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घर में यहां रखते हैं मृतकों की तस्वीर तो कभी नहीं मिलेगा वास्तु दोष से छुटकारा

आजकल ज्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के मृत लोगों की तस्वीरें लगा लेते हैं क्योंकि उन लोगों से उनकी भावनाएं जुड़ी होती है। इसी कारण वह परिवार के सदस्यों की मौत के बाद उनकी याद के तौर पर उनकी तस्वीरों को घर में लगाते हैं। कुछ लोग तो घर के पूजा स्थल में अपने पूर्वजों के तस्वीरें रख देते हैं। लेकिन शास्त्रों के मुताबिक एेसा करना गलत माना जाता है। इतना ही नहीं एेसा करने पर घर में की जानी वाली पूजा का फल भी नहीं मिलती और सकारात्मकता ऊर्जा भी घर में प्रवेश नहीं करती। तो आईए जानें इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें-

यदि आप घर के किसी मृत सदस्य की तस्वीर को घर में लगाना चाहते हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा शुभ रहती है। यहां मृतकों के तस्वीर लगाई जा सकती है, लेकिन इस बात का ध्यान मंदिर में नहीं लगानी चाहिए। मंदिर में मृतकों के फोटो लगाने से देवी-देवताओं की पूजा सफल नहीं हो पाती है। साथ ही, इससे नकारात्मकता भी बढ़ती है, इसकी वजह से कार्यों में सफलता नहीं मिल पाती है और बुरे समय का सामना करना पड़ सकता है।


ध्यान रखें घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का दरवाजा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। अगर ये संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा, तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।


घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए, जहां दिनभर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है, वहां के कई वास्तु दोष स्वत: ही शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ौतरी होती है।


घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए। पूजन कक्ष में पूजा से संबंधित सामग्री ही रखनी चाहिए। अन्य कोई वस्तु रखने से बचना चाहिए।


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रुमाल भी बनाता और बिगाड़ता है हमारी तकदीर, जानें कैसे

हाथ-मुंह पौछने वाला रूमाल आपकी सेहत तो संवारता ही है आपकी किस्मत भी चमका सकता है। यकीन ना आए तो एक बार इस्तेमाल करके देख लें। 

रूमाल को रखने के भी अपने कायदे हैं। अंक ज्योतिष भी इस बात को मानता है कि जेब में रूमाल रखने से आपके जीवन में सकारात्मकता या बड़ी सफलता का इंतज़ार कर रहे हैं वे जब भी रूमाल रखें उसके चार या छह फोल्ड करके अपनी जेब में डालें। 

वास्तु के अनुसार अपने रूमाल पर कभी भी पेन या पेंसिल से नहीं लिखना चाहिए। ऐसा करने से आपकी एकाग्रता में कमी आ सकती है। ध्‍यान रखें कि भूलकर के भी किसी और का रूमाल इस्‍तेमाल नहीं करना चाहिए और न ही किसी को अपना रूमाल देना चाहिए। 

आपके रूमाल का रंग हमेशा हल्का होना चाहिए और हमेशा धुला हुआ होना चाहिए। अगर आपका रूमाल धुला हुआ नहीं होगा तो इससे आपके जीवन में नकारात्मकता घुल जाएगी जिससे पार पाना मुश्किल हो सकता है। 
 


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आदर्श मकान में रखें दिशानुसार वस्तुएं, बनेगा शांति एवं पवित्रता का वातावरण

निवास दो प्रकार का होता है। पहला निवास आध्यात्मिक दृष्टि से शरीर होता है और दूसरा निवास जिसमें परिवार रहता है। अपने परिवार का निवास कैसा होना चाहिए? उसमें क्या सुविधा होनी चाहिए, जिससे सुख-समृद्धि, वैभव, शांति इत्यादि की दिनों-दिन वृद्धि हो और व्यक्ति का जीवन आनंद से परिपूर्ण हो जाए? वास्तु शास्त्र में साधारण तौर पर कुछ ऐसे ध्यान देने वाले बिंदु हैं जिनका पाल करने से वास्तु से संबंधित दोष दूर हो जाते हैं तथा मकान में शांति एवं पवित्रता का वातावरण बनता है, अत: किस दिशा में क्या रखना चाहिए जानने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें-


