी बढ़ती है, इसकी वजह से कार्यों में सफलता नहीं मिल पाती है और बुरे समय का सामना करना पड़ सकता है।


ध्यान रखें घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का दरवाजा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। अगर ये संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा, तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।


घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए, जहां दिनभर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है, वहां के कई वास्तु दोष स्वत: ही शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ौतरी होती है।


घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए। पूजन कक्ष में पूजा से संबंधित सामग्री ही रखनी चाहिए। अन्य कोई वस्तु रखने से बचना चाहिए।

रुमाल भी बनाता और बिगाड़ता है हमारी तकदीर, जानें कैसे

हाथ-मुंह पौछने वाला रूमाल आपकी सेहत तो संवारता ही है आपकी किस्मत भी चमका सकता है। यकीन ना आए तो एक बार इस्तेमाल करके देख लें। 

रूमाल को रखने के भी अपने कायदे हैं। अंक ज्योतिष भी इस बात को मानता है कि जेब में रूमाल रखने से आपके जीवन में सकारात्मकता या बड़ी सफलता का इंतज़ार कर रहे हैं वे जब भी रूमाल रखें उसके चार या छह फोल्ड करके अपनी जेब में डालें। 

वास्तु के अनुसार अपने रूमाल पर कभी भी पेन या पेंसिल से नहीं लिखना चाहिए। ऐसा करने से आपकी एकाग्रता में कमी आ सकती है। ध्‍यान रखें कि भूलकर के भी किसी और का रूमाल इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए और न ही किसी को अपना रूमाल देना चाहिए। 

आपके रूमाल का रंग हमेशा हल्का होना चाहिए और हमेशा धुला हुआ होना चाहिए। अगर आपका रूमाल धुला हुआ नहीं होगा तो इससे आपके जीवन में नकारात्मकता घुल जाएगी जिससे पार पाना मुश्किल हो सकता है। 
 

आदर्श मकान में रखें दिशानुसार वस्तुएं, बनेगा शांति एवं पवित्रता का वातावरण

निवास दो प्रकार का होता है। पहला निवास आध्यात्मिक दृष्टि से शरीर होता है और दूसरा निवास जिसमें परिवार रहता है। अपने परिवार का निवास कैसा होना चाहिए? उसमें क्या सुविधा होनी चाहिए, जिससे सुख-समृद्धि, वैभव, शांति इत्यादि की दिनों-दिन वृद्धि हो और व्यक्ति का जीवन आनंद से परिपूर्ण हो जाए? वास्तु शास्त्र में साधारण तौर पर कुछ ऐसे ध्यान देने वाले बिंदु हैं जिनका पाल करने से वास्तु से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं तथा मकान में शांति एवं पवित्रता का वातावरण बनता है, अत: किस दिशा में क्या रखना चाहिए जानने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें-


घर के मध्य में आंगन या चौक वाला स्थान ब्रह्मा का है, उसे हमेशा साफ रखना चाहिए।


घर में समृद्धि के लिए प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी, कुबेर या गणपति की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित करनी चाहिएं। ईशान कोण में कभी भी कूड़ा-कर्कट इकट्ठा न होने दें। ईशान कोण पवित्र स्थान है। यहां कभी भी झाड़ू न रखें। इसे हमेशा साफ-सुथरा व खाली रखने का प्रयास करें क्योंकि इस दिशा को अशुद्ध रखने से मानसिक तनाव एवं शारीरिक कष्ट होता है। उत्तर दिशा कुबेर का स्थान है, अत: तिजोरी, लॉकर, नकद राशि आदि इसी दिशा में रखें।


पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा की ओर तथा पलंग दीवार से सटाकर रखें। भारी संदूक, सोफा-सैट, अलमारी, भारी सामान का स्टोर आदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें।


घर में तुलसी, चंदन आदि के पौधे लगाने चाहिएं। पूजा स्थल उत्तर-पूर्व कोण (ईशान) में उत्तम होता है। रसोईघर में कभी पूजा स्थल न बनाएं। रसोईघर में चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय दिशा) में रखना चाहिए। इससे आग लगने, गैस सिलैंडर फटने जैसी घटनाएं नहीं घटेंगी।


मेहमानों को उत्तर-पश्चिम कोण (वायव्य) दिशा में बिठाना चाहिए। घर में बेर, बबूल, नींबू के पेड़ कभी न लगाएं, ये वर्जित पेड़ हैं। उत्तर-पूर्व दिशा के कमरे को स्टोर रूम कभी न बनाएं।


दैनिक उपयोग में आने वाला जल उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर में साज-सज्जा के लिए कबूतर, बाज, सर्प, गीदड़, उल्लू, गिद्ध, सूअर, झंडा, शेर आदि के चित्र न लगाएं। युद्ध, ज्वालामुखी और भूकंप आदि के चित्र भी वर्जित हैं।


मिर्च-मसाले, आटा, दाल और चावल आदि दक्षिण-पश्चिम दीवार के सहारे रखें। बच्चों के पढऩे की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि पढ़ते समय  उनका मुंह उत्तर की ओर रहे, इससे मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है। यह भी ध्यान रखें कि मेज दीवार से छुए नहीं।


घर के मुख्य दरवाजे के दोनों और दूध, पानी मिलाकर डालें, बीच में हल्दी का स्वस्तिक बनाएं, उस पर गुड़ (सूर्य) की छोटी डली रखें और दो-चार बूंद (चंद्र) डालकर पूजा करें, इससे मकान के दोष दूर होंगे, बाहरी हवा का प्रभाव नहीं होगा, ऐसा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होने लगती है।