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महामारी में दादी-परदादी के गहने बेचने को मजबूर हुए लोग, बाजार में खरीदारों से ज्यादा बेचने वालों की भीड़ रतलाम, जयपुर और इंदौर के सर्राफा बाजार से ग्राउंड रिपोर्ट

ByRameshwar Lal

Jun 30, 2021

कोरोना महामारी ने आम से लेकर खास सभी की आर्थिक हालत तंग कर दी। बेरोजगारी और सख्त पाबंदियों से आमदनी लगातार घटी, लेकिन महंगाई ने खर्च बढ़ा दिए। कई लोगों के लिए तो घर चलाने के लाले पड़ गए। ऐसे में घर में रखा सोना उनका सहारा बना।

आर्थिक तंगी की मार झेल रहे लोगों ने अपने खानदानी गहनों तक को बेचकर अपना घर चलाया। ऐसे में बाजार में सोने के खरीदार कम और बेचने वालों की भीड़ ज्यादा दिखी। ज्वैलर्स ये भी कह रहे हैं कि सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से भी ज्वैलरी की बिक्री बढ़ी है।

  • राजस्थान के जयपुर से विष्णु शर्मा की रिपोर्ट – सोना बेचने वालों की संख्या दोगुनी हुई

शहर के सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि पहले लोग एक्सचेंज के लिए पुराना सोना बेचने आते थे, लेकिन अब जरूरत के लिए बेच रहे हैं। ट्रेंड ऐसा बदला है कि सोना बेचने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है। जौहरी बाजार में जे.एम. ज्वैलर्स के मालिक अनिल कुमार सेवानी ने बताया कि पहले रोजाना दो से तीन ग्राहक सोना बेचने आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर चार से छह हो गई है।

उन्होंने बताया कि पहले ज्यादातर ग्राहक ऐसे थे जो पुरानी गोल्ड ज्वैलरी बेचकर शादी-ब्याह के लिए नया सोना खरीदते थे, लेकिन कोरोना के बाद जरूरतमंद लोग सोना बेचने आ रहे हैं। नौकरी जाने और बिजनेस ठप पड़ने से सबकी आर्थिक हालत पहले जैसी नहीं रही। लोग घर खर्च भी नहीं उठा पा रहे।

सोना बेचने वालों में ज्यादातर लोअर मिडिल क्लास से जुड़े लोग हैं। शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। गांव में रहने वाले शहर कम आ पा रहे हैं और आसपास जो भाव मिलता है उसी में पुराना सोना बेच रहे हैं।

स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि हॉल मार्किंग गोल्ड ज्वैलरी बेचने की अनिवार्यता के बाद गांव वाले आकर पुराना सोना ज्यादा बेच रहे हैं। इनमें ऐसे ग्राहक हैं, जिनकी ज्वैलरी हॉल मार्क नहीं है या शुद्ध नहीं है।

हालांकि, हॉल मार्क वाले पुराने गोल्ड की बिक्री से ग्राहकों को अच्छा भाव मिलता है। जबकि टांका वाला गढ़ा सोना बेचने में कम। अनिल ने बताया कि हॉल मॉर्क वाले गहनों में रीटेस्टिंग की जरूरत नहीं होती है। इससे ज्वैलर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकते।

  • मध्य प्रदेश के रतलाम से दिव्यराज राठौर की रिपोर्ट: खेती के लिए किसान बेच रहे सोना

सोने की शुद्धता और कारीगरी के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश के रतलाम सर्राफा बाजार का हाल भी कुछ जयपुर जैसा ही है। दो महीने के लॉकडाउन के बाद बाजार में सोने के खरीदार कम और बेचने वाले ज्यादा पहुंच रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सोने और चांदी के गहने बेचने के लिए यहां आ रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग लॉकडाउन की वजह से आ रही आर्थिक परेशानियों के चलते गहने बेच रहे हैं। वहीं खेती के लिए भी किसान या तो गहने बेच रहे हैं या गिरवी रख रहे हैं। समय पर मानसून आने से खेती का रकबा बढ़ने की उम्मीद है, जिसके लिए लागत भी ज्यादा खर्च होगी।

शादियों का सीजन गया अब फेस्टिव सीजन का इंतजार
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि सोने-चांदी की खरीदारी अक्षय तृतीया और शादी के सीजन में सबसे ज्यादा होती है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान शादियों का पूरा सीजन तो निकल गया। अब गिनी चुनी शादियां ही बची हैं। ऐसे में कारोबार ठंडा पड़ा हुआ है।

सर्राफा बाजार के व्यापारी मनोज शर्मा बताते हैं कि बाजार में अभी मंदी छाई हुई है। ग्राहक छोटी-मोटी खरीदारी के लिए मार्केट आ रहे हैं। वहीं सोने-चांदी के भाव में तेजी की वजह से भी खरीदारी नहीं हो रही है। हां, जरूरत के लिए लोग सोना बेच जरूर रहे हैं। ऐसे लोगों की भी तादाद काफी है, जिन्हें जेवरात गिरवी रखने हैं।

नामली कस्बे के ज्वैलर नीतीश सोनी भी कहते हैं कि बाजार में पहुंचने वाले ग्राहकों में ज्यादातर लोग गहने बेचने वाले ही हैं। वहीं, खेती के लिए किसान सोने और चांंदी के गहने गिरवी रखने आ रहे हैं। सोने का दाम 48,500 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 68,000 रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड पर है। इसे भी बिक्री का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

  • MP के इंदौर से संतोष सिताले की रिपोर्ट: खरीदारी घटे, सोना बेचने वाले 20% बढ़े

कोरोना की मार कुछ इस कदर पड़ी कि लोग अपने पुरखों के जेवरात भी बेचने पर मजबूर हैं। सर्राफा कारोबारी अनिल बाहेती के मुताबिक ज्वैलरी की बिक्री करने वालों की संख्या 20% से ज्यादा बढ़ी है, जबकि खरीदने वाले इक्का-दुक्का ही बचे हैं। खरीदारी करने वालों में अधिकतर वो लोग हैं, जिनके घर या परिवार में शादियां हैं।

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