घर के मध्य में आंगन या चौक वाला स्थान ब्रह्मा का है, उसे हमेशा साफ रखना चाहिए।


घर में समृद्धि के लिए प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी, कुबेर या गणपति की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित करनी चाहिएं। ईशान कोण में कभी भी कूड़ा-कर्कट इकट्ठा न होने दें। ईशान कोण पवित्र स्थान है। यहां कभी भी झाड़ू न रखें। इसे हमेशा साफ-सुथरा व खाली रखने का प्रयास करें क्योंकि इस दिशा को अशुद्ध रखने से मानसिक तनाव एवं शारीरिक कष्ट होता है। उत्तर दिशा कुबेर का स्थान है, अत: तिजोरी, लॉकर, नकद राशि आदि इसी दिशा में रखें।


पलंग का सिरहाना दक्षिण दिशा की ओर तथा पलंग दीवार से सटाकर रखें। भारी संदूक, सोफा-सैट, अलमारी, भारी सामान का स्टोर आदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें।


घर में तुलसी, चंदन आदि के पौधे लगाने चाहिएं। पूजा स्थल उत्तर-पूर्व कोण (ईशान) में उत्तम होता है। रसोईघर में कभी पूजा स्थल न बनाएं। रसोईघर में चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय दिशा) में रखना चाहिए। इससे आग लगने, गैस सिलैंडर फटने जैसी घटनाएं नहीं घटेंगी।


मेहमानों को उत्तर-पश्चिम कोण (वायव्य) दिशा में बिठाना चाहिए। घर में बेर, बबूल, नींबू के पेड़ कभी न लगाएं, ये वर्जित पेड़ हैं। उत्तर-पूर्व दिशा के कमरे को स्टोर रूम कभी न बनाएं।


दैनिक उपयोग में आने वाला जल उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। घर में साज-सज्जा के लिए कबूतर, बाज, सर्प, गीदड़, उल्लू, गिद्ध, सूअर, झंडा, शेर आदि के चित्र न लगाएं। युद्ध, ज्वालामुखी और भूकंप आदि के चित्र भी वर्जित हैं।


मिर्च-मसाले, आटा, दाल और चावल आदि दक्षिण-पश्चिम दीवार के सहारे रखें। बच्चों के पढऩे की व्यवस्था इस प्रकार करनी चाहिए कि पढ़ते समय  उनका मुंह उत्तर की ओर रहे, इससे मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ती है। यह भी ध्यान रखें कि मेज दीवार से छुए नहीं।


घर के मुख्य दरवाजे के दोनों और दूध, पानी मिलाकर डालें, बीच में हल्दी का स्वस्तिक बनाएं, उस पर गुड़ (सूर्य) की छोटी डली रखें और दो-चार बूंद (चंद्र) डालकर पूजा करें, इससे मकान के दोष दूर होंगे, बाहरी हवा का प्रभाव नहीं होगा, ऐसा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होने लगती है।


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कड़ी मेहनत के बाद भी मिल रही है असफलता, आज ही घर से निकालें ये चीजें

प्रत्येक आम आदमी अपने जीवन में मेहनत करता है व अमीर बनने के ख्वाब देखता है, परंतु उनमें से कुछ ही होते हैं जिनके यह सपने पूरे हो पाते हैं, ज्यादातार लोग अपनी ख्वाहिशों को पूरा नहीं कर पाते। जिसका कारण छोटे-छोटे ग्रहो दोष व वास्तु दोष हो सकते हैं। इन सबके चलते ही व्यक्ति को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो आईए आज आपको इन सबसे छुटकारा पाने के कुछ सरल उपाय बताएं। 


कबाड़ को घर-दुकान से दूर करें
घर-दुकान के वातावरण को स्वच्छ और पवित्र रखने के लिए घर से बेकार सामान बाहर निकाल दें। फटे-पुराने जूते-चप्पल, बेकार पड़ी कीलें, बिना ताले की चाभियां, जंग लगा हुआ लोहा, खराब लकड़ी आदि चीजें तुरंत बाहर निकाल दें। इन चीजों से घर में नकारात्मकता बढ़ती है, जो कि हमारे स्वास्थ्य और विचारों पर बुरा असर डालती है।


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अचूक उपाय अवश्य आजमाएं, काम होगा आसान

स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन कहा गया है, अस्वस्थ होने पर डाक्टरी इलाज के अतिरिक्त कुछ उपाय करने से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होने की बात कही गई है। यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड़ लेकर उसे किसी कपड़े में कस कर बांध दें। फिर उस कपड़े को रोगी के कान से बांध दें। सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें। अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकड़े रखें।


हनुमान जी की पूजा के दौरान सरसों का तेल लेकर दीए में डालें और उसमें दो लौंग डाल लें। इस दीए से हनुमान जी की पूरे मन से पूजा करें। ऐसा करने से धन लाभ होगा।                  


यूं तो कर्म का फल मिलता ही है लेकिन कभी-कभी हमारे प्रयास कमजोर पड़ जाते हैं। इसी क्रम में व्यापार बढ़ाने के लिए कुछ उपाय करने की मान्यता है। जैसे शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्टरी या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोड़ा-सा गेहूं का आटा रख दें। ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नहीं। 


आजकल हर आदमी किसी न किसी कारण परेशान है। कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोड़ा-सा लाल चंदन मिला दें। उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जाएं। प्रात: उस जल को तुलसी के पौधे पर चढ़ा दें। धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी।


यदि कन्या की शादी में कोई रुकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें। भगवान शिव की मूर्ति या फोटो के आगे रखकर ‘ॐ वरप्रदाय श्रीं नम:’ मंत्र का पांच माला जाप करें। फिर पांचों नारियल शिवजी के मंदिर में चढ़ा दें।


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अगर करियर और रोजगार में चाहते हैं बढोतरी, इस दिशा में बनाए सीढ़ियां

वास्तु में सीढिय़ों का विशेष महत्व है, भवन के दक्षिण-पश्चिम यानि कि नैऋत्य कोण में सीढ़ियां बनाना वास्तु की दृष्टि में बहुत शुभ माना जाता है। सीढ़ियां बनाते वक्त किसी भी इमारत या भवन में यदि वास्तुशास्त्र के नियमों का पालन किया जाए तो उस स्थान पर रहने वाले सदस्यों के लिए यह कामयाबी एवं सफलता की सीढ़ियां बन सकती है। 

भवन के दक्षिण-पश्चिम यानि कि नैऋत्य कोण में सीढ़ियां बनाने से इस दिशा का भार बढ़ जाता है जो वास्तु की दृष्टि में बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिशा में सीढ़िय़ों का निर्माण सर्वश्रेष्ठ माना गया है इससे धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 

दक्षिण या पश्चिम दिशा में इनका निर्माण करवाने से भी कोई हानि नहीं है। अगर जगह का अभाव है तो वायव्य या आग्नेय कोण में भी निर्माण करवाया जा सकता है। इससे बच्चों को परेशानी होने की आशंका होती है। घर का मध्य भाग यानि कि ब्रह्म स्थान अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया है अत: भूलकर भी यहां सीढिय़ों का निर्माण नहीं कराएं अन्यथा वहां रहने वालों को विभिन्न प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

ईशान कोण की बात करें तो इस दिशा को तो वास्तु में हल्का और खुला रखने की बात कही गई है, यहां सीढिय़ां बनवाना हानिकारक सिद्ध हो सकता है।


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घड़ी ऐसे बना और बिगाड़ सकती है आपके काम, जानें...

दक्षिण दिवार पर घड़ी टांगते है तो आपका चन्द्रमा गुरु और शुक्र ग्रह बलहीन हो जाता है । 1.आपका मन हमेशा अशांत रहेगा और मन में हमेशा नेगेटिव सोच आएगी। 
2.घर में पूजा या धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा और घर में हर सदस्य हमेशा का आपस में मतभेद होता रहेगा।
3.किसी को भी अपने कार्य में सफलता नहीं मिलेगी।

घड़ी पश्चिम दिवार पर टांगते हैं तो आपका शुक्र सूर्य बुध बलहीन हो जाते है। 
1.घर में रहने वाली महिलाये अक्सर बीमार रहती है और पति पत्नी में भी अच्छी नहीं बन पाती है। 2.अकसर काम में उच्च अधिकारियो के विवाद होता है या उनको प्रसन्न करने में हम असफल रहते है ।
3.घर में बच्चो का दिमाग पढ़ाई पर नहीं लग पाता है और न ही वो ठीक से बर्ताव करते है।


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इन देव को करें प्रसन्न, शनि कृपा के साथ मिलेगा मुंह मांगा वरदान

ग्रंथों में कई जगहों पर वर्णन आता है कि शनि देव शिव के पुजारी हैं किंतु ‘शनि महात्म्य’ के अनुसार विशेष तौर पर शिव के रुद्रावतार काल भैरव की उपासना करते हैं। भैरव रूप की आराधना से जातक शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय हासिल करता है। बहुत से समाज ऐसे हैं जहां यह कुल देवता के रूप में पूजे जाते हैं और इन्हें पूजने का प्रचलन भी भिन्न-भिन्न है, जो कि विधिवत न होकर स्थानीय परम्परा का हिस्सा है। शनि कृपा प्राप्त करने के लिए इस विधि से काल भैरव को करें प्रसन्न


रोज सुबह सूर्योदय से एक घंटा पहले उठें। नित्य कार्यों से निवृत होकर भैरव जी के दर्शन करने मंदिर जाएं और तेल का दीपक जलाएं। प्रतिदिन ऐसा करने से भैैरव बाबा से जो चाहे सो पाएं।


लोहबान, गूगल, कपूर, तुलसी, नीम, सरसों के पत्ते मिक्स करके सुबह-शाम घर में धूनी दें।


भैरू जी के मंदिर में इमरती व मदिरा का भोग लगाएं।


भैरू मंदिर में उड़द व सिद्ध एकाक्षी श्रीफल भैरू बाबा के समक्ष मन्नत मांग कर चढ़ाएं।


काले कुत्ते को इमरती खिलाएं व कच्चा दूध पिलाएं।


शुभ कामों में बार-बार बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार के दिन भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ाएं और बटुक भैरव स्तोत्र का एक पाठ करें।


महाकाल भैरव मंदिर में चढ़ाए गए काले धागे को गले या बाजू में बांधने से भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता।


रोली, सिन्दूर, रक्तचन्दन का चूर्ण, लाल फूल, गुड़, उड़द का बड़ा, धान का लावा, ईख का रस, तिल का तेल, लोहबान, लाल वस्त्र, भुना केला, सरसों का तेल भैरव जी की प्रिय वस्तुएं हैं। इन्हें भैरव जी पर अर्पित करने से मुंह मांगा फल प्राप्त किया जा सकता है।


प्रतिदिन भैरव मंदिर की आठ बार प्रदक्षिणा करने से पापों का नाश होता है।


भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है इसलिए कुत्ते की भी पूजा की जाती है। कहते हैं कि अगर कुत्ता काले रंग का हो तो पूजा का माहात्म्य और बढ़ जाता है। कुछ भक्त तो उसे प्रसन्न करने के लिए दूध पिलाते हैं और मिठाई खिलाते हैं।


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मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए यह खास फूल करें महादेव को अर्पण

यूं तो मनचाहा जीवनसाथी मिलना नसीब पर निर्भर करता है लेकिन ज्योतिष के अनुसार महादेव पर अगर इस खास फूल को अर्पण किया जाए तो न केवल मनचाहा वर-वधू मिलता है बल्कि विपरीत आकर्षण में भी बढोतरी होती है। 

कहते हैं महादेव तो केवल जल अर्पण करने भर से प्रसन्न होने वाले देवता हैं लेकिन बेला के फूल भगवान शिव तो अतिप्रिय हैं। शास्त्रों के अनुसार सुन्दर और सुशील जीवन साथी प्राप्ति के लिए प्रातः काल स्नान आदि के पश्चात किसी शिवमंदिर में तांबे या पीतल के लोटे में गंगा जल यदि गंगा जल उपलब्ध न हो तो शुद्ध जल और बेला के कम से कम पांच फूल डाल कर शिवलिंग पर एक धार से चढ़ाना चाहिए। साथ ही साथ ” ॐ नमः शिवाय ” मन्त्र का जाप करते रहना चाहिए। ध्यान रहे जल चढ़ाते समय जल की धारा टूटनी नही चाहिए। यदि गंगा जल का अभाव हो तो शुद्ध जल में कुछ बूंदे गंगा जल मिला कर भी प्रयोग कर सकते हैं।


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घड़ी ऐसे बना और बिगाड़ सकती है आपके काम

दक्षिण दिवार पर घड़ी टांगते है तो आपका चन्द्रमा गुरु और शुक्र ग्रह बलहीन हो जाता है । 1.आपका मन हमेशा अशांत रहेगा और मन में हमेशा नेगेटिव सोच आएगी। 
2.घर में पूजा या धार्मिक कार्य में मन नहीं लगेगा और घर में हर सदस्य हमेशा का आपस में मतभेद होता रहेगा।
3.किसी को भी अपने कार्य में सफलता नहीं मिलेगी।

घड़ी पश्चिम दिवार पर टांगते हैं तो आपका शुक्र सूर्य बुध बलहीन हो जाते है। 
1.घर में रहने वाली महिलाये अक्सर बीमार रहती है और पति पत्नी में भी अच्छी नहीं बन पाती है। 2.अकसर काम में उच्च अधिकारियो के विवाद होता है या उनको प्रसन्न करने में हम असफल रहते है ।
3.घर में बच्चो का दिमाग पढ़ाई पर नहीं लग पाता है और न ही वो ठीक से बर्ताव करते है।


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चौथी बार सच हुई पंजाब केसरी की भविष्यवाणी

ज्योतिष के मोदिनी खण्ड अनुसार ग्रहण और प्राकृतिक आपदा का गहरा नाता है। मोदिनी ज्योतिष एक ऐसा खण्ड है, जिसमें वर्षा, गर्मी, सर्दी तथा वार्षिक रूप से मौसम का अनुमान तथा प्राकृतिक आपदा से मापदण्ड हेतु प्रयोग में लिया जाता है। इस ज्योतिषीय तकनीक में ग्रहण अथवा ग्रहों के गोचर के आधार पर यह आकलन लगाया जाता है की विश्व के किसी भी क्षेत्र में मौसम अथवा आपदा आने की क्या संभावना है? बुधवार दिनांक 31 जनवरी 2018 को इस साल का पहला ग्रहण चन्द्र ग्रहण के रूप में आज विद्यमान है। इस संदर्भ में पंजाब केसरी के ज्योतिष ने बताया था कि इस ग्रहण का प्रभाव मुख्य रूप से पहाड़ों पर देखने को मिलेगा। आज पड़ने वाल 6.1 मैग्नीट्यूड का भूकंप भारत से जुड़े अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में ही आया है